मेरठ विकास प्राधिकरण (MDA) ने मंगलवार को बहुजन समाज पार्टी (BSP) के नेता याकूब कुरैशी के बूचड़खाने को सील कर दिया है। फ़रवरी के पहले सप्ताह में स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा बूचड़खाने के संबंध में कार्रवाई पर रोक लगाने वाले आदेश को MDA ने रद्द कर दिया है।
अल फहीम मीटेक्स प्राइवेट लिमिटेड (Al Faheem Meatex Pvt Ltd meat factory) नाम के इस मीट फैक्ट्री को बनाने से पहले संबंधित सरकारी अधिकारियों से नक्शे को मंजूरी नहीं मिली थी। जिस जमीन पर बूचड़खाने का निर्माण किया गया है, उसके कुछ हिस्से नन-कंपाउंडेबल क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं।
इससे पहले स्थानीय प्रशासन ने एमडीए द्वारा बूचड़खाने को सील करने पर रोक लगा दी थी। हालाँकि, फैक्ट्री को सील करने से पहले MDA ने संचालक को अपना पक्ष रखने के लिए कहा था, लेकिन जब संचालक अपना पक्ष नहीं दे सका, तो MDA की तरफ से स्टे आर्डर रद्द कर दिया गया।
बता दें कि बूचड़खाने के मालिक कुरैशी को बसपा ने मेरठ-हापुड़ सीट के लिए के लोकसभा प्रभारी के रूप नियुक्त किया है। पिछले दिनों कुरैशी ने उच्च न्यायालय से सीलिंग पर रोक लगाने की माँग की थी, लेकिन उच्च न्यायालय ने कुरैशी की माँग को ठुकरा दिया था।
पिछले मंगलवार को MDA के अधिकारी पुलिस के साथ बूचड़खाने वाली जगह पर पहुँचे। इसके बाद बूचड़खाने को अधिकारियों ने सील कर दिया। यही नहीं किसी भी इस क्षेत्र में किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए पुलिस की तरफ से काफ़ी सतर्कता बरती गई थी।
हालाँकि, कुछ मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अधिकारियों ने अवैध क्षेत्र को सील करने में केवल औपचारिकता की थी क्योंकि बूचड़खाने का केवल एक छोटा सा हिस्सा सील किया गया था। मीडिया रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि MDA टीम को शुरू में परिसर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं थी और बाद में बहुत संघर्ष के बाद बूचड़खाने के अंदर जाने की अनुमति दी गई।
जानकारी के लिए बता दें कि कुरैशी पहली बार 2006 में खबरों में तब आए थे, जब उन्होंने डेनमार्क के एक कार्टूनिस्ट के सिर लाने वाले को 51 लाख रुपए देने की बात कही। कुरैशी ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि वह कार्टूनिस्ट इस्लाम विरोधी कार्टून बनाता था। यही नहीं कुरैशी यूपी के कद्दावर नेताओं में से एक हैं। इन्हें तत्कालीन मुलायम सिंह यादव सरकार में ‘मुस्लिम मामलों’ का मंत्री बनाया गया था। उन्होंने बाद में बसपा को ज्वाइन कर लिया।
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) छात्र संघ के अध्यक्ष सलमान इम्तियाज सहित 14 छात्रों के ख़िलाफ़ देशद्रोह का मुक़दमा दर्ज किया गया है। इन छात्रों पर आईपीसी की धारा 124A के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने AMU में पढ़ने वाले इन छात्रों के ख़िलाफ़ तोड़-फोड़ और लोगों की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप भी लगाए हैं।
एएमयू उपद्रवियों के ख़िलाफ़ प्रमुख शिकायतकर्ता भाजपा युवा मोर्चा के सदस्य मुकेश लोढ़ा ने आरोप लगाया है कि एएमयू छात्र संघ अध्यक्ष सहित कुछ अन्य छात्रों ने विरोध दर्ज कराने की वजह से उनकी कार को रोककर उन्हें धमकी दी।
मुकेश लोढ़ा ने बताया कि कैंपस के उपद्रवी छात्रों की भीड़ ने कई वाहनों को आग लगा दी। इसके बाद उपद्रवी छात्रों ने भारत विरोधी और पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगाए। जिसके बाद उन्होंने उपद्रवियों के ख़िलाफ़ राजद्रोह का मामला दर्ज करने के लिए थाने में शिकायत की।
An FIR has been filed against 14 AMU students. The FIR also names AMU student Union President Salman Imtiaz. The students have been booked for allegedly raising pro-Pakistan slogans. More details by @tusharswaruppic.twitter.com/u9utCi2ewp
