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जोधपुर: रामनवमी पर शोभायात्रा से लौट रहे भक्तों पर पत्थरबाजी, वाहन फूँके, दो लोग गिरफ़्तार

राजस्थान में जोधपुर के सूरसागर क्षेत्र में रामनवमी पर दो गुटों के बीच तनाव इतना बढ़ गया कि शोभायात्रा से लौट रहे लोगों पर एक समुदाय के लोगों ने पथराव किया। घटना शनिवार (13 अप्रैल) की है जहाँ इस मामले को शांत कराने की कोशिश में दो पुलिसकर्मी समेत पाँच लोग भी घायल हो गए। ख़बर यह भी है कि पथराव के बाद समुदाय विशेष के लोगों ने दो वाहनों को आग भी लगा दी।

दरअसल, सूरसागर क्षेत्र के व्यापारियों के मोहल्ले में दो दिन पहले किसी बात को लेकर कुछ युवकों में आपसी बहस हो गई थी। यह बहस इतनी बढ़ गई कि विवाद साम्प्रदायिक झगड़े में तब्दील हो गया। विवाद बढ़ता देख वहाँ मौजूद कुछ लोगों ने मामले को शांत करा दिया लेकिन रामनवमी के मौके पर शोभायात्रा में हिस्सा लेने वाले लोग जब अपने घर लौट रहे थे, तभी उन पर कुछ लोगों ने अपनी छतों पर से पत्थर बरसाने शुरू कर दिए। अचानक पत्थरों की बौछार से शोभायात्रा में शामिल लोगों में अफ़रा-तफ़री का माहौल बन गया। इसी अफ़रा-तफ़री में कुछ लोग गंभीर रूप से घायल भी हो गए।

थोड़ी देर के बाद दोनों समुदाय के बीच जमकर पत्थरबाजी हुई जिसके बाद मामले को शांत कराने पुलिस मौक़े पर पहुँची। पहले तो पुलिस ने स्थिति पर काबू पाने के लिए वहाँ उपस्थित भीड़ को खदेड़ा। उसके बाद जो लोग छत से पथराव कर रहे थे उन्होंने पुलिस पर भी पथराव करना शुरू कर दिया। इससे दो पुलिसकर्मियों को गंभीर चोटें आईं।

बिगड़ती स्थिति पर क़ाबू पाने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल के साथ पुलिस कमिश्नर बीजू जार्ज जोसफ ख़ुद घटना स्थल पर पहुँचे। पुलिस ने पथराव कर रहे दो लोगों को हिरासत में लिया। हिरासत के विरोध में आए लोगों को पुलिस ने एक तरफ खदेड़ दिया। फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। दोनों गुटों के लोगों में आपसी विवाद अभी भी जारी है।

झारखंड में रामनवमी जुलूस पर डेढ़ घंटे तक पत्थरबाजी, नरुल्लाह को पुलिस ने किया गिरफ्तार

शनिवार (अप्रैल 13, 2019) को रामनवमी के उत्सव पर झारखंड में दो जगह तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई। रजरप्पा थाना क्षेत्र के दुलमी प्रखंड के गाँव सिकनी और कसमार थाना क्षेत्र के कमलापुर में रामनवमी का जुलूस निकालने के दौरान झड़प हो गई

सिकनी गाँव में जुलूस निकालने के दौरान एक समुदाय विशेष द्वारा विरोध किए जाने के बाद दोनों समुदायों के बीच झड़प हुई और फिर पत्थरबाजी भी होने लगी। इस पथराव की वजह से जुलूस में शामिल लोगों के अलावा कई अधिकारियों को भी चोटें आई है। घटना के बाद सिकनी गाँव में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी दोनों पक्षों के लोगों को समझाने में जुटे हुए हैं। देर शाम तक दोनों पक्षों के बीच तना-तनी का माहौल बना रहा। घटना स्थल पर बड़ी संख्या में पुलिसबल को तैनात किया गया है।

जुलूस में शामिल लोगों के मुताबिक, वे लोग तय रास्ते से ही रामनवमी का जुलूस गाँव में घुमा रहे थे। मगर इसी दौरान पहले से तैयार एक पक्ष के लोगों ने अपनी छतों से जुलूस पर पथराव करना शुरू कर दिया। इस पथराव में जुलूस में शामिल कई लोग घायल हो गए। इसके बाद जुलूस में शामिल लोगों ने भी पत्थर चलाना शुरू कर दिया। जुलूस के साथ मौजूद पुलिस अधिकारियों ने स्थिति को अनियंत्रित होता देख तत्काल इसकी सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को दी। सूचना पाकर दुलमी सीओ किरण सोरेन, रजरप्पा के एसआई अरुण सिंह समेत भारी संख्या में पुलिस बल पहुँचकर स्थिति को नियंत्रित करने में जुट गए।

लेकिन दोनों तरफ से हो रहे पथराव में कई अधिकारियों समेत पुलिस के जवानों को भी चोटें आई हैं। घायल अधिकारियों में दुलमी के सीओ किरण सोरेन भी शामिल हैं। घटना के बाद रामगढ़ के एसडीओ, एसडीपीओ, मजिस्ट्रेट, के अलावा सैकड़ों पुलिस के जवान पहुँचे। घायलों को तत्काल इलाज के लिए रामगढ़ के सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

मिली जानकारी के अनुसार, मुस्लिम समुदाय के लोगों ने रामनवमी पर निकाले गए जुलूस के ऊपर पत्थरबाजी की थी। जिस जगह से जुलूस निकाला जा रहा था, उस जगह पर मुस्लिम समुदाय के लोगों का भी घर था। गाँववालों का कहना है कि जिस तरीके से जुलूस पर पथराव हुआ है और वहाँ जितनी अधिक में संख्या में पत्थर गिरे हैं, उससे ऐसा लग रहा है कि इसकी साजिश पहले से ही रची गई थी, मोहल्ले के घरों की छतों पर पहले से ही इसके लिए पत्थर जमा किए गए थे। उनका कहना था कि पथराव के दौरान जुलूस में शामिल भीड़ ऐसे फँस गई कि वहाँ से भागने का मौका नहीं लगा।

