पुलवामा हमले के बदले में भारत द्वारा बालाकोट पर की गई एयर स्ट्राइक का असर दिखने लगा है। जैश सरगना मौलाना मसूद अजहर के अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित होने के बाद अब पाकिस्तान ने भारत को नियंत्रण रेखा पर तनाव काम करने के लिए शांति प्रस्ताव भेजा है। प्रस्ताव में एलओसी से पाकिस्तानी सेना के विशेष दस्ते एसएसजी की एकतरफा वापसी और सीमा पार गोलीबारी को दोनों तरफ अस्थाई रूप से रोकने की बात कही गई है।
पीएमओ भेजी गई रिपोर्ट के हवाले से खबर
हिंदुस्तान टाइम्स में पीएमओ को भेजी गई एक रिपोर्ट के हवाले से यह दावा किया गया है। खबर के अनुसार यह प्रस्ताव पाकिस्तानी DGMO से भारतीय DGMO को भेजा गया है। भारतीय सैन्य प्रतिष्ठान के वरिष्ठ अधिकारी ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर बताया कि यह प्रस्ताव दोनों पक्षों के बीच स्थापित ‘संस्थागत सैन्य संचार मार्ग’ से प्राप्त हुआ है। प्रस्ताव में पाकिस्तान ने अपनी विशेष सैन्य टुकड़ी स्पेशल सर्विसेज़ ग्रुप (एसएसजी) को एलओसी से हटाने का एकतरफा प्रस्ताव दिया है और सलाह दी है कि दोनों ओर से फ़िलहाल गोलीबारी पर अस्थाई रोक रहे। एसएसजी को पाकिस्तान ने एलओसी पर पुलवामा हमले के बाद (भारत की जवाबी कार्रवाई की आशंका से) एहतियातन तैनात किया था।
पुलवामा के बाद से कोई घुसपैठ नहीं
खबर में यह भी दावा किया गया है कि रिपोर्ट के अनुसार पुलवामा के बाद से हिंदुस्तान में कोई घुसपैठ नहीं हुई है। यहाँ तक कि घुसपैठ कराने के लिए सीमा के पास विशेष रूप से स्थापित अड्डे (‘लॉन्च पैड’) भी सूने पड़े हैं। माना जा सकता है कि पाकिस्तान को ऐसा बढ़ रहे अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते करना पड़ रहा है। भारत ने न केवल चीन को मजबूर किया कि वह अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने में रोड़े अटकाना बंद करे, बल्कि भारत सरकार FATF में भी पाकिस्तान को ब्लैकलिस्ट किए जाने के लिए पुरजोर कोशिश कर रही है। फाइनेंशियल एक्शन टास्क फ़ोर्स (FATF) आतंकवाद और मनी लॉन्ड्रिंग पर नजर रखने वाली वैश्विक संस्था है। वहाँ ब्लैकलिस्ट हो जाने से न केवल पाकिस्तान को दुनिया से पैसा उगाहने में मुश्किल होगी, बल्कि चीन जैसे उसके समर्थकों के लिए भी उसके साथ किसी भी प्रकार के संबंधों को उचित सिद्ध करना मुश्किल हो जाएगा।
जमशेदपुर में परसुडीह थाना क्षेत्र के कलियाडीह में भाजपा नेता मृगेन्द्रनाथ होपेन हेंब्रम (35 वर्षीय) की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस घटना को उनके घर से मात्र 200 मीटर की दूरी पर अंजाम दिया गया। इससे साफ़ ज़ाहिर है कि हमलावर हत्या की वारदात को अंजाम देने के लिए पहले से ही घात लगाए बैठे थे। ख़बर के अनुसार, घटना शनिवार (11 मई) शाम 7:30 बजे की है। दो बाइक सवार अपराधियों ने भाजपा नेता पर ताबड़तोड़ 6 गोलियाँ बरसाईं। गोली की आवाज़ सुनकर आसपास के लोग मौक़े पर पहुँचे और लहूलुहान हालत में उन्हें टाटा मुख्य अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
जानकारी के मुताबिक़, होपेन हेंब्रम भाजपा एससी-एसटी मोर्चा के क्षेत्रीय मंडल उपाध्यक्ष थे। इसके अलावा वो गोशाला में काम करते थे और एलआईसी से भी जुड़े हुए थे। सूचना मिलने पर भाजपा कार्यकर्ता और उनके परिजन भी अस्पताल पहुँचे जहाँ उनके परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था।
मृतक के भाई सुकू हेंब्रम ने बताया कि होपेन शाम को फुटबाल खेलने गए थे, वहाँ से लौटते समय जैसे ही वो पुल के पास पहुँचे, तभी पहले से मौक़े की तलाश में बैठे हमलावरों ने उन पर 6 गोलियाँ दाग दीं। इससे घटनास्थल पर ही उनकी मृत्यु हो गई। सुकू हेंब्रम ने दुखू टुडू उर्फ़ दुखू मांझी पर हत्या आरोप लगाया है। उन्होंने दुखू मांझी के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई करने की माँग की है।
