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जिस क्लब से एकनाथ शिंदे को कहा ‘गद्दार’, वहाँ पहुँच गया BMC का ‘हथौड़ा’: बोले नीतेश राणे- हमें कुणाल कामरा जहाँ भी मिलेगा, हम उसकी धुलाई करेंगे

बृहन्मुंबई नगर पालिका (BMC) के कर्मचारी मुंबई के हैबिटेट क्लब में हथौड़े लेकर गए हैं। हैबिटेट क्लब में ही कॉमेडियन कुणाल कामरा ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का मजाक उड़ाया था। हैबिटेट क्लब में तोड़फोड़ की कार्रवाई की बात भी सामने आई है।

सोमवार (24 मार्च, 2025) को BMC के कर्मचारी हैबिटेट क्लब पहुँचे हैं। उनके साथ बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी भी मौजूद थे। यह क्लब यूनीकॉन्टिनेंटल होटल में मौजूद है। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि BMC अधिकारियों ने इसके अंदर कुछ हिस्सों में तोड़ने की कार्रवाई की है।

हैबिटेट क्लब में इससे पहले सोमवार रात में ही शिवसेना के कार्यकर्ता पहुँचे थे। उन्होंने यहाँ कुर्सियाँ तोड़ी थी और कुछ सामान को भी नुकसान पहुँचाया था। इसके वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे। हैबिटेट क्लब ने तोड़फोड़ के बाद एक बयान भी जारी किया है।

हैबिटेट क्लब ने कामरा के वीडियो पर माफी माँगी है और बताया है कि वह इसमें किसी भी तरह नहीं जुड़ा हुआ था। हैबिटेट क्लब ने एक दूसरे बयान में कहा है कि वह तोड़फोड़ की घटना से हैरान हैं और अस्थायी रूप से काम बंद कर रहे हैं।

हैबिटेट ने स्पष्ट किया है कि वह किसी भी कलाकार की प्रस्तुति का हिस्सा नहीं होते। हैबिटेट ने कलाकारों और बाकी लोगों से सुझाव भी माँगे हैं। इस बीच कुणाल कामरा को लेकर भाजपा नेता नीतेश राणे ने बयान दिया है। नीतेश राणे ने कहा है कि कुणाल कामरा जहाँ मिलेगा, वहाँ उसको पीटा जाएगा।

इससे पहले शिवसेना नेता संजय निरुपम ने कुणाल कामरा की ‘धुलाई’ करने की बात कही थी। कुणाल कामरा पर इस मामले में एक FIR भी दर्ज की गई है। कामरा को मुंबई पुलिस पूछताछ के लिए बुला चुकी है। कामरा को लेकर शिंकजा कसता जा रहा है।

गौरतलब है कि रविवार (23 मार्च, 2025) को मुंबई में एक लाइव कार्यक्रम के दौरान कुणाल कामरा ने एकनाथ शिंदे को ‘गद्दार’ बताया था और उन पर एक अपमानजनक गाना गया था। उन्होंने एकनाथ शिंदे को रिक्शावाला बताया और कहा कि अगर उनकी नजर से देखा जाए तो शिंदे गद्दार नजर आएँगे।

कामरा ने कहा था कि एकनाथ शिंदे ने जिस थाली में खाया उसी में छेद किया। कामरा ने यह भी दावा किया कि एकनाथ शिंदे ने ‘बाप चुराया है।’ उनका इशारा बालासाहेब ठाकरे की तरफ था। गौरतलब है कि एकनाथ शिंदे लगातार बालासाहेब की राजनीति के आदर्शों से समझौता करने का आरोप उद्धव ठाकरे पर लगाते हैं।

कुणाल कामरा ने एकनाथ शिंदे के विरुद्ध बनाए गए इस वीडियो को सोशल मीडिया पर भी अपलोड कर दिया। 2 मिनट के इस वीडियो के सामने आने के बाद शिवसेना कार्यकर्ताओं में गुस्सा भर गया। अब कुणाल कामरा पर कार्रवाई की माँग हो रही है।

शारिक साठा ने दिए हथियार, मुल्ला अफरोज-वारिस की गोलियों से मरे 4… ‘मियाँ’ जफर अली तो खेलेगा ही ‘विक्टिम कार्ड’, पर आप जान लीजिए संभल में हुई मौतों का सच

संभल में विवादित जामा मस्जिद के सदर जफर अली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। जफर अली पर आरोप है कि उसने जामा मस्जिद हिंसा के बाद पुलिस पर फर्जी आरोप लगाए और कोई सबूत पेश करने में विफल रहा। उस पर हिंसा भड़काने का भी आरोप है। गिरफ्तारी के बाद जफर अली ने ‘विक्टिम कार्ड’ खेलना चालू कर दिया है। जफर अली ने दावा किया है कि हिंसा में मारे गए लड़कों की हत्या पुलिसकर्मियों ने की है। हालाँकि, पुलिस पहले ही इन हत्याओं के आरोपित पकड़ चुकी है।

संभल में उस दिन क्या हुआ था?