अधिकांश ग्रामीणों को सिर पर चोट आईं क्योंकि घर की छतों से पथराव किया जा रहा था। जुलूस में हुए पथराव के बाद भगदड़ मच गई। इस बीच अचानक गाँव के बलदेव ठाकुर का पुत्र सुमित कुमार (8 वर्ष) लापता हो गया, जिससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। मगर पुलिस ने दो घंटे के भीतर बच्चे को ढूंढ़कर उसके परिजनों को सौंप दिया। जिसके बाद ग्रामीणों व परिजनों ने राहत की साँस ली। इसके साथ ही पुलिस ने जुलूस के ऊपर पत्थरबाजी करने के आरोप में नरूल्लाह नामक एक शख्स को गिरफ्तार कर लिया है और इस घटना में शामिल बाकी लोगों की छानबीन कर रही है।

वहीं, कसमार थाना क्षेत्र कमलापुर में भी रामनवमी जुलूस के कमलापुर मस्जिद की तरफ से निकलने के दौरान मुस्लिम समुदायों ने इसका विरोध किया, जिसकी वजह से तनाव पैदा हो गया। तनाव बढ़ता देख पुलिस को सूचना दी गई, जिसके बाद कसमार के बीडीओ मोनिया लता, जरीडीह इंस्पेक्टर मो रुस्तम व कसमार थाना प्रभारी राजेंद्र चौधरी कमलापुर पहुँचकर दोनों पक्षों से बातचीत कर मामले को सुलझाया और जुलूस को वहाँ से आगे बढ़ाया।

चुनाव के समय में पत्रलेखन: प्रचार, आचार, चाटुकार और पत्राचार का फलता फूलता व्यवसाय

चुनाव प्रारंभ हो चुके हैं। प्रचार, आचार, चाटुकार और पत्राचार का माहौल खिंचा हुआ है। सोशल मीडिया के ज़माने में पत्र लिखने का दौर चल रहा है। भिन्न-भिन्न प्रकार के प्रत्याशी नामांकित हो चुके हैं। अभिनय में विफल अभिनेता-अभिनेत्रियाँ, अभिनय में सफल नेता-नेत्रियाँ दस्ताने पहन कर, हँसिया उठा कर मैदान में उतर चुके हैं। हम भी सोच रहे थे खड़े हो जाएँ और कोई बिठाने को आए तो उचित मूल्य पर तुरंत बैठ जाएँ। किंतु जैसा कि शरद जोशी जी के समय से व्यंग्यकारों के साथ होता रहा है, पुरस्कार के समय अपना नाम घोषित होने पर भी निरीह व्यंग्यकार आशंकित सा यहाँ-वहाँ तकता रहता है।

एक व्यंग्यकार अपनी महत्वहीनता को लेकर पूर्णतया निश्चिंत रहता है, और सम्मानित करने का हल्का सा भी प्रयास उसे स्वयं के और सम्मानित करने के वाले के प्रति आशंकित कर देता है। बहरहाल इसी उहापोह में ना हम खड़े हुए ना ही आआपा के कुमार विश्वास। जिस देश में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों पर विजयी नेत्राणियों के पति ठसक से प्रधान पति की नामपट्टिका स्कॉर्पियो पर लगा कर घूमते हैं, वहाँ हमने और डॉक्टर साहब दोनों ने सांसद बनने का स्वर्णिम अवसर जाने दिया, जिसके कारण हमें विश्वास है कि हमारा और विश्वास साहब का नाम देश के महान बलिदानियों की सूची मे भगवंत मान जी के बाद अवश्य सम्मिलित होगा।

किंतु इसका अर्थ यह नहीं है कि अब चुनाव में हमारा योगदान स्याही लगी अँगुली के आगे कुछ नहीं रहा है। आधुनिक चुनाव के तीन स्तंभ, आचार, प्रचार और चाटुकार तो अपने स्वभाव के लिए व्यंग्यकार होने के नाते कठिन है। एक व्यंग्यकार पर आचार की शिष्टता, प्रचार के प्रभावी होने और कुशल चाटुकारिता के लिए निर्भर नहीं हुआ जा सकता है। पार्टी प्रवक्ता बनने में भी दो समस्याएँ थीं कि अव्वल तो व्यंग्यकार को कोई गंभीरता से नहीं लेता, दूसरे स्टूडियो की हिंसा के लिए इस लेखक की आयु उपयुक्त नहीं है। जो लोग ईवीएम पूर्व भारत में बूथ कैप्चरिंग जैसे वीर-सुलभ कार्य करते थे वे अब प्रवक्ता हो गए हैं और इस आयु में ऐसा ख़तरनाक व्यवसाय उचित नहीं होगा। किंतु जैसा हर विफल व्यक्ति को उत्साहित करने के लिए परंपरागत रूप से कहा जाता है, एक द्वार बंद होता है तो ऊपरवाला दूसरा द्वार खोलता है। इसी प्रक्रिया में प्रभु ने ऐसा मार्ग खोला है जो इस लेखक के स्तर, सामर्थ्य और औकात के अनुरूप है।

अचानक ही मेघदूतम के यक्ष की आत्मा समस्त देशवासियों के हृदय में उतर आई है। सब लोग एक दूसरे को पत्र लिख रहे हैं। सौ लोग एक दल को वोट देने से मना करते हैं तो दो सौ वोट देने के लिए लिखते हैं। परसाईं जी बुद्धिजीवियों के विषय में लिखते हैं कि बुद्धिजीवी हवा में उड़ते हैं, पर जब ज़मीन पर सोते हैं, तो टांगें ऊपर करके– इस विश्वास और दंभ के साथ, कि आसमान गिरेगा तो पाँवों पर थाम लूंगा। सो बुद्धिजीवी एक दूसरे को पत्र लिख कर आकाश को गिरने से रोककर उसी प्रकार आश्वस्त हैं जैसे नेहरू जी अंग्रेजी में ट्रिस्ट विद मिडनाईट का भाषण दे कर हो गए थे और भारतीय पत्नियाँ पतियों को आदर्श पुरूष होने का आदेश दे कर संतुष्ट हो जाती हैं। अब सेवानिवृत्त सैनिकों ने भी कथित रूप से राष्ट्रपति को पत्र लिखा है। वरिष्ठ अफ़सरों ने इस पत्र को झूठा बताया है।