घटना की सूचना मिलने पर डीएसपी आलोक रंजन अपने दल-बल के साथ घटनास्थल पर पहुँचे, जहाँ उन्होंने दो खोखा और होपेन का जूता बरामद किया। पुलिस ने दुखू टुडू के परिजनों को हिरासत में लेकर उनसे इस मामले पर पूछताछ की। फ़िलहाल, आरोपी इस वारदात को अंजाम देने के बाद से ही फ़रार है। पुलिस मामले की छानबीन कर रही है और हत्या के कारणों का पता लगाने में जुट गई है।
पश्चिम बंगाल के झारग्राम जिले में शनिवार (मई 11, 2019) की रात भारतीय जनता पार्टी के एक कार्यकर्ता का शव मिला है। भाजपा कार्यकर्ता का नाम रमन सिंह है। रमन सिंह का शव मिलने के बाद इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है। भाजपा ने झारग्राम जिले के गोपीबल्लभपुर के बीजेपी बूथ एजेंट की हत्या का आरोप तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) पर लगाया है। भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय ने आरोप लगाया है कि टीएमसी कार्यकर्ताओं ने उनके घर में घुसकर हत्या की है।
West Bengal: BJP worker Raman Singh found dead last night in Gopiballabpur, Jhargram. More details awaited. pic.twitter.com/MVAdDUOrn0
वहीं, एक दूसरी घटना में राज्य के पूर्वी मिदनापुर, भगवानपुर में बीजेपी के दो कार्यकर्ता अनंत गुचैत और रणजीत मैती को रविवार (मई 12, 2019) की रात गोली मार दी गई। दोनों गंभीर रूप घायल हैं। दोनों कार्यकर्ताओं को जख्मी हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस इस मामले की खोजबीन कर रही है, लेकिन अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है।
West Bengal: Two BJP workers Ananta Guchait & Ranjit Maity shot at last night in Bhagabanpur, East Medinipur. Both the injured admitted to hospital. More details awaited.
इसके साथ ही बंगाल की चर्चित पूर्व आईपीएस अधिकारी और घाटल लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी भारती घोष ने टीएमसी कार्यकर्ताओं पर उनके साथ बदतमीजी करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि केशपुर में टीएमसी कार्यकर्ताओं ने उनके साथ बदसलूकी की है।
ऐसा पहली बार नहीं है कि टीएमसी के गुंडों ने खुलेआम अपनी गुंडागर्दी दिखाई हो, इससे पहले भी उनके हिंसा में शामिल होने की खबरें आती रही हैं। अभी तक के हर चरण में बंगाल से हिंसा की खबरें आई हैं। फिर चाहे वह कार्यकर्ताओं के बीच हाथापाई हो या फिर पोलिंग बूथ पर ही देसी बम से हमला किया जाना हो। यहाँ पर पाँचवें चरण के मतदान के दौरान बैरकपुर से भाजपा उम्मीदवार अर्जन सिंह पर टीएमसी के गुंडों ने हमला किया था, जिसमें उन्हें काफी चोटें आईं। वहीं चौथे चरण के चुनाव के दौरान आसनसोल से सांसद और बीजेपी उम्मीदवार पर टीएमसी समर्थकों ने हमला किया था, उनकी कार को तोड़ दिया गया था। पश्चिम बंगाल में आज 8 सीटों- झारग्राम, तमलुक, कंठी, घाटल, मिदनापुर, बाकुरा, बिश्नुपुर और पुर्लिया पर वोटिंग हो रही है।
शनिवार (मई 11, 2019) को उत्तर प्रदेश के भदोही जिले की कॉन्ग्रेस जिलाध्यक्ष नीलम मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया। नीलम मिश्रा के साथ ही पार्टी के कई अन्य कार्यकर्ताओं ने भी पार्टी छोड़ दी। नीलम ने बताया कि कॉन्ग्रेस महासचिव और पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गाँधी द्वारा सरेआम अपमानित किए जाने से नाराज होकर उन्होंने और जिला कॉन्ग्रेस कमेटी के कई पदाधिकारियों और नेताओं ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देकर कॉन्ग्रेस का साथ छोड़ दिया है।
Congress leader, other office-bearers resign from party alleging humiliation by Priyanka Gandhi Vadrahttps://t.co/rlUnH1MSJw
