इस त्रासदी का 346 टन ज़हरीला कचरा अब भी भारत के लिए एक चुनौती बना हुआ है। ये कचरा कंपनी के कारख़ाने में कवर्ड शेड में मौजूद है। इसके ख़तरे को देखते हुए आम जन का प्रवेश यहाँ पर वर्जित है।
लोकसभा में चर्चा हो गई, सवालों का जवाब दे दिया गया, सुप्रीम कोर्ट ने संतुष्टि जता दी, बिंदुवार आँकड़े दे दिए गए, कैग की रिपोर्ट आ गई, लेकिन राहुल का लिप-लॉक टूट ही नहीं रहा!
ज्योति मल्होत्रा को पी चिदंबरम ने जैसे धमकी दी, ऐसा अगर भाजपा के किसी मंत्री ने किया होता तो 'लोकतंत्र खतरे में' और 'मीडिया पर अंकुश' या 'सुपर-इमर्जेंसी' जैसा कुछ भयंकर ट्रेंड कर गया होता ट्विटर पर।
राज्यपाल की मुहर के बाद अब लद्दाख डिविज़न का प्रशासनिक और रेवेन्यू मुख्यालय लेह में होगा जिसके बनने की तैयारी शुरू कर दी गई हैं। अब लेह में एक अलग डिविज़नल कमिश्नर और इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस का पद और कार्यालय होंगे।
अगर बीवी-बच्चों का नाम लेकर ही किसी की पहचान साबित होती है तो 10 बच्चे और 5 बीवियों वाले पकिस्तान के मौलवी साहब भी नायडू से पूछ सकते हैं- 'Who Are You?
कार्यकर्ताओं ने प्रियंका के जयकारे लगाने से लेकर उन्हें 'बदलाव की आँधी' तक करार दिया लेकिन राहुल गाँधी को लेकर ऐसे कोई ख़ास नारे नहीं लगे। पोस्टरों में भी प्रियंका गाँधी को राहुल से ज्यादा तवज्जोह दी गई।
कॉन्ग्रेस पोस्टर से सोनिया की तस्वीर का अचानक छोटा और फिर गुम हो जाना एक बड़े राजनीतिक बदलाव का संकेत देता है। संकेत यह कि सोनिया का राजनीतिक कद पार्टी में और आम लोगों के बीच कम होता जा रहा है।
प्रियंका गाँधी की सीट का आवंटन इस ओर भी इशारा करता है कि कहीं न कहीं कॉन्ग्रेस को यह एहसास है कि वो वंशवादी परंपरा को आज भी जीवित रखे हुए है, जिसे दुनिया की नज़र से धूमिल करना होगा।
स्पष्ट है कि राहुल गाँधी को देश की सामरिक ताक़त बढ़ने से कोई मतलब नहीं है। वो केवल ढेला फेंक कर भागने वाली टुच्ची राजनीति करने में मशगूल हैं। और इस कृत्य में उन्होंने एन राम जैसे खलिहर पत्रकारों को भी मिला लिया है।