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फैक्ट चेक: क्या पुलवामा आतंकी हमले के बाद पीएम नरेंद्र मोदी उत्तराखंड में फोटो शूट करवा रहे थे?

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफ़िले पर हुए भयानक आतंकवादी हमले के एक हफ्ते बाद, राहुल गाँधी ने एक ट्वीट पोस्ट किया जिसमें दावा किया गया कि हमले के 3 घंटे बाद पीएम नरेंद्र मोदी फोटो शूट में भाग ले रहे थे। कॉन्ग्रेस अध्यक्ष ने 14 फ़रवरी को मोदी की कॉर्बेट नेशनल पार्क की यात्रा की तस्वीरें भी पोस्ट कीं, और एक फोटो में दिखाया गया है कि मोदी एक कैमरामैन द्वारा फोटो खिंचवा रहे हैं।

इसी आरोप को कॉन्ग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने भी उठाया। कल (फ़रवरी 21, 2019) को सुरजेवाला ने दावा किया कि 14 फ़रवरी को 3:10 बजे जिस समय आतंकी हमला हुआ था, नरेंद्र मोदी डिस्कवरी चैनल के कैमरा क्रू के साथ नाव की सवारी का आनंद ले रहे थे। उसके बाद, कॉन्ग्रेस समर्थक सोशल मीडिया पेजेज और कॉन्ग्रेस समर्थकों के द्वारा आरोप-प्रत्यारोप का खेल शुरू हुआ, इस खेल को हवा देने में कॉन्ग्रेस समर्थक कुछ प्रमुख पत्रकार भी शामिल रहें।

यहाँ असली सवाल ये है कि क्या मोदी वास्तव में पुलवामा आतंकी हमले के तीन घंटे बाद तक फोटो शूट करवा रहे थे जैसा कि राहुल गाँधी ने दावा किया? आइए उन सभी के दावों  की सत्यता की जाँच करें।

पुलवामा आत्मघाती हमला लगभग 3:10 बजे हुआ और दावे के हिसाब से मोदी शाम 6 बजे के बाद तक भी फोटो खिंचवा रहे थे। अगर हम मोदी की फोटो खींचते हुए देंखे, तो हम साफ़ देख सकते हैं कि जब यह फोटो ली गई है यह दिन का समय है, क्योंकि फोटो की पृष्ठभूमि में खिली हुई धूप और साफ नीला आकाश देखा जा सकता है। अगर ये शाम की होती तो क्या बैकग्राउंड में इतनी खिली धूप होती? जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में सूर्यास्त का समय टाइम एंड डेट वेबसाइट के अनुसार 14 फ़रवरी को शाम 6:02 बजे था। इसका मतलब यह है कि अगर हमले के 3 घंटे बाद भी शूटिंग जारी होती तो बैकग्रॉउंड में अंधेरा हो गया होता। यहाँ तो ये स्पष्ट है कि जब ये तस्वीर ली गई है वह समय सूर्यास्त से पहले का है। न कि हमले के 3 घंटे बाद का समय था।