नीलम का कहना है कि शुक्रवार (मई 10, 2019) को भदोही में हुई चुनावी सभा के बाद उन्होंने प्रियंका से शिकायत की थी कि भदोही से पार्टी के प्रत्याशी रमाकांत यादव जिला कॉन्ग्रेस के साथ बिल्कुल भी तालमेल नहीं रख रहे हैं और रैली में पार्टी के कई जिला पदाधिकारियों को पास नहीं दिया गया। नीलम का आरोप है कि इस बात पर प्रियंका ने भीड़ के सामने ही उनसे तेज आवाज में बात की और कहा कि अगर आप लोग अपमानित महसूस कर रहे हैं, तो करते रहिए। इसके अलावा प्रियंका ने भीड़ के सामने कई कटु शब्द कहकर उन्हें और पार्टी जिला इकाई के पदाधिकारियों को अपमानित किया।
कॉन्ग्रेस पार्टी का साथ छोड़ने के बाद अब नीलम मिश्रा आज (मई 12, 2019) भदोही लोकसभा सीट के लिए होने वाले चुनाव में गठबंधन के प्रत्याशी रंगनाथ मिश्र का समर्थन करेंगी। वहीं, जब इस बारे में कॉन्ग्रेस के जिला उपाध्यक्ष मुशीर इकबाल से बात की गई तो उन्होंने कहा कि जिला अध्यक्ष नीलम मिश्रा सहित कई पदाधिकारियों ने जल्दबाजी में यह कदम उठाया है। उनका कहना है कि उन्हें चुनाव के खत्म होने तक का इंतजार करना चाहिए था।
और आज फाइनली अपने दीपक चौरसिया जी को भी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का इंटरव्यू मिल गया, वह भी उनके घर में घुसकर। मोदी जी तो ‘लव’ हैं, वह तो हमेशा बढ़िया लगते हैं, लेकिन चौरसिया जी को मैं सन 1999 से देख रहा हूँ, आज भी उनकी दाढ़ी और बाल उसी करीने से कटे हैं, जैसे विजय चौक की झाड़ियाँ, आज भी वे उतने ही गुटखा खोर लगते हैं, जितना वे प्रमोद महाजन के जमाने में थे। सवाल-जवाब तो खैर मैं नहीं सुनता, क्योंकि मोदी पर ट्रस्ट है कि बंदा अगर निपट झूठ भी बोलेगा तो तब भी वह ‘खानदान’ के सत्तर साल के सच पर भारी पड़ेगा।
वहीं आज रवीश कुमार को राहुल गाँधी के साथ, जेठ की दुपहरिया में खुले आसमान के नीचे इंटरव्यू करते हुए देखा तो ख्याल आ गया कि यह बंदा इश्क में फलाना-ढिमकाना हो जाना लिखता है, लेकिन असल जिन्दगी में बेइन्तिहाँ नफरत और कुंठा ढोता है। जो चेहरे से टपकती है।
शम्भूनाथ शुक्ला सरीखे और फेसबुक के टॉप फैनों ने इनमें इतनी हवा भर दी है, कि इनकी आत्मा इधर से उधर ठोकरें खाती फिर रही है, भरी जवानी में इनका चैन-वैन सब उजड़ गया है।
इनके साथ वाले पत्रकारों ने इस दौरान कई चैनल बदले, चैनल खोल लिए, राज्य सभा पहुँच गए, कई मंत्री बन गए और कई तो रिटायर भी हो गए। लेकिन रवीश 25 साल से प्रनॉय रॉय की ‘गोदी’ में ही बैठे हुए हैं। इतना कमजर्फ और बुजदिल इंसान बीते सौ सालों में शायद ही कोई हुआ हो। जिनकी सरकारी नौकरियाँ होती हैं, उनके भी ट्रान्सफर होते हैं, जिनकी मंत्रालय की नौकरियां होती हैं, उनके कमरे तो भी बदल जाते हैं, लेकिन आपकी जिन्दगी में कुछ नहीं बदला। आप में हिम्मत नहीं हुई NDTV नामक टापू से बाहर देखने की।
और अपनी इस बुजदिली को आपने ‘मैचो मैन’ का जामा पहना दिया, जो इतना ताकतवर है कि सीधे भारत के प्रधानमंत्री मोदी से सवाल-जवाब करता है। जो खुद अपने आप में एक संस्था बन गया है, जो एक पैरेलल लोकपाल है। जो रेलवे नौकरी की अभ्यर्थियों से लेकर सफाई कर्मियों तक का यूनियन लीडर और उनका खैरख्वाह है, जो ममता बनर्जी की तरह मोदी को देश का प्रधानमंत्री ही नहीं मानता।
खैर आपकी शान में क्या कहा जाए, शब्द बौने लगते हैं आपके चेहरे पर पसरी ‘मनहूसियत’ के आगे। बहरहाल आज जब आपको राहुल गांधी के आगे बड़ी बेतरतीब सी हालत में देखा तो लगा कि ऐसी क्रांतियाँ चूल्हें में चलीं जाएँ लेकिन इंसान को सलीके से, अच्छे कपडे पहनकर रहना चाहिए। अगर सुफेद बालों में डाई सूट नहीं करती है तो जेल लगाकर कंघी तो की जा सकती है न! या फिर आपने कसम खा ली है कि देश में वामपंथी दरिद्रता के आख़िरी ब्रांड एम्बेसडर आप ही बनेंगे!