इस मामले में अलीगढ़ पुलिस ने कहा है कि धारा 307 और धारा 153 को किसी समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने और हिंसक धमकी और तोड़-फोड़ में लिप्त होने के लिए AMU के अराजक तत्वों के ख़िलाफ़ चालान किया गया है।
यही नहीं अलीगढ़ पुलिस ने एएमयू कैंपस में अराजकता फैलाने वाले 56 छात्रों को कैंपस से निष्कासित करने की माँग विश्वविद्यालय प्रशासन से की है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार जल्द ही इन अराजक छात्रों के ख़िलाफ़ गैर-जमानती वारंट जारी किया जाएगा।
बता दें कि एक दिन पहले AMU छात्रों द्वारा रिपब्लिक टीवी के क्रू को परेशान किया गया था जिसके बाद उपद्रवी छात्रों के ख़िलाफ़ धारा 307 और धारा 153 के तहत टीवी क्रू ने स्थानीय पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी।
AMU कैंपस में उपद्रवी छात्रों ने रिपब्लिक टीवी के पत्रकारों को धमकाया था, जिसमें एक महिला पत्रकार भी शामिल थी। भीड़ ने महिला क्रू मेंबर्स को धमकी दी थी कि किसी भी कीमत पर महिला होने की वजह से उन्हें नहीं बख्शा जाएगा। यही नहीं छात्रों ने महिला पत्रकार के साथ अभद्रता करते हुए उसका कैमरा भी तोड़ दिया था।
द वायर ने इस घटना के बारे में एक झूठी कहानी गढ़कर एएमयू के गुंडागर्दी कर रहे छात्रों का समर्थन करते हुए कहा कि रिपब्लिक टीवी वालों ने ही भड़काया था। हालाँकि, एक विडम्बना ये भी है कि एएमयू में पाकिस्तान समर्थक नारे लगाए जाने की ख़बर को मुख्यधारा की मीडिया बहुत अधिक गंभीरता से नहीं ले रही है।
केरल पुलिस ने एक नाबालिग लड़की के यौन शोषण के मामले में थोलिकोड (Tholicode) के मुख्य इमाम और केरल इमाम काउंसिल के सदस्य शफ़ीक़ अल क़ासिमी के ख़िलाफ़ POCSO अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है।
Kerala: Police registers a case under POCSO Act & relevant sections of the IPC against former Chief Imam of Tholicode Jama Ath, Shafeek Al Qasimi for sexually assaulting a minor girl. The Imam has been suspended by the Jama Ath committee.
ख़बरों के अनुसार, मस्जिद कमेटी के बयान के बाद मामला दर्ज किया गया था, जिसमें कहा गया था कि इमाम ने एक 15 वर्षीय लड़की को बहका कर जंगल में ले जाकर बच्ची का यौन उत्पीड़न किया। स्थानीय महिलाओं के एक समूह ने जब इमाम को एक स्कूल जाने वाली लड़की के साथ देखा तो भेद खुल गया।
थोलिकोड मुस्लिम मस्जिद के अध्यक्ष की शिकायत के पर मंगलवार को तिरुवनंतपुरम के नेदुमंगद (Nedumangad) के विथुरा पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया। कहा जाता है कि इमाम भी उसी मस्जिद में काम किया करता था। घटना की सूचना मिलने के बाद, दरिंदे शफ़ीक़ को मस्जिद और इमाम परिषद में उनके पद से हटा दिया गया था।
रिपोर्ट के अनुसार, कई गवाहों द्वारा नाबालिग के यौन उत्पीड़न की पुष्टि की गई है। मस्जिद के अध्यक्ष बदुशा (Badusha) द्वारा इन गवाहों के बयान का एक ऑडियो क्लिप जारी की गई थी। मस्जिद के सदस्यों द्वारा जाँच शुरू करने के बाद इस पूरे मामले का खुलासा हो गया है। रिपोर्ट के अनुसार, जब स्थानीय महिलाओं ने इमाम से सवाल किया, तो उसने झूठ बोला कि बच्ची उसकी पत्नी थी। जब महिलाओं ने बच्ची के यूनिफॉर्म और स्कूल के बैज पर ध्यान दिया, तो उन्हें संदेह हुआ।
जब महिलाओं ने सवाल किया कि 15 साल की लड़की 40 वर्षीय व्यक्ति की पत्नी कैसे हो सकती है, तब इमाम आपा खोने लगा और ख़ुद ही चिल्लाता हुआ वहाँ से भाग निकला।
बता दें कि मदरसों और चर्च में एक के बाद एक यौन उत्पीड़न के मामले सामने आ रहें हैं, कुछ दिन पहले केरल के एक पादरी पर चर्च की ननों के यौन उत्पीड़न का मामला सामने आया था।
इस दुनिया में हर किसी को एक जीवन साथी चाहिए होता है जिसके लिए आजकल शहरों में रहने वाले लड़के-लड़कियाँ तरह-तरह के जतन करते हैं। लेकिन भारत के कुछ भागों में प्राचीनकाल से ही आदिवासी समुदाय के लोग द्रौपदी के स्वयंवर से प्रेरित ऐसे आयोजन का हिस्सा बनते रहे हैं जहाँ लड़के-लड़कियाँ अपना जीवन साथी स्वयं चुनते हैं।
