सुरक्षाबलों ने आतंकियों को कुत्ते की मौत दे दी। अब, जबकि वो मार गिराए गए हैं और भारत सरकार की नई जीरो टॉलरेंस नीति के हिसाब से साल के दो सौ आतंकी निपटाए जा रहे हैं, तो इससे कई सकारात्मक बातें सामने आती हैं........
जातिवाद खत्म करने वाली आर्थिक ताकत मुक्त बाज़ार के कम्युनिस्ट दुश्मन हैं। सड़कें न बनने देने वाले, स्कूलों में बम लगा देने वाले माओवादियों के पैरोकार हैं।
समस्या केवल नेताओं के बहके बोल ही नहीं है। बचाव में गढ़े जाने वाले तर्क बताते हैं कि इस पार्टी के लिए कामुक टिप्पणियॉं कितनी आम बात है। पार्टी आलाकमान के घर की पढ़ी-लिखी सांसद रह चुकी बहू महिला के अंडरवियर का रंग बताए जाने को ‘छोटी सी बात’ बताती हैं।
हर कुत्ते को भौंकने के लिए एक भागती हुई कार चाहिए। आरएसएस वही भागती हुई, चमचमाती कार है जिसे देख कर ये भौंकते हैं क्योंकि इनका एक भी संगठन इस तरह का नहीं बन पाया जो कि अपनी राष्ट्रवादी विचारधारा को सत्ता तक पहुँचा दे।
"मैं इस गाँव के लोगों के प्रति आभारी हूँ। मैं ऐलान करता हूँ कि गाँव चिंतमडाका के प्रत्येक परिवार को सरकार की तरफ से ₹10 लाख दिए जाएँगे। इस राशि से वो कुछ भी खरीद सकते हैं।"
हम 'हिन्दू होमलैंड' इज़राइल की तर्ज पर बना सकते हैं, जहाँ हर नागरिक के अधिकार समान होंगे, लेकिन प्रताड़ित हिन्दुओं के लिए हिंदुस्तान 'होमलैंड' दे सकता है।
शिवभक्त काँवड़िया जब इन इलाकों से गुजरता है तो पत्थरबाजी और मार-पीट की खबरें कैसे आती हैं? क्या इसके उलट आपने कहीं सुना है कि ईद की नमाज पढ़ते, या ईद तो छोड़िए हर शुक्रवार सड़क घेर कर देश के कई इलाके में नमाज पढ़ते शांतिप्रिय पर किसी ने आवाज भी उठाई हो?
दलित हरिजन महिलाओं के लिए मिथिला का समाज बहुत रुढ़िवादी रहा है। लेकिन कागज पर पेंटिंग बना कर बेचने का मौका जब इन्हें मिलने लगा, तो एक नया द्वार खुल गया। लेकिन फिर शुद्धतावादियों और आधुनिकतावादियों में चर्चा शुरू हो गई। कुछ लोग लोक कला से पौराणिक कथाओं का जाना परंपरा का नष्ट होना बताते हैं, वहीं कुछ लोग...
फातिमा सरकारी मशीनरी की बात करना चाहतीं हैं? जिस सरकारी मशीनरी को वह महज़ दो घटनाओं के चलते अपनी पूरी कौम के खिलाफ खड़ा मान रहीं हैं, वही मशीनरी सबरीमाला, तिरुपति बालाजी समेत हिन्दुओं के हज़ारों मंदिरों को निगल चुकी है। RTE का बोझ केवल हिन्दू शैक्षिक संस्थान उठा रहे हैं- मुस्लिमों के मदरसे इससे आज़ाद हैं।