संभल में 24 नवम्बर, 2024 को हिन्दू पक्ष की एक टीम कोर्ट के आदेश के बाद विवादित जामा मस्जिद का सर्वे करने के लिए पहुँची थी। इस टीम में वकील विष्णु शंकर जैन भी शामिल थे। यह टीम इससे पहले 19 नवम्बर, 2024 को गई थी लेकिन तब मुस्लिमों के हँगामे के चलते सर्वे पूरा नहीं हो पाया था।

यह सर्वे हिन्दू पक्ष की याचिका के बाद हो रहा था, जिसमें कहा गया था कि जामा मस्जिद को हिन्दू हरिहर मंदिर तोड़ कर बनाया गया था। 24 नवम्बर को जब यह टीम संभल पहुँची तो यहाँ हिंसा भड़क गई। मुस्लिम दंगाइयों ने मस्जिद के आसपास के इलाकों में पुलिस को निशाने पर लिया।

मुस्लिमों ने खूब पत्थर बरसाए और पुलिस पर गोलियाँ भी चलाई। इस पथराव के दौरान मुस्लिम दंगाइयों ने पुलिसवालों को गालियाँ भी दी। उनके हथियार छीनने का भी प्रयास किया गया। यह भीड़ मस्जिद का सर्वे करने आई टीम को भी निशाना बनाना चाहती थी।

इस हिंसा के दौरान हुई फायरिंग में 4 मुस्लिम लड़कों की मौत हो गई थी। हिंसा में संभल के CO अनुज चौधरी को भी गोली लगी थी। वह भी घायल हो गए थे। उनके साथ ही कई और कई पुलिसवाले गंभीर रूप से घायल हुए। इस दंगे के बाद पुलिस ने जाँच में सच बाहर निकाला।

जाँच में क्या सामने आया?

संभल में हुई हिंसा के बाद पुलिस को पता चला था कि इसकी प्लानिंग पहले ही हो गई थी। पुलिस पर हमला करने और गोलियाँ चलाने का प्लान दुबई में रहने वाले शारिक साठा ने रचा था। साठा संभल का ही रहने वाला है और भारत में गाड़ियाँ चुराता था। उसको दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था लेकिन वह बाद में दुबई भाग गया था।

साठा वर्तमान में ISI के साथ काम करता था है। वह अब जाली नोट और हवाला का धंधा करता है। संभल में सर्वे की बात सामने के आने के बाद शारिक साठा ने अपने गुर्गे मुल्ला अफरोज को हथियार दिए थे, जो उसने बाकी लड़कों में बाँटे थे। शारिक साठा ने पाकिस्तानी गोलियाँ भी संभल में भेजी थीं। पुलिस को यह गोलियाँ हिंसा वाली जगह से बरामद हुई थीं।

शारिक साठा ने 10-20 नेताओं को संभल में मारने का प्लान तैयार किया था। उसी के दिए हथियारों से संभल में फायरिंग हुई। इस फायरिंग में 4 लड़कों की मौत हुई। पुलिस ने जाँच करके हत्या करने वाले मुल्ला अफरोज और वारिस को पकड़ा था।

संभल हिंसा में 4 मौतें, 2 को मुल्ला अफरोज- 2 को वारिस ने मारी गोली

सामने आया था कि हिंसा के दौरान मुल्ला अफरोज ने पुलिस को निशाना बनाया लेकिन भगदड़ मचने के कारण यह गोली बिलाल और अयान को लग गई और वह मौके पर ही मारे गए। इस हत्या के लिए उसने 32 बोर का एक हथियार उपयोग किया था। इसके बाद वह छिप गया था। 

वहीं एक और दंगाई वारिस की गोली से नईम और कैफ की मौत हो गई थी। इन हत्याओं के मामले में अब इन आरोपितों पर मुकदमा चल रहा है। यह पुलिस स्पष्ट कर चुकी है। हालाँकि जफर अली अपना प्रोपेगेंडा चलाने और गिरफ्तारी से बचने के लिए पुलिस को दोषी ठहरा रहा है।

पहले भी कर चुका यही दावा

संभल हिंसा भड़काने का आरोपित जफर अली पहले भी पुलिस पर फर्जी आरोप जड़ चुका है। उसने हिंसा के एक दिन बाद (25 नवम्बर, 2024) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके दावा किया था कि हिंसा में मारे गए लड़कों पर पुलिस ने गोली चलाई थी। पुलिस ने अब इस मामले में जफर अली पर फर्जी आरोप लगाने का मामला दर्ज किया है, जिसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया है।

यह भी आरोप लगा है कि वह जामा मस्जिद के नाम पर पैसा इकट्ठा कर रहा है। इसके लिए एक QR कोड भी फैलाया जा रहा है। हालाँकि, इस पर अभी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं सामने आई है। पुलिस अब आगे जफर अली पर कार्रवाई कर रही है।

कंप्यूटर शॉप की आड़ में बांग्लादेशियों को बसाने का गैंग चला रहा था मोहम्मद मोइनुद्दीन, कागज से लेकर बीवी तक सब कुछ घुसपैठियों को मिलता था: दिल्ली पुलिस ने किया पर्दाफाश

बांग्लादेशी घुसपैठियों के बच्चे भारत में EWS कोटा का लाभ उठा रहे हैं। घुसपैठिए बांग्लादेश से एक-एक कर यहाँ अपने परिवार के लोगों को बुलाते हैं। कुछ ने तो भारतीय महिलाओं से निकाह तक कर लिया है। यह सारे खुलासे हाल ही में दिल्ली से पकड़े गए बांग्लादेशी घुसपैठियों ने किए हैं।