गुजरात के सुरेन्द्रनगर ज़िले में तरनेतर का मेला लगता है जहाँ पारंपरिक नृत्य इत्यादि होते हैं। विवाहिताएँ तो काले लहंगे में नाचती हैं लेकिन जो लड़कियाँ लाल लहंगे में नाचती हैं उन्हें वर चाहिए होता है। त्रिनेत्रेश्वर महादेव के मंदिर के पास लगने वाले मेले में यह परंपरा 200-250 वर्षों से चली आ रही है। यह मेला आज भी लगता है तथा कुछ मात्रा में जीवनसाथी पसन्द भी किए जाते हैं।
छत्तीसगढ़ में ऐसा ही भगोरिया मेला लगता है। भगोरिया एक उत्सव है जो होली का ही एक रूप है। यह मध्य प्रदेश के मालवा अंचल के आदिवासी इलाकों में बेहद धूमधाम से मनाया जाता है। भगोरिया के समय धार, झाबुआ, खरगोन आदि क्षेत्रों के हाट-बाजार मेले का रूप ले लेते हैं और हर तरफ फागुन और प्यार का रंग बिखरा नजर आता है।
भगोरिया हाट-बाजारों में युवक-युवती बेहद सजधज कर अपने भावी जीवनसाथी को ढूँढने आते हैं। इनमें आपसी रज़ामंदी ज़ाहिर करने का तरीका भी बेहद निराला होता है। सबसे पहले लड़का लड़की को पान खाने के लिए देता है। यदि लड़की पान खा ले तो हाँ समझी जाती है। इसके बाद लड़का लड़की को लेकर भगोरिया हाट से भाग जाता है और दोनों विवाह कर लेते हैं। इसी तरह यदि लड़का लड़की के गाल पर गुलाबी रंग लगा दे और जवाब में लड़की भी लड़के के गाल पर गुलाबी रंग मल दे तो भी रिश्ता तय माना जाता है।
बिहार के मिथिला क्षेत्र के मधुबनी में सौराठ सभा अर्थात दूल्हों का मेला लगता है। यह मेला हर साल ज्येष्ठ या अषाढ़ महीने में 7 से 11 दिनों तक लगता है जिसमें कन्याओं के पिता योग्य वर को चुनकर अपने साथ ले जाते हैं। यह एक प्रकार से सामूहिक अरेंज मैरिज होता है। इस सभा में लड़के अपने पिता व अन्य अभिभावकों के साथ आते हैं। कन्या पक्ष के लोग वरों और उनके परिजनों से बातचीत कर एक-दूसरे के परिवार कुल-खानदान के बारे में पूरी जानकारी इकट्ठा करते हैं और दूल्हा पसंद आने पर रिश्ता तय कर लेते हैं।
सौराठ सभा में पारंपरिक पंजीकार होते हैं जो तय हो चुके रिश्ते का पंजीकरण करते हैं। पंजीकार के पास वर और कन्या पक्ष की वंशावली होती है। उसमें पंजीकार दोनों तरफ की सात पीढ़ियों के उतेढ़ (विवाह का रिकॉर्ड) का मिलान करते हैं। दोनों पक्षों के उतेढ़ देखने पर जब पुष्टि हो जाती है कि दोनों परिवारों के बीच सात पीढ़ियों में इससे पहले कोई वैवाहिक संबंध नहीं हुआ है, तब पंजीकार रिश्ता पक्का करने की स्वीकृति देता है।
छत्तीसगढ़ की मुरिया और गोंड जनजाति के लोगों में लड़के लड़कियों के स्वछंद मिलन की प्रथा है जिसे घोटुल कहा जाता है। घोटुल एक बड़े कुटीर को कहते हैं जिसमें पूरे गाँव के बच्चे या किशोर सामूहिक रूप से रहते हैं। यह छत्तीसगढ़ के बस्तर ज़िले और महाराष्ट्र व आंध्र प्रदेश के पड़ोसी इलाक़ों के गोंड ग्रामों में विशेष रूप से मिलते हैं। अलग-अलग क्षेत्रों की घोटुल परंपराओं में अंतर होता है।
कुछ में बच्चे घोटुल में ही सोते हैं और अन्य में वे दिन भर वहाँ रहकर रात को अपने-अपने घरों में सोने जाते हैं। घोटुल में क़बीले से संबंधित आस्थाएँ, ज्ञान, नृत्य-संगीत और कथाएँ सीखी जाती है। कुछ में किशोर किशोरियाँ आपस में बिना बाधा मिलकर जीवन साथी भी चुना करते हैं जिसे आज के ज़माने की ‘डेटिंग’ जैसा समझा जा सकता है। हालाँकि यह आधुनिक शहरी मान्यताओं के दबाव में धीरे-धीरे कम हो रहा है।
इसी प्रकार उत्तराखंड की भोटिया जनजाति में ‘रड़-बड़ विवाह’ की प्रथा हुआ करती थी, जिसमें महिलाओं को अपना वर चुनने का अधिकार होता था। इस प्रथा में विशाल मेले का आयोजन किया जाता था और लोग बड़ी मात्रा में इसमें हिस्सा लेकर अपना मनचाहा जीवन साथी चुन सकते थे। यह परंपरा उत्तराखंड में प्राचीन समय से ही महिलाओं की इच्छाओं के मान सम्मान का भी परिचायक है।
भारतीय रेलवे ने ट्वीट द्वारा की गई अपील पर एक्शन लेते हुए एक महिला को त्वरित मेडिकल सपोर्ट मुहैया कराई। दरअसल, प्रशांत भारती नामक व्यक्ति ने ट्वीट कर रेलवे को महिला के पेट में असहनीय दर्द होने की सूचना दी, जिसके बाद रेलवे ने संज्ञान लेते हुए मेडिकल टीम भेजी।
Kindly share your PNR number. @Drmncrald Please provide medical assistance.
