पश्चिम बंगाल के पूर्व मिदनापुर में अमित शाह की रैली के पास कुछ गुंडों ने पास में खड़ी गाड़ियों के साथ तोड़फोड़ करते हुए जमकर हंगामा किया। बताया जा रहा है कि इस दौरान बीजेपी समर्थकों पर भी हमला किया गया।
West Bengal: Vehicles parked near Amit Shah’s rally venue in East Midnapore, vandalized. BJP’s Rahul Sinha says, “TMC is afraid of our strength that’s why they committed violence. Unfortunate that everything happened in front of police, attackers didn’t even spare women workers.” pic.twitter.com/aEz2QHfmgl
मामले पर बीजेपी के राहुल सिन्हा ने कहा, “टीएमसी हमारी ताकत से डरती है इसलिए उन्होंने हिंसा की है। दुर्भाग्यपूर्ण है कि पुलिस के सामने सब कुछ हुआ, हमलावरों ने महिला कार्यकर्ताओं को भी नहीं छोड़ा।” उन्होंने हमले के पीछे तृणमूल कांग्रेस को ज़िम्मेदार ठहराया है।
#WATCH West Bengal: Vehicles parked near Amit Shah’s rally venue in East Midnapore, vandalized. BJP’s Rahul Sinha has alleged that TMC is behind the attack. pic.twitter.com/N5lVGHjNT3
रैली में हमले की वारदात पर बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय ने कहा, “हम ममता जी को चेतावनी देना चाहते हैं कि इस प्रकार से बीजेपी कार्यकर्ता डरने वाला नहीं है। ये ममता जी को बहुत मँहगा पड़ेगा।” बता दें कि, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने यहाँ रैली को संबोधित करते हुए जनता से पूछा कि बंगाल को क्या हुआ है? ‘शोनार बांग्ला’ कहाँ गया? सब बंगाल की तरफ देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल के लिए ये चुनाव बंगाल को ‘शोनार बांग्ला’ बनाने के लिए हैं।
Kailash Vijayvargiya,BJP on vehicles vandalized near Amit Shah’s rally venue in East Midnapore: Hum Mamata ji (WB CM) ko chetawani dena chahte hain ki iss prakar BJP ka karyakarta na darne wala hai na jhukne wala hai. Ye Mamata ji ko bahut mehenga padega,ye main kehna chahta hun pic.twitter.com/F0eX8LRvJs
मायावती ने मंगलवार (जनवरी, 29 2019) को कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा जनता से किए वादे पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि अगर ‘गरीबी हटाओ’ और ‘अच्छे दिन’ की तरह राहुल का वादा भी एक मज़ाक हुआ तो हैरानी वाली बात नहीं होगी। बता दें कि मायावती ने राहुल पर ये तंज उनके सोमवार (जनवरी, 28 2019) को जनता से किए वादे पर कसा है। जिसमें राहुल ने कहा था कि अगर वो सरकार में आते हैं तो देश में गरीबों को न्यूनतम आय दी जाएगी।
बीएसपी प्रमुख मायावती ने राहुल को सलाह दी है कि वो पहले कॉन्ग्रेस शासित राज्य (राजस्थान, पंजाब, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़) में ग़रीबी को हटाने से जुड़ी योजनाओं और जनता के लिए कल्याणकारी योजनाओं को लागू करें, ताकि राष्ट्रीय स्तर पर लोग उनके किए वादों पर विश्वास दिखा सकें।
मायावती ने कहा कि लोकसभा चुनावों के नज़दीक आते ही राहुल द्वारा किए जा रहे ‘न्यूनतम आय’ के लिए वादे, लोगों को हैरान भी कर रहे हैं और उनके मन में सवालों को भी खड़ा कर रहे हैं।
मायावती ने राहुल के इस वादे पर सवाल उठाया कि ग़रीब को न्यूनतम आय देने का वादा, कॉन्ग्रेस के ‘ग़रीबी हटाओ’ और बीजेपी के ‘अच्छे दिन’ जैसा ही मज़ाक तो नहीं है।
उन्होंने कहा कि चुनावी वादों पर अगर बात करें तो पता चलेगा कि बीजेपी और कॉन्ग्रेस दोनों ही इन्हें पूरा करने में असफल रहे हैं। मायावती का कहना है कि जनता ने पिछले 72 सालों में बीजेपी और कॉन्ग्रेस दोनों को अपनाकर देख लिया है। इसलिए उन्होंने जनता से बीएसपी की ओर से अपील करते हुए कहा कि वो एक बार उनकी पार्टी पर विश्वास दिखाएँ जो अपने वादों को पूरा करने के लिए लगातार कार्य कर रहे हैं।
कहानी एक महिला ऐसी उद्यमी महिला की जो अपने परिवार के आय को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार की ‘मुद्रा योजना’ से लोन लेकर अपना व्यवसाय शुरू किया और आज वह अपने परिवार का आसानी से ख़्याल रख पा रही हैं। उनका शून्य से शुरू हुआ व्यापार अब करोड़ में पहुँच चुका है।
हम बात कर रहे हैं तमिलनाडु के मदुरै में रहने वाली अरुलमोझी सर्वानन की, जो अभी सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) के ज़रिए अपना व्यवसाय चला रही हैं। उनका कहना है कि (जीईएम) सिर्फ़ व्यवसाय के लिए एक साधन ही नहीं, बल्कि राष्ट्र की सेवा का एक माध्यम है। उनका मानना है कि, यह सरकारी कार्यालयों में जनता के पैसे को बचाने का एक अच्छा माध्यम है।
पीएम मोदी से मिलकर हुईं भावुक
पीएम मोदी हाल में जब तमिलनाडु के दौरे पर थे तो, अरुलमोझी उनसे मिलने पहुँच गईं थी, जिसके बाद प्रधानमंत्री मोदी से उन्होंने मुलाक़ात किया। इस दौरान वो काफ़ी भावुक हो गईं, उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री से मिलना उनका एक सपना था। जिसके बाद प्राधनमंत्री ने उनसे अंग्रेज़ी में पूछा कि उनका व्यापार कैसा चल रहा है। बता दें कि, दो साल पहले 2017 के मध्य में पीएम ने इनके बार में ‘मन की बात’ कार्यक्रम में ज़िक्र किया था।
During my visit to Madurai yesterday, I had the honour of meeting a remarkable woman entrepreneur, Arulmozhi Saravanan.
