राहुल गाँधी की दादी से लेकर पिताजी तक के राजनीतिक दंभ को बिहार और यूपी ने ही चकनाचूर किया है। लेकिन विदेशी पढ़ाई के कारण शायद राहुल को इन ऐतिहासिक घटनाओं की जानकारी नहीं होगी। सामाजिक समस्याओं का राजनीतिकरण शाह बानो की तरह कहीं कॉन्ग्रेस की कब्र न खोद दे इस बार!
अमेठी के रेलवे स्टेशन परिसर में राहुल गाँधी के विरोधस्वरूप एक पोस्टर लगाया गया है। इस पोस्टर में वह आतंकी मसूद अज़हर के साथ दिख रहे हैं। पोस्टर में राहुल गाँधी को जैश सरगना का पाँव छूते हुए दिखाया गया है।
रक्षा प्रतिष्ठान के सूत्रों ने कहा कि यह फ़ैसला कितना सही और कितना गलत था- इस पर बहस हो सकती है, लेकिन किसी अधिकारी का नाम लेकर उसे कटघरे में खड़ा करना सही नहीं है। अधिकारी तो बस अपनी ड्यूटी कर रहे थे, जो सरकार द्वारा उन्हें सौंपी गई थी।
रॉबर्ट वाड्रा की तरह राहुल गाँधी भी संजय भंडारी से सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं। गाँधी परिवार का क़रीबी भंडारी एक हथियार डीलर है। राफेल सौदे के दौरान दसौं द्वारा उसे फटकार लगाई जा चुकी है।
आपको यह जान कर हैरानी होगी कि लतीफ़ को रिहा करने की माँग वही आतंकी कर रहे थे, जिन्होंने 1999 में भारतीय विमान को हाईजैक किया था। इतने खूंखार आतंकी को यूं छोड़ दिया गया जैसे कि वह कोई चोरी-चकारी का मुजरिम हो।
इस से पहले कॉन्ग्रेस नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अलक़ायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन को 'लादेन जी' कह कर सम्बोधित कर चुके हैं। इसके अलावा दिग्विजय सिंह आतंकी हाफिज सईद को 'साहब' कह कर भी सम्बोधित कर चुके हैं।
यह बात चौंकाने वाली है कि भविष्य में देश का नेतृत्व करने की इच्छा रखने वाले राहुल गाँधी को ऐसी राष्ट्रीय आपात स्थितियों के दौरान आतंकी समूहों के साथ होने वाली जटिल वार्ताओं के बारे में पूरी और सही जानकारी अब तक नहीं है।
अब राहुल गाँधी ने कुछ ऐसा किया है, जिसे जानकार आपके सामने उनके दिखावे की पोल तो खुल ही जाएगी, साथ ही यह भी पता चलेगा कि वे भारतीयता, हिंदुत्व और हमारी पूजा पद्धति से कितने अनभिज्ञ हैं।
कॉन्ग्रेस प्रवक्ता विनोद शर्मा ने कहा, “पार्टी के कार्यकर्ता भी चाहते थे कि कॉन्ग्रेस इस तरह की बयानबाजी न करे।
आम लोग चाह रहे थे कि पूरे देश के लोगों को सेना के साथ खड़ा रहना चाहिए। लेकिन दुर्भाग्यवश कॉन्ग्रेस जैसे भी हो, कहीं न कहीं गलत कदम उठा रही थी। सेना का मनोबल तोड़ने का काम कर रही थी।”