प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) ने शनिवार (दिसंबर 12, 2020) को पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के युवा नेता रऊफ शरीफ को हिरासत में ले लिया। रऊफ शरीफ देश छोड़कर भागने की फिराक में था, मगर ED ने समय रहते कार्रवाई की और उसे धर दबोचा।
केरल से हुई गिरफ्तारी
ED के सूत्रों के अनुसार, शरीफ को केरल के तिरुवनंतपुरम इंटरनेशनल एयरपोर्ट से हिरासत में लिया गया है। आरोपित पुलिस को चमका देकर फरार होने की फिराक में था, लेकिन सरकारी एजेंसी ने तत्पर कार्रवाई करते हुए उसकी इस योजना पर पानी फेर दिया।
मीडिया रिपोर्ट में ED के हवाले से कहा गया है कि शरीफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में वांछित है। आरोप है कि रऊफ शरीफ के खाते में ओमान और कतर से दो करोड़ रुपए आए थे। यह भी आरोप है कि इन पैसों का प्रयोग असामाजिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। शरीफ से पूछताछ के लिए जाँच एजेंसियों ने उसे नोटिस भी जारी किए थे लेकिन जाँच एजेंसियों के नोटिसों से खुद को बचा रहा था। वह कोरोना महामारी का बहाना बनाकर काफी समय से छिपा हुआ था।
जनपद हाथरस की दुर्भाग्यपूर्ण घटना की आड़ में दंगा भड़काने की साजिश में 05 अक्टूबर को कई लोगों को मथुरा से गिरफ्तार किया गया था। इनमें आरोपित अतीकुर्रहमान और मसूद को दंगा भड़काने की साजिश में आर्थिक मदद और संसाधन उपलब्ध कराने के लिए केरल निवासी रऊफ शरीफ की भूमिका सामने आई थी। इसके बाद लुकआउट नोटिस जारी किया गया था। रऊफ शरीफ मस्कट जाने की फिराक में था, जिसे एयरपोर्ट पर हिरासत में लिया गया है। CFI के महासचिव रउफ शरीफ पर देश-विदेश से करोड़ों रुपए की फंडिंग प्राप्त होने और उसका प्रयोग सामाजिक वैमनस्यता और दंगो को भड़काने में करने का आरोप है।
ये है हाथरस का मास्टर माइंड रऊफ़,PFI का अगुवा रऊफ़ विदेश भागते समय एयरपोर्ट से धरा गया,हुआ खुलासा,हाथरस में हुई बड़ी साज़िश,घूंघट वाली भाभी से लेकर तमाम ‘चर्चित चेहरों’ ने पढ़ी PFI की लिखी हुई स्क्रिप्ट,नफ़रत फैला प्रदेश में जातीय दंगा कराने के लिए रऊफ़ को विदेशों से मिले करोड़ों pic.twitter.com/xUM3J4elpL
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मीडिया सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी के मुताबिक उत्तर प्रदेश पुलिस को भी हाथरस मामले में उसकी तलाश है और वह उस मामले में भी वांछित है। हाथरस में हुई बड़ी साज़िश, घूँघट वाली भाभी से लेकर तमाम ‘चर्चित चेहरों’ ने PFI की लिखी हुई स्क्रिप्ट पढ़ी। प्रदेश में नफरत फैलाने और जातीय दंगा भड़काने के लिए उसे विदेशों से कोरड़ों रुपए मिले थे।
गौरतलब है कि पिछले दिनों प्रवर्तन निदेशालय ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया के नेशनल एग्जीक्यूटिव काउंसिल मेम्बर करमना अशरफ मौलवी के तिरुअनंतपुरम स्थित पूंथुरा आवास पर छापा मारा था। ईडी ने साल 2018 के दौरान पीएफ़आई के कई सदस्यों पर धन शोधन निरोधक अधिनियम (मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) के तहत मामला दर्ज किया था। इसके अलावा कोज़ीकोड़े, मल्लापुरम और एर्नाकुलम स्थित पीएफ़आई नेताओं के आवासों पर भी छापा मारा गया।
चारा घोटाला मामले में सजायाफ्ता लालू प्रसाद यादव का स्वास्थ्य कभी भी बिगड़ सकता है। लगातार उनकी किडनी की समस्या गंभीर होती जा रही है। यह जानकारी उनका इलाज कर रहे डॉक्टर उमेश प्रसाद ने दी है। डॉक्टर उमेश प्रसाद के अनुसार लालू प्रसाद यादव की किडनी सिर्फ 25 फीसदी ही काम कर रही है। जिसको लेकर फिलहाल कुछ नहीं कहा जा सकता। बता दें कि लालू फिलहाल रिम्स में भर्ती हैं और वे मधुमेह और गुर्दे की बीमारी से ग्रसित हैं।
Lalu Prasad Yadav’s kidney function can deteriorate any time. It’s difficult to predict. It is obviously alarming & I’ve given it in writing to authorities: Dr Umesh Prasad, doctor treating RJD chief Lalu Yadav who is admitted at Rajendra Institute of Medical Sciences, Ranchi pic.twitter.com/6M5GNKSAFW
उमेश प्रसाद ने शनिवार को न्यूज़ एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा, “लालू प्रसाद यादव की स्थिति गंभीर है। उनका किडनी फंक्शन कब बिगड़ेगा इस पर अनुमान लगाना मुश्किल है। उनकी स्थिति ठीक नहीं है और मैंने इसे अधिकारियों को लिखित रूप में दे दिया है।”
रिपोर्ट के अनुसार, लालू प्रसाद यादव की किडनी 25 फीसदी ही काम कर रही है। यह स्थिति अलार्मिंग इस वजह से है क्योंकि इस स्थिति में कभी भी उनके किडनी की फंक्शनिंग अचानक से बंद हो सकती है। अगले कुछ दिनों तक स्थिति ऐसी ही रही तो उन्हें डायलिसिस कराने की जरूरत पड़ सकती है।
लालू का इलाज कर रहे डॉ. उमेश प्रसाद ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से लालू प्रसाद बहुत चिंतित और परेशान हैं। उनकी किडनी 25% फंक्शन कर रही है। उन्होंने कहा कि इनकी स्वास्थ्य की जानकारी रिम्स प्रबंधन और सरकार को दे दी गई है।
डॉक्टर के मुताबिक, कुछ दिनों से लालू यादव का ब्लड शुगर भी बढ़ा है। उनके स्वास्थ्य में लगातार गिरावट हो रही है। उन्हें अच्छे इलाज की जरूरत है। उमेश यादव ने कहा कि अगर जरुरत पड़ती है तो लालू यादव के इलाज के लिए बाहर से भी डॉक्टर बुलाया जा सकता है।
जानकारी के मुताबिक, शरुआती दिनों में रिम्स में एडमिट होते वक्त लालू का किडनी 53 प्रतिशत काम कर रही थी, जिसका इलाज किया जा रहा था। लेकिन समय के साथ अब मात्र 25 प्रतिशत की किडनी काम कर रही है। जोकि गंभीर स्थिति है। बीते दो सालों में किडनी के काम करने की दरों में काफी गिरावट आई है।
सुपरस्टार रजनीकांत शनिवार (दिसंबर 12, 2020) को 70 वर्ष के हो गए और इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई क्षेत्रों की बड़ी हस्तियों ने उन्हें शुभकामनाएँ दी। रजनीकांत के करीबी कहते हैं कि वो एक आध्यात्मिक व्यक्ति हैं और अपनी फिल्मों की रिलीज से पहले हिमालय पर ज़रूर जाते हैं। और उनके इस आध्यात्मिक रुख का कारण हैं – महावतार बाबाजी; रजनीकांत की महावतार बाबाजी के प्रति श्रद्धा की बात आगे करेंगे, लेकिन पहले जान लें कि ये सिद्ध योगी आखिर हैं कौन?