चलिए ठीक से उस दिन का पूरा घटनाक्रम समझते हैं, यहीं से इस वाकये का सच भी समझ आएगा। पहला सवाल ये है कि उस दिन वास्तव में मोदी राष्ट्रीय उद्यान में कब पहुँचे? प्रधानमंत्री 14 फ़रवरी को दोपहर 3 बजे उत्तराखंड के रुद्रपुर में एक रैली को संबोधित करने वाले थे। इसके लिए, वह लगभग 7 बजे सुबह देहरादून के जॉली ग्रांट हवाई अड्डे पर पहुँचे, जहाँ से उन्हें हेलीकॉप्टर द्वारा आगे की यात्रा करनी थी। लेकिन खराब मौसम के कारण हेलीकॉप्टर उड़ान नहीं भर सका। इसलिए मोदी ने वहाँ करीब तीन घंटे इंतजार किया। वहाँ से उनका हेलिकॉप्टर सुबह 11:15 बजे कालागढ़ के लिए रवाना हुआ और वहाँ से सड़क के रास्ते जिम कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के ढिकाला जोन जाना था। वह दोपहर लगभग 12 बजे टाइगर रिज़र्व पहुँचे थे और ग्लोबल टाइगर रिजर्व की बैठक में भाग लिया। बैठक के बाद, उन्होंने लगभग 1 बजे जंगल के ढिकाला क्षेत्र में पहुँचने के लिए एक नाव पर सवार होकर रामगंगा नदी को पार किया। क्योंकि उसके कुछ ही समय बाद उनके आगमन की सूचना मीडिया द्वारा दी गई थी।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मोदी ने वन क्षेत्र में केवल 30 मिनट बिताए, जहाँ से वह खिन्नौली वन विश्राम गृह गए। जिसका मतलब है कि पीएम ने पुलवामा में हमले से लगभग एक घंटे पहले ही अपनी वन यात्रा पूरी कर ली थी। उस दौरान कुछ फ़ोटोग्राफ़रों ने उनकी कुछ तस्वीरें लीं। गेस्ट हाउस में, उन्होंने अधिकारियों के साथ बाघ संरक्षण प्रयासों पर चर्चा की और बाद में रुद्रपुर में रैली को फोन से संबोधित किया क्योंकि मौसम में सुधार नहीं हुआ था। भाषण को डीडी न्यूज द्वारा लाइव किया गया था। और लाइव वीडियो के यूट्यूब मेटाडेटा विश्लेषण से, यह देखा जा सकता है कि भाषण का प्रसारण शाम 5:17 बजे शुरू हुआ। इसका मतलब है, हमले के 2 घंटे बाद, मोदी फोन करके रैली को संबोधित कर रहे थे, ताकि उन हजारों लोगों को निराश न करें जो उन्हें सुनने के लिए 5-6 घंटे से इंतजार कर रहे थे। यहाँ भी ये साफ है कि वह फोटो शूट नहीं करवा रहे थे।

कॉर्बेट राष्ट्रीय पार्क में मोदी की यात्रा की तस्वीरें पहले ही 2 बजे के आसपास मीडिया द्वारा प्रकाशित कर दी गई थीं, जिसका साफ अर्थ यह भी है कि तस्वीरें वास्तव में 2 बजे से पहले ली गई थीं। और जैसा कि मोदी ने वन क्षेत्र में लगभग आधे घंटे का समय बिताया, इसका मतलब यह है कि हमले के बारे में सत्यापित जानकारी पहुँचने से पहले ही वह अपनी वन यात्रा से लौट आए थे। इसलिए, नाहक सनसनी बनाकर ये आरोप लगाना कि पुलवामा हमले के बाद पीएम मोदी जिम कॉर्बेट पार्क में एक फोटोशूट करवा रहे थे, यह राहुल गाँधी, उनके ट्रोल सोशल मीडिया के यूजर और फुल टाइम प्रचारक पत्रकारों द्वारा प्रचारित एक और झूठ, उनकी कभी न खत्म होने वाली महाझूठ और प्रोपेगंडा का हिस्सा है। इस तरह से राहुल के इस झूठ को मीडिया गिरोह ने एक बार फिर फैलाकर अपनी विश्वसनीयता को कलंकित किया है।

देवबंद: जैश के आतंकी शाहनवाज़ और आक़िब गिरफ़्तार, ग्रेनेड बनाने में थे एक्सपर्ट

पुलवामा हमले के बाद से सुरक्षाबलों ने देश में आतंकियों को पकड़ने की धर-पकड़ तेज कर दी है। जगह-जगह पर सुरक्षा को मद्देनज़र रखते हुए सख़्ती से जाँच की जा रही है। इसी दिशा में यूपी के आतंक रोधी दस्ते (एटीएस) ने शुक्रवार (फरवरी 22, 2019) को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर ज़िले के देवबंद से आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के दो संदिग्ध आतंकवादियों को गिरफ़्तार किया है।

इन संदिग्धों को पकड़ने की कार्रवाई देवबंद स्थित एक हॉस्टल में की गई। गिरफ़्तार हुए इन आतंकियों का नाम शाहनवाज़ अहमद तेली और आक़िब है। इनमें शाहनवाज़ को ग्रेनेड एक्सपर्ट बताया जाता है।

शाहनवाज़ जम्मू-कश्मीर के कुलगाम का रहने वाला है, जबकि आक़िब पुलवामा का है। यह दोनों आतंकी यूपी में उन लोगों की तलाश कर रहे थे जिनका ब्रेन वॉश करके जैश में शामिल कराया जा सके। इस सिलसिले में वो कई बार देवबंद और बाक़ी के ज़िलों में भी जा चुके हैं। इन आतंकियों के कब्जे से 32 बोर का पिस्टल और 30 कारतूस बरामद हुए हैं।