The Mudra Yojana brought a qualitative change in her life and she even sold products to the PMO! https://t.co/ZQKz0DOAJI
केंद्र की ‘मुद्रा योजना’ के तहत अरुलमोझी ने लोन लेकर बिज़नेस करते हुए (जीईएम) पर पर अपना पहला ऑर्डर ₹234 का रिसीव किया था। इन्हें जीईएम के माध्यम से पता चला की प्रधानमंत्री कार्यालय को कुछ थर्मोफ्लेक्स की ज़रूरत है। जिसके बाद इन्होंने (जीईएम) के माध्यम से थर्मोफ्लेक्स की आपूर्ति की और उसका भुगतान भी इन्हें मिल गया। अरुलमोझी ने इस बात की पूरी कहानी पत्र लिखकर पीएम के साथ साझा की थी।
पीएम को पत्र लिखकर किया धन्यवाद
उन्होंने हाल में प्रधानमंत्री मोदी को एक पत्र लिखकर व्यवसाय के बारे में जानकारी देते हुए लिखा कि इस व्यवसाय ने उनके जीवन में परिवर्तन ला दिया है। साथ ही उन्होंने कहा कि पहले खाना चूल्हे पर पकाया जाता था, लेकिन अब वह गैस सिलेंडर का उपयोग करती हैं। जानकारी देते हुए उन्होंने लिखा, अब उनका व्यावसाय चालू वित्त वर्ष में ₹1 करोड़ के पार चला गया है, और अब वह जल्द ही अपनी रसोई गैस सब्सिडी छोड़ने की योजना बना रही हैं।
क्या है सरकार की ‘मुद्रा योजना’
केंद्र सरकार ने अप्रैल 2015 में छोटे उद्यम शुरू करने के लिए इस योजना की शुरूआत की थी। इसके तहत लोगों को अपना कारोबार शुरू करने के लिए छोटी रकम का लोन दिया जाता है। बता दें कि इसके तहत बिना गारंटी के लोन मिलता है और लोन के लिए कोई प्रोसेसिंग चार्ज भी नहीं लिया जाता। साथ ही लोन चुकाने की समय सीमा को 5 साल तक बढ़ाया भी जा सकता है। इसमें लोन लेने वाले को एक ‘मुद्रा कार्ड’ दिया जाता है, जिसकी मदद से वह ज़रूरत पर उसका इस्तेमाल कर सकता है।
‘मुद्रा योजना’ की ख़ास बात यह है कि इसके तहत लोन लेने वाले चार लोगों में से तीन महिलाएँ हैं। PMMY के लिए बनाई गयी वेबसाइट के मुताबिक़ 23 मार्च 2018 तक ‘मुद्रा योजना’ के तहत ₹2,28,144 करोड़ के लोन मंजूर किए जा चुके हैं। सरकार ने इस योजना के तहत इस साल 23 मार्च तक ₹2,20,596 करोड़ के लोन बाँटे हैं।
उत्तर प्रदेश के मेरठ में समुदाय विशेष के कुछ दबंगों द्वारा बारातियों की पिटाई और दुल्हन के साथ छेड़-छाड़ के साथ लूट-पाट करने का मामला सामने आया है। जिले के भावनपुर थाना क्षेत्र के पचपेड़ा गाँव से बागपत लौट रही बारात पर दर्ज़न भर युवकों ने मामूली कहासुनी के बाद हमला बोल दिया और जमकर लूटपाट मचाई। दरअसल, पूरा मामला दुल्हन पर टिप्पणी करने के साथ शुरू हुआ था, जिसके बाद मामला इतना बढ़ गया कि दबंगों ने दुल्हन से छेड़छाड़ करनी शुरू कर दी और दुल्हन के जेवरात भी लूट लिए।
4 गाड़ी में आए दबंगों ने दूल्हे और बारातियों को लाठी-डंडे से पीटा
बताया जा रहा है कि, दुल्हन की तबियत बारात के दौरान अचानक ख़राब हो गई, जिसके बाद दुल्हन की गाड़ी को गाँव में ही दूसरे समुदाय के व्यक्ति की दुकान के सामने रोक दिया गया। जहाँ पर दुल्हन ने उलटी की जिसको लेकर दूसरे समुदाय के युवकों ने दुल्हन पर कमेंट्स कर दिया और जब दूल्हे समेत बारातियों ने इसका विरोध किया तो समुदाय विशेष के लोगों ने लाठी-डंडे से जमकर पिटाई शुरू कर दी। आरोप है कि मामला बढ़ने पर समुदाय विशेष के दबंगों ने चार अन्य गाड़ियाँ भी मँगा लीं, जिसमें करीब 60-70 लोग आए और सभी ने मिलकर मारपीट की और साथ ही दुल्हन का कुंडल भी लूट ले गए।
मौके पर पहुँची पुलिस ने संभाला मोर्चा
