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बाहर से आई भीड़ ने अचानक किया हमला: नोएडा में हिंसक प्रदर्शन पर ऑपइंडिया से बोले प्रत्यक्षदर्शी, कहा- ‘उनका कोई मोटिव नहीं था, वो बस पत्थर मारते रहे’

नोएडा में विरोध प्रदर्शन के बीच उग्र भीड़ ने कंपनियों में तोड़फोड़ की, गाड़ियों में आग लगाई, पत्थरबाजी की और करोड़ों का नुकसान पहुँचाकर दहशत फैलाई

दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के नोएडा में हाल ही में हजारों फैक्टरी मजदूर वेतन बढ़ाने की माँग को लेकर सड़कों पर उतर आए। इस दौरान जमकर बवाल हुआ गाड़ियों, शोरूम और कंपनियों में तोड़फोड़ की गई। इस हिंसा में नक्सलियों से लेकर पाकिस्तान तक के कनेक्शन की बात सामने आई है। इस हिंसा के बाद ऑपइंडिया ने इसके कुछ प्रत्यक्षदर्शियों से बातचीत की है जिन्होंने इस पूरे मामले को लेकर कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ दी हैं।

क्या है पूरा मामला?

इस मामले में हिंसा की शुरुआत सोमवार (13 अप्रैल 2023) से हुई और हजारों श्रमिक सड़कों पर आए गए। फेज-2 और सेक्टर-62 समेत कई इलाकों में प्रदर्शन के दौरान हालात बिगड़ गए और कुछ उपद्रवी तत्वों ने वाहनों-कंपनियों में तोड़फोड़ की, यहाँ तक कि कुछ गाड़ियों में आग भी लगा दी गई।

अगले दिन तक हिंसा जारी रही। मंगलवार (14 अप्रैल 2026) को लगातार दूसरे दिन मजदूरों ने सड़कों पर उतरकर बवाल किया। मंगलवार को फैक्ट्री कर्मचारी कुछ जगहों पर सड़कों पर उतर आए और जब पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की तो बवाल हो गया।

मामले में पुलिस ने 300 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है और इस मामले में 7 FIR दर्ज की गई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि सोमवार को करीब 42000 कर्मी सड़कों पर उतरे और 80 अलग-अलग जगहों पर उपद्रव किया।

इस दौरान फेस-2 इलाके की एक फैक्ट्री के बाहर शुरू हुई आगजनी सेक्टर-67, 63 में भी फैल गई। साथ ही, मदरसन में भी 3-4 गाड़ियों को आग लगा दी गई। दावा किया जा रहा है कि इस पूरे प्रदर्शन के दौरान 100 से अधिक गाड़ियों में तोड़फोड़ और आगजनी की गई। इस दौरान उपद्रवियों ने पुलिसकर्मियों पर पथराव किया और मीडियाकर्मियों के साथ भी बदसलूकी की।

प्रत्यक्षदर्शियों ने ऑपइंडिया को क्या बताया?

घटना के प्रत्यक्षदर्शियों ने ऑपइंडिया को इस हिंसा को लेकर बताया कि कैसे ऑफिस में पूरा झुंड घुस रहा था और तोड़फोड़ करते हुए बाहर निकल रहा था। धर्मेंद्र सिंह नाम के एक व्यक्ति ने बताया की “हुआ ये था कि बाहर से अचानक भीड़ आई और उन्होंने एकदम से हमला कर दिया। भीड़ मतलब ये लगा लो पूरा झुंड था, 300-500 तक लोग थे, रोड भरी हुई थी।”

उन्होंने आगे कहा, “पहले इन्होंने पत्थरबाजी की, फिर यहाँ पर गाड़ियों में तोड़फोड़ की। बाहर जो गाड़ियाँ खड़ी थीं, उन में आग लगा दी। हम लोग अपनी जान बचाने के लिए अंदर चले गए। अंदर तक घुस गए थे, करीब 40-45 गाड़ियों के शीशे तोड़ दिए। हमें तो ये भी नहीं पता कि आग कैसे लगाई गई, हमारा मकसद तो बस अपनी जान बचाना था।”

