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CBI और पश्चिम बंगाल में जंग जारी, ज्वॉइंट डायरेक्टर को पुलिस ने एक हफ़्ते में पेश होने का भेजा नोटिस

पश्चिम बंगाल पुलिस और केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के बीच विवाद थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। इसी विवाद ने एक और प्रकरण को जन्म दिया है। बता दें कि पश्चिम बंगाल के चर्चित उगाही केस में पश्चिम बंगाल पुलिस ने सीबीआई के संयुक्त निदेशक (ज्वॉइंट डायरेक्टर) पंकज श्रीवास्तव के नाम एक नोटिस जारी किया है। इस नोटिस के अनुसार पंकज श्रीवास्तव को एक हफ़्ते में भोवानीपुर पुलिस स्टेशन में हाजिर होने के लिए कहा गया है।

सीबीआई सब-इंस्पेक्टर सुनील मीणा के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 341, 342 और 34 के तहत दर्ज एक मामले की जाँच में पंकज श्रीवास्तव को शामिल होने के लिए कहा गया है।

वैभव खट्टर नामक एक व्यक्ति ने आरोप लगाया था कि सीबीआई ने उसे एक मामले में अवैध रूप से हिरासत में लिया और प्रताड़ित किया, जिसका उससे कोई लेना-देना नहीं था। खट्टर सेंट्रल रोलर फ्लौर मिल्स प्राइवेट लिमिटेड का कर्मचारी है जिस पर अगस्त 2018 में CBI ने छापा मारा था। यह आरोप लगाया गया था कि तत्कालीन निदेशक आलोक कुमार वर्मा और तत्कालीन विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के बीच CBI के भीतर अनबन के कारण छापे मारे गए।

मिल के मालिक दीपेश चांडक जो बिहार के चारा घोटाला मामले में लिप्त था उसे सीबीआई ने उठा लिया और कथित तौर पर अस्थाना को फँसाने के लिए उन्हें विवश किया गया। लेकिन वह हिरासत से भागने में क़ामयाब हो गया, जिसके बाद सीबीआई ने खट्टर सहित कंपनी के कर्मचारियों की जमकर लताड़ लगाई और कथित तौर पर उन्हें प्रताड़ित किया था।

चांडक को बाद में कोलकाता पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया और वो इस समय हिरासत में है। सीबीआई की ये गतिविधियाँ संयुक्त निदेशक पंकट श्रीवास्तव के नेतृत्व में हुईं और इसीलिए उनका नाम भी सामने आया।

CBI और पश्चिम बंगाल पुलिस के बीच विवाद में यह एक नया मोड़ आया है जो जाँच एजेंसी और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच दरार को स्पष्ट करता है। हाल ही में, सीबीआई ने कोलकाता पुलिस आयुक्त राजीव कुमार से शारदा चिट फंड घोटाले के सिलसिले में पूछताछ की थी। इस मामले में TMC सांसद कुणाल घोष को भी तलब किया गया था।

इससे पहले, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा कथित तौर पर शारदा चिट फंड घोटाले की जाँच से खुद को बचाने के लिए धरने की राजनीति का सहारा भी लिया गया। ममता बनर्जी कोलकाता पुलिस द्वारा आठ CBI अधिकारियों को बलपूर्वक हिरासत में लेने के बाद धरने पर बैठी थीं, जो शारदा घोटाले के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करने के लिए पुलिस आयुक्त राजीव कुमार से मिलने गए थे। हालाँकि बाद में कोर्ट के दखल के बाद यह मामला शांत हुआ था और कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार शिलांग में सीबीआई के समक्ष पूछताछ के लिए पेश हुए थे।

UN सुरक्षा परिषद ने जैश का नाम लेकर की पुलवामा हमले की निंदा; चीन ने जताई आपत्ति

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत को बड़ी कूटनीतिक सफलता मिली है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का नाम लेते हुए पुलवामा आतंकी हमले की कड़ी निंदा की है। सुरक्षा परिषद ने अपने बयान में इसे एक जघन्य और कायराना हरकत करार दिया है। साथ ही, सुरक्षा परिषद ने कहा कि इस निंदनीय हमले के जो भी दोषी हैं, उन्हें दंड मिलना चाहिए। इसे पाकिस्तान के लिए तगड़ा झटका माना जा रहा है। सुरक्षा परिषद ने अपने बयान में कहा:

“इस घटना के अपराधियों, षडयंत्रकर्ताओं और उन्हें धन मुहैया कराने वालों को इस निंदनीय कृत्य के लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए और उन्हें दंड मिलना चाहिए । सुरक्षा परिषद के सदस्य 14 फरवरी 2019 को जम्मू-कश्मीर में जघन्य और कायराना तरीके से हुए आत्मघाती हमले की कड़ी निंदा करते हैं जिसमें भारत के अर्धसैनिक बल के 40 जवान शहीद हो गए थे और इस हमले की जिम्मेदारी जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी।”

