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खालिस्तानी झंडा फहराने के लिए उकसाया था, कहा था हिंसा-तोड़फोड़ करने को: सुखदेव सिंह ने पूछताछ में किए कई खुलासे

दिल्ली में ‘किसान आंदोलन’ के अंतर्गत आयोजित ट्रैक्टर रैली में गणतंत्र दिवस (जनवरी 26, 2021) के दिन जम कर हिंसा हुई थी, जिसमें 500 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। अब गिरफ्तार ‘किसान नेता’ सुखदेव सिंह ने कबूल किया है कि उसने जुगराज को लाल किला पर खालिस्तानी झंडा फहराने को कहा था। लाल किले में ही वो पहली बार दीप सिद्धू और जुगराज से मिला था। सेवादार के रूप में काम करने वाले जुगराज को पोल पर चढ़ कर झंडा फहराने का पुराना अभ्यास था।

50 हजार रुपए के इनामी सुखदेव सिंह ने ये खुलासे किए हैं। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने बताया कि करनाल निवासी 65 वर्षीय सुखदेव सिंह सिंघु सीमा पर ही छिपा हुआ था। उसने चक्का जाम आंदोलन में भी हिस्सा लिया। पुलिस को उसकी लोकेशन सिंघु सीमा से ही मिल रही थी। कुरुक्षेत्र के पास स्थित पीपली गाँव में उसकी बेटी का ससुराल है। इसके बाद वो चंडीगढ़ पहुँचा और अपने वकील से मुलाकात की।

‘अमर उजाला’ की खबर के अनुसार, वो चंडीगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर कर ये आरोप लगाना चाहता था कि दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे किसानों का बिजली-पानी कनेक्शन काट दिया गया है। लेकिन, हाईकोर्ट पहुँचने से पहले ही दिल्ली पुलिस ने औद्योगिक क्षेत्र, सेक्टर-तीन, चंडीगढ़ में रेडलाइट से उसे पकड़ लिया। लाल किले पर उसने एक बड़ी भीड़ का नेतृत्व किया था और लोगों को उकसाया भी था।

उसने कहा था कि अगर तोड़फोड़ नहीं होगी तो सरकार झुकेगी कैसे? उसने दंगाइयों को जम कर तोड़फोड़, हिंसा और खालिस्तानी झंडा फहराने के लिए उकसाया था। पूछताछ में भी उसने इन आरोपों को स्वीकार किया है। तरनतारन निवासी जुगराज वहाँ के 5 गुरुद्वारों का सेवादार है। अपराध शाखा की चाणक्यपुरी में स्थित इंटरस्टेट सेल (आईएससी) में तैनात इंस्पेक्टर नीरज चौधरी ने सुखदेव सिंह को चंडीगढ़ से गिरफ्तार किया।

सुखदेव सिंह और दीप सिद्धू की गिरफ्तारी के साथ ही गणतंत्र दिवस की हिंसा में गिरफ्तारी की कुल संख्या 128 तक पहुँच गई थी। इससे पहले दिल्ली हिंसा के मामले में पुलिस ने हरप्रीत सिंह (32), हरजीत सिंह (48) और धर्मेद्र सिंह (55) नामक तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल रिकॉर्डिग और अन्य तकनीकों का प्रयोग करते हुए पुलिस हिंसा में शामिल अन्य आरोपितों का पता लगा रही है।

128वीं गिरफ़्तारी दीप सिद्धू की हुई। उस पर पुलिस ने 1 लाख रुपए का इनाम भी रखा हुआ था। दीप सिद्धू को दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद ‘किसान आंदोलन’ में हुई हिंसा को लेकर कई राज खुलने की संभावना जताई जा रही है। पता चला था कि पंजाबी एक्टर जो भी वीडियो फेसबुक या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड करता है, उसके पीछे सिद्धू की एक बेहद करीबी महिला मित्र है।

‘किसान आंदोलन पर प्रियंका चोपड़ा खामोश क्यों?’ मिया खलीफा ने बेरूत की बर्बादी और शकीरा को किया याद

पूर्व पोर्न स्टार मिया खलीफा ने अब दिल्ली व उसके आसपास के इलाकों में चल रहे ‘किसान आंदोलन’ पर चुप्पी को लेकर प्रियंका चोपड़ा पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने प्रियंका को ‘मिस जोनास’ कह कर सम्बोधित किया और पूछा कि वो चुप क्यों हैं? मिया खलीफा ने आरोप लगाया है कि ये ठीक उसी तरह है, जैसे बेरूत की बर्बादी के समय गायिका शकीरा चुप थीं। उन्होंने कहा कि उन्हें इसे लेकर खासी उत्सुकता है।

