Homeराजनीतिवीर सावरकर को भारत रत्न देने के लिए पैरवी की जरूरत नहीं: संसद में...

वीर सावरकर को भारत रत्न देने के लिए पैरवी की जरूरत नहीं: संसद में मोदी सरकार

कॉन्ग्रेस सावरकर को भारत रत्न देने के विरोध में रही है। कॉन्ग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कहा था, "अगर महात्मा गाँधी की 150 वीं वर्षगाँठ पर यह सरकार वीर सावरकर को भारत रत्न देने के बारे में सोचती है, तो मैं कह सकता हूँ कि इस देश को भगवान ही बचा सकते हैं।"

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के घोषणापत्र में बीजेपी ने स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) को भारत रत्न देने का वादा किया था। अब लोकसभा में भी सरकार ने इस पर प्रतिक्रिया दी है। गृह मंत्रालय ने लोकसभा में मंगलवार को कहा कि भारत रत्न के लिए सिफारिशें आती रहती हैं लेकिन इसके लिए किसी औपचारिक सिफारिश की जरूरत नहीं है। समय-समय पर भारत रत्न को लेकर फैसले किए जाते हैं।

बता दें कि संसद के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन मंगलवार (नवंबर 19, 2019) बीजेपी के ही एक सांसद गोपाल चिन्नया शेट्टी ने इस संबंध में सवाल पूछे। जिसके बाद गृह मंत्रालय की ओर से जवाब में ये बातें कही गई।

गौरतलब है कि भारत रत्न देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है और सरकार इसके लिए राष्ट्रपति से संस्तुति करती है। महाराष्ट्र में चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी ने घोषणा की थी कि सत्ता में आने के बाद वह वीर सावरकर के नाम की सिफारिश भारत रत्न के लिए करेगी। इसे लेकर उस समय भी काफी विवाद हुआ था।

कॉन्ग्रेस सावरकर को भारत रत्न देने की बीजेपी की माँग की निंदा कर रही थी। कॉन्ग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कहा था, “अगर महात्मा गाँधी की 150 वीं वर्षगाँठ पर यह सरकार वीर सावरकर को भारत रत्न देने के बारे में सोचती है, तो मैं कह सकता हूँ कि इस देश को भगवान ही बचा सकते हैं।”

इसके अलावा उन्होंने बीजेपी की इस माँग पर कटाक्ष करते हुए पूछा था कि वह महात्मा गाँधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को यह सम्मान देने की माँग क्यों नहीं करती? मनीष तिवारी का कहना था कि सावरकर पर महात्मा गाँधी हत्याकांड में साजिश में शामिल होने के आरोप में मुकदमा चला था। हालाँकि बाद में वह बरी हो गए थे।

यह भी पढ़ें: मुस्लिमों को 5% आरक्षण देने और सावरकर के लिए भारत रत्न की माँग छोड़ने को तैयार शिवसेना
यह भी पढ़ें: BHU में सावरकर की फोटो उखाड़ कर पोती स्याही: वामपंथी छात्र ने कहा- ‘वाह! माँ #% दी’

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी, केजरीवाल-मान-सिसोदिया के साथ तस्वीरें: कौन है AAP नेता अशोक ओझा, जो अपनी ही पार्टी के नेताओं को IB के नाम...

अशोक ओझा केवल शहर स्तर का पदाधिकारी नहीं था, बल्कि पार्टी के बड़े नेताओं के साथ सीधा संपर्क रखने वाला और संगठन में पहचान रखने वाला चेहरा था।

जनगणना में मातृभाषा का एक जवाब तय करता है देश का बजट, शिक्षा नीति और राजनीतिक प्रतिनिधित्व: जानिए उर्दू-अरबी से लेकर 19000 भाषाई पहचान...

लोकतंत्र में संख्या बल ही किसी भी भाषाई समूह की माँगों को मजबूती देता है। बहुभाषी भारत में यह जनगणना तय करती है कि आने वाले समय में सरकारी संसाधन और प्रशासनिक विकास किस दिशा में आगे बढ़ेंगे।
- विज्ञापन -