CAA विरोध के नाम पर 15 दिसंबर को हिंसा और आगजनी हुई थी। आरोप है कि कुछ लोगों ने इसके लिए भीड़ को उकसाया था। क्राइम ब्रांच ने आशु खान और आइसा नेता चंदन कुमार को भी हाजिर होने को कहा है।
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष फैजुल हसन ने कहा कि देखना है तो मुस्लिमों का सब्र देखो। अग़र बर्बाद करने पर आए तो किसी देश को छोड़ेंगे नहीं। इतना गुस्सा है। वहीं जवाब में एक यूजर ने लिखा कि यह 1947 का हिंदुस्तान नहीं है कुचल कर रख देंगे।
छत्तीसगढ़ पुलिस ने सीएए के समर्थन में हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे 19 के खिलाफ धारा 151 के तहत कार्रवाई कर दी, हालाँकि, पुलिस ने सभी को मुचलके पर छोड़ दिया।
विहिप ने ट्वीट कर कहा है कि CAA के समर्थन में निकली रैली पर इस्लामिक जिहादियों ने ईंट-पत्थर से हमला किया। पेट्रोल बम फेंके। हिंदुओ के घरों और वाहनों के साथ महिलाओं को निशाना बनाया गया।
"तुम जो ये कर रहे हो, तुमने ये फैसला कर लिया है कि सिर्फ मुसलमानों को बदनाम करने के लिए तुम डिबेट करोगे और सरकार की जूतियाँ सीधी करोगे। मैं दीपक चौरसिया तुझे चैलेंज करता हूँ.... भ*वे पत्रकार!"
"भारत माता से आज़ादी, कश्मीर से आज़ादी एक तरह के अलगाववादी नारे हैं, जिनकी CAA के ख़िलाफ़ प्रदर्शन में कोई जगह नहीं होनी चाहिए। इस तरह के नारे देश पर सवाल खड़े करते हैं और CAA के ख़िलाफ़ चल रहे मज़बूत आंदोलन को कमज़ोर करने का काम करते।"
बेनिया बाग़ में उपद्रवियों ने गिरफ़्तार किए गए अराजक तत्वों को छुड़ाने के लिए पुलिस की नाक में दम कर दिया। पुलिस का प्रयास था कि स्थानीय लोगों को इस झड़प के कारण दिक्कत न पहुँचे। अंततः दर्जनों उपद्रवियों को पुलिस से छुड़ाने में अराजक तत्व कामयाब हुए।
"मुझे नौकरी से निकाल दिए जाने की खबर उन लोगों तक पहुँच गई, जो ऐसा चाहते थे। फिर वो लोग सोशल मीडिया पर जश्न मनाने लगे। मुझे रिजाइन करवा कर वास्तव में उस अस्पताल ने बहुत कुछ खोया है, जो पहले से ही कम स्टाफ की समस्या से गुजर रहा है।"
एससी/एसटी कमीशन के चेयरमैन ने बताया कि भारत में जिन शरणार्थियों को सीएए के तहत नागरिकता मिलने वाली है। उनमें 70 से 75 प्रतिशत दलित, ओबीसी और गरीब है। जिन्हें अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश से भगाया गया था।
पश्चिम बंगाल के बीरभूम में 20 साल की चुमकी खातून पर गाँव वालों ने हमला कर दिया। उनके घर में आग लगा दी। वहीं राजस्थान में नज़ीरान बानो पर मुस्लिम भीड़ ने उस समय हमला किया, जब वह नेशनल इकनॉमिक सेंशस 2019-2020 के लिए डेटा इकट्ठा कर रही थीं।