Home Blog Page 5637

88 उग्रवादी करेंगे सरेंडर: केन्द्र सरकार से त्रिपुरा के अलगाववादियों का शांति समझौता

त्रिपुरा में अलगाववादियों ने केंद्रीय गृह मंत्रालय व राज्य सरकार के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर किया है। अलगाववादी संगठन ‘द नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (NLFT-SD)’ ने शनिवार (अगस्त 10, 2019) को ‘ मेमोरेंडम ऑफ सेटलमेंट’ पर हस्ताक्षर किए। इसके साथ ही इस उग्रवादी संगठन के 88 सदस्य अपने-अपने हथियारों के साथ 13 अगस्त को पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर देंगे। NLFT-SD के सभी उग्रवादियों ने मुख्यधारा में लौटने की बात कहते हुए हथियार छोड़ने का संकल्प लिया।

अलगाववादी संगठन ने भारत के संविधान के प्रति आस्था भी जताई। इन उग्रवादियों को Surrender-cum-Rehabilitation Scheme, 2018 के तहत कुछ सुविधाएँ भी दी जाएँगी। त्रिपुरा सरकार आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों व उनके परिवारों के लिए शिक्षा और आवास की व्यवस्था करने में मदद करेगी। संगठन के नेताओं ने केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी मुलाकात की। हालाँकि, इस संगठन का एक धड़ा ऐसा भी है जिसने इस समझौते को स्वीकार नहीं किया है। लेकिन सरकार सभी अलगाववादियों को मुख्यधारा में लाने के लिए कार्य कर रही है।

सबीर देवबर्मा के नेतृत्व में चल रहा यह संगठन 1997 से ही गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत प्रतिबंधों के दायरे में है। इस संगठन ने भारत में आतंकी घटनाओं को अंजाम देने के लिए सीमा पार भी अपने कैम्प स्थापित कर रखे हैं। 2005-2015 के बीच कम से कम 317 ऐसे वारदात हुए, जिसके लिए इस संगठन को दोषी ठहराया गया। इन घटनाओं में 28 जवानों और 62 नागरिकों की जानें गईं।

बता दें कि हाल ही में हुए पंचायत चुनावों में भाजपा को राज्य में भारी जीत मिली है। त्रिपुरा की 116 जिला परिषद सीटों में से पार्टी को 114 सीटों पर जीत मिली। पंचायत समिति की 419 सीटों में से 411 पर भाजपा ने जीत का परचम लहराया। इतना ही नहीं, ग्राम पंचायतों की 6111 सीटों में से 5916 पर भाजपा ने जीत की पताका लहराई है।

कश्मीरी बहू: राहुल गाँधी ने दी फेक न्यूज़ को हवा, बबीता फोगाट ने Wire की पत्रकार को लताड़ा

पहले मीडिया ने हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया। उसके बाद नेताओं और सेलिब्रिटीज पत्रकारों के बीच इस फेक न्यूज को हवा देने की होड़ लग गई। इनमें कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गॉंधी और प्रोपगेंडा पत्रकारिता के लिए विख्यात The Wire की पत्रकार आरफा खानम शेरवानी जैसे नाम शामिल हैं।

आरफा को तो इसके लिए हरियाणा की मशहूर पहलवान बहनों में से बबीता फोगाट ने लताड़ा। वहीं, राहुल को खुद खट्टर ने जवाब दिया। राहुल ने ट्वीट कर कहा, “महिला कोई संपत्ति नहीं है कि पुरुषों का उन पर स्वामित्व होगा। कश्मीरी महिलाओं के बारे में हरियाणा के मुख्यमंत्री खट्टर की टिप्पणी निंदनीय है। यह दिखाता है कि आरएसएस का वर्षों का प्रशक्षिण एक कमजोर, असुरक्षित और दयनीय व्यक्ति की सोच को कैसा बना देता है।” जवाब में खट्टर ने उन्हें फेक खबर पर प्रतिक्रिया देने की बजाए अपने बयान का वीडियो देखने को कहा।

