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AAP ने कई महीने से नहीं भरा भोपाल वाले दफ्तर का किराया… मकान मालिक ने गुस्से में प्रॉपर्टी पर ताला लगाया: प्रदेश अध्यक्ष को कुछ पता तक नहीं

मध्य प्रदेश की प्रदेश अध्यक्ष रानी अग्रवाल ने कहा कि उन्हें इस बारे में कुछ पता नहीं और वो भोपाल के पदाधिकारियों से बात करेंगी।

भोपाल में आम आदमी पार्टी (आप) के लिए मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। दिल्ली विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद अब मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पार्टी के प्रदेश कार्यालय पर ताला लग गया है। ये ताला मकान मालिक ने लगाया है, क्योंकि आप ने पिछले चार महीनों से किराया नहीं दिया। सुभाष नगर में स्थित इस ऑफिस में लंबे समय से पार्टी की गतिविधियाँ चल रही थीं, लेकिन अब हालात ऐसे हो गए कि मकान मालिक को सख्त कदम उठाना पड़ा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मकान मालिक विवेक गंगलानी ने नाराजगी जताते हुए कहा कि किराए के साथ-साथ बिजली बिल भी बकाया है। इतना ही नहीं, उन्होंने ऑफिस में शराब की पेटियाँ और दूसरी आपत्तिजनक गतिविधियों का भी आरोप लगाया है। गंगलानी का कहना है कि किराया माँगने पर उन्हें धमकियाँ तक मिलीं, जिसके बाद वो पुलिस में शिकायत करने की तैयारी कर रहे हैं।

दिल्ली में हार का असर अब दूसरे राज्यों में भी साफ दिख रहा है। भोपाल के इस ऑफिस का किराया करीब 50 हजार रुपये बताया जा रहा है, जो दो से चार महीनों से बकाया है। मकान मालिक ने ताला तो लगा दिया, लेकिन आप के बड़े नेताओं को इसकी खबर तक नहीं। मध्य प्रदेश की प्रदेश अध्यक्ष रानी अग्रवाल ने कहा कि उन्हें इस बारे में कुछ पता नहीं और वो भोपाल के पदाधिकारियों से बात करेंगी। वहीं, भोपाल जिला अध्यक्ष सीपी सिंह चौहान ने भी अनजान बनते हुए कहा कि उनका जिला ऑफिस तो नरेला शंकरी में है, उन्हें प्रदेश कार्यालय की कोई जानकारी नहीं।

इस बीच, पार्टी के अंदर मतभेद की बातें भी सामने आ रही हैं। दिल्ली की हार के बाद आप के नेता बंटे हुए दिख रहे हैं और कार्यकर्ताओं में निराशा छाई हुई है।

बता दें कि आम आदमी पार्टी ने मध्य प्रदेश में अपनी जड़ें मजबूत करने की कोशिश की थी। विधानसभा चुनाव में भले ही सफलता न मिली, लेकिन निकाय चुनाव में सिंगरौली की मेयर रानी अग्रवाल ने जीत हासिल कर पार्टी का झंडा बुलंद किया था। छत्तीसगढ़ में भी आप ने हाल ही में खाता खोला है। मगर अब भोपाल ऑफिस पर ताला लगने से सवाल उठ रहे हैं कि क्या पार्टी मुश्किल दौर से गुजर रही है?

मकान मालिक का कहना है कि ऑफिस में कोई खास हलचल नहीं थी और किराया न मिलने से उन्हें ये कदम उठाना पड़ा। वहीं, कुछ लोग इसे दिल्ली हार का नतीजा मान रहे हैं, जिसने पार्टी की आर्थिक हालत पर भी असर डाला है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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