हालाँकि, इसके बाद प्रियंका चोपड़ा के फैंस द्वारा उन्हें गुस्से का सामना करना पड़ा। फैंस ने उन्हें याद दिलाया कि ‘फैशन गर्ल’ ने दिसंबर 2020 में ही ‘किसान आंदोलन’ के सर्मथन में बयान जारी कर दिया था और यहाँ तक कि दिलजीत दोसाँझ के ट्वीट को रीट्वीट भी किया था। बता दें कि गणतंत्र दिवस के दिन हुई हिंसा पर चुप पंजाबी गायक दिलजीत ने खालिस्तानियों की निंदा करने से इनकार कर दिया। वो ट्विटर पर प्रोपेगंडा फैलाते रहते हैं।

मिया खलीफा लगातार ‘किसान आंदोलन’ पर ट्वीट कर रही हैं। उन्होंने पूछा था कि आखिर कोई ऐसा सोच भी कैसे सकता है कि सारे अंतरराष्ट्रीय सेलेब्रिटीज ने रुपए लेकर ही ‘अब तक के सबसे बड़े विरोध प्रदर्शन’ के पक्ष में ट्वीट किया है। साथ ही वो मीणा हैरिस के ट्वीट्स को भी रीट्वीट करने में लगी हुई हैं। उन्होंने भारतीय खाने के साथ तस्वीर शेयर कर के भी इस मामले में इमोशनल समर्थन लेना चाहा। हालाँकि इसके लिए उनका विरोध भी हो रहा है।

किसान संगठनों द्वारा आंदोलन में किसानों के मरने की जो खबरें फैलाई जा रही हैं, उन्हें भी मिया खलीफा जम कर आगे बढ़ा रही हैं। उन्होंने कनाडा के खालिस्तान समर्थक सांसद जगमीत सिंह को भी धन्यवाद किया। वो रुपी कौर और जगमीत के साथ अक्सर ट्विटर टैग्स में दिखती हैं। उन्होंने पूछा कि क्या UN को भी ट्वीट करने से पैसे मिल रहे हैं? साथ ही कहा कि ये भारत का आंतरिक मुद्दा नहीं है, मानवता का है।

राज्यसभा में सम्बोधन देते समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ‘FDI (फॉरेन डिस्ट्रक्टिव आइडियोलॉजी)’ के खिलाफ एकजुट होने की अपील की थी। असम में भाषण देते समय भी उन्होंने ग्रेटा थनबर्ग द्वारा लीक किए गए टूलकिट की तरफ इशारा करते हुए कहा था कि उन्होंने भारत के योग के साथ-साथ चाय को नहीं छोड़ा।

दीप सिद्धू गिरफ्तार: लाल किले हिंसा में किया था दंगाइयों का नेतृत्व, कई पुलिसकर्मी हुए थे घायल

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने लाल किला परिसर में गणतंत्र दिवस (जनवरी 26, 2021) को हुई हिंसा और पुलिसकर्मियों पर हमले वाले भीड़ का नेतृत्व करने वाले दीप सिद्धू को गिरफ्तार कर लिया है। उस पर पुलिस ने 1 लाख रुपए का इनाम भी रखा हुआ था। दीप सिद्धू को दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद ‘किसान आंदोलन’ में हुई हिंसा को लेकर कई राज खुलने की संभावना जताई जा रही है।

इससे पहले वो लगातार वीडियो के माध्यम से बयान जारी कर रहा था। पता चला था कि पंजाबी एक्टर जो भी वीडियो फेसबुक या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड करता है, उसके पीछे सिद्धू की एक बेहद करीबी महिला मित्र है। ये महिला मित्र भारत से बाहर विदेश में बैठकर सिद्धू के वीडियो अपलोड करती थी। इसके पीछे सिद्धू की चाल जाँच एजेंसियों को भटकाने की थी। वो पेशेवर अपराधियों की तरह ‘खेल’ रहा था।

मुस्लिम महिला बिना तलाक नहीं कर सकती दूसरा निकाह, मर्द कर सकता है: हाईकोर्ट की जज अलका सरीन का फैसला