मामले को बढ़ता देख पुलिस को सूचना दी गई, जिसके बाद पाँच-छः थानों की फोर्स के साथ एसपी क्राइम डॉ. बीपी अशोक, एडीएम प्रशासन रामचंद्र, एएसपी सतपाल सिंह, सीओ सदर देहात चक्रपाणि त्रिपाठी ने मौके पर पहुँचकर मामले को शांत करवाया। बावजूद इसके बताया जा रहा है कि इलाके में तनाव बना हुआ है। बता दें कि, बारात पर हमले की सूचना मिलते ही बीजेपी और अन्य हिन्दू संगठनों के तमाम नेता भावनपुर थाने पर पहुँच गए।
उन्होंने आरोपितों पर कार्रवाई की माँग करते हुए जमकर हँगामा किया। मामले में पुलिस ने दुल्हन के भाई गौरव शर्मा की तहरीर पर शादाब, शाहबाज, बहादुर, इमरान, कामरान, नदीम, यूसुफ समेत 60 लोगों पर गंभीर धाराओं में मुक़दमा दर्ज कर 6 लोगों को गिरफ़्तार कर लिया है और अज्ञात आरोपितों की गिरफ़्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। इसके अलावा पुलिस ने दुल्हन समेत सात लोगों को मेडिकल परीक्षण के लिए जिला अस्पताल भेज दिया है।
आज एक विचलित करने वाली ख़बर पढ़ी। ख़बर थी कि सुप्रीम कोर्ट के पाँच जजों की संवैधानिक पीठ इस बात पर फ़ैसला करेगी कि केन्द्रीय विद्यालयों में हर सुबह होने वाली प्रार्थनाएँ, ख़ासकर संस्कृत वाली, संविधान निर्दिष्ट मूलभूत धर्मनिरपेक्ष अवधारणा के विरोध में है या नहीं।
यह बात विचलित करने वाली नहीं है, विचलित करने वाली बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट के जज ने इस याचिका को इस लायक समझा कि इसे पाँच जजों की बेंच के लिए लिस्ट कर दिया। जब आप इसमें दिए जाने वाले तर्क सुनेंगे तो आपको लगेगा कि लगभग दो करोड़ लम्बित मामले वाले इस देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था के पास किस-किस तरह की बातों के लिए समय है।
पहले तो याचिकाकर्ता का कहना है कि वह नास्तिक व्यक्ति है, और केन्द्रीय विद्यालय में संस्कृत की ‘धार्मिक प्रार्थना’ के कारण इस देश के बहुत लोगों की भावनाएँ आहत होती हैं। हालाँकि, भावना आहत होने के आँकड़ों के लिए कोई शोध किया गया हो, ऐसा कहीं भी बताया नहीं गया है। भावनाएँ आहत होना हमारा राष्ट्रीय उद्योग बन चुका है, और सुप्रीम कोर्ट का हर भावना को बचाने के लिए समय निकाल कर दही हाँडी की ऊँचाई से लेकर जलीकट्टू के सांड की सींग और होली के पानी तक के प्रयास का आम जनता जबरदस्ती सम्मान करती रही है।
(इस लेख का वीडियो आप नीचे देख सकते हैं।)
वापस आते हैं प्रार्थना के ऊपर। जो भी प्रार्थना होती है, जिसमें संस्कृत के कुछ श्लोक हैं जैसे कि ‘असतो मा सद्गमय, तमसो मा ज्योतिर्मय, मृत्योर्मामृतं गमय’ आदि हैं। ये एक बेहूदी दलील है कि ये धार्मिक है। यहाँ, धार्मिक मतलब ‘हिन्दू धर्म’ से संबंधित। इस कोर्ट के जज को क्या इतनी समझ नहीं है कि इस तरह की याचिकाओं को फाड़कर कूड़ेदान में फेंक दिया जाना चाहिए? क्योंकि इस बात से समस्या विद्यार्थियों को होनी चाहिए, न कि किसी मलिन विचारों वाले व्यक्ति को।
प्रार्थना हम क्यों करते हैं, और क्या होता है इसमें? क्या सुविचार के संस्कृत में होने से धार्मिक भावनाएँ आहत होती हैं? फिर स्कूलों की प्रार्थनाओं को ही क्यों, ‘सत्यमेव जयते’ लिखे राष्ट्रीय प्रतीकों से लेकर संस्कृत की सारी किताबों में आग लगा देनी चाहिए। फिर तो, संस्कृत भाषा की पढ़ाई भी बंद करा देनी चाहिए। फिर तो, हमें मदरसों और मिशनरी स्कूलों से जीसस, अल्लाह की बातों पर भी ग़ौर करना चाहिए कि क्या वो धार्मिक हैं या नहीं?
इस तरह की याचिका का सुप्रीम कोर्ट के जज की टेबल पर पहुँचना बताता है कि लोगों के पास कितना खाली समय है। यही कारण है कि सुप्रीम कोर्ट का जज किसी प्रोग्राम में जाकर रोने लगता है कि जुडिशरी पर बहुत दबाव है! अरे भाई, जब इस तरह की बेहूदगी को बर्दाश्त करोगे, तो रोना ही नहीं, शर्म भी आनी चाहिए कि जिस कुर्सी पर आप बैठे हैं वहाँ आख़िर कर क्या रहे हैं?
