अरविन्द केजरीवाल और दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया वीरगति को प्राप्त रतन लाल के परिवार से मिलने जैसे ही पहुँचे, आक्रोशित लोगों ने 'केजरीवाल, वापस जाओ' और 'जो बैक केजरीवाल' के नारे लगाने शुरू कर दिए। इसके बाद केजरीवाल उलटे पाँव वहाँ से लौट गए।
नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के कई इलाक़ों में हिंसा अभी भी जारी है। चाँदबाग़ इलाक़े में हिंसा भड़कने के बाद फिर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। करावल नगर में जवानों पर एसिड फेंके जाने के बाद स्थानीय लोगों ने घरेलू तरीकों से उनका उपचार करने का प्रयास किया।
सीएए दंगाइयों की हिंसा के दौरान वीरगति को प्राप्त हुए पुलिस कॉन्स्टेबल रतन लाल के पार्थिव शरीर को उनके बुरारी स्थित निवास पर लाया गया। दिल्ली के चाँदबाग़ इलाक़े में भी फिर से हिंसा भड़कने की ख़बर है। वहाँ पुलिस को स्थिति नियंत्रित करने के लिए आँसू गैस के गोले दागने पड़े।
देश के एक जाँबाज पुलिसकर्मी की हत्या पर ख़ुशी मनाने वाले ये लोग इसी देश के हैं। हमनें 'ज़ी न्यूज़' के एक पोस्ट को खँगाला, जहाँ अली ख़ान, बाबा रउफ, इफ्तिखार अली, अवैस हैदर और इशाक वानी जैसे लोगों ने 'हाहा' रिएक्शन दे रखा था। ये कौन लोग हैं, आप ख़ुद देख लीजिए।
अब तक कुल 20 घरों को आग के हवाले किया जा चुका है और इतनी ही गाड़ियों को भी फूँका जा चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दौरे के कारण अहमदाबाद में अतिरिक्त पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे, जिसका फायदा उठा कर हिन्दुओं के घरों व गाड़ियों को जला डाला गया।
दिल्ली की एक अदालत ने जामिया हिंसा मामले में उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को दी गई क्लीन चिट देने वाली कार्रवाई रिपोर्ट (ATR) को खारिज करते हुए दिल्ली पुलिस आयुक्त को नए सिरे से रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
सोशल मीडिया के जरिए सामने आ रहे ये वीडियो दिल्ली के अशोक नगर के बताए जा रहे हैं। वीडियो में देखा जा सकता है कि कुछ लोग मस्जिद के ऊपर चढ़कर मस्जिद के स्पीकर नीचे फेंक रहे हैं और उस पर कोई झंडा फहरा रहे हैं।
"अपने-आप को कमतर मत आँकिए। विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। ये तब तक चलता रहेगा, जब तक दोनों उल्टी न कर दें। इंशाअल्लाह, हमारे बहुत सारे लोग जो ज़मीन पर उतरे हुए हैं और इस कोशिश में लगे हुए हैं कि एनआरसी एवं एनपीआर लागू नहीं हो, वे सफल होंगे।"
दंगाई मोहम्मद शाहरुख जब बन्दूक से फायरिंग करते हुए आगे बढ़ रहा था, तब एक जाँबाज पुलिसकर्मी को उसकी बन्दूक के सामने आकर उसे रोकने का प्रयास करते हुए देखा गया। बावजूद इसके शाहरुख गोलियाँ बरसता रहा।
देश के लिए जान देने वाले, दंगाइयों के हाथों मारे जाने वाले और अपना पूरा जीवन जनता की सुरक्षा में खपा देने वाले जवान के लिए कोई नेता आवाज़ क्यों नहीं उठा रहा? हिंसा करने वालों का नाम क्यों नहीं ले रहा?