बताया जा रहा है कि इन आतंकियों को पुलवामा में हुए हमले की पूरी जानकारी थी। साथ ही इनके मोबाइल से जैश-ए-मोहम्मद सहित तमाम आतंकियों की वीडियो बरामद की गई। शुक्रवार (फरवरी 22, 2019) सुबह हुई कार्रवाई में एटीएस ने 11 कश्मीरी छात्रों को हिरासत में लिया था जिसमें 5 छात्र उड़ीसा के भी थे। जाँच के बाद जैश के इन दोनों आतंकियों को गिरफ़्तार किया गया।

12 करोड़ किसानों के बैंक में मोदी 1 क्लिक से भेजेंगे ₹25,000 करोड़

बजट सत्र में किसान सम्मान निधि योजना पर हुई घोषणा के बाद इसकी पहली किस्त सरकार द्वारा रविवार (फरवरी 24, 2019) को जारी करेंगे।

गोरखपुर में राष्ट्रीय किसान सम्मेलन के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक क्लिक में देश के 12 करोड़ किसानों के खाते में ₹25,000 करोड़ की रकम ट्रांस्फर करेंगे।

यह योजना किसानों को प्रत्यक्ष रूप से आर्थिक मदद देने के लिए अब तक की सबसे अहम योजना है। इस पूरी योजना पर ₹75,000 करोड़ खर्च आने का अनुमान है। इसके तहत किसानों को सालाना ₹6,000 तीन किस्तों में दिए जाएँगे।

खबरें थी कि चुनाव के प्रचार शुरू होने से पहले ही इस योजना की पहली किस्त किसानों के खातों में डाल दी जाएगी। इसी दिशा में प्रधानमंत्री पहली किस्त रविवार को जारी करेंगे। बता दें कि यह राशि छोटे और सीमांत किसानों को दी जा रही है।

नवभारत में छपी ख़बर के अनुसार उनके सहयोगी टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए बीजेपी सांसद और किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह ने सूचना दी है कि इस योजना का ग्राउंड वर्क पूरा हो चुका है।

किसान मोर्चा अध्यक्ष राजा वर्मा ने कहा कि किसानों के लिए यह अपनी तरह की पहली स्कीम है, जो देश विकास के लिए रीढ़ है। अकेले यूपी में ही 90 लाख छोटे और मझोले किसानों को इस स्कीम से लाभ होने वाला है।

AMU छात्र मोहम्मद तालिब की जमानत याचिका ख़ारिज, छात्रों ने किया 3 घंटे तक विरोध प्रदर्शन

निचली अदालत ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) के छात्र मोहम्मद तालिब की ज़मानत याचिका ख़ारिज कर दी गई है। बता दें कि मोहम्मद तालिब पर 12 फरवरी को कैंपस में हिंसा के दौरान बर्बरता और शत्रुता को बढ़ावा देने के आरोप थे।

इस याचिका पर अतिरिक्त न्यायिक मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह ने सुनवाई की। ज़मानत याचिका ख़ारिज होने के बाद, बड़ी संख्या में छात्र बाब-ए-सैयद गेट पर जमा हो गए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया जो लगभग तीन घंटे तक जारी रहा। अभियोजन अधिकारी इंद्रजीत पाल जो तालिब की जमानत याचिका का विरोध कर रहे थे, ने कहा, “मैंने उसकी जमानत याचिका का विरोध किया, क्योंकि अपराध की प्रकृति गंभीर थी।”

बता दें कि तालिब, B.A के द्वितीय वर्ष का छात्र है जिसे रविवार (17 फ़रवरी 2019) की रात को पुलिस ने गिरफ़्तार किया था। छात्र संघ के सदस्य तालिब की गिरफ़्तारी के बाद विरोध में उतर आए थे और पुलिस स्टेशन को घेर लिया था। हालाँकि, पुलिस द्वारा उसकी गिरफ़्तारी के सबूत दिखाए जाने के बाद वे लौट गए थे। छात्र संघ के उपाध्यक्ष हमज़ा सूफ़ियान ने कहा कि वे ज़िला प्रशासन के अधिकारियों से मिलेंगे जिन्होंने तालिब की जल्द रिहाई का आश्वासन दिया था।