खैर आज का इंटरव्यू, वह भी राहुल गांधी के साथ, क्या निकल कर आ सकता है! पानी को मथने से हो सकता है कुछ मिनरल निकल आएँ लेकिन राहुल में से तो शून्य के झाग ही निकलेंगे। और इसलिए इतनी कवायद के बाद रवीश के पास एक अदद हेडलाइन तक नहीं है। वहीं मोदी जी अब तक जिन दर्जनों पत्रकारों को इंटरव्यू दे चुके हैं, वे फूल के कुप्पा बने घूम रहे हैं, उनके चेहरे की लाली उनकी खुशी और उनकी उपलब्धि बयान कर रही है।
वहीं रवीश आज राहुल गाँधी का इंटरव्यू करने के बाद भी डल लगे, उन्होंने कई बार राहुल गाँधी से बीच-बीच में प्राइम टाइम वाली हँसी ठिठोली भी की, लेकिन यह सब राहुल के पल्ले नहीं पड़ता, वे उतना ही बोलते, हँसते, चिल्लाते और चीखते हैं, जितना उन्हें सुबह CWC के गिद्धराज जटायु के हमउम्र कांग्रेसी ब्रीफ करते हैं।
इससे ज्यादा सुर्खियाँ और दुआएँ तो रवीश ने महागठबंधन की रैली के मंच पर मायावाती के विशालकाय सफ़ेद सोफे के पीछे अनुशासित बसपाई कार्यकर्ता की तरह एक्ट करके हासिल कर ली थी। लगता है इन दिनों भाई का बैड लक ही खराब चल रहा है।
अरियाना टीवी, निजी राष्ट्रीय स्तर के चैनल शमशाद टीवी, पश्तो भाषा के लामार टीवी समेत कई चैनलों में एक दशक से ज्यादा समय तक छाईं रहीं पूर्व महिला न्यूज़ एंकर मीना मंगल की अफगानिस्तान में दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई। काबुल में हुए इस हत्याकाण्ड को दो मोटरसाइकिल सवारों ने अंजाम दिया। मीना की हत्या तब हुई जब वह अपने लिए कार का इंतजार कर रहीं थीं।
हवा में गोली चला भीड़ को किया तितर-बितर
मीना कार का इंतजार काबुल स्थित अफ़गानी संसद के निचले सदन जिरगा की सांस्कृतिक सलाहकार की अपनी नौकरी पर जाने के लिए कर रहीं थीं। तभी कहीं से एक मोटरसाइकिल पर सवार दो लोग आ गए और हवा में चार फ़ायर किए। हवाई फायर से जब भीड़ इधर-उधर हो गई तो उन्होंने मीना को सीने पर दो गोलियाँ मारीं और फरार हो गए। अरियाना न्यूज़ द्वारा घटनास्थल की जारी तस्वीरों में मंगल की लाश अपने ही खून में लथपथ दिखाई पड़ रही है।
महिलाओं के अधिकारों पर सोशल मीडिया में लिखतीं थीं
मीना मंगल अफगानिस्तान में अपनी न्यूज़ एंकरिंग के अलावा अपने सोशल मीडिया पेजों को लेकर भी काफी चर्चित थीं। इन पेजों पर वह अफगानी औरतों के पढ़ने और काम करने के अधिकारों पर बात करतीं थीं। इसके अलावा उन्होंने 2017 में जबरदस्ती हुई खुद की अरेंज्ड मैरिज के बारे में भी काफी कुछ लिखा है। उनका तलाक अभी मई में ही हुआ है।
उन्होंने सोशल मीडिया पर हाल ही में लिखा था कि उन्हें जान से मारने की धमकियाँ मिल रहीं हैं। अफगानी गृह मंत्रालय के प्रवक्ता नुसरत रहीमी ने स्थानीय मीडिया को बताया है कि हालाँकि हत्यारे फरार हो गए हैं और अभी तक किसी ने इस हत्या की जिम्मेदारी नहीं ली है, पर मंगल की हत्या की जाँच विशेष पुलिस यूनिट कर रही है।
राजनीति में ‘क्या कहा जा रहा है’ के साथ-साथ ‘कौन कह रहा है’ का भी अपना महत्व होता है। कई बार किसी बात में, किसी आरोप में कितना दम है इसकी पूरी तस्दीक के लिए बोलने वाले का इतिहास, उसकी पृष्ठभूमि* आदि को भी ध्यान में रखना जरूरी हो जाता है। इसी पैमाने पर अगर नरेंद्र मोदी को ‘मुख्य विभाजक’ कहने वाले आतिश तासीर को रखा जाए तो पहली नजर में भले ही वह ‘आइडियल लिबरल’ के रूप में निखरें, पर ज़रा गौर से देखने पर उनके पैतृक खानदान में वही हिन्दुओं के लिए नफ़रत, हिंदुस्तान से दुश्मनी और इस्लामिक कटटरपंथ को व्यक्त-अव्यक्त समर्थन दिखेगा जिसे वह अपनी माँ तवलीन सिंह के सिख होने के पीछे छिपने की कोशिश करते हैं। पिता कश्मीर पर हिंदुस्तान के खिलाफ आग उगलते रहे, भारतीय हॉकी टीम को ‘बबून’ (बंदर) कहते रहे, हमारी सेना का मखौल उड़ाते रहे। दादा ने एक हिन्दू की ‘FoE’ छीन उसे मौत के घाट उतारने वाले इस्लामी कट्टरपंथी के हक में अंग्रेजों से ‘सौदेबाजी’ की थी।
‘रंगीला रसूल’, इल्मुद्दीन, और मुहम्मद दीन तासीर