अपने को उससे मतलब नहीं है। अपना उद्देश्य मूलतः व्यावसायिक हैं। सनद रहे कि लेखक कुशल पत्रलेखक है। युवावस्था मे लेखक के मित्र रहे थे, जिन्हें प्यार करने वाले और उधार देने वाले स्नेहपूर्वक रामू कह कर पुकारते थे। लेखन और धज मे राग दरबारी के रूप्पन बाबू से प्रभावित मित्र रामू लेखक की पत्रलेखन की अंतर्निहित प्रतिभा के साक्षी रहे हैं। जब उन्होंने इंजीनियरिंग के दिनों में संभावित प्रेमिका को प्रेमपत्र लिखवाया था, लेखक ने पत्र को थोड़ा सरल करने का सुझाव दिया था। किंतु साहित्य प्रेमी रामू ने सुझाव नकार कर, अपने हृदय पर दो बार मुक्का मार कर कहा, “नहीं भाई, भारी ही रखो, यहाँ पर लगना चाहिए।” कन्या ने पत्र पढ़ते ही कुशल समीक्षक की भाँति आपके प्रिय लेखक को अपराधी घोषित किया। उस पत्र के परिणामस्वरूप रामू तत्परता से कन्या के भ्राता नियुक्त हुए और कालांतर में उस कन्या के विवाह में बारातियों पर इत्र छिड़कते देखे गए।

विरोधी इसे पत्रलेखक की विफलता मानेंगे किंतु यह पत्र की सफलता ही थी कि संभावित प्रेमिका भाषा से लेखक पहचान गई और प्रेम में परित्यक्त होकर रामू जी को माता पिता का आज्ञाकारी, होनहार पुत्र होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। भिन्न गुट, समूह और संगठनों से निवेदन है कि लेखक की इस प्रतिभा का संज्ञान लें। सेना ने, कलाकारों ने पत्र और प्रतिपत्र लिख कर भूमिका बना दी हैं। अब समय आ गया है कि राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम सड़कों के राजनीतिकरण के विरोध में, सड़क मज़दूर संगठन अधिनियम के विरोध में, पेट्रोलियम संस्थान उज्जवला योजना के राजनीतिकरण के विरोध में, भारतीय रेलवे रेल आधुनिकीकरण के राजनीतिकरण के विरोध में पत्र लिखे। मेरा निवेदन यह है कि यहाँ प्रभावशाली पत्र उचित मूल्य पर लिखे जाते हैं। भारत की तमाम टिटिहरियों से निवेदन है कि लेखक के पत्रों की सहायता रियायती मूल्यों पर प्राप्त कर के इस चुनाव मे आसमान को गिरने से रोकें। वर्तमान पीढ़ी का कर्तव्य है कि पत्रलेखन द्वारा राष्ट्र रक्षा के इस पुनीत प्रयास को बल दें और बेरोज़गार लेखकों को धनार्जन का अवसर दें।

कॉन्गो में भारतीय मृतक के गरीब परिजनों की सहायता के लिए सुषमा स्वराज ने बढ़ाया हाथ

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज विदेश में रह रहे भारतीयों की कई बार मदद कर चुकी हैं। ऐसे कई मौके सामने आ चुके हैं जब विदेश में रह रहे भारतीयों ने ट्वीट कर उनसे मदद माँगी है और सुषमा स्वराज ने उनकी मदद की है। ऐसा ही एक मामला फिर सामने आया है। इस बार अफ्रीकी देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कॉन्गो से एक भारतीय डॉ प्रीती यादव ने मुश्किल में फंसे दूसरे भारतीय परिवार की मदद की माँग की है

प्रीती यादव ने अपने ट्वीट में लिखा कि डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कॉन्गो के किन्शासा शहर में एक भारतीय सुनील शर्मा की दो दिन पहले ही मौत हो गई। सुनील Du Cinquantanaire अस्पताल में लैब टेक्नीशियन के तौर पर काम करते थे। प्रीती ने कहा कि सुनील शर्मा के परिवार के पास पैसे नहीं हैं कि वो उनके शव को भारत ला सकें। क्या वो इस मामले में उनकी तरफ से मदद की उम्मीद कर सकती हैं? हमेशा की तरह इस बार भी सुषमा स्वराज ने मदद का आश्वासन दिया और कहा कि हम अपने खर्च पर शव को कांगो से भारत लाएँगे। इसके साथ ही उन्होंने वहाँ के भारतीय दूतावास से भी संज्ञान लेने को कहा है।

इससे पहले शनिवार (अप्रैल 13, 2019) को जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला ने सुषमा स्वराज से एक कश्मीरी छात्रा के शव को बांग्लादेश से वापस भारत लाने के लिए मदद की अपील की थी। जिसके बाद सुषमा स्वराज ने इस मामले में ढाका में भारतीय उच्चायुक्त को मामले में पीड़ित परिवार की मदद के लिए कहा था और भारतीय उच्चायोग ने कहा था कि हमारे अधिकारी छात्रा के परिवार के संपर्क में है और ढाका और बांग्लादेश के अधिकारियों के साथ मिलकर छात्रा के शव को भारत भेजने की कोशिश में है।

गौरतलब है कि पिछले दिनों एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सुषमा स्वराज से मदद माँगी थी। दरअसल, 16 मार्च 2019 को न्यूज़ीलैंड में हुए हमले में जो लोग घायल हुए, उसमें हैदराबाद निवासी इक़बाल जहाँगीर के भाई अहमद जहाँगीर भी शामिल थे। हमले की खबर सुनने के बाद इकबाल अपने भाई के परिवार को सहारा देने के लिए न्यूज़ीलैंड जाना चाहते थे। इसके लिए ओवैसी ने ट्वीटर के ज़रिए सुषमा स्वराज से माँग की थी कि इकबाल के न्यूजीलैंड जाने के लिए जरूरी प्रबंधन करा दें। इस ट्वीट के कुछ देर बाद ही, इस मामले का अपडेट देने के लिए ओवैसी ने एक और ट्वीट किया। इसमें उन्होंने कहा कि वो सुषमा स्वराज का धन्यवाद करते हैं कि उन्होंने खुद उन्हें अहमद के परिवार वालों को समय से न्यूज़ीलैंड पहुँचाने संबंधी प्रयासों से अवगत कराया।

बिहार का गुमनाम जलियाँवाला: नेहरू ‘तारापुर शहीद दिवस’ की घोषणा करके भी मुकर गए, क्या थी वजह?