प्रशांत भारती ने अपने ट्वीट में रेलवे को टैग करते हुए लिखा:
“कुम्भ यात्रा पर जा रहीं किशनगंज के भावेश जालान की माताजी पारवती जालान के पेट में असहनीय दर्द है। ट्रैन प्रयाग स्टेशन पहुँचने वाली है। तुरंत मेडिकल सपोर्ट की ज़रूरत है।”
इसके बाद रेलवे ने तुरंत संज्ञान लेते हुए प्रशांत से पीएनआर संख्या माँगी। रेलवे ने प्रयागराज के डिविजनल रेलवे मैनेजर को टैग करते हुए तुरंत मेडिकल सुविधाएँ मुहैया कराने को कहा।
रेलवे यात्रियों की कुशलता के लिए किसी भी प्रकार की सहायता पहुंचाने के लिए हमेशा तैयार है, आशा करते है वह अब पूर्णतः स्वस्थ होंगी https://t.co/iwCS6OkMBv
कुछ देर बाद प्रशांत ने ट्वीट कर जानकारी देते हुए बताया कि उक्त महिला तक समुचित चिकित्सा पहुँच गई है। उन्होंने रेलवे व डीआरएम को उनकी सामूहिक तत्परता के लिए ह्रदय से आभार व्यक्त किया।
इसके बाद केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने ट्ववीट कर महिला के स्वास्थ्य की कामना की। उन्होंने बताया कि रेलवे यात्रियों की कुशलता के लिए किसी भी प्रकार की सहायता पहुंचाने के लिए हमेशा तैयार है। रेल मंत्री के ट्वीट के प्रत्युत्तर में प्रशांत ने बताया कि पार्वती जालान अब सकुशल हैं और उन्होंने पूरी रेलवे टीम को धन्यवाद भेजा है।
सोशल मीडिया पर भी लोगों ने रेलवे को उसकी तत्परता के लिए सराहा। लोगों ने कहा कि इस तरह की सर्विस पहले कभी नहीं देखी। उन्होंने मोदी कैबिनेट के मंत्रियों को ‘कुशल’ बताया।
गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले तीन सालों की तुलना में 2018 में सेना ने सबसे अधिक आतंकियों को जम्मू-कश्मीर में मार गिराया है। रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि 2016 में भारतीय सेना ने 135 आतंकियों को मार गिराया था, जबकि 2017 में यह आँकड़ा 207 पहुँच गया था।
2018 में सेना ने कश्मीर में 244 आतंकी को मार गिराया। इस तरह जाहिर होता है कि केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद कश्मीर में आतंकी सफाई को लेकर बड़ा कदम उठाया गया है।
कश्मीर में अशांति फैलाने वाले आतंकी समूह को जड़ से खत्म करने के लिए सेना दिन-रात काम कर रही है। इसका परिणाम यह हुआ है कि पिछले साल सबसे ज्यादा घुसपैठ करने की कोशिश आतंकियों द्वारा की गई, लेकिन उन सबको बॉर्डर पर मार गिराकर सेना ने आतंकियों के मंसूबे पर पानी फेर दिया।
हालाँकि, 2017 की तुलना में 2018 में संघर्ष विराम उल्लंघन की ज्यादा घटनाएँ घटी हैं। 2017 में संघर्ष विराम की 971 घटनाएँ घटी जबकि 2018 में संघर्ष विराम की 2140 घटनाएँ घटी। पिछले साल आतंकी और पाकिस्तानी सेना द्वारा जब कभी घुसपैठ का प्रयास किया गया या फिर संघर्ष उल्लंघन किया गया तो भारतीय सेना ने मुँहतोड़ जवाब दिया है।
जानकारी के लिए बता दें कि कश्मीर में सेना के सफल प्रयास से ही हिज़्बुल मुज़ाहिद्दीन का गढ़ माने जाने वाला ज़िला बारामूला को अब आतंक-मुक्त घोषित कर दिया गया है। सेना और पुलिस की इस क़ामयाबी पर पूरे देश को गर्व होना चाहिए। 23 जनवरी 2019 को सेना के साथ मुठभेड़ में तीन आतंकियों के मारे जाने के बाद जम्मू एवं कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह ने इस बात की पुष्टि की थी।
जम्मू एवं कश्मीर में जितने भी आतंक प्रभावित ज़िले हैं, उनमें से बारामूला आतंक-मुक्त घोषित होने वाला पहला ज़िला है।
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव भी पीएम मोदी के फैन निकले! लोकसभा चुनाव से पहले मुलायम सिंह ने बड़ा बयान दिया है। पूर्व सपा सुप्रीमो ने नरेंद्र मोदी के फिर से प्रधानमंत्री बनने की कामना की है। बजट सत्र के आखिरी दिन मुलायम ने पीएम मोदी की उपस्थिति में सदन में कहा:
“मेरी कामना है कि यहाँ जितने भी सदस्य हैं, वे फिर से चुनकर आएँ। हम इतना बहुमत हासिल नहीं कर सकते हैं, इसलिए प्रधानमंत्री जी आप फिर प्रधानमंत्री बनकर आएँ।”
मुलायम सिंह के इस बयान का सदन ने ठहाकों और तालियों की गड़गड़ाहट से स्वागत किया। संसद में यूपीए अध्यक्षा सोनिया गाँधी के साथ बैठे मुलायम ने जैसे ही पीएम मोदी के बारे में ऐसा कहा, लोकसभा में ‘जय श्री राम’ के नारे गूँजने लगे। उनके बगल में बैठीं सोनिया गाँधी इस दौरान इधर-उधर देखने लगीं।
Mulayam Singh Yadav says he wants PM Modi to come back as PM !!