न तो किसी को इनके जन्म के बारे में पता है और न ही जीवन के। कहते हैं, महावतार बाबाजी सिर्फ चुनिंदा लोगों को ही दर्शन देते हैं और अपने बारे में उतना ही बताते हैं, जितना वो दुनिया तक पहुँचाना चाहते हैं। न किसी ने उनकी तस्वीर क्लिक की है, और न ही वो प्रवचन देते हैं। लेकिन, फिर भी देश-दुनिया में उनके लाखों भक्त हैं। क्रिया-योग का जनक उन्हें ही माना जाता है। उनके चुनिंदा शिष्यों ने उनकी बात और शिक्षा दुनिया तक पहुँचाई।
योगदा आश्रम के संस्थापक स्वामी योगानंद ने अपनी पुस्तक ‘Autobiography Of a Yogi‘ में उनका जिक्र किया है। उनका कहना है कि उन्हें भी बाबाजी के दर्शन हुए और उनके कहने पर ही वो पश्चिमी जगत में उनकी शिक्षाओं को लेकर पहुँचे। उनका दर्शन करने वाले योगियों का कहना है कि बाबाजी को देश-दुनिया की पूरी खबर रहती है। कहा जाता है कि वो स्थूल शरीर में शताब्दियों से हिमालय पर ही वास कर रहे हैं।
उन्हें बद्रीनाथ के आसपास स्थित उत्तरी हिमालय पर्वत पर ही विचरते हुए देखा गया है। उनकी आध्यात्मिक अवस्था को मानवीय आकलन से परे माना जाता है। भगवद्गीता और समस्या वेद-उपनिषद में पारंगत रहे युक्तेश्वर गिरी के शब्दों में कहें तो महावतार बाबाजी कल्पनातीत हैं और सामान्य मनुष्य को तो उनकी अवस्था का ज्ञान भी नहीं हो सकता। परमहंस योगानंद कहते हैं कि जगद्गुरु शंकराचार्य और मध्ययुगीन कवि कबीर को उन्होंने ही दीक्षा दी थी।
वहीं लाहिड़ी महाशय के शब्दों में मानें तो महावतार बाबाजी का नाम लेने भर से ही व्यक्ति को तुरंत आध्यात्मिक दर्शन प्राप्त हो जाता है। वो बताते हैं कि बाबाजी अपने शिष्यों के साथ पर्वत पर भ्रमण करते रहते हैं। यहाँ तक कि उनकी मंडली में दो उन्नत अमेरिकी शिष्य भी हैं। वो एक शिखर से दूसरे शिखर तक पैदल जाते हैं और कहीं ज्यादा दिन नहीं रुकते। लाहिड़ी महाशय कहते हैं कि बाबाजी अदृश्य होकर कहीं भी जा सकते हैं, लेकिन वो ऐसा नहीं करते।
वो बताते हैं कि उनका शरीर अक्षय है और इसीलिए भोजन-पानी की ज़रूरत नहीं पड़ती। जब वो चाहते हैं, तभी उन्हें कोई पहचान पाता है कभी वो दाढ़ी-मूँछों के साथ होते हैं तो कभी इनके बिना ही। वो अपने शिष्यों से फल या चावल की खीर लौकिक शिष्टाचार के तहत खाते हैं। वहीं केवलानंद का कहना है कि उन्हें 2 बार बाबाजी मिले। उन्होंने देखा कि बाबाजी ने वैदिक होम के बीच यज्ञाग्नि से जली लकड़ी से अपने एक शिष्य के कंधे पर प्रहार किया और उसे कर्माग्नि से मुक्त कर दिया।
Rajinikanth at Dunagiri caves, also known as Mahavatar Babaji cave in Uttarakhand on his annual pilgrimage…I love his spirituality & simplicity… #offbeatukpic.twitter.com/2Bgv5tdvXZ
उन्होंने तो यहाँ तक बताया कि जब एक व्यक्ति ने उन्हें पहचान लिया था तो महावतार बाबाजी को अपना गुरु बनाने की जिद करने लगा। जब उसने पर्वत पर से कूद जाने की धमकी दी, फिर भी बाबाजी ने उसे अपना शिष्य नहीं बनाया, जिसके बाद वो सचमुच कूद गया। केवलानंद ने कहा कि आश्चर्य ये कि जब उसका शव बाबाजी के सामने लाया गया, तो उन्होंने उसे तत्क्षण जिन्दा कर दिया। साथ ही उसे ‘अमर मण्डली’ में शामिल किया।
महावतार बाबाजी से मिलने-जुलने वाले लोगों का कहना है कि वो कोई भी भाषा बोलने की क्षमता रखते हैं, लेकिन प्रायः हिंदी में ही बात करते हैं। ‘डेरा-डंडा उठाओ’ उनका पसंदीदा तकिया कलाम है और वो कहीं से भी कहीं और जाने के समय शिष्यों से यही कहते हैं। साथ ही वो अपने साथ एक डंडा भी रखते हैं। कइयों ने उनकी बहन ‘माताजी’ का भी दर्शन किया है। परमहंस योगानंद ने अपनी पुस्तक में लिखा है:
“बाबाजी के लम्बे और ओजस्वी बाल हैं, जिससे वो अपने शिष्यों से कहीं अधिक ओजस्वी और युवा दिखते हैं। एक बार ‘माताजी’ के निवेदन पर उन्होंने कहा कि वो अपने स्थूल शरीर का त्याग नहीं करेंगे और ये पृथ्वी पर कुछ लोगों के लिए दृश्यमान रहेगा। ईश्वर ने वर्तमान कल्प के अंत तक बाबाजी को पृथ्वी पर सशरीर रहने के लिए चुना हुआ है। युग पर युग आएँगे-जाएँगे, लेकिन महामृत्युंजय महागुरु यही रहेंगे, युगों के नाटक का अवलोकन करते हुए। लाहिड़ी महाशय जब अकाउंटेंट के रूप में दानापुर में कार्यरत थे, तब बाबाजी से उनकी पहली मुलाकात हुई थी। मैनेजर ने उन्हें एक तार आने के बाद रानीखेत भेजा, जहाँ सेना का नया कैम्प स्थापित होना था। वहीं पर घूमते हुए जब वो एक संत से मिलने पहुँचे, तो उन्हें ये देख कर आश्चर्य हुआ कि वो युवा संत देखने में उनके जैसा ही था।”
