Thursday, April 2, 2026
Homeरिपोर्टअंतरराष्ट्रीयबॉडी डबल्स से 'पूप सूटकेस' और फूड लैब तक, जानें भारत आ रहे रूस...

बॉडी डबल्स से ‘पूप सूटकेस’ और फूड लैब तक, जानें भारत आ रहे रूस के राष्ट्रपति पुतिन की सुरक्षा का क्या-क्या है इंतजाम?

दावों के मुताबिक, पुतिन ने पब्लिक अपियरेंस में कई बार बॉडी डबल्स का इस्तेमाल किया है, खासकर तब, जब खतरा ज्यादा हो। यूक्रेन की इंटेलिजेंस का दावा है कि कम से कम तीन लोग उनके हमशक्ल के रूप में तैयार किए गए हैं, जिनमें से कुछ ने अपना लुक पूरी तरह मैच कराने के लिए प्लास्टिक सर्जरी तक कराई है।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बुलावे पर वार्षिक भारत-रूस समिट में शामिल होने के लिए भारत आ रहे हैं। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की विदेश यात्राएँ दुनिया में सबसे गोपनीय व किलेबंद सुरक्षा प्रोटोकॉल मानी जाती हैं। जहर, जासूसी, स्वास्थ्य लीक और हमलों के खतरे से बचाने के लिए रूस की एफएसओ एजेंसी उनके जीवन के हर कदम को नियंत्रित रखती है।

दुनिया में कई नेता सुरक्षा घेरे में घूमते हैं, लेकिन रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सुरक्षा व्यवस्था इतनी गुप्त और अभेद्य है कि उसे आधुनिक दौर का ‘चलता-फिरता किला’ कहा जा सकता है। उनकी विदेश यात्रा केवल राजनयिक दौरा नहीं, बल्कि एक उच्च स्तरीय गोपनीय सैन्य अभियान जैसी होती है, जिसमें उनका हर कदम पहले से नियंत्रित और सुरक्षित होता है, चाहे वह खाना हो, विमान हो, फोन हो या फिर बाथरूम।

व्लादिमीर पुतिन के ‘पूप सूटकेस’ का रहस्य

पुतिन की सुरक्षा व्यवस्था का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा उनका ‘पूप सूटकेस’ है। विदेश यात्राओं के दौरान उनके निजी बॉडीगार्ड्स उनका मल विशेष बैग में इकट्ठा कर सील करते हैं और उसे एक गुप्त सूटकेस में रूस वापस ले जाया जाता है।

ऐसा कहा जाता है कि पुतिन को अपने स्वास्थ्य के बारे में जानकारी लीक होने का खतरा है इसीलिए वे मल अपने साथ लेकर लौटते हैं। विदेशी ताकतों को राष्ट्रपति के मल के नमूने से उनके स्वास्थ्य की जानकारी पता लग सकती है और वो ऐसा नहीं चाहते हैं।

(फोटो साभार: AI)

यानी ऐसा इसलिए किया जाता है कि राष्ट्रपति के मल का नमूना दूसरे देशों के पास न पहुँच सके। BBC की पूर्व पत्रकार फरीदा रुस्तमोवा बताती हैं कि 1999 में रूस के राष्ट्रपति बनने के बाद से ही पुतिन की सुरक्षा में उनके मल को इकट्ठा करके वापस रूस लाया जाता है।

पत्रकार के अनुसार, वियना की यात्रा में तो पुतिन अपने प्राइवेट बाथरूम के साथ पहुँचे थे, जिसमें पोर्टेबल टॉयलेट था। पुतिन अपने स्वास्थ्य की जानकारी विदेशी ताकतों तक नहीं पहुँचाना चाहते हैं। वैसे ही पुतिन की स्वास्थ्य को लेकर कुछ वर्षों में कई दावे सामने आए हैं। इससे बचने के लिए राष्ट्रपति ऐसा करते हैं।

इसका उद्देश्य विदेशी जासूसों को उनके स्वास्थ्य विश्लेषण से रोकना है। यह प्रोटोकॉल 2017 के फ्रांस दौरे, 2019 की सऊदी यात्रा और हेलसिंस्की शिखर सम्मेलन में देखा गया।

पत्रकार फरीदा रुस्तामोवा के अनुसार, पुतिन हमेशा निजी या पोर्टेबल शौचालय ही इस्तेमाल करते हैं। यह परंपरा सोवियत काल की उस सोच से जुड़ी है जब स्टालिन ने माओ त्से-तुंग के मल का विश्लेषण करवाया था।

