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जिसका अब्बा था भारतीय विमान अपहरण का मास्टरमाइंड, वह तालिबान का रक्षा मंत्री: चीन ने खोला खजाना, फौजी भी भेज सकता है

बताया जा रहा है कि चीन बगराम हवाई क्षेत्र में सैन्य कर्मियों और आर्थिक विकास अधिकारियों को तैनात करने पर विचार कर रहा है।

अफगानिस्तान में तालिबान ने जो अंतरिम सरकार का गठन किया है उसमें रक्षा मंत्री मुल्‍ला मोहम्‍मद याकूब को बनाया है। वह तालिबान के संस्थापक मुल्‍ला उमर का बेटा है। 1999 में भारतीय विमान को अगवा कर कंधार ले जाया गया था। इसका मास्टरमाइंड मुल्ला उमर ही था। दूसरी ओर तालिबानी राज के लिए चीन ने अपना खजाना खोल दिया है। उसने 31 मिलियन डॉलर की मदद का ऐलान किया है। साथ ही कभी अमेरिका के नियंत्रण में रहे बगराम एयरबेस पर अपने फौजियों की तैनाती पर भी विचार कर रहा है।

मुल्ला याकूब को रक्षा मंत्री बनाने के बाद तालिबान ने उसकी पहली तस्वीर भी सार्वजनिक की है। उसके आतंकी संगठनों लश्‍कर और जैश से बेहद करीबी संबंध हैं। उसे पाकिस्तान का भी पूर्ण समर्थन बताया जाता है। तालिबान के सैन्य अभियानों के प्रमुख रहे याकूब को इतना महत्वपूर्ण मंत्रालय आईएसआई के हस्तक्षेप के बाद ही मिलने की भी बात कही जा रही।

गौरतलब है कि 24 दिसंबर 1999 को पाकिस्तानी आतंकवादियों ने इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट IC-814 को जैश-ए-मोहम्मद के सरगना आतंकी मसूद अजहर, अल उमर मुजाहिदीन का मुश्ताक अहमद जरगर और अलकायदा के अहमद उमर सईद शेख की रिहाई के लिए हाईजैक कर लिया गया था। तीनों आतंकी भारतीय जेल में बंद थे। 

आईसी 814 विमान काठमांडू से दिल्ली के लिए उड़ा था जिसे आतंकवादियों ने हाइजैक कर लिया था। इसके बाद वह विमान को कंधार लेकर गए थे। इस घटना के वक्त विमान में 176 यात्री और 15 क्रू के सदस्य मौजूद थे, जिन्हें हाईजैकर्स ने 7 दिनों तक बंधक बनाए रखा था। मुल्ला उमर इस ऑपरेशन का मास्टरमाइंड था।

इधर अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार बनते ही चीन ने बुधवार (सितंबर 8, 2021) को 31 मिलियन अमेरिकी डॉलर की मदद का ऐलान किया। चीन ने कहा कि यह अराजकता खत्म करने और व्यवस्था बहाल करने के लिए जरूरी है। अफगानिस्तान के हालात पर पड़ोसी देशों के विदेश मंत्रियों की पहली बैठक में चीन की विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि चीन, अफगानिस्तान को 200 मिलियन यूआन (31 मिलियन अमेरिकी डॉलर) की मदद के तहत अनाज, सर्दी के सामान, कोरोना के टीके और जरूरत की दवाएँ देगा।

पाकिस्तान की अध्यक्षता में हुई बैठक में ईरान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्रियों ने शिरकत की। हालाँकि पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी की मेजबानी में आयोजित इस बैठक में रूस ने भाग नहीं लिया। वांग यी ने कहा कि पहली खेप में चीन ने अफगानिस्तान को 30 लाख टीके देने का फैसला किया है।

बताया जा रहा है कि चीन बगराम हवाई क्षेत्र में सैन्य कर्मियों और आर्थिक विकास अधिकारियों को तैनात करने पर विचार कर रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, चीन वर्तमान में बगराम में आर्थिक विकास कार्यक्रम बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के लिए श्रमिकों को भेजने पर स्टडी कर रहा है। हालाँकि, चीनी विदेश मंत्रालय ने ऐसी किसी योजना से इनकार किया है। यह एयरबेस काबुल से लगभग एक घंटे की दूरी पर है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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