प्रार्थना के शब्दों के लिए संस्कृत भाषा एक माध्यम भर है। क्या किसी बच्चे को स्कूल के आप भगवान का नाम लेने से मना कर सकते हैं? क्या किसी बच्चे को यह कहा जा सकता है कि संस्कृत में ‘हमें असत्य से सत्य की ओर, अंधेरे से प्रकाश की ओर, मृत्यु से अमरता की ओर ले चलो’ का मतलब हिन्दी, अंग्रेज़ी या उर्दू में किए गए अनुवाद से अलग होगा?
क्या मदरसे में नमाज़ पर प्रतिबंध लगा दिया जाए कि ये धार्मिक है? और अगर धार्मिक ही है, तो क्या यही संविधान हमें धर्म को चुनने, अनुसरण करने की अनुमति नहीं देता है? क्या केंद्रीय विद्यालयों के अस्सी प्रतिशत विद्यार्थी जो हिंदू हैं (एक औसत आँकड़ा ले रहा हूँ), वो कल को वकील भेजकर ये कहलवाएँ कि प्रार्थना करना उनका अधिकार है, तो क्या सुप्रीम कोर्ट फिर से सात जजों की बेंच बनाएगी?
‘सेकुलर’ के नाम पर जो बेहूदगी इस देश में हो रही है, और इस लॉबी के कारण न्यायपालिका का जितना समय हर रोज बर्बाद होता है, वो न जाने किस मजबूरी में जजों को नहीं दिख रहा। ऐसे वकीलों पर न सिर्फ़ आर्थिक पैनल्टी लगनी चाहिए, बल्कि इन्हें कोर्ट और पब्लिक में बेइज़्ज़त किया जाना चाहिए कि इस क़िस्म की याचिका वो क्यों लेकर आता है।
अगर धार्मिक शिक्षा के नाम पर, संस्कृत के श्लोक के नाम पर, ऐसी बातें सिखाई जाएँ जो मानवता और भाईचारे के सिद्धांतों से दूर हैं, बच्चों को बिगाड़ते हों, तो बेशक सुप्रीम कोर्ट को स्वयं ही दख़ल देकर पूछना चाहिए कि शिक्षा के नाम पर ये सब क्या हो रहा है। लेकिन, जब प्रार्थना का उद्देश्य सुविचार और दिन की शुरुआत एक शांत, गंभीर तरीके से करना हो, तो इसमें किसी को समस्या कैसे हो सकती है?
क्या बच्चों के अभिभावकों के पास स्कूल चुनने का हक़ नहीं है? क्या किसी भी स्कूल से लगातार ऐसी शिकायतें आई हैं कि वहाँ सारे बच्चों को संस्कृत प्रार्थना करने पर विवश किया जाता है? क्या किसी ने ऐसा कहा है कि उसे प्रार्थना करने का मन नहीं होता, लेकिन उसके धार्मिक पहचान के आधार पर उससे प्रार्थना करवाकर, उसे प्रताड़ित किया जा रहा है?
ऐसे याचिकाकर्ता बहुत ही धूर्त लोग हैं जिनकी मंशा न तो देश की धर्मनिरपेक्षता है, न ही समाज की भलाई का। ये लोग दो मिनट की लोकप्रियता के लिए इस तरह की बेहूदगी करते हैं। हमें यह देखना चाहिए कि क्या इतनी छोटी उम्र के बच्चे संस्कृत की उस प्रार्थना को ‘धार्मिक’ रूप में देखते हैं? अगर ऐसा है तो उसके माँ-बाप को, उसके शिक्षकों का दोष है कि वह भाषा को धर्म से जोड़कर देखता है, वह शब्दों के अर्थ को न लेकर शब्दों पर ही सवाल कर रहा है।
आप बच्चों को किस-किस आधार पर एक दूसरे के ख़िलाफ़ खड़े करने की बात कर रहे हैं? धर्मनिरपेक्ष का मतलब धर्म का लोप नहीं होता, बल्कि दूसरे धर्मों की बातों को सहजता से स्वीकारना होता है। धर्मनिरपेक्ष का मतलब यह नहीं है कि मैं ‘अल्लाहु अकबर’ या ‘जय श्री राम’ कहने से साम्प्रदायिक हो जाता हूँ, बल्कि इसका मतलब यह है कि किसी के ‘जय श्री राम’ या ‘अल्लाहु अकबर’ कहने से मुझे कोई समस्या नहीं है।
मुझे याचिकाकर्ता से समस्या नहीं है, क्योंकि वो तो अपनी हरकतों से चिरकुट लगता है। मुझे समस्या सुप्रीम कोर्ट के जजों से है कि उसकी समझ इतनी बेकार है संविधान या समाज को लेकर कि उसे इस मामले में संवैधानिक पीठ तक जाना पड़ रहा है? कुछ लोग कहेंगे कि सुप्रीम कोर्ट को फ़ाइनल कर ही देना चाहिए कि ये सही है या गलत।
फिर तो सुप्रीम कोर्ट तक कोई आदमी ‘भगवा’ रंग को लेकर धर्म देखते हुए पूरे देश से उसे हटवाने की अपील करेगा क्योंकि उससे उसकी धार्मिकता या नास्तिकता आहत हो रही है? कोई कल को मस्जिदों को हटाने की माँग कर सकता है कि उसे देखकर उसका हिन्दुत्व ख़तरे में पड़ रहा है?
