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देश मोदी के नेतृत्व में बना रहा है नए आयाम; राष्ट्रपति के बजट अभिभाषण की मुख्य बातें

राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने बजट सेशन के पहले दिन संसद के संयुक्त अधिवेशन को सम्बोधित करते हुए गुरु नानक देव को उनकी 550वीं जयंती वर्ष पर याद किया। उन्होंने अपने अभिभाषण में महात्मा गाँधी और राम मनोहर लोहिया का ज़िक्र करते हुए कहा कि देश उनके दिखाए राह पर चल रहा है। साथ ही राष्ट्रपति ने जलियाँवाला बाग़ नरसंहार के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में शहीदों को नमन किया। राष्ट्रपति ने कहा कि 2014 चुनावों से पहले देश अनिश्चितता के दौर से गुज़र रहा था लेकिन पारदर्शी मोदी सरकार ने सत्ता संभालने के बाद लोक कल्याणकारी सुविधाओं को जन-जन तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा।

कृषि एवं किसानों के हित में किए गए कार्य

राष्ट्रपति ने देश के मेहनती किसानों को रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन के लिए उनकी प्रशंसा की। उन्होंने उन्हें अर्थव्यवस्था का आधार बताया। किसानों का अभिनन्दन करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार उन तक सभी सुविधाएँ पहुँचाने का लगातार प्रयास कर रही है। इस पर विशेष जानकारी देते हुए उन्होंने कहा:

“मेरी सरकार ने 22 फसलों के न्‍यूनतम समर्थन मूल्य यानि एम.एस.पी. को फसल की लागत का डेढ़ गुना से अधिक करने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। मिट्टी की सेहत के बारे में किसानों को जानकारी देने के लिए 17 करोड़ से ज्यादा सॉयल हेल्थ कार्ड बांटे गए हैं। खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा यूरिया के दुरुपयोग को रोकने के लिए यूरिया की 100 प्रतिशत नीम कोटिंग भी की गई है। सिंचाई के लिए पानी की व्यवस्था बेहतर बनाने के लिए मेरी सरकार पहले की 99 अधूरी परियोजनाओं को पूरा कर रही है। इनमें से 71 परियोजनाएं, अगले कुछ महीनों में पूरी होने जा रही है। देश की 1,500 से ज्यादा कृषि मंडियों को ऑनलाइन जोड़ने का अभियान चलाया गया है।”

दीन दयाल उपाध्याय के आदर्शों पर चल रही है सरकार

पंडित दीन दयाल उपाध्याय को याद करते हुए और मोदी सरकार में हुए बदलावों के बारे में बात करते हुए राष्ट्रपति ने कहा:

“वो ग़रीब माँ जो लकड़ी के धुएँ में खाना बनाती थी, वो बेबस बहन जो पैसे की चिंता में गंभीर बीमारी के बावजूद अपना इलाज़ टालती थी, वो बेटी जो शौच जाने के लिए सूरज ढलने का इंतजार करती थी, वो बच्चा जो बिजली के अभाव में पढ़ाई के लिए सूरज की रोशनी का इंतज़ार करता था, वो किसान जो ओले से फ़सल बर्बाद होते देखकर कर्ज़ चुकाने की चिंता में घिर जाता था, वो युवा जो कर्ज़ न मिल पाने के कारण अपना रोज़गार शुरू नहीं कर पाता था, ऐसे ही असंख्य असहाय चेहरों ने मेरी सरकार के लक्ष्य तय किए। और इसी सोच ने मेरी सरकार की योजनाओं को आधार दिया। यही दीन दयाल उपाध्याय के अंत्योदय का आदर्श रहा है और उनका यह आदर्श ही, मेरी सरकार के कामकाज की सार्थकता की कसौटी बना है।”

उज्ज्वला योजना

मोदी सरकार की महत्वकांक्षी उज्ज्वला योजना पर बोलते हुए राष्ट्रपति ने आँकड़े गिनाए। उन्होंने कहा:

“हमारी बहुत सी माताएँ, बहनें और बेटियाँ, चूल्हे के धुएँ के कारण बीमार रहती थीं, पूरे परिवार का स्वास्थ्य प्रभावित होता था और उनका अधिकांश परिश्रम और समय, ईंधन जुटाने में लग जाता था। ऐसी बहनों-बेटियों के लिए मेरी सरकार ने उज्ज्वला योजना के तहत अब तक 6 करोड़ से ज़्यादा गैस कनेक्शन दिए हैं। दशकों के प्रयास के बाद भी वर्ष 2014 तक हमारे देश में केवल 12 करोड़ गैस कनेक्शन थे। बीते केवल साढ़े चार वर्षों में मेरी सरकार ने कुल 13 करोड़ परिवारों को गैस कनेक्शन से जोड़ा है।”

शौचालय निर्माण के क्षेत्र में केंद्र सरकार के अभूतपूर्व कार्य

राष्ट्रपति ने स्वच्छता अभियान में शौचालय निर्माण के क्षेत्र में किए गए कार्यों के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि महात्मा गाँधी की 150वीं जयंती तक देश को सम्पूर्ण रूप से स्वच्छ बनाने का संकल्प रखा गया है। उन्होंने कहा:

“शौचालय की सुविधा का न होना करोड़ों देशवासियों, विशेषकर हमारी बहू-बेटियों को गरिमाहीन और अस्वस्थ जीवन जीने के लिए मजबूर करता था। स्वच्छ भारत अभियान के तहत 9 करोड़ से ज्यादा शौचालयों का निर्माण हुआ है। इस जन आंदोलन के कारण आज ग्रामीण स्वच्छता का दायरा बढ़कर 98 प्रतिशत हो गया है, जो कि वर्ष 2014 में 40 प्रतिशत से भी कम था। एक आकलन के अनुसार, इन शौचालयों के बनने से गरीबों की अनेक बीमारियों से सुरक्षा, हो पा रही है और 3 लाख से ज्यादा गरीब देशवासियों के जीवन की रक्षा संभव हुई है। महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के इस वर्ष में हमें याद रखना है कि हमने पूज्य बापू की स्मृति में इस वर्ष 2 अक्तूबर तक देश को संपूर्ण स्वच्छ बनाने का संकल्प लिया है।”

स्वास्थ्य के क्षेत्र में किए गए कार्य

राष्ट्रपति ने ‘आयुष्मान भारत योजना’, ‘प्रधानमंत्री जन आरोग्य अभियान’ और ‘प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना’ का ज़िक्र करते हुए स्वास्थ्य के क्षेत्र में किए गए कार्यों को गिनाते हुए कहा:

