Thursday, August 5, 2021
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सऊदी अरब से आई कुरान: कोच्चि में होगी नीलामी, 21 जनवरी को लगाएँ बोली

अब्दुल सलाम ने गरीबों के बीच बॉंटने के नाम पर सऊदी अरब से फ्री में कुरान मॅंगवा तो लिया, लेकिन इनके पहुॅंचने के बाद इम्पोर्ट ड्यूटी भेजने से इनकार कर दिया। अब उन्होंने इसकी नीलामी के लिए टर्मिनल अधिकारियों को पत्र दिया है।

केरल के कोच्चि में इंटरनेशनल ट्रांसशिपमेंट कंटेनर टर्मिनल (वल्लारपाद) पर 25 टन क़ुरान की नीलामी की जाएगी। इन्हें सऊदी अरब से 6 महीने पहले भेजा गया था। मल्लापुरम के वाज़हक्कड़ स्थित दारुल उलूम अरेबिक कॉलेज के प्रिंसिपल अब्दुल सलाम ने इन्हें मँगवाया था। अब उन्होंने आयात शुल्क का भुगतान करने में असमर्थता जताई है। इसलिए 21 जनवरी को 25 टन क़ुरान को नीलाम कर दिया जाएगा।

ख़बर के अनुसार, बड़ी संख्या में क़ुरान की खेप 6 महीने पहले वल्लारपदम इंटरनेशनल कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल (ICTT) में आई थी। विदेश में अत्याधुनिक प्रेस में छपी हुई ये क़ुरान तब से पड़ी हुई है। मलप्पुरम में दारुल उलूम अरबी कॉलेज के प्रिंसिपल अब्दुल सलाम ने बताया कि कॉलेज ने आर्थिक रूप से कमज़ोर तबके के मुस्लिमों को मुफ़्त क़ुरान बाँटने के लिए इन्हें सऊदी अरब से मँगवाया था।

सलाम का कहना था, “जब हम खेप को स्वीकार करने गए, तो हमसे खेप हासिल करने के लिए सीमा शुल्क के रूप में लगभग 8 लाख रुपए का भुगतान करने के लिए कहा गया। हमारे पास इतना पैसा नहीं था और हमने इसे कबूल नहीं करने का फ़ैसला किया। बाद में सीमा शुल्क एजेंट ने सूचित किया कि लावारिस खेप की नीलामी की जाएगी।”

सलाम ने यह भी बताया कि उन्होंने क़ुरान की खेप को वापस सऊदी अरब भेजने का अनुरोध किया था, लेकिन उन्हें सूचित किया गया कि इसके लिए माल भाड़ा शुल्क का भुगतान करना होगा। उसके बाद, उन्होंने टर्मिनल अधिकारियों को क़ुरान की नीलामी के लिए एक पत्र दे दिया। इस पत्र में कहा गया था कि कॉलेज 8 लाख रुपए का शुल्क अदा करने में असमर्थ है। सलाम ने बताया कि इतनी बड़ी संख्या में क़ुरान की प्रतियाँ सऊदी अरब से निशुल्क भेजी गई थी। ऐसा इसलिए क्योंकि उन्हें पता चला था कि 2018 में केरल में आई बाढ़ के दौरान बहुत सारी क़ुरान खो गई थीं।

अब जब कॉलेज ने क़ुरान को लेने से इनकार कर दिया है, तो MIV लॉजिस्टिक्स प्राइवेट लिमिटेड ने क़ुरान की खेप की नीलामी करने संबंधी एक नोटिस जारी किया है। लॉजिस्टिक कंपनी का कहना था कि उन्होंने सीमा शुल्क विभाग से कार्रवाई आगे बढ़ाने के आदेश पर क़ुरान की नीलामी करने का फ़ैसला लिया है। 

MIV लॉजिस्टिक्स के अधिकारियों ने बताया कि कंसाइनमेंट किसी भी छूट की श्रेणी में नहीं आता है और आयातक के लिए शुल्क का भुगतान करना ज़रूरी होता है। उन्होंने बताया कि सभी आयातित सामानों को कम्प्यूटरीकृत भारतीय सीमा-शुल्क EDI प्रणाली से गुज़रना पड़ता है। सीमा शुल्क के तहत मूल्यांकनकर्ताओं की एक समिति ने क़ुरान की खेप की नीलामी के लिए आधार मूल्य के रूप में 1 लाख रुपए की राशि तय की है, इसकी ई-नीलामी 21 जनवरी को होगी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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