"उस रात मैं मुख्यमंत्री आवास पर ही थीं। तभी केजरीवाल के पास एक घायल मरीज के इलाज के लिए फोन आया। उन्होंने फोन पर तड़पते मरीज की मदद करने के बजाए नसीहत दे डाली कि सरकारी अस्पताल क्यों नहीं गए?
ये महिलाएँ हैं दिल्ली के दंगा प्रभावित इलाक़ों की। ऑपइंडिया से बातचीत के दौरान इन्होंने बताया कि वो पल-पल दंगाई भीड़ के डर के साए में जी रही हैं। महिलाओं ने अपना दुःखड़ा सुनाते हुए कहा कि समुदाय विशेष के लोग आकर उनके घरों को आग के हवाले करने की धमकी देते हैं।
शौहर पुलिस से: बहुत समझाता हूँ कि धरने पर मत जाओ, लेकिन चली जाती है, क्या करें! तभी बीवी अंदर से भाग कर आती है और डाँटते हुए कहती है: "तुमने कहा था कि धरने में जाओ।"
इलाके के नालों से निकलती लाशों से वहाँ पर हड़कंप मचा हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अभी नालों से और भी शव निकल सकते हैं। स्थानीयों की मानें तो दंगाइयों ने हत्या करने के बाद शव को छिपाने के लिहाज से उन्हें नाले में फेंका था, इसलिए...
दिल्ली के हिन्दू विरोधी दंगों में व्यस्त होने का फायदा उठा शाहरुख़ पुलिस को चकमा दे निकल भागा था, अब उसके पिता और भाई के भी फरार हो जाने की खबरें आ रही हैं।
जहाँ भी उन्हें लगा कि बीमा और सरकारी मुआवजे का लाभ मिल सकता है, वहाँ दुकान से दो फर्नीचर बाहर निकाले और खुद ही लगा दी आग। उनकी तैयारी इतनी तगड़ी थी कि दूसरे मजहब के लोग अपने बच्चों को काफ़ी पहले ही स्कूल से ले गए और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुँचा दिया था।
जहाँ तक शौकत की बात है, इस घटना के बाद वो और भी ज्यादा फँस गया है। उस पर पुलिसकर्मियों ने और भी कई केस ठोक दिए हैं। उस पर पहले से जो मामले चल रहे थे सो अलग। घर के खाने को लेकर पुलिस से की गई अभद्रता का उसे अच्छा सबक मिला है।
दिल्ली विधानसभा की 'शांति और सद्भाव' कमेटी के चेयरमैन आम आदमी पार्टी के विधायक सौरभ भारद्वाज ने कमेटी की पहली मीटिंग के बाद आज अफवाह फैलाने वालों के प्रति दिल्ली सरकार के सख्त रवैय्ये को दर्शाने की कोशिश की।
वो आइआइटी कानपुर से पढ़ा हुआ है और फ़िलहाल इंटेल की बेंगलुरु ऑफिस में कार्यरत है। उसने दीनदयाल उपाध्याय के नाम से 'पंडित' हटा दिया। उसने दिल्ली दंगों में ताहिर हुसैन का नाम हटा दिया। वो लगातार ऐसी एडिटिंग कर के हिन्दू-घृणा से ग्रसित लेख बना रहा है।