हम इस बात से भली-भाँती परिचित हैं कि बीमारी के इलाज़ का ख़र्च, किसी ग़रीब परिवार को और भी ग़रीब बनाता है। इस पीड़ा को समझने वाली मेरी सरकार ने, पिछले वर्ष ‘आयुष्मान भारत योजना’ शुरू की। विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना- ‘प्रधानमंत्री जन आरोग्य अभियान’ के तहत देश के 50 करोड़ गरीबों के लिए गंभीर बीमारी की स्थिति में, हर परिवार पर प्रतिवर्ष 5लाख रुपए तक के इलाज़ ख़र्च की व्‍यवस्‍था की गई है। सिर्फ 4 महीने में ही इस योजना के तहत 10 लाख से ज़्यादा ग़रीब ,अस्पताल में अपना इलाज़ करवा चुके हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार ने किडनी की बीमारी से परेशान भाइयों और बहनों के लिए डायलिसिस की निशुल्क सेवा उपलब्ध कराई है। उन्होंने कहा:

मेरी सरकार का यह भी प्रयास रहा है कि ग़रीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर इलाज़ के खर्च का बोझ कम से कम पड़े। ‘प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना’ के तहत देश भर में अब तक 600 से ज्यादा जिलों में 4,900 जन औषधि केन्‍द्र खोले जा चुके हैं। इन केन्‍द्रों में 700 से ज़्यादा दवाइयाँ बहुत कम क़ीमत पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसी तरह, दिल की बीमारी में इस्तेमाल होने वाले स्टेंट की क़ीमत कम किए जाने से ग़रीब और मध्यम वर्ग के लोगों को औसतन लगभग 4,600 करोड़ रुपए सालाना की बचत हो रही है। घुटने के ट्रांसप्लांट की क़ीमत कम किए जाने से लोगों को सालाना लगभग 1,500 करोड़ रुपए की बचत हो रही है। मेरी सरकार ने किडनी की बीमारी से परेशान भाइयों और बहनों के लिए डायलिसिस की निशुल्क सेवा उपलब्ध कराई है। इससे डायलिसिस के हर सेशन में लोगों को 2 हजार रुपए से अधिक की बचत हो रही है।

केंद्र सरकार द्वारा चलाए जा रहे बीमा योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया:

इसके साथ ही, सिर्फ 1 रुपया महीना के प्रीमियम पर ‘प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना’ और 90 पैसे प्रतिदिन के प्रीमियम पर ‘प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना’ के रूप में लगभग 21 करोड़ गरीब भाई-बहनों को बीमा सुरक्षा कवच प्रदान किया गया है। किसी अनहोनी के समय प्रत्येक योजना के तहत 2 लाख रुपए की सहायता का प्रावधान किया गया है। अब तक इस योजना के माध्यम से 3,100 करोड़ रुपए से ज़्यादा राशि उपलब्ध कराकर, मेरी सरकार ने देशवासियों का, उनके संकट के समय में साथ दिया है।

अंतर्राष्ट्रीय पटल पर भारत की सफलता

महामहिम कोविंद ने भारतीय कूटनीति की सफलता की चर्चा करते हुए कहा कि अब अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत की बात ध्यान से सुनी जा सकती है। अंतररष्ट्रीय योग दिवस व अन्य सफलता पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा:

यह मेरी सरकार की राजनयिक सफलता है कि आज भारत की आवाज वैश्विक मंचों पर सम्मान के साथ सुनी जाती है। कुछ दिन पूर्व वाराणसी में आयोजित प्रवासी भारतीय दिवस में भारत की यह अंतर्राष्ट्रीय ध्वनि और ज्यादा मुखर हुई है। भारत की पहल पर संयुक्त राष्ट्र ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में घोषित किया और आज यह दिवस पूरे विश्व में बहुत उत्साह के साथ मनाया जाता है। पूरी दुनिया में योग की लोकप्रियता तेज़ी से बढ़ रही है। आज भारत को यह गर्व है कि हमने विश्व समुदाय को योग जैसी श्रेष्ठ पद्धति की सौगात दी है।

सरकार ने विदेश में रहने वाले भारतीयों के पासपोर्ट की ताकत और उसका मान ही नहीं बढ़ाया है, बल्कि उनके सुख-दुःख की सहभागी भी बनी है। पिछले चार वर्ष में संकट में फंसे 2 लाख 26 हजार से ज्यादा भारतीयों को स्वदेश वापस लाया गया है।

जम्मू, लद्दाख और कश्मीर

जम्मू, कश्मीर एवं लद्दाख में किए जा रहे विकास कार्यों की चर्चा करते हुए महामहिम ने कहा कि वहाँ चुनाव सफल रहे हैं। उन्होंने कहा:

“मेरी सरकार जम्मू, लद्दाख और कश्मीर के संतुलित विकास के लिए प्रतिबद्ध है। मेरी सरकार के प्रयासों का ही परिणाम है कि राज्य में विकास का वातावरण बनना शुरू हुआ है। हाल ही में राज्य के शहरी स्थानीय निकायों में 13 वर्ष बाद और पंचायतों में 7 वर्ष के अंतराल के बाद शांतिपूर्वक चुनाव हुए जिनमें लोगों ने बहुत उत्साह दिखाया और 70 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ। जम्मू-कश्मीर के विकास के लिए प्रतिबद्ध मेरी सरकार द्वारा 80 हजार करोड़ रुपए के पैकेज का ऐलान किया गया था। इस पैकेज में से, इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ी अलग-अलग परियोजनाओं के लिए अब तक 66 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की स्वीकृति दी जा चुकी है।”

भारतीय सेना और OROP

राष्ट्रपति ने ‘वन रैंक वन पेंशन’ लागू किए जाने की चर्चा करते हुए भारतीय सेना की तारीफ़ की और कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ ने सैन्य बलों का मनोबल बढ़ाया है। उन्होंने राफेल की भी चर्चा की। उन्होंने कहा:

“हमारी सेनाएँ और उनका मनोबल, 21वीं सदी के भारत के सामर्थ्य का प्रतीक है। मेरी सरकार ने चार दशकों से लंबित वन रैंक वन पेंशन की मांग को न सिर्फ पूरा किया बल्कि 20 लाख पूर्व-सैनिकों को 10,700 करोड़ रुपए से ज्यादा के एरियर का भुगतान भी किया है। मेरी सरकार का मानना है कि अपनी रक्षा ज़रूरत को एक पल के लिए भी नज़रअंदाज़ करना, देश के वर्तमान और भविष्य, दोनों के ही हित में नहीं है। बीते वर्ष रक्षा क्षेत्र में हुए नए समझौतों, नए सैन्य उपकरणों की खरीद और Make In India के तहत देश में ही उनके निर्माण ने सेना का मनोबल बढ़ाया है और सैन्य-आत्मनिर्भरता की ओर देश का मार्ग प्रशस्त किया है। दशकों के अंतराल के बाद भारतीय वायुसेना, आने वाले महीनों में, नई पीढ़ी के अति आधुनिक लड़ाकू विमान-राफेल को शामिल करके, अपनी शक्ति को और सुदृढ़ करने जा रही है।”

अर्थव्यवस्था और GST पर राष्ट्रपति के बोल

संसद के बजट सेशन में दोनों सदनों को सम्बोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि GST से देश में एक ईमानदार और पारदर्शी व्यापारिक व्यवस्था का निर्माण हो रहा है जिसका काफी बड़ा लाभ देश के युवाओं को मिल रहा है। अर्थव्यवस्था पर बात करते हुए उन्होंने आगे कहा:

“सरदार पटेल ने देश के भौगोलिक और राजनैतिक एकीकरण का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य अपनी असाधारण क्षमताओं के बल पर प्राप्त किया था। लेकिन पूरे देश के व्यापक आर्थिक एकीकरण का काम अधूरा रह गया था। हमारे व्यापारी और उद्यमी हमेशा परेशान रहते थे कि वे अपना सामान कहां से खरीदें और कहां बेचें, किस तरह से अलग-अलग राज्यों की अलग-अलग कर-प्रणालियों का पालन करें। अब GST जैसा व्यापक कर सुधार लागू होने से One Nation- One Tax- One Market की अवधारणा साकार हुई है।

GST से देश में एक ईमानदार और पारदर्शी व्यापारिक व्यवस्था का निर्माण हो रहा है जिसका काफी बड़ा लाभ देश के युवाओं को मिल रहा है। इस व्यवस्था से व्यापारियों के लिए पूरे देश में कहीं पर भी व्यापार करना आसान हुआ है और उनकी कठिनाइयां कम हुई हैं। मैं देशवासियों को इस बात के लिए बधाई देता हूं कि शुरुआती दिक्कतों के बावजूद, देश के बेहतर भविष्य के लिए उन्होंने बहुत कम समय में एक नई प्रणाली को अपनाया। मेरी सरकार ने व्यापार जगत से मिल रहे सुझावों को ध्यान में रखकर GST में सुधार की प्रक्रिया को निरंतर जारी रखा है।”

राष्ट्रपति ने ‘Ease Of Doing Business’ में भारत की रैंकिंग पाँच वर्ष में 65 अंक ऊपर जाने की बात कहते हुए कहा कि सरकार स्व-रोज़गार को बढ़ावा दे रही है।

भ्रष्टाचार और कालाधन पर अंकुश

राष्ट्रपति ने कहा कि ‘बेनामी संपत्ति कानून’, ‘प्रिवेन्शन ऑफ मनी लांडरिंग एक्ट’ और आर्थिक अपराध करके भागने वालों के खिलाफ बने कानून के तहत 50 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की संपत्ति जब्त करने की कार्रवाई हो रही है। उन्होंने भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा किए गए कार्यों की जानकारी देते हुए बताया:

“वर्ष 2014 में मेरी सरकार को जनता ने पूर्ण बहुमत देने के साथ ही यह आदेश भी दिया था कि कालेधन और भ्रष्टाचार पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई हो। बीते साढ़े चार वर्षों में मेरी सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ मजबूत लड़ाई लड़ी है। जन-मन को समझने वाली मेरी सरकार ने पहले दिन से ही कालेधन और भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम छेड़ी और कैबिनेट की पहली ही बैठक में कालेधन के खिलाफ SIT यानि विशेष जांच दल के गठन का निर्णय लिया। इसके बाद सरकार ने कालेधन के खिलाफ नया और कठोर कानून बनाया। विदेश में गैर-कानूनी तरीके से जुटाई गई संपत्ति के खिलाफ भी मेरी सरकार ने अभियान चलाया। टैक्स हेवेन समझे जाने वाले अनेक देशों के साथ नए सिरे से समझौते किए गए और कई देशों के साथ पुराने समझौतों की कमियों को दूर करते हुए, नए बदलाव लाए गए।”

कालेधन के ख़िलाफ़ अभियान की बात करते हुए महामहिम ने कहा:

“भारत से विदेश जा रहे कालेधन को रोकने के साथ ही मेरी सरकार ने, देश के भीतर भी कालेधन के खिलाफ एक बड़ा अभियान चलाया। देश का हर वह सेक्टर जहाँ कालेधन का प्रवाह था, उसके लिए नए कानून बनाए गए, उन्हें टैक्स के दायरे में लाया गया। इन कार्रवाइयों के बीच सरकार ने लोगों को अपनी अघोषित आय और अघोषित धन को स्वेच्छा से घोषित करने का अवसर भी दिया।”

“कालेधन और भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार द्वारा चलाए जा रहे अभियान में नोटबंदी का फैसला एक महत्वपूर्ण कदम था। इस फैसले ने कालेधन की समानांतर अर्थव्यवस्था पर प्रहार किया और वह धन, जो व्यवस्था से बाहर था, उसे देश की अर्थव्यवस्था से जोड़ा गया। सरकार के इस कदम ने देश को अस्थिर करने वाली ताकतों और कालेधन के प्रवाह में मदद करने वाली व्यवस्थाओं की कमर तोड़ दी है। कालेधन के प्रवाह के लिए जिम्मेदार 3 लाख 38 हजार संदिग्ध शेल कंपनियों का रजिस्ट्रेशन सरकार द्वारा खत्‍म किया जा चुका है। इन कंपनियों के निदेशकों के दोबारा चुने जाने पर भी पाबंदी लगा दी गई है।”

इसके अलावा राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि ‘प्रधानमंत्री मुद्रा योजना’ के तहत, बिना किसी गारंटी के 7 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा के ऋण दिए गए हैं। इसका लाभ, ऋण प्राप्त करने वाले 15 करोड़ से ज्यादा लोगों ने उठाया है।

शाह फ़ैसल के नए गीतों में अलगाववादियों के बोल हैं

भारतीय प्रशासनिक सेवा की परीक्षा में टॉप करने वाले कश्मीरी शाह फ़ैसल का इस्तीफ़ा देने के बाद नई पार्टी बनाने का विचार, फ़ैसल की राजनीतिक मंशा को उजागर करता है। अपने हर वक्तव्य में केवल कश्मीर मुद्दे का राग अलाप कर फ़ैसल देश की जनता का ध्यान भटकाने का काम कर रहे हैं। उन्हें लगता है कि अपने इस हथकंडे से वो जनता को अपने पक्ष में लेकर अपने राजनीतिक करियर की शुरूआत करने में कामयाब हो जाएँगे।

एनबीएसओ सरहद और अरहम फाउंडेशन द्वारा आयोजित 12वें कश्मीर महोत्सव का उद्घाटन करने के लिए एमबीबीएस डिग्री धारक फ़ैसल वहाँ पहुँचे। इस मौक़े पर पत्रकारों से बात करते हुए, फ़ैसल (35) ने सिविल सेवा से इस्तीफ़ा देने, कश्मीर मुद्दे और भविष्य की योजनाओं पर अपने विचारों, राजनीति में शामिल होने के अपने फ़ैसले के बारे में विस्तार से बात की। उन्होंने कहा, “घाटी की स्थितियों को देखते हुए, केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित करने की आवश्यकता है, क्योंकि जब तक हत्याएँ नहीं रुकेंगी, तब तक राज्य में स्थिति नहीं सुधरेगी।”

भारत समेत कश्मीर में ‘हिन्दुत्ववादी तत्वों’ में ख़तरनाक वृद्धि का हवाला देकर नौकरी से इस्तीफ़ा देने वाले वाले फैसल के पसंदीदा व्यक्तित्वों में से एक पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान भी हैं, इसका मतलब कहीं ये तो नहीं कि फैसल की राजनीतिक गतिविधियाँ वहीं से उड़ान भरती हों।