आपके योगदान कितने याद किए जाएँगे और कितने भुला दिए जाएँगे ये इस पर भी निर्भर करता है कि आपने उसे खुद कितना याद रखा है। नेताओं, स्थानीय विधायकों, कॉन्ग्रेस जैसों का पाप इसमें फिर भी कम गिना जाना चाहिए। असली कसूरवार है रीढ़विहीन, गफलत में डूबी, जातिवादी, पलायन के शौक़ीन, उजड्ड और अन्य कई संबोधनों से नवाजने योग्य बिहारी जनता। क्यों ? क्योंकि इन्हें अशर्फी मंडल याद नहीं, बसंत धानुक पता नहीं, शीतल और सांता पासी याद नहीं। ये सिर्फ चंद नाम हैं।

इनके अलावा थे रामेश्वर मंडल, विश्वनाथ सिंह, महिपाल सिंह, सुकुल सोनार, सिंहेश्वर राजहंस, बद्री मंडल, गैबी सिंह, चंडी महतो, झोंटी झा। इनमें से किसी नाम का जिक्र सुना है? नहीं सुना तो बता दें कि ये वो 13 लोग थे, जिनके शव की शिनाख्त हुई थी- इनके अलावा 31 शव ऐसे थे जिनकी शिनाख्त नहीं हो पाई थी। जो गंगा में बह गए, उनका कोई हिसाब नहीं है।

अंग्रेज कलेक्टर ई. ओली के आदेश पर एक निहत्थी भीड़ पर एस.पी. डब्ल्यू. फ्लैग ने गोलियाँ चलवा दी थीं। नहीं-नहीं, जलियाँवाला की बात नहीं कर रहे भाई! वहाँ जनरल डायर था, और वहाँ लाशें बहाने के लिए गंगा कहाँ होती है वहाँ? ये घटना जलियाँवाला बाग़ के बाद की है। 15 फ़रवरी 1932 की इस घटना में मारे गए ज्यादातर लोगों को लापता घोषित कर दिया गया था। बिलकुल जलियाँवाला की तरह बेरहमी से मारे गए लोगों का आज जिक्र करना भी किसी को जरूरी नहीं लगता।

मुंगेर आज बिहार का एक जिला है- पहले बंगाल था। कई बार जिन क्रांतिकारियों, लेखकों को आप बंगाल का जानते-पढ़ते हैं वो इस वजह से भी है कि बिहार को बने हुए ही सौ साल हुए हैं।

पुराने दौर में बंगाल माने जाने वाले मुंगेर, दरभंगा, भागलपुर जैसे इलाकों से अहिंसावादियों ने ही नहीं बल्कि कई बार सशस्त्र क्रांतिकारियों ने भी फिरंगियों की नाक में दम किया था। हालाँकि, कोई भी कॉन्ग्रेसी नेता 1920 से 1947 के दौर के स्वतंत्रता संग्राम में नहीं मारा गया, लेकिन आम जन ने अक्सर पुलिस की गोलियाँ झेली थी।

फ़रवरी 1932 में मुंगेर के शंभूगंज थाने में आने वाले सुपोर, जमुआ में एक मीटिंग हो रही थी। श्री भवन की इसी मीटिंग में तारापुर थाने पर तिरंगा फहराने की बात रखी गई। मुंगेर का यह इलाका पहाड़ी है। महाभारत कालीन कर्ण का क्षेत्र अंग देश माने जाने वाले इस इलाके में देवधरा पहाड़ और ढोल पहाड़ी जैसे इलाके हैं, जो अपनी बनावट और जंगल की वजह से अक्सर क्रांतिकारियों को सुरक्षा देते थे। गंगा के दूसरे पार बिहपुर से लेकर बाँका और देवघर तक के इलाकों में क्रांतिकारियों का प्रभाव काफी ज्यादा था।

15 फ़रवरी की सुबह होते होते तारापुर में भीड़ जमा होने लगी। दोपहर में जब ये लोग झंडे के साथ आगे बढे तो अंग्रेज कलेक्टर ई. ओली के आदेश पर एक निहत्थी भीड़ पर फिरंगी एस.पी. डब्ल्यू. फ़्लैग ने गोलियाँ चलवानी शुरू कर दीं। गोलियाँ चलती रहीं, पर लोग बढ़ते रहे और आखिर झंडा फहरा दिया गया। आश्चर्यजनक था कि गोलियाँ चलने पर भी लोगों ने बढ़ना नहीं छोड़ा ! बाद में और कुमुक आने पर पुलिस ने दोबारा थाने को अपने कब्जे में लिया।

तथाकथित “पंडित”, पूर्व प्रधानमंत्री नेहरू ने इस घटना पर 1942 की अपनी तारापुर यात्रा में 34 शहीदों का उल्लेख किया था, और कहा था कि शहीदों के चेहरे पर लोगों के देखते-ही-देखते कालिख मल दी गई थी। बाद में कॉन्ग्रेस ने 15 फ़रवरी को “तारापुर शहीद दिवस” मनाने का प्रस्ताव पारित कर के इसकी घोषणा भी की थी। समस्या यह थी कि इसमें केवल पासी, धानुक, मंडल और महतो ही नहीं शहीद हुए थे- मरने वालों में झा और सिंह नामधारी भी थे। तो दलहित चिंतकों के लिए इस मामले में रस नहीं होता। इसलिए यह नाम भी गुमनाम ही रह गए, और मुंगेर भी नेताओं के लिए जलियाँवाला जितना जरूरी नहीं बना।

बाकी तो जिस जनता ने भी अपने ही बलिदानियों को भुला दिया, उस जनता को भी शत-शत नमन!

हम रैली में कुर्सियाँ किराए पर लाते हैं और कॉन्ग्रेस वाले नेताओं को किराए पर: देवेंद्र फडणवीस

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नांदेड़ में एक चुनावी सभा में MNS और कॉन्ग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि नेताओं को किराए पर लाने का श्रेय कॉन्ग्रेस के अशोक चव्हाण को जाता है, वे उन नेताओं को MNS (महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना) से ​​ला रहे हैं। MNS पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि MNS पहले ‘महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना’ थी फिर MNS ‘मतदाता नहीं सेना’ (Matdata Nahi Sena) बन गया और अब यह UNS “उम्मीदवार नहीं सेना” (Ummidwar Nahi Sena) बन गया है।

फडणवीस ने कॉन्ग्रेस को घेरते हुए कहा कि प्रदेश में बीजेपी-शिवसेना गठबंधन के पक्ष में माहौल ऐसा है कि कॉन्ग्रेस के अशोक चव्हाण लोगों को रैलियों में लाने के लिए किराया दे रहे हैं। हम किराए पर मंच और कुर्सियाँ ​​लाते हैं, लेकिन अशोक चव्हाण की शुक्रवार की रैली में नेताओं को किराए पर लाना पड़ रहा है। पूरा माहौल NDA के पक्ष में है। महाराष्ट्र में NDA भारी सीटों से जीत दर्ज करेगी।