आरफा ने इस मामले में फोगाट बहनों को खट्टर की आलोचना के लिए ललकारा तो जवाब में बबीता ने कहा, “हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर जी ने ऐसा कोई बयान नहीं दिया है जिसमें हमारी बहन-बेटियों के बारे में गलत बोला गया हो मेरी मीडिया से प्रार्थना है कि उनके बयान को गलत तरीके से जनता के सामने पेश ना करें।” इसके साथ ही बबीता फोगाट ने कहा कि अफवाह फैलाकर हरियाणा को बदनाम करने की कोशिश ना की जाए।

बिना संदर्भ के प्रोपेगंडा

दरअसल, खट्टर ने हरियाणा में सुधरते लिंगानुपात की बात करते हुए ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ की सफलता की चर्चा की। इस दौरान मीडिया ने सीएम के बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश कर इसे विवादित बयान बताया। कई मीडिया पोर्टल्स ने ख़बर प्रकाशित किया कि खट्टर ने कश्मीर से लड़कियों को बहू बना कर लाने की बात कही है। मगर ये खबर गलत थी। असल में मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि हरियाणा का नाम पहले बदनाम था और यह बेटी मारने वाले प्रदेश के रूप में कुख्यात हो गया था। बेटियों को बचाने के लिए चलाई गई विभिन्न योजनाओं की सफलता पर बात करते हुए खट्टर ने बताया कि पहले हरियाणा में लिंगानुपात 850 था, अर्थात प्रति 1000 लड़कों पर 850 लड़कियों का अनुपात। वहीं अगर ताज़ा आँकड़ों की बात करें तो यह बढ़ कर 933 हो गया है, जो दिखाता है कि इस मामले में हरियाणा बड़े सुधार की ओर अग्रसर है।

इसके साथ ही आगे उन्होंने कहा, “हमारे धनखड़ जी ने कहा कि बिहार से (बहुएँ) लानी पड़ेंगी। अब कुछ लोग कह रहे हैं कि कश्मीर खुल गया, अब वहाँ से लेकर आएँगे। ‘मजाक’ की बातें अलग हैं। लेकिन समाज में लिंगानुपात ठीक होगा तो संतुलन बैठेगा।”

सीएम के इसी बयान को कुछ मीडिया समूहों ने तोड़-मरोड़ कर गलत तरीके से पेश किया। The Wire की पत्रकार आरफा खानम शेरवानी ने भी बिना तथ्य और सच्चाई को जाने ही फेक न्यूज़ के आधार पर फोगाट बहनों को ललकार दिया। वैसे इस फेक न्यूज को सच मानने वालों में बरखा दत्त और स्वाति मालीवाल का नाम भी शामिल हैं।

थैंक्यू राहुल गाँधी, स्क्रॉल और अशोक स्वैन: पाकिस्तान

राहुल गाँधी के बयान को तो पाकिस्तान ने भी हाथों-हाथ लेकर अपने हिंदुस्तान-विरोधी प्रोपगेंडा में फिट कर दिया। पहले राहुल गाँधी ने खट्टर के खिलाफ झूठ फैलाया, जिसे स्क्रॉल ने लपक लिया। वहाँ से उठाया हिन्दू और हिंदुस्तानी नाम वाले लेकिन हिन्दुओं और हिंदुस्तान के लिए नफ़रत फ़ैलाने वाले अशोक स्वैन ने, और स्वैन को रीट्वीट किया पाकिस्तानी सेना के प्रोपेगंडाकार/इंटर-सर्विसेज़ पब्लिक रिलेशंस के महानिदेशक मेजर जनरल आसिफ़ गफ़ूर ने।

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पद की हु-तू-तू: लाखों मधुमक्खियाँ भी अपनी रानी चुनने में इतने नखरे नहीं करतीं

नेहरू-गॉंधी परिवार में ही आलाकमान की मूरत देखने की आदत ने कॉन्ग्रेस को अंदर से इतना खोखला कर दिया है कि वह अपना अध्यक्ष नहीं चुन पा रही है। बीते दिनों पार्टी ने ऐलान किया था कि 10 अगस्त को वह अपना नया अध्यक्ष चुन लेगी। लेकिन, कॉन्ग्रेस वर्किंग कमिटी की बैठक शुरू होने से पहले ही तमाशा शुरू हो गया।