सुरक्षा परिषद द्वारा पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश का नाम लेना भारत के लिए बड़ी सफलता है क्योंकि जैश के सरगना मसूद अज़हर को सुरक्षा परिषद द्वारा प्रतिबंधित कराने की भारत की कोशिशें अब तक विफल रही हैं। जब भी पाकिस्तानी आतंकी मसूद को प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव लाया गया, चीन ने वीटो लगा कर उसमें अड़ंगा लगाया। सुरक्षा परिषद के ताज़ा बयान में भी जैश का नाम लिए जाने पर चीन ने आपत्ति जताई। मीडिया में प्रकाशित ख़बरों के अनुसार, चीन ने सुरक्षा परिषद के सदस्यों से इस साझा बयान में से जैश का नाम हटाने की माँग की।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने इस हमले के दोषियों को सज़ा दिलाने को लेकर भारत सरकार के सक्रिय सहयोग की भी बात कही। साथ ही घायल जवानों के जल्दी ठीक होने की कामना करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए जवानों के परिजनों के प्रति संवेदनाएँ भी जताई गई। साझा बयान के अनुसार, सुरक्षा परिषद के सदस्यों ने पुष्टि की कि आतंकवाद अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक है, चाहे यह किसी भी रूप में हो या इसके पीछे जो भी मंशा हो।

ज्ञात हो कि फ्रांस ने मसूद अज़हर को प्रतिबंधित करने के लिए सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव लाने का ऐलान किया है। अमेरिका और जर्मनी भी इस मसले पर भारत के साथ हैं। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने कहा कि UNSC का बयान देर से आया लेकिन दुरुस्त आया। उन्होंने कहा कि इस बयान में कई ऐसी चीजें हैं जो पहली बार हुई हैं। उनका इशारा बयान में जैश का नाम लेकर निंदा करने की तरफ था।

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि UNSC के इस बयान के बाद पाकिस्तान अपने नियंत्रण क्षेत्र में चल रही आतंकी गतिविधियों पर लगाम लगाने का अंतर्राष्ट्रीय दबाव में आ गया है। उन्होंने कहा कि पुलवामा हमले के जिम्मेदार आतंकियों पर कार्रवाई करने के लिए पाकिस्तान पर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने दबाव बनाया है।

भारत के कड़े रुख से घबराया Pak! अस्पतालों को तैयार रहने के दिए निर्देश

भारत द्वारा कड़ा रुख अपनाने के बाद पाकिस्तानी सेना में हलचल तेज हो गई है। पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा जवाबी कार्रवाई की आशंका से डरे पाकिस्तान ने अस्पतालों को तैयार रहने के निर्देश दिए हैं। आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का मुखिया मसूद अज़हर ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान से भारत के दबाव के सामने न झुकने को कहा है। टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित एक ख़बर के अनुसार, बलूचिस्तान स्थित पाकिस्तानी सेना का दफ़्तर और पाक अधिकृत कश्मीर प्रशासन- इन दोनों के दस्तावेज़ों से पता चलता है कि पाकिस्तान ने युद्ध के लिए तैयारियाँ शुरू कर दी है।

क्वेटा स्थित पाकिस्तानी फ़ौज के हेडक्वार्टर क्वेटा लॉजिस्टिक्स एरिया (HQLA) कैंटोनमेंट ने जिलानी अस्पताल को पत्र लिख कर कहा है कि भारत से संभावित युद्ध के मद्देनज़र मेडिकल सपोर्ट की व्यवस्था और योजना तैयार करें। अस्पताल को लिखे पत्र में कहा गया है:

“पूर्वी मोर्चे पर आपातकाल की परिस्थिति में क्वेटा लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में सिंध और पंजाब के नागरिक और सैन्य अस्पतालों से घायल सैनिकों के आने की उम्मीद है। शुरुआती मेडिकल इलाज के बाद योजना है कि इन सैनिकों को सैन्य और नागरिक सार्वजनिक क्षेत्र से बलूचिस्तान के नागरिक अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया जाएगा, जब तक कि सीएमएच (सिविल मिलिट्री हॉस्पिटल) में बेड की उपलब्धता नहीं होती है।”

इतना ही नहीं, पत्र में सभी सैन्य व सिविल अस्पतालों में मेडिकल सपोर्ट के लिए विस्तृत योजना बनाने की बात भी कही गई है। सैन्य अस्पताल में बिस्तरों के विस्तार एवं अन्य चिकित्सा व्यवस्था के लिए व्यापक योजना की तैयारी की जा रही है। इसके अलावा सिविल अस्पतालों को भी ज़रूरत पड़ने पर घायल जवानों के लिए 25% सीटें आरक्षित रखने को कहा गया है।