मुलायम सिंह के इस बयान के कई राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। उनके बेटे और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने यूपी में मोदी के रथ को रोकने के लिए नेताजी की पुरानी राजनीतिक दुश्मन मायावती से गठबंधन कर लिया है। अखिलेश आए दिन मोदी पर हमला करते रहते हैं। ऐसे वक़्त पर मुलायम के इस बयान को अहम माना जा रहा है। क्या नेताजी ने देश का मूड पहले ही भाँप लिया है?
प्रधानमंत्री मोदी की प्रसंशा करते हुए मुलायम सिंह यादव ने कहा:
“मैं प्रधानमंत्री जी को बधाई देना चाहता हूँ। आपने सबसे मिल जुल करके सबका काम किया है। हम जब-जब मिले, किसी काम के लिए कहा, आपने उसी वक्त ऑर्डर किया। मैं आपका आदर करता हूं, सम्मान करता हूँ।”
Ravidas Mehrotra, Samajwadi Party, on Mulayam Singh Yadav’s remark in Lok Sabha, ‘I wish you (PM Modi) become PM again’: I don’t have knowledge about the context in which Neta Ji said it. But we want change of government at center. PM himself will lose from his constituency pic.twitter.com/R29Kl6wBj0
राहुल गाँधी ने मुलायम के इस बयान से असहमति जताई है। उन्होंने कहा कि मुलायम सिंह का राजनीति में अहम योगदान है और वे उनका सम्मान करते हैं। पीएम मोदी ने भी सदन में अपने भाषण के दौरान मुलायम के इस बयान का ज़िक्र करते हुए कहा- “मुझे मुलायम सिंह जी ने आशीर्वाद दे दिया है। मैं उनका सम्मान करता हूँ।“
मुलायम सिंह ने लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन की भी तारीफ़ की। उन्होंने कहा कि सुमित्रा महाजन अच्छी तरह से सदन चलाने में क़ामयाब हुईं हैं। समाजवादी पार्टी के नेताओं ने कहा कि उन्हें मुलायम सिंह के बयान की जानकारी नहीं है।
प्रयागराज में कुम्भ चल रहा है। आस्था और उत्साह का सैलाब चरम पर है। कुम्भ मेले की व्यापकता का ही प्रभाव है कि हिन्दुओं के साथ-साथ अन्य आस्था, मत, सम्प्रदाय और धर्म के लोग हर तरह से प्रयागराज में चल रहे कुम्भ मेले का आनंद ले रहे हैं।
सनातन हिन्दू धर्म के इस त्यौहार की सबसे बड़ी खूबी है कि इसके विस्तार में सिर्फ हिन्दू ही नहीं बल्कि बड़े स्तर पर यह लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ हुआ है। इसका सबसे बेहतरीन उदाहरण प्रयागराज से आने वाली ये तस्वीरें हैं जिसमें सद्गुरु यीशु आपको अपने से जोड़ने की प्रार्थना कर रहे हैं।
हिन्दू धर्म की सहिष्णुता का ये एक बहुत बड़ा उदाहरण है। त्यौहार हिन्दुओं का, डुबकी हिन्दुओं की, ताम-झाम हिन्दुओं का और हाथ धो रहे हैं ईश्वर के पुत्र पवित्र यीशु! धर्म परवर्तन और प्रचार के मकसद से डाले गए ईसाई धर्म के कैंप प्रयागराज तक भी पहुँच चुके हैं। और इसके लिए विकसित देशों से उपजी धर्म परिवर्तन की सभ्यताएँ हर तरह के हथकंडे अपना रही है। कुम्भ मेले में ईसाई मिशनरियों के पंडाल का प्रमुख उद्देश्य यही है।
प्रयागराज में चल रहे कुम्भ में जो पर्चे बाँटे जा रहे हैं उनमें बहुत ही आसानी से यीशु (ईसा मसीह) को ‘सद्गुरु यीशु’ बनाकर जनता के सामने रखा जा रहा है। हिन्दू धर्म के पवित्र उपनिषदों के श्लोकों में ईसा मसीह को ठूँसकर परोसा जा रहा है। धर्म परिवर्तन का यह वाकया धर्म परिवर्तन के लिए अपनाए जा रहे सभी हथकंडों में सबसे ज्यादा ‘क्रिएटिव’ और हास्यास्पद तो है ही, साथ ही यह ईसाइयत के विस्तार की पराकाष्ठा को भी दर्शाता है।