दिल्ली पुलिस ने 18 बांग्लादेशी घुसपैठिए पकड़े हैं। इन बांग्लादेशी घुसपैठियों को भारत में बसाने में मदद करने वाले 8 भारतीय भी गिरफ्तार किए गए हैं। ये बांग्लादेशी घुसपैठियों को भारत में कागज दिलाने से लेकर उनको नौकरी दिलाने तक का काम करता था। दिल्ली और असम से अब घुसपैठियों को डिपोर्ट करने का भी काम चालू कर दिया गया है।

कागज-नौकरी के लिए मुस्लिमों का गैंग करता था मदद

यह बांग्लादेशी भारत में फर्जी कागजों के सहारे रह रहे थे। इनको भारत में बसाने का काम भारतीय ही कर रहे थे। इस गैंग का सरगना मोहम्मद मोइनुद्दीन है। उसकी दिल्ली के अमीर खुसरो नगर में कंप्यूटर शॉप थी जिससे वह बांग्लादेशियों के लिए फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाता था।

दिल्ली पुलिस के डीसीपी ने अंकित चौहान ने बताया कि इस रैकेट में दिल्ली के पुल प्रहलादपुर से जुल्फिकार अंसारी, फरमान खान और यूपी के बुलंदशहर से जावेद को गिरफ्तार किया गया है। जुल्फिकार, फरमान और जावेद फर्जी आधार कार्ड बनाते थे। बांग्लादेशियों का आधार कार्ड बनाने में ये मोईनुद्दीन द्वारा बनाए गए फर्जी जन्म प्रमाण पत्र का उपयोग करते थे।

इन बांग्लादेशी घुसपैठियों के फर्जी कागज बनवाने के अलावा इन्हें नौकरी दिलाने में भी यह गैंग मदद करता था। बांग्लादेशी घुसपैठियों को मोहम्मद शाहीन छोटी-मोटी नौकरी दिलाता था। इस पूरे सिंडिकेट के लिए पैसे का लेन-देन निजामुद्दीन में रहने वाला भारतीय युवक मनवर हुसैन करता था।

मनवर हुसैन कूड़ा बीनने वाले, कबाड़ी वाले, मजदूर जैसे अवैध बांग्लादेशियों से पैसे लेकर फॉरेक्स एजेंट को भेजता था, इसके बाद यह बांग्लादेश तक पहुँचाए जाते थे। डीसीपी चौहान ने बताया है कि मनवर की तरफ से UPI किए गए पैसे बांग्लादेश के बशीरहाट में फॉरेक्स एजेंट निमाई करमाकर और गौरांग दत्ता तक जाते थे।

यह दोनों जमा हुई पूरी रकम को हवाला जैसे अन्य माध्यमों से भी घुसपैठियों के रिश्तेदारों तक पैसे पहुँचा देते थे। दिल्ली पुलिस ने बंगलादेशी घुसपैठियों से 23 वोटर कार्ड, 19 पैन कार्ड, 17 आधार कार्ड, 11 जन्म प्रमाण पत्र और छह सादे वोटर कार्ड कब्जे में लिया है।

भारतीय महिलाओं से निकाह भी कर लिया

रिपोर्ट्स के अनुसार, कई घुसपैठियों ने यहाँ भारतीय महिलाओं से शादी भी कर ली है और उनके बच्चे भी स्थानीय स्कूलों में पढ़ते हैं। यहाँ तक कि घुसपैठियों के बच्चे EWS कोटा का फायदा भी उठा रहे हैं। एक बांग्लादेशी घुसपैठिए ने एयरलाइन में नौकरी तक ले ली थी।

दिल्ली में पकड़े गए बांग्लादेशी घुसपैठिए एक-एक कर भारत आते गए। पुलिस ने बताया है कि बांग्लादेश से 2007 में मोहम्मद आलमगीर भारत आया। यहाँ उसने एक भारतीय महिला से निकाह किया। उसके 13 और 9 साल के दो बच्चे हैं।

उसका भाई मोहम्मद जुवेल 2021 में आया। इसके अलावा मोहम्मद लतीफ खान 2015 में, नदीम शेख 2021 में, मिजानुर रहमान और रबिउल 2022 में एवं कमरुज्जमान 2014 में भारत आए। इन सब में सबसे अधिक समय तक भारत में रहने वाला मोहम्मद रेजाउल है जो 2000 में आया था।

वह बीते दो साल में 22 बार बांग्लादेश का चक्कर लगा चुका है। वहीं दिल्ली पुलिस ने बताया है कि उसने पहले गिरफ्तार किए गए 6 बांग्लादेशी घुसपैठियों को वापस बांग्लादेश डिपोर्ट कर दिया है। इसके अलावा 4 और बांग्लादेशी घुसपैठियों की जाँच की जा रही है, यह जाँच पूरी होने के बाद इन्हें भी बांग्लादेश वापस भेज दिए जाएँगे।