1927 में हिंदुस्तान में कुछ पर्चे (पैम्फलेट) बँटने लगे थे, जिनमें भगवान श्रीराम की पत्नी और भगवती लक्ष्मी का अवतार मानीं जाने वालीं माता सीता को ‘वेश्या’ बताया गया था। उन माता सीता को, जिनका व्यक्तित्व हिन्दुओं में चरित्र का मापदण्ड है। इससे बिफ़रे एक आर्यसमाजी पण्डित चमूपति ने ‘रंगीला रसूल’ नामक एक पुस्तक लिखी और लाहौर के महाशय राजपाल ने उसे प्रकाशित कर दिया। न केवल प्रकाशित किया बल्कि लेखक के नाम अलावा उसकी कोई भी पहचान उजागर करने से भी इंकार कर दिया।
नाराज हो इल्मुद्दीन नामक एक कट्टरपंथी ने महाशय राजपाल की चाकू घोंपकर हत्या कर दी, और खुद फाँसी पर चढ़ गया। अंग्रेज सरकार उसे एक मामूली कातिल की तरह दफ़ना देना चाहती थी पर कुछ मजहब के लोग अड़ गए कि उसे बाकायदा इस्लामी गाजे-बाजे के साथ ‘शहीदी’ विदाई दी जाए। अंग्रेजों के साथ उसे एक ‘शहीदी’ सुपुर्दे-खाक देने के लिए जमकर सौदेबाजी करने वालों में एक था मोहम्मद दीन तासीर। आतिश तासीर का दादा, जिसने लिबरलों की प्यारी ‘FoE’ का क़त्ल करने वाले कातिल के जनाज़े का इंतज़ाम किया। और इस जनाज़े का पाकिस्तान मूवमेंट में कितना बड़ा हाथ रहा, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इस कातिल इल्मुद्दीन को दफ़नाने पाकिस्तान के ‘बौद्धिक बाप’ अल्लामा इक़बाल आए। आए और आँसू बहा कर कहा कि हम तो बैठे ही रह गए, और यह बढ़ई का लड़का ‘बाज़ी’ मार ले गया।
आए तो वैसे उसे फाँसी से बचाने जिन्ना भी थे, मगर पता है कि उसकी काट फट से यह कहकर कर दी जाएगी कि वकील का तो काम ही है कातिलों के लिए कानून से कबड्डी खेलना।
आज पाकिस्तान में जिन्ना की ही तरह ‘मजार’ है इल्मुद्दीन की, जहाँ उसकी ‘वीरता’ और उसके ‘बलिदान’ के किस्से सुनाए जाते हैं। और इसका श्रेय जाता है मुहम्मद दीन तासीर को- आतिश तासीर के दादा को।
एक और बात: जिस 295A को ‘लिबरल गैंग’ अपना सबसे बड़ा दुश्मन बताता है, अभिव्यक्ति की आजादी का अंत बताता है, उसे भी ‘रंगीला रसूल’ किताब के खिलाफ कानूनी तौर पर कुछ न कर पाने की नाराजगी को दूर करने के लिए ही बनाया गया था। जिस समय यह किताब छपी, उस समय मजहबी भावनाओं को आहत करने के खिलाफ कोई कानून नहीं था और इसलिए पूरे शहर के कट्टरपंथियों के गुस्से के बावजूद महाशय राजपाल का कोई कोर्ट-कचहरी बाल भी बाँका नहीं कर पाई थी। लेकिन कट्टरपंथियों के गुस्से को देखते हुए आगे के लिए यह कानून बना दिया गया।
हिंदुस्तान को नीचा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी सलमान तासीर ने भी
सलमान तासीर बेशक पाकिस्तान के जाहिलाना कानून ‘ईश-निंदा के लिए मौत की सजा’ की मुख़ालफ़त करते हुए हलाक हुए, और इसके लिए उनकी जितनी भी तारीफ़ की जाए कम है। पर मौत किसी के स्याह सच को नहीं बदल देती। और यह भी एक कड़वा सच ही है कि ‘लिबरल’ तासीर हिंदुस्तान से उतनी ही नफ़रत का प्रदर्शन करते थे अपने ट्विटर अकाउंट पर जितनी उनके मुल्क के ‘कठमुल्ले’।
What about millions of muslims who migrated 2 Pak?RT @rajivememem: Shame :Pakistan’s two dozen Hindu families seek asylum in India:
मेरी बात पर अँधा यकीन मत करिए। सलमान तासीर का ट्विटर अकाउंट आज भी है- उस पर एडवांस्ड सर्च में जरा नाम सलमान तासीर के ट्विटर अकाउंट का डालिए, और कीवर्ड डालिए ‘India’। हिंदुस्तान के लिए जहर से भरे ट्वीट निकल-निकल कर दिखेंगे। खुद आतिश तासीर इस बात की तस्दीक कर चुके हैं कि उनके वालिद और पाकिस्तानियों की तरह वह भी हिंदुस्तान से नफरत की ग्रंथि से ग्रस्त हैं। और यह ट्वीट बताते हैं कि सलमान तासीर ने पाकिस्तान में फैले कठमुल्लावाद को मिटाने के लिए चाहे जो किया, जितना भी किया, लेकिन वह हिन्दू और हिंदुस्तान को निशाना बनाने की पाकिस्तानी संस्कृति से खुद की एक अलग तस्वीर नहीं पेश कर पाए।
अब भी कोई आश्चर्य है कि आतिश को हिन्दूफ़ोबिया फैंटेसी लगता है?
