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‘कट्टर गुंडागर्दी है बॉलीवुड का बॉयकॉट करना’: ‘कांतारा’ में पुलिस ऑफिसर बने अभिनेता ने कहा – एक्टर्स के खिलाफ हो रही नफरत की राजनीति, एक हो फिल्म बिरादरी

उन्होंने लिखा है, "समय आ गया है कि पूरे देश की फिल्म बिरादरी बॉलीवुड फिल्मों के बहिष्कार, कट्टर गुंडागर्दी तथा एक्टर्स के खिलाफ नफरत की राजनीति की निंदा करके बॉलीवुड का समर्थन करे।"

कन्नड़ की सुपरहिट फिल्म कांतारा में वन अधिकारी मुरलीधर की भूमिका निभाने वाले एक्टर किशोर कुमार जी (Kishore Kumar G) ने ‘बॉयकॉट बॉलीवुड’ की तुलना गुंडागर्दी से की है। किशोर, हाल ही में, ट्विटर अकाउंट हैक होने और KGF-2 को ‘बेसिर पैर की फिल्म’ बताकर चर्चा में आए थे।

किशोर कुमार जी ने बॉयकॉट बॉलीवुड को लेकर इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर की है। इस पोस्ट में उन्होंने अखबार की एक कटिंग शेयर की है, जिसमें सुनील शेट्टी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से बॉयकॉट बॉलीवुड ट्रेंड से मुक्ति दिलाने की अपील की थी। इसके साथ ही, किशोर ने लिखा है कि अब समय आ गया है कि ‘बॉयकॉट बॉलीवुड’ के खिलाफ पूरा बॉलीवुड एकजुट हो।

उन्होंने लिखा है, “समय आ गया है कि पूरे देश की फिल्म बिरादरी बॉलीवुड फिल्मों के बहिष्कार, कट्टर गुंडागर्दी तथा एक्टर्स के खिलाफ नफरत की राजनीति की निंदा करके बॉलीवुड का समर्थन करे।”

किशोर ने यह भी कहा है कि यह सरकार की बड़ी चूक है कि वह बॉलीवुड जैसे बड़े उद्योग को शातिर हमलों से नहीं बचा पाई है। उन्होंने लिखा है, “यह सरकारों की विफलता है कि वे दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में किसी व्यवसाय या उद्योग की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर सकते। फिर भी, फिल्म उद्योग के लोग बात नहीं कर रहे हैं, जहाँ डर का माहौल बनाया गया है।”

उन्होंने आगे लिखा है, “यह सब कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिम्मेदार सरकारी अधिकारियों के लिए शर्म की बात है। साथ ही, यह स्पष्ट तौर पर कानून का उल्लंघन है जो समाज में जहर घोल रहा है। स्थानीय फिल्म उद्योग में भी आग फैलने से पहले इसे रोकने और दंडित करने की जरूरत है।”

बता दें कि कन्नड़ की सुपरहिट फिल्म कांतारा में वन अधिकारी मुरलीधर की भूमिका निभाने वाले किशोर कुमार जी ब्लॉकबस्टर फिल्म KGF-2 पर टिप्पणी कर चर्चा में आए थे। उन्होंने कहा था, “मुझे नहीं पता कि यह गलत है या सही, लेकिन मैंने KGF 2 नहीं देखी है। यह मेरे टाइप का सिनेमा नहीं है। यह पर्सनल चॉइस है। मैं इस फिल्म (केजीएफ 2) को देखने के बजाय कोई ऐसी छोटे बजट की फिल्म देखना पसंद करूँगा, जो भले ही हिट न हुई हो, लेकिन सीरियस मुद्दे पर हो। ऐसी फिल्म जो कहानी को दर्शाती हो न कि बेसिर पैर की कहानी हो।”

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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