खबर आई कि राहुल की इच्छा का सम्मान करते हुए पार्टी के पॉंच-पॉंच नेताओं की समिति बनेगी जो सभी राज्यों के प्रतिनिधियों से बात कर नया नेता चुनेगी। फिर बैठक शुरू हुई। कुछ देर बाद सोनिया गॉंधी अपने बेटे राहुल के साथ बाहर आईं और पत्रकारों से कहा ‘हम (सोनिया और राहुल) सहमति बनाने की प्रक्रिया का हिस्सा नहीं होंगे, इसलिए जा रहे हैं।’ थोड़ी देर बाद बैठक से लोकसभा में पार्टी संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चौधरी बा​हर निकले और कहा कि रात आठ बजे फिर से बैठक होगी और उम्मीद है कि नौ बजे तक पार्टी के नए अध्यक्ष का चुनाव हो जाएगा।

देश की सबसे पुरानी पार्टी में अध्यक्ष पद पर इतनी माथापच्ची तब हो रही है जब राहुल गॉंधी ने लोकसभा चुनाव के नतीजों के तत्काल बाद इस्तीफे की पेशकश कर दी थी। मान-मनौव्वल से भी वे नहीं माने और तीन जुलाई को अपना इस्तीफा सार्वजनिक कर दिया। इसके बाद वयोवृद्ध मोतीलाल वोरा को अंतरिम अध्यक्ष बनाने की खबर आई जिसे वोरा ने खुद नकार दिया।

इस बीच, शशि थरूर, कर्ण सिंह और कैप्टेन अमरिंदर सिंह जैसे नेताओं ने प्रियंका गाँधी को अध्यक्ष बनाए जाने की वकालत की। यह दिखाता है कि कॉन्ग्रेस का कोई बुजुर्ग नेता हो या युवा, सभी गाँधी परिवार के पाश में ही जकड़े रहना चाहते हैं। मुंबई कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष रहे मिलिंद देवड़ा ने राजस्थान के उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट या मध्य प्रदेश स्थित ग्वालियर के राजघराने से आने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया को अध्यक्ष पद के लिए सबसे उपयुक्त बताया था। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में मुकुल वासनिक को आगे बताया गया क्योंकि उनका प्रशासनिक अनुभव अच्छा है।

ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या कॉन्ग्रेस ख़ुद को भाजपा के ‘शहजादा’ वाले हमले से बाहर निकालने की कोशिश में आंतरिक लोकतंत्र के नाम पर यह दिखावा कर रही है?

अनुच्छेद 370 से लेकर अन्य मुद्दों तक, पार्टी के बड़े नेतागण भी बँटे से नजर आए। राज्यसभा में बहुमत न होने के बावजूद भाजपा ने अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को ख़त्म करने सहित अन्य बिल पारित करा लिए। क्या इस बदले हालत में प्रियंका गाँधी जिम्मेदारी लेने से बच रही हैं?

सार्वजनिक प्लेटफॉर्म्स पर कॉन्ग्रेस नेता चाहे जितने सुझाव दे रहे हों लेकिन बैठकों का दौर चलने के बाद भी कोई नतीजा नहीं निकल पा रहा है। कॉन्ग्रेस की इस हु-तू-तू में ऐसा लग रहा है जैसे यह प्रक्रिया कभी ख़त्म ही नहीं होगी। इससे कम समय में तो लाखों मधुमक्खियाँ मिल कर अपनी रानी चुन लेती है, जितना समय कॉन्ग्रेस ने राहुल गाँधी के इस्तीफे पर विचार करने में गँवा दिया। कॉन्ग्रेस की हालत आज मधुमक्खी के छत्ते से भी बदतर हो गई है।

कुछ ख़बरें ऐसी भी हैं कि आज अंतिम निर्णय न होने पर मैराथन बैठकों का दौर कल भी जारी रहेगा। थरूर ने ट्वीट कर सलाह दी है कि पार्टी पहले एक अंतरिम अध्यक्ष चुन ले और इसके बाद एक वृहद प्रक्रिया के तहत नया अध्यक्ष चुना जाए। उन्होंने कॉन्ग्रेस कार्यसमिति के चुनाव के लिए भी यही प्रक्रिया अपनाने की सलाह दी।