देश धर्मनिरपेक्ष होने का मतलब यह नहीं है कि धर्म के प्रतीकों को हटा दिया जाए, बल्कि उसका मतलब है कि हर धर्म के प्रतीकों के लिए नागरिक के मन में सम्मान हो। सम्मान न भी हो तो, वो दूसरों की धार्मिक भावनाओं पर आक्रमण न करे। उन्हें नीचा न दिखाए।
याचिकाकर्ता की तरफ से दलील यह भी दी जा रही है कि ये केन्द्र संचालित हैं, तो उसमें इस तरह की बातें नहीं होनी चाहिए। केन्द्र संचालित बहुत सी चीज़ें हैं और उसमें धर्म के नाम पर बहुत सी बातें होती हैं। कार्यक्रमों का शुभारंभ दीप जलाकर किया जाता है, मंत्रालयों, विभागों, संस्थानों के नाम में, उनके प्रतीकों में संस्कृत के सुविचार हैं, तो क्या ये सब धार्मिक हैं?
ये धार्मिक नहीं हैं, ये हमारी संस्कृति का हिस्सा है। संस्कृति का हिस्सा धर्म से जुड़ा हो सकता है लेकिन इसका मतलब यह तो नहीं कि धर्म से जुड़ा है तो गलत है? अगर कहीं यह लिखा हो कि विधर्मियों को काट देना चाहिए, तो उस पर प्रतिबंध लगाने की ज़रूरत है, न कि इस बात पर जो बेहतर जीवन जीने का उपदेश देता हो।
किसी धर्म से जुड़ा होना उसे स्वयं ही गलत नहीं बना देता। आजकल का फ़ैशन है कि जो हिन्दू है, हिन्दू धर्म से जुड़ा है, हिन्दू विचारों की बात करता है, वो साम्प्रदायिक हो जाता है। चलन में आजकल है कि हिन्दुओं के हर प्रतीक को इस ‘सेकुलर’ नैरेटिव में खींचकर उसे नकार दिया जाए। यह स्थिति बहुत ख़तरनाक है क्योंकि देश की इतनी बड़ी आबादी के सब्र का इम्तिहान एक हद तक ही लिया जा सकता है।
जब जनता सड़क पर आ जाएगी तब न तो जज रहेंगे, न कोर्ट। इस तरह की याचिकाओं के लिए तीन सेकेंड से ज़्यादा समय देना बताता है कि हमारी न्यायिक व्यवस्था विवेक की जगह ‘टेक्निकेलिटी’ से चलती है, और इसे वकीलों ने अपने मनमानी का अखाड़ा बना लिया है। जजों को अपनी और संस्थान की अहमियत समझनी चाहिए, तथा जजमेंट या निर्देश देते हुए अपने विवेक का इस्तेमाल करना चाहिए।
ऐसी तमाम बातों को देखकर ही लगातार अब यह नैरेटिव भी सामने आ रहा है कि न्यायालय का सहारा लेकर हिन्दुओं को टार्गेट किया जा रहा है। सबरीमाला से लेकर दही हांडी तक, दीवाली से लेकर होली तक, सरस्वती की संस्कृत प्रार्थना से लेकर दुर्गा की मूर्ति तक, हमेशा एक ही धर्म इनके निशाने पर रहे हैं। यह बात सोचने को विवश करती है कि जजों का बुद्धि-विवेक चंद वकीलों के हाथ में क्यों बंधक बना हुआ है।
एमजे अकबर पर ‘मी टू’ (Me Too) के तहत यौन शोषण का आरोप लगाने वाली पत्रकार प्रिया रमानी को अदालत ने समन किया है। दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने प्रिया को 25 फ़रवरी के दिन अदालत के समक्ष पेश होने को कहा है। बता दें कि प्रिया रमानी द्वारा पूर्व केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर पर यौन शोषण के आरोप लगाए जाने के बाद उन्हें इस्तीफ़ा देना पड़ा था। पूर्व मंत्री ने रमानी के ख़िलाफ़ अदालत में मानहानि का मुक़दमा दायर किया था, जिस पर सुनवाई करते हुए प्रिया रमानी को समन किया गया।
अक्टूबर 2008 में कई ट्वीट कर के रमानी ने अकबर पर यौन शोषण के गंभीर आरोप लगाए थे। पूर्व मंत्री ने मानहानि के केस को साबित करने के लिए अपनी तरफ़ से 6 गवाह पेश किए। सभी गवाहों ने अदालत को बताया कि एमजे अकबर के ख़िलाफ़ प्रिया रमानी द्वारा लगाए गए आरोप उनके लिए चौंकाने वाले थे। अदालत ने इन गवाहों के बयान सुनने के बाद प्रिया रमानी को आरोपित के रूप में समन किया। गवाहों ने कोर्ट को बताया कि इन आरोपों के बारे में जानने के बाद उनकी आँखों में अकबर के लिए मान कम हो गया। गवाहों ने यह भी कहा कि उन्होंने अकबर के साथ इतने दिन काम करने के बावजूद उनके ख़िलाफ़ कोई शिकायत वाली बात नहीं सुनी।
A Delhi court issued summons to Priya Ramani as an accused in the defamation case filed by former junior external affairs minister MJ Akbar against her
एमजे अकबर हमेशा अपने ऊपर लगे आरोपों का खंडन करते रहे हैं और उनका कहना है कि उन्हें जान-बूझ कर फँसाया जा रहा है। एडिशनल चीफ मेट्रोपोलिटन मेजिस्ट्रेट (ACMM) के समक्ष एमजे अकबर ने रमानी के आरोपों को ‘गढ़ी हुई घटनाएँ (Fabricated non-events)’ बताया था। वहीं अदालत के इस निर्णय के बाद प्रिय रमानी ने सोशल मीडिया के माध्यम से बताया कि अब उनकी तरफ की कहानी बताने का वक्त आ गया है।
प्रिया रमानी पेशे से पत्रकार हैं। उनके आरोपों के बाद कई अन्य महिलाओं ने भी एमजे अकबर पर आरोप लगाए थे। ‘मी टू’ में अब तक नाना पाटेकर, विनोद दुआ, आलोक नाथ, राजकुमार हिरानी और साज़िद ख़ान सहित कई हस्तियों के नाम आ चुके हैं।