इसके सीधे मायने तो यही लगाए जा सकते हैं कि फ़ैसल का इस्तीफ़ा केवल एक ज़रिया भर था जिससे वो अपने उन मनसूबों को पूरा कर सकें जो सेवा में रहकर पूरे नहीं किए जा सकते। फ़िलहाल तो फ़ैसल को अपनी राजनीतिक उड़ान में कई दिक़्कतों का सामना करना पड़ेगा क्योंकि हिज़्बुल मुज़ाहिदीन संगठन ने शाह फैसल के राजनीति में आने के क़दम पर कड़ा ऐतराज जताया। हिज़्बुल ने शाह के फैसले को केंद्र सरकार की चाल बताया है। बक़ायदा एक चिट्ठी के ज़रिए हिज़्बुल ने लोगों से कहा है कि वो फैसल का साथ न दे और राज्य में होने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों का बहिष्कार करें। हिज़्बुल ने इतने पर ही विराम नहीं लगाया बल्कि शाह फैसल से यह भी पूछा कि उन्होंने डॉक्टर मन्नान वानी का रास्ता क्यों नहीं अपनाया और राजनेताओं की टोली में क्यों शामिल हो गए?

बता दें कि यह वही मन्नान है जिसे जम्मू-कश्मीर के हंदवाड़ा में सुरक्षाबलों ने मार गिराया था। मन्नान का एक फोटो फेसबुक पर राइफल के साथ वायरल होने पर उसे अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से निष्कासित कर दिया गया था। इसके बाद 5 जनवरी 2019 को वो हिज़्बुल में शामिल हुआ था। 

शाह फ़ैसल ने अपने इस्तीफ़े के बारे में बात करते हुए कहा, “प्रशासनिक सेवाओं की एक अहम भूमिका होती है, मैं पानी, बिजली, सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएँ प्रदान कर सकता हूँ, लेकिन मैं लोगों के राजनीतिक अधिकारों को बहाल नहीं कर सकता क्योंकि वो केवल राजनीतिक नेताओं द्वारा ही दिए जा सकते हैं।

देश के मुस्लिमों और युवाओं को को मोहरा बनाकर अपनी राजनीतिक इच्छाओं की पूर्ति करने वाले फ़ैसल को बता दें कि मोदी सरकार में अल्पसंख्यकों के फलने-फूलने के लिए पहले से ही अनेकों कल्याणकारी योजनाएँ चल रही हैं जो प्रधानमंत्री मोदी के ‘सबका विकास, सबका साथ’ के इरादों को स्पष्ट करती हैं।

इन योजनाओं में मुस्लिम लड़कियाँ भी शामिल हैं, ‘शादी शगुन योजना‘ ऐसी ही एक योजना है । इसमें लड़कियों को 51,000 रुपए की धनराशि देना शामिल है। इसके अलावा लोन की व्यवस्था, शैक्षिक शिक्षा में सुधार, उर्दू की शिक्षा को बढ़ावा गेना, मदरसों का आधुनिकीकरण, मेधावी छात्रों को छात्रवृति, स्वरोज़गार, कौशल विकास जैसी तमाम योजनाओं के माध्यम से उन्हें भी देश में बराबरी का स्तर प्रदान किया गया है।

जम्मू-कश्मीर के युवाओं के लिए ‘उड़ान योजना‘ पहले से मौजूद है। इसका मक़सद वहाँ के युवाओं को एक बेहतर रोज़गार उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनके जीवन को स्वावलंबी बनाना है। इस योजना के ज़रिए घाटी के लगभर 30,000 युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है और वे देश के अलग-अलग हिस्सों में नौकरी भी कर रहे हैं।

जम्मू-कश्मीर के ग़रीब परिवारों को नि:शुल्क बिजली का कनेक्शन उपलब्ध करवाने के लिए ‘सौभाग्य योजना‘ भी शुरू की गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस महत्वकांक्षी योजना के तहत दिसंबर 2018 तक चार करोड़ ग़रीब परिवारों को बिजली मुहैया करवाने का लक्ष्य रखा गया था। 

ऐसे में शाह फ़ैसल का कश्मीर मुद्दा केवल राजनीति में आने का ज़रिया मात्र दिखता है। साल 2009 में भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयन के बाद लगभग 10 वर्ष पद पर रहने के बाद एकाएक लोकसभा चुनाव से पहले नौकरी से इस्तीफ़ा देना, फ़ैसल के जिस लक्ष्य को दिखाता है वो उनकी राजनीतिक मंशाओं को स्पष्ट दिखाता है। अब देखना बाक़ी है कि आख़िर शाह फ़ैसल एकमात्र कश्मीर को मुद्दा बनाकर कब तक अपनी राजनीति चमकाते रहेंगे, जबकि उस पाले में पहले ही बहुत भीड़ है।

कुम्भ मेले में साधु-संतों से ‘चिलम’ माँगते दिखे बाबा रामदेव

कुम्भ मेला पहुँचे योग गुरू रामदेव ने साधु-संतों से धूम्रपान छोड़ने का आग्रह किया। उन्होंने वहाँ साधु-संतों से कहा कि हम सब राम और कृष्ण का अनुसरण करते हैं, जिन्होंने अपने पूरे जीवन में कभी भी धूम्रपान नहीं किया, तो फिर हमें क्यों ज़रूरत है? हमें क़सम खानी चाहिए कि हम धूम्रपान करना छोड़ देंगे।

उन्होंने कहा, “हम साधुओं ने अपना घर, माँ-बाप सब कुछ बहुत बड़े मकसद की वज़ह से छोड़ा है तो हम धूम्रपान करना क्यों नहीं छोड़ सकते।”

रामदेव ने वहाँ बैठे साधुओं से चिलम इकट्ठा की और उन्हें प्रण दिलाया कि वो सब लोग तंबाकू छोड़ देंगे। रामदेव ने कहा कि वो ये सारी ‘चिलम’ इकट्ठा करके उस म्यूज़ियम में रखेंगे, जिसे वो बनवाएँगे। उन्होंने कहा, “मैं नौज़वानों से तंबाकू और धूम्रपान छुड़वा सकता हूँ तो महात्माओं से क्यों नहीं।”

बता दें कि 55 दिन तक चलने वाला कुंभ मेला 4 मार्च को ख़त्म होगा। एक अंदाज़ के अनुसार, 13 करोड़ श्रद्धालु कुम्भ में भाग ले सकते हैं।

राहुल-चिदंबरम के आँकड़े में लोचा, ₹7 लाख करोड़ से भी ज्यादा का वित्तीय भार पड़ेगा सरकार पर

राहुल गाँधी ने सोमवार (जनवरी 28, 2019) को देश की जनता से वादा किया कि अगर कॉन्ग्रेस 2019 लोकसभा चुनाव जीतती है तो देश के हर ग़रीब को न्यूनतम आय प्रदान करने का प्रावधान करेगी। अपने इस वादे की मौखिक रूप से घोषणा के बाद राहुल ने प्रस्ताव के बारे में खुलकर कुछ नहीं बताया।

