विदेश जाने का सपना देख रहे भारतीय अब किडनैपिंग का शिकार हो रहे हैं। डंकी रूट से कनाडा अमेरिका और यूके जाने वाले युवा ईरान जैसे दूसरे देश में ट्रैप हो रहे हैं और उसके परिवार वालों से भारी फिरौती माँगी जा रही है।
एक ऐसा ही मामला गुजरात से आया है। जहाँ के 13 नौजवान ऑस्ट्रेलिया में अवैध तरीके से जा रहे थे। इन्हें फिरौती के लिए ईरान में बंधक बना लिया गया। इनमें से अभी भी 6 वहाँ फँसे हुए हैं, बाकियों की वतन वापसी हो गई है।
अपहरणकर्ताओं ने बंधकों का एक वीडियो उन्हें ऑस्ट्रेलिया भेजने वाले एजेंट और उनके परिवारों को भेजकर करोड़ों रुपये की फिरौती माँगी। मामला सामने आने पर मानसा से भाजपा विधायक जयंती पटेल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर मदद माँगी। इसके बाद बंधकों की रिहाई संभव हो पाई।
19 अक्टूबर को मानसा के बापूपुरा गाँव की प्रिया चौहान, अजय चौधरी, अनिल चौधरी और निखिल चौधरी ऑस्ट्रेलिया के लिए रवाना हुए। उन्हें दिल्ली से थाईलैंड, वहाँ से दुबई और फिर अमीरात एयरलाइंस के जरिए ईरान की राजधानी तेहरान ले जाया गया। ईरान पहुँचने के बाद, उन्हें एक टैक्सी में बिठाकर किसी अज्ञात स्थान पर ले जाया गया।
इसके बाद, उन्हें बंधक बना लिया गया और बेरहमी से पीटा गया। इन लोगों के दो वीडियो ऑनलाइन सामने आए। एक वीडियो में दो युवकों को नंगा करके पीटा जा रहा था। इन दो वीडियो के अलावा, अपहरणकर्ताओं ने एक जोड़े की तस्वीर भी साझा की, जिसमें उनके हाथ और मुँह बंधे हुए थे। इस वीडियो और तस्वीरों को दिखाते हुए पीड़ितों के परिवारों से ₹2 करोड़ की फिरौती माँगी गई।
डंकी मार्ग, फिरौती के लिए अपहरण: हताशा और धोखे की कहानी
हालाँकि, यह कोई पहला मामला नहीं है जब विदेश में अवैध रूप से पहुँचने की कोशिश करते समय भारतीय नागरिकों का अपहरण किया गया हो। जुलाई 2023 में, एक ऐसा ही मामला सामने आया था जिसमें एक गुजराती दंपति, डॉ. पंकज और निशा पटेल का ईरान में वसीम नाम के एक व्यक्ति ने अपहरण कर लिया था। ये लोग जो ‘डंकी मार्ग’ से अमेरिका जा रहे थे। दंपति को प्रताड़ित किया गया और अपहरणकर्ताओं ने उनके एजेंट से 10 लाख रुपए की फिरौती माँगी।
सितंबर 2024 में, केरल के 26 वर्षीय हिमांशु नाम के एक व्यक्ति का ईरान में इसी तरह अपहरण कर लिया गया था। उसके परिवार द्वारा 20 लाख रुपये की फिरौती देने के बाद ही युवक को रिहा किया गया था। हिमांशु हरियाणा के करनाल के अमन राठी नाम के एक एजेंट के संपर्क में आया। राठी ने हिमांशु को ऑस्ट्रेलिया में वर्क वीजा दिलाने का झाँसा दिया।
इसके बाद हिमांशु को नोएडा ले जाया गया और 15 दिनों का प्रशिक्षण दिया गया। उसे इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता भेज दिया गया। तीन हफ़्ते बाद, वह दिल्ली लौटा। फिर उसे ईरान भेज दिया गया। चाबहार पहुँचने के बाद हिमांशु का अपहरण कर लिया गया। पाकिस्तानी मानव तस्करों ने भारतीय नागरिक पर हमला किया और उसे प्रताड़ित किया। हिमांशु के परिवार से एक करोड़ रुपए की फिरौती माँगी गई। बातचीत में 20 लाख रुपए पर सहमति बनी और हिमांशु के परिवार ने उसकी रिहाई के लिए 20 लाख दे दिए।
