स्वामी की ‘legacy’ के आकलन में पार्टी, विचारधारा और निष्ठा को एक ही चीज़ मानकर देखने पर वे शायद ‘मौकापरस्त’, नज़र आएँगे। लेकिन किसी नेता को आंकने के पैमाने के तौर पर उसके कर्म उसके शब्दों से अधिक सटीक होते हैं और स्वामी को इसी कसौटी पर परखा जाना चाहिए।
झुनझुनवाला ने कहा कि मोदी के वोटर जो चाहते थे, वह सब उन्होंने किया। उनके वोटर 370 हटाना चाहते थे। उनके वोटर राम मन्दिर चाहते हैं। उन्होंने इन वादों पर काम किया है।" झुनझुनवाला ने मोदी सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का भी ज़िक्र किया।
केंद्रीय लोक निर्माण विभाग ने राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक के 2.5 किलोमीटर लम्बे राजपथ के दोनों ओर के 4 वर्ग किलोमीटर में आमूलचूल बदलाव लाने के लिए निविदा आमंत्रित की है।
वित्त मामलों की स्थायी समिति की रिपोर्ट में 1980 से लेकर साल 2010 के बीच भारतीयों द्वारा 246.48 अरब डॉलर से लेकर 490 अरब डॉलर के बीच काला धन देश के बाहर भेजने का अनुमान लगाया गया है। स्विस बैंकों से मिलने वाली जानकारियों से ऐसे लोगों पर कार्रवाई में मदद मिलेगी।
"जैसे लोकमान्य तिलक ने कहा था कि स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है, वैसे ही अब जबकि हम आज़ादी के 75 वर्षों की तरफ बढ़ रहे हैं, तो हमें कहना चाहिए कि 'सुराज्य' हमारा कर्त्तव्य है।"
नीतियाँ लम्बे समय तक के लिए होती हैं, इसलिए सरकारों को सोच समझ कर बोलना चाहिए ताकि बिजनेस करने वालों के बीच यह भरोसा रहे कि यह सरकार जो बोलती है, वो करती है। अगर नीतियाँ तीन महीने में घोषणा के बाद बदलती रहेंगी, जो कि मोदी सरकार में कई बार हो चुका है, तो इंडस्ट्री उसे सही सिग्नल नहीं मानती।
ऑक्सफोर्ड से पढ़े हुए मनमोहन सिंह अर्थव्यवस्था पर ज्ञान दिए जा रहे हैं। मनमोहन सिंह कहते हैं कि मोदी की नीतियों ने भारत को इस स्थिति में पहुँचाया है। लेकिन आँकड़े इस दावे के उलट कुछ और ही कहानी कहते हैं।
मोदी की हर वक्त आलोचना को गैर वाजिब बताने के उनके बयान को सोनिया गाँधी ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया था। इसके बाद केरल की प्रदेश कॉन्ग्रेस ने थरूर से स्पष्टीकरण माँगा और पूर्व मंत्री वीरप्पा मोइली ने उन्हें 'पब्लिसिटी का भूखा' बताया।
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने कालेधन के खिलाफ लड़ाई में इसे काफी महत्वपूर्ण कदम बताया है। दोनों देशों के बीच का यह आदान-प्रदान AEOI के तहत होगा। इससे बड़ी-बड़ी 'मछलियों' की काली कमाई का खुलासा होने की उम्मीद है।
OSD in PMO नियुक्त हुए पीके सिन्हा यूपी कैडर के अफसर हैं। अर्थशास्त्र में स्नातक और परास्नातक करने वाले सिन्हा ऊर्जा और जहाजरानी मंत्रालयों में सचिव भी रह चुके हैं। कैबिनेट सचिव के तौर पर 2017 और 2018 में एक-एक साल का विस्तार पाने के बाद जब उन्हें जून में तीसरा सेवा-विस्तार मिला तो.....