इस घोषणा पर पी चिदंबरम के गणित के अनुसार अगर देश के 18-20% ग़रीबों को इसमें टारगेट किया जाता है तो इस योजना का लागत अनुमान 5 लाख करोड़ रुपए होगा।

केंद्र सरकार के अनुमान के अनुसार देश के 25 प्रतिशत गरीबों को न्यूनतम आय प्रदान कराने के लिए 7 लाख करोड़ रुपए से भी अधिक का खर्चा आएगा। सरकार के इस शुरुआती अनुमान में न्यूनतम वेतन भुगतान ₹321 प्रतिदिन के आधार पर लगाया गया है। इसमें सरकार द्वारा अकुशल मज़दूरों को महीने में ₹9,630 का वेतन भुगतान निश्चित किया जाएगा।

बता दें कि गरीबों को न्यूनतम आय देने वाली यह योजना अगर अस्तित्व में आती है तो सरकार पर वित्तीय भार बढ़ जाएगा। क्योंकि पहले से ही सरकार गरीबों को सब्सिडी दे रही है और कई राज्यों ने किसान कर्ज़माफ़ी भी शुरू कर दी है।

दो साल पहले हुए इकोनॉमिक सर्वेक्षण में यूनिवर्सल बेसिक आय पर जो सुझाव दिया गया था, उसे अमल में नहीं लाया जा सका। ऐसा इसलिए क्योंकि तेंदुलकर कमिटी द्वारा परिभाषित ग़रीबी रेखा से हर एक को ऊपर उठाने के लिए देश में 75% परिवारों को सालाना 7,620 रुपए देने पड़ते। यह इसलिए भी मुमकिन नहीं था क्योंकि सरकार मध्य वर्ग के लोगों और ग़रीबों को दी जाने वाली सब्सिडी वापस लेने में असमर्थ थी।

इस सर्वेक्षण का यह भी अनुमान था कि जीडीपी का 4.9 प्रतिशत यानि सालाना 2.4-2.5 लाख करोड़ का खर्चा करके 25 प्रतिशत गरीबों को न्यूनतम आय दी जा सकती है। इसके अलावा अगर गरीब परिवार के पाँच सदस्यों को ₹3,180/महीने दिए जाएँ तो सरकार को इसमें 1.75 लाख करोड़ का खर्चा आएगा।

हम थोड़े बेवफ़ा क्या हुए, आप तो बदचलन हो गए: राहुल गाँधी अमेठी सभासदों से

राजनीति के घोड़े पर सवार राहुल गाँधी ने अभी-अभी रफ़्तार पकड़ी थी। तीन राज्यों में सरकार बनाई। वो भी हिन्दी पट्टी में। लेकिन घोड़ा दुलत्ती भी मारता है, इस ज्ञान को कैलाश के रास्ते में खोज न पाए! और नतीजा अमेठी में मिला।

अमेठी जो न सिर्फ राहुल गाँधी का गढ़ है, बल्कि कॉन्ग्रेस पार्टी का पर्याय भी। यहाँ से कॉन्ग्रेस पार्टी के 13 सभासदों ने कल मतलब बुधवार मतलब 30 जनवरी 2019 को ‘हाथ’ झटककर ‘कमल’ का दामन थाम लिया। अब कहाँ कॉन्ग्रेस जैसी बड़ी पार्टी, और कहाँ छोटे-मोटे सभासद। लेकिन एक कहावत है – देखन को छोटन लगे, घाव करे गंभीर!

गंभीर ही है घाव। यकीन मानिए। सभी के सभी 13 सभासद ‘अल्पसंख्यक’ समाज से आते हैं। कॉन्ग्रेस के लिए यह घाव तब भगंदर बन गया, जब ख़बर में यह भी है कि ना सिर्फ 13 सभासदों ने बल्कि अल्पसंख्यक समाज की कई महिलाएँ और पुरुषों ने भी ‘कमल’ को ही अपना लिया।

नरेंद्र मोदी पर ‘फूट डालो और शासन करो’ का आरोप लगाने वाले ‘शिवभक्त’ ‘रामभक्त’ दत्तात्रेय गोत्री राहुल गाँधी को यह लाइन टेप-रिकॉर्डर में रिपीट मोड ऑन करके सुनना चाहिए – “13 सभासदों के साथ सैकड़ों लोगों ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की है। भाजपा सबका साथ और सबका विकास की राजनीति करती है। इसलिए हम लोगों ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की है।”

हमारे एक साथी हैं। शानदार लिखते हैं। फ़िल्में उन्हें बेहद पसंद है। इसलिए लेखनी में फ़िल्मों के डायलॉग या गाने भी चिपका देते हैं। उन्होंने कभी कपिल सिब्बल को देशद्रोह कानून पर अपनी लेखनी में एक नसीहत दी थी: “येक पे रहना – या घोड़ा बोलो या चतुर बोलो।” पता नहीं क्यों, उनकी यह कालजयी लाइन (जो एक गाने की है, उनकी इसलिए क्योंकि राजनीतिक संदर्भ में पिरोया उन्हीं ने) “येक पे रहना – या घोड़ा बोलो या चतुर बोलो” – राहुल गाँधी पर बहुत सटीक बैठ रही है।

अब देखिए न! कहाँ तो बेचारे जनेऊ धारण कर कमंडल को साधने चले थे। पता चला टोंटी वाले लोटे ने धोखा दे दिया। तिलक लगा राम-भक्त बनने निकले थे, रहीम ने दूरी बना ली। टेंपल-रन के मामले में मोदी को पीछे छोड़ने वाले ‘असली और एकमात्र’ शिव-भक्त राहुल से अगर मुहर्रम पर सवाल पूछ दिए जाएँ तो मैं ‘केजरीवाली’ दावे के साथ कह सकता हूँ कि कल को शिया-सुन्नी भी इनसे कट लेंगे। और जिनको आप साधना चाह रहे हैं, वो सब गंगा मइया में नंगे हैं, तो बताइए भला, क्या आप नंगों के मत से सरकार बनाएँगे! छी-छी-छी!