भारत देश में कश्मीर से कन्याकुमारी और JNU से सरकारी विद्यालय तक अपनी पैठ बना रहे ये ‘धर्म परिवर्तक घातक टुकड़ियाँ’ बढ़िया कारोबार कर रही हैं।
इन पर्चों में ईसाई धर्म के प्रचार के लिए हिन्दू धर्म-ग्रंथों और ब्राह्मण साहित्यों के साथ ‘मिलावट का कारोबार’ चल रहा है। इनमें दावा किया गया है कि यीशु ईश्वर के इकलौते पुत्र थे और वो सनातन सद्गुरु हैं, अगर किसी को सत्य जानना है तो उसे सद्गुरु यीशु के पास जाना चाहिए।
असतो मा सद्गमय
ब्राह्मण साहित्यों के श्लोकों की भोंडी नक़ल करते हुए श्लोंको के बीच लिखा गया है, “असतो मा सद्गमय अर्थात यीशु ही हमें असत्य से पूर्ण सत्य पर ले चलते हैं, क्योंकि वे स्वयं सत्य हैं, वो अहमेव सत्यः का दवा करते हैं जिसका मतलब होता है सत्य मैं ही हूँ।”
इसके साथ ही प्रयागराज में बाँटे जा रहे इन किताबों में लिखा गया है, “यीशु ग्रन्थ हमें सिखाता है कि अनंत जीवन पाने के लिए हमें केवल सद्गुरु यीशु पर अपनी आस्था रखनी चाहिए।” इन पर्चों में बड़ी ही सावधानी से लिखा गया है कि सद्गुरु यीशु ही ज्योति हैं।
मृत्योर्मा अमृतं गमय
एक और पर्चे में लिखा गया है, “जो मेरा सन्देश सुनता और भेजने वाले पर भरोसा करता है, उसे दंड नहीं मिलता और अंतिम न्याय के दिन मैं उसे फिर जीवित कर दूँगा।”
क्या है असल सन्देश
हमारे पूर्वग्रह हमें इस बात पर यकीन करने से रोकते हैं लेकिन हिन्दू धर्म विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यता रही है। सदियों बाद भी अगर यह हिन्दू धर्म बिना किसी धर्म प्रचार, धर्म परिवर्तन और हिंसा के, वैश्विक और अडिग है तो इसकी वजह इसके मूल में निहित इसकी सहिष्णुता है।
हिन्दू धर्म में मौजूद आध्यात्म, शान्ति और शालीनता आसानी से हर किसी के आकर्षण का केंद्र बन जाती है। यही कारण है कि निरंतर वैश्विक स्तर पर लोग हिन्दू धर्म से जुड़ रहे हैं। ईसाई धर्म प्रचार में जुटी हुई ये ‘घातक टुकड़ियाँ’ भी इस मर्म को समझती हैं। बढ़ते हुए भौतिकवाद के बीच हर इंसान जिस शांति की तालाश करता है, उसे हिन्दू धर्म में वह आध्यात्म आसानी से मिल जाता है। शायद यही वजह है कि ‘हिन्दू गरीबों को गुड़ और चना’ की विफल नीति के बाद अब ईसाई मिशनरी भी आध्यात्म और सत्संग के जरिए लोगों को रिझा कर बहुसंख्यक बनने की ओर अग्रसर हैं।
आज कैग रिपोर्ट भी आ गई, बताया कि राफ़ेल विमान मोदी सरकार ने मनमोहन काल से 2.86% सस्ते में लिया है। ये डील सस्ती कैसे हुई, उसके सारे कारण आप यहाँ पढ़ सकते हैं। लेकिन गुणियों में श्रेष्ठ, घोटालों को सूँघकर जान लेने वाले, घोटालों की गोद में पल कर बड़े हुए राहुल गाँधी ने एक लाइन में नकार दिया है इस रिपोर्ट को।
‘मेरे पास कोई सबूत नहीं है, लेकिन मैं जानता हूँ कि मोदी चोर है’ जैसे कालजयी संवादों के जन्मदाता राहुल गाँधी ने ज़माने को दिखा दिया है कि अगर आप प्रेम करते हैं किसी से तो उसे पागलपन की हद तक चाहना पड़ता है। राफ़ेल राहुल की वही प्रेमिका है, जिसके बारे में व्यंग्यकार नीरज बधवार जी ने लिखा है कि ‘राफ़ेल मामला राहुल गाँधी के लिए उस रिश्ते की तरह है, जिसमें वो इतना इन्वेस्ट कर चुके हैं कि धोखा मिलने के बाद भी, उससे बाहर आने को तैयार नहीं।’