आश्चर्य की बात तो ये कि उन संत को लाहिड़ी महाशय का नाम याद था और उन्होंने उन्हें पुकारा भी। इसके बाद उन्होंने उनके पिछले जन्म की चीजें याद दिलाईं और साथ ही योग सिखाया। साथ ही उन्होंने पूरी प्रक्रिया के तहत उन्हें क्रिया योग की दीक्षा दी। उन्होंने लाहिड़ी महाशय को एक ऐसे महल में घुमाया, जहाँ स्वर्ण ही स्वर्ण था। इसके बाद लाहिड़ी महाशय को एक गृहस्थ योगी बनने का उन्होंने निर्देश दिया।
जब लाहिड़ी महाशय 10 दिनों के बाद कैम्प पहुँचे तो उनके साथियों ने बताया कि वो उन्हें चारों तरफ ये सोच कर खोज रहे थे कि कहीं वो खो तो नहीं गए हैं। इसके बाद मुख्यालय से एक तार आया कि उनका गलती से रानीखेत में ट्रांसफर हो गया है, उन्हें दानापुर लौटना पड़ेगा। इतना सब कुछ होने का कारण कौन था, वो समझ गए। एक बार जब उन्होंने कुछ लोगों को अपनी बात मनवाने के लिए बाबाजी को बुला लिया तो उन्होंने कहा कि वो सिर्फ सच्चे साधकों के लिए उन्हें बुलाया करें, कौतूहल शांत करने वालों के लिए नहीं।
उन्होंने अपनी मित्र मंडली को भी बाबाजी का दर्शन कराया, जो ये सब देख कर हतप्रभ थे और सोच रहे थे कि उनके देखे बिना ही कमरे में कोई कैसे घुस गया। उन्होंने इसे सम्मोहन बताया। लेकिन, बाबाजी ने सबके शरीर को स्पर्श कर अपने होने का सबूत दिया। उन्होंने हलवा बनवाया, खाया और सभी उपस्थित लोगों से बातचीत की। एक बार वो एक जटाधारी सन्यासी के सामने नतमस्तक और बर्तन माँजते हुए भी दिखे थे।
कहते हैं कि 1920 में परमहंस योगानंद को दिव्य दृष्टि में क्रिया योग की शिक्षाओं का पश्चिमी देशों में दूत नियुक्त किया गया। योगानंद जी ने ईश्वर से गहरी प्रार्थना करने का निश्चय किया, इस उद्देश्य से कि उन्हें अपने निकट आ गए महान कार्य करने के लिए ईश्वर से विश्वास और आशीर्वाद मिले। उत्तर में बाबाजी खुद योगानंद जी के सामने प्रकट हुए, उन्हें आशीर्वाद दिया और उन्हें सर्वश्रेष्ठ रक्षा का वादा दिया। बाबाजी ने योगानंद जी से कहा:
तुम वही हो जिसे मैंने क्रिया योग की शिक्षा का पश्चिमी देशों में प्रचार करने के लिए चुना हैं। बहुत पहले मैं तुम्हारे गुरु युक्तेश्वर से कुम्भ मेले में मिला था; मैंने उनसे कहा कि मैं तुम्हे उनके पास प्रशिक्षण के लिए भेजूँगा। क्रिया योग जोकि ईश्वर का बोध प्राप्त करने के लिए एक वैज्ञानिक तकनीक हैं, आखिर में सभी देशों में फैल जाएगी, और मानव के निजी, अतिश्रेष्ट परमपिता के बोध से देशों के बीच मधुर सम्बन्ध बनाने में मदद करेगी।”
हिमालय प्रवास के दौरान रजनीकांत
हिमालय पर योगदा समाज ने ध्यान और योग के लिए गुफा भी बना रखी है, जहाँ रजनीकांत जैसे सुपरस्टार भी जाते हैं। रजनीकांत अपनी हर फिल्म की रिलीज से पहले वहाँ जाया करते थे। वो पिछले वर्ष अपनी ‘काला’ फिल्म की रिलीज से पहले वहाँ गए थे। ‘बाबा’ फिल्म उन्होंने खास तौर पर महावतार बाबाजी के बारे में दुनिया को बताने के लिए बनाई थी। लेकिन, ये फिल्म चली नहीं। अपने घर में भी रजनीकांत ने उनकी स्केच तस्वीर लगा रखी है।
रजनीकांत का 1978 में ‘Autobiography Of a Yogi’ पुस्तक से परिचय हुआ था, लेकिन उन्होंने 1999 में इसे पढ़ी। उन्होंने बताया कि खराब अंग्रेजी के कारण इतना समय लगा। लेकिन, उनका कहना है कि पुस्तक पढ़ने के दौरान जैसे ही महावतार बाबाजी की तस्वीर आई, उससे एक प्रकाश पुंज निकल कर उनके भीतर जाता दिखा। उससे पहले वो अपने-आप एक खास पोजीशन में बैठ गए थे। वो कहते हैं कि ‘बाबा’ फिल्म बनाने का कारण भी यही था।
हाल ही में सुपरस्टार रजनीकांत ने राजनीति में कदम रखने की तमाम अटकलों को ख़त्म करते हुए अहम ऐलान किया था। उन्होंने कहा था कि वह 31 दिसंबर को अपने राजनीतिक दल की घोषणा करेंगे और नए साल के अवसर अपने दल को लॉन्च करेंगे। सुपरस्टार रजनीकांत का राजनीतिक दल तमिलनाडु की हर विधानसभा सीट पर चुनाव लड़ेगा। दावा किया गया है कि उनकी पार्टी सिर्फ आध्यात्मिक राजनीतिक करेगी और किसी अन्य की आलोचना नहीं करेगी।
पूरी संभावना है कि आपने बालकृष्ण शिवराम मुंजे का नाम नहीं सुना होगा। सुनेंगे भी क्यों? जो सीधे तौर पर कॉन्ग्रेस के साथ नहीं था, उस हरेक स्वतंत्रता सेनानी का नाम किराए की कलमों ने इतिहास की किताबों से मिटा दिया है। अगर एक वाक्य में उनका योगदान बताना हो तो बता दें कि पहले फिरंगी जातियों के आधार पर सेना में भर्ती लेते थे और इस व्यवस्था को हटाकर सभी की भर्ती हो सके, ये व्यवस्था बीएस मुंजे के प्रयासों से हो पाई थी। बिलासपुर के एक ब्राह्मण परिवार में 1872 में जन्मे मुंजे ने 1898 में मुंबई के ग्रांट मेडिकल कॉलेज से अपनी डॉक्टरी की पढ़ाई पूरी की थी।
