कॉन्ग्रेस नेता की भारत तोड़ने की इस टिप्पणी पर न्यूज एंकर और भाजपा प्रवक्ता ने तीखी प्रतिक्रियाएँ दी। उन्होंने कॉन्ग्रेस नेता कि इस भड़काऊ और विभाजनकारी टिप्पणियों के लिए काफी आलोचना की। इसके बाद ट्विटर यूजर ने भी आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि क्या कॉन्ग्रेस सच में ‘जिन्ना वाली आजादी’ चाहती है।
"1919 में दूसरे विश्व युद्ध के खत्म होने बाद अंग्रेज यह समझ गए थे कि हिंदुस्तान में उनके खिलाफ असंतोष बढ़ रहा है। ऐसे में उन्होंने रॉलेट एक्ट जैसे कानून को भारत में लागू किया। वर्ष 1919 के इस रॉलेट एक्ट और 2019 के नागरिकता संशोधन कानून को अब इतिहास के काले कानून के रूप में जाना जाएगा।"
“ये जो आप देख रहे हैं वो CAA का विरोध नहीं है। इनको दर्द है अनुच्छेद 370 का, इनको दर्द है राम मंदिर का, इनको दर्द है बालाकोट एयरस्ट्राइक का। लेकिन इतना मैं बता दूँ कि 200 रुपए के बिजली बिल के लिए अपने देश को मत नीलाम करो।"
गिरफ्तार किए गए मोहम्मद उमर, सैयद अब्दुल, फैज़ान, वासिफ और सरवर पर बाबूपुरवा और यतीमखाना में हिंसा भड़काने का आरोप है। मेरठ में हिंसा से ठीक पहले 4 खातों में 3 करोड़ रुपए डाले गए थे।
खबर है कि प्रदर्शनकारियों का एक गुट सड़क का एक हिस्सा खोले जाने के पक्ष में है। दूसरा इसका विरोध कर रहा। मतभेद उभरने के बाद एक-दूसरे पर स्टेज से चप्पलें फेंकी जाने की भी सूचना है।
फिरोज बख्त ने सीएए के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा की है। उन्होंने कहा, "मोदी और उनके साथियों सलाम कि उन्होंने ऐसे लोगों (पाकिस्तान, बांग्लादेश व अफगानिस्तान के प्रताड़ित अल्पसंख्यकों) को नागरिकता देने का निर्णय लिया है।"
आखिर हिन्दू धर्म को मानने वाला कट्टर क्यों बनना चाह रहा है? वो सोच क्या रहा है? क्या ऐसे बच्चे और भी हैं? क्या इस्लामी कट्टरपंथियों और आतंकियों के आतंक से इस समाज के बच्चे अब डरने लगे हैं?
नीरज प्रजापति की मृत्यु तब हुई जब उनके सर पर CAA के समर्थन में लोहे की रॉड से हमला किया गया। पुलिस का कहना है कि उनकी मृत्यु इस चोट की वजह से अत्यधिक खून बहने और घाव पर सेप्टिक होने से हुई।
गृहमंत्री अमित शाह ने घटना को गंभीरता से लेते हुए मामले पर दिल्ली पुलिस कमिश्नर से बात की है और कमिश्नर को कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। शाह ने ट्वीट करते हुए कहा कि सरकार इस तरह की किसी भी घटना को बर्दाश्त नहीं करेगी।
हाल ही में न्यूज़ नेशन के संपादक दीपक चौरसिया पर शाहीन बाग़ में हुए हमले के बाद दिल्ली में ही प्रदर्शनकारियों ने ज़ी न्यूज़ के पत्रकारों पर हमला कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने बैरकेडिंग तोड़कर पत्रकारों को घेरकर पीटा, यही नहीं उन्हें लात-घूँसे मारे गए।