किस तरह हर दिन हम मौत की तरफ बढ़ रहे हैं, वजह प्रदूषण: रामनवमी पर पर्यावरण बचाने की सार्थक पहल

अप्रैल का महीना अपने कई खूबियों के कारण जाना जाता है। इनमे से एक है अप्रैल के महीने में अपने रिश्तेदारों और दोस्तों को फूल (उल्लू) बनाना और दूसरी विषेशता है अप्रैल के महीने से मौसम का गर्म होना। अप्रैल के महीने में रामनवमी के अवसर पर अप्रैलकूल के नाम से एक कैम्पेन की शुरुआत की गई है।  जिसका मुख्य उद्देश्य अप्रैल के गर्म होते महीने को कूल बनाना है जिससे हमारा वातावरण और हमारी धरती कूल रह सके। जब हमारी धरती कूल रहेगी तभी इसपे रहने वाले जीव भी कूल रह सकेंगे।

रामनवमी के अवसर पर शुरू किए गए इस अप्रैलकूल कैम्पेन के तहत लोगों से अपील है  एक पौधा लगाने की और सोशल मीडिया (फेसबुक, व्हाट्सप्प, इंस्टाग्राम) पर अपने लगाए पौधे कि तस्वीर के साथ aprilcool टैग लाइन लगाकर अपने दोस्तों एवं रिश्तेदारों से शेयर करना की,  ठीक वैसे ही जैसे आप होली दिवाली या अन्य त्योहारों पर तस्वीरें शेयर करके करते हैं।

अप्रैलकूल कैम्पेन का महत्व इस मायने में भी बढ़ जाता है कि आज हमारा वातावरण इतना प्रदूषित हो गया है कि हम खुल कर साँस भी नहीं ले पाते, ऐसा लगता है कि हमारे घरों में विषैली गैसों की एक चादर फैली है जिसमे हम सभी जीवन जीने के लिए मजबूर हैं। हम इंसानो का पूरा जीवन पूरी तरह से प्रकृति पर आश्रित है लेकिन हमें जीवन देने वाले वातावरण से हम सौतेला व्यवहार करते है जिसका परिणाम अब लगातार घातक साबित होता जा रहा है।

ऐसे माहौल में बागवानी फाउंडेशन की यह मुहीम राहत की खबर है। खासतौर से बड़े शहरों में जहाँ पेड़ लगाने की उतनी सहूलियत नहीं है। वहाँ यह सवाल लाज़मी है कि इतनी गर्मी में हम पौधे कैसे लगा सकते हैं वह तो गर्मी में मर जाएँगे। इस सन्दर्भ में बागवानी फाउंडेशन ने जवाब दिया है कि हम अभी इंडोर प्लांट्स लगा सकते हैं जो घर के अंदर रखे जाते हैं। ये पौधे बेस्ट एयर प्यूरीफायर भी होते हैं। इंडोर लगाने के लिए कुछ बेस्ट प्लांट्स हैं- मनी प्लांट, पीस लिली, स्नेक प्लांट, बम्बू पाम, स्पाइडर प्लांट्स इत्यादि।  ये पौधे न सिर्फ हवा को स्वच्छ करने में अन्य पौधों से ज्यादा सक्षम है, बल्कि यह हमारे घर की सुन्दरता को भी बढ़ाते हैं।

कहते हैं कि सम्भावनाओ से भरी ज़िन्दगी की डोर आती-जाती साँसों पर टिकी होती है और इन सांसों का आधार है, हरा-भरा वातावरण यानि  पर्यावरण। साँसों के माध्यम से हम जो कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं वो पौधे ग्रहण कर लेते हैं और उसके बदले में वो हमें देते हैं बेशकीमती ऑक्सीज़न।

एक अनुमान के अनुसार एक स्वस्थ पेड़ से 260 पौंड ऑक्सीज़न हर साल हमें मिलता है। इस तरह के दो पेड़ दो से तीन लोगों की ऑक्सीज़न की जरूरतों को पूरा करते हैं। यानी  जैसे-जैसे आबादी बढ़ रही है वैसे-वैसे हमारे लिए पौधे और बेहतर पर्यावरण की आवश्यकता भी बढ़ गयी है। हम सब पर्यावरण को अपने-अपने ढंग से जानते और समझते हैं। पर्यावरण यानि जो प्राकृतिक रूप से हमारे चारों तरफ है और पृथ्वी पर हमारे रोजमर्रा के जीवन को प्रभावित करता है।

हवा, जिसमें हम हर पल साँस लेते हैं। पानी, जिसे हम अपनी दिनचर्या में इस्तेमाल करते हैं। पौधे, जानवर और सभी जीवित चीजें सब पर्यावरण पर ही आश्रित हैं। स्वस्थ वातावरण प्रकृतिक संतुलन बनाए रखता है और साथ ही साथ पृथ्वी पर सभी जीवित चीजों को बढ़ने और विकसित होने में मदद करता है।

पर्यावरण मुख्य रूप से वायुमंडल, जलमंडल, स्थलमंडल और जीवमण्डल से मिलकर बना है। पर्यावरण हमारे लिए कई तरह से उपयोगी है। इससे हमें उद्योगों के लिए कच्चा माल मिलता है, नई दवाइयों के निर्माण और मेडिकल रिसर्च के लिए कई प्रकार की उपयोगी चीजें मिलती हैं। सौंदर्य और मनोरंजन जैसे जरूरतों को भी पूरा करने के लिए पर्यावरण कई स्तरों पर हमारे लिए सहायक है। पर्यावरण हमारी शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विकास में भी अहम् है। गौरवशाली परम्परा और अनूठी संस्कृति के देश भारत में पर्यावरण को  विशेष महत्व दिया गया है।

प्राचीन काल से ही भारतीय संस्कृति में पर्यावरण के अनेक घटकों जैसे वृक्षों को पूज्य मानकर उन्हें पूजा जाता है। जल, वायु ,अग्नि को भी पवित्र मानकर उनकी पूजा की जाती है। समुद्र और नदी को भी आराधना योग्य माना गया है। धरती को भी माँ का अमूल्य स्थान दिया गया है।