ये वो दौर था जब कॉन्ग्रेस में नर्म दल और गर्म दल अलग-अलग होने लगे थे। गर्म दल का नेतृत्व लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक और बिपिनचंद्र पाल अर्थात लाल-बाल-पाल की तिकड़ी के हाथ में था। इस दौर तक दोनों कॉन्ग्रेसी धड़ों के बीच जूतेबाजी भी शुरू हो चुकी थी।
जब 1907 में सूरत में कॉन्ग्रेस पार्टी का अधिवेशन हो रहा था तो दोनों हिस्सों के बीच तल्खियाँ बढ़ गईं। इस वक्त बीएस मुंजे ने खुलकर तिलक का समर्थन किया और यही वजह रही कि तिलक के वो भविष्य में भी काफी करीबी रहे। पार्टी के लिए चंदा इकठ्ठा करने के कार्यक्रमों में वो तिलक के आदेश पर पूरे केन्द्रीय भारत में भ्रमण करते रहे।
बाद में जब राष्ट्रवाद को बढ़ावा देने के लिए लोकमान्य तिलक ने गणेश पूजा की शुरुआत की तो उसे भी मुंजे का पूरा समर्थन मिला। पंडाल लगाने, मूर्ति बैठाने और उसे विसर्जित करने तक के कार्यक्रम के जरिए लोकमान्य तिलक ने जो व्यवस्था महाराष्ट्र में शुरू की थी, उसी को वो बाद में कोलकाता भी ले गए। कोलकाता के इस अभियान में लोकमान्य तिलक के साथ बीएस मुंजे भी थे।
आज जो आप कोलकाता के दुर्गा पूजा में विशाल पंडालों, मूर्तियों इत्यादि का आयोजन देखते हैं वो 1900 के शुरुआती दशकों में रखी गई थी। जैसा कि हर सौ वर्षों में होता ही है, शताब्दी का दूसरा दशक उस समय भी हिन्दुओं के पुनःजागरण का काल था।
मोहनदास करमचंद गाँधी की ही तरह बोअर युद्ध के दौरान बीएस मुंजे भी 1899 में मेडिकल कॉर्प्स में थे। सायमन कमीशन के विरोध, रक्षा बजट का प्रावधान अलग करवाने और समाज सुधार के कार्यों में बीएस मुंजे लगातार काम करते रहे। जब लोकमान्य तिलक की मृत्यु हो गई तब वो 1920 में कॉन्ग्रेस से अलग हो गए थे।
उनकी मोहनदास करमचंद गाँधी की ‘धर्मनिरपेक्षता’ और ‘अहिंसा’ जैसे विषयों पर घोर असहमति थी। आगे चलकर करीब 65 वर्ष की आयु में उन्होंने नासिक में भोंसला मिलिट्री अकादमी की स्थापना कर डाली। ये स्कूल आज भी जाने माने विद्यालयों में से एक है। उनके द्वारा स्थापित किए हुए कई संस्थान तो अब अपनी सौवीं वर्षगाँठ के आस-पास हैं और आश्चर्य की बात कि कोई भी बंद या सरकारी मदद माँगने वाली बुरी स्थिति में नहीं पहुँचा!
कॉन्ग्रेस से दूरी बढ़ाने के वक्त भी उनकी हिन्दू महासभा से नजदीकी कम नहीं हुई। वो डॉ. हेडगेवार के राजनैतिक गुरु थे। उनकी प्रेरणा से ही डॉ. हेडगेवार ने 1925 में आरएसएस की शुरुआत की थी। डॉ. बीएस मुंजे ने 1927 में हिन्दू महासभा के प्रमुख का पदभार सँभाल लिया था और उन्होंने 1937 में ये पद विनायक दामोदर सावरकर को दिया।
सैन्य स्कूल स्थापित करने की प्रेरणा उन्हें अपनी इटली यात्रा से मिली थी, जहाँ 1931 में वो मुसोलनी से भी मिले थे। कॉन्ग्रेस के घनघोर विरोध के बाद भी वो दो बार लंदन में गोल मेज़ सभाओं में भी सम्मिलित हुए थे। अपने पूरे जीवन वो यात्राएँ ही करते रहे।
ऐसा भी नहीं है कि उनसे सलाह लेने और मानने वालों में केवल सावरकर और डॉ. हेडगेवार ही थे। जब डॉ. भीमराव राम आंबेडकर को धर्मपरिवर्तन करना था तो उन्होंने भी डॉ. मुंजे से सलाह ली और मानी थी। डॉ. मुंजे ने उन्हें अब्रह्मिक मजहबों की तरफ जाने के बदले भारतीय धर्मों की ओर जाने की सलाह दी थी।
जब सिख होने और बौद्ध धर्म अपनाने के बीच चुनना था तो अंततः डॉ. आंबेडकर ने डॉ. बीएस मुंजे की सलाह मानते हुए बौद्ध धर्म अपनाया था। अगर आपने कभी सोचा हो कि अपने समय के हर संगठन (राजनैतिक या गैर-राजनैतिक) पर अपने विचार रखने वाले डॉ. आंबेडकर की संघ से क्यों नजदीकी थी, तो ऐसा मान सकते हैं कि डॉ. बीएस मुंजे उनके बीच की कड़ी थे।
आज डॉ. बीएस मुंजे (12 दिसम्बर 1872 – 3 मार्च 1948) की जयंती है। जब सेना में बिना किसी भेदभाव के सभी को सम्मिलित होने के अधिकार की याद करें, तो डॉ. हेडगेवार के गुरूजी, डॉ. बालकृष्ण शिवराम मुंजे को भी याद कर लीजिएगा।
पश्चिम बंगाल में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के काफ़िले पर हुए पथराव को लेकर केंद्र सरकार बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल के 3 आईपीएस अधिकारियों को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर बुलाने का आदेश जारी किया है। भाजपा अध्यक्ष के काफ़िले पर गुरुवार (10 दिसंबर 2020) को हमला हुआ था जिसमें भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय समेत अन्य भाजपा नेताओं को चोटें आई थीं।
Centre recalls three IPS officers of West Bengal.
