आपने सत्ता की आलोचना को अपनी घृणा के सहारे खूब हवा दी, लेकिन आपने देश के नकारे विपक्ष और एक परिवार पर एक गहरी चुप्पी ओढ़े रखी। इसको अंग्रेज़ी में कन्विनिएंट साइलेन्स कहते हैं। यहाँ आप न्यूट्रल नहीं हो रहे, यहाँ आप जानबूझकर एक व्यक्ति का पक्ष ले रहे हैं ताकि उसकी छवि बेकार न हो।
मलाला से महिलाओं के अधिकार पर आवाज उठाने की माँग करने वाली लड़कियों के ट्विटर एकाउंट्स में अपने जननांगों की तस्वीरें भेजने वाले ये लोग पाकिस्तान और कश्मीर के युवा थे। भारतीय मीडिया गिरोह इन्हें भटके हुए युवाओं के नाम से जानता है, जो या तो किसी हेडमास्टर के बेटे निकल जाते हैं या फिर भारतीय सेना द्वारा सताए गए मजबूर युवा।
जब 6 फुट का CRPF का जवान अपने घर 200 ग्राम के मांस के बंडल में पहुँच रहा है, उसकी स्थिति को देखकर जो लोग दुखी हैं, उनको रवीश कुमार अपने प्राइम टाइम में उन्मादी बता रहे हैं। इस पर तो कुछ बोलना ही शेष नहीं रह जाता और यह वही रवीश कुमार हैं, जो JNU कांड के समय अफजल गुरु का फोटो लेकर नारे लगाने वालों के बचाव में अपनी स्क्रीन काली कर रहे थे।
फ़र्ज़ी न्यूज फैलाने में पेशेवर और स्वघोषित फ़ैक्ट-चेकर AltNews के संस्थापक प्रतीक सिन्हा ‘कमेंट’ के लिए ऑपइंडिया के CEO राहुल रोशन के पास जा पहुँचे। इस प्रतिक्रिया को प्रकाशित इसीलिए किया गया है ताकि ऐसे तत्वों को ऑपइंडिया के CEO के बयान को ग़लत ढंग से प्रचारित और प्रसारित करने का कोई अवसर न मिल सके।
इस खबर के मूल हकीक़त को परखेे बिना इसे सोशल मीडिया पर शेयर करना दिखाता है कि आजकल सोशल मीडिया का इस्तेमाल किस प्रकार फेक न्यूज को फैलाने के लिए किया जा रहा है।
कॉन्ग्रेस पार्टी में शामिल होने वाली सुप्रिया श्रीनेट द्वारा इसी हफ़्ते पत्रकारों की ‘न्यूट्रिलिटी’ और अखंडता पर सवाल उठाए थे। हाल ही में, सुप्रिया श्रीनेट ने RBI के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन का साक्षात्कार लिया था और अपने इसी शो में राहुल गाँधी के NYAY कार्यक्रम का समर्थन भी किया था।
खानदान विशेष के एहसानों और पुरस्कारों के बोझ तले दबा यह मीडिया गिरोह 2014 में सवाल नहीं पूछ पाया था, शायद तब तक कभी गाँधी परिवार ने इसे एहसास भी नहीं होने दिया था कि मीडिया का काम सवाल पूछना भी हो सकता है। सवाल पूछ पाने की यह वैचारिक क्रांति इस मीडिया गिरोह में 2014 के बाद ही देखने को मिली है।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी एक ऐसे प्रधानमंत्री थे, जो प्रधानमंत्री होने के साथ-साथ एक डेमोक्रेट भी थे, वो कम से कम लोगों की सुनते थे जबकि नरेंद्र मोदी जी शुरू से ही कॉन्ग्रेस-मुक्त भारत का सपना देख रहे हैं।
झूठ का पर्दाफाश होने के बाद भी ये उम्मीद मत रखिए कि दिल्ली के ठग और #बेगुसरायकाबकैत अपनी बेशर्मी के लिए कोई माफ़ी माँगेंगे। ये वो लोग हैं जो अपने गिरोह के लोगों या खुद की की हुई यौन शोषण, बलात्कार जैसी हरकतों पर भी चुप्पी साधते हैं।