विचार

माओनंदन येचुरी जी, रामायण, महाभारत और जिहाद में अंतर है, सन्दर्भ समझिए

कम्युनिस्टों की यही समस्या रही है कि उनके लिए कभी महाभारत कल्पना हो जाती है, कभी इतिहास। येचुरी जी बुजुर्ग हो गए हैं, उनको ऐसे बयान देने से बचना चाहिए।

PUBG और सर्जिकल स्ट्राइक्स का अंतर समझने में ‘छोटा भीम’ को अभी वक़्त लगेगा

वो दिन दूर नहीं जब पूरा दिन PUBG खेलने के बाद राहुल गाँधी PUBG को ही कॉन्ग्रेस द्वारा की गई सर्जिकल स्ट्राइक साबित कर देंगे। ऐसा करने के लिए उनके पास मीडिया गिरोह से लेकर नेहरुवियन सभ्यता वाले, किसी भी समय अवार्ड वापस करने वालों के गैंग, स्लीपर सेल अवस्था में हर वक़्त मौजूद तो हैं ही।

होमवर्क बनाम गृहकार्य में नहीं उलझती हैं अब लड़कियाँ… वो टॉप करती हैं और हेडलाइन बनती हैं

बात सिर्फ़ उन लड़कियों तक सीमित नहीं, जिन्होंने 500 में से 499 अंक लाकर किसी लड़के को पछाड़ा है। बात उन सभी लड़कियों की, जिन्होंने सामाजिक और परिवारिक जद्दोजहद के बावजूद अकादमिक क्षेत्र में आगे बढ़ने का सपना देखा और उस सपने को पूरा करने के लिए अपना एक-एक पल झोंक दिया।

सर्टिफाइड ‘मौलाना’ है मसूद अजहर: आतंक का मजहब भले न हो, आतंकी का मजहब स्पष्ट है

मौलाना मसूद अज़हर कोई एक अकेला आतंकवादी नहीं है। जैश-ए-मोहम्मद आतंकी संगठन पूरी तरह से उसके परिवारवालों और परिजनों द्वारा संचालित है। इंडियन एयरलाइन्स के विमान IC-814 की हाईजैकिंग का मास्टरमाइंड मसूद का भाई इब्राहिम अज़हर था।

शशि थरूर जी, कृपया देशहित दाँव पर लगा कर वोट मत जुगाड़िए

कॉन्ग्रेस का एक धड़ा राहुल गाँधी के बजाए आपको 'पीएम मैटीरियल' मानता है। सेंटर-राईट लोग भी आपको पसंद करते हैं। प्लीज शशि थरूर! हमारा दिल मत तोड़िए…

मसूद अज़हर पर ‘दिग्गी राजा’ और ‘गोभक्त’ कमलनाथ ‘परेशान’, कॉन्ग्रेस से लेकर वोटर तक हैरान!

दिग्विजय सिंह ने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि मसूद को आतंकवादी घोषित करने से क्या होगा? जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान, मोदी जी के साथ दोस्ती निभा रहे हैं, तो उन्हें दाऊद इब्राहिम, मसूद अज़हर और हाफ़िज़ सईद को भी भारत को सौंप देना चाहिए।

लड़की की शॉर्ट ड्रेस, रेप की धमकी और BJP कनेक्शन: ‘भोट-कटवा कॉन्ग्रेस’ की नई वाली राजनीति

गुरुग्राम में एक महिला और कुछ युवतियों में हुई बहस के बाद उस महिला का वीडियो वायरल कर दिया जाता है। इसके बाद इसमें संघ, भाजपा और रिलायंस का हाथ तलाशने की कोशिश की जाती है। इस प्रकरण का कॉन्ग्रेस ने राजनीतिक लाभ उठाने का प्रयास किया है।

क्यों वामपंथियो, तुम्हारे कुकर्म इतने भारी हो गए कि अपने लिए वोट माँगने की हिम्मत नहीं बची?

लोगों से अपने नाम पर वोट माँगने लायक इनका मुँह ही नहीं बचा है- इनका दोहरापन दुनिया के सामने है। यह अब दूसरे को हराने की अपील तक सीमित हो गए हैं।

‘द वायर’ के हिसाब से भारतीय हिन्दू ही आतंकी हैं जिन्होंने समुदाय विशेष पर हिंसा की है! हाउ क्यूट!

मतलब, संकट मोचन मंदिर से लेकर लोकतंत्र के मंदिर संसद तक हमले में मरने वाले अधिकतर लोग हिन्दू ही होते हैं (क्योंकि जनसंख्या ज्यादा है और टार्गेट पर भी वही होते हैं) और मारने वाले हर बार कट्टरपंथी होते हैं, फिर भी असली हिंसा तो गौरक्षकों द्वारा गौतस्करों को सरेराह पीट देना है।

गढ़चिरौली को अब पुलवामा वाली प्रतिक्रिया की ज़रूरत है: निशानदेही और घेर कर वार

माओवादी कहीं ना कहीं अब ये बात जान और समझ गए हैं कि 'जल-जंगल-जमीन' का उनका नारा अब प्रासंगिक नहीं रहा है। इनके पोषक ये बात अच्छे से जानते है कि यदि अब यह 3 मुद्दे ही प्रासंगिक नहीं रहे, तो अब माओवंशी किस तरह से अपना अभियान आगे बढ़ाएँ? लोगों के बीच डर पैदा कर के ही ये आतंकवादी संगठन अब प्रासंगिक बने रहना चाहते हैं।

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