This comes in connection to the alleged attack on the BJP Chief’s convoy in WB.@Arunima24 with the details.
पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव अलापन बंद्योपाध्याय और डीजीपी वीरेंदर को इस घटना के संबंध में केंद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ से समन भेजा गया था। जिसमें इनसे यह पूछा जाएगा कि प्रदेश में जारी सिलसिलेवार राजनीतिक हिंसाओं को रोकने के लिए क्या उपाय किए गए। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने भी केंद्र को इस संबंध में रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें उन्होंने प्रदेश की क़ानून व्यवस्था को लेकर चिंता जताई थी।
गौरतलब है कि गुरुवार (दिसंबर 10, 2020) को दक्षिण 24 परगना में एक कार्यक्रम के लिए डायमंड हार्बर की ओर जाते वक़्त बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के काफिले पर हमला हुआ था। इस हमले में बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय की गाड़ी पर ईंट फेंकी गई थी। उन्होंने वीडियो साझा करते हुए पूरी घटना की सूचना दी थी।
इस घटना पर कैलाश विजयवर्गीय ने लिखा था, “बंगाल पुलिस को पहले ही राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के कार्यक्रम की जानकारी दी गई थी। लेकिन एक बार फिर बंगाल पुलिस नाकाम रही। सिराकोल बस स्टैंड के पास पुलिस के सामने ही TMC के गुंडों ने हमारे कार्यकर्ताओं को मारा और मेरी गाड़ी पर पथराव किया।”
इसके बाद प्रदेश के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने कहा था कि उन्होंने घटना के ठीक बाद मुख्य सचिव और राज्य के डीजीपी को पूरी जानकारी के लिए तलब किया था। काफिले पर हुए हमले को लेकर बंगाल पुलिस ने कहा था कि किसी को कुछ नहीं हुआ है और सभी लोग सुरक्षित हैं। इस मामले पर कार्रवाई को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के अधिकारी और पुलिस पूरी तरह निष्क्रिय है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को तीसरी बार जान से मारने की धमकी दी गई है। यह धमकी शुक्रवार (11 दिसंबर, 2020) पुलिस सेवा डॉयल 112 के व्हाट्सअप पर मिली है। इस धमकी भरे संदेश में आपत्तिजनक भाषा और गलियों का प्रयोग भी किया गया है। धमकी देने वाला शख्स आगरा का है। जिसकी जानकारी आगरा पुलिस को भी दे दी गई है।
जानकारी के मुताबिक, धमकी भरा संदेश मिलते ही यूपी-112 के प्रभारी मदन पाल सिंह ने अपने अधिकारियों को इस बारे में जानकारी दी। मदन पाल सिंह ने एफटीएफ को भी तहरीर दी है। जिसके बाद सुशांत गोल्फ सिटी थाने पर अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर किया गया।
धमकी भरे मैसेज के बाद हड़कंप मच गया है। जिस नंबर से यह मैसेज भेज गया है उसे ट्रेस किया जा रहा है। हालाँकि, शुरुआती जाँच में धमकी देने वाला शख्स आगरा का बताया गया है। पुलिस आरोपित के धर-पकड़ में जुट गई है। यूपी-112 का यह (94585 03171) व्हाट्सएप नम्बर है, जिस पर धमकी दी गई थी। बता दें कि इससे पहले भी सीएम योगी को डायल-112 के कंट्रोल रूम पर तीन बार धमकी दी जा चुकी है।
गौरतलब है कि इससे पहले सीएम योगी को 22 नवंबर 2020 की शाम को पुलिस के डायल 112 के व्हाट्सएप नंबर पर धमकी दी गई थी। साइबर सेल को फोन नंबर की जाँच में लोकेशन आगरा की मिली। इसके बाद सुशांत गोल्फ सिटी थाना प्रभारी सचिन सिंह के साथ टीम ने ग्राम अकोला थाना मांगरोल आगरा से आरोपित नाबालिग को गिरफ्तार किया था।
बता दें कि इसके पहले सात जुलाई को डायल 112 के वाट्सएप नंबर पर मुख्यमंत्री को जान से मारने की धमकी भरा मैसेज मिला। मैसेज मिलते ही पुलिस महकमा अलर्ट हो गया। छानबीन में पता चला कि धमकी भरा मैसेज कानपुर देहात से भेजा गया है। मामले में 12वीं के छात्र को पकड़ा गया। छात्र को जुवेनाइल कोर्ट के समक्ष पेश किया गया।
वहीं 21 मई, 2020 की शाम को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी। यह धमकी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को उत्तर प्रदेश- 112 के व्हाटसएप नम्बर पर दी गई थी, जिसमें कहा गया था कि उन पर बम से हमला किया जाएगा। मामले में पुलिस ने कामरान नाम के शख्स को गिरफ्तार किया। उसने पुलिस की पूछताछ में अपना जुर्म कबूल किया था। आरोपित कामरान ने कहा था कि उसने एक करोड़ रुपए मिलने के वायदे के बदले में सीएम योगी को बम से उड़ाने की धमकी दी थी।
इसके अलावा कोरोना वायरस के मद्देनजर नमाज और अजान पर निर्देशों से गुस्साए तनवीर खान नाम के एक व्यक्ति ने सोशल मीडिया पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को गोली मारने की बात कही थी। तनवीर खान ने अपने फेसबुक एकाउंट से पोस्ट किया था, “दिलदार नगर और पूरे कामसरोवर (कामसर) में अजान नहीं हो रही है। योगी को गोली मार दो…।” पोस्ट वायरल होते ही तनवीर खान ने अपना एकाउंट डिएक्टिवेट कर लिया था।