इस साल जून में, संगरूर के हुसनप्रीत सिंह, एसबीएस नगर के जसपाल सिंह और होशियारपुर के अमृतपाल सिंह नामक तीन भारतीय तेहरान पहुँचने के कुछ ही समय बाद गायब हो गए। होशियारपुर के एक एजेंट ने उन्हें दुबई और ईरान के रास्ते ऑस्ट्रेलिया में जॉब देने का सब्जबाग दिखाया था। उसे तेहरान में अस्थायी तौर पर रहने के लिए कहा गया।
परिवार के मुताबिक तेहरान पहुँचते ही उनका अपहरण कर लिया गया था। अपहरणकर्ताओं ने एक करोड़ रुपए की फिरौती माँगी। इनलोगों ने काफी दर्दनाक वीडियो परिजनों को भेजा। इसमें बंधकों को पीली रस्सियों से बाँधा गया था और खून बह रहा था। लापता भारतीयों से आखिरी बार 11 मई को संपर्क हुआ था। भारत सरकार के हस्तक्षेप और ईरानी पुलिस के सक्रिय होने के बाद तीनों भारतीयों को बचाया जा सका।
हाल ही में, एक पंजाबी परिवार का सीमा पार के एक गिरोह ने अपहरण कर लिया था। 4 अक्टूबर 2025 को धरमिंदर सिंह, उनकी पत्नी संदीप कौर और उनका 12 साल का बेटा तब रिहा हुआ, जब 80 लाख रुपए की फिरौती और गहने पाकिस्तानी गिरोह को दिए।
पंजाब के राहों का यह परिवार एक एजेंट के संपर्क में आया। एजेंट ने उन्हें कहा कि वे सीधे भारत से कनाडा नहीं भेज सकते हैं, लेकिन ईरान के रास्ते कनाडा में बसाया जा सकता है।
परिवार के मुताबिक, “एजेंट ने कहा कि परिवार को चिंता करने की जरूरत नहीं है। कनाडा पहुँचने के बाद ही पूरा भुगतान करना होगा। तब तक का खर्च वह उठाएगा,”
ठेके पर ज़मीन लेने वाले किसानी करने वाले धरमिंदर ने बात मान ली। धरमिंदर सिंह ने एजेंट के हवाले से कहा, “पूरे परिवार के लिए कुल खर्च 26 लाख रुपए हैं, लेकिन भुगतान कनाडा पहुँचने के बाद ही होगा।”
25 सितंबर को, सिंह परिवार चंडीगढ़ से कोलकाता, फिर दुबई और फिर तेहरान के लिए रवाना हुआ। वे इमाम खुमैनी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर टैक्सी ड्राइवर का इंतज़ार कर रहे थे। एजेंट उन्हें टैक्सी देने वाला था। इस दौरान एक टैक्सी ड्राइवर आया और भारतीय नागरिकों को एक दूर दराज के स्थान पर ले गया। वहाँ भारतीय परिवार के पासपोर्ट और मोबाइल फोन छीन लिए गए। पीड़ित परिवार को पता चला कि उन्हें पाकिस्तान से संचालित अंडरवर्ल्ड से जुड़े एक गिरोह ने अगवा कर लिया है। पाकिस्तानी गिरोह ने 1.5 करोड़ रुपए की फिरौती माँगी।
सिंह परिवार को पाकिस्तानी गिरोह की कैद से अपनी रिहाई के लिए 80 लाख रुपये का इंतजाम करना पड़ा, गहने देने पड़े और जमीन बेचनी पड़ी।
हाल के दिनों में ऐसे मामलों में वृद्धि हुई है, जिसमें धोखेबाज एजेंट हताश लोगों को विदेश में नौकरी और आकर्षक करियर का झाँसा देकर ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और अमेरिका भेजने के नाम पर फँसाते हैं। मानव तस्करों और फिरौती माँगने वाले ऐसे लोगों की तलाश में रहते हैं जो विदेश जाने का सपना देखते हैं और इसे पूरा करने के लिए ‘कुछ भी’ करने को तत्पर रहते हैं। ‘डंकी रूट’ ऐसे ही लोगों की वजह से फलफूल रहा है।