गुरुवार को कश्मीर की कथित सरकार ने नीलम, झेलम, रावलकोट, हवेली, कोटली और भिमभेर क्षेत्र और नियंत्रण रेखा के पास स्थित क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन को नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी करने के लिए कहा है क्योंकि भारतीय सेना बदले की कार्रवाई कर सकती है।

भारत द्वारा एक-एक कर कड़े क़दम उठाते हुए पाकिस्तान को घेरा जा रहा है। पहले पाकिस्तान से ‘मोस्ट फेवर्ड नेशन‘ का दर्जा वापस ले लिया और अब सरकार ने रावी, ब्यास और सतलुज के पानी को पाकिस्तानी को देने की बजाय उस से यमुना को सींचने की योजना बनाई है। पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक संकट के दौर से गुज़र रहा है।

विडियो: कारवाँ के एजाज़ अशरफ़, मूर्खता विरासत में मिली है या कारवाँ वाले डिप्लोमा कराते हैं?

कारवाँ के पत्रकार ने इस राष्ट्रव्यापी शोक के मौक़े पर बलिदान जवानों की जाति पर लम्बा लेख लिखकर बताया है कि वीरगति को प्राप्त जवान किस जाति के हैं, और राष्ट्रवाद का जज़्बा सिर्फ ‘शहरी उच्च जाति के हिन्दुओं’ में है। इस तरह की सोच बेकार मानसिकता का ही परिचायक है, और कुछ नहीं:

पाकिस्तान ने हाफिज सईद के आतंकी संगठन जमात-उद-दावा और उसके सहयोगी संगठन पर लगाया बैन

पुलवामा हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में तनाव के बीच वृहस्पतिवार (फरवरी 21, 2019) को पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने राष्ट्रीय सुरक्षा समिति की बैठक ली जिसमें कुछ बड़े फैसले लिए गए हैं। पाकिस्तानी वेबसाइट ‘डॉन’ के अनुसार पाकिस्तान ने आतंकी संगठन जमात-उद-दावा पर बैन लगाया है। इसके साथ ही इसके सहयोगी फ़लाह-ए-इंसानियत पर भी बैन लगाया गया है। इन दोनों आतंकवादी संगठनों का संबंध मुंबई हमले के आरोपी हाफिज सईद से है। बैठक में इन दोनों ही संगठनों को गैरकानूनी करार दिया गया है।

माना जा रहा है कि पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत सरकार के द्वारा अपनाए जा रहे सख्त रवैये के कारण ही यह निर्णय लिया है। आज ही केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने एक बड़ा बयान देकर कहा कि अब पाकिस्तान को रावी, ब्यास और सतलुज का पानी न देकर उस से यमुना को सींचेंगे। भारत सरकार ने पाकिस्तान को दिया गया ‘मोस्ट फेवर्ड नेशन‘ का दर्जा भी वापस ले लिया है। अब गडकरी के ताज़ा ऐलान के बाद पहले से ही आर्थिक परेशानी से जूझ रहे पाकिस्तान पर संकट के नए बादल मँडराने लगे हैं।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की अगुआई में बुलाई गई इस बैठक का मुख्य मुद्दा आतंकवाद के ख़िलाफ़ पाकिस्तान के एक्शन प्लान को लेकर था।

आप भारत के एम्बेसडर हैं: दक्षिण कोरिया में प्रवासी भारतीयों से PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वृहस्पतिवार (फरवरी 21, 2019) को दो दिवसीय दौरे पर दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल पहुँचे। पीएम मोदी, दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे-इन, और पूर्व अमेरिकी महासचिव बान की मून ने दक्षिण कोरिया के सियोल में योनसेई विश्वविद्यालय में महात्मा गाँधी की एक प्रतिमा का अनावरण किया। पीएम मोदी भारत-कोरिया व्यापार बैठक को संबोधित कर रहे थे।

इसके बाद दक्षिण कोरिया के सियोल में पीएम मोदी ने प्रवासी भारतीयों को सम्बोधित करते हुए कहा, “भारत और कोरिया के बीच आत्मीयता का यह संपर्क नया नहीं है। प्राचीन काल में भारत की राजकुमारी सूरीरत्ना हजारों किलोमीटर की यात्रा कर यहाँ आईं थीं। यहाँ पर भारतीय मेधा और कौशल का बहुत सम्मान है। आप कोरिया में रिसर्च और इनोवेशन में योगदान दे रहे हैं।”

पीएम मोदी ने कहा कि भारत और कोरिया के संबंधों का आधार केवल बिजनेस समझौता नहीं बल्कि इसका मुख्य आधार ‘पीपल टू पीपल कॉन्टैक्ट’ है। प्रवासी भारतीयों को सम्बोधित करते हुए नरेंद्र मोदी ने कहा, “आप भारत के एम्बेसडर हैं। 3 करोड़ भारतीय जो विदेश में रहते हैं, उनकी कड़ी मेहनत, अनुशासन से दुनियाभर में देश की साख बढ़ी है। कोरिया के साथ हर दिन हमारे संबंध मजबूत हो रहे हैं और मजबूती के साथ बढ़ते जा रहे है। कोरिया और भारत शांति, स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देने में कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ रहे हैं।”