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने मुस्लिम महिलाओं एवं पुरुषों के तलाक और शादी को लेकर अहम निर्णय दिया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जहाँ मुस्लिम महिलाएँ तलाक के बिना दूसरा निकाह नहीं कर सकतीं, वहीं मुस्लिम पुरुषों को तलाक के बिना दूसरा निकाह करने की अनुमति है। मुस्लिम पुरुष अपनी बीवी को तलाक दिए बिना ही एक से अधिक निकाह कर सकता है। मुस्लिम महिलाओं पर ये नियम लागू नहीं होता।

हाईकोर्ट ने कहा है कि अगर किसी मुस्लिम महिला को दूसरा निकाह करना है तो उसे मुस्लिम विवाह अधिनियम 1939 (Dissolution of Muslim Marriages Act, 1939) या मुस्लिम पर्सनल लॉ के हिसाब से सबसे पहले अपने मौजूदा शौहर से तलाक लेना पड़ेगा। ये फैसला अलका सरीन ने सुनाया। हरियाणा के मेवात स्थित नूँह के एक मुस्लिम प्रेमी जोड़े ने अदालत से सुरक्षा की माँग की थी, जिस पर ये निर्णय दिया गया।

उक्त प्रेमी जोड़े ने अदालत को बताया कि वो पहले से ही शादीशुदा हैं। मुस्लिम महिला ने आरोप लगाया कि उसका निकाह उसकी मर्जी के बिना ही कर दिया गया था, इसीलिए अब वो अपने प्रेमी से निकाह करने जा रही है। हाईकोर्ट ने कहा कि चूँकि महिला ने अपने प्रेमी के साथ निकाह से पहले अपने शौहर से तलाक नहीं लिया है, ऐसे में उसे कपल मान कर सुरक्षा नहीं दी जा सकती क्योंकि कानूनी रूप से निकाह के आधार पर सुरक्षा की माँग वैध नहीं है।

दोनों के परिजनों ने उन्हें जान से मार डालने की धमकी दी थी, जिसके बाद हाईकोर्ट ने उनसे कहा कि वो सम्बंधित जिले के एसपी के पास याचिका लेकर जाएँ और पुलिस से सुरक्षा की माँग करें। अदालत ने कहा कि जीवन को खतरा हो तो पुलिस सुरक्षा देने को बाध्य है। दोनों के परिजनों ने उन्हें परिवार और संपत्ति से भी बेदखल करने की धमकी दी है। अदालत ने उनकी सुरक्षा के बाबत कोई आदेश जारी नहीं किया।

किसानों की पहुँच सीधे बाजार तक: ‘आंदोलनजीवी’ YoYa ने वीडियो में कही थी यह बात, आज कर रहे विरोध

‘इच्छाधारी आन्दोलनजीवी’ योगेंद्र यादव आज दर्शन पाल और राकेश टिकैत जैसों के साथ मिल कर ‘किसान आंदोलन’ का चेहरा बने हुए हैं, लेकिन कभी उन्होंने इसी तरह के कृषि कानूनों को लाने की वकालत की थी, जिनका आज वो विरोध कर रहे हैं। ‘पॉलिटिकल कीड़ा’ ने एक पुराना वीडियो शेयर किया है, जिसमें ‘स्वराज अभियान’ के अध्यक्ष योगेंद्र यादव कह रहे हैं कि किसानों को सीधे बाजार तक पहुँच मिलनी चाहिए।

इस वीडियो में वो समझाते हुए कहते हैं कि बेचने वाले उत्पादक और खरीदने वाले ग्राहक के बीच फ़िलहाल 7 लेयर हैं, जिन्हें कम किया जाना चाहिए। तब उनकी माँग थी कि सरकार को बाजार को रेगुलेट करना पड़ेगा क्योंकि सारी चीजों की मार किसानों पर ही पड़ रही है। उन्होंने मौजूदा सिस्टम को ख़त्म करने की बात करते हुए बिचौलियों पर लगाम लगाने की बात कही थी। उन्होंने आशंका जताई थी कि बिचौलिए और सरकार मिले हुए हैं।

उन्होंने ये भी कहा था कि पूरा का पूरा बाजार आज उन लोगों के कब्जे में है, जो न तो उत्पादन कर रहे हैं और न ही उपयोग कर रहे हैं। उनका जोर था कि उपभोक्ता और उत्पादक दोनों को पीसने से रोका जाए।

