Homeदेश-समाज14 दिनों बाद तालाब से मिला रिबिका का कटा सिर, शरीर के 29 टुकड़े...

14 दिनों बाद तालाब से मिला रिबिका का कटा सिर, शरीर के 29 टुकड़े भी बरामद: पूर्व सांसद ने कहा- CM सोरेन सीधे तौर पर जिम्मेदार

दिलदार अंसारी और उसके परिवार की निर्ममता की शिकार हुई रिबिका पहाड़िन का कटा सिर बरामद हो गया है। मृतका का सिर एक तालाब से मिला है जिसे शनिवार (31 दिसंबर 2022) को मछली पकड़ रहे मछुआरों ने सबसे पहले देखा।

झारखंड के साहिबगंज में 17 दिसंबर 2022 को दिलदार अंसारी और उसके परिवार की निर्ममता की शिकार हुई रिबिका पहाड़िन का कटा सिर बरामद हो गया है। मृतिका का सिर एक तालाब से मिला है जिसे शनिवार (31 दिसंबर 2022) को मछली पकड़ रहे मछुआरों ने सबसे पहले देखा। रिबिका के शरीर के हुए 50 टुकड़ों में से अब तक 29 टुकड़े बरामद हो गए हैं। इसी तालाब के आस-पास ही शरीर के बचे 21 हिस्सों की तलाश की जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रिबिका पहाड़िन का कटा सिर हत्या के 14वें दिन बरामद हुआ है। इस दौरान कुछ मछुआरे तालाब में मछली पकड़ रहे थे। उन्होंने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मौके से कटे सिर को बरामद किया। बरामद हुए सिर की हालत बेहद भयावह थी। यह सिर महज कंकाल के तौर पर दिखाई दे रहा है। 90बाद में मृतका के परिजनों को शिनाख्त के लिए बुलाया गया। सिर की बरामदगी के बाद पुलिस को आशंका है कि शरीर के बाकी हिस्से भी तालाब के ही आस-पास बिखरे हो सकते हैं।

पूर्व सांसद ने बताया सोरेन परिवार का हाथ

वहीं रिबिका की मौत पर पूर्व सांसद सालखन मुर्मू ने रिबिका पहाड़िन की हत्या में सीधे तौर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के परिवार का हाथ बताया है। उन्होंने कहा कि आदिवासियों के वोट से सरकार बनाने वाला सोरेन परिवार मुस्लिमों और ईसाईयों के लिए ही काम करता है। पूर्व सांसद ने आगे एक क्रान्ति का एलान करते हुए बताया कि सोरेन खानदान ने संथाल क्षेत्र को आदिवासियों और मुस्लिमों के हवाले कर दिया है।

झारखंड दिसोम पार्टी के संस्थापक और राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व सांसद सालखन मुर्मू ने आगे कहा कि झारखंड में हो रहे धर्मान्तरण की जड़ें विदेशों से जुड़ीं हैं। मुर्मू ने कहा कि 1 जनवरी 2023 से झारखंड के दुमका से इन सभी समस्याओं के खिलाफ आंदोलन की शुरुआत होगी क्योंकि सोरेन सरकार के रहते आदिवासियों का भला हो ही नहीं सकता।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

भगवान राम का अपमान, आजादी के नारे और तिरंगे से बदसलूकी: कॉकरोचों को ये तक नहीं पता कि वे क्यों आए हैं, पढ़ें- CJP...

कॉकरोचों के प्रदर्शन में छात्रों के मुद्दे नहीं बल्कि आजादी के नारे, डफली गैंग, तिरंगे से बदसलूकी और हिंदू देवी-देवताओं का अपमान दिखा। पढ़ें रिपोर्ट।

तमिलनाडु में द्रविड़ राजनीति के ‘घृणा मॉडल’ को अन्नामलाई की चुनौती, पेरियार नहीं, कलाम हैं आदर्श: समझें- ‘We The Change’ से राष्ट्रवाद का शंखनाद...

अन्नामलाई ने कहा कि तमिल संस्कृति-भाषा पर गर्व और भारत माता के प्रति समर्पित रहना एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।
- विज्ञापन -