लम्बे समय से ही भारत में पर्यावरण के अलग अलग रूपों को उनके विशेष गुणों के कारण खास स्थान दिया गया है। समय के साथ पर्यावरण का संतुलन गड़बड़ा सा गया है। पर्यावरण के इस बिगड़ते स्वरुप के पीछे ढेर सारे कारण है। आधुनिक होते समाज में पर्यावरण की समस्या विकासशील राष्ट्रों की ही नहीं बल्कि पूरे विश्व की समस्या बन गयी है। सभी ऋतुएँ अपने अस्तित्व को खोती नज़र आ रही है। समय पर ठण्ड नहीं पड़ना, गर्मी में बहुत ज्यादा गर्मी, वर्षा का समय पर न आना या कहीं-कहीं बेमौसम अधिक वर्षा होना, कहीं अकाल की स्थिति पैदा होना। ये सब पर्यावरण में बदलाव का ही नतीजा है।  पर्यावरणीय समस्याओं से मनुष्य और दूसरे जीवधारियों को अपना सामान्य जीवन जीने में कठिनाई होने लगती है और कई बार जीवन-मरण का सवाल पैदा हो जाता है।

प्रदूषण भी एक पर्यावरणीय समस्या है जो आज एक विश्व-व्यापी समस्या बन गयी है। पशु-पक्षी, पेड़-पौधे और इंसान सब उसकी चपेट में हैं। कारखानों बिजली घरों और मोटर वाहनों में खनिज ईंधनों का अंधाधुंध प्रयोग होता है, इनके जलने पर कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड आदि खतरनाक गैसें निकलती हैं जिससे धरती का तापमान बढ़ रहा है और मौसम में असामान्य बदलाव हो रहा है।

पिछले सौ सालों में वायुमंडल का तापमान 3 से 6 डिग्री सेल्सियस बढ़ा है। लगातार बढ़ते तापमान से दोनों ध्रुवों पर बर्फ गलने लगेगी जिससे कई देशों की डूबने की सम्भावना बढ़ गयी है। इसके आलावा कुछ क्षेत्रों में सुखा पड़ेगा तो कई जगहों पर तूफ़ान आएगा और कहीं भरी वर्षा हो सकती है।

उद्योगों से निकलने वाली विषैली गैसों से वायु प्रदूषण कई गुना बढ़ गया है जिससे पर्यावरण और जीव-जंतुओं को भारी नुकसान पहुँच रहा है। एक अध्यन के अनुसार वायु प्रदुषण से केवल 36 शहरों में प्रतिवर्ष 52,7739 लोगों की अकाल मृत्यु हो जाती है। कोलकता , कानपुर तथा हैदराबाद में वायु प्रदूषण से होने वाली मृत्यु पिछले 3-4 सालों में दुगुनी हो गई है। एक अनुमान के अनुसार हमारे देश में प्रदूषण के कारण हर दिन करीब 150 लोग मरते हैं और सैकड़ों लोगों को फेफड़े और हृदय की जानलेवा बीमारी हो जाती है।

आपको जानकर आश्चर्य होगा की हवाई जहाज से सबसे अधिक प्रदुषण होता है। 46 हजार हेक्टेयर में फैले जंगल से जितना ऑक्सीजन निकलता है उतना एक दिन में एक हवाई जहाज द्वारा कार्बन-डाइऑक्साइड का उत्सर्जन वायुमंडल में हो जाता है। कोयला डीजल, पेट्रोल के जलने से कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा में दिनों-दिन वृद्धि हो रही है जिसके कारण रोज़ एक प्रजाति लुप्त हो रही है।

औद्योगिकीकरण और शहरीकरण से जुडी एक और समस्या है जल-प्रदूषण। भारत में ऐसी कई नदियाँ हैं जिनका जल अब अशुद्ध हो गया है। दूषित पानी पिने से ब्लड कैंसर, त्वचा कैंसर, हड्डी रोग , हृदय एवं गुर्दों की तकलीफें और पेट की अनेक बीमारियाँ हो रही हैं जिनसे हमारे देश में हजारों लोग हर साल मर रहे हैं। एक और पर्यावरणीय समस्या है वनों की कटाई। पूरे विश्व में प्रतिवर्ष 1.1 करोड़ हेक्टेयर वन काटा जा रहा है। अकेले भारत में प्रतिवर्ष 10 लाख हेक्टेयर वन कटा जा रहा है। वनों के विनाश के कारण वन्य जीव लुप्त हो रहे हैं।

पर्यावरण के बिगड़ते स्वरुप के पीछे एक और अहम् कारण हैं, रासायनिक उर्वरकों का जरुरत से ज्यादा प्रयोग। इसके लगातार प्रयोग से भूमि की उर्वरा-शक्ति लगातार घट रही है वहीं  कई बार तो ये भी देखा गया है कि इनके लगातार प्रयोग से भूमि बंजर भी हो जाती है। धरती सीमित है और जब भूमि ही अपनी उर्वरा शक्ति खो देगी तब भला हम हरे-भरे वातावरण की कल्पना कैसे कर सकते हैं। पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन ने पूरी दुनिया को प्रभावित किया हुआ है।

इस समस्या से उबरने के लिए पूरी दुनिया को एक होने की जरुरत है, हम सब को अपने अपने स्तर पर कोशिश करते रहने की जरुरत है। हर वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाने के पीछे भी यही मकसद है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक किया जा सके। लेकिन साल के किसी एक दिन को इस तरह की दिवस मनाकर हम इस विकराल समस्या को नही सुलझा सकते, इसके लिए पूरे वर्ष सतत प्रयास करते रहने की जरूरत है।

इसी को ध्यान में रखते हुए टीम बागवानी के डेडिकेटेड टीम ने अप्रैल में अप्रैल कूल से शुरुआत कर 5 जून तक लोगों में पेड़ लगाने के प्रति जागरूकता फ़ैलाने की मुहीम को तेज करने का निर्णय लिया है।

दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रौढ़ शिक्षा विभाग के प्रांगण में इस टीम ने कई पौधे एक साथ लगाए और इनको एक खूबसूरत स्वरूप देने की पहल की। कुमार राम और विशाल कुमार गुप्ता नाम के इन दो युवकों ने इससे पहले भी कई दफा ऐसे पौधारोपण कार्यक्रम करके कई शिक्षकों और दूसरे युवाओं को प्रेरित करने का काम किया है। ऐसी सकारात्मक ऊर्जा से सराबोर युवाओं को सतत ऐसे कार्य करते रहने के लिए हम सभी को इन्हें प्रोत्साहित करने की जरूरत है।

