Monday, April 19, 2021
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देश विरोध, हिंदूफोबिया, नेपोटिज्म… 2020 में गजब पड़ी बॉयकॉट की मार

ऐसा ही एक शब्द इस साल काफी चर्चा में रहा और वह था बहिष्कार यानी ‘बॉयकॉट’। कई समूहों, संस्थाओं, फिल्मों और चेहरों ने इस शब्द की भरपूर मार झेली। इनमें से ज़्यादातर का बहिष्कार एक ही वजह से हुआ कि इनसे संबंधित कोई न कोई बात लोगों की आस्था या भावना के विपरीत थीं।

2020 में ऐसी तमाम बातें हुई जो सभी के लिए अलग और नई थीं। इनमें से ज़्यादातर को शायद ही कोई याद रखना चाहेगा। ऐसा ही एक शब्द इस साल काफी चर्चा में रहा और वह था बहिष्कार यानी ‘बॉयकॉट’। कई समूहों, संस्थाओं, फिल्मों और चेहरों ने इस शब्द की भरपूर मार झेली। इनमें से ज़्यादातर का बहिष्कार एक ही वजह से हुआ कि इनसे संबंधित कोई न कोई बात लोगों की आस्था या भावना के विपरीत थीं।

बॉयकॉट चीन

इस कड़ी में सबसे पहला नाम है हमारे पड़ोसी मुल्क चीन का! एक ही साल में ऐसे न जाने कितने मौके आए जब इंटरनेट की जनता चीन का बहिष्कार करते हुए नज़र आई। चाहे टिकटॉक पर लगाई गई पाबंदी का वक्त हो, भारत और चीन की सेना के बीच टकराव का वक्त हो या दीवाली का वक्त हो। जब जब चीन की तरफ से कोई अप्रत्याशित हरकत हुई, सोशल मीडिया पर लोग उसके विरोध में नज़र आए। सरकार ने भी आंतरिक सुरक्षा और जन भावनाओं को मद्देनज़र रखते हुए इस मुद्दे पर कड़े कदम उठाते हुए चीन को स्पष्ट संदेश दिया।

बॉयकॉट टिकटॉक

ज़िक्र हुआ टिकटॉक का, चीन की कंपनी का बनाया हुआ एक वीडियो शेयरिंग एप्लीकेशन! जिसे लेकर भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के कई देशों ने सख्त कदम उठाए। बाद में यह बात भी सामने आई कि इस एप्लीकेशन की मदद से चीन दूसरे देशों की अहम जानकारी इकट्ठा कर रहा है। भारत में इसके बहिष्कार का एक और बड़ा कारण था, दो बड़े कंटेंट प्लेटफॉर्म की लड़ाई (youtube vs tik-tok) के बाद टिकटॉक से जुड़े कई नकारात्मक पहलू खुल कर सामने आए। टिकटॉक पर ऐसी विषयवस्तु को बढ़ावा दिया जा रहा था जो ग़ैरक़ानूनी होने के साथ-साथ सामाजिक सुरक्षा को लेकर भी बड़े सवाल खड़े कर रहे थे। 

बॉयकॉट तनिष्क

2020 में सबसे बड़े पैमाने पर बहिष्कार झेलने वालों नामों तीसरा नाम है तनिष्क का। एक ऐसा ब्रांड जिसने तथाकथित ‘सेक्युलर’ नज़र आने की होड़ में एक विज्ञापन बनाया। विज्ञापन में एक मुस्लिम परिवार की गर्भवती हिन्दू बहू की गोदभराई का वीडियो दिखाया गया। यानी ऐसा संदेश देने की कोशिश हुई कि मुस्लिम परिवार कितना ‘सहिष्णु’ है (बाकी सच्चाई सर्वव्याप्त है)। विज्ञापन का इस कदर विरोध हुआ जिसकी शायद ही किसी ने कल्पना की होगी। नतीजा यह निकला कि अंत में तनिष्क को अपना ‘सो कॉल्ड सेक्युलर’ वीडियो हटाना पड़ा। तनिष्क ने साल में एक बार नहीं बल्कि दो बार बहिष्कार झेला, दूसरी बार दीवाली के मौके पर। ऐसा विज्ञापन बनाया जिसमें ज्ञान दिया गया कि पटाखे नहीं जलाने चाहिए। धर्म निरपेक्षता इस कदर हावी थी कि दीवाली के विज्ञापन में त्यौहार से संबंधित कोई भी अहम चीज़ नहीं नज़र आई। हालाँकि, विरोध के बाद तनिष्क ने यह विज्ञापन भी हटा लिया था