AMU के कुछ छात्रों ने कथित रूप से पत्रकार नलिनी शर्मा सहित रिपब्लिक टीवी क्रू को परेशान किया था जो परिसर से लाइव रिपोर्टिंग कर रही थीं। पत्रकार ने आरोप लगाया था कि एएमयू के छात्रों ने उनके उपकरण भी छीन लिए थे।

लेफ्टिनेंट जनरल डीएस हुड्डा ने कॉन्ग्रेस में शामिल होने की ख़बरों का किया खंडन

सितंबर 2016 में LoC पार की गई सर्जिकल स्ट्राइक में महत्वपूर्ण रोल निभाने वाले लेफ्टिनेंट जनरल डीएस हुड्डा (सेवानिवृत्त) ने कॉन्ग्रेस में शामिल होने ख़बरों का खंडन किया है। बता दें कि गुरुवार (21 फ़रवरी 2018) को ऐसी ख़बरें सामने आईं थीं जिनके मुताबिक कॉन्ग्रेस ने रिटायर्ड जनरल हुड्डा को पार्टी में शामिल करते हुए उन्हें बड़ी ज़िम्मेदारियाँ सौंपी गई।

इसके अलावा यह बात भी प्रचारित और प्रसारित हो रही थी कि जनरल डीएस हुड्डा ने अपनी ज़िम्मेदारी स्वीकार कर ली है और कॉन्ग्रेस ने इसके लिए टास्क फोर्स का भी गठन कर लिया है। कॉन्ग्रेस के सभी दावों को ख़ारिज करते हुए जनरल हुड्डा ने कहा कि कॉन्ग्रेस में शामिल होने की सभी ख़बरे बेबुनियादी हैं और उन्होंने पार्टी ज्वॉइन नहीं की है।

उरी हमले का बदला लेने के लिए भारत ने LoC पार जाकर पाकिस्तानी आतंकियों पर सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया था और अपने इस ऑपरेशन में कई आतंकवादियों को मार गिराया गया था। भारत की ओर से किए गए सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल डीएस हुड्डा की अहम भूमिका थी।

आपको बता दें कि उरी हमले में 19 सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए थे। हमला करने वाले तीन आतंकवादियों को भारत ने तत्काल ही मार गिराया था।

मध्य प्रदेश सरकार से नाराज़ 25 कॉन्ग्रेसी विधायक हुए लामबंद, बनाया अपना ‘क्लब’

मध्य प्रदेश में सत्ताधारी कॉन्ग्रेस के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है। कमलनाथ सरकार से नाराज़ चल रहे क़रीब 25 कॉन्ग्रेसी विधायकों ने लामबंद होकर अपना एक अलग क्लब बना लिया है। ये विधायक राज्य सरकार के मंत्रियों से ख़फ़ा हैं। इस क्लब में कॉन्ग्रेसी विधायकों के अलावा कमलनाथ सरकार को समर्थन दे रहे निर्दलीय व अन्य दलों के विधायक भी शामिल हैं। कहा जा रहा है कि इनमे से अधिकतर ऐसे विधायक हैं जो पहली बार चुन कर आए हैं।

बसपा विधायक रामबाई ने मीडिया को बताया कि इस क्लब में 28-30 विधायक हैं। उन्होंने कहा, “एक बार लोकसभा चुनाव हो जाए, फिर काहे का समर्थन?” उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाया। नाराज़ कॉन्ग्रेस विधायक सुरेंद्र सिंह शेरा ने समाचार चैनल आज तक से बात करते हुए बताया कि उन्होंने मुसीबत के समय कॉन्ग्रेस का साथ दिया लेकिन उन्हें वादे के मुताबिक़ मंत्रीपद नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि अब कोई भी उन्हें कॉन्ग्रेस में अहमियत नहीं देता। उन्होंने कहा कि मंत्री उनके फोन भी नहीं उठाते और विधायकों की कोई सुनवाई नहीं होती।

मीडिया में आ रही ख़बरों की मानें तो विधायक अधिकारियों के तबादले को लेकर नाराज़ हैं। उनका कहना है कि सरकार उन्हें भरोसे में लिए बिना उनके क्षेत्र के अधिकारियों का तबादला कर रही है। इसके अलावा भूमिपूजन व शिलान्यास कार्यक्रमों में भी विधायकों की उपेक्षा की जा रही है। राजधानी भोपाल के एक होटल में बैठक कर इन विधायकों ने आगे की रणनीति बनाई। वे मुख्यमंत्री कमलनाथ से जल्द ही मुलाक़ात करेंगे।