प्रयागराज कुम्भ में मंगलवार को पहली बार ऐसा हुआ है जब कुम्भ क्षेत्र में राज्य सरकार की कैबिनेट की बैठक हुई। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ यूपी सरकार के सभी मंत्री मौजूद रहे।
UP Chief Minister Yogi Adityanath: Cabinet has decided to make Ganga-Expressway, to connect Prayagraj with Western Uttar Pradesh. This will be world’s longest expressway, approximately 600 km, it will take 6,556 hectares of land, it will cost approximately Rs 36,000 crore. pic.twitter.com/aLXt8CNd1B
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुआई में कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया जिनका ऐलान करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ से लेकर प्रयागराज तक गंगा एक्सप्रेस-वे बनाया जाएगा। यह 6 लेन का गंगा एक्सप्रेस-वे गंगा के किनारों के साथ आगे बढ़ेगा। इस एक्सप्रेस-वे को बनाने के लिए 36000 करोड़ रुपए के बजट को मंज़ूरी दी गई।
गंगा एक्सप्रेस-वे मेरठ, अमरोहा, बुलन्दशहर, बदायूँ, शाहजहाँपुर, फ़र्रुखाबाद, हरदोई, कन्नौज, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ होते हुए प्रयागराज तक आएगा। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ये एक्सप्रेस-वे दुनिया का सबसे लंबा एक्सप्रेस-वे होगा।
छह लेन का गंगा एक्सप्रेस-वे मेरठ, अमरोहा, बुलन्दशहर, बदायूं, शाहजहांपुर, फर्रुखाबाद, हरदोई, कन्नौज, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ होते हुए प्रयागराज तक आएगा। यह दुनिया का सबसे बड़ा हाईवे होगा : #UPCM श्री @myogiadityanath जी
इसके अलावा फ़ैसला लिया गया है कि बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे का भी तेजी से निर्माण किया जाएगा, 270 किलोमीटर के इस एक्सप्रेस-वे के लिए लिए 8000 करोड़ रुपए से अधिक का आवंटन किया जाएगा। कैबिनेट मीटिंग में किसानों की आय को दोगुना करने के लिए भी किसान मंडी में प्रतिनिधित्व को लेकर कुछ अहम निर्णय लिए गए।
Uttar Pradesh Chief Minister Yogi Adityanath chairs Cabinet meeting at Prayagraj. pic.twitter.com/HFr4QskFbB
साथ ही, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सर्जिकल स्ट्राइक के ऊपर बनी फिल्म ‘उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक’ को उत्तर प्रदेश में कर मुक्त कर दिया है। महर्षि भारद्वाज की नगरी प्रयागराज के आश्रम का भी सौंदर्यीकरण करने की घोषणा की गई। निषादराज की नगरी श्रृंगवेरपुर को भी विकसित करने का ऐलान किया गया।
Uttar Pradesh Chief Minister Yogi Adityanath in Prayagraj: There is a movie on the surgical strikes ‘Uri’, cabinet has decided to exempt it from state GST. This film will instill a feeling of nationalism in the youth and the citizens of the country. pic.twitter.com/J2F0EXjJEy
कैबिनेट बैठक के बाद योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में इस बार कुम्भ का आयोजन भव्यतम है। मुख्यमंत्री ने इसके लिए प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया। बता दें कि इस बार कुम्भ में दुनिया के 70 से अधिक देशों के लगे राष्ट्रध्वज, इसकी वैश्विक प्रतिष्ठा के प्रतिक हैं।
प्रयागराज कुम्भ को आदरणीय प्रधानमंत्री @narendramodi जी और भारत सरकार का सकारात्मक सहयोग एवं मार्गदर्शन प्राप्त हुआ है, उसके लिए हम उनका अभिनन्दन एवं आभार व्यक्त करते हैं : #UPCM श्री @myogiadityanath जी
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी और निर्माणी अनी अखाड़े के प्रमुख महंत धर्मदास के साथ ही विभिन्न साधु-संतों के अलावा आम श्रद्धालुओं ने भी योगी सरकार के कुम्भ में कैबिनेट बैठक करने पर ख़ुशी का इज़हार किया है।
बिहार की राजधानी पटना में गर्दनीबाग इलाके में 20 मंत्रियों के बंगले ₹62 करोड़ में बनाए जाने थे। अब इन बंगलों की निर्माण राशि में सरकार ने कटौती की है। कटौती के बाद अब मंत्रियों के बंगलों का निर्माण ₹52 करोड़ में किया जाएगा।
सरकार द्वारा राशि में कटौती के बाद अब एक बंगले की निर्माण राशि 2.5 करोड़ होगी। राशि में 10 करोड़ की गिरावट के कारण भीतर के डिज़ाइन में भी परिवर्तन होगा। जिसके बाद इन बंगलों के निर्माण की प्रक्रिया चालू होगी।
बता दें कि गर्दनीबाग में बसने वाले टाउनशिप इलाके में न्यायाधीशों व मंत्रियों के 20 बंगले बनने हैं। वहीं अधिकारियों और तृतीय श्रेणी के कर्मियों के 700-700 आवास बनने हैं और चुतुर्थ ग्रेड कर्मियों के 400 सरकारी आवास बनने हैं। उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों के बनने वाले बंगले का अब तक डिज़ाइन फाइनल नहीं हुआ है।