असम से भी 13 डिपोर्ट

दिल्ली के अलावा असम में भी बांग्लादेशी घुसपैठियों की धर-पकड़ तेजी से की जा रही है। शुक्रवार (21 मार्च, 2025) को असम सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि असम के माटिया ट्रांसिट कैंप में हिरासत में लिये गए 63 में से 13 बांग्लादेशी घुसपैठियों को वापस भेज दिया गया है।

बाकी 50 बांग्लादेशी घुसपैठियों के कागज जाँचे जा रहे हैं। इससे पहले 4 फरवरी, 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने असम सरकार से ट्रांजिट कैंप में रखे गए 63 लोगों को लेकर एक्शन ना लिए जाने को लेकर सवाल किया था।

ST छात्रों ने ‘स्टेटस’ पर लगाई शिवाजी महाराज की फोटो, पुलिस अधिकारी ने बेरहमी से पीटा: महाराष्ट्र के अकोला में बवाल, हिंदू संगठन सड़क पर उतर बोले- हमारे युवाओं को बनाया जा रहा निशाना

महाराष्ट्र के अकोला जिले के बालापुर तालुका के लोहरा गाँव में एक दुखद घटना सामने आई है, जिसमें दो जनजातीय छात्र- प्रशांत ढेले और आनंद इंगले, को एक सहायक पुलिस इंस्पेक्टर द्वारा बेरहमी से पीटा गया। घटना 21 मार्च 2025 सुबह लगभग 7 बजे हुई। छात्रों की गलती बस इतनी थी कि उन्होंने व्हाट्सएप पर छत्रपति शिवाजी महाराज की तलवार संभाले एक तस्वीर साझा की थी। इसी स्टेटस पर नाराजगी जताते हुए इंस्पेक्टर गोपाल धोले, जो उरला पुलिस थाना में तैनात हैं, ने बिना किसी पूर्व चेतावनी के दोनों छात्रों को बुलाकर बुरी तरह पीटा।

स्थानीय समाचार पत्र ‘अजिंक्य भारत’ के अनुसार, पुलिस अधिकारी ने छात्रों पर डंडे से वार किया, जिसके चलते छात्रों को गंभीर चोटें आई। घटना के तुरंत बाद घायल छात्रों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ उनका इलाज जारी है। वहीं, छात्रों के माता-पिता और गाँव के लोग इस घटना से रोष में हैं।

बता दें कि घटना की सूचना मिलते ही लोहरा गाँव के करीब 50 से अधिक ग्रामीण मिलकर अकोला के एसपी कार्यालय पहुँचे। वहाँ उपस्थित लोगों ने इंस्पेक्टर धोले के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और तत्काल सस्पेंड करने की माँग करते हुए शिकायत दर्ज कराई है। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस की यह कार्रवाई न सिर्फ अवैध है बल्कि पुलिस की ओर से अपनी शक्ति का दुरुपयोग भी है।

स्थानीय हिंदू समाज के एक प्रमुख समूह, सकाल हिंदू समाज’ ने भी एसपी कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। वहाँ मौजूद हिंदू कार्यकर्ता राजीत गवांडे ने कहा, “यह अत्यंत निंदनीय है कि पुलिस अधिकारी हिंदू युवाओं को निशाना बना रहे हैं और उन्हें इस तरह बेरहमी से पीट रहे हैं। यदि इंस्पेक्टर धोले में इतनी हिम्मत है, तो वह अपने क्षेत्र में चल रहे अवैध रैकट और कसाईखानों को बंद करने का साहस भी दिखा सकते हैं।” उनके इस बयान से स्थानीय लोगों में नाराजगी और बढ़ गई है।

घटना को लेकर सोशल मीडिया पर भी विरोध जताया जा रहा है। इस पूरे मामले ने न केवल स्थानीय लोगों के बीच गहरी नाराजगी पैदा की है, बल्कि पूरे राज्य में पुलिस बल के दुरुपयोग को लेकर प्रश्न उठने लगे हैं। कई राजनीतिक और सामाजिक दल इस घटना की कड़ी निंदा कर रहे हैं। स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग से माँग की जा रही है कि वे इस मामले की निष्पक्ष जाँच करें और दोषियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करें ताकि आम जनता का विश्वास फिर से बहाल हो सके।

नागपुर दंगे के साजिशकर्ता फहीम खान के घर पर चला बुलडोजर, बिना नक्शा पास करवाए खड़ी की थी इमारत: मुस्लिम भीड़ इकट्ठा कर बोला था- किसी भी हिंदू को छोड़ेंगे नहीं

नागपुर दंगों के मुख्य आरोपित फहीम शमीम खान का घर अवैध पाया गया है। उसके घर पर प्रशासन ने बुलडोजर कार्रवाई चालू कर दी है। फहीम खान नागपुर में दंगे के लिए भीड़ इकट्ठा करने और भड़काऊ भाषण देकर पथराव-हिंसा करवाने का आरोपित है।

इस मामले में नागपुर नगर निगम की टीम सोमवार (24 मार्च, 2025) को उसके घर पर पहुँची है। नगर निगम के साथ पुलिस की टीम भी मौजूद है। यहाँ पुलिस ने बुलडोजर लगा कर उसके घर को गिराना चालू कर दिया है। फहीम खान वर्तमान में जेल में बंद है।