विधायकों ने बताया कि शिलान्यास-पट्टी में उनके नाम तक नहीं लिखे जा रहे हैं। उन्होंने माँग की कि उनके और सीएम के बीच में समन्वय बनाने के लिए किसी ऐसे व्यक्ति को नियुक्त कर दिया जाए जो इसमें सक्षम हो। मध्य प्रदेश की 231 सदस्यीय विधानसभा में कॉन्ग्रेस के 114 विधायक हैं जबकि बसपा के दो व सपा के एक विधायक हैं। इनके अलावा सरकार को 4 निर्दलीयों का भी समर्थन प्राप्त है। कुल मिलाकर कमलनाथ के नेतृत्व में चल रही सरकार के पास 121 विधायकों का समर्थन है।

जवानों के बलिदान को जाति और वर्ग में सीमित कर देने वाले नहीं समझेंगे राष्ट्रवाद की परिभाषा

पुलवामा हमले में बलिदान हुए जवानों पर पूरा देश शोक मना रहा है। देश की रक्षा करते हुए 40 जवान आज अपने पीछे अपने परिवार छोड़ गए हैं। परिवार में किसी के बूढ़े माँ-बाप हैं तो किसी के छोटे बच्चे हैं। घर के इन चिरागों के चले जाने से न केवल इनके परिवार में अंधेरा हुआ है बल्कि उनकी आर्थिक स्थिति भी डगमगा गई है।

ऐसी स्थिति में हमारे देश में एक तरफ कुछ ऐसे बुद्धिजीवी हैं जो इन परिवारों की मजबूरी पर अपनी विचारधारा की ज़मीन मजबूत करने में जुटे हुए हैं तो वहीं कुछ उदाहरण ऐसे हैं जो अपने जीवन की जमा-पूँजी से इन परिवारों की मदद करने में संकोच नहीं कर रहे हैं।

आश्चर्य होता है कि एक ही देश में रहकर दो वर्गों के लोगों के विचारों में इतना अंतर कैसे हो सकता है। कल एक तरफ जहाँ ‘द कारवां’ के एजाज़ अशरफ ने पुलवामा जैसे संवेदनशील मामले में जाति और मज़हब को लाकर पत्रकारिता में निहित विश्वसनीयता और निष्पक्षता जैसे नैतिक मूल्यों को तिलांजलि दे दी है। वहीं दूसरी तरफ ख़बर आई कि भीख माँगकर अपना गुज़र बसर करने वाली एक औरत ने अपनी जमा पूंजी पुलवामा में बलिदान हुए जवानों के लिए दान दे दी है।

कल अशरफ ने अपने आर्टिकल में दावा करते हुए कहा कि पुलवामा हमले पर राष्ट्रवाद को लेकर केवल शहरी मध्यम वर्ग के ही लोग आक्रोषित है, जिसमें अधिकतर केवल उच्च जाति के लोग शामिल हैं। अब उन्हें कैसे बताया जाए कि यह मुद्दा ऐसा नहीं है जिसे जाति अथवा वर्गों में बाँटा जाए। सेना के जवानों की जाति खोज निकालने वाले अशरफ पढ़े-लिखे और समझदार मालूम होते हैं तभी उनकी सोच और भीख माँगकर जीवन जीने वाली बुजुर्ग महिला की सोच में आकाश-पाताल का अंतर है।

अशरफ जहाँ जवानों के परिजनों को फोन करके उनकी जाति का प्रमाण माँगकर एक विशेष विचारधारा का एंगल देने का प्रयास कर रहे थे, वहीं अजमेर में नंदिनी नाम की महिला की सारी संपत्ति उसकी आखिरी इच्छा के अनुसार संरक्षकों द्वारा सीआरपीएफ जवानों के नाम पर दान दे दी गई।

यहाँ बता दें कि पिछले साल आखिरी साँस लेने से पहले नंदिनी ने एक वसीयत छोड़ी थी, जिसमें उन्होंने अपनी अंतिम इच्छा जाहिर की थी कि उनके पैसों को देश और समाज के उपयोग में लगाया जाए। नंदिनी अजमेर के बजरंगगढ़ में स्थित अंबे माता मंदिर के बाहर भीख माँगती थीं और वहीं से उन्होंने ये पैसे इकट्ठा किए। वह अपने पैसे हर दिन बैंक में जमा करती थी और अपनी मौत के बाद इन पैसों का ख्याल रखने के लिए उन्होंने दो लोगों को अपना संरक्षक बना रखा था।