योगेंद्र यादव ने मोदी सरकार पर ये तक आरोप लगाया था कि वो न तो उपभोक्ताओं का प्रतिनिधित्व करती है और न ही किसानों का। आज जब केंद्र सरकार ने इसी समस्या को ख़त्म करने के लिए 3 कृषि कानून लाए, तो योगेंद्र यादव उसके भी विरोध में हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिना बात हर चीज का विरोध करने वालों के लिए राज्यसभा में सोमवार (फ़रवरी 8, 2021) को ‘आन्दोलनजीवी’ शब्द का प्रयोग किया था। इसी तरह प्रशांत भूषण ने एक वीडियो रीट्वीट किया जिसमें लिखा था, “चरखी दादरी पर आज किसान आंदोलन।” प्रशांत भूषण ने इसे रीट्वीट करते हुए लिखा, “बंगाल जीतने के चक्कर में शायद भाजपा उत्तर प्रदेश खो दिया है।” जबकि ये जगह हरियाणा में है।

जमीन का पता नहीं, सोशल मीडिया में हवाबाजी की तैयारी: सिकुड़ती कॉन्ग्रेस का 5 लाख ‘वॉरियर्स’ से कितना भला?

भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस एक नया राजनीतिक पैंतरा लेकर आई है। कॉन्ग्रेस लगभग 5 लाख ‘सोशल मीडिया वॉरियर्स’ तैनात करेगी। लेकिन इस ख़बर के सामने आते ही मज़बूत सवाल खड़ा होता है, क्या राजनीतिक ज़मीन पर लड़खड़ाती कॉन्ग्रेस को ऐसे फैसलों की ज़रूरत है? हाल-फ़िलहाल की राजनीति का सबसे सरल सवाल है कि देश के कितने राज्यों में कॉन्ग्रेस की सरकार बची है। इसका जवाब कोई भी आम इंसान अपनी ऊँगलियों पर गिन सकता है। आखिर अस्तित्व के लिहाज़ से सबसे पुराना राजनीतिक दल नाकामी के इस पड़ाव पर पहुँचा कैसे? 

इस समझने के लिए 2019 के आम चुनावों में कॉन्ग्रेस के ‘वोट शेयर’ पर गौर करिए। 2014 के आम चुनाव में कॉन्ग्रेस को 44 सीटें हासिल हुई थीं और 2019 के आम चुनाव में 52। 2014 की तुलना में 2019 के दौरान सीटों की संख्या में भले नाममात्र का इज़ाफा हुआ हो, लेकिन दोनों चुनावों के दौरान कॉन्ग्रेस का वोट शेयर लगभग 19 से 20 फ़ीसदी के बीच ही रहा। 2009 के आम चुनावों में कॉन्ग्रेस को 28 फ़ीसदी वोट मिले थे और इस आँकड़ें के आधार पर एक बात स्पष्ट हो जाती है। अगर आज की तारीख में भी चुनाव होते हैं और वोट शेयर 8-10 फ़ीसदी बढ़ता है (जिसकी कोई उम्मीद नहीं दिखती) फिर भी कॉन्ग्रेस के लिए स्थिति संतोषजनक नहीं होगी। 

यह तो आम चुनावों की बात हो गई, कुछ विधानसभा चुनावों की ओर भी गौर कर लेते हैं, शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 से! यह चुनाव एक लिहाज़ से हर राजनीतिक दल के लिए नया था, महामारी के बाद होने वाला पहला चुनाव! रैलियों में सीमित भीड़, चुनाव आयोग के हिस्से की चुनौतियाँ, ऑनलाइन जनसभा और जनसंपर्क। यानी क्षेत्रीय दल से लेकर राष्ट्रीय दल तक, सभी के सामने कई चुनौतियों का स्वरूप एक जैसा था। जिस बिहार विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी 74 सीटें जीत कर दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी। ठीक उसी चुनाव में कॉन्ग्रेस महज़ 19 सीटों पर सिमट कर रह गई।  

2019 में हुआ महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव का नज़ारा भी कॉन्ग्रेस के लिए कुछ अलग नहीं था। आज भले महाराष्ट्र में शिवसेना, एनसीपी और कॉन्ग्रेस की गठबंधन सरकार है, लेकिन इस चुनाव में भी कॉन्ग्रेस का प्रदर्शन औसत से भी बदतर था। जहाँ 100 से अधिक सीटें हासिल करके भाजपा राज्य की इकलौती सबसे बड़ी पार्टी साबित हुई थी, वहीं कॉन्ग्रेस सिर्फ 44 सीटों पर सिमट कर रह गई थी। ठीक यही स्थिति बनी झारखंड के विधानसभा चुनावों में जिसमें कॉन्ग्रेस को सिर्फ 16 सीटें हासिल हुई थीं। 