फहीम खान के अवैध घर को इससे पहले हटाने की नोटिस दी गई थी। हालाँकि, फहीम खान के परिवार ने इसे खुद नहीं तोड़ा। 20 मार्च, 2025 को नागपुर नगर निगम की एक टीम ने उसके घर का सर्वे किया था। टीम ने बताया था कि फहीम खान का घर बनाने के लिए कोई भी नक्शा नहीं पास करवाया गया था।

यह घर फहीम खान की पत्नी ज़हरुन्निशा के नाम पर बना है और लगभग 950 स्क्वायर फीट में फैला हुआ है। इस घर में दो मंजिले हैं। यह भी सामने आया है कि उसके अवैध निर्माण के विरुद्ध पहले भी शिकायतें की गई थीं, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई थी।

अब उसके घर को नगर निगम गिरा रहा है। इससे पहले नगर निगम ने नागपुर में दंगा करने वालों की दो दुकानें भी सीज कर दी थी। पुलिस को पता चला था कि यह दुकानें दंगे के दौरान इस्तेमाल की गई थीं। यह दंगा करने वाले भी फहीम के करीबी थे।

गौरतलब है कि फहीम खान ने सोमवार (17 मार्च, 2025) को नागपुर में मुस्लिमों को इकट्ठा किया था। इसके बाद उसने इनको भड़काने के लिए एक बयान दिया था। उसने पुलिस पर हिन्दुओं की मदद करने के आरोप लगाए थे और कहा था किसी को छोड़ना नहीं है।

इसके बाद मुस्लिम भीड़ ने नागपुर में खूब उत्पात मचाया था। इस दंगे में 70 लोग घायल हो गए थे। इसमें 30 से अधिक पुलिसकर्मी थे। दंगाइयों ने 50 से अधिक गाड़ियों को जला दिया था। उन्होंने एक DCP को कुल्हाड़ी मार दी थी। एक महिला पुलिसकर्मी से छेड़छाड़ की थी।

दंगे का मास्टरमाइंड फहीम खान अल्पसंख्यक डेमोक्रेटिक पार्टी’ का अध्यक्ष है। उसने 2024 में लोकसभा चुनाव लड़ा था। वह नागपुर से केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी के खिलाफ चुनाव में उतरा था और बुरी तरह हार गया था। फहीम खान नागपुर के संजय नगर का रहने वाला है और CCTV मरम्मत करने का काम करता है।

अब उसके खिला राजद्रोह का मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने अब तक इस मामले में 100 से अधिक दंगाइयों को गिरफ्तार किया है। कई विवादित पोस्ट भी हटाई जा चुकी हैं।

राहुल गाँधी+आदित्य ठाकरे ने रची साजिश, फिर कुणाल कामरा ने कहा ‘गद्दार’: मुंबई पुलिस को मिली शिकायत में एकनाथ शिंदे के खिलाफ ‘पेड कैंपेन’ का दावा

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के अपमान मामले में कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी, शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे और संजय राउत के खिलाफ भी शिकायत दी गई है। शिवसेना नेता राहुल कनाल ने इन तीनों नेताओं पर एकनाथ शिंदे की छवि धूमिल करने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज करवाई है। 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कनाल ने अपनी शिकायत में कहा कि एकनाथ शिंदे की प्रतिष्ठा, छवि और साख को धूमिल करने के लिए राहुल गाँधी, आदित्य ठाकरे और संजय राउत ने यह अपराधिक साजिश रची है और उनके नेता के खिलाफ ‘पेड कैम्पेन’ चलाया है। टाइम्स नाउ ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि इस संबंध में दर्ज FIR में इन तीनों नेताओं का नाम है।

इस शिकायत में कहा गया है, “कुणाल कामरा द्वारा किए गए कृत्य, जिनमें आम जनता की भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाले बयान देना, विवादित बातें बोलना और एकनाथ शिंदे पर आरोप लगाना शामिल हैं, यह अपमानजनक होने के साथ ही भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 के प्रावधानों के तहत गैरकानूनी भी हैं।”

शिवसेना के नेताओं ने कुणाल कामरा के खिलाफ जल्द कार्रवाई की माँग की है। वहीं मुंबई पुलिस ने बताया है कि उसने इस अपमानजनक बयान और शिकायतों का संज्ञान लेते हुए कामरा को ढूँढना चालू कर दिया है। कई शिवसेना नेताओं ने कामरा को धमकी भी दी है। शिवसेना के एक नेता ने कहा है कि कुणाल कामरा का कहीं भी जाना मुश्किल हो जाएगा।

गौरतलब है कि रविवार (23 मार्च, 2025) को मुंबई में एक लाइव कार्यक्रम के दौरान कुणाल कामरा ने एकनाथ शिंदे को ‘गद्दार’ बताया था और उन पर एक अपमानजनक गाना गया था। उन्होंने एकनाथ शिंदे को रिक्शावाला बताया और कहा कि अगर उनकी नजर से देखा जाए तो शिंदे गद्दार नजर आएँगे।