कॉन्ग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा है कि वर्किंग कमिटी ने एक मत से राहुल गाँधी को अध्यक्ष बने रहने के लिए निवेदन किया लेकिन वे अपनी जिद पर अड़े रहे। सुरजेवाला ने बताया कि वर्किंग कमिटी ने राहुल को अध्यक्ष बने रहे और पार्टी को ‘नेतृत्व और मार्गदर्शन’ देना जारी रखने को कहा। बकौल सुरजेवाला, आज जब सरकार सारी संवैधानिक संस्थाओं को कब्जे में ले रही है, कॉन्ग्रेस पार्टी के नेताओं को लगता है कि राहुल गाँधी इस ‘कठिन समय’ में इकलौते नेता हैं जो विपक्ष का चेहरा बन सकते हैं। सुरजेवाला के अनुसार, राहुल ने इस्तीफा वापस लेने से मना करते हुए कहा है कि वे पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ मिल कर काम करते रहेंगे।

कॉन्ग्रेस के नेता जिस तरह मीडिया और सोशल मीडिया में अपनी राय दे रहे हैं, पार्टी को एक ऑनलाइन मीटिंग ही बुला लेनी चाहिए, जिसका लाइव प्रसारण भी हो। लगता तो ऐसा ही है कि कॉन्ग्रेस की बैठकों में ये नेता अपनी राय नहीं रख पाते, तभी तो पार्टी के आंतरिक मुद्दों पर भी सोशल मीडिया से माध्यम से ही अपनी राय शीर्ष नेतृत्व तक पहुँचाते दिख रहे हैं। सिद्धू ने इस तरीके को इतने जोर-शोर से आजमाया की कैप्टेन ने उन्हें मंत्रिमंडल से उखाड़ फेंका। अब देखना यह है कि राज्य के नेताओं, विधायकों, सांसदों और संगठन के पदाधिकारियों से राय लेने के बाद (जैसा कि राहुल गाँधी चाहते हैं), कहीं कॉन्ग्रेस कार्यसमिति कई दिनों की बैठकों के बाद नए अध्यक्ष का चुनाव करने के लिए अंत में सोनिया गाँधी को ही न अधिकृत कर दे।

डॉन बृजेश सिंह के भतीजे MLA सुशील सिंह की थी हत्या की साज़िश, धोनी सहित 3 बदमाश हत्थे चढ़े

उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) के हाथ एक बड़ी क़ामयाबी लगी है। डॉन बृजेश सिंह के भतीजे और चंदौली के सैयदराजा क्षेत्र से बीजेपी विधायक सुशील सिंह की हत्या करने वाले शार्पशूटर्स को धर-दबोचा है। वाराणसी से तीनों शूटर पकड़े गए।

ख़बर के अनुसार, पकड़े गए बदमाशों में कुख्यात अपराधी शिव प्रकाश तिवारी उर्फ़ धोनी तिवारी भी शामिल है, जिस पर 1 लाख रुपए की इनामी राशि घोषित थी। इसके अलावा मनीष केसरवानी और अंजनी सिंह को गिरफ़्तार किया गया है। पुलिस ने बदमाशों के पास से पिस्टल, ज़िंदा कारतूस और तमंचे भी बरामद किए हैं। बदमाशों ने बताया है कि वे बीजेपी विधायक सुशील सिंह की हत्या की फिराक में थे।

ग़ौरतलब है कि शिव तिवारी साल 2011 में हिन्दू युवा वाहिनी के प्रदेश संयोजक विष्णु दत्त ओझा की हत्या के मामले में भी आरोपित है। वहीं, मनीष केसरवानी और अंजनी सिंह पर भी मर्डर और डकैती के कई मामले विभिन्न थानों में दर्ज हैं।

एसएसपी (STF) सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज के मुताबिक़, “पुलिस को विश्वस्त सूत्रों से जानकारी मिली थी कि बिहार के गैंगस्टर अमरनाथ चौधरी के इशारों पर धोनी और उसके सहयोगी बीजेपी विधायक की हत्या की साजिश रच रहे हैं। हालाँकि, अभी यह साफ़ नहीं है कि चौधरी बीजेपी विधायक को क्यों मरवाना चाहता था?”