उत्तर प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मोहसीन रजा ने अमेठी को दिलचस्प बना दिया है। यह सारा कारनामा उन्हीं का है। वैसे वो राहुल गाँधी के परिवार को बहुत प्यार करते हैं। इतना प्यार, इतना प्यार कि वो अकेले ऐसे राजनेता थे, जिन्होंने पिछले सप्ताह (या शायद 10 दिन) राहुल के दादाजी स्वर्गीय फ़िरोज गाँधी को श्रद्धांजलि देने गए थे। यह और बात है कि अपने दादाजी को श्रद्धांजलि देने के लिए राहुल गाँधी को बीजेपी जॉइन करनी ही पड़ी, ऐसी बाध्यता नहीं है।

भ्रष्टाचार पर मोदी सरकार का वार: अगस्ता वेस्टलैंड मामले में 2 दलाल पकड़ाए, आज कोर्ट में पेशी

भारत ने अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले पर कार्रवाई तेज़ करते हुए क्रिस्चियन मिशेल के बाद दो अन्य दलालों को दुबई से प्रत्यर्पित करने में सफलता पाई है। घोटाले के सह-अभियुक्त राजीव सक्सेना को बुधवार (जनवरी 30, 2019) सुबह 9:30 बजे उनके आवास से UAE की सुरक्षा एजेंसी द्वारा उठा लिया गया और शाम 5:30 को भारत के लिए प्रत्यर्पित किया गया। वहीं एक अन्य सफल कार्रवाई में दीपक तलवार को भी भारत लाया गया है, जिसे दुबई के अधिकारियों ने पकड़ा था।

दैनिक जागरण के सूत्रों के मुताबिक़ आइजी रैंक के एक अधिकारी के नेतृत्व में प्रवर्तन निदेशालय का एक दल, विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अफसर और रॉ के अफसरों की एक टीम ने इस काम को अंज़ाम दिया। ताज़ा ख़बरों के अनुसार, भारतीय अधिकारी दोनों ही आरोपितों से पूछताछ कर रहे हैं। इस पूछताछ के बाद घोटाले से जुड़े कई अन्य जानकारियों के भी पर्दाफ़ाश होने की संभावना है।

दुबई में रहने वाले सक्सेना को ईडी ने कई बार तलब किया था। 2017 में उसकी पत्नी को भी चेन्नई एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया था। हालाँकि उसकी पत्नी अभी जमानत पर बाहर है। ईडी के अनुसार, सक्सेना, उसकी पत्नी और दुबई स्थित उसकी दो फर्मों ने धन शोधन किया है। सक्सेना और तलवार को पटियाला कोर्ट में पेश करने की तैयारी की जा रही है।

दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने 3,600 करोड़ रुपए के अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर मामले में सीबीआई द्वारा गिरफ्तार किए गए क्रिश्चियन मिशेल को 22 द‍िसंबर को ईडी की 7 दिन की हिरासत में भेज दिया था। इस मामले में विशेष न्यायाधीश अरविंद कुमार ने बिचौलिए मिशेल की जमानत याचिका खारिज कर दी थी।

रक्षा मंत्रालय ने दिल्ली हाई कोर्ट में अगस्ता-वेस्टलैंड के खिलाफ़ मध्यस्थता की कार्रवाई के लिए याचिका दायर की। सरकार के पक्ष को सुनने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट ने रक्षा मंत्रालय की याचिका को स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने सुनवाई की अगली तारीख़ 28 फ़रवरी तय कर दी है। कोर्ट ने दोनों पक्षों को हलफ़नामा दायर करने के लिए 5 सप्ताह का समय भी दिया है।

आपको बता दें कि 12 वीवीआईपी हेलि‍कॉप्टरों की खरीद के लिए इटली की कंपनी अगस्ता-वेस्टलैंड के साथ साल 2010 में करार किया गया था। 3,600 करोड़ रुपए के करार को जनवरी 2014 में भारत सरकार ने रद्द कर दिया था। जानकारी के लिए बता दें कि इस करार में 360 करोड़ रुपए के कमीशन के भुगतान का आरोप लगा था। इटली की कंपनी और भारत सरकार के बीच के इस करार में कमीशन की ख़बर सामने आते ही 12 एडब्ल्यू-101 वीवीआईपी हेलीकॉप्टरों की सप्लाई पर सरकार ने फ़रवरी 2013 में रोक लगा दी थी।

इज़राइल से ₹5,700 करोड़ में दो AWACS ख़रीदेगा भारत

भारत ने इज़राइल से दो और फाल्कन एयरबॉर्न वॉर्निंग एंड कण्ट्रोल सिस्टम (“Phalcon” Airborne Warning And Control System) एयरक्राफ्ट ख़रीदने का निर्णय लिया है। इसे AWACS भी कहा जाता है। इन दोनों की कुल कीमत $800 मिलियन यानी ₹5,700 करोड़ होगी। सरकार इसके लिए जल्द ही बजट का अनुमोदन करने वाली है। अभी हाल ही में भारत ने एयर डिफेंस रडार (ADR) के लिए इज़राइल से ₹4577 करोड़ का करार किया है।

इज़राइल भारत के शीर्ष हथियार आपूर्तिकर्ता देशों में से एक है। भारतीय सेना इस स्थिति को मज़बूत करते हुए इज़राइल से अतिरिक्त हेरॉन (Heron) और हारोप (Harop) भी ख़रीदना चाहती है। ये दोनों ही मानवरहित विमान हैं, जो दुश्मन के रडार में या अन्य लक्ष्य पर विस्फोट करने के लिए क्रूज़ मिसाइल का भी कार्य करते हैं। भारतीय सशस्त्र सेना इज़राइल से ऐसे अन्य वाहन भी ख़रीदना चाहती है।

इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू 11 फरवरी को भारत दौरे पर आ रहे हैं। पिछले एक वर्ष में उनका यह दूसरा भारत दौरा होगा। 2017 में नरेंद्र मोदी ने भी यहूदी देश इज़राइल का दौरा किया था। मोदी इज़राइल जाने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं। नेतन्याहू के दौरे के बाद भारत-इज़राइल संबंध और प्रगाढ़ होने की उम्मीद है। वह अपने भारत दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के साथ बैठक करेंगे।

टाइम्स ऑफ इंडिया के सूत्रों के अनुसार, तेल अवीव “स्पाइक” एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (ATGM) के लिए समझौते पर नए सिरे से जोर दे रहा है। ज्ञात हो कि 2017 के अंत में भारत ने 8,356 मध्यम दूरी की स्पाइक मिसाइलों, 321 लॉन्चर और 15 सिमुलेटरों के लिए प्रस्तावित ₹3,200 करोड़ के सौदे को रद्द कर दिया था। ऐसा रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के कहने पर किया गया था। एजेंसी ने कहा था कि वह एक-दो साल के भीतर तकनीकी रूप से अधिक उन्नत मैन-पोर्टेबल एटीजीएम प्रदान कर सकता है।

अनुमानित रूप से ₹12,640 करोड़ के एक बड़े करार में, 400 की संख्या में 155mm आर्टिलरी गन सिस्टम (Artillery Gun Systems) की सप्लाई करने के लिए इज़रायल की कम्पनी एलबिट सिस्टम्स (Elbit Systems) फ्रांस की नेक्सटर सिस्टम के साथ प्रतिस्पर्धा कर रही है। करार के अनुसार 1,180 और आर्टिलरी गन सिस्टम बाद में मेड इन इंडिया के तहत भारत में बनाई जानी है।

भारत ने हाल ही में इज़रायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज के साथ 66 अग्नि नियंत्रण रडार (Fire Control Radars) के लिए प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के रख-रखाव के साथ ₹4,577 करोड़ का सौदा किया है। ये 3-डी निगरानी और ट्रैकिंग रडार सेना की वायु रक्षा वाहिनी के पास मौज़ूद फ्लाईकैचर रडार सिस्टम की जगह लेंगे, जो अब पुरानी हो गई है।