इन चीज़ों के परिप्रेक्ष्य में अगर आतिश तासीर को देखा जाए साफ़ पता चलता है कि कट्टरपंथी इस्लाम से सहानुभूति और हिंदुस्तान से नफ़रत विरासत में मिले हैं। उनकी माँ ने उन्हें किस तरह की (सेक्युलर, या हिन्दू -सिख, या मुस्लिम) परवरिश दी, इस पर तो मैं टिप्पणी नहीं करना चाहता पर यह साफ़ है कि हिन्दू-सिख माहौल में पलने-बढ़ने के बावजूद इस्लामी कट्टरपंथ उनपर मोदी के आकलन के समय हावी हो ही गया। इसीलिए संविधान के अनुच्छेद 25-30 से लेकर मजहबी तौर पर भेदभावपूर्ण RTE, सदियों से लटके राम मंदिर और सदियों की मेहनत से स्थापित पवित्र क्षेत्र को अपवित्र करवा चुके सबरीमाला तक के बाद भी उन्हें हिन्दूफ़ोबिया ‘फैंटेंसी’ लगता है। आतिश पता नहीं ‘gone case’ हैं या नहीं इस्लामी कटटरपंथ के, पर वह सेक्युलर तो नहीं ही हैं…
*(हालाँकि ,जरूरी नहीं कि हर एक बार इंसान की बात को तौलने के लिए उसकी पृष्ठभूमि को देखा ही जाए पर अधिकांश विषयों पर यह महत्वपूर्ण हो ही जाता है।)
8 मई 2019 को, एक छोटी सी वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई, जिसमें एक व्यक्ति अभिनेत्री से ट्रोल हो चुकी स्वरा भास्कर के साथ एक सेल्फी ले रहा था। क्लिप में, सेल्फी लेते हुए, मुस्करा कर स्वरा भास्कर से कहता है, “पर मैम, आएगा तो मोदी ही”।
वायरल वीडियो के अभी तक कई संस्करण आ चुके हैं, कई मिम्स बन चुके हैं, जिससे ट्वीटर पर घमासान छिड़ा हुआ है। एक तरफ जहाँ मोदी समर्थक इसके मजे ले रहे हैं, वहीं स्वरा भास्कर ने उनके आनंद पर पानी फेरना चाहा, कहा कि जब उस आदमी ने उनसे हवाई अड्डे पर सेल्फी के लिए कहा, तो उन्होंने कहा, “जो उनके के साथ सेल्फी लेना चाहते हैं, वह उनसे भी राजनीतिक विचारधारा के आधार पर भेदभाव नहीं करती हैं।” लेकिन उसने ‘चुपके से यह वीडियो शूट किया है”। स्वरा ने आगे कहा कि अपनी घृणित शैली में, ऐसी अंडरहैंड और टैक्टिक रणनीति भक्तों का ट्रेडमार्क है।
A guy asks for a selfie @ airport; I oblige ‘coz I don’t discriminate people who want selfies based on their politics. He sneakily shoots a video. Tacky & underhand tactics r trademarks of bhakts. I’m unsurprised. But always glad 2 make bhakts feel like their lives are worthwhile https://t.co/bKyFEOKZQh
वीडिओ वायरल है, ट्विटर पर बवाल काट रहा है, ऑपइंडिया ने उस व्यक्ति से संपर्क किया, जिसकी पहचान वी राँझा के रूप में की गई थी, वह एक पंजाबी गायक हैं, यह जानने के लिए कि पूरा मामला क्या था?
वी राँझा ने कहा कि उन्होंने स्वरा भास्कर से एक स्नैप स्टोरी के लिए पूछा था, जिसमें ऑडियो और वीडियो दोनों हैं। उन्होंने स्वरा को यह कहते हुए लताड़ा कि अगर यह उन्हें पसंद नहीं था, तो उन्हें वहीं उसे डिलीट करने के लिए कहना चाहिए था। उन्होंने कहा कि वह स्वरा को विवाद में नहीं घसीटना चाहते हैं और हो सकता है कि जब उन्होंने उनसे स्नैप स्टोरी के लिए पूछा तो उन्होंने हवाई अड्डे के शोर में ठीक से नहीं सुना हो।
उन्होंने कहा, “आएगा तो मोदी ही” कहने के बाद, स्वरा भास्कर ने बस इतना कहा कि ‘देखते हैं 23 मई को’ और चली गईं। यदि उसे स्नैप स्टोरी में कोई समस्या थी, तो उसे डिलीट करने के लिए कहना चाहिए था न कि वह इसे रीट्वीट कर और लोगों तक पहुँचाती।
वास्तव में, वी. राँझा ने कहा कि वह अभिनेत्री के रूप में स्वरा भास्कर के प्रशंसक थे, हालाँकि, एक राजनेता के रूप में, वह प्रधानमंत्री मोदी को सत्ता में वापसी करते हुए देखना चाहते हैं क्योंकि अभी देश में उनके कैलिबर का कोई अन्य नेता नहीं है।
यह पूछे जाने पर कि उन्होंने स्वरा भास्कर के राजनीतिक विचारों को अपवाद के रूप में क्यों लिया, उन्होंने कहा कि उस मामले में उन्हें स्वरा की राजनीति से कोई प्रॉब्लम नहीं है लेकिन जब बात भारतीय सेना और पाकिस्तान की होती है तो वे ऐसे मुद्दों पर वे स्टैंड लेते हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने मेजर गोगोई के बारे में स्वरा के ट्वीट को भी एक्सेपशन के तौर पर लिया, गोगोई एक पथराव करने वाली भीड़ के बीच से चुनाव अधिकारियों के लिए सुरक्षित मार्ग को सुनिश्चित करने के लिए अपनी जीप के बोनट पर एक पत्थरबाज को बाँध कर रास्ता बनाते हैं।
