अमेरिकी दालों पर कोई छूट नहीं
अमेरिका ने भारत के साथ हुए ट्रेड डील की फैक्ट शीट में कुछ बदलाव किए हैं। भारत के हिसाब से ये काफी राहत देने वाली है। फैक्ट शीट से दालें हटा दी गई हैं। इसका मतलब है कि भारत को अब अमेरिका दालों पर टैरिफ घटाने की जरूरत नहीं है। इससे दाल उत्पादक किसानों को राहत मिलेगी। अगर अमेरिकी दालें भारत के बाजार में आती तो किसानों को नुकसान हो सकता था।
Just in: White House drops pulses, changes 'committed' to 'intends' for $500 bn purchase in updated White House Fact Sheet on India Trade Deal
— Sidhant Sibal (@sidhant) February 11, 2026
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भारत में दालें राजनीतिक रूप से एक सेंसिटिव सेक्टर हैं। खास बात यह है कि भारत मसूर, छोले और सूखी फलियों का सबसे बड़ा प्रोड्यूसर और कंज्यूमर है। इन्हें हटाना दिखाता है कि नई दिल्ली ने उस भाषा के खिलाफ विरोध किया है जिस पर वह सहमत नहीं थी।
500 बिलियन डॉलर खरीद की ‘प्रतिबद्धता’ अब बना ‘इरादा’
भारत अमेरिका ट्रेड डील के साझा बयान में कहा गया था कि अगले 5 सालों में भारत ने अमेरिका से 500 अरब डॉलर का आयात करने का वादा किया है। लेकिन बदलाव के बाद इसमें कहा गया है कि ‘प्रतिबद्धता’ नहीं बल्कि ये ‘इरादा’ है। यानी डील के हिसाब से इसमें बदलाव संभव है और भारत की कोई कानूनी बाध्यता नहीं है। अब इसमें लिखा है, ‘भारत ज्यादा अमेरिकी सामान खरीदने और $500 बिलियन यानी ₹4194.5 करोड़ से ज़्यादा की US एनर्जी, इन्फॉर्मेशन और कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी, कोयला और दूसरे प्रोडक्ट खरीदने का इरादा रखता है।’

डिजिटल सर्विस टैक्स हटाने वाली बात भी हटाई
अमेरिका के फैक्टशीट में जो बदलाव हुए हैं उसमें भारत के अपने डिजिटल सर्विस टैक्स हटाने से जुड़ा टेक्स्ट भी हटा दिया गया है। पहले कहा गया था, ‘भारत अपने डिजिटल सर्विस टैक्स हटा देगा और डिजिटल ट्रेड में भेदभाव वाले या बोझिल तरीकों और दूसरी रुकावटों को दूर करने वाले मजबूत बाइलेटरल डिजिटल ट्रेड नियमों पर बातचीत करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसमिशन पर कस्टम ड्यूटी लगाने पर रोक वाले नियम भी शामिल हैं।
अमेरिका ने अब कहा है, ‘भारत ने डिजिटल ट्रेड के लिए भेदभाव वाले या बोझिल तरीकों और दूसरी रुकावटों को दूर करने वाले मजबूत बाइलेटरल डिजिटल ट्रेड नियमों पर बातचीत करने का वादा किया है।’ फिलहाल भारत को डिजिटल टैक्स पर कुछ करने की जरूरत नहीं है। आगे नियमों को लेकर बात हो सकती है।
फैक्ट शीट में बदलाव भारत के लिए फायदेमंद
दालों पर टैरिफ नहीं घटाने से तो भारत को फायदा होगा ही साथ ही भारत पर टैरिफ 18 फीसदी किए जाने का फर्क भी बाजार में दिखेगा। भारत पर लगा टैरिफ पड़ोसी देशों पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश, चीन, वियतनाम और दूसरे देशों से कम है। अब रूस से तेल खरीदने को लेकर लगाया गया 25 फीसदी रेसिपोकल टैरिफ भी खत्म हो गया है, यानी 50 फीसदी टैरिफ की जगह अब भारत को 18 फीसदी टैरिफ देना होगा। साझा बयान में जिन बातों का मतलब भारत के हितों के खिलाफ लग रहा था, उनमें बदलाव किया गया है और अमेरिका ने फैक्टशीट में चुपके से कई बदलाव किए हैं।
एक साल से चल रही थी ट्रेड डील पर बातचीत
व्यापार समझौतों में शब्दों के अपने मायने होते हैं। इसमें बदलाव का असर पड़ता है। यूएस ट्रेड डील में प्रतिबद्धता को इरादा में बदला गया। इसका काफी डिप्लोमैटिक और इकोनॉमिक असर पड़ता है। व्हाइट हाउस ने US-इंडिया ट्रेड डील पर अपनी फैक्ट शीट में चुपके से किए गए खास बदलावों को वापस ले लिया, क्योंकि बदलाव आधिकारिक साझा बयान से थोड़े अलग थे।
फैक्ट शीट में 9 फरवरी को जो बदलाव किया गया था, जिसमें ऐसी भाषा जोड़ी गई थी जो इंडिया के ‘व्यापारिक वचनबद्धता’ को बढ़ाती हुई लग रही थी। दालों पर भारत द्वारा टैरिफ कम करने की बात थी। कुछ घंटों बाद बिना सार्वजनिक जानकारी दिए 10 फरवरी 2026 को इन बदलावों को हटा दिया गया। अब साझा बयान के साथ नए फैक्ट शीट को शामिल किया गया है।
भारत और अमेरिका फरवरी 2025 में शुरू हुई लगभग एक साल की बातचीत के बाद एक अंतरिम ट्रेड समझौते पर पहुँचे। भारत को टेक्सटाइल, गारमेंट्स, लेदर, फुटवियर, केमिकल्स, होम डेकोर और कुछ खास मशीनरी जैसे कई एक्सपोर्ट्स पर ड्यूटी 50 परसेंट से घटाकर 18 परसेंट करने का फायदा मिलेगा।