कामरा ने कहा था कि एकनाथ शिंदे ने जिस थाली में खाया उसी में छेद किया। कामरा ने यह भी दावा किया कि एकनाथ शिंदे ने ‘बाप चुराया है।’ उनका इशारा बालासाहेब ठाकरे की तरफ था। गौरतलब है कि एकनाथ शिंदे लगातार बालासाहेब की राजनीति के आदर्शों से समझौता करने का आरोप उद्धव ठाकरे पर लगाते हैं।

कुणाल कामरा ने एकनाथ शिंदे के विरुद्ध बनाए गए इस वीडियो को सोशल मीडिया पर भी अपलोड कर दिया। 2 मिनट के इस वीडियो के सामने आने के बाद शिवसेना कार्यकर्ताओं में गुस्सा भर गया। इसके बाद शिवसेना के कार्यकर्ताओं ने उस जगह पर तोड़फोड़ की थी, जहाँ कुणाल कामरा ने यह लाइव किया था।

कुणाल कामरा ने महाराष्ट्र के डिप्टी CM एकनाथ शिंदे को कहा ‘गद्दार’, गाना गाकर उड़ाया मजाक: शिवसैनिक भड़के, बोले-11 बजे होगी धुलाई, माफी नहीं माँगी तो कालिख भी पोतेंगे

कॉमेडियन कुणाल कामरा ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे को ‘गद्दार’ करार दिया है। कामरा ने कहा है कि एकनाथ शिंदे ने ‘किसी का बाप चुरा’ लिया है। यह सब कुणाल कामरा ने एक लाइव कॉमेडी शो में किया है। इस अपमान के बाद शिवसेना कार्यकर्ताओं में गुस्सा है।

कुणाल कामरा ने एकनाथ शिंदे को लेकर यह अपमानजनक टिप्पणियाँ मुंबई में एक लाइव में शो में रविवार (23 मार्च, 2025) को की हैं। उन्होंने लाइव शो के दौरान एक कविता गाई, इसमें उन्होंने एकनाथ शिंदे को रिक्शावाला बताया और कहा कि अगर उनकी नजर से देखा जाए तो शिंदे गद्दार नजर आएँगे।

इसी कविता में कामरा ने कहा कि एकनाथ शिंदे ने जिस थाली में खाया उसी में छेद किया। कामरा ने यह भी दावा किया कि एकनाथ शिंदे ने ‘बाप चुराया है।’ उनका इशारा बालासाहेब ठाकरे की तरफ था। गौरतलब है कि एकनाथ शिंदे लगातार बालासाहेब की राजनीति के आदर्शों से समझौता करने का आरोप उद्धव ठाकरे पर लगाते हैं।

कुणाल कामरा ने एकनाथ शिंदे के विरुद्ध बनाए गए इस वीडियो को सोशल मीडिया पर भी अपलोड कर दिया। 2 मिनट के इस वीडियो के सामने आने के बाद शिवसेना कार्यकर्ताओं में गुस्सा भर गया। शिवसेना के कार्यकर्ता उस कायर्क्रम स्थल जा पहुँचे, जहाँ कामरा ने यह कविता पढ़ी थी।

कुछ लोगों ने उस जगह पर तोड़फोड़ भी की, इसके वीडियो भी सामने आए हैं। इसमें कुछ लोग कुर्सियाँ एवं बाकी सामान तोड़ते हुए दिखते हैं। शिवसेना ने इस मामले में आधिकारिक तौर पर भी शिकायत दर्ज करवाई है। शिव सेना के सोशल मीडिया इंचार्ज ने यह शिकायत दर्ज करवाई है।

शिवसेना ने कहा है कि यह शिंदे की छवि को धूमिल करने का सुनियोजित प्रयास है। शिवसेना ने शिकायत में यह भी कहा कि इससे आम जनता की भावना को ठेस पहुँची है। कुणाल कामरा पर सभ्य आलोचना की सीमा लाँघने का आरोप भी शिवसेना ने लगाया है।

कुणाल कामरा को कई शिवसेना नेताओं ने चेतावनी भी दी है। शिवसेना नेता संजय निरुपम ने एक्स (पहले ट्विटर) पर ऐलान किया है कि वह सोमवार (24 मार्च, 2025) को 11 बजे कुणाल कामरा की ‘धुलाई करेंगे।’ हालाँकि, अभी तक कामरा पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

जस्टिस यशवंत वर्मा का फोन रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश, कचरे में मिले जले हुए नोटों के टुकड़े: रिपोर्ट में दावा- पुलिस ने बनाए थे कई वीडियो, लेकिन डिलीट करने का दिया गया आदेश

दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायाधीश यशवंत वर्मा के घर मिले भारी नकदी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कार्रवाई शुरू कर दी है। आंतरिक जाँच के लिए तीन जजों की कमिटी बनाई है। इसके साथ जस्टिस वर्मा को निर्देश दिया गया है कि वे अपने मोबाइल फोन का कोई भी डेटा डिलीट ना करें, चाहे वो फोन कॉल हो या मैसेज। दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ने CJI को दी गई अपनी रिपोर्ट में गहन जाँच की सिफारिश की है।

दूसरी तरफ, इन सभी आरोपों से जस्टिस यशवंत वर्मा ने इनकार किया है। दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय को दिए गए बयान में जस्टिस वर्मा ने दिल्ली स्थित उनके आधिकारिक आवास से भारी मात्रा में नकदी बरामदगी के आरोपों का खंडन किया। उन्होंने बताया, “कर्मचारियों में से किसी को भी मौके पर मौजूद नकदी या मुद्रा के अवशेष नहीं दिखाए गए।”