भारत की तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत देश आज दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था है। उन्होंने कहा कि अगले कुछ ही साल में भारत 5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

अपने भाषण के दौरान मोदी ने कहा, “भारत आज GST सिस्टम का हिस्सा है। पहले सरदार वल्लभ भाई पटेल ने देश को एक किया था, उसके बाद आर्थिक रूप से देश के एकीकरण का काम GST ने किया है। डिजिटल इंडिया से भारत के लोगों के जीवन में तेजी से बदलाव लाए गए हैं। देश के सवा लाख गाँवों में ऑप्टिकल फ़ाइबर पहुँचा दी गई है। दुनिया में भारत को इन्वेस्टमेंट के लिए सबसे उचित जगह माना जा रहा है, देश को पिछले 4 साल में रिकॉर्ड 263 बिलियन डॉलर का FDI प्राप्त हुआ है।

Fact Check: मीडिया गिरोह के सदस्य ‘scroll’ का एक और झूठ, मामला पत्रकारों के अश्लील संदेशों का

प्रोपेगंडा वेबसाइट scroll.in ने एक ख़बर प्रकाशित की जिसका शीर्षक है ‘पत्रकारों को भेजे गए अश्लील संदेशों के लिए केंद्र ने दूरसंचार कंपनियों को ज़िम्मेदार ठहराया’। इसमें कहा गया है कि सरकार ने पत्रकार रवीश कुमार और अभिसार शर्मा को अश्लील संदेश भेजने वाले 19 लोगों के ख़िलाफ़ तत्काल कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने ट्विटर पर यह भी कहा कि केंद्र ने एयरटेल, वोडाफोन, जियो और अन्य को रवीश कुमार और अभिसार शर्मा को अश्लील संदेश भेजने के लिए ज़िम्मेदार ठहराया है।

Scroll के शीर्षक में और ट्वीट में स्पष्ट रूप से दूरसंचार कंपनियों को अपने ग्राहकों द्वारा पत्रकारों को भेजे गए अश्लील संदेशों के लिए ज़िम्मेदार ठहराया गया। लेकिन यह सच नहीं है, क्योंकि सरकारी आदेश यह नहीं कहता है कि दूरसंचार नेटवर्क उपयोगकर्ताओं द्वारा भेजे गए संदेशों के लिए ज़िम्मेदार हैं। DoT (Department of telecom) द्वारा दिए गए आदेश को लेख में अटैच भी किया गया है।

आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि लाइसेंसिंग मानदंडों के अनुसार, दूरसंचार ऑपरेटरों पर यह सुनिश्चित करने के लिए कि उनके नेटवर्क का उपयोग अश्लील, दुर्भावनापूर्ण और आपत्तिजनक प्रसारण के लिए नहीं किया जाता है। बावजूद इसके स्क्रॉल ने अपनी ख़बर में इसे ग़लत मंशा से प्रचारित और प्रसारित किया।

बता दें कि इस आदेश में दूरसंचार कंपनियों को फोन पर लोगों द्वारा प्राप्त आपत्तिजनक संदेशों की शिकायत प्राप्त करने के लिए कॉल सेंटर या हेल्पलाइन सेंटर खोलने का भी सुझाव दिया।

पुलवामा हमले के बाद, कई पत्रकारों ने फ़र्ज़ी ख़बर फैलाई थी कि विभिन्न स्थानों पर कश्मीरी मुस्लिम छात्रों पर दक्षिणपंथी समूहों द्वारा हमला किया जा रहा है। इस तरह के निराधार दावों के कारण लोगों ने सोशल मीडिया पर उनकी आलोचनाएँ भी की थीं। कुछ पत्रकारों ने आरोप लगाया था कि कुछ लोगों ने अपनी सीमा को लाँघते हुए उन्हें ट्विटर और व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आपत्तिजनक संदेश और चित्र भेजे। इसके बाद पत्रकारों ने सोशल मीडिया पर सेंसरशिप की माँग की और सरकार को कार्रवाई करने के लिए कहा। इसके बाद, सरकार ने दूरसंचार कंपनियों को अपराधियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने के लिए कहा, लेकिन कंपनियों को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जैसा कि स्क्रॉल ने अपनी ख़बर में दर्शाने का प्रयास किया।

