संजय सेठ समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष थे। वे यूपी के बड़े बिल्डर्स में से एक हैं। बताया जाता है कि वे मुलायम सिंह के छोटे बेटे प्रतीक यादव के बिज़नेस पार्टनर भी हैं।
"एक नेता अपने लिए बोकारो और बेटे के लिए पलामू से सीट चाहते हैं। एक नेता को भाई के लिए हटिया सीट चाहिए। दूसरा नेता घाटशिला से बेटी के लिए और खूंटी से खुद के लिए सीट चाहता है। एक अन्य नेता जामताड़ा से बेटे के लिए और मधुपुर से बेटी के लिए सीट चाहते हैं।"
दुबे द्वारा वीडियो नहीं हटाने और माफी नहीं माँगने पर ब्लॉक कॉन्ग्रेस अध्यक्ष समेत अनेक महिला नेताओं ने पुलिस से शिकायत की। इसके बाद दुबे को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
केन्द्र शासित प्रदेश बनने के बाद देश के अन्य प्रदेशों की विधानसभा की तरह ही जम्मू-कश्मीर विधानसभा का कार्यकाल भी पॉंच साल ही होगा। जब तक गुलाम कश्मीर भारत का हिस्सा नहीं बनता सदन की 24 सीटें खाली रहेंगी। यूटी लद्दाख में विधानसभा नहीं होगी।
पार्टी की सुप्रीम कोर्ट, मानवाधिकार और आरटीआई यूनिट ने प्रेस नोट जारी कर इस मामले पर अलग स्टैंड दिखाया है। प्रेस नोट में कहा गया है कि अनुच्छेद 370 एक आस्थायी प्रावधान था और इसे हटाकर केन्द्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर का सही मायनों में भारत के साथ विलय कर दिया है।
अपनी अस्वस्थता के कारण ही जेटली ने मोदी सरकार की दूसरी कैबिनेट में शामिल होने से मना कर दिया था। इसको लेकर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी भी लिखी थी।
कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा में पार्टी के चीफ व्हिप रहे भुवनेश्वर कलीता भी बीजेपी में शामिल हो सकते हैं। अनुच्छेद 370 पर कॉन्ग्रेस के रुख के विरोध में उन्होंने सोमवार को राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।
रतुल पुरी ने प्रवर्तन निदेशालय द्वारा रिकॉर्ड किए गए अपने बयान की कॉपी हासिल करने के लिए गुरुवार को दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। निचली अदालत ने 6 अगस्त को उनकी यह माँग ख़ारिज कर दी थी।
शिवसेना के मुखपत्र सामना के संपादकीय में कहा गया है कि यदि पाकिस्तान ने नई दिल्ली में अपना उच्चायोग बंद नहीं किया होता, तो उसके उच्चायुक्त को यहाँ से भागना पड़ता क्योंकि यहाँ काफी गुस्सा है और अब दोनों देशों के बीच कोई भावनात्मक जुड़ाव नहीं है।
जम्मू-कश्मीर की 80 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर करती है। जानकारों का मानना है कि अनुच्छेद-370 में संशोधन के बाद सरकार द्वारा पैसा भेजने में तेज़ी आएगी क्योंकि वहाँ की शासन व्यवस्था अब सीधे केंद्र के हाथों में है।