एक भीख मांगने वाली औरत के मन मे समाज और देश के लिए भावनाएँ हो सकती हैं लेकिन अशरफ जैसे बुद्धिजीवियों के मन मे ये भावनाएँ नहीं आ सकती। पुलवामा हमले में हत हुए जवानों के बलिदान को क्षेत्र और वर्ग में सीमित कर देने वाले यह कभी नहीं समझेंगे कि राष्ट्रवाद की परिभाषा वो नहीं है जिसका निर्माण वे कर रहे हैं, बल्कि वो है जो नंदिनी जैसी बुजुर्ग और गरीब महिलाएँ अपनी आखिरी इच्छाओं में प्रकट कर रही हैं।

प्रोपोगेंडा की गाड़ी में पेट्रोल भरने के लिए एयर कंडीशंड कमरों में बैठकर परिजनों से सवाल दागना जितना आसान है उनके मन में भीतर उतर कर उनकी मनःस्थिति समझना उतना ही कठिन है।

पत्रकारिता के दम पर जागरूकता फैलाने का ढोंग करने वाले अशरफ को इतना ही नहीं बरेली के प्राइवेट स्कूल की एक प्रिंसिपल किरण झगवाल तक से शिक्षा लेने की आवश्यकता है। जिन्होंने अपनी चूड़ियाँ बेचकर सीआरपीएफ जवानों के परिवार वालों की मदद करने के लिए 1,38,387 रुपए प्रधानमंत्री राहत कोष में भेजे।

इसके अलावा 14 फरवरी से अब तक 80,000 लोगों के सहयोग से करीब 20 करोड़ रुपए भारत के वीरों के नाम जमा किए जा चुके हैं जिसकी जानकारी सरकार ने दी है।

सोचने वाली बात है कि एक तरफ जहाँ पर देश के कोने-कोने से लोगों द्वारा वीरगति प्राप्त जवानों के लिए हर संभव मदद पहुँचाई जा रही हैं वहीं पत्रकारिता के समुदाय विशेष के कुछ लोग इसे अपनी विचारधारा में सराबोर कर रहे हैं। आज यही जवानों की ‘जाति पूछने वाले’ कल को ‘आतंकवाद का कोई मज़हब नहीं होता’ जैसे आर्टिकल लिखते नज़र आएँगे। मानवता के धरातल से उठकर और कुतर्कों की दुनिया में खो चुके इन बुद्धिजीवियों को अपने भीतर नंदिनी और किरण जैसी भावनाएँ जगाने में अरसा लग जाएगा।

CBI और पश्चिम बंगाल में जंग जारी, ज्वॉइंट डायरेक्टर को पुलिस ने एक हफ़्ते में पेश होने का भेजा नोटिस

पश्चिम बंगाल पुलिस और केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के बीच विवाद थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। इसी विवाद ने एक और प्रकरण को जन्म दिया है। बता दें कि पश्चिम बंगाल के चर्चित उगाही केस में पश्चिम बंगाल पुलिस ने सीबीआई के संयुक्त निदेशक (ज्वॉइंट डायरेक्टर) पंकज श्रीवास्तव के नाम एक नोटिस जारी किया है। इस नोटिस के अनुसार पंकज श्रीवास्तव को एक हफ़्ते में भोवानीपुर पुलिस स्टेशन में हाजिर होने के लिए कहा गया है।

सीबीआई सब-इंस्पेक्टर सुनील मीणा के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 341, 342 और 34 के तहत दर्ज एक मामले की जाँच में पंकज श्रीवास्तव को शामिल होने के लिए कहा गया है।

वैभव खट्टर नामक एक व्यक्ति ने आरोप लगाया था कि सीबीआई ने उसे एक मामले में अवैध रूप से हिरासत में लिया और प्रताड़ित किया, जिसका उससे कोई लेना-देना नहीं था। खट्टर सेंट्रल रोलर फ्लौर मिल्स प्राइवेट लिमिटेड का कर्मचारी है जिस पर अगस्त 2018 में CBI ने छापा मारा था। यह आरोप लगाया गया था कि तत्कालीन निदेशक आलोक कुमार वर्मा और तत्कालीन विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के बीच CBI के भीतर अनबन के कारण छापे मारे गए।