उन्होंने कहा, “मैंने व्यक्तिगत रूप से अपने कर्मचारियों के साथ मामले की जाँच की। उन्होंने पुष्टि की है कि परिसर में कथित रूप से पाए गए नोटों को हटाया नहीं गया था। केवल मलबा और बचाए जाने योग्य सामान ही हटाए गए थे। इन्हें घर में अलग से रखा गया है और निरीक्षण के लिए उपलब्ध हैं।” हालाँकि, जस्टिस वर्मा के आवास पर तैनात गार्ड ने घर से मलबा हटाने की बात कही है।

कहा जा रहा है कि दिल्ली के पुलिस कमिश्नर ने दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को बताया है कि जस्टिस वर्मा के आवास पर तैनात सुरक्षा गार्ड ने 15 मार्च की सुबह कुछ मलबा और आंशिक रूप से जली हुई वस्तुओं को हटाने की बात कही है। जस्टिस उपाध्याय ने घटना का एक वीडियो जस्टिस वर्मा को दिखाया तो उन्होंने कहा कि उनकी प्रतिष्ठा को धूमिल करने के लिए साजिश रची गई है।

हालाँकि, जस्टिस वर्मा के आवास के पास जले हुए नोट मिले हैं। इस इलाके में काम करने वाले सफाई कर्मचारी इंद्रजीत ने बताया, “चार-पाँच दिन पहले हम यहाँ सफाई कर रहे थे और कूड़ा इकट्ठा कर रहे थे। उसी दौरान हमें 500 रुपए के जले हुए नोटों के कुछ छोटे-छोटे टुकड़े मिले। बदा में भी हमें एक-दो और टुकड़े मिले। हमें नहीं पता था कि आग कहाँ लगी थी। हम सिर्फ कूड़ा इकट्ठा करते हैं।”

वहीं, रिपब्लिक भारत ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि जिस जगह पर नकदी जल रही थी, वहाँ का दिल्ली पुलिस के जूनियर अधिकारी वीडियो रिकॉर्ड किया था था। हालाँकि, बाद में इसे डिलीट करने के लिए कह दिया गया। शुरू में ये वीडियो पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ साझा किया गया था। बाद में सभी लोगों को निर्देश दिया गया के वे सारी फुटेज डिलीट कर दें और उसकी कॉपी ना रखें और ना ही किसी को भेजें।

सामने आए वीडियो में दमकल कर्मियों को बोरे में भरकर रखी हुई नोटों की जलती गड्डियों को बुझाकर हटाते हुए देखा जा सकता है। इस वीडियो को सुप्रीम कोर्ट ने अपनी वेबसाइट पर अपलोड किया है। वीडियो में दिख रहा है कि जस्टिस वर्मा के आवास पर आग बुझाने गए दमकल कर्मियों में से एक नोटों के संदर्भ में ये कहते हुए सुनाई देता है कि ‘गाँधी में आग लग रही है भाई’।

‘मुस्लिम गैंग’ से हिंदू बच्चियों की सुरक्षा के लिए 36 दिनों से जारी है ब्यावर का संघर्ष, CBI जाँच की माँग: स्कूल जाने वाली लड़कियों को ब्लैकमेल कर करते थे रेप, धर्मांतरण का डालते थे दबाव

राजस्थान के ब्यावर जिले के बिजयनगर में स्कूली छात्राओं के साथ रेप और ब्लैकमेल का मामला पिछले 36 दिनों से लोगों के दिलों में आग बनकर जल रहा है। 15 फरवरी 2025 को जब ये मामला सामने आया, तो हर कोई सन्न रह गया। नाबालिग लड़कियों के साथ हुई इस हैवानियत ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया। शनिवार (22 मार्च 2025) को एक बार फिर बिजयनगर की सड़कों पर गुस्सा फूट पड़ा।

सर्व समाज संघर्ष समिति ने बिजयनगर बंद का ऐलान किया और लोग सीबीआई जाँच की माँग लेकर सड़कों पर उतर आए। बाजार बंद रहे, दुकानों के शटर डाउन थे और हर तरफ एक ही आवाज गूँज रही थी – इंसाफ चाहिए

रिपोट्स के मुताबिक, प्रदर्शन कारी लोगों का कहना है कि SIT की जाँच से उन्हें भरोसा नहीं। पहले इस केस को एडिशनल एसपी नेम सिंह देख रहे थे, लेकिन अब अजमेर रेंज के डीआईजी ओमप्रकाश ने जाँच की कमान आईपीएस अभिषेक अंदासु को सौंप दी। अभिषेक IIT बॉम्बे से पासआउट हैं और साइबर क्राइम के एक्सपर्ट माने जाते हैं। फिर भी लोग कह रहे हैं कि SIT की रफ्तार धीमी है और सच को पूरी तरह बाहर लाने के लिए सीबीआई ही सही रास्ता है। प्रदर्शनकारियों ने पैदल मार्च निकाला, नारे लगाए और प्रशासन से गुहार लगाई कि इस मामले की गहराई तक जाकर हर दोषी को सजा दी जाए।