कुछ उपायों को अमल में लाकर हम पर्यावरण के स्वरुप को बिगड़ने से बचा सकते हैं। युवा वर्ग आगे आकर सकारात्मक योगदान दे सकते हैं। सही मायनो में गो-ग्रीन कहने के लिए ही नही बल्कि करने में भी आसान है। आज के समय में पर्यावरण का ध्यान रखना हर किसी की जिम्मेदारी और अधिकार होना चाहिए और खासकर आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्यावरण का संरक्षण बहुत जरुरी है तो आइए एक शपथ लें की हम सब अपने अपने स्तर से पर्यावरण को बचाने की पूरी कोशिश करेंगे जिससे बनेगा हरा भरा वातावरण और खुशहाल पर्यावरण।

इस रामनवमी के अवसर पर फिलहाल अप्रैलकूल कैंपेन से जुड़े और अपने दोस्तों, रिश्तेदारों को भी जोड़ें क्योंकि कोई अकेला हमारे पर्यावरण को स्वच्छ एवं स्वस्थ नहीं कर सकता। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए सभी का योगदान अनिवार्य है।

“धरती हो रही गर्म,
सासें होने लगी कम
आओ पेड़ लगाए हम……”      

J&K: कुरैशी वर्षों करता रहा बेटी का रेप, पीड़िता ने दे दी जान; चाचा अयूब भी करता है अपनी बेटी का रेप

कश्मीर घाटी के बांदीपोरा से एक वहशी पिता की शर्मनाक वारदात की कहानी सामने आयी है। बांदीपोरा के चल्लीवान गोजारपति आरामबाग एरिया में शनिवार (अप्रैल 13, 2019) को लड़की ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली। बताया जा रहा है कि लड़की ने पिता वलायत कुरैशी द्वारा कई सालों से लगातार बलात्कार किए जाने पर शनिवार को आत्महत्या कर ली।

मृतक लड़की की बहन ने बताया कि उसके पिता पिछले कई सालों से उसके साथ बलात्कार कर रहे थे पर पिता द्वारा जान से मारे जाने की धमकी के डर से वह किसी को अपनी आपबीती नहीं बता पा रही थी। पुलिस ने बताया कि पीड़ित लड़की ने जहर खाकर आत्महत्या की। लड़की को अस्पताल में भरती कराया गया, लेकिन बचाया नहीं जा सका। आरोपित पिता (वलायत कुरैशी) को गिरफ्तार कर लिया गया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार पीड़ित लड़की का साथ उसके पिता वलायत कुरैशी अपनी बेटी के साथ कई सालों से लगातार बलात्कार कर रहा था। जिसकी वजह से वह मानसिक रूप से परेशान थी। लड़की को जब एहसास हुआ कि उसका पिता मानने वाला नहीं है, उसने छत से कूदकर जान देने की कोशिश की, लेकिन पड़ोसियों ने देख लिया और बचा लिया था। इसके बाद लड़की ने 2 दिन पहले थाने में रिपोर्ट भी दर्ज कराने की कोशिश की थी, लेकिन उसकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। इन सभी घटनाक्रमों के बाद उसने उसने जहर खाकर खुदकुशी कर लेना ही बेहतर समझा।

पुलिस ने लड़की की लाश को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस का दावा है कि आरोपित पिता के खिलाफ केस दर्ज कर उसको गिरफ्तार कर लिया गया है। जबकि स्थानीय पड़ोसी उसको फरार बता रहे हैं, इस घटना के बाद पूरे इलाके में जबरदस्त रोष है और वो आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग कर रहे हैं।

चाचा अयूब भी करता है अपनी बेटी से बलात्कार

पीड़िता की बहन का कहना है कि उसके चाचा अयूब कुरैशी भी अपनी बेटी के साथ बलात्कार करते थे। उसने कहा, “जब मेरे पिता को मेरे चाचा के बारे में पता चला, तो उन्होंने अपनी बेटी के साथ भी ऐसा ही करना शुरू कर दिया। वह पिता के सामने गिड़गिड़ाई लेकिन उन्होंने उसे जान से मारने की धमकी दी।”

वेतन ₹69, सुरक्षा का खर्चा ₹156 करोड़: ज़ुकरबर्ग की ‘सादगी’ के क्या कहने

$1 (₹69) का सालाना वेतन लेने वाले फेसबुक के सीईओ मार्क ज़ुकरबर्ग अपनी सुरक्षा पर सवा दो करोड़ डॉलर (₹156 करोड़) से ज्यादा राशि खर्च करते हैं। 2018 में इतनी राशि के खर्च का खुलासा फ़ेसबुक द्वारा हाल में की गई नियामक फाइलिंग में किया गया।

प्राइवेट जेट के लिए ₹18 करोड़, बाकी का ‘बाकी सब’

समाचार एजेंसी रायटर्स में छपी एक खबर के अनुसार $26 लाख (₹18 करोड़) ज़ुकरबर्ग को यात्रा के दौरान प्राइवेट जेटों के प्रयोग पर भत्ते के रूप में दिए गए, जो कि उनकी सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा हैं। बाकी के खर्चे के बारे में केवल इतनी जानकारी मिली है कि वह राशि ज़ुकरबर्ग और उनके परिवार की सुरक्षा के इंतजाम में खर्च हुई है।

2017 के मुकाबले तीन गुना खर्च, तीन साल से ‘$1’ से चल रहा आटा-दाल

पिछले एक साल में ज़ुकरबर्ग की सुरक्षा का खर्च एकाएक लगभग तीन गुना बढ़ गया है। पिछले साल उन्होंने सुरक्षा भत्ते के नाम पर कंपनी से $90 लाख (₹62 करोड़) लिए थे।

हैरानी की बात यह है कि पिछले तीन साल से वह फेसबुक से सीईओ के वेतन के तौर पर केवल $1 (₹69) का सालाना वेतन ले रहे हैं। ऐसे में यह सवाल उठना लाज़मी है कि जिस व्यक्ति को केवल अपनी जान सलामत रखने के लिए ₹150 करोड़ से ज्यादा चाहिए, वह ज़ाहिर तौर पर 70 रुपए में साल भर का खाना-रहना तो नहीं कर रहा होगा। तो बेहतर होगा कि ज़ुकरबर्ग अपने वेतन को ‘सांकेतिक’ कर दूसरे मार्गों से वही पैसा वाहवाही लूटने के बाद लेने की बजाय खुल कर मुनाफ़े में हिस्सा या वेतन लें।