योगी सरकार में ‘ऑपरेशन नेस्तनाबूत’ के तहत हो रही ताबड़तोड़ कार्रवाईयों के चलते भू-माफिया, बाहुबलियों में खौफ पैदा हो चुका है। जिसका ताजा उदाहरण शुक्रवार (12 दिसंबर,2020) को समाजवादी पार्टी से बगावत कर भदोही से दबंग बाहुबली निर्दलीय विधायक विजय मिश्रा के साथ देखने को मिला। जिन्होंने प्रयागराज में स्थित अपने अवैध शॉपिंग कॉम्प्लेक्स पर खुद ही हथौड़ा चलावा दिया।
रिपोर्ट के अनुसार, विधायक विजय मिश्रा की प्रयागराज शहर के अल्लाहपुर इलाके में पुलिस चौकी के ठीक सामने बनी चार मजिला इमारत है। कॉम्प्लेक्स में बेसमेंट समेत नीचे की दो मंजिल पर बीस से ज्यादा दुकानें और शोरूम हैं। जबकि ऊपर की दो मंजिल पर ऑफिस और लॉज बना हुआ हैं। बिल्डिंग का विकास प्राधिकरण से सिर्फ दो मंजिल का ही नक्शा पास था, जबकि विधायक ने ऊपर की दो मंजिल अवैध तरीके से बनवाई थी।
बता दें राज्य सरकार की कुर्की से सहमे विधायक ने बिल्डिंग को पूरी तरह से ध्वस्त होने से बचाने के लिए खुद ही ऊपरी दो मंजिल को तोड़ने का ठेका दे दिया है। कहा जा रहा है कि पिछले कुछ समय में विजय मिश्रा के करोड़ों के आशियाने को जमींदोज किया जा चुका है। जिसके बाद यह अवैध 4 मंजिला कॉम्प्लेक्स सरकारी अमले की रडार पर था। जिसके मद्देनजर उन्होंने यह फैसला लिया।
विजय मिश्रा के परिजनों ने करोड़ों की इस संपत्ति को बचाने की पुरजोर कोशिश की थी। मामला कोर्ट तक गया, लेकिन अदालत से भी उन्हें किसी भी प्रकार की राहत नहीं मिली। इसके बाद विजय मिश्रा के परिवार ने हाईकोर्ट में अंडरटेकिंग देकर अवैध निर्माण को खुद ही गिराए जाने की बात कही है। तकरीबन डेढ़ दर्जन मजदूर और इंजिनियर अवैध निर्माण को गिराने में लगे हुए हैं। कहीं हथौड़े चल रहे हैं तो कहीं ड्रिल मशीन के जरिए दरवाजों और खिड़कियों को तोड़ा जा रहा है।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में माफिया, बाहुबलियों, गैंगस्टरों के खिलाफ योगी सरकार का ऑपरेशन जारी है। मुख़्तार अंसारी, अतीक अहमद और उनसे जुड़े कई गुंडे माफियाओं की बिल्डिंगों को प्रशासन द्वारा ध्वस्त किया जा चुका है। इतना ही नहीं, योगी सरकार ने अवैध निर्माण कार्यों को ढहाने में हुए खर्च भी उन्हीं लोगों से वसूल रही है। CM योगी की इस कार्रवाई का खौफ पूरे प्रदेश में साफ तौर पर देखा जा रहा है।
सोशल मीडिया पर एक ऐसा वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें ट्रैक्टर पर सवार 6 अज्ञात आरोपितों ने मंगलवार (8 दिसंबर, 2020) को स्टंट करते हुए पुलिसकर्मियों को कुचलने की कोशिश की। घटना नए कृषि कानूनों के विरोध में किसान संगठनों द्वारा घोषित भारत बंद के दिन उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के तितावी क्षेत्र में हुआ है।
खबरों के मुताबिक, अज्ञात बदमाश जुआ खेल रहे थे, जिस दौरान पुलिस अधिकारियों ने उन्हें रोका। इसके अलावा वे अपने ट्रैक्टरों पर खतरनाक स्टंट भी कर रहे थे। वीडियो में आप देख सकते है कि पुलिस ने शुरू में बदमाशों को रोकने की कोशिश की। फिर जैसे ही पुलिस के हाथ ट्रैक्टर पर बैठे 2 बदमाश लगे वैसे ही ट्रैक्टर चालक ने तेजी से ट्रैक्टर चलाकर वहाँ मौजूद पुलिसकर्मियों को कुचलने की कोशिश की। जिस दौरान पुलिस अधिकारियों ने भागकर तेज गति से आ रहे ट्रैक्टर से अपनी जान बचाई।
उत्तर प्रदेश के जिला मुजफ्फरनगर की यह वीडियो देखिए…। भारत बंद आंदोलन में किसानों ने ट्रैक्टर से स्टंटबाजी की। पुलिस ने उन्हें ऐसा करने से रोकने की कोशिश की। किसानों ने पुलिसकर्मियों पर ही ट्रैक्टर चढ़ाने का प्रयास किया। थाना तितावी में मुकदमा दर्ज। #Muzaffarnagar#Uppic.twitter.com/MESeH49Mt5
मुजफ्फरनगर पुलिस ने वीडियो का जवाब देते हुए कहा कि अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है और मामले में आगे की जाँच जारी है।
अवगत कराना है कि उक्त प्रकरण के सम्बन्ध में थाना तितावी पर CN-337/20 US-147.279.290 Ipc बनाम 5-6 व्यक्ति अज्ञात के विरुद्ध पंजीकृत किया गया है तथा थाना तितावी पुलिस द्वारा अभियुक्तों के गिरफ़्तारी के प्रयास जारी है, अभियोग की विवेचना प्रचलित है I
मुजफ्फरनगर पुलिस ने 6 आरोपितों के खिलाफ आईपीसी की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। घटना के बारे में जानकारी देते हुए एसपी अभिषेक यादव ने कहा, “पुलिस अज्ञात युवकों का पता लगाने की कोशिश कर रही है। उन्हें जल्द ही गिरफ्तार किया जाएगा और उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।”