इसके साथ ही आपको बता दें कि टाउनशिप इलाके में अधिकारियों के जो 700 आवास बनने हैं उस पर ₹480 करोड़ का ख़र्चा आना है। इन आवास निर्माण के लिए टेंडर की प्रक्रिया पूरी हो रही है। इस इलाके में बने मास्टर प्लान में आवासीय भवनों के साथ व्यवसायिक क्षेत्र, आईटी पार्क, होटल, अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान आदि का भी निर्माण होना है।
इन सभी भवनों की संरचना में पटना के भूकंप को ध्यान रखते हुए सुरक्षात्मक मापदंडो का पालन होगा। प्रभात खबर में छपी रिपोर्ट के अनुसार, भवन निर्माण विभाग के सूत्र ने बताया कि पहले मंत्रियों के बंगलों के निर्माण में 52 करोड़ ख़र्च का अनुमान लगाया गया था। लेकिन, नए डिज़ाइनों के चलते इन पर दस करोड़ अधिक खर्च बढ़ने की सम्भावना थी। इसी अतिरिक्त बढ़े ख़र्च में कटौती करते हुए डिजाइन में परिवर्तन करने पर अभी निर्णय लिया जाना है।
आयकर (IT) विभाग ने पिछले दो वर्षों में ₹6900 करोड़ की बेनामी संपत्ति ज़ब्त की है। एजेंसी ने कहा कि उसने बेनामी लेनदेन निषेध अधिनियम के तहत इतनी मूल्य की संपत्ति को कुर्क किया। एजेंसी ने इस संबंध में समाचार पत्रों को विज्ञापन भी दिए, जिसमें बताया गया है कि दोषियों को 7 साल तक की सज़ा हो सकती है। बता दें कि नए क़ानून के तहत जो कार्रवाई होगी, वह आयकर क़ानून, 1961 के अतिरिक्त होगी। देश में संशोधित बेनामी क़ानून 2016 में लागू हुआ था।
विज्ञापन में बेनामी सौदे करने वाले, बेनामदार (बेनामी संपत्ति के मालिक) और लाभार्थी (बेनामी संपत्ति ख़रीदने के लिए रुपए ख़र्च करने वाले)- इन तीनो को ही दोषियों की श्रेणी में रखा गया है। एजेंसी ने कहा कि दोषियों पर अभियोजन चला कर उन्हें सज़ा तो दिलाई जाएगी, साथ ही उनसे संपत्ति के बाज़ार मूल्य का 25 प्रतिशत ज़ुर्माना भी वसूल लिया जाएगा। बता दें कि लोग टैक्स से बचने के लिए अपनी चल-अचल संपत्ति को किसी और के नाम कर देते हैं- इस संपत्ति को बेनामी संपत्ति के रूप में जाना जाता है।
आयकर विभाग द्वारा ज़ारी किया गया विज्ञापन
इसके अलावा बेनामी सपत्तियों को लेकर जो गलत सूचना देते हैं और जो सही जानकारी छिपाते हैं- उसके लिए भी सज़ा और ज़ुर्माना का प्रावधान किया गया है। उन्हें 5 वर्ष तक की सज़ा के साथ-साथ संपत्ति के बाज़ार मूल्य का 10% ज़ुर्माना के रूप में वसूला जाएगा। आयकर विभाग ने जनता से भी एजेंसी का सहयोग करने का निवेदन किया है ताकि इस बुराई को ख़त्म किया जा सके। बता दें कि पहले वाले क़ानून के तहत सिर्फ़ तीन वर्ष की ही सज़ा हुआ करती थी। आईटी विभाग ने लोगों को आगाह किया है कि बेनामी संपत्ति को सरकार द्वारा ज़ब्त किया जा सकता है।
बता दें कि साल 2017-18 में आयकर विभाग ने अकेले कर्नाटक और गोवा क्षेत्र से ₹12,268 करोड़ के गुप्त आय और संपत्ति को पकड़ा है जो कि अपने आप में एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। पिछले कुछ वर्षों में एजेंसी की सक्रियता का ही परिणाम है कि करदाताओं की संख्या में भारी उछाल आया है।
दूसरे दिन छगनलाल जी मिल गए। चेहरे पर भारतीय मतदाता जैसे आश्चर्य और असमंजस के भाव थे। हिंदी पाठकों वाले निर्धन, निरीह मुख पर चमत्कृत होने के भाव छगनलाल जी को आदर्श भारतीय मतदाता की छवि प्रदान करते थे जो मध्यवर्गीय भी हों और विवाहित भी।
वह उस वर्ग से आते थे जो हिंदी पढ़ता है और अपनी समस्याएँ अंग्रेज़ी लेखकों को टीवी पर प्राइम टाइम विचार विमर्श की विषय वस्तु बना कर प्रस्तुत करता है। जब अंग्रेज़ी लेखक और प्रवक्ता टीवी पर उसकी समस्या और एक-दूसरे का छीछालेदर कर रहे होते, वह ब्रुश लेकर बाथरूम मे दाँत माँजने घुस जाता है और उसकी पत्नी चैनल बदल देती है। उसे विश्वास होता है कि उसकी समस्या के निराकरण का सौभाग्य नहीं है, बुद्धिजीवियों के मनोरंजन का सुयोग है। मध्यवर्गीय भारतीय की समस्याएँ बुद्धिजीवियों का च्यूईंग गम है, जो उनके जबड़ों के स्वस्थ और चेहरे की त्वचा को युवा रखता है।
इसी निरुत्साह के भाव के साथ छगनलाल जी ने हमारी ओर प्रश्न उछाला, “बताइए, यह क्या बात हुई कि आदमी बैंगन बन कर आए?” हमने चुनावी मौसम में आदमी को बेवक़ूफ़ बनते हुए सुना था, ये बैंगन वाला एंगल हमारे लिए भी नया था। हम छगनलाल जी की इस विचित्र विडंबना से उसी निर्विकार भाव से निकल सकते थे जैसे ग़रीब किसानों की स्थिति पर टेसुए बहाता नेता, रात की फ्लाइट से नानी के दर्शन को विदेश निकल जाता है। पर व्यंग्य लेख़क का काम होता है फँसना, सो हम फँसे।
हमने कहा, “चुनाव मे लोग आज कल ब्राह्मण और मौलवी बन लेते हैं, यह बैंगन बनने की प्रथा कब शुरू हुई?”