उन्होंने कहा, “इसकी जानकारी मिलते ही 6 लोगों की टीम उन्हें पकड़ने के लिए लगाया गया। बदमाश बाइक पर सवार थे। भनक लगते ही वे भागने लगे। लेकिन उन्हें दबोच लिया गया। ”

भू-माफिया आज़म ख़ान पर जमीन हड़पने के 27 मामले दर्ज, जल्द हो सकती है गिरफ़्तारी

समाजवादी पार्टी के सांसद और भू-माफ़िया आज़म ख़ान की मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रही है। उनके सिर पर गिरफ़्तारी की तलवार लटक रही है। रामपुर के एसपी डॉक्टर अजय पाल ने बताया कि सपा सांसद आज़म ख़ान पर दर्ज मुक़दमों के आधार पर उनकी गिरफ़्तारी संभव है।

उन्होंने बताया कि जौहर अली यूनिवर्सिटी के लिए किसानों की ज़मीन हड़पने को लेकर आज़म ख़ान के ख़िलाफ़ किसानों ने 26 मुक़दमे दर्ज कराए हैं। जिन किसानों ने यह मामले दर्ज कराए हैं, वो अब इलाहाबाद हाईकोर्ट तक जा पहुँचे हैं। एसपी ने बताया कि इससे पहले किसानों की तरफ़ से लगातार दर्ज हो रहे मामलों के बाद अब रामपुर शहर कोतवाली में आज़म ख़ान समेत चार लोगों पर शत्रु सम्पत्ति का मामला दर्ज हुआ है।

नायब तहसीलदार की तरफ से दर्ज किए गए इस मामले में आरोप लगाया गया है कि जौहर विश्वविद्यालय ट्रस्ट और आज़म ख़ान को फ़ायदा पहुँचाने के लिए दस्तावेज़ों में छेड़छाड़ की गई। इसके अलावा आज़म ख़ान पर महिलाओं पर अभद्र टिप्पणी करने को लेकर दो मुक़दमे दर्ज हो चुके हैं। इन मामलों में जो धाराएँ लगाई गई हैं, वो उनकी गिरफ़्तारी के लिए पर्याप्त हैं।

बता दें कि सपा नेता आज़म ख़ान पर साल 2003 से लेकर 2005 के बीच 26 किसानों की ज़मीन हड़पने और उसे जौहर यूनिवर्सिटी परिसर में शामिल करने का आरोप है। जानकारी के अनुसार, किसानों ने रामपुर के अजीम नगर थाने में आज़म ख़ान के खिलाफ़ आईपीसी की धारा 323, 242, 447, 506 और 389 के तहत मुक़दमा दर्ज कराया है।

ख़बर के अनुसार, आज़म ख़ान के ख़िलाफ़ ज़मीन हड़पने के मामले में कुल 27 मुक़दमे दर्ज हैं, इनमें 26 तो किसानों द्वारा दर्ज कराए गए हैं, जबकि एक मुक़दमा राज्य सरकार की तरफ़ से राजस्व निरीक्षक ने दर्ज कराया है। इसमें भी उन पर ज़मीन हड़पने का आरोप लगाया गया है।

Man Vs Wild: ‘मुसीबत के वक्त धैर्य नहीं खोते PM मोदी, यही बात उन्हें वर्ल्ड लीडर बनाती है’

12 अगस्त को मैन वर्सेज वाइल्ड का स्पेशल ऐपिसोड टेलीकास्ट होने वाला है, जिसमें पीएम नरेंद्र मोदी मशहूर होस्ट और खतरों से खेलने वाले बेयर ग्रिल्स के साथ एडवेंचर करते हुए नजर आएँगे। शो टेलीकास्ट होने से पहले ग्रिल्स ने पीएम मोदी की जमकर तारीफ की है। ग्रिल्स ने बताया कि मोदी बीहड़ जंगल में मुश्किल हालातों के बीच भी सहज थे और उनके चेहरे की मुस्कान कभी गायब नहीं हुई।

समाचार एजेंसी ANI को दिए इंटरव्यू में ग्रिल्स से जब पूछा गया कि उन्हें मोदी की क्या बात याद रहेगी? इस पर ग्रिल्स ने जवाब दिया कि वह पीएम मोदी की लगातार हो रही बारिश में भी उनके चेहरे की बड़ी मुस्कान के कायल हो गए। ग्रिल्स ने कहा कि वह काफी सहज और शांत इंसान हैं। लगातार बारिश में जब सीक्रेट सर्विस ने उनके लिए छाता निकालने की कोशिश की तो उन्होंने मना कर दिया और ग्रिल्स के साथ नदी की तरफ बढ़ गए।

