"हमने टेस्टिंग बढ़ा दी है पर विदेशों से लौट कर आए हुए लोग और एनआरआई 14 दिन के होम क्वारन्टाइन से बचने के लिए यहाँ-वहाँ छिपे घूम रहे हैं। उन्हें स्वयं तथा समाज के हित में स्वास्थ्य प्रोटोकॉल के अनुसार आचरण करने की जरूरत है।"
"देशवासियों से मेरी अपील है कि वह कोरोना वायरस के खिलाफ युद्ध में PM-CARES फंड में अंशदान के लिए आगे आएँ। इस फंड का उपयोग आगे भी आपदा की स्थिति में किया जा सकता है।"
कई लोगों ने इस भीड़ को देख कर नोटबंदी के बाद बैंकों में लगी भीड़ को याद किया। मेरठ ही नहीं बल्कि अलीगढ़ में भी भीड़ जुटी। एक बैंक के अधिकारी ने बताया कि अफरातफरी के माहौल के कारण लोग 100 रुपए भी निकाल के ले जा रहे हैं।
"लोगों के बीच जागरूकता बहुत कम है। उन्हें जागरूक करने के लिए हमने कुछ अलग करने की सोची। हमने एक हेलमेट डिजाइन किया है जो कोरोना वायरस की तरह दिखता है। हमने कुछ ऐसा करने के बारे में सोचा, जो लोगों को डराए और उन्हें घर पर बनाए रखे।"
यह व्यक्ति पिछले हफ्ते ही श्रीलंका से लौटा था। उसे उसके घर में ही क्वारंटाइन किया गया था। पुलिस के अनुसार इसकी वजह से वह दिमागी रूप से असंतुलित हो चुका है। यह व्यक्ति टेक्सटाइल व्यापारी है।
गाँव में पहले से ही एक युवक कोरोना पॉजिटिव पाया गया है। इसके बाद भी समुदाय के लोग मस्जिद में एकत्र होकर नमाज अदा करने सा बाज नहीं आ रहे। और तो और, मौलाना मस्जिद में बैठकर माइक से लोगों को नमाज के लिए इकट्ठा करने का ऐलान कर रहा था।
65 वर्षीय मृतक तबलीगी जमात से जुड़ा था। कुछ दिन पहले दिल्ली में एक मजहबी आयोजन में शामिल हुआ था। इस आयोजन में अन्य देशों के लोग भी थे। श्रीनगर लौटने से पूर्व वह जम्मू के पास एक मदरसा में भी रुका था।
पुलिस को देखकर नमाज पढ़ रहे लोगों के बीच अफरा-तफरी मच गई। कई लोग छत से लटक कर कूद गए। पुलिस ने दोनों भाइयों दीन और आस मोहम्मद को गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए दोनों भाइयों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है।
सीएम योगी आदित्यनाथ ने रात में मीटिंग कर मजदूर हित में यह बड़ा फैसला लिया है। बस का इंतजाम नोएडा, गाजियाबाद, अलीगढ़ समेत कई अन्य जिलों में किया गया, जहाँ से मजदूर अपने घरों को जा सकेंगे। मुख्यमंत्री के इस बड़े फैसले से उत्तर प्रदेश और बिहार के लोग अपने-अपने घर तक पहुँच सकेंगे।