हिटलर को 'मेरे मित्र हिटलर' तो गाँधी ने भी कहा था। उन्होंने तो हिटलर को 'वीर', 'अपनी पितृभूमि से प्रेम करने वाला' भी कहा था, और कहा था कि उन्हें नहीं लगता कि हिटलर वह दैत्य है जो उसके दुश्मन उसे बताते हैं।
लिबरल गैंग के पास हिन्दुओं के खिलाफ बोलने के लिए और कोई आधार नहीं बचा है। बम धमाके न सही, 'ज़बरदस्ती जय श्री राम बुलवाया जा रहा है' ही सही! बंदूक लेकर कथित हिन्दू आतंकवादी सड़कों पर भले नहीं उतर रहे, लेकिन लोगों को बीफ़ करी खाने भी तो नहीं मिल रही!
गिरती लोकप्रियता के कारण BBC हाशमी दवाखाना के विज्ञापनों की तरह ही अपने होमपेज पर सेक्स ही सेक्स लिखते हुए घूम रहा है। हाशमी दवाखाना वालों के मार्केट पर इससे जरूर गहरी चोट लग सकती है।
बात चाहे हस्तमैथुन और ऑर्गेज़्म के जरिए महिलाओं के अधिकारों की बात करने वाली स्वरा भास्कर की हो या फिर उन्हीं के जैसी काम के अभाव में सोशल मीडिया पर एक्टिविस्ट्स बने फिर रहे अन्य मीडिया गिरोह हों, सब जानते हैं कि उन्हें कब कैंडल बाहर निकालनी है और किन घटनाओं का विरोध करना है।
छुआछूत हिन्दू समाज को उसी पायदान पर खड़ा करता है जिस पर समुदाय विशेष पर्दा, हलाला, बुरका और तीन तलाक के चलते खड़े हैं- इंसान से उसकी गरिमा का हक छीनने वाला चाहे तीन तलाक हो, हलाला हो, या छुआछूत, वह बराबर निंद्य है।
हो सकता है अंजुमन इस्लामिया वालों को ‘फक योर सिस्टर’ का या ‘तेरी माँ मेरी रखैल’ आदि का मतलब मालूम न हो, लेकिन कोर्ट के जजों को तो ज़रूर पता होगा कि इन शब्दों से एक लड़की की ‘मोडेस्टी आउटरेज’ होती है। और यह क़ानूनन जुर्म है।
बाढ़ सरकारी महकमे के अफसरों और नेताओं के लिए उत्सव है। ये वो समय है जब राहत पैकेज के रूप में भ्रष्टाचार का पैकेज आता है। आखिर लगभग पंद्रह साल से सत्ता में रही पार्टी इस समस्या का कोई हल ढूँढने में विफल क्यों रही है? अगर कोसी द्वारा अपने पुराने बहाव क्षेत्र में वापस आने वाले साल को छोड़ दिया जाए, तो बाकी के हर साल एक ही समस्या कैसे आ जाती है?
बॉलीवुड में अच्छा रूतबा रखने वाले सेलेब्स ने मीडिया को न जाने कितनी बार ज़लील किया लेकिन मजाल है कि किसी पत्रकार ने उफ़ तक किया हो! सुदूर पहाड़ी कस्बे से आई एक सेल्फ-मेड महिला ने आइना क्या दिखा दिया, गिरोह के गठन की ज़रूरत आन पड़ी!
जबरन ब्रम्हचर्य को किसी सामाजिक संस्था पर थोप देना, जिसका मुख्य उद्देश्य कुछ और है, वैसे ही हानिकारक परिणाम देगा, जैसे गलत तरीके से किए गए योग के आसनों से होगा। इसे जबरन लोगों पर थोपने के नतीजे बिलकुल वैसे ही होंगे जैसे चर्च के लिए हुए हैं।
मोदी के जीतते ही ऐसी खबरों में अचानक से इजाफा कैसे हो गया? आखिर आधी खबरें झूठी क्यों साबित हो रही हैं? दर्जन भर मंदिर तोड़े गए, मूर्तियाँ विखंडित हुईं, और हर बार आरोपित या तो 'शांतिप्रिय' है, या अज्ञात।