इसके अलावा एक और ऐसा चुनाव है, जो फ़िलहाल लोगों के ज़ेहन में शायद उतना ताज़ा नहीं होगा लेकिन असल मायनों में इस विधानसभा चुनाव ने कॉन्ग्रेस की ज़मीन को कहीं ज़्यादा खोखला किया था। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2017 जब समाजवादी पार्टी और कॉन्ग्रेस के ‘युवा नरेश’ ने साथ चुनाव लड़ा और नतीजा ये रहा कि अखिलेश यादव से एक साल बड़े और राहुल गाँधी से एक साल छोटे आदित्यनाथ मुख्यमंत्री चुने गए। इस चुनाव में भाजपा को तीन चौथाई बहुमात हासिल हुआ था और सपा-कॉन्ग्रेस गठबंधन को सिर्फ 50 से अधिक सीटें हासिल हुई थीं। 

यह तो फिर भी आँकड़ों के आधार पर पेश की गई दलीलें हैं। इसके बाद आती हैं वो दलीलें जो तार्किक हैं और प्रासंगिक भी हैं! जितना आसान कॉन्ग्रेस शासित राज्यों को ऊँगलियों पर गिनना है, ठीक उतना ही आसान इस दल की गलतियाँ पहचानना भी है। इसकी सबसे बड़ी दो मिसाल हैं, संगठन के भीतर ‘युवा बनाम बुजुर्ग’ और ‘अध्यक्ष एक खोज’। 2018 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद कमलनाथ मुख्यमंत्री चुने गए। एक साल तक सरकार किसी तरह चली, लेकिन फिर शुरू हुआ कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच बयानबाज़ी का दौर। सिंधिया बगावती हुए और कॉन्ग्रेस की सरकार गिर गई। भले सब कुछ सही होने के अनेक दावे किए गए हों, लेकिन इस राजनीतिक उलटफेर ने कॉन्ग्रेस की बड़े पैमाने पर किरकिरी कराई। 

कुछ ही समय बाद ठीक ऐसी ही सूरत की राजनीतिक अदावत नज़र आई राजस्थान कॉन्ग्रेस में। अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच भी इतनी तीखी बयानबाज़ी हुई कि कोई सरकार के सत्ता में बने रहने को लेकर आशावादी नहीं था। कई दिनों तक चले इस सियासी खींचतान में भी कॉन्ग्रेस की बल भर किरकिरी हुई। कॉन्ग्रेस की चुनौतियाँ यहीं ख़त्म नहीं होती। वरिष्ठ और तजुर्बेकार नेताओं की सूची के बावजूद उसे पूर्णकालिक अध्यक्ष नहीं मिला है।

जमीन के साथ पहचान की संकट से जूझ रही कॉन्ग्रेस जब तक इन समस्याओं का समाधान नहीं तलाशती, सोशल मीडिया वॉरियर्स जैसे फैसलों से शायद ही उसका भला हो!

मुख्तार अंसारी बोला- हामिद अंसारी के परिवार से हूँ, यूपी मत भेजो: योगी सरकार ने कहा- गैंगस्टर की मदद कर रहा पंजाब

सुप्रीम कोर्ट में सोमवार (8 फरवरी 2021) को मऊ के बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी को पंजाब की जेल से उत्तर प्रदेश ट्रांसफर करने के मामले से जुड़ी याचिका पर सुनवाई हुई। मीडिया रिपोर्टों के अुनसार यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पंजाब की सरकार पर गैंगस्टर को बचाने का आरोप लगाया। वहीं अंसारी ने पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी और अपने परिवार का हवाला देते हुए यूपी नहीं भेजने की गुहार लगाई। मामले की अगली सुनवाई 24 फरवरी को होगी।

मुख्तार अंसारी ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी पारिवारिक पृष्ठभूमि का हवाला देते हुए कहा कि वह एक ऐसे परिवार से है, जिसके सदस्य भारत के स्वतंत्रता संग्राम का हिस्सा थे। उसने हामिद अंसारी से भी अपने संबंध का हवाला दिया।

अंसारी की याचिका में कहा गया, “प्रतिवादी ऐसे परिवार का हिस्सा है, जिसने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में बहुत बड़ा योगदान दिया है। भारत को हामिद अंसारी जैसा नेता दिया जो उपराष्ट्रपति रहे। इसके अलावा बाबा शौकतुल्ला अंसारी ओडिशा के राज्यपाल थे। माननीय न्यायमूर्ति आसिफ अंसारी इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे।”

