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आग वाली रात मेरे घर में किसी ने नहीं देखा नोटों का बंडल, मुझे जले हुए नोटों की बोरियाँ भी नहीं दिखाई: रिपोर्ट में दावा- जस्टिस यशवंत वर्मा ने कैश की बात नकारी, CJI ने पूछे थे 3 सवाल

जस्टिस वर्मा ने बताया कि उन्हें जले हुए नोटों की बोरियाँ ना दिखाई गईं थी और ना ही सौंपी गई थी। उन्होंने कहा है कि कमरे के अंदर जिस मलबे को बुझाने का प्रयास किया गया था, वह अभी भी आवास के एक हिस्से में मौजूद है।

दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा ने घर से कैश मिलने की बात को सिरे से नकार दिया है। उन्होंने CJI संजीव खन्ना को दिए गए जवाब में बताया है कि घर पर नोट मिलने की बात सही नहीं है। उन्होंने नोट मिलने के दौरान खुद के घर में मौजूद होने की बात भी नकार दी है।

न्यूज18 की एक रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस यशवंत वर्मा से तीन स्पष्ट प्रश्न पूछे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस वर्मा से यह प्रश्न दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय के माध्यम से पूछे हैं। इसको लेकर उन्होंने एक पत्र डीके उपाध्याय को लिखा है।

CJI खन्ना ने यह प्रश्न जस्टिस डीके उपाध्याय द्वारा प्राप्त इस मामले में रिपोर्ट के बाद पूछे थे। यह जवाब उन्हें 22 मार्च, 2025 तक देने थे। इसके बाद उनका तबादला इलाहाबाद हाई कोर्ट कर दिया गया था। उनके खिलाफ अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमिटी जाँच कर रही है। सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस वर्मा से अपना फोन और उसका डाटा सुरक्षित रखने को कहा है।

CJI ने पूछे ये तीन सवाल

CJI खन्ना ने जस्टिस उपाध्याय से जस्टिस वर्मा से यह तीन प्रश्न पूछने को कहा था-

1- वह अपने परिसर में स्थित कमरे में धन/नकदी की उपस्थिति का हिसाब कैसे देते हैं?

2- उस कमरे में मिले धन/नकदी का स्रोत क्या है, इसके विषय में भी बताएँ।

3- वह व्यक्ति कौन है जिसने 15 मार्च, 2025 की सुबह कमरे से जले हुए पैसे/नकदी को निकाला था?

फोटो साभार: News18 India

जस्टिस यशवंत वर्मा ने दिया जवाब

जस्टिस यशवंत वर्मा ने इन तीनों सवालों के जवाब CJI को भेज दिए थे। उन्होंने क्रमिक तरीके से यह उत्तर दिए थे। उन्होंने अपने जवाब में कहा।

1- पहले प्रश्न के उत्तर में जस्टिस यशवंत वर्मा ने कहा, “मुझे कभी भी घर के स्टोर रूम में पड़े किसी पैसे या नगदी के बारे में जानकारी नहीं थी। ना तो मुझे और न ही मेरे परिवार के किसी भी सदस्य को कैश यानी नकदी के बारे में कोई जानकारी थी। ना ही इसका मुझसे या मेरे परिवार से कोई संबंध है। मेरे परिवार के सदस्यों या कर्मचारियों को जिस रात को आग लगी उस रात को ऐसी कोई मुद्रा या नकदी दिखाई नहीं गई।”

2- दूसरे सवाल का जवाब देते हुए जस्टिस वर्मा ने कहा, “पहले प्रश्न के जवाब से साफ तौर पर जाहिर है कि दूसरे सवाल का जवाब यानी नकदी का स्रोत स्पष्ट करने का कोई प्रश्न ही नहीं बनता है।

3- तीसरे प्रश्न के उत्तर में जस्टिस यशवंत वर्मा ने बताया, “मैं इस आरोप को बिलकुल नकारता हूँ कि हमने कोई नोट स्टोररूम से निकाले हैं। जैसा कि मैंने ऊपर वाले प्रश्न में बताया है कि हमें जले हुए नोटों की बोरियाँ न दिखाई गईं और न ही सौंपी गई। कमरे के अंदर आग लगने के बाद जिस मलबे को बचाया गया वह भी घर में एक जगह मौजूद है।”

जस्टिस वर्मा ने बताया कि वह और उनकी पत्नी भोपाल से 15 मार्च को लौटे थे और कुछ भी हटाए जाने सम्बन्धी उन्हें कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया है कि घटना के दौरान उनके कर्मचारियों को कोई नकदी या मुद्रा मिली थी।

होली वाले दिन लगी थी आग

दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के घर होली वाले दिन (14 मार्च, 2025) को आग लग गई थी। इसके बाद अग्निशमनकर्मियों को बुलाया गया था। उन्हें आग बुझाने के दौरान घर के एक कमरे से बड़ी मात्रा में नकद मिला था।

इसका वीडियो भी सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया था। सुप्रीम कोर्ट ने उनके विषय में एक रिपोर्ट भी जारी की थी। सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने उनका ट्रांसफर इस घटना के बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट में कर दिया था। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक जाँच कमिटी बना दी है, इसमें तीन जस्टिस शामिल हैं। इसकी रिपोर्ट आने तक तक यशवंत वर्मा को न्यायिक काम से हटा दिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने यशवंत वर्मा ने खिलाफ FIR की माँग करने वाली याचिका को भी सुनने से इनकार कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अभी FIR दर्ज करने का समय नहीं है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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