Homeदेश-समाज'स्त्री को ज़िंदा जला कर जश्न मनाना गलत, ऐसी प्रथा को बंद करो': होली...

‘स्त्री को ज़िंदा जला कर जश्न मनाना गलत, ऐसी प्रथा को बंद करो’: होली से पहले फिर सक्रिय हुआ वामपंथी गैंग, YouTuber ने कहा – ऐसे नहीं बनेगा अच्छा समाज

साथ ही उन्होंने लोगों से भी अपील की कि अगर वो 'प्रोग्रेसिव सोसाइटी' का हिस्सा हैं तो इसका विरोध करें।

होली का त्योहार नजदीक आ रहा है, ऐसे में अब इसे लेकर घृणा फैलाने का दौर शुरू हो गया है क्योंकि ये हिन्दुओं द्वारा मनाया जाता है। निर्देश सिंह नामक महिला यूट्यूबर ने एक वीडियो जारी कर होली को लेकर अनाप-शनाप बका है। इस वीडियो में वो कहती दिख रही हैं कि हम खुद को सभ्य समाज में रहने वाला नागरिक समझते हैं, लेकिन आप खुद ही सोचिए कि एक सभ्य समाज में एक स्त्री को जीवित जला कर जश्न मनाना कहाँ तक उचित है?

वीडियो में वो कहती हैं, “अगर हमारी सभ्यताओं में महिलाओं को ज़िंदा जला कर जश्न मनाना रहा है तो मैं इसे गलत मानती हूँ। हमारी सभ्यताओं में स्त्रियों को सती-प्रथा के तहत ज़िंदा चिताओं में जलाया गया तो वो प्रथा भी बदली हमलोगों ने, क्योंकि हम एक प्रोगेसिव सोसाइटी हैं। मुझे लगता है कि होलिका दहन के नाम पर एक स्त्री को जलाना, चाहे काल्पनिक हो, त्योहार या जश्न के रूप में हो – किसी भी रूप में, किसी भी अर्थ में ऐसी प्रथा की सख्त विरोधी हूँ।”

उन्होंने कहा कि स्त्री के प्रतीक को भी जलाना गलत है और वो जीवन भर इसका विरोध करती रहेंगी। साथ ही उन्होंने लोगों से भी अपील की कि अगर वो ‘प्रोग्रेसिव सोसाइटी’ का हिस्सा हैं तो इसका विरोध करें। निर्देश सिंह ने कहा कि जब हमारे बच्चे आज एक स्त्री को जला कर जश्न मनाते हुए देखेंगे तो भविष्य में किसी बहन-बेटी को ज़िंदा जलते देखेंगे तो वो उसका विरोध नहीं कर पाएँगे। यूट्यूबर के अनुसार, होलिका दहन एक निंदनीय है और इससे एक अच्छा समाज नहीं बनेगा।

बता दें कि होलिका एक राक्षसी थी, जो अपने भतीजे प्रह्लाद को जलाना चाहती थी। लेकिन, आग में वो खुद जल गई। प्रह्लाद भगवान विष्णु के अनन्य भक्त के रूप में जाने जाते हैं। लोगों ने यूट्यूबर से पूछा कि क्या एक मासूम को ज़िंदा जलाने की साजिश रचने वाली का समर्थन किया जाना चाहिए? निर्देश सिंह ‘The Hasti’ नाम से यूट्यूब चैनल चलाती हैं। लोग उन्हें सलाह दे रहे हैं कि वो भक्त प्रह्लाद और होलिका दहन की कथा पढ़ें, क्योंकि होलिका ने खुद आग में जाने की साजिश रची थी।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?

मुस्लिमों को रिझाने में 2017 में औंधे मुँह गिरे थे अखिलेश, आरक्षण का वादा किया लेकिन घोषणापत्र खाली रहा: 2027 के चुनावी रण में...

मुस्लिम आरक्षण पर अखिलेश बयानों से लेकर मुलायम सिंह यादव की मुस्लिम राजनीति अपने पुराने ढर्रे पर रही है। हालाँकि अब यूपी में वोटर्स अपनी प्रथमिकताएँ बदल रहे हैं।
- विज्ञापन -