कभी असली पुतिन कभी कॉपी

दावों के मुताबिक, पुतिन ने पब्लिक अपियरेंस में कई बार बॉडी डबल्स का इस्तेमाल किया है, खासकर तब, जब खतरा ज्यादा हो। यूक्रेन की इंटेलिजेंस का दावा है कि कम से कम तीन लोग उनके हमशक्ल के रूप में तैयार किए गए हैं, जिनमें से कुछ ने अपना लुक पूरी तरह मैच कराने के लिए प्लास्टिक सर्जरी तक कराई है।

भोजन सुरक्षा और मोबाइल फूड लैब

पुतिन का भोजन विशेष रूसी शेफ तैयार करते हैं, जो हथियार संचालन और मिलिट्री ट्रेनिंग प्राप्त होते हैं। विदेश यात्राओं में एडवांस टीम होटल से स्थानीय खाद्य सामग्री हटाकर रूसी सामान स्थापित करती है।

बॉडीगार्ड्स भोजन का स्वाद पहले चखते हैं और एक मोबाइल लैब उनकी प्लेट में पहुँचने से पहले जहर या रेडिएशन की जाँच करती है। पुतिन फास्ट फूड, शराब और रात में मीट से परहेज करते हैं और अक्सर ओलिवियर सलाद, बैंगन ऐपेटाइजर और अदरक या गुलाब की चाय पसंद करते हैं।

(फोटो साभार: हिंद फर्स्ट)

बॉडीगार्ड्स: ‘साइलेंट प्रोटेक्टर्स’

एफएसओ की राष्ट्रपति सुरक्षा सेवा (SBP) में चुने जाने वाले बॉडीगार्ड्स 35 वर्ष से कम उम्र, 180 सेमी से ऊँचाई और मानसिक-शारीरिक फिटनेस वाले होते हैं। वे बहुभाषी, मार्शल आर्ट्स प्रशिक्षित और उच्च स्तर की निष्ठा जाँच से गुजरते हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उनकी टीम में स्नाइपर्स, ड्रोन विशेषज्ञ और इलेक्ट्रॉनिक सर्वेलेन्स यूनिट शामिल होती है। अंतर्राष्ट्रीय यात्रा से पहले, उनके बॉडीगार्ड्स को कथित तौर पर दो सप्ताह के लिए क्वारंटीन में रखा जाता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे पूरी तरह से तैयार हैं और उनमें संक्रमण नहीं है। पुतिन, उनकी निजी जानकारी या रूटीन साझा करना कानूनी रूप से वर्जित है।

वाहन और विमान: बुलेटप्रूफ नहीं, ‘वॉरप्रूफ’

पुतिन का विमान IL-96-300PU, जिसे ‘फ्लाइंग प्लूटो’ कहा जाता है, अत्याधुनिक मिसाइल रक्षा, न्यूक्लियर लॉन्च सिस्टम और मेडिकल सेंटर से लैस है। यह अक्सर दो बैकअप विमानों और लड़ाकू जेट्स के साथ उड़ता है। इसमें मिसाइल डिफेंस सिस्टम, जिम, ऑपरेशन रूम, बार, मेडिकल यूनिट और हाई-सिक्योरिटी कम्युनिकेशन सिस्टम है। माना जाता है कि इस विमान में एक ऐसा बटन भी है जिससे वे हवा में रहते हुए न्यूक्लियर स्ट्राइक की मंजूरी दे सकते हैं।

लैंडिंग के बाद पुतिन जिस कार में बैठते हैं, वह Aurus Senat कहलाती है। यह सिर्फ बुलेटप्रूफ नहीं, बल्कि ग्रेनेड या केमिकल अटैक झेलने में सक्षम है। रिपोर्ट्स कहती हैं कि यह कार चारों टायर पंचर होने पर भी चलती रहती है। इसमें ऑक्सीजन सप्लाई, फायर सप्रेशन सिस्टम, कमांड कंट्रोल और मेडिकल सपोर्ट जैसी सुविधाएँ मौजूद हैं।

होटल और मूवमेंट कंट्रोल सिस्टम

विदेश प्रवास के दौरान पुतिन के लिए अलग लिफ्ट, अलग मार्ग और अलग पानी व हवा की आपूर्ति की व्यवस्था होती है। मोबाइल फोन, ओपन नेटवर्क और सार्वजनिक संपर्क से वे परहेज करते हैं। कई मौकों पर उन्होंने विमान की जगह एक विशेष सुरक्षित ट्रेन का इस्तेमाल किया है। सार्वजनिक कार्यक्रमों में गार्ड्स हैंडहेल्ड एंटी-ड्रोन डिवाइस लेकर चलते हैं।