चंद्रबाबू नायडू के लिए ज़मीन नहीं देने पर किसान की पीट-पीट कर हत्या

आंध्र प्रदेश के गुंटूर में एक किसान की असामयिक मृत्यु को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा जा रहा है। राज्य में विपक्षी पार्टियों ने TDP (तेलुगू देशम पार्टी) सरकार पर हमला तेज़ कर दिया है। विपक्षी नेताओं ने मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उक्त किसान ने उनके दौरे को लेकर अपनी ज़मीन देने से इनकार कर दिया था, जिस कारण उसे मार डाला गया। किसान के परिवार वालों ने बताया कि उन्होंने अपनी ज़मीन में अस्थायी हेलिपैड बनाने के लिए अनुमति नहीं दी, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें प्रताड़ित किया।

मृतक की पहचान पिटला कोटेश्वरा राव के रूप में की गई है, जो यदलापडु मंडल के पुटलकोटा गाँव के मूल निवासी हैं। उसके परिजनों का कहना है कि पुलिस ने मृतक को काफ़ी यातनाएँ दी। यह घटना सोमवार (फ़रवरी 18, 2019) की है, जब नायडू एक कार्यक्रम के सिलसिले में क्षेत्र के दौरे पर आए थे। ‘द न्यूज़ मिनट’ के अनुसार, पीड़ित के परिवार और स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि पुलिस द्वारा पीटने के बाद उसकी मौत हो गई क्योंकि उसने सीएम की सुरक्षा व्यवस्था के लिए अपने खेत में जगह देने से इनकार कर दिया था।

इस घटना के बाद वाईएसआरसीपी के प्रमुख जगनमोहन रेड्डी, जो राज्य की विधानसभा में विपक्ष के नेता भी हैं, ने नायडू को किसान की मृत्यु का दोषी ठहराया। अपने एक ट्वीट में जगन ने कहा:

“आपने कोंडावेदु में बीसी किसान कोटिया की हत्या कर दी है। पिटाई के बाद उसे अधमरे स्थिति में छोड़ दिया गया था। आपके हेलीकॉप्टर की लैंडिंग की सुविधा के लिए, उनकी पपीते की फसल नष्ट हो गई। जब मानवता की ज़रूरत है तो यह क्रूरता क्या है?”

TDP सुप्रीमो चंद्रबाबू नायडू ने मृतक किसान के परिजनों को मुआवज़े के रूप में 5 लाख रुपए देने की घोषणा की। इस घटना के बाद विपक्षी दलों के नेताओं ने इलाके में पहुँचना शुरू कर दिया। जगनमोहन की पार्टी की तरफ से 3 सदस्यीय समिति ने किसान के परिजनों से मुलाक़ात किया। तेलुगू सुपरस्टार पवन कल्याण की पार्टी ने भी घटना को लेकर नायडू पर निशाना साधा और मृतक के परिजनों को सरकार नौकरी के साथ-साथ एक करोड़ रुपए देने की माँग की।

वहीं पुलिस ने बताया कि मामले की उच्च स्तरीय जाँच की जाएगी और जो भी दोषी होंगे, उन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। राज्य भाजपाध्यक्ष कन्ना लक्ष्मी नारायण ने केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से हस्तक्षेप करने की माँग की है। राज्य भाजपा ने कहा कि सीएम नायडू केंद्र में भाजपा सरकार को लेकर अक्सर कहते रहते हैं कि लोकतंत्र ख़तरे में है, लेकिन उन्हीं की सरकार ने एक निर्दोष किसान को मार डाला।

कालिंदी एक्सप्रेस विस्फोट स्थल पर मिला पत्र, PM मोदी की रैली में RDX से विस्फोट करने की थी योजना

बुधवार (21 फ़रवरी 2019) को कानपुर-भिवानी कालिंदी एक्सप्रेस में बम विस्फोट हुआ, जिसमें अभी तक किसी के हताहत होने की ख़बर नहीं मिली। लेकिन विस्फोट की जाँच करते समय सुरक्षा एजेंसियों को जैश-ए-मोहम्मद के संचालक द्वारा लिखा गया एक पत्र मिला है।


पत्र की शुरुआत में लिखा है कि मीटिंग कर इस बारे में सभी को अवगत कराया जा चुका है। उसके बाद लिखा है कि मोदी के मंच को बम से उड़ाना है।

सुरक्षा एजेंसियों को मिले इस पत्र में RDX के प्रयोग से रैली के दौरान पीएम मोदी पर एक सुनियोजित हमला करने की साज़िश का विवरण है। इस पत्र में शताब्दी एक्सप्रेस और दिल्ली-कानपुर मार्ग पर बने एक पुल पर हमला करने के बारे में भी लिखा है।

कालिंदी एक्सप्रेस ने शाम 5:30 बजे कानपुर सेंट्रल स्टेशन से भिवानी, हरियाणा की ओर यात्रा शुरू की। ट्रेन कानपुर से 40 किमी दूर, बर्राजपुर स्टेशन पर शाम करीब 6:40 बजे पहुँची। बम धमाका सामान्य डिब्बे के टॉयलेट में हुआ। राजकीय रेलवे पुलिस ने सबसे पहले विस्फोट की जानकारी दी और बाद में आतंकवाद निरोधी दस्ते ने जाँच अपने हाथों ली।