यूपी सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि पंजाब सरकार मुख्तार अंसारी को उत्तर प्रदेश भेजने का विरोध कर रही है। पंजाब सरकार का कहना है कि मुख्तार अंसारी डिप्रेशन का शिकार है और वो कहता है कि वो स्वतंत्रता सेनानी के परिवार से है। हकीकत में वो गैंगस्टर है और उसने पंजाब में केस के लिए जमानत इसलिए नहीं लगाई क्योंकि वो वहाँ की जेल में खुश है।

उन्होंने कहा कि अंसारी के खिलाफ गंभीर आरोप हैं और मामले यूपी में पेंडिंग हैं। दो साल पहले उसे एक नाबालिग से संबंधित केस में पंजाब लाया गया था और तब से वह यहाँ के जेल में बंद हैं। उसे संबंधित मामले के मद्देनजर यूपी जेल में ट्रांसफर किया जाए। अंसारी यूपी में पेंडिंग केस में पेशी से बच रहा है।

सुप्रीम कोर्ट को सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि पंजाब सरकार कैसे अंसारी का सपोर्ट कर सकती है? पंजाब क्यों अंसारी का बचाव कर रही है? सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि अंसारी पर यूपी में गंभीर मामले दर्ज हैं और उसी में समन जारी हुआ है। 

गौरतलब है कि रूपनगर जेल में बंद बाहुबली और माफिया मुख्तार अंसारी को उत्तर प्रदेश पुलिस के हवाले करने से पंजाब सरकार मना कर चुकी है। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें कहा गया है कि मुख्तार अंसारी की गैरमौजूदगी की वजह से मामलों की सुनवाई नहीं हो पा रही है। 

योगी सरकार के मुताबिक़ कई बार गिरफ्तारी के लिए वारंट जारी किया गया, लेकिन पंजाब सरकार अब तक इस बात को टालती रही है। पंजाब सरकार स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए मुख्तार अंसारी को सौंपने में टालमटोल कर रही है। 

पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से भारतीय जनता पार्टी विधायक अलका राय ने कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा को चिट्ठी लिखकर बाहुबली मुख्तार अंसारी को बचाने का आरोप लगाया था। अलका राय, पूर्व विधायक कृष्णानंद राय की पत्नी हैं, जिनकी हत्या का आरोप मुख्तार अंसारी पर लगा था। बीजेपी विधायक अलका ने प्रियंका वाड्रा से भावनात्मक सवाल पूछा था कि उनकी सरकार हत्यारे को क्यों बचा रही है? गौरतलब है कि पंजाब में कॉन्ग्रेस की ही सरकार है।

OLX पर केजरीवाल की बेटी से ठगी, NDTV ने बताकर डिलीट मारी स्टोरी: जानिए, रिपोर्ट में क्या कुछ था

NDTV ने सोमवार (फरवरी 8, 2021) को एक रिपोर्ट पब्लिश की। इसमें मीडिया हाउस ने बताया था कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की बेटी हर्षिता केजरीवाल ने जब ऑनलाइन मार्केटप्लेस ओएलएक्स (OLX) पर सेकेंड हैंड सोफा बेचने की कोशिश की, तो एक जालसाज ने उसे 34,000 रुपए का चूना लगा दिया।

इसमें कहा गया था कि दिल्ली के सिविल लाइन्स पुलिस स्टेशन में इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई गई है और मामले की जाँच की जा रही है। लेकिन, रिपोर्ट प्रकाशित करने के कुछ मिनट बाद NDTV ने अपनी वेबसाइट से इसे हटा लिया।

NDTV deletes story about daughter of Arvind Kejriwal being duped
NDTV की रिपोर्ट, जिसे प्रकाशित होने के कुछ मिनट बाद हटा दिया गया था

NDTV ने इस स्टोरी वाली ट्वीट भी कुछ देर पहले डिलीट कर दी।

NDTV deletes story about daughter of Arvind Kejriwal being duped
NDTV का ट्वीट, जो अब डिलीट कर दिया गया है

इंडिया टीवी ने भी इस रिपोर्ट को पब्लिश किया था, लेकिन फिर बाद में डिलीट कर दिया।

इंडिया टीवी की डिलीट की गई रिपोर्ट

रिपोर्ट के अनुसार, आरोपित ने हर्षिता को 34,000 रुपए का चूना लगाया। आरोपित ने शुरू में उसका विश्वास हासिल करने के लिए हर्षिता केजरीवाल के खाते में कुछ राशि जमा की थी। बाद में, हर्षिता को भेजे गए एक क्यूआर कोड का उपयोग करते हुए, जालसाज ने उसके खाते से राशि वापस निकाल ली।