सरकार द्वारा पारित तीन नए कृषि कानून के खिलाफ किसान नवंबर के अंत से विरोध प्रदर्शन कर रहे है। किसान तीन ऐतिहासिक कृषि कानूनों को निरस्त करने की माँग के साथ, बिचौलियों, एपीएमसी बाजारों के एकाधिकार को समाप्त करना और किसानों के जीवन को उनकी उपज के लिए उचित मूल्य निर्धारण के माध्यम से संपन्न बनाना है।
हालाँकि, सरकार द्वारा उनकी माँगों को खारिज कर दिया गया। सरकार ने आश्वासन दिया है कि वे इस विषय पर चर्चा करने के लिए तैयार है। भाजपा ने कॉन्ग्रेस और कमीशन एजेंटों पर किसानों को गुमराह करने और मंडियों के उन्मूलन के बारे में अफवाह फैलाने का आरोप लगाया था।
खालिस्तानियों और नक्सलियों द्वारा प्रदर्शन को किया गया हाइजैक
गौरतलब है कि गत गुरुवार को किसान आंदोलन के दौरान एक चौकाने वाला नजारा देखने को मिला। कृषि कानूनों के खिलाफ शिकायत के रूप में अपना विरोध शुरू करने वाले टिकरी सीमा पर प्रदर्शनकारियों ने गौतम नवलखा, सुधा भारद्वाज, वरवारा राव, आनंद तेलतुम्बडे, और दिल्ली दंगों के आरोपित उमर खालिद, शरजील इमाम, खालिद सैफी आदि लोगों की रिहाई की माँग भी शुरू कर दी।
किसान संगठन होने का दावा करने वाले भारतीय किसान यूनियन (BKU उगराह) ने मानवाधिकार दिवस पर माओवादी-नक्सलियों के साथ संबंध के आरोप में ‘गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) संशोधन विधेयक (यूएपीए) UAPA के तहत गिरफ्तार किए गए कई आरोपितों के साथ प्रदर्शनकारियों ने सरकार से हिंदू विरोधी दिल्ली दंगों के आरोपितों को रिहा करने की भी माँग की थी।
बीकेयू (उगराह) के वकील और समन्वयक एनके जीत ने कहा कि यह पहले दिन से ही उनकी माँग रही है कि जेलों में बंद मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को रिहा किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने कहा है कि शहरी नक्सलियों, कॉन्ग्रेस और खालिस्तानियों द्वारा कृषि आंदोलन को भड़काया गया है। एनके जीत ने कहा कि शहरी नक्सल लोगों पर मुकदमा चलाने का यह एक बहाना है और पंजाब में लोगों को स्टेट टेररिज्म और आतंकवादियों के बीच फंसाया जाता है जबकि नक्सलवाद ने आदिवासी लोगों को उनके अधिकार दिलाने में मदद की है।”
केरल पुलिस ने एर्नाकुलम में यूसुफ नाम के युवक को गिरफ्तार किया है। उसने अपनी गाड़ी में एक कुत्ते को बाँध कर कई किलोमीटर तक घसीटा था। घटना शुक्रवार (11 दिसंबर 2020) की सुबह लगभग 11 बजे परवुर क्षेत्र में हुई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ यूसुफ ने बर्बरता भरी घटना को इसलिए अंजाम दिया क्योंकि वह कुत्ता उस इलाके के कई कुत्तों के साथ मिल कर समस्या ‘खड़ी’ कर रहा था।
इससे नाराज युसूफ़ ने कुत्ते को अपनी गाड़ी से बाँध कर कई किलोमीटर तक घसीटने का फैसला किया। रास्ते से गुज़र रहे अखिल नाम के युवक ने पूरी घटना का वीडियो बना लिया, जिसमें आरोपित को इस निर्दयता भरी घटना को अंजाम देते हुए देखा जा सकता है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में यह भी देखा जा सकता है कि शुरुआत में कुत्ता कार की रफ़्तार के साथ-साथ भागने की पूरी कोशिश करता है। लेकिन कार की रफ़्तार बढ़ने के बाद वह थक जाता है, जिसके बाद वह कार के साथ सड़क पर घसीटता जाता है। यह देखकर अखिल ने मामले में दखल दिया। इसके बाद भी यूसुफ पूरी अकड़ में था। अखिल ने उससे पूछा, “तुम्हारी समस्या क्या है अगर यह कुत्ता मर गया तो?” अपना पक्ष कमज़ोर होने पर यूसुफ ने कुत्ते सड़क पर छोड़ दिया।
After the pregnant Elephant episode, now a dog was tied to a car and dragged for 2 Kilometres by YUSUF in KERALA
इस घटना के चश्मदीद के अनुसार, “यह एक भयावह दृश्य था। कुत्ते के गले में एक मोटी रस्सी बँधी हुई थी और उसे बेहद निर्दयता के साथ सड़क पर कई किलोमीटर तक खींचा गया।” फिर इस घटना की जानकारी पशु अधिकार संगठन DAYA को दी गई, संगठन ने यूसुफ के खिलाफ़ शिकायत दर्ज कराई जिसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया।
पुलिस ने आरोपित को भारतीय दंड संहिता की धारा 428 (जीव जंतुओं की हत्या/विकलांग बनाना), 429 (मवेशियों की हत्या/विकलांग बनाना) और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा 11 (1) के तहत गिरफ्तार किया है। फ़िलहाल कुत्ते को उपचार के लिए भेज दिया गया है।
केरल में हुई थी गर्भवती हथिनी की हत्या
जून 2020 के दौरान केरल के पलक्कड़ में एक गर्भवती हथिनी को विस्फोटक पदार्थ खिला दिया गया था जिसके ऊपर गुड़ की परत थी। इसकी वजह से उसकी मृत्यु हो गई थी और इस घटना लेकर पूरे देश में काफी आक्रोश था। हथिनी की एक तस्वीर भी सामने आई थी जिसमें वह पानी के भीतर शांति से खड़ी थी और वह विस्फोटक पदार्थ की वजह से पल-पल तड़प कर मरी थी।
