सामाजिक मुद्दे

चूँकि हलाल कानूनी है, इसलिए दूसरे धर्मों द्वारा ‘हम समुदाय विशेष को काम नहीं देते’ लिखना भी जायज है

दुर्भाग्यवश खास समुदाय ने पीड़ितों की तरह रोने की आदत बना ली है, जबकि वो हर तरफ हावी हैं। भारतीय कानून एजेंसियों को इस तरह की आपत्तियों को बढ़ावा नहीं देना चाहिए, क्योंकि.....

ज़हर-ए-मुनव्वर राणा: महफिल नहीं मिल रही तो ट्विटर से फैला रहा है नफरत, हिन्दुओं को ले कर घृणा

उर्दू के मशहूर और विवादित शायर मुनव्वर राना ने एक विवादित ट्वीट में लिखा कि भारत में 35 करोड़ इंसान और 100 करोड़ जानवर रहते हैं।

विश्व की 15% जनसंख्या का समाप्त होना निश्चित: विनाश से सृजन का बीज है चीनी कोरोना वायरस

अगले 10 वर्षों में कोरोना वायरस के कारण राष्ट्रों के बीच टकराव एवं आर्थिक विभीषका के परिणामस्वरूप, विश्व की 15% जनसंख्या समाप्त होगी और...

हलाल का हल्ला: आयुर्वेद व ऋषि-परंपरा को इस्लामी देशों ने अपनाया, समझौता उन्होंने किया, जीत हमारी हुई

पतंजलि को हलाल सर्टिफिकेट मिला लेकिन क्या कंपनी में कोई बदलाव किया गया? नहीं। तो फायदा किसे हुआ और समझौता किसे करना पड़ा? समझिए!

‘वायर’ के वेणु! मस्जिदों से जिहाद, जकात का पैसा काहे नहीं माँगते? मंदिरों के सोने पर क्यों है तेरी कुदृष्टि?

वक़्फ़ के पास हर बड़े शहर की प्राइम लोकेशन पर दसियों एकड़ जमीनें हैं, जकात का अथाह पैसा है। कोरोना काल में मंदिर से सोने के बजाय मस्जिद को...

तेजस्वी सूर्या के ट्वीट पर छाती पीटते लिबरलों को क्यों खटक रहे भारत-अरब के मैत्रीपूर्ण रिश्ते

तेजस्वी सूर्या प्रसंग में वामपंथी और कट्टरपंथी जमात एक हो गए। ऐसे प्रतिक्रिया कर रहे हैं जैसे वे भारतीय ना होकर सऊदी अरब के एजेन्ट हों।

भगवा झंडे से समुदाय विशेष को परेशानी क्यों? वो ध्वजा है, मिर्ची नहीं!

भगवा रंग किसी की आँखों को चुभता है तो समस्या उसकी है। ये उसकी दुष्टता है कि उसे हमारे धर्म के प्रतीक चिह्नों से घृणा है।

हिटलर ने बंकर में अपने डॉक्टर से पूछा- आत्महत्या का सबसे अच्छा तरीका क्या – जहर या बंदूक की गोली?

आत्महत्या सायनाइड या गोली से? हिटलर ने डॉक्टर से पूछा। फिर सायनाइड का असर जाँचने के लिए अपनी प्यारी पालतू बिल्ली ब्लॉन्डी को उसने...

लॉकडाउन की 3 बड़ी उपलब्धियाँ, आगे की योजनाएँ ताकि बेहतर तरीके से हो सके चुनौती का सामना

3 मई के बाद लॉकडाउन को हटाने के लिए भी दो स्तरों पर काम करने की आवश्यकता है। भारत को भविष्य में ऐसी किसी आपदा से निपटने के लिए...

अभिव्यक्ति की आजादी देश की चूलें हिलाने में नहीं, देशहित में अभिव्यक्त हों: आजादी के सिपाहियों की मंशा

कुछ लोगों को लगता है कि सत्ता के खिलाफ आवाज उठाना ही सबसे बड़ा वाक्शौर्य है, लेकिन वो भूल जाते हैं कि अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब सिर्फ...

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