मिल के मालिक दीपेश चांडक जो बिहार के चारा घोटाला मामले में लिप्त था उसे सीबीआई ने उठा लिया और कथित तौर पर अस्थाना को फँसाने के लिए उन्हें विवश किया गया। लेकिन वह हिरासत से भागने में क़ामयाब हो गया, जिसके बाद सीबीआई ने खट्टर सहित कंपनी के कर्मचारियों की जमकर लताड़ लगाई और कथित तौर पर उन्हें प्रताड़ित किया था।

चांडक को बाद में कोलकाता पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया और वो इस समय हिरासत में है। सीबीआई की ये गतिविधियाँ संयुक्त निदेशक पंकट श्रीवास्तव के नेतृत्व में हुईं और इसीलिए उनका नाम भी सामने आया।

CBI और पश्चिम बंगाल पुलिस के बीच विवाद में यह एक नया मोड़ आया है जो जाँच एजेंसी और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच दरार को स्पष्ट करता है। हाल ही में, सीबीआई ने कोलकाता पुलिस आयुक्त राजीव कुमार से शारदा चिट फंड घोटाले के सिलसिले में पूछताछ की थी। इस मामले में TMC सांसद कुणाल घोष को भी तलब किया गया था।

इससे पहले, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा कथित तौर पर शारदा चिट फंड घोटाले की जाँच से खुद को बचाने के लिए धरने की राजनीति का सहारा भी लिया गया। ममता बनर्जी कोलकाता पुलिस द्वारा आठ CBI अधिकारियों को बलपूर्वक हिरासत में लेने के बाद धरने पर बैठी थीं, जो शारदा घोटाले के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करने के लिए पुलिस आयुक्त राजीव कुमार से मिलने गए थे। हालाँकि बाद में कोर्ट के दखल के बाद यह मामला शांत हुआ था और कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार शिलांग में सीबीआई के समक्ष पूछताछ के लिए पेश हुए थे।

UN सुरक्षा परिषद ने जैश का नाम लेकर की पुलवामा हमले की निंदा; चीन ने जताई आपत्ति

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत को बड़ी कूटनीतिक सफलता मिली है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का नाम लेते हुए पुलवामा आतंकी हमले की कड़ी निंदा की है। सुरक्षा परिषद ने अपने बयान में इसे एक जघन्य और कायराना हरकत करार दिया है। साथ ही, सुरक्षा परिषद ने कहा कि इस निंदनीय हमले के जो भी दोषी हैं, उन्हें दंड मिलना चाहिए। इसे पाकिस्तान के लिए तगड़ा झटका माना जा रहा है। सुरक्षा परिषद ने अपने बयान में कहा:

“इस घटना के अपराधियों, षडयंत्रकर्ताओं और उन्हें धन मुहैया कराने वालों को इस निंदनीय कृत्य के लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए और उन्हें दंड मिलना चाहिए । सुरक्षा परिषद के सदस्य 14 फरवरी 2019 को जम्मू-कश्मीर में जघन्य और कायराना तरीके से हुए आत्मघाती हमले की कड़ी निंदा करते हैं जिसमें भारत के अर्धसैनिक बल के 40 जवान शहीद हो गए थे और इस हमले की जिम्मेदारी जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी।”

सुरक्षा परिषद द्वारा पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश का नाम लेना भारत के लिए बड़ी सफलता है क्योंकि जैश के सरगना मसूद अज़हर को सुरक्षा परिषद द्वारा प्रतिबंधित कराने की भारत की कोशिशें अब तक विफल रही हैं। जब भी पाकिस्तानी आतंकी मसूद को प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव लाया गया, चीन ने वीटो लगा कर उसमें अड़ंगा लगाया। सुरक्षा परिषद के ताज़ा बयान में भी जैश का नाम लिए जाने पर चीन ने आपत्ति जताई। मीडिया में प्रकाशित ख़बरों के अनुसार, चीन ने सुरक्षा परिषद के सदस्यों से इस साझा बयान में से जैश का नाम हटाने की माँग की।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने इस हमले के दोषियों को सज़ा दिलाने को लेकर भारत सरकार के सक्रिय सहयोग की भी बात कही। साथ ही घायल जवानों के जल्दी ठीक होने की कामना करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए जवानों के परिजनों के प्रति संवेदनाएँ भी जताई गई। साझा बयान के अनुसार, सुरक्षा परिषद के सदस्यों ने पुष्टि की कि आतंकवाद अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक है, चाहे यह किसी भी रूप में हो या इसके पीछे जो भी मंशा हो।