इसी आर्टिकल का वीडियो यहाँ देखें
ये बात बिलकुल सही है। हर जिले में प्रेस कॉन्फ़्रेंस से लेकर, हर शाम काग़ज़ के टुकड़े दिखा कर केजरीवाल ब्रांड के ‘सबूत’ लहराने वाले राहुल गाँधी ने जिस राफ़ेल को इतनी शिद्दत से चूमा था, उसे मोदी ने इतना ठंढा कर दिया है कि उनके होंठ चिपक गए हैं, और वो अगर वहाँ से खींचना चाहें तो चेहरा लहुलुहान हो जाएगा।
राहुल गाँधी और पत्रकारिता के समुदाय विशेष गिरोह के तथाकथित पत्रकारों ने पहले ही साल से ये लाइन पकड़ रखी थी कि सरकार है तो घोटाले भी होंगे ही। वो लोग धैर्य के साथ आगे बढ़ रहे थे, कि अब होगा घोटाला, तब होगा घोटाला। घोटाला नहीं हुआ। फिर लांछन लगाने में गिरोह सक्रिय हुआ। गडकरी को घेरा, अमित शाह को घेरा, अजित डोभाल को घेरा, लेकिन हर बार मामला फुस्स हो गया।
फिर नई योजना बनी कि गडकरी को प्रधानमंत्री के लिए प्रमोट किया जाए, उनके बयान को काट-छाँट कर दिखाया गया। दरार पैदा हुई नहीं, गडकरी ने दो लाइन में खंडन किया और फ्लायओवर बनाने लगे।
अब कुछ नहीं रह गया, तो फिर गोएबल्स को याद कर भाजपा को घेरने वाले गोएबल्स से सीख लेकर राफ़ेल मुद्दे को पीटना शुरु किया कि ये एक पब्लिक डिबेट का मामला बन जाए। मामला बन भी गया। लगातार, हर दूसरे दिन ‘मैं नहीं मानता’, ‘चौकीदार चोर है’, ‘सब को मैनेज किया हुआ है’, ‘कैग पर दबाव है’ आदि कह-कह कर एक नॉनइशू को इशू बनाया गया।
मुद्दा बना और लोग इस पर बातें करने लगे कि कोई इतनी बार एक ही बात क्यों बोल रहा है, इस पर सरकार कुछ बोलती क्यों नहीं? सरकार ने बताना शुरु किया तो तर्क आया कि जाँच होनी चाहिए। जाँच भी सुप्रीम कोर्ट या सीबीआई से नहीं, ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमिटी से जिसमें कॉन्ग्रेस के भी लोग हैं। यानी, निष्पक्ष जाँच नहीं, बल्कि जहाँ उनके नेता फ़ैसले पर प्रभाव बना सकें, रिपोर्ट लीक कर सकें, ऐसी जाँच।
इसमें एक बात यह भी है कि दो देशों के साथ हुए रक्षा समझौतों पर, जिसमें गोपनीय तकनीक आदि का इस्तेमाल हो रहा हो, उसे पब्लिक डोमेन में नहीं लाया जा सकता है। इससे दो देशों के संबंध खराब होते हैं, और देश की छवि धूमिल होने से आगे से कोई भी देश आपको इस तरह के समझौतों में शामिल करने से हिचकिचाता है।
ऐसा नहीं है कि इस बात को राहुल गाँधी या उनकी पार्टी के लोग नहीं जानते। इसके उलट, बात यह है कि वो जानते हैं, ऐसा नहीं हो सकता इसीलिए इस बात पर अटके हुए हैं क्योंकि आम जनता को ये बातें समझानी मुश्किल है। आम जनता का तर्क यही होता है कि ‘जाँच करा लो, क्या दिक्कत है?’ फिर, पत्रकारों के गिरोह, जो अच्छे से जानते हैं कि क्या हो सकता है, क्या नहीं, वो भी इसी लाइन पर कहने लगते हैं, “नहीं, क्या समस्या है जाँच कराने में? एक बार सरकार करा क्यों नहीं लेती?”
ये पूरा गिरोह एक वेल-ऑयल्ड मशीन की तरह काम करता है। अंधेरा होते ही एक सियार ‘हुआँ’ करता है, तो बाकी भी करने लगते हैं। लोकसभा में चर्चा हो गई, सवालों का जवाब दे दिया गया, सुप्रीम कोर्ट ने संतुष्टि जता दी, बिंदुवार आँकड़े दे दिए गए, कैग की रिपोर्ट आ गई, लेकिन राहुल का लिप-लॉक टूट ही नहीं रहा!