पत्र के मुताबिक कानपुर से 30 किमी दूर, 27 फरवरी को एक पुल पर एक विस्फोट होना निर्धारित किया गया था। फिर, डेढ़ किलो RDX का उपयोग करके, कानपुर-दिल्ली शताब्दी एक्सप्रेस पर हमला किया जाना था। हमले से एक दिन पहले विस्फोटकों को दिल्ली के आनंद विहार बस टर्मिनल पर सौंप दिया जाना था। पत्र के ऊपरी भाग पर 786 और शब्द “पैगाम” लिखा है।


पत्र के ऊपरी भाग पर 786 और शब्द “पैगाम” लिखा है

इसके बाद पत्र में आगामी पीएम मोदी की रैली का विवरण है, इस रैली के दौरान दो किलो RDX के इस्तेमाल से धमाका करने का मक़सद था। पत्र में इस बात का भी ज़िक्र है कि इन हमलों के लिए लगभग 5 करोड़ रुपये लगाए गए हैं।

पत्र के अलावा एजेंसियों को एक डायरी भी मिली है, इसमें कानपुर के मक्कड़पुर शहर के निवासियों के कई गुप्त कोड और नाम दर्ज हैं। फ़िलहाल, एजेंसियों द्वारा इन गुप्त ​​कोडों को क्रैक करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके अलावा घटना स्थल पर आधा किलो माँस से भरा बैग भी बरामद किया गया।

SSP अनंत देव तिवारी के मुताबिक, पत्र और डायरी की जाँच हो रही है और मामले को गंभीरता से लिया गया है। ट्रेन विस्फोट के गुर्गों का पता लगाने के लिए एक अलग टीम का गठन भी किया गया है। अपराधियों की धर-पकड़ के लिए जाँच एजेंसियाँ ​​सीसीटीवी कैमरों की मदद ले रही हैं।

रवीश जी गालियाँ आपके पत्रकारिता से तंग जनता का आक्रोश है, इसे भारत-माँ के नाम मत कीजिए

परम आदरणीय रवीश जी,

आज आपकी फिर बहुत जोर से याद आयी, यूँ ही नहीं, मैंने कल आपका राष्ट्र के नाम सन्देश पढ़ा तो ख़ुद को आपको याद करने से नहीं रोक पाया। आपको तो पता ही होगा कि आप एक ‘महान’ पत्रकार हैं। पर रवीश जी, आपको जो महानता हासिल हुई है क्या उसका सर्टिफिकेट आपने ख़ुद छापा या इस देश के लोगों ने आपको इतना सम्मान दिया कि आप पत्रकारिता के एक पर्याय बने? बहुतों ने आपको देखकर आपके जैसा बनना चाहा। ऐसे कई लोगों से तो मैं मिला भी हूँ। जो लोग आपके प्राइम टाइम का बेसब्री से इंतज़ार करते थे।

वो आज आपका नाम सुनते ही कंटेंट ख़ुद बताने लगते हैं कि आपने क्या लिखा होगा? आज हम उस दौर में जी रहे हैं जब ख़ुद आपको ही ये अपील करनी पड़ रही है दर्शकों से कि ‘आप टीवी से दूर रहें। हमारी तो नौकरी है, हमें तो प्राइम टाइम करना ही होगा लेकिन अब यहाँ भी आपके देखने-जानने-समझने लायक कुछ भी नहीं है।’ इसलिए अब मुझसे उम्मीदे न रखें। सोचिए ना आज-कल आपने प्राइम टाइम का क्या हाल कर दिया है। आपने तो एक तरह से हथियार ही डाल दिया कि अब हमसे पत्रकारिता नहीं हो पाएगा। अब जो कर रहा हूँ बस यही मुझमें शेष है। आपके अंदर इतना खोखलापन देखकर सच में बहुत दुःख हो रहा है रवीश जी।

ख़ैर, कल रवीश जी आपने लिखा कि लोग आपको गालियाँ दे रहे हैं। सच में यह जानकर बहुत दुःख हुआ। पर सर, क्या आपने सोचा कभी कि क्यों दे रहे हैं? ऐसा आप क्या कर रहे हैं जो आपको पत्रकारिता के सिरमौर बनाने वाले दर्शक आज आपसे ख़फ़ा हैं। क्या आपने ये भी सोचा कि कौन लोग हैं ये, जो आपको गालियाँ दे रहे हैं? आपने तो बड़ी आसानी से इनके लिए एक वर्ग चुना ‘देश भक्त’। क्या आपके हिसाब से देश भक्ति की यही परिभाषा है। क्या जो आपको गालियाँ नहीं दे रहे वो देश भक्त नहीं, कुछ और हैं?