हाल ही में, पंजाब पुलिस ने एक ऐसे ही रैकेट का भंडाफोड़ किया और लीबिया से पाँच युवकों को छुड़ाया। इस मामले में भी कार्यप्रणाली कुछ अलग नहीं थी। हताश लोगों को विदेश में बेहतर जीवन और अवसरों का लालच देकर, उन्हें अवैध रास्ता अपनाने के लिए राजी करना, उन्हें उनके मनमुताबिक देश भेजने के बहाने, उनका अपहरण करना, यातनाएँ देना और फिर फिरौती माँगना।
काम के लिए विदेश जाने में कोई बुराई नहीं है, बशर्ते रास्ते सही हों। वीजा प्रक्रिया में देरी से हताश भारतीय धोखे, विश्वासघात, यातना, आर्थिक नुकसान और सबसे बढ़कर जान गँवाने की स्थिति में ये लोग फँस रहे हैं। ये कुछ ऐसे मामले हैं जो मीडिया के जरिए बाहर आ पाई हैं। ऐसी कई घटनाएँ हुई हैं, जो रिपोर्ट ही नहीं की गईं।
इस खतरे की जड़ में ‘डंकी रूट’ है। डंकी पंजाबी में एक शब्द है जिसका अर्थ है एक जगह से दूसरी जगह कूदना। समय के साथ, यह उन लोगों द्वारा अपनाए जाने वाले अवैध रास्ते के लिए इस्तेमाल होने लगे, जो बिना कागजात के दूसरे देश में एंट्री करते हैं।
कई एजेंट डंकी रूट के जरिए भारतीयों को विदेश भेजने का लालच देते हैं। जो लोग डंकी रूट चुनते हैं, उनका पहले पासपोर्ट और वीजा बनवाया जाता है। अक्सर अवैध रास्तों पर काम करने वाले एजेंट पैसे लेकर किसी यूरोपीय देश या लैटिन अमेरिका के किसी देश का वीजा बनवा देते हैं।
ज्यादातर मामलों में यह पर्यटक वीजा होता है। इसके जरिए डंकी रूट के लोगों को भारत से निकाला जाता है। उन्हें नेपाल, दुबई या किसी अन्य देश में कुछ दिनों की यात्रा करवाई जाती है और उनकी यात्रा की पूरी कहानी सुनाई जाती है। कई लोग शरण लेने के लिए अमेरिका, कनाडा या ऑस्ट्रेलिया जाना चाहते हैं। अक्सर गैरकानूनी काम करने वाले एजेंट पैसे लेकर किसी यूरोपीय देश या लैटिन अमेरिका के किसी देश का वीज़ा बनवा देते हैं। इसमें प्रति व्यक्ति 25-50 लाख रुपये तक का खर्च आता है। साथ ही पुलिस द्वारा पकड़े जाने, अपहरण किए जाने, आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के लिए मजबूर किए जाने या जान गँवाने का भी जोखिम रहता है।
इसी तरह के आपराधिक गिरोह म्यांमार और अन्य देशों में भी सक्रिय हैं। हज़ारों भारतीयों को दक्षिण पूर्व एशिया में कॉल सेंटर और डेटा एंट्री जैसी नौकरियों के फर्जी विज्ञापनों और वादों के जरिए 1-3 लाख रुपए की अग्रिम राशि देकर ठगा जाता है। ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिनमें इस जाल में फँसे भारतीयों के पासपोर्ट जब्त कर लिए गए और उन्हें ‘स्कैम फॉर्म’ में कैद कर दिया गया। न केवल भारतीय, बल्कि अन्य देशों के लोगों को भी निवेश घोटाले या संदिग्ध क्रिप्टो योजनाओं जैसे ऑनलाइन धोखाधड़ी चलाने के लिए इन स्कैम फ़ार्मों में काम करने के लिए मजबूर किया जाता है।