जब उनसे पूछा गया कि मेजर गोगोई के संबंध में उन्होंने कौन से बयान को एक्सेप्शन के रूप में लिया है, तो उन्होंने कहा कि वह स्वरा भास्कर द्वारा इस्तेमाल किए गए अपमानजनक शब्द को दोहराना नहीं चाहते हैं लेकिन यह ऑन रिकॉर्ड मौजूद है। हालाँकि, इस ट्वीट ने ट्विटर पर एक तगड़ी प्रतिक्रिया को जन्म दिया था।
आखिरकार, स्वरा ने दावा किया कि वह ऊना की घटना के बारे में बात कर रही थीं, लेकिन किसी ने भी स्वरा पर विश्वास नहीं किया क्योंकि उसने मेजर गोगोई के इस तरह से अधिकारियों को बचाने के अंतिम प्रयास की भी आलोचना की थी।
वैसे स्वरा भास्कर का पाकिस्तान के प्रति झुकाव भी काफी स्पष्ट है, जिसकी समय-समय पर चर्चा होती रही है। एक वीडियो में, उन्होंने पाकिस्तान की प्रशंसा करते हुए कहा था कि वह पाकिस्तान में रहने के बाद से पाक के लिए ‘डिसेंट वर्ड’ का ही उपयोग करना चाहती हैं ।
उन्होंने हाल ही में विंग कमांडर अभिनंदन की रिहाई के लिए भी ‘तालिबान’ इमरान खान को श्रेय दिया था, जबकि स्पष्ट रूप से, घटनाक्रमों ने मोदी सरकार द्वारा पाकिस्तान पर गंभीर वैश्विक दबाव की ओर इशारा किया था, जिसकी वजह से उनकी रिहाई हुई थी। वास्तव में, अभिनन्दन जब तक पाकिस्तान में थे तब तक पाक ने लगातार अभिनंदन को मानसिक और शारीरिक चोट ही पहुँचाया था।
Pakistan has done the right thing in releasing Wing Cmdr #Abhinandan We welcome this move by @ImranKhanPTI Delighted this brave dignified son of India, our hero will return home soon. India has done the right thing in sending Pak a message that terror will no longer be tolerated
जब उनसे पूछा गया कि स्वरा भास्कर ने कन्हैया कुमार के लिए चुनाव प्रचार किया था तो इस बारे में आपने क्या सोचा है, तो वी राँझा ने कहा कि अगर वह किसी ऐसे व्यक्ति के लिए प्रचार करना चाहती हैं जो देश के ‘टुकडे टुकडे’ चाहता है, तो यह उसकी अपनी पसंद है।
राँझा ने यह भी कहा कि उसने वही किया जो वह करना चाहते हैं क्योंकि वह इसे अपने कुछ दोस्तों के साथ साझा करना चाहता थे और उन्हें यह नहीं पता था कि यह वायरल हो जाएगा। वह इससे पब्लिसिटी नहीं चाहते थे। क्योंकि, वह पहले से ही टी-सीरीज़ के साथ काम कर चुके हैं और YouTube पर उनके गाने के 3 मिलियन से अधिक व्यूज हैं।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर उनकी पर्याप्त फैन फॉलोइंग है और उन्हें प्रचार के लिए यह सब करने की आवश्यकता नहीं है।
स्वरा भास्कर के लिए परेशानी सिर्फ वी राँझा के साथ ही खत्म नहीं हुई। एक और घटना सामने आई है जहाँ स्वरा को ट्रोल किया गया है।
एक महिला पत्रकार द्वारा स्वरा भास्कर का इंटरव्यू लेने के बाद, उस पत्रकार द्वारा अपने फेसबुक पेज पर पोस्ट करते हुए कहा गया कि उन्हें स्वरा का इंटरव्यू लेते समय बहुत अच्छा लगा, लेकिन ‘आएगा तो मोदी ही’।
प्रधानमंत्री मोदी ने आज यूपी के गाज़ीपुर में भाजपा प्रत्याशी मनोज सिन्हा के समर्थन में आरटीआई मैदान में आयोजित एक जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने अपनी सरकार के पिछले पाँच साल के विकास कार्यों का उल्लेख किया। गाजीपुर की भौगोलिक, सांस्कृतिक महत्व की जानकारी भी उनके संबोधन का हिस्सा रहे।
राजस्थान के अलवर में दलित महिला के साथ हुए गैंग रेप मामले पर पीएम मोदी ने कहा, “वहाँ एक दलित बेटी के साथ दो हफ़्ता पहले कुछ दरिंदों ने बलात्कार किया, लेकिन उन दरिंदों को पकड़ने की बजाए, वहाँ की पुलिस, वहाँ की कॉन्ग्रेस सरकार इस केस को ही छिपाने-दबाने में जुट गई।” उन्होंने कहा कि यही है कॉन्ग्रेस के ‘न्याय’ की सच्चाई।
राजस्थान में भी चुनाव थे इसलिए वहां की कांग्रेस सरकार, उस बिटिया को न्याय दिलाने के बजाय चुनाव बीतने का इंतजार करती रही।
इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “इनके रागदरबारी भी इतने भयंकर कांड को दबाते रहे और मोमबत्तियाँ लेकर निकलने वाले लोगों की मोमबत्तियों से धुआँ निकल रहा है।” अवॉर्ड वापसी गैंग पर तंज कसते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आज वो अवॉर्ड वापसी गैंग इस मुद्दे पर चुप क्यों बैठी है? देश के एक बड़े हिस्से ने इन स्वार्थियों को पहचान लिया है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराध के लिए फाँसी की सज़ा का प्रावधान किया है। महिला हितों और महिलाओं की सुरक्षा के प्रति हम पूरी तरह संवेदनशील हैं।
इनके रागदरबारी भी इतने भयंकर कांड को दबाते रहे और मोमबत्तियां लेकर निकलने वाले लोगों की मोमबत्तियों से धुआं निकल रहा है।
ये जो अवार्ड वापसी गैंग थी, मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि अलवर की बेटी के साथ बलात्कार होने पर भी आपकी गैंग चुप क्यों बैठी है: पीएम मोदी #DeshKeDilMeiModipic.twitter.com/07M5F3MUS4
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने मंच से बसपा-सपा के कई हमलों का जवाब भी दिया। उन्होंने कहा “जब भी देश में महामिलावटी सरकार होती है तो वो राष्ट्रीय सुरक्षा को भी ख़तरे में डाल देती है। याद कीजिए जब तीसरे मोर्चे की महामिलावटी सरकार थी, समाजवादी पार्टी मंत्रिमंडल में थी, तब इन्होंने देश का क्या हाल कर दिया था?” उन्होंने कहा कि इन महामिलावटी सरकार ने हमारे पूरे खूफ़िया तंत्र को दीमक लगा दिया था, खोखला कर दिया था, बर्बाद कर दिया था। इसका ख़ामियाज़ा देश को लंबे समय तक भुगतना पड़ा था।
अपने संबोधन में उन्होंने जनता से कहा कि विकास और राष्ट्र को लेकर हमारी भावना मज़बूत रहे इसके लिए दिल्ली में मज़बूत सरकार फिर से बनानी है, इसलिए हर बूथ पर आपको कमल खिलाना है।
विकास और राष्ट्र को लेकर हमारी भावना मजबूत रहे इसके लिए दिल्ली में मजबूत सरकार फिर से बनानी है।
आम आदमी पार्टी की पूर्वी दिल्ली से उम्मीदवार आतिशी के खिलाफ पोस्टरों पर शुरू हुआ विवाद बढ़ता ही जा रहा है। इसी संबंध में अब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भाजपा के पूर्वी दिल्ली के उम्मीदवार गौतम गंभीर को कानूनी नोटिस भेजा है। इस नोटिस में गौतम गंभीर को लिखित रूप में तत्काल माफी माँगने के लिए कहा गया है और उसे अखबारों और सोशल मीडिया में 24 घंटे के भीतर सच और सही तथ्यों के साथ प्रकाशित करने के लिए कहा है।
The notice to Gautam Gambhir seeks immediate apology in writing & asks to publish the same ‘along with true & correct facts’ in newspapers & on social media, within 24 hours. https://t.co/IUUCvczrge
दरअसल, गौतम गंभीर ने कहा था, “मुझे शर्म आती है कि अरविंद केजरीवाल जैसा मेरा सीएम है। श्रीमान आप सीएम हैं और किसी को आपके गंदे दिमाग को साफ करने के लिए आपके अपने ही ‘झाड़ू’ की जरूरत है।” इससे पहले इस मसले पर गौतम गंभीर ने आतिशी, अरविंद केजरीवाल और दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को मानहानि का नोटिस भेजा था। आतिशी ने गंभीर पर उनके निर्वाचन क्षेत्र में उनके खिलाफ ‘आपत्तिजनक और अपमानजक’ भाषा वाली पर्चियाँ बँटवाने का आरोप लगाया था।
Challenger Number 3 to @ArvindKejriwal and @aap. If he can prove that I have anything to do with this pamphlet filth, then I will hang myself in public. Otherwise @ArvindKejriwal should quit politics. Accepted?
— Chowkidar Gautam Gambhir (@GautamGambhir) May 10, 2019
गौतम गंभीर ने आतिशी और आम आदमी पार्टी के आरोपों को खारिज कर दिया था और कहा था कि अगर ये आरोप सही साबित हो गए, तो वो अपनी उम्मीदवारी वापस ले लेंगे। इसके साथ ही गंभीर ने एक ट्वीट करते हुए लिखा, “अगर वो ये साबित कर देते हैं कि उस पर्चे से मेरा कोई लेना-देना है, तो मैं जनता के बीच अपने आप को फाँसी लगा लूँगा। अगर ऐसा नहीं हुआ तो अरविंद केजरीवाल को राजनीति से संन्यास लेना होगा। क्या यह चुनौती स्वीकार है?”