चीन की राजनीति और सेना के भीतर एक बार फिर बड़ा भूचाल आया है। इस बार वजह हैं पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के शीर्ष जनरल और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बेहद करीबी माने जाने वाले झांग यूश्या। राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बेहद करीबी माने जाने वाले और चीनी सेना के शीर्ष नेतृत्व में शामिल जनरल झांग यूश्या के खिलाफ जाँच शुरू होने से सत्ता के गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
चीन के रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की है कि झांग यूश्या पर ‘अनुशासन और कानून के गंभीर उल्लंघन’ के आरोपों में जाँच चल रही है। इसी के साथ एक और वरिष्ठ अधिकारी जनरल लियू झेनली भी जाँच के दायरे में हैं। इस कदम को कई दशकों में चीनी सेना के भीतर सबसे बड़ी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।
China's top general, President Xi Jinping's second-in-command, is under investigation, marking the highest-profile purge of senior military leadership amid Beijing's military modernization https://t.co/ZXoQc5XUNt pic.twitter.com/mJRRqWAzxg
— Reuters (@Reuters) January 24, 2026
क्या है कार्रवाई का आधिकारिक कारण?
रक्षा मंत्रालय ने आरोपों का खुलासा भले नहीं किया है, लेकिन चीन में ‘अनुशासन और कानून के उल्लंघन’ जैसे शब्द आमतौर पर भ्रष्टाचार, सत्ता के दुरुपयोग या पार्टी लाइन से भटकने की ओर इशारा करते हैं। ऐसे मामलों में अक्सर पद से हटाना और कड़ी सजा देखने को मिलती है।
यह कार्रवाई ऐसे समय पर हुई है जब बीते वर्ष अक्टूबर में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी पहले ही 9 शीर्ष जनरलों को निलंबित कर चुकी है। जानकारों का मानना है कि यह केवल भ्रष्टाचार विरोधी अभियान नहीं, बल्कि सेना पर केंद्रीय नेतृत्व की पकड़ मजबूत करने का प्रयास भी है।
कौन हैं झांग यूश्या और क्यों माने जाते थे बेहद ताकतवर?
75 वर्षीय झांग यूश्या चीन की सबसे शक्तिशाली सैन्य संस्था सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (CMC) के उपाध्यक्ष थे। यह वही संस्था है, जिसके अध्यक्ष खुद राष्ट्रपति शी जिनपिंग हैं। झांग न सिर्फ CMC के शीर्ष अधिकारी थे, बल्कि कम्युनिस्ट पार्टी के पोलितब्यूरो के सदस्य भी रहे हैं, जहाँ देश के सबसे अहम फैसले लिए जाते हैं।
उन्होंने 1968 में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी जॉइन की थी और वे उन गिने-चुने वरिष्ठ अधिकारियों में थे जिनके पास वास्तविक युद्ध का अनुभव था। वह उन कुछ सैन्य अधिकारियों में शामिल थे जो सीधे शी जिनपिंग के साथ मिलकर सेना की कमान सँभालते थे।
उम्र सीमा पार करने के बावजूद उन्हें पद पर बनाए रखा गया, जिसे लंबे समय तक शी जिनपिंग के भरोसे का संकेत माना जाता रहा। उन्हें लंबे समय तक चीनी सेना का अनुभवी और प्रभावशाली चेहरा माना गया। लेकिन अब वही जनरल सत्ता की जाँच एजेंसियों के निशाने पर हैं।
क्या शी जिनपिंग को हटाने की हो रही थी कोशिश?
झांग यूश्या और सैन्य रणनीति प्रमुख ल्यू झेनली के खिलाफ अचानक शुरू हुई जाँच ने कई अटकलों को जन्म दे दिया है। चीन मामलों की विशेषज्ञ और मानवाधिकार कार्यकर्ता जेनिफर जेंग का दावा है कि यह सिर्फ अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं, बल्कि सत्ता संघर्ष का हिस्सा है।
उनके अनुसार, पार्टी के भीतर एक गुट शी जिनपिंग की ताकत कम करना चाहता था। इस गुट में पूर्व राष्ट्रपति हू जिंताओ, पूर्व प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ और झांग यूश्या जैसे दिग्गज शामिल बताए जा रहे हैं। इन नेताओं का मकसद कम्युनिस्ट पार्टी को बनाए रखते हुए चीन को देंग शियाओपिंग के दौर जैसी सामूहिक नेतृत्व व्यवस्था में लौटाना था।
जेंग का यह भी कहना है कि हाल ही में शी जिनपिंग की बीमारी और अस्पताल में भर्ती होने की खबरें दरअसल एक रणनीतिक चाल थीं, जिससे विरोधियों को भ्रम में रखा जा सके।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक अहम बैठक के दौरान झांग यूश्या अपेक्षाकृत कम सुरक्षा के साथ पहुँचे थे। वहीं पहले से मौजूद बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें घेर लिया और हिरासत में ले लिया गया। कुछ दावों में कहा जा रहा है कि झांग वास्तव में शी जिनपिंग को हटाने की योजना बना रहे थे, लेकिन इसकी जानकारी पहले ही लीक हो गई।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद शी जिनपिंग ने तेजी से कार्रवाई कर यह संकेत दे दिया कि सत्ता पर उनकी पकड़ अब भी मजबूत है। इससे पहले एक अन्य वाइस चेयरमैन हे वेइडोंग को हटाने की जानकारी महीनों बाद सामने आई थी, लेकिन झांग यूश्या के मामले में घोषणा तुरंत की गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि अब कम्युनिस्ट पार्टी के भीतर यह भ्रम भी टूट रहा है कि सिर्फ चेहरों के बदलने से व्यवस्था बदल सकती है। या तो पूरा सिस्टम बदलेगा, या फिर चीन में डर और सख्ती का यही दौर आगे भी चलता रहेगा।
क्या रहा पहले चुनौती देने वालों का हश्र?
शी जिनपिंग के सत्ता में आने के बाद से चीन में व्यापक सफाई अभियान चल रहा है। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के मुताबिक 2012 से अब तक करीब 2 लाख अधिकारियों पर कार्रवाई हो चुकी है। सेना में इससे पहले भी कई प्रभावशाली जनरलों को पद से हटाया गया है।
पूर्व CMC उपाध्यक्ष गुओ बॉक्सियोंग और शू काईहौ जैसे नाम इसके उदाहरण हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि झांग यूश्या के खिलाफ कार्रवाई भी इसी संदेश का हिस्सा है कि सेना में वफादारी सिर्फ शीर्ष नेतृत्व के प्रति ही चलेगी।
झांग यूश्या पर जाँच ने यह साफ कर दिया है कि चीन में सत्ता के केंद्र में किसी भी तरह की असहमति के लिए अब बहुत कम जगह बची है। यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ कदम है या फिर सत्ता को चुनौती देने वालों के खिलाफ सख्त संदेश इसका पूरा जवाब आने वाले समय में मिलेगा। लेकिन इतना तय है कि चीनी सेना और राजनीति में यह घटना एक टर्निंग पॉइंट बन चुकी है।