बात नहीं मानने पर प्रताड़ना झेलना पड़ता है। भूखे रखा जाता है और शरीर के अँग काटने की धमकियाँ दी जाती हैं। पीड़ितों को प्रतिदिन कोटा या लक्ष्य दिए जाते हैं और उन्हें पूरा न कर पाने पर उनसे मारपीट किया जाता है। हाल ही में, भारत ने कंबोडिया और थाईलैंड से अपने सैकड़ों नागरिकों को बचाया है।
जैसा कि ऑपइंडिया ने दिसंबर 2023 में बताया था, क्रिस्टल मेथामफेटामाइन की तस्करी का केंद्र होने के अलावा, म्यांमार का उत्तरी शान राज्य चीनी सीमा से लगी चौकियों में कई अन्य अवैध गतिविधियों का भी केंद्र है।
पिछले जुलाई में, म्यावाड्डी के हपा लू स्थित एक स्कैम सेंटर में काम कर रहे आठ भारतीय नागरिकों को बचाकर संबंधित म्यांमार पुलिस और आव्रजन अधिकारियों को सौंप दिया गया था।
ऐसी खबरें आईं कि कई अपहृत भारतीय नागरिकों को एक सशस्त्र समूह द्वारा ऑनलाइन धोखाधड़ी करने के लिए मजबूर किया जा रहा था। उनके परिवारों ने विदेश मंत्रालय से शिकायत कर उनकी रिहाई के लिए हस्तक्षेप की माँग की।
म्यावाडी में सक्रिय एक समूह ने तमिलनाडु के कम से कम 60 लोगों सहित 300 से ज्यादा भारतीयों पर साइबर क्राइम में शामिल होने का दबाव डाला। इन पीड़ितों को धमकियाँ दी गईं, प्रताड़ित किया गया और उन्हें रोजाना 15 घंटे से ज्यादा काम करने के लिए मजबूर किया गया। उन्होंने आगे बताया कि जब उन्होंने गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल होने से इनकार किया, तो उन्हें शारीरिक हिंसा और बिजली के झटके दिए गए।
यह एक दुष्चक्र है जिसमें विदेश में रहने का काल्पनिक सपना और इस सपने को साकार करने की असाध्य हताशा कई भारतीयों को शिकारियों का आसान शिकार बना देती है। अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया या किसी भी यूरोपीय देश तक पहुँचने के लिए किसी भी हद तक जाने की कमज़ोरियाँ और इच्छाशक्ति भारतीय नागरिकों को अपहरण के लिए फिरौती गिरोहों, नौकरी और ऑनलाइन घोटालों, और आधुनिक गुलामी के जाल में फँसा रही है।
लोगों को एजेंटों को लेकर बेहद सतर्क रहने की जरूरत है। कोई शॉटकट नहीं अपनाना चाहिए बल्कि वैध तरीके से ही विदेश जाने की योजना बनानी चाहिए। चाहे इसमें जितना भी वक्त लगे। जब तक उनके पास स्पष्ट, मान्य अनुबंध न हों, तब तक कोई भी पैसा देने से बचना चाहिए।
इसके अलावा, इन घोटालों के बारे में जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है, और अगर किसी को भी संदेह है कि वह या उसका कोई परिचित इसका शिकार हो सकता है, तो तुरंत अधिकारियों को इसकी सूचना देनी चाहिए। इस खतरे को खत्म करने के लिए, सरकार को भी कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। जागरूकता कार्यक्रम शुरू करने चाहिए और सहयोगी देशों से सहयोग बढ़ाने के लिए प्रेरित करना चाहिए। भारतीयों को येन केन प्रकारेण विदेश जाना और इसके लिए अवैध तरीके अपनाना बंद करना होगा।
(ये लेख मूल रूप से अंग्रेजी में लिखी गई है। इसे पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें)


