क्या तुमको सोनिया गाँधी से लगाव है, क्या तुमको राहुल गाँधी से प्रेम है, या फिर प्रियंका वाड्रा से मोहब्बत है? अगर ऐसा है भी तो उसका एक सपाट कारण बता दो कि इन लोगों का देश, समाज और अर्थव्यवस्था में क्या योगदान है जो तुम इन पर अपनी जान न्यौछावर करते हो?
कॉन्ग्रेस की यही समस्या है कि वो इतना नकारा तो चौवालीस सीट पाने के बाद भी नहीं महसूस कर पाया जितना विपक्ष में कि इतने नेताओं के महागठबंधन के बाद भी मोदी को घेरने के लिए उसके पास सिवाय अहंकार और अभिजात्य घमंड के और कुछ भी नहीं है।
आप सोच कर भी नहीं सोच पाएँगे कि अमित शाह के बाद भाजपा का अध्यक्ष कौन बनेगा, मोदी के बाद भाजपा का पीएम कौन होगा या फिर यही देख लीजिये कि अटल जी और आडवानी जी की विरासत को कौन आगे बढ़ा रहा है?
आज के समय में कॉन्ग्रेस पार्टी की सबसे बड़ी त्रासदी ये है कि उनके सबसे वरिष्ठ और 'कद्दावर पार्टी अध्यक्ष' का NDA सरकार को घेरने के लिए सबसे बड़े सबूत फोटोशॉप्ड तस्वीरें और ''किसी ने कहा है" होते हैं।
मीडिया के एक धड़े में कॉन्ग्रेस की संभावित हार को लेकर अफरा-तफरी का माहौल है। शायद इतना ‘दाँव’ पर लगा है कि अब खुलकर भाजपा को हराने की हिमायत उनकी मजबूरी है।
जैसे शेयरिंग सवारियाँ ढोने वाला ऑटो ड्राईवर, आवश्यकतानुसार ट्रैफिक पुलिस वाले की मुट्ठी गर्म कर देता है, और प्रभु का तीसरा नेत्र भी इस दुर्लभ संयोग को देखने से वंचित रह जाता है। वैसे ही मोदी ने बंद मुट्ठी करके ₹15 हजार करोड़ के दो स्पेशल नोट जूनियर अम्बानी की जेब में डाल दिया होगा।
'चौकीदार' को 'चोर' कौन कह रहा है ? वही जो '5000 करोड़ रुपए' के 'नेशनल हेराल्ड केस' में ख़ुद अपनी माताजी सहित जमानत पर चल रहा है, जिनके जीजाजी देश के सबसे बड़े 'भू-माफिया' हैं, जिनके पिताजी की 'बोफोर्स घोटाले' में संलिप्तता थी?
कॉन्ग्रेस की मानसिकता का स्तर लगातार गिरता जा रहा है जो उसकी दिमागी रूप से विक्षिप्त होने की दशा को भी उजागर करता है। सोशल मीडिया पर पुरानी तस्वीर को शेयर करना ख़ुद कॉन्ग्रेस के लिए ही भारी पड़ गया, जब लोगों ने इस पर जमकर तंज कसे।