इसी तरह एक अन्य ने बताया प्रत्यक्षदर्शी अरुण कुमार ने बताया की “कुछ नहीं, पब्लिक आई इधर से करीब 200-250 आदमी थे, महिलाएँ भी थीं। कंपनी बंद थी फिर भी पत्थर फेंकने लगे, गेट तोड़ दिया, कैमरे भी तोड़ दिए। हमसे बोले कि कंपनी दिखाओ अंदर चल के, हमने कहा कोई नहीं है। 12 कैमरे तोड़कर निकाल ले गए, गेट का सरिया तक तोड़ दिया। अंदर घुस गए और बस उपद्रव कर रहे थे, पत्थर मार रहे थे उनका कोई मोटिव नहीं था।”

इसी तरह कुछ लोगों ने बताया कि उनकी कंपनी बंद थी उसके बाद भी वे लोग ताला तोड़कर अंदर घुस गए और तोड़फोड़ करनी शुरू कर दी। सिक्योरिटी रूम कंप्यूटर डेस्कटॉप सब डैमेज कर दिया। कई लोगों ने कहा कि वे बाहर के लोग थे, हाथ में डंडा और पत्थर लेकर घुस गए और तोड़फोड़ करने लगे। प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि अगर माँग है तो धरना दो, हड़ताल करो लेकिन तोड़फोड़ करना गलत है।

घटनास्थल के पास मौजूद दुकानदारों का कहना है कि वे चार-पाँच साल से दुकान लगा रहे हैं लेकिन ऐसा माहौल उन्होंने नहीं देखा और अब दुकान पर लोग नहीं रहे हैं। विक्रम राणा नाम के एक व्यक्ति ने बताया, “ये महावीरा कंपनी के वर्कर थे, वहीं से शुरू हुआ था उसके बाद आसपास के लोग भी जुड़ गए पहले डेढ़ घंटे सब नॉर्मल था फिर दो-तीन बजे के बाद पत्थर बाजी शुरू हो गई।”

उन्होंने आगे बताया, “400-500 लोग थे, हमारे ऑफिस पर भी पत्थर मारे गए, हमारा कोई पर्सनल मामला नहीं था। माँगें जायज हो सकती हैं लेकिन तरीका गलत है।”

इस पूरे उपद्रव के दौरान 10 पुलिसकर्मियों सहित कुल 30 लोग घायल हुए। औद्योगिक इकाइयों और सार्वजनिक संपत्ति को भारी नुकसान पहुँचा है, जिसकी भरपाई का अनुमान करीब 3000 करोड़ रुपए लगाया गया है।

वहीं पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने बताया कि अफवाह फैलाने वाले कई ग्रुप्स की पहचान की गई है। करीब 50 X (ट्विटर) हैंडल के जरिए लोगों को हिंसा के लिए उकसाया गया। पुलिस के मुताबिक, इन हैंडल्स के जरिए QR कोड भेजकर लोगों को ग्रुप में जोड़ा जा रहा था और ‘सड़कों पर आओ, पुलिस को पीटो’ जैसे मैसेज फैलाए जा रहे थे।

पुलिस का कहना है कि एक राजनीतिक पार्टी से जुड़ा हैंडल भी जाँच में सामने आया है। ये सभी हैंडल घटना से पिछले 24 घंटों में बनाए गए और इनका इस्तेमाल भ्रामक जानकारी फैलाने के लिए किया गया।

पुलिस का कहना है कि यह पूरी साजिश सुनियोजित लगती है जिसमें मजदूरों से जुड़े मुद्दे को आधार बनाकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की गई। इस बीच डीजीपी राजीव कृष्ण ने साफ कहा कि हिंसा और आगजनी में शामिल लोगों पर कड़ी कार्रवाई होगी। साथ ही नुकसान की भरपाई भी उपद्रवियों से ही कराई जाएगी।

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