इस घटना के एक आरोपित पी विल्सन को गिरफ्तार किया गया था जो कि फसलों और मसालों की खेती करने वाली कंपनी का कर्मचारी का था। इस घटना के दो अन्य संदिग्ध अब्दुल करीम और उसका बेटा रियासुद्दीन जो उस कंपनी के मालिक थे वह काफी समय तक फ़रार बताए गए थे। आरोपित ने पूछताछ के दौरान बताया था कि उन्होंने जंगली सूअरों को डराने के लिए फलों के साथ पटाखों का जाल बिछाया था, क्योंकि वे फसलों का नुकसान कर देते हैं। केरल में यह प्रक्रिया बेहद आम है जिसके तहत जंगली सूअरों को डराने के लिए फलों में पटाखे या विस्फोटक पदार्थ रखे जाते हैं।
इस्लामी कट्टरता के खिलाफ फ्रांस नया कानून बनाने जा रहा है, जिसका ड्राफ्ट वहाँ की संसद में बुधवार (दिसंबर 9, 2020) को पेश किया गया। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का कहना है कि जो कट्टर इस्लामी ताकतें देश को कमजोर कर रही हैं, ये कानून उन अलगाववादियों से निपटने के लिए है। हालाँकि, कई मानवाधिकार संगठन सक्रिय हो गए हैं और इसे भेदभाव वाला बता रहे हैं। हालाँकि, फ्रांस अपनी सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाता जा रहा है।
नए बिल के अनुसार, कोई भी बच्चा अगर 3 वर्ष का हो जाता है तो उसके बाद उसे स्कूल में भर्ती कराना ही पड़ेगा। कुछ खास मामलों में ही बच्चे को स्कूल न भेज कर घर पर ही स्कूलिंग की सुविधा देने की अनुमति प्रदान की जाएगी। कई इस्लामी कट्टरपंथी वहाँ गुपचुप मदरसे चलाते हैं और बच्चों को मुस्लिम परिवार वहीं भेज देते हैं। इसी कारण बच्चों को स्कूल जाने के लिए उम्र निर्धारित कर के इसे अनिवार्य कर दिया गया है।
इस बिल में कहा गया है कि मस्जिद प्रार्थना करने की जगह है और इसे एक धार्मिक स्थल के रूप में ही पहचाना जाना चाहिए, इसे इसी रूप में सक्रिय रहना चाहिए। फ्रांस में 2600 से भी अधिक मस्जिद हैं और वो सभी उनके एसोसिएशन के नियम-कायदों से हिसाब से संचालित किए जाते हैं। मस्जिदों की विदेशी फंडिंग पर रोक तो नहीं लगाई गई है, लेकिन अब गुपचुप तरीके से ये नहीं चलेगा। 10,000 यूरो (8.93 लाख रुपए) से ज्यादा की फंडिंग पर एक-एक पाई का हिसाब देना होगा।
फ्रांस में मुस्लिम समुदाय के लोग निकाह से पहले अक्सर लड़की के ‘वर्जिनिटी सर्टिफिकेट’ माँगते हैं, जिसे किसी डॉक्टर से बनवाया जाता है। अब ऐसा करने पर 1 साल की जेल की सजा का प्रावधान किया गया है। साथ ही किसी युवा महिला का ‘वर्जिनिटी सर्टिफिकेट’ बनाने पर जुर्माना भी लगेगा। अब मुस्लिम संगठनों ने इस प्रतिबन्ध के खिलाफ तर्क देते हुए कहा है कि ये हिंसा झेलने वाली महिलाओं के विरुद्ध होगा।
साथ ही जबरन निकाह को लेकर भी प्रावधान है। अब कपल को सम्बंधित अधिकारी के समक्ष एक इंटरव्यू के लिए बैठना होगा, जिसके बाद इसकी पुष्टि की जाएगी कि ये शादी सहमति से हो रही है। अगर अधिकारियों को जरा भी शक होता है तो वो प्रॉसिक्यूटर को बताएँगे, जो इस शादी पर रोक लगा सकता है। फ्रेंच रेसिडेंस कार्ड लेकर बहुविवाह पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। एक से ज्यादा पत्नी नहीं रख सकते हैं।
ANALYSIS: What is actually contained in France’s new law against Islamic extremism? https://t.co/WrnzTvrA6A
फ्रांस में एक कट्टरपंथी द्वारा शिक्षक सैमुअल पैटी की हत्या के बाद से ही वहाँ की सरकार इस्लामी कट्टरता को लेकर सजग है। इस कानून के लागू होने के बाद जज को ये अधिकार होगा कि वो आतंकवाद, भेदभाव, घृणा या हिंसा के आरोपित को मस्जिद में जाने से रोके। महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग स्विमिंग पूल वाले नियम को भी हटाया जाएगा। बच्चों को मस्जिद में नहीं पढ़ाया जा सकेगा।
पिछले 8 वर्षों में फ्रांस में 30 से भी अधिक इस्लामी हमले हुए हैं, इसी कारण इस कानून को लाया गया है। इसके लिए उदारवादी मुस्लिम नेताओं के साथ विचार-विमर्श भी किया गया। सभी धार्मिक स्थलों को ‘गणतांत्रिक मूल्यों’ के पालन वाले दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने होंगे। फ्रांस की स्थानीय मीडिया के अनुसार, वहाँ के अधिकतर मुस्लिम इस्लामी किताबों को देश के कानून से ऊपर मानते हैं, इसीलिए कड़े प्रावधान किए जा रहे हैं।
हाल ही में सैमुअल पैटी के हत्यारे अब्दुल्लाख को उसके गृह क्षेत्र चेचन्या में दफ़न किया गया है, जहाँ उसे पूरा हीरो वाला सम्मान दिया गया। सैकड़ों लोगों ने उसके जनाजे में भाग लिया और मुस्लिम भीड़ ने ‘इस्लाम का शेर’ के नारे लगाए। उसके सम्मान में गाने गाए गए। उसके गाँव शालाजी में ग्रामीणों ने उसके सम्मान में कार्यक्रम किए और अपने गाँव के इस्लामी रीति-रिवाजों के साथ दफ़न किया। भारी बर्फबारी के बावजूद 200 लोगों ने उसके अंतिम-संस्कार में हिस्सा लिया।