इसके साथ ही ग्रिल्स ने आगे बताया, “हमें नदी पार करनी थी, मैंने हाथों से ही एक राफ्ट बनाई, लेकिन सीक्रेट सर्विस ने कहा कि पीएम को ऐसे नहीं ले जाया जा सकता क्योंकि इसमें खतरा है। इस पर भी पीएम ने उन्हें समझाकर अलग किया। इसके बाद जब हम हाथ से बनी उस छोटी राफ्ट पर थे तो वह डूबने लगी। तब मैं नीचे उतरा और राफ्ट को खींचने लगा। तब भी पीएम मोदी काफी शांत दिखे।”

पीएम मोदी के साथ शूट किए ऐपिसोड पर बात करते हुए ग्रिल्स ने कहा कि इसमें पीएम मोदी का वह रूप देखने को मिलेगा जो पहले कभी नहीं देखा गया होगा। ग्रिल्स ने कहा, “जब तक मुसीबत नहीं आती तब तक किसी का असली रूप आप जान नहीं सकते। यह देखकर अच्छा लगा कि पीएम मोदी जैसा वर्ल्ड लीडर मुश्किल हालातों में भी शांत और स्थिर रहते हैं और यही बात उन्हें वर्ल्ड लीडर बनाती है।”

बेयर ग्रिल्स ने आगे बताया, “पीएम मोदी एक ऐसे व्यक्ति हैं, जो पर्यावरण के बहुत बड़े संरक्षक हैं। यही वजह थी कि वो मेरे साथ इस यात्रा पर आए। उन्होंने असल में एक युवा शख्स के तौर पर जंगल में समय बिताया। मेरे लिए ये आश्चर्य की बात थी कि वो यहाँ कितने आराम और शांति से रहे।”

वहीं, शुक्रवार (अगस्त 9, 2019) को ‘मैन वर्सेज वाइल्ड’ के एपिसोड की झलक दिखलाता एक वीडियो जारी किया गया। ग्रिल्स मोदी को बाघ के संभावित हमले से बचने के लिए भाले जैसा हथियार देते हैं तो मोदी कहते हैं, “मेरे संस्कार किसी को मारने की इजाजत नहीं देते हैं, लेकिन फिर भी मैं आपके लिए इसे (भाले) पकड़ लेता हूँ।”

नान-रोटी के भाव से जूझता पाकिस्तान देख रहा है हिन्दुस्तान का एयर स्पेस बंद करने का ख्वाब

मुल्क के तौर पर पाकिस्तान की वही हालत है जैसे एक गली का लौंडा यह नहीं समझ पाता कि लड़की उसे हँस के देख रही है या देख के हँस रही है। अपनी मूर्खता का प्रदर्शन करने के बाद उसके चर्चित हो जाने को पाकिस्तानी किसी तमगे की तरह लटका कर घूमने भी लगते हैं। ऐसी ही एक मूर्खता फ़िलहाल अभी पाकिस्तान में चालू है।

कश्मीर में अनुच्छेद-370 के कुछ प्रावधानों के निष्क्रिय होने के बाद से कश्मीर को हाथ से जाता हुआ देख पाकिस्तानियों को ज़ाहिर तौर पर सदमा लगा है। और इसी सदमे की प्रतिक्रिया में इमरान खान सरकार ने समझौता एक्सप्रेस बंद करने, भारत से राजनयिक सम्बन्ध का स्तर कम करने, अपनी वायुसीमा बंद करने जैसे कदम भी उठाए हैं। जिनका आखिर में नुकसान हमेशा की ही तरह पाकिस्तान को ही उठाना पड़ेगा। लेकिन इस बीच कुछ पाकिस्तानियों ने हिन्दुस्तान के एयरस्पेस को भी बंद करने का अरमान पालना भी शुरू कर दिया। शुरूआत करने वाले इस जीनियस असद उल्ला ने लिखा:

असद उल्ला के हिसाब से बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद जब पाकिस्तान ने हिंदुस्तानी हवाई जहाजों के लिए अपना एयर स्पेस बंद कर दिया था, तो हिंदुस्तान को ₹491 करोड़ का नुकसान हुआ। उनका मानना है कि इसी प्रक्रिया को फिर से करने के लिए इस बार पाकिस्तान को हिंदुस्तान की एयर स्पेस बंद कर देनी चाहिए। उसने इसके लिए बाकायदा हैशटैग बनाया- #ShutDownIndianAirSpace

और पाकिस्तानियों ने इस मूर्खता को ट्विटर ट्रेंड भी बना दिया!