रवीश जी, आपने गौर किया कि आप पिछले कुछ सालों से पत्रकारिता के नाम पर जो कर रहे हैं वो क्या है? पूरे देश को काला-सफ़ेद दो वर्गों में बाँटने का पराक्रम करके भी आपके हाथ कुछ नहीं लगा। आपको भी मालूम है कि इनके बीच भी कई शेड हैं। जानते हैं सर, यह वही शेड हैं, जो अब उभर कर सामने आ रहे हैं। जो पहले आपको ठीक से नहीं समझ पा रहे थे। जब वो खुल कर बोलने लगे तो आपने उन्हें ‘भक्त’ कहा, सम्मान वश नहीं बल्कि गाली के रूप में ही जबकि आपको अच्छी तरह पता है कि आप जो कर रहे हैं वह भी वही है बस आपका तारणहार अलग है या आप खुद ही भगवान बनने की लालसा में किसी का तारणहार बनने के लिए जी जान से लगे हैं?

आपने पहले इस देश के युवाओं को ललकारा कि तो थोड़ा पढ़ लिख लिया करो। यही गलती कॉन्ग्रेस ने केज़रीवाल को राजनीति के लिए ललकार कर और मोदी को गाली देकर की थी। एक ने ऐसी राजनीति की कि लोग कहते हैं इसे देखकर गिरगिट भी रंग बदलना छोड़ दिया है। और जब मोदी को ललकारा तो उन्होंने विकास को आगे कर कॉन्ग्रेस को पीछे छोड़ दिया। बहरहाल, आपकी बात जम गई युवाओं को। जब पढ़ने लगे तो उनको आपकी पत्रकारिता में झोल नज़र आने लगा सर। शुरुआत में वो ग़लती कर रहे थे तो आपने फिर उन्हें राह दिखाई कि व्हाट्सप यूनिवर्सिटी नहीं बल्कि सही स्रोतों का इस्तेमाल करें।

रवीश जी आप तो गुरु हैं आपको ख़ुश होना चाहिए, आज आपके वही छात्र जैसे ही आप कुछ भी आधा-अधूरा परोसते हैं वो फटाक से पढ़-वढ़कर उसका ठीक से पोस्टमॉर्टम कर देते हैं। आपके पूरे प्रोपेगंडा की चिन्दी-चिन्दी कर उससे ‘राफ़ेल’ बनाने की कला सीख गए हैं। सर, जैसे-जैसे आपके लेखों में साल दर साल गन्दगी बढ़ती गई। आपके छात्र भी परिपक्व होते गए अब उन्हें आपके बोलने में भी काइयाँपन नज़र आने लगा, आपकी तिरछी मुस्कान में छिपी कुटिलता को भी ये भाँपने लगे और जब आप हें-हें-हें करते हैं न तो पक्का ये समझने लगे कि देश की जनता से पत्रकारिता के नाम पर कुछ बड़ा झोल अब करने वाले हैं आप।

अब सोशल मीडिया से लेकर आप अपने प्राइम टाइम पर जो भी खिचड़ी परोसते हैं, इससे पहले कि आँख मूँदकर आपके भक्त वाह-आह करें, उससे पहले ही आपके छात्र पहचानने लगे हैं कि यह खिचड़ी है किस चीज़ की। क्या-क्या और कौन सा सड़ा-गला सामान उनके गुरु ने स्वाद और सेहत का पर्याय बना कर परोस दिया है। जानते हैं सर, आपके छात्रों की मेधा से देश की आम जनता की भी आँखे खुलने लगी हैं।

पहले आप जो कुछ भी परोस देते थे, जो बेचारे उसे चुपचाप अमृत समझ खा लेते थे। रवीश जी, जानते हैं जो पहले आपका दिया सब कुछ खा लेते थे ना, वो अपना पूरा लिवर, गाल ब्लेडर डैमेज कर बैठे हैं। डॉ. ने उनसे पूछा कि पहले क्या खाते थे, जिससे दिनों-दिन आपकी सेहत गिरती गई। फिर आपके दर्शकों और पाठकों को लगा कि धोख़ा हुआ है हमारे साथ, हमारी भावनाओं और भरोसे का गला घोटा गया है। हर तरफ़ एक आक्रोश पनपने लगा।

जानते हैं रवीश जी जब कोई अपना धोखा दे ना तो ज़्यादा बुरा लगता है। परिणामस्वरुप अचानक से आपके भक्ति का ग्राफ़ गिरने लगा, आपके पूरे गिरोह की नींव डगमगाने लगी तो आप सीधे-सीधे खुलकर सामने आ गए। अब प्रोपेगंडा ही आपके लिए ख़बर हो गई। पर कम्बख़्त जब वो भी नहीं चला तो आपने अभी-अभी जागी जनता को फिर से सोने को कह दिया, पर ये सम्भव न हुआ।