NDTV deletes story about daughter of Arvind Kejriwal being duped
NDTV की रिपोर्ट का अंश जो डिलीट कर दी गई है

दिल्ली सिविल लाइंस पुलिस ने दिल्ली के मुख्यमंत्री की बेटी की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया है और जाँच चल रही है।

यह स्पष्ट नहीं है कि NDTV ने स्टोरी क्यों हटाई। यह भी साफ नहीं हो पाया है कि यह स्टोरी झूठी थी या एनडीटीवी और अन्य मीडिया घरानों ने AAP के दबाव में रिपोर्ट हटाई है।

‘दीदी! प्लीज मत जाओ’: ट्विटर वाली महिमा कौल के इस्तीफे से ‘फूफा-फूफी’ दुखी, हैशटैग ट्रेंड कराने की होड़

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज (फरवरी 8, 2021) राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के तहत हुई चर्चा का जवाब दे रहे थे। इस दौरान उन्होंने कॉन्ग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों के लिए ‘फूफा-फूफी‘ शब्द का इस्तेमाल किया था। वे बताना चाहते थे कि जिस तरह घरों में आयोजन के वक्त कोई फूफा या फूफी नाराज हो जाती हैं, वही हाल देश के विपक्षी दलों का है। विपक्षी दलों का यही गम ट्विटर की पब्लिक पॉलिसी डायरेक्टर (भारत और दक्षिण एशिया) महिमा कौल के इस्तीफे को लेकर भी झलक रहा है।

महिमा कौल ने कथित तौर पर व्यक्तिगत वजहों इस्तीफ़ा दे दिया है। लेकिन उनके चाहने वालों पर उनकी वापसी के लिए इस कदर बेचैन हो गए कि ट्विटर पर हैशटैग #MahimaPleaseDontGo ट्रेंड कराने लगे। 

सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता पीयूष मिश्रा इस बात से बेहद निराश नज़र आए। 

उन्होंने महिमा कौल के समर्थन में हैशटैग ट्रेंड कराने की ज़िम्मेदारी उठा ली। अपने एक ट्वीट में लिखा, ‘दीदी! प्लीज़ मत जाओ’।

पीयूष मिश्रा इतने पर ही नहीं रुके, उन्होंने सीधे ट्विटर के सीईओ (CEO) जैक डोर्सी को टैग किया कि वे महिमा कौल का इस्तीफ़ा नहीं स्वीकार करें। 

फिर डिजिटल दुनिया की इस तात्कालिक क्रांति को आगे बढ़ाते हुए नज़र आए तमाम कॉन्ग्रेसी नेता।  

उन्होंने न जाने किन कारणों से गुरप्रीत वालिया नाम के व्यक्ति को टैग कर दिया, जो खुद को ‘पत्रकार’ बताता है। वह भी महिमा कौल की वापसी के लिए हैशटैग ट्रेंड कराने की कोशिश में जुटा हुआ था। 

उसने दावा किया कि ये हैशटैग उसने ही शुरू किया था और उसने अपने फॉलोवर्स से भी ऐसा करने के लिए कहा था। वालिया एक ‘पत्रकार’ है जो TV24 के लिए काम करता है। 

समाजवादी पार्टी की प्रवक्ता जूली सिंह ने भी इस पहल में अपना योगदान देने में कसर नहीं छोड़ी।   

इसी तरह आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता और स्वघोषित ‘सोशल मीडिया एक्टिविस्ट’ भी इस काम में जुट गए। हालाँकि महिमा कौल ने ऐसी किसी भी अपील पर ध्यान तक नहीं दिया। 

साल 2018 में ट्विटर के मुखिया जैक डोर्सी ने कबूला था कि उनके कर्मचारी वामपंथी विचारधारा की तरफ झुकाव रखते हैं। इसके कुछ ही हफ़्तों बाद महिमा कौल ने अपने पुराने ट्वीट डिलीट करना शुरू कर दिए थे जिसमें उनकी राजनीतिक ‘विचारधारा का झुकाव’ साफ़ नज़र आ रहा था। 

महिमा कौल के पुराने ट्वीट जो अब डिलीट किए जा चुके हैं (साभार: @iankursingh on Twitter)

ऐसे ही 2010-11 के दौरान जब नरेन्द्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, ट्विटर के एक पूर्व कर्मचारी रहील खुर्शीद ने 15 साल की लड़की का मज़ाक बनाया था। इसकी वजह ये थी कि उस लड़की की राजनीतिक विचारधारा कन्हैया कुमार के विरोध में थी और ये बात खुर्शीद को हज़म नहीं हुई।