फिर क्या था, हिंदुस्तानी ‘twitteratti’ ने ShutDownIndianAirSpace हैशटैग के जमकर मजे लिए:

कुछ थोड़े ‘कम समझदार’ पाकिस्तानियों ने शंका जताई कि हिंदुस्तान की एयर स्पेस भला पाकिस्तान कहाँ से बंद करेगा, तो ‘नॉर्मल’ पाकिस्तानियों ने उन्हें समझा दिया। लॉजिक यह है कि अगर ‘जब मोदी के जहाज़ गुज़रेंगे तो ये इंडियन एयर स्पेस हुई न’।

अगर तकनीकी Terminology की बात परे भी कर दें, तो यह केवल पाकिस्तान की मूर्खता ही है कि उसे लगता है कि उसके किसी ‘प्रतिबंध’ का हिंदुस्तान की सेहत पर असर पड़ता है। इस एयर स्पेस प्रतिबंध की ही बात करें तो हालाँकि हिंदुस्तान आने-जाने वाले जहाजों का हवाई मार्ग लम्बा हो जाने से हमें ₹400 करोड़ अतिरिक्त खर्च ज़रूर करने पड़े, लेकिन इस दौरान पाकिस्तान को इसी कदम से ₹700 करोड़ का नुकसान वह किराया न मिलने से हुआ, जो वह उन हवाई जहाजों को अपने एयर स्पेस से गुज़रने देने की चुंगी के रूप में वसूलता था। इसके अलावा दोनों देशों की आर्थिक सेहत में ज़मीन-आसमान का अंतर है।

जहाँ हमारे लिए पैमाना यह है कि दुनिया की सबसे ताकतवर अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले हम कितनी तेज़ी से बढ़ रहे हैं, उन्हें अर्थव्यवस्था के कुल आकर में हम कितना आगे-पीछे कर पाएँगे, वगैरह, वहीं पाकिस्तान की विदेशी क़र्ज़ से कमर टूट रही है, जिससे बचने के लिए उसे दूसरे विदेशी कर्ज़ों की ही दरकार है। कभी वह चीन का क़र्ज़ गधे बेचकर उतारने की कोशिश करता है, कभी इमरान खान प्रधानमंत्री निवास की भैंसों की नीलामी कर ख़ज़ाने में पैसा लाने की कोशिश करते हैं।

ऐसे में यह कार्टून पाकिस्तान की हालत पर सटीक बैठता है:

Article 370: मोदी सरकार के फैसले को उमर अब्दुल्ला की पार्टी ने दी SC में चुनौती

नेशनल कॉन्फ्रेंस ने जम्मू-कश्मीर के संवैधानिक दर्जे में बदलाव को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। मोहम्मद अकबर लोन और हसनैन मसूदी ने अपनी याचिका में कहा है कि संसद द्वारा स्वीकृत कानून और इसके बाद राष्ट्रपति की ओर से जारी आदेश ‘असंवैधानिक’ है, इसलिए उन्हें ‘अमान्य एवं निष्प्रभावी’ घोषित कर दिया जाए।

लोन और मसूदी दोनों नेशनल कॉन्फ्रेंस के लोकसभा सदस्य हैं। लोन जम्मू-कश्मीर विधानसभा के अध्यक्ष रह चुके हैं। वहीं, मसूदी जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश हैं।

गौरतलब है कि अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी किए जाने से पहले केन्द्र सरकार ने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष उमर अब्दुल्ला को नजरबंद कर दिया था। बाद में उन्हें हिरासत में ले लिया गया था।

इससे पहले 8 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 370 पर राष्ट्रपति के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया था। न्यायालय ने याचिकाकर्ता से कहा था कि अनुच्छेद 370 पर राष्ट्रपति के आदेश को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर नियत समय पर ही सुनवाई होगी। यह याचिका वकील मनोहर लाल शर्मा ने दायर की थी।