मीडिया के समुदाय विशेष की असहनीय पीड़ा तो देखिए कि बेचारों की मति इतनी भ्रष्ट हो चुकी है कि ‘मेरे पास कोई सबूत नहीं, लेकिन मैं जानता हूँ मोदी चोर है’ जैसे कुतर्कों को सुनने के बाद भी एक मतछिन्नू आदमी के पीछे खड़ा है। ये बात अपने आप में विचित्र है कि ऐसी बहकी-बहकी बातें करने वाले कुलदीपक को हवाओं से बचाने में लगे पड़े हैं। आज कल इसी को निष्पक्ष पत्रकारिता भी कहा जाता है।
कैग की रिपोर्ट में हर बिंदु पर बताया गया है कि किस हिस्से में सरकार ने ज़्यादा पैसे दिए, किस हिस्से में कम, और कुल मिलाकर डील सस्ती ही मिली। अब, कल कॉन्ग्रेस द्वारा कैग को ही ख़ारिज किए जाने के बाद, राहुल आज मोदी को घेर रहे हैं कि उसने कहा था कि नौ प्रतिशत सस्ता है, ये तो कम ही सस्ता हुआ है। मतलब, मोदी ने किस आधार पर इसे सस्ता कहा था, उसका ज़िक्र नहीं।
और तो और, अब मुद्दा यह नहीं है कि राफ़ेल में घोटाला हुआ है, बल्कि यह है कि मोदी ने जितना पैसा बताया था, उतना तो नहीं बचा है! अब कैग की रिपोर्ट की वो लाइन उठकर नृत्य चालू आहे! जबकि उसी कैग की रिपोर्ट में यह अच्छे से समझाया गया है कि नौ प्रतिशत वाली बात किस संदर्भ में कही गई थी।
हाल ही में, पता चला कि रक्षा सौदों का दलाल क्रिश्चियन मिशेल जो कि कॉन्ग्रेस के ही समय हुए अगस्टा वैस्टलैंड घोटाले में अभियुक्त है, वो राफ़ेल डील रोकने को लिए उसके प्रतिस्पर्धी यूरोफाइटर के लिए लॉबी कर रहा था। अब राहुल जी अपनी पार्टी की गंदगी पर मिट्टी डालने के लिए राफ़ेल को अपनी प्रेमिका बनाकर उसके गीतों को नहीं गाएँगे तो और क्या करेंगे?
अस्तित्व बचाने की जद्दोजहद से लेकर सत्ता पाने की हर संभव कोशिश करने में जी-जान से जुटा गिरोह राफ़ेल को पीट-पीट कर चपटा करने के बाद, उसे पिघला कर तार बना चुका है, लेकिन मिलावट के कण मिले नहीं। हाँ, अब ये जंजाल इतना बड़ा बन चुका है कि कॉन्ग्रेस इससे बाहर आना ही नहीं चाहती। अब यही एक सहारा है जिससे मोदी को चोर और भ्रष्ट साबित किया जा सके।
वैलेंटाइन सप्ताह चल रहा है और, राहुल गाँधी की बातों को भी गंभीरता से लेने लायक बनाने वाले राफ़ेल को राहुल गाँधी ऐसे समय में छोड़ दें, यह संभव नहीं दिखता। अभी तो फ़िज़ाओं में प्रेम है, और आनेवाले समय में राजनीति होगी। राहुल जी दोनों ही विषयों में, एक ही प्रेमिका के साथ उतरना चाह रहे हैं, लेकिन बेवफ़ा राफ़ेल बिदक कर भाग जाती है।
16 वीं लोकसभा का अंतिम बजट सत्र खत्म हो गया है। विपक्ष के हो-हंगामे की वजह से संसद के दोनों ही सदनों को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया गया है। पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के मुताबिक 16 वीं लोकसभा कार्यकाल के दौरान सदन में राहुल गाँधी की उपस्थिति 52% रही है।
यही नहीं राहुल ने सदन के अंदर महज 14 चर्चाओं में ही हिस्सा लिया है। भले ही राहुल गाँधी प्रधानमंत्री मोदी को सामने आकर 15 मिनट डिबेट के लिए चुनौती पेश करते हों, लेकिन सच्चाई यह है कि सदन में पूरे कार्यकाल के दौरान राहुल ने सरकार से एक भी धारदार सवाल पूछने की हिम्मत नहीं की। यही नहीं, राहुल गाँधी सदन के अंदर एक भी प्राइवेट मेंबर बिल लेकर नहीं आए।
इस वीडियो में राहुल प्रधानमंत्री को डिबेट के लिए चुनौती दे रहे हैं
16 वीं लोकसभा के इस सत्र की समाप्ति के बाद सरकार के कामकाज और विपक्ष के सवाल के बारे में आकलन शुरू हो गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) सरकार के दूसरे कार्यकाल की तुलना में भाजपा नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार के कार्यकाल में प्रोडक्टिविटी अधिक रही है।
विपक्ष के विरोध के बावजूद सरकार ने जनता के हित में कई बिल को सदन में पास कराकर कानून का रूप दिया है। सरकार के प्रयास की वजह से लोकसभा में 156 और राज्यसभा में 118 बिल पास हुए। विपक्ष के विरोध के चलते लोकसभा में 46 व राज्यसभा में 33 बिल अटक गए।
इस तस्वीर के जरिए 15वीं और 16वीं लोकसभा के कामकाज को समझें
भाजपा सांसद निशिकांत दूबे ने सदन के अंदर सबसे अधिक 48 प्राइवेट मेंबर बिल पेश किए। यही नहीं, उत्तर प्रदेश भाजपा के सांसद भैरो प्रसाद मिश्रा और मुंबई नॉर्थ से भाजपा के सांसद गोपाल शेट्टी ने सदन में 100% उपस्थिति दर्ज कराई है।