‘तस्वीर उसकी करनी बता रही’: दिल्ली दंगों में पुलिस पर पिस्तौल तानने वाले शाहरुख को जमानत नहीं

साल 2020 में दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों के दौरान जाफराबाद में हेड कॉन्स्टेबल दीपक दहिया पर पिस्तौल तानने के आरोपित शाहरुख पठान को कड़कड़डूमा कोर्ट ने जमानत देने से इनकार कर दिया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत की कोर्ट ने आरोपित की तस्वीर उस दिन घटना में उसकी संलिप्तता और उसके व्यवहार के बारे में बताती हैं।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत की अदालत ने शाहरुख की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि आरोपित का आचरण जमानत देने लायक नहीं है। यह तीसरा मौका है जब उसकी जमानत याचिका खारिज हुई है। अभियोजन पक्ष की तरफ से पेश वकील डीके भाटिया ने जमानत अर्जी का विरोध करते हुए कोर्ट को बताया कि पिछले वर्ष 24 फरवरी को जाफराबाद मेट्रो स्टेशन और मौजपुर चौक के बीच 66 फुट रोड पर एक गुट जाम लगा रहा था। वहीं दूसरा गुट उन्हें जाम लगाने से रोकने का प्रयास कर रहा था। इसी दौरान दोनों गुट भिड़ गए थे और पथराव होने लगा था। इसी बीच कुछ लोग हवा में पिस्तौल लहराते हुए पुलिस कर्मियों पर फायरिंग करने लगे थे।

वजीराबाद पुलिस ट्रेनिंग स्कूल के हेड कॉन्स्टेबल दीपक दहिया ने बहादुरी दिखाते हुए फायरिंग कर रहे दंगाइयों को रोकने का प्रयास किया तो उन पर गोली चला दी गई। किसी तरह झुक कर उन्होंने जान बचाई। फिर भी हाथ में पिस्तौल लिए एक युवक उनकी तरफ बढ़ गया। उन्होंने बताया कि जाँच के दौरान वीडियो के जरिए हेड कॉन्स्टेबल पर पिस्तौल तानने वाले युवक की पहचान अरविंद नगर निवासी शाहरुख पठान के रूप में हुई थी। उसे शामली बस अड्डे से गिरफ्तार किया गया था।

कलीम नामक शख्स ने उसे घर में पनाह दी थी। उसे भी पुलिस ने गिरफ्तार किया था। जिस कार में शाहरुख पठान फरार हुआ था, वह कार भी शामली के कैराना से बरामद की गई थी। कोर्ट को यह भी बताया गया कि दिसंबर 2019 में शाहरुख ने मेरठ के बाबू वसीम से 35 हजार रुपए में पिस्तौल और 20 कारतूस खरीदे थे।

अभियाेजन पक्ष की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि आरोपित के परिवार का आपराधिक इतिहास रहा है। उसका पिता साबिर अली नशीले पदार्थ के साथ वर्ष 1994 व 1995 में गिरफ्तार हो चुका है। शाहरुख की अम्मी के भी ड्रग तस्करों से ताल्लुकात हैं। साथ ही मौसा भी ड्रग तस्कर है। अभियोजन पक्ष पहले ही साक्ष्य के रूप में वीडियो फुटेज, आरोपित के घर से बरामद पिस्तौल और उसके कपड़े कोर्ट में पेश कर चुका है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने आरोपित की जमानत अर्जी खारिज कर दी।

गौरतलब है कि शाहरुख पठान के खिलाफ धारा 147, 148, 149, 216, 186, 307, 353 और 34 आईपीसी और धारा 25 और 27 आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। उल्लेखनीय है कि नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और एनआरसी (NRC) के विरोध में 23 और 24 फरवरी को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के भारत दौरे से ठीक पहले उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंसा हुई थी। इस दौरान जाफराबाद-मौजपुर इलाके में लोगों को भड़काने और पुलिस पर पिस्तौल तानने के आरोपित शाहरुख को यूपी के शामली से 3 मार्च को गिरफ्तार किया गया था। 

हिंसा के दौरान शाहरुख ने जाफराबाद इलाके में 8 राउंड फायरिंग की थी। उसके पास से एक पिस्तौल तथा दो कारतूस जब्त किए गए थे। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने दिल्ली में शाहरुख के घर से पिस्टल और तीन कारतूस बरामद किए थे।