बॉयकॉट मिर्जापुर-2

मिर्जापुर की दूसरी किस्त ने भी 2020 में भी बॉयकॉट का स्वाद जम कर चखा। दरअसल, इस वेब सीरीज़ में भूमिका निभाने वाले किरदारों की राजनीतिक बयानबाजी की वजह से इसका विरोध शुरू हुआ था। इसकी शुरुआत दिसंबर 2019 से ही हो गई थी जब अली फ़ज़ल ने सीएए और एनआरसी के विरोध में सुर बुलंद किए थे। उसको मद्देनज़र रखते हुए लोगों ने अक्टूबर 2020 में रिलीज़ हुई दूसरी किस्त का विरोध शुरु हुआ। इसके बाद निर्माताओं और अन्य कलाकारों ने कह दिया कि उन्हें इस बात से फ़र्क नहीं पड़ता और वह ट्रेंड की दया पर नहीं जीते हैं। इस वेब सीरीज़ में ऐसा कंटेंट भी जम कर पेश किया गया था जो हिन्दू समुदाय की भावनाओं को आहत करने वाला था। फिर क्या था? इंटरनेट की जनता ने इस बयान को भी पूरी गंभीरता से लिया और मिर्जापुर-2 का जम कर बहिष्कार किया। 

बॉयकॉट नेटफ्लिक्स

हिन्दू देवी देवताओं की धुरी पर मनोरंजन की आड़ में रचनात्मक होने का चलन पुराना है। ऐसा ही कुछ दोहराया गया नेटफ्लिक्स पर सीरीज कृष्णा एंड हिज लीला (Krishna & His Leela) में। इस सीरीज में एक कृष्णा नाम के लड़के के कई लड़कियों से शारीरिक संबंध होते है। इनमें से एक लडक़ी का नाम राधा भी होता है। अब इसी बिंदु को आधार बनाकर सोशल मीडिया पर सवाल उठना शुरू हुए। इस सीरीज़ का बहिष्कार करने की माँग होने लगी। लोगों का पूछना था कि आखिर क्यों हिंदू देवी-देवताओं को लेकर अभद्रता के मामले बढ़ते जा रहे हैं? क्यों हमारे देवी-देवताओं का अपमान किया जा रहा है? क्या इसका कारण नेटफ्लिक्स का हिंदूफोबिक होना है? 

बॉयकॉट इरोस नाउ

हिन्दू देवी देवताओं के साथ हिन्दू त्यौहारों को लेकर भी बड़े-बड़े समूहों की फूहड़ता सामने आई। यह कारनामा किया था इरोज नाउ (Eros Now) ने! नवरात्र के मौके पर इरोज नाउ ने इस तरह की कई तस्वीरें साझा की थीं, जो सांस्कृतिक त्यौहार के दृष्टिकोण से आपत्तिजनक थीं। जबकि अन्य मज़हब के त्यौहारों पर यही इरोज नाउ ने बेहद धर्म निरपेक्ष तरीके से शुभकामनाएँ दी थीं। हिन्दुओं के 9 दिन तक चलने वाले त्यौहार नवरात्र के मौके पर कंपनी की ओर से कई तस्वीरें ट्वीट की गई थीं। वह तस्वीरें ऐसी कतई नहीं थीं, जिनके ज़रिए एक त्यौहार की शुभकामनाएँ दी जाती हैं। विरोध बढ़ने पर इरोज नाउ ने सार्वजनिक रूप से माफ़ी माँगी। 

बॉयकॉट सड़क-2

2020 कुछ चर्चित नामों के लिए भी बहुत अच्छा नहीं रहा, इसमें सबसे उल्लेखनीय हैं स्टार किड्स। इस साल OTT मंच पर एक फिल्म रिलीज़ हुई सड़क-2 जिसमें संजय दत्त, आलिया भट्ट और आदित्य रॉय कपूर ने मुख्य भूमिकाएँ निभाई थीं। बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद लोग निराश थे और समय के साथ यह निराशा गुस्से में तब्दील हुई। अगस्त के दूसरे हफ्ते में इस सड़क-2 का ट्रेलर लॉन्च हुआ था, ट्रेलर जारी होने के कुछ ही समय बाद उसने dislikes का नया रिकॉर्ड बना दिया। यह शायद पहला ऐसा ट्रेलर था जो यूट्यूब पर लाइक्स के लिए नहीं बल्कि डिसलाइक्स की वजह से ट्रेंड कर रहा था। कुछ समय बाद फिल्म भी रिलीज़ हुई और उसकी IMDB रेटिंग ने भी गिरावट के कई कीर्तिमान स्थापित किए।  

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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