छगनलाल गहरी साँस छोड़ते हुए बोले- “बेटे के स्कूल मे वार्षिकोत्सव है।”
हमने कहा कि, ये हर्ष का विषय है। देश की राजनीति भी अभी उत्साहित है। पत्रकारों के घोर आह्वान के बावजूद, हर चुनाव के समय ‘ऋतु वसंत आया’ पर मनोरम नृत्य प्रस्तुत करने के बाद कॉन्ग्रेस की ट्रेन आऊटर पर निर्विकार अंगद के पाँव की भाँति स्थापित है। बाहरहाल, निरुत्साहित सभागणों के उत्साह को बनाए रखने के लिए नई शटल चलाई गई है।
जिन्हें पुराने दरबार मे स्थान नहीं मिला उनके लिए नवनियुक्ति के अवसर ले कर सत्ता का नया केंद्र कॉन्ग्रेस मे प्रस्तुत हुआ। छूटे हुए चाटुकारों ने राष्ट्रीय कृषक की पत्नी और भारत रत्न प्रपौत्री में इंदिरा गाँधी की छवि सहसा देखी, चहुँ ओर प्रथम परिवार की जय-जयकार गुंजायमान हुई। बुद्धिजीवी टिटिहरियों ने संसार मे धर्म की रक्षा पर संतोष व्यक्त किया, निष्पक्ष पत्रकारों ने सामूहिक सोहर कोरस मे गा कर कॉन्ग्रेस के प्रथम परिवार की दूसरी प्रविष्टि का स्वागत किया।
समर्थकों ने दक्षिण के सिनेमा के स्टाईल मे हिंद की शेरनी, ग़रीबों की मसीहा के शिमला के बँगले से अवतरित होने के स्वागत मे पोस्टर छापे और विश्लेषकों ने लेख लिखे जिनके मूल भाव मे देवी ऐसे उत्साह के वातावरण मे जहाँ ईवीएम का क्रांतिकारी कॉन्ग्रेसी प्रेस कॉफ्रे़ंस दब चुका है, और राफ़ेल की चिड़िया दाना चुग कर उड़ चुकी है, यह बैंगन छगनलाल जी कहाँ से ले आए, मै समझ नहीं पाया।
दोबारा पूछने पर बोले- “बेटे को स्कूल मे फ़ैंसी ड्रेस मे बैंगन बनना है? यह भी कोई बात हुई? ऊपर से पिछले साल वो शर्मा जी का बेटा कुम्हड़ा बन कर प्रथम स्थान ले गया था। बहुत प्रेशर है पत्नी का कि, लड़के को इस बार फ़र्स्ट आना है।”
हमने उन्हे समझाया कि यह उनकी पत्नी की राजनीतिक परिपक्वता बताता है। भारतीय राजनीति इन्हीं दो मानकों पर आधारित है- फ़ैंसी ड्रेस और शर्मा जी का बेटा होने पर। आप क्या हैं वह आपकी वेष-भूषा तय करती है। जींस में हैं तो प्रायवेट सिटिज़न, साड़ी मे है तो राष्ट्र नेता। दूसरे यदि, आप शर्मा जी के बेटे हैं तो आपकी पैदाइश ही आपकी महानता का साक्ष्य है। जैसा अपने सर्वदा समसामयिक उपन्यास मे श्रीलाल शुक्ल जी रूप्पन बाबू को पाठकों के समय प्रस्तुत करते हुए कहते हैं कि रुप्पन बाबू नेता हैं क्योंकि उनके पिता भी नेता है।
महागठबंधन के तीसरे या चौथे मोर्चे के नेताओं ने हाल मे हुए कोलकाता सम्मेलन में योग्य शर्मा जी के योग्य औलादों को जनता के समक्ष, प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बना प्रस्तुत किया तो घाघ, वृद्ध कॉन्ग्रेस ने सर्वश्रेष्ठ और सर्वोच्च शर्मा पुत्री को मैदान मे उतार कर मास्टर स्ट्रोक खेला। सब शर्मा जी के बेटे मुँह बाए देखते रह गए। जल्द ही नेतोचित परिधान धारण कर के प्रियंका जी राष्ट्रोद्धार के पुनीत कार्य मे संलग्न होंगी और हमारी आशा है कि, श्री छगनलाल के पुत्र भी बैंगन बन कर प्रथम पुरस्कार प्राप्त करेंगे और शर्मा जी के पुत्र को परास्त करेंगे।