ज्ञात हो कि फ्रांस ने मसूद अज़हर को प्रतिबंधित करने के लिए सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव लाने का ऐलान किया है। अमेरिका और जर्मनी भी इस मसले पर भारत के साथ हैं। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने कहा कि UNSC का बयान देर से आया लेकिन दुरुस्त आया। उन्होंने कहा कि इस बयान में कई ऐसी चीजें हैं जो पहली बार हुई हैं। उनका इशारा बयान में जैश का नाम लेकर निंदा करने की तरफ था।

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि UNSC के इस बयान के बाद पाकिस्तान अपने नियंत्रण क्षेत्र में चल रही आतंकी गतिविधियों पर लगाम लगाने का अंतर्राष्ट्रीय दबाव में आ गया है। उन्होंने कहा कि पुलवामा हमले के जिम्मेदार आतंकियों पर कार्रवाई करने के लिए पाकिस्तान पर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने दबाव बनाया है।

भारत के कड़े रुख से घबराया Pak! अस्पतालों को तैयार रहने के दिए निर्देश

भारत द्वारा कड़ा रुख अपनाने के बाद पाकिस्तानी सेना में हलचल तेज हो गई है। पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा जवाबी कार्रवाई की आशंका से डरे पाकिस्तान ने अस्पतालों को तैयार रहने के निर्देश दिए हैं। आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का मुखिया मसूद अज़हर ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान से भारत के दबाव के सामने न झुकने को कहा है। टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित एक ख़बर के अनुसार, बलूचिस्तान स्थित पाकिस्तानी सेना का दफ़्तर और पाक अधिकृत कश्मीर प्रशासन- इन दोनों के दस्तावेज़ों से पता चलता है कि पाकिस्तान ने युद्ध के लिए तैयारियाँ शुरू कर दी है।

क्वेटा स्थित पाकिस्तानी फ़ौज के हेडक्वार्टर क्वेटा लॉजिस्टिक्स एरिया (HQLA) कैंटोनमेंट ने जिलानी अस्पताल को पत्र लिख कर कहा है कि भारत से संभावित युद्ध के मद्देनज़र मेडिकल सपोर्ट की व्यवस्था और योजना तैयार करें। अस्पताल को लिखे पत्र में कहा गया है:

“पूर्वी मोर्चे पर आपातकाल की परिस्थिति में क्वेटा लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में सिंध और पंजाब के नागरिक और सैन्य अस्पतालों से घायल सैनिकों के आने की उम्मीद है। शुरुआती मेडिकल इलाज के बाद योजना है कि इन सैनिकों को सैन्य और नागरिक सार्वजनिक क्षेत्र से बलूचिस्तान के नागरिक अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया जाएगा, जब तक कि सीएमएच (सिविल मिलिट्री हॉस्पिटल) में बेड की उपलब्धता नहीं होती है।”

इतना ही नहीं, पत्र में सभी सैन्य व सिविल अस्पतालों में मेडिकल सपोर्ट के लिए विस्तृत योजना बनाने की बात भी कही गई है। सैन्य अस्पताल में बिस्तरों के विस्तार एवं अन्य चिकित्सा व्यवस्था के लिए व्यापक योजना की तैयारी की जा रही है। इसके अलावा सिविल अस्पतालों को भी ज़रूरत पड़ने पर घायल जवानों के लिए 25% सीटें आरक्षित रखने को कहा गया है।

गुरुवार को कश्मीर की कथित सरकार ने नीलम, झेलम, रावलकोट, हवेली, कोटली और भिमभेर क्षेत्र और नियंत्रण रेखा के पास स्थित क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन को नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी करने के लिए कहा है क्योंकि भारतीय सेना बदले की कार्रवाई कर सकती है।

भारत द्वारा एक-एक कर कड़े क़दम उठाते हुए पाकिस्तान को घेरा जा रहा है। पहले पाकिस्तान से ‘मोस्ट फेवर्ड नेशन‘ का दर्जा वापस ले लिया और अब सरकार ने रावी, ब्यास और सतलुज के पानी को पाकिस्तानी को देने की बजाय उस से यमुना को सींचने की योजना बनाई है। पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक संकट के दौर से गुज़र रहा है।