यह सांकेतिक वेतन की virtue signalling कर नैतिक श्रेष्ठता के छद्म प्रतिमान खड़े वही करते हैं जिन्हें बाद में इस ‘कमाई’ को ‘कैश’ कराना होता है।

जब सोनिया गाँधी ने चुनाव में फर्जी कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी को कोर्ट में बताया था ‘टाइपिंग मिस्टेक’

लोकसभा चुनावों के बीच नेताओं की डिग्री और शैक्षणिक योग्यता एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। कॉन्ग्रेस पार्टी प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की डिग्री को लेकर सोशल मीडिया पर कुछ प्रश्न उठाए। इसके बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं का सैलाब उमड़ पड़ा।

सबसे पहली प्रतिक्रिया भाजपा नेता और राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी की ओर से आई। स्वामी ने कॉन्ग्रेस पार्टी अध्यक्ष राहुल गाँधी की ही डिग्री को कटघरे में रखकर कल रात ट्वीट करते हुए लिखा, “बुद्धु (राहुल गाँधी) के कैम्ब्रिज सर्टिफिकेट के मुताबिक उसका नाम रौल विंसी है। उन्होंने एम.फिल की पढ़ाई की है, लेकिन वो नेशनल इकोनॉमिक प्लानिंग एंड पॉलिसी में फेल हो गए थे।”

राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी पहले भी गाँधी परिवार के सदस्यों की शैक्षणिक योग्यता पर सवाल उठाते रहे हैं। इससे पहले स्वामी राहुल गाँधी की मम्मी सोनिया गाँधी की शैक्षणिक योग्यता पर से पर्दा उठा चुके हैं।

सोनिया की लोकसभा सदस्यता समाप्त होने तक आ गई थी बात

साल 2000 की शुरुआत में सुब्रमण्यम स्वामी ने तत्कालीन UPA अध्यक्ष सोनिया गाँधी की डिग्री को लेकर तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष से शिकायत की थी। साथ ही सुप्रीम कोर्ट में गलत जानकारी देने के आधार पर उनकी लोकसभा सदस्यता खत्म करने की गुहार लगाई थी। इसके बाद से सोनिया गाँधी की पढ़ाई और डिग्री को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।

दरअसल, स्वामी ने तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष मनोहर जोशी के पास सोनिया गाँधी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराकर कहा था, “लोकसभा पेज के ‘Who is who’ यानी ‘कौन क्या है’ सेक्शन में लिखा है कि सोनिया गाँधी ने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से अंग्रेजी में डिप्लोमा किया था।

कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी ने बताया था कि सोनिया गाँधी ने वहाँ कभी पढ़ाई नहीं की

स्वामी के मुताबिक उन्होंने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से इस बारे में जानकारी माँगी थी। इसके जवाब में यूनिवर्सिटी ने बताया था कि सोनिया ने वहाँ कभी पढ़ाई ही नहीं की है। स्वामी ने बताया कि जब वह कैम्ब्रिज में लेक्चर देने गए थे, तब उन्होंने सोनिया के बारे में लोगों से पूछा कि वह कैसी स्टूडेंट थीं, तो जवाब में बताया गया कि ऐसी तो यहाँ कोई स्टूडेंट नहीं थीं।

सुब्रमण्यम स्वामी इसी मामले को लेकर वह कैम्ब्रिज अथॉरिटी से एक खत भी लिखवाकर लाए थे। सोनिया गाँधी द्वारा अपनी एजुकेशन को लेकर इलेक्शन एफिडेविट में झूठी जानकारी देने के मामले पर सुब्रमण्यम स्वामी कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी का खत लोकसभा में पेश भी किया था। जब लोकसभा स्पीकर ने सोनिया गाँधी से डिग्री को लेकर सवाल किया तो सोनिया ने इसे ‘टाइपिंग मिस्टेक’ (Typo Error) बताया था। स्वामी ने इस पर व्यंग्य करते हुए कहा था कि ऐसी टाइपिंग मिस्टेक करने वालों को गिनीज बुक में जगह देनी चाहिए।

तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष ने स्वामी की शिकायत पर स्पष्टीकरण के लिए सोनिया गाँधी से पत्राचार किया। उस वक्त सोनिया गाँधी के हवाले से जवाब दिया गया था कि उन्होंने ‘कैम्ब्रिज’ से डिग्री ली है न कि ‘कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी’ से। सोनिया गाँधी का कहना था कि लोकसभा पब्लिकेशन में यूनीवर्सिटी शब्द गलती से छप गया है।

स्मृति ईरानी को लेकर गरमाया है मुद्दा

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के चुनावी हलफनामे में बताई गई शैक्षिक योग्यता को लेकर सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी विपक्ष के निशाने पर है। कॉन्ग्रेस ने स्मृति ईरानी पर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए उनके इस्तीफे की माँग की है। इसके बाद स्वामी ने एक ट्वीट करते हुए कॉन्ग्रेस की बोलती बंद कर डाली जिसमें उन्होंने लिखा, “बुद्धू ने भी अपने नॉमिनेशन फॉर्म में गलत जानकारी देते हुए दावा किया है कि उसके पास एमफिल की डिग्री है। वह प्री-थीसिस एग्जाम में फेल था, इसलिए उसे थीसिस लिखने की इजाजत नहीं मिली। उसे कहो कि अपनी थीसिस पेश करे या फिर एग्जाम के नतीजे के सबूत दिखाए।”

कॉन्ग्रेस स्मृति ईरानी को लगातार निशाने पर रखते हुए उन पर हर तरह के आरोप लगाती नजर आती है। इस पर स्मृति ईरानी ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि भले ही उन्हें कितना भी अपमानित और प्रताड़ित किया जाता रहे, वह अमेठी के लिए और कॉन्ग्रेस के खिलाफ मेहनत से काम करती रहेंगी।

डिग्री के विवाद पर इससे पहले कॉन्ग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, ”समस्या यह नहीं है कि कोई कितना पढ़ा है, लेकिन जब इस देश की प्रजातांत्रिक प्रणाली को धोखा देकर, झूठ बोलकर जनता की आँख में धूल झोंकने की कोशिश की जाती है तो दिक्कत है।” सुरजेवाला अगर प्रजातांत्रिक प्रणाली के प्रति इतने संवेदनशील हैं, तो उन्हें पहले पार्टी अध्यक्ष सोनिया गाँधी जी से कैम्ब्रिज और कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के बीच के अन्तर पर चर्चा करनी चाहिए।