शीत युद्ध की विरासत और छाया सुरक्षा व्यवस्था

यह संपूर्ण सुरक्षा ढाँचा केजीबी की विरासत है और इसे एफएसओ 1996 से संचालित करती है। इसका उद्देश्य सिर्फ पुतिन की सुरक्षा नहीं बल्कि उनकी निजी जानकारी, खासकर स्वास्थ्य और निर्णय प्रणाली को शून्य जोखिम पर रखना है। उनकी सुरक्षा टीम के कई सदस्य बाद में सरकारी पदों पर पहुँचते हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह केवल सुरक्षा नहीं बल्कि सत्ता का सबसे संवेदनशील विश्वास तंत्र है।

हाई अलर्ट मोड में दिल्ली: राजघाट से लेकर भारत मंडपम तक तैयारियाँ

दिल्ली में होने वाली भारत-रूस वार्षिक समिट से पहले राजधानी हाई-अलर्ट मोड में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन गुरुवार (4 दिसंबर 2025) की रात दिल्ली पहुँचेंगे और दोनों नेता डिनर पर मुलाकात करेंगे। अगले दिन राष्ट्रपति भवन में उनका औपचारिक स्वागत होगा।

शुक्रवार (5 दिसंबर 2025) को पुतिन गाँधी स्मृति स्थल राजघाट जाएँगे। इसके बाद हैदराबाद हाउस में भारत-रूस समिट होगी, जिसमें रक्षा, रणनीतिक साझेदारी और ऊर्जा सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर बातचीत तय है। शाम को वह भारत मंडपम में एक कार्यक्रम में शामिल होंगे और रात को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा आयोजित स्टेट डिनर में हिस्सा लेंगे।

सुरक्षा में 5 लेयर का घेरा और रूसी कमांडोज तैनात

पुतिन की यात्रा को लेकर सुरक्षा एजेंसियाँ अलर्ट हैं। उन्हें पाँच-स्तरीय सिक्योरिटी कवर दिया जा रहा है। रूसी प्रेसिडेंशियल सिक्योरिटी सर्विस के करीब 50 विशेष कमांडो पहले ही दिल्ली पहुँच चुके हैं। इनके साथ NSG कमांडो, दिल्ली पुलिस की स्पेशल यूनिट्स और स्नाइपर टीमें भी मैदान में हैं।

ड्रोन-निगरानी, जामर, फेशियल रिकग्निशन कैमरे और AI-आधारित ट्रैकिंग सिस्टम सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा हैं। पुतिन के लैंड करते ही कंट्रोल रूम से सभी टीमों को रियल-टाइम अलर्ट और मूवमेंट अपडेट मिलते रहेंगे।

रहने और मूवमेंट के रूट का भी सैनिटाइजेशन

जिस होटल में पुतिन रुकेंगे, वहाँ रूसी सिक्योरिटी एजेंट पहले से तैनात हैं। जिन-जगहों पर वह जा सकते हैं, उनकी भी लगातार जाँच और स्कैनिंग की जा रही है। भारत में उनके इस्तेमाल के लिए रूस से उनकी खास आर्मर्ड लिमोजीन Aurus Senat भी मँगाई गई है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

सौम्या सिंह
सौम्या सिंह
ख़ुद को तराशने में मसरूफ़

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

15 साल बाद, पहली बार पूरी तरह डिजिटल… 1 अप्रैल से शुरू हुई दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना, जातियों की भी होगी सटीक गिनती:...

भारत में पहली बार डिजिटल तरीके से जनगणना 2027 शुरू हो गई है। इसमें जातियों की भी गणना होगी। पहली बार स्वगणना का भी विकल्प दिया गया है।

न हॉर्मुज खुला, न बदली ईरान की सत्ता… कंफ्यूजन में ट्रंप प्रशासन कर रहा कभी वापसी की बात तो कभी युद्ध जारी रखने का...

US ने उम्मीद की थी कि ईरान 2-3 हफ्तों की बमबारी में हथियार डाल देगा लेकिन भारी भरकम खर्च के बावजूद एक महीने से ज्यादा बीतने के बाद भी ईरान ठस से मस नहीं हो रहा है।
- विज्ञापन -