बीते दिनों अनुच्छेद 370 के पहले खंड को छोड़कर बाकी सभी खंडों को समाप्त कर दिया गया था। इससे जम्मू कश्मीर को मिला विशेष राज्य का दर्जा भी खत्म हो गया। साथ ही केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों (जम्मू-कश्मीर और लद्दाख) में विभाजित कर दिया है। मोदी सरकार के दोनों ही फैसलों पर पिछले दिनों नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने कहा था कि वो सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे।

Article 370: ‘श्रीनगर में 20 लोगों के विरोध को विदेशी मीडिया ने बताया 10 हजार लोगों का प्रदर्शन’

अनुच्छेद 370 पर केंद्र सरकार के फैसले के बाद से मीडिया का एक वर्ग खासकर, कुछ विदेशी मीडिया संस्थान लगातार भ्रामक और विवादित ख़बरों को हवा दे रहे हैं। केंद्र सरकार ने शनिवार (अगस्त 10, 2019) को उन मीडिया रिपोर्ट्स को मनगढ़ंत बताया जिनमें शुक्रवार को श्रीनगर में 10,000 लोगों द्वारा विरोध-प्रदर्शन करने का दावा किया गया था। केंद्र ने इन रिपोर्ट्स को पूरी तरह गलत और आधारहीन करार दिया है।

गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने बयान जारी कर कहा है कि हजारों लोगों के विरोध करने की खबरें गलत है। जुमे के मौके पर श्रीनगर और बारामूला में छिटपुट प्रदर्शन हुए थे, लेकिन इनमें 20 से ज्यादा लोग नहीं थे।

गृह मंत्रालय ने अपने ट्वीट में कहा कि रायटर्स और डॉन में छपी खबरों में इस तरह के दावे किए गए कि श्रीनगर में 10,000 लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। यह पूरी तरह मनगढ़ंत है। उन्होंने स्पष्ट करते हुए कहा कि हालाँकि, श्रीनगर और बारामूला में कुछ इस तरह के प्रदर्शन हुए, लेकिन इसमें भी 20 से अधिक लोग नहीं थे।


शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने प्रतिबंधों में ढील दी थी ताकि लोग मस्जिदों में नमाज अता कर सकें। साथ ही बकरीद की तैयारी भी कर सकें। इसके लिए जम्मू-कश्मीर के पाँच जिलों से सीआरपीसी की धारा-144 के तहत लागू निषेधाज्ञा हटा दी गई है। किश्तवाड़ एवं डोडा जिलों में कर्फ्यू में ढील दी गई है।

अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि राज्य में जनजीवन अब सामान्य हो रहा है। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, जम्मू क्षेत्र के पाँच जिलों में स्कूल और कॉलेज खोल दिए गए हैं। सरकारी कार्यालयों में भी उपस्थिति बढ़ी है। 

सपा के पूर्व राज्यसभा सांसद संजय सेठ, सुरेंद्र नागर BJP में शामिल

समाजवादी पार्टी के पूर्व राज्यसभा सांसद संजय सेठ और सुरेंद्र सिंह नागर बीजेपी में शामिल हो गए हैं। दोनों ने हाल ही में समाजवादी पार्टी और राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफ़ा दिया था। इस्तीफ़ा दिए जाने के बाद से ही इनके बीजेपी में शामिल होने की अटकलें लगाई जा रही थी। शनिवार (10 अगस्त) को दिल्ली स्थित बीजेपी दफ्तर में बीजेपी के वरिष्ठ नेता भूपेंद्र यादव की मौजूदगी में संजय सेठ और सुरेंद्र नागर बीजेपी का हिस्सा बने।

ग़ौरतलब है कि पिछले एक महीने में समाजवादी पार्टी और राज्यसभा से इस्तीफ़ा देने वाले संजय सेठ तीसरे सांसद हैं। वे समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष थे। साथ ही वे यूपी के बड़े बिल्डर्स में से एक हैं। ख़बर तो यह भी है कि वे मुलायम सिंह के छोटे बेटे प्रतीक यादव के बिज़नेस पार्टनर भी हैं। संजय सेठ द्वारा इस्तीफ़ा दिए जाने के बाद राज्यसभा में सपा के केवल 10 सांसद रह गए हैं। 

बता दें कि इससे पहले नीरज शेखर और सुरेंद्र नागर ने भी राज्यसभा और पार्टी से अपना इस्तीफ़ा दे दिया था। नीरज शेखर भी बीजेपी में शामिल हो चुके हैं।