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नाम: जुनयोंग लियू और यून्किंग जियान, काम: रिसर्च, संबंध- बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड, मिशन: अमेरिका को जैविक हथियारों से तबाह करना: जानिए क्या है FHB तस्करी का मामला

लियू के सामान की जाँच करने पर अधिकारियों को चीनी भाषा में एक नोट, फिल्टर पेपर का एक टुकड़ा और चार प्लास्टिक की थैलियाँ मिलीं, जिनमें लाल रंग की पौधों की सामग्री के छोटे-छोटे गुच्छे थे। लियू ने जानबूझकर नमूनों को टिशू के एक बंडल में छिपाया था क्योंकि उसे पता था कि इनके आयात पर प्रतिबंध है। उसका मकसद अमेरिका में अपना रिसर्च जारी रखना था।

अमेरिका में दो चीनी नागरिकों यून्किंग जियान (33) और जुनयोंग लियू (34) को एक खतरनाक बायोलॉजिकल पैथोजन ‘फ्यूजेरियम ग्रैमिनीरम’ की तस्करी करने के आरोप में गिरफ्तार किया है, जो अनाज की फसलों को बर्बाद कर सकता है।

काश पटेल ने X पर दी जानकारी

काश पटेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले ट्वीटर) पर बताया कि FBI ने अमेरिका में चीनी नागरिक को गिरफ्तार किया है, जिस पर खतरनाक बायोलॉजिकल पैथोजन की तस्करी का आरोप है।

गिरफ्तार किए गए व्यक्ति की पहचान युनकिंग जियान के रूप में हुई है, जिस पर फ्यूसैरियम ग्रैमिनेरम नामक फंगस की तस्करी का आरोप है। पटेल ने इसे ‘एग्रोटेररिज्म एजेंट’ बताया, जिसका मतलब है कि इसका इस्तेमाल फसलों को नुकसान पहुँचाकर कृषि-आतंकवाद फैलाने के लिए किया जा सकता है।

कैसे पकड़े गए दोनों चीनी नागरिक?

27 जुलाई 2024 को लियू ने अमेरिका में प्रवेश करते समय अधिकारियों को बताया कि वह अपनी गर्लफ्रेंड से मिलने आया है और जल्द ही लौट जाएगा। उसने दावा किया कि उसके पास कोई ‘काम की चीज’ नहीं है। हालाँकि, उसके सामान की दूसरी बार जाँच करने पर अधिकारियों को चीनी भाषा में एक नोट, फिल्टर पेपर का एक टुकड़ा और चार प्लास्टिक की थैलियाँ मिलीं, जिनमें लाल रंग की पौधों की सामग्री के छोटे-छोटे गुच्छे थे।

शुरुआत में लियू ने कहा कि उसे नहीं पता कि ये चीजें उसके बैग में कैसे आईं। लेकिन कड़ी पूछताछ के बाद उसने सच कबूल कर लिया। उसने बताया कि उसने जानबूझकर नमूनों को टिशू के एक बंडल में छिपाया था क्योंकि उसे पता था कि इनके आयात पर प्रतिबंध है। उसका मकसद अमेरिका में अपना रिसर्च जारी रखना था।

क्या है पूरा मामला?

अमेरिका के जस्टिस डिपार्टमेंट के बयान के अनुसार, जियान और लियू पर साजिश रचने, तस्करी करने, झूठे बयान देने और वीजा धोखाधड़ी जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। ये दोनों कथित तौर पर अपनी रिसर्च के लिए चीनी सरकार से फंडिंग ले रहे थे। लियू, जो चीन की एक यूनिवर्सिटी में इस रोगाणु पर रिसर्च कर रहा था, डेट्रॉयट मेट्रोपॉलिटन एयरपोर्ट के रास्ते इसे अमेरिका लाने की कोशिश कर रहा था।

उसका मकसद मिशिगन यूनिवर्सिटी की लैब में इस पर रिसर्च करना था, जहाँ उसकी गर्लफ्रेंड जियान काम करती है। अधिकारियों का मानना है कि ये दोनों चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े हो सकते हैं।

इतिहास में भी इस तरह के हमले हो चुके हैं, जिसमें जर्मनी, जापान और भारत शामिल है। इस तरह के मामले ने अमेरिका समेत दुनिया को फिर से चेताया है कि जैविक आतंकवाद केवल थ्योरी नहीं, बल्कि एक हकीकत बनता जा रहा है, जिससे वैश्विक खाद्य सुरक्षा को बड़ा खतरा है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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