टाइम्स नाउ-VMR सर्वे में NDA को 252, UPA को 147 सीट, त्रिशंकु लोकसभा

आजकल हर टीवी चैनल और मीडिया हाउस नए-नए सर्वे करा रहा है। हाल ही में इंडिया टुडे और फ़र्स्ट पोस्ट के सर्वे भी आए थे। चुनावों की घोषणा अगले महीने हो सकती है, और अप्रैल में चुनावों के शुरू होने की उम्मीद की जा रही है।

ऐसे में टाइम्स नाउ-VMR का सर्वे आया है जिसमें आगामी लोकसभा चुनावों में किसी भी पार्टी या गठबंधन को पूर्ण बहुमत मिलता नहीं दिखाया जा रहा। सर्वे के अनुसार भाजपा के नेतृत्व वाली NDA को 252 सीटें मिलने की बात कही गई है। इसमें से भाजपा को कुल 215 सीटों पर जीत मिलने की उम्मीद है जो कि पिछले चुनावों के 282 सीटों के आँकड़े से 67 कम है। 

इसी सर्वे में अगर UPA की बात करें तो इस गठबंधन को 147 सींच मिलने की उम्मीद है। इसमें से कॉन्ग्रेस को 96 सीटें मिल सकती हैं, जो कि पिछले चुनावों के 44 सीटों से 52 ज़्यादा है। 

सर्वे में भाजपा के कम सीटों का सबसे बड़ा कारण उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा गठबंधन दिख रहा है जो कि भाजपा वाले NDA को 27 पर गिराता दिख रहा है। पिछले लोकसभा चुनावों में, और विधानसभा चुनाव में भी, भाजपा ने अप्रत्याशित सफलता पाई थी। लेकिन इस बार सपा-बसपा गठबंधन, सर्वे की मानें तो, भाजपा के ताबूत का कील बनती दिख रही है। 

हालाँकि, पिछले कई बार ऐसे सर्वे बिलकुल ही गलत साबित हो चुके हैं। अगर अभी तक के तीन बड़े सर्वेक्षणों की बात करे तो फ़र्स्ट पोस्ट ने भाजपा को आगे बताया। 

सर्वे के अनुसार, 2019 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले नरेंद्र मोदी और बीजेपी के नेतृत्‍व वाले नेशनल डेमोक्रेटिक एलायंस (NDA) को जनता की पहली पसंद माना जा रहा है। इस सर्वे के अनुसार NDA, विपक्षी महागठबंधन से बहुत आगे है। इस सर्वे में 52.8% जनता पीएम नरेंद्र मोदी को सर्वाधिक भरोसेमंद नेता मानती है। वहीं, कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी पर केवल 26.8% जनता ने ही विश्वास जताया है।

वहीं, इंडिया टुडे के सर्वे के अनुसार उत्तर भारत के पाँच राज्यों में चुनाव के नतीजे एनडीए के समर्थन में ही आने वाली है। सर्वे के मुताबिक इन पाँच राज्यों – दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और राजस्थान- में NDA को 40% तक वोट मिल सकते हैं, जबकि UPA को महज 23% वोट मिलने की संभावना है। हालाँकि, इस रिपोर्ट के मुताबिक अन्य दल इन राज्यों में यूपीए से ज़्यादा भाजपा व उनके सहयोगी दलों के लिए चुनौती पेश कर सकते हैं।

कलिकाल के संजय हैं दिव्यदृष्टिधारी जनेऊधारी शिवभक्त रामभक्त दत्तात्रेय गोत्री राहुल गाँधी

कॉन्ग्रेस पार्टी की एकमात्र उम्मीद अपने राजनीतिक करियर में एक के बाद एक लगभग पिछत्तिस चुनाव हारने से इतने दुखी हुए हैं कि आए दिन वो कोई नया दिवास्वप्न देखने लगे हैं। लेटेस्ट दिवास्वप्न जो उन्होंने इस क्रम में देखा है, वो ये है कि गोवा के सीएम मनोहर पर्रिकर ने उनसे बताया था कि राफेल डील बदलते समय पीएम नरेंद्र मोदी ने मनोहर पर्रिकर से नहीं पूछा था।

शायद ऐसे स्वप्न देखकर वो अब ये सुबूत देना चाह रहे हैं कि जनेऊ धारण करते ही वो अब महाभारत और उसके पात्रों में विश्वास करते हैं और इनमें सबसे ज्यादा प्रभावित वो संजय के किरदार से हुए हैं, वही संजय जो अपनी दिव्यदृष्टि से धृतराष्ट्र को युद्धभूमि का हाल सुनते थे।

राहुल गाँधी ने शायद अब अपना एक ध्येय बना लिया है कि चाहे तथ्य कुछ भी कहें, लेकिन उन्होंने जो स्वप्न देखा है वही उनके तथ्य का पुख्ता सुबूत है। ऐसा करने में उन्होंने उस मीडिया गिरोह को भी पीछे छोड़ दिया है, जो ‘साँय -साँय’ वाली रहस्य और रोमाँच से भरी कहानियाँ अपनी ‘विशेष चर्चा’ में चलाने में माहिर हैं।

अलीगढ़ के ‘पिलर लंबर बारा’ पर बैठे हमारे एक ‘गुप्त सूत्र’ की रिसर्च की मानें तो ऐसे हादसे राहुल गाँधी के साथ ख़ासकर तब से होने लगे हैं, जब से उन्होंने यज्ञोपवीत धारण किया है। हमारे इस गुप्त सूत्र को शक है कि राहुल गाँधी को शायद जनेऊ ‘सूट’ नहीं  कर रहा है। और इसी वजह से वो आए दिन अनाप-शनाप सपने देखने लगे हैं।

इससे पहले राहुल गाँधी को स्वप्न आया था कि वो कैलाश मानसरोवर यात्रा पे 13 घंटे लगातार पैदल चलकर जा रहे हैं। हैरानी की बात ये है कि अपनी इस युवावस्था में ढलते-उजड़ते राजनैतिक करियर को सँभालने के लिए जब राहुल गाँधी को एक व्यक्तिगत राजनीतिक सलाहकार और तेज-तर्रार किसी PR दलों की सहायता लेनी चाहिए थी, वो फोटोशॉप करने वाले युवाओं की मदद ले रहे हैं।

अपनी कैलाश मानसरोवर यात्रा से काला चश्मा और कूल वाली टोपी के साथ स्वप्नद्रष्टा राहुल गाँधी द्वारा जारी तस्वीरें , तस्वीर में कहीं से लाठी की छाया लाकर लगाने वाले को मिलेगा ‘गुप्त सूत्र’ बाबा का ऑटोग्राफ़

बाज़ार में इसके पहले भी इस प्रकार के ‘स्वप्न-राहुलदोष’ के मामले चर्चा में आ चुके हैं, जब पहले अपनी चौड़ाई दिखाने के लिए राहुल गाँधी ने कहा था कि हाँ, वो चीन के साथ विवाद के बावजूद चीन के अधिकारियों से मिलने गए थे। लेकिन यह मामला जैसे ही ‘राष्ट्रवादी’ रंग में आया और सुरक्षा कारणों से यह मुलाकात एकदम बेवकूफ़ाना और राहुल गाँधी के स्तर की बताई गई, तब राहुल गाँधी एकता मंच यह कहता पाया गया कि नहीं, उन्होंने चीन में किसी से कोई मुलाकात नहीं की थी और अगर की भी होगी तो यह राजनयिकों से होने वाली मुलाकात का हिस्सा मात्र था, जो की विपक्ष का नेता होने के नाते वह कर सकते हैं।

विपक्ष का नेता? जी हाँ, यानी एक और स्वप्न, जब आपकी पार्टी के पास पिछले 4 सालों से विपक्ष लायक सीटें भी नहीं हैं, तो फिर आप किस विपक्ष के नेता हैं? मने भाई साब, विपक्ष की ये किस लाइन में आ गए आप?