रवीश जी, जिसे आप जिसे गाली कह रहे हैं वो गाली नहीं, बल्कि आपसे खीझी हुई जनता का आक्रोश है। ये आइना है आपके लिए कि आप अपना पुनः मूल्यांकन करें और जानें कि आप कौन सी गलती कर रहे हैं? आपकी अपनी भक्त जनता भी जब आपसे उकता कर अपना आक्रोश व्यक्त करने लगी है तो आपने और आपके गिरोह ने ‘भक्त’ शब्द को ही गाली बना दिया और अब ‘देश भक्ति’ के पीछे पड़े हैं।

रवीश जी, आपने कहा कि आपको जो गालियाँ दी गईं, उसमें माँ-बहनों के जननांगों को केंद्रित किया गया है। दुर्भाग्य है, ऐसा नहीं होना चाहिए। मैं भी इसके सख्त ख़िलाफ़ हूँ। जनता और आपके छात्रों को अपना आक्रोश व्यक्त करने के लिए या तो संसदीय गालियां ईज़ाद करनी चाहिए या फिर कोई और तरीका अपनाना चाहिए। पर जानते हैं रवीश जी, मुझे जो लग रहा है, ये आम जनता है। ये आपके जितना क्रिएटिव नहीं कि ‘देश भक्ति’ को ही गाली बना दे। रवीश जी, आपके एक पुराने छात्र ने तो खुलकर ये स्वीकार किया कि ये बस आपके प्रोपेगंडा से ऊबी जनता का आक्रोश है।

आप तो विद्वान हैं रवीश जी, जानते ही होंगे कि जब हम गुस्से में होते हैं तो यूँ ही किसी को बोल देते हैं कि ‘ज़िंदा गाड़ दूँगा’, ‘आँखे निकाल लूँगा’, यहाँ तक कि खीझी माँ भी अपने बच्चे को बोल देती है कि ‘मर क्यों नहीं जाते’! इनमें से जो भी ऐसा बोलता है वो ऐसा चाहता नहीं सर और न ही करता है बल्कि वो खीझा हुआ है, तंग है, ऐसा करने का मक़सद सिर्फ़ ये जताना होता है कि कुछ तो गड़बड़ है, अन्याय पूर्ण है जो नहीं होना चाहिए।

पर सर आपने तो हद कर दी। जब आपको तारीफें मिली, प्रसिद्धि मिली, आज आप जो कुछ हैं जब वो सब मिला तो आपने कभी नहीं कहा कि ये सब ‘भारत माँ’ की वजह से है। और जब आपको आपके विचारों और पत्रकारिता के नाम पर प्रोपेगंडा से त्रस्त जनता और आपके अपने ही छात्रों का आक्रोश झेलना पड़ रहा है तो आप आज कह रहे हैं कि ये सभी गालियाँ मैं ‘भारत माँ’ को समर्पित कर रहा हूँ। क्या आप की नज़र में आज ‘भारत माँ’ यही डिज़र्व करती हैं?

दूसरे शब्दों में आज आप देश भक्तों का सहारा ले परोक्ष रूप से ही सही पत्रकारिता के नाम पर भारत माँ को गाली नहीं दे रहे?

अभी भी वक़्त है रवीश जी लौट आइए। पत्रकारिता का वो सुनहरा दौर फिर से ले आइए। जिस दिन से आप फिर से पत्रकारिता करने लगेंगे, देश की यही जनता, आपके भक्त और पुराने छात्र आपके तारीफ़ में कसीदें पढ़ते नज़र आएँगे। हमारे यहाँ तो कहावत है कि सुबह का भूला शाम को घर लौट आए तो उसे भूला नहीं कहते। छोड़ दीजिए ना ये प्रोपेगंडा, मत कीजिए ‘देश भक्ति’ और भारत-माँ को गाली बनाने का कुत्सित प्रयास।

देश सिर्फ़ सीमाओं की घेराबंदी नहीं बल्कि वहाँ के लोगों के अंदर व्याप्त उसके प्रति प्रबल भावनाओं से बनता है, विकसित होता है। जिस दिन से आपने फिर से पत्रकारिता शुरू कर दी ना रवीश जी, ये आक्रोशित लोग जिसे आपने पढ़ने-लिखने के लिए प्रेरित किया है, जिनके आप मनोनीत गुरु हैं, यूँ अपने अभिव्यक्ति की आज़ादी का दुरुपयोग करना छोड़ देंगी, ये सब इस पीढ़ी ने आप ही से सीखा है। बस आपने थोड़ा नाटकीय ढंग से उसमे काइयाँपन भी मिलाकर फेंट लिया है और ये आपसे विमुख आपके भक्त, आपके पूर्व छात्र आज भी सीधे-सरल बने हुए हैं।

सधन्यवाद
पत्रकारिता के अच्छे दिनों के लिए कृतसंकल्प एक पत्रकार