यह राहुल गाँधी स्वप्नों का आदि हो चुका है और अब ये विपक्ष का ‘तंत्र-साधक’ नेता स्वप्न के दूसरे ही स्तर पर पहुँच चुका है। इस स्तर में होता यह है कि इंसान अपनी खुद की मुलाकातों के स्वप्न के अलावा ये भी दिव्यदृष्टि से जान लेता है कि दूसरे लोग किस-किस से मिल रहे हैं। इसका सबसे जबरदस्त उदाहरण है, जब कलिकाल के इस संजय ने अरुण जेटली की विजय माल्या से वो मुलाकात देख डाली, जिसमें अरुण जेटली माल्या की अटैची और बिस्तरबंद लेकर उन्हें एयरपोर्ट छोड़ने जा रहे थे।

अंधभक्त और गोदी मीडिया कभी भी नहीं मानेगा कि महाठगबंधन अपनी जगह पर है, लेकिन मोदी जी को अगर असल मायनों में कोई चुनौती दे रहा है, तो वो सिर्फ और सिर्फ राहुल गाँधी हैं। इसके लिए उनके पास कारण भी हैं। मामला चाहे राफ़ेल का हो या फिर कोई और, तमाम सरकारी स्पष्टीकरणों के बाद भी जिस चौड़ाई और हठ से वो अपने बयानों पर अड़े रहते हैं, वो वाकई देखने लायक और लाजवाब है।

गंदे नाले से बॉल निकाल लाने के लिए गली क्रिकेट में बड़े लड़के अक्सर उम्र में छोटे बच्चों को भी टीम में रख लेते हैं, लेकिन जब वो बैटिंग करने की हठ करता है तो घरवालों के मनाने से भी नहीं मानता है। इसी बच्चे से फिर अगर आप कह दें कि बॉउंड्री के उस पार की ही ‘सिक्स’ मानी जाएगी, लेकिन वो बच्चा तो बालहठ में बल्ले पर लगी ‘टुक्क’ को ही सिक्स मानता है, क्योंकि एक बार रूमी ने कहा था, ‘हिज़ लाइफ़ हिज़ रूल्ज़।’

तो मित्रो! इस तरह से राहुल गाँधी की दिव्यदृष्टि एक के बाद एक सपने देखने में अब तक लगातार कामयाब रही है। जैसे उनका एक सपना था कि राफेल डील की फ़ाइलें पर्रिकर के बेडरूम में थीं। दूसरा सपना था, मनोहर पर्रिकर ने कहा था कि उन्हें राफेल के बारे मे कोई जानकारी नही है।

इस तरह से कुल मिलाकर राहुल गाँधी का अब एक सपना ही बाकी रह गया है, जो उन्होंने बचपन में देखा था, “मैं दत्तात्रेय गोत्री, गाँधी पुत्र राहुल, एक दिन देश का प्रधानमंत्री बनूँगा।”

उम्मीद है कि राहुल गाँधी के सपनों को जल्द ही उड़ान मिले और वो इस ‘स्वप्न-काण्ड’ के प्रथम अध्याय से जागकर कुछ कर गुज़रें।

अगस्ता वेस्टलैंड: सह-अभियुक्त राजीव सक्सेना को UAE से उठाया गया, वकीलों ने कहा इल्लीगल है ये

अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले के सह-अभियुक्त राजीव सक्सेना को आज (जनवरी 30, 2019) सुबह 9:30 बजे उनके आवास से UAE की सुरक्षा एजेंसी द्वारा उठा लिया गया और शाम 5:30 को भारत के लिए प्रत्यर्पित किया गया। उनके वकीलों, गीता लूथरा और प्रतीक यादव ने इस पूरे प्रकरण को ग़ैरक़ानूनी कहा है।

वकीलों ने कहा कि राजीव सक्सेना को भारत भेजने के लिए किसी भी तरह की एक्सट्राडीशन (प्रत्यर्पण) प्रक्रिया को नहीं अपनाया गया और सक्सेना को अपनी दवाई तक नहीं लेने दी गई। उसे दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के एक प्राइवेट टर्मिनल से एक प्राइवेट जेट पर बिठाकर भारत ले जाया गया।

जब सक्सेना के वकीलों ने संयुक्त अरब अमीरात की सुरक्षा एजेंसी से बात करने की कोशिश की कि पूरा मामला क्या था तो, वकीलों के शब्दों में, उन्हें कहा गया कि राजीव सक्सेना हवाई जहाज पर हैं और उसे अब रोका नहीं जा सकता। जब वकीलों ने माँग की कि उन्हें और जानकारी दी जाए तो उन्हें कहा गया, “भारत सरकार से पूछो।”

राजीव सक्सेना अगस्ता वेस्टलैंड डील से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दोषी पाए गए हैं। उन्होंने पिछले महीने दिल्ली की एक अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी, जिसका ईडी (ED) ने विरोध भी किया था। सितंबर 2017 में VVIP चॉपर घोटाले में दायर एक आरोप पत्र में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उनका नाम लिया था। सक्सेना और उनकी पत्नी शिवानी सक्सेना दुबई स्थित दो कंपनियों में निदेशक हैं, जबकि वह एक अन्य मॉरीशस स्थित कंपनी में निदेशक के पद पर हैं, और यह आरोप लगाया गया है कि उन सभी कंपनियों को अगस्ता वेस्टलैंड सौदे में किकबैक मिला है।

अगस्ता-वेस्टलैंड मामला क्या है?

भारतीय वायुसेना के लिए 12 वीवीआईपी हेलि‍कॉप्टरों की खरीद के लिए इटली की कंपनी अगस्ता-वेस्टलैंड के साथ साल 2010 में करार किया गया था। 3,600 करोड़ रुपये के करार को जनवरी 2014 में भारत सरकार ने रद्द कर दिया। जानकारी के लिए बता दें कि इस करार में 360 करोड़ रुपये के कमीशन के भुगतान का आरोप लगा था। इटली की कंपनी और सरकार के बीच के इस करार में कमीशन की ख़बर सामने आते ही 12 एडब्ल्यू-101 वीवीआईपी हेलीकॉप्टरों की सप्लाई पर सरकार ने फ़रवरी 2013 में रोक लगा दी थी।