ये मामला तब शुरू हुआ, जब 15 फरवरी को एक नाबालिग लड़की ने बिजयनगर थाने में शिकायत की। फिर धीरे-धीरे तीन और पीड़िताओं के परिवार सामने आए। आरोप है कि समुदाय विशेष के युवकों ने इन लड़कियों को पहले दोस्ती के जाल में फँसाया, फिर उनके अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल किया। इसके बाद रेप की वारदात को अंजाम दिया और उन्हें जबरन कलमा पढ़ने, रोजा रखने और धर्म बदलने के लिए मजबूर किया।

अब तक पुलिस ने 16 आरोपितों को पकड़ा है। इनमें 11 को जेल भेजा जा चुका है और 5 नाबालिगों को किशोर सुधार केंद्र में रखा गया है। नामजद आरोपितों में रेहान, सोहेल मंसूरी, लुकमान, अफराज, कैफे संचालक श्रवण जाट, आशिक, करीम, हकीम कुरैशी, जावेद, सांवरमल और अमान मंसूरी शामिल हैं।

बिजयनगर में शनिवार (22 मार्च 2025) को हालात तनावपूर्ण रहे। प्रशासन ने कोई रिस्क न लेते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया। DYSP सज्जन सिंह ने खुद मोर्चा संभाला। 8 थानों की पुलिस और RAC का जाब्ता शहर में नजर आया। लेकिन लोगों का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा। हिंदू संगठनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि ये सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि सुनियोजित साजिश है। वो चाहते हैं कि सीबीआई इसकी तह तक जाए और पीड़िताओं को पूरा इंसाफ मिले।

नए SIT प्रभारी अभिषेक अंदासु ने कहा, “हम इस केस को पूरी गंभीरता से देख रहे हैं। कोई लापरवाही हुई तो उसे ठीक करेंगे। जाँच तेज और निष्पक्ष होगी।” उनकी टीम में एडिशनल एसपी ब्यावर, मसूदा सीओ, दो थाना अधिकारी और एक सब इंस्पेक्टर शामिल हैं। लेकिन सवाल ये है कि क्या ये बदलाव लोगों का भरोसा जीत पाएगा? बिजयनगर के लोग अभी भी परेशान हैं। माँ-बाप अपनी बेटियों की सुरक्षा को लेकर डरे हुए हैं। हर कोई चाहता है कि दोषियों को ऐसी सजा मिले कि कोई दोबारा ऐसी हरकत की हिम्मत न करे।

मजहबी आरक्षण स्वीकार नहीं: RSS, बोले दत्तात्रेय हसबोले- औरंगजेब आइकॉन नहीं, गंगा-जमुनी तहजीब की बात करने वाले दारा शिकोह को याद क्यों नहीं करते?

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा का रविवार (23 मार्च 2025) को आखिरी दिन था। इस मौके पर RSS के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और देश के कई बड़े मुद्दों पर खुलकर बात की। उन्होंने औरंगजेब, दारा शिकोह, भारत की संस्कृति और बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रही हिंसा जैसे गंभीर मसलों पर RSS का रुख साफ किया।

दत्तात्रेय होसबले ने कहा, “हमारे देश में कोई भी मुद्दा उठा सकता है। इतिहास में कई घटनाएँ हुई हैं। दिल्ली में औरंगजेब मार्ग था, उसे बदलकर एपीजे अब्दुल कलाम मार्ग कर दिया गया। इसके पीछे कोई मकसद तो है न? भारत में औरंगजेब के भाई दारा शिकोह को कभी आइकॉन नहीं बनाया गया। जो लोग गंगा-जमुनी तहजीब की बात करते हैं, उन्होंने दारा शिकोह को आगे क्यों नहीं बढ़ाया? सवाल ये है कि क्या भारत की संस्कृति को तोड़ने वाले को आइकॉन बनाना है या जो यहाँ की परंपराओं के साथ रहे, उन्हें सम्मान देना है? औरंगजेब इस कड़ी में नहीं आता, लेकिन दारा शिकोह उस श्रेणी में फिट बैठते हैं।”

आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले ने आगे कहा, “अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई को तो हम स्वतंत्रता संग्राम कहते हैं। लेकिन उनसे पहले जो आक्रांता आए, उनके खिलाफ जो युद्ध हुए, वो भी आजादी की लड़ाई ही थी। जैसे राणा प्रताप ने जो किया, वो भी स्वतंत्रता संग्राम था। जो लोग आक्रमणकारी मानसिकता रखते हैं, वो देश के लिए खतरा हैं। हमें तय करना है कि अपनी संस्कृति को किसके साथ जोड़ना है। ये देशी-विदेशी धर्म की बात नहीं, बल्कि सोच की बात है। यही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का दृढ़ विचार है। बहन निवेदिता क्रिश्चियन थीं, फिर भी वो भारत की होकर रह गईं।”

हमें अपने नायकों को चुनना होगा, औरंगजेब नायक नहीं

इस पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने औरंगजेब के खिलाफ बेहद सख्त रुख दिखाया। उन्होंने कहा, “भारत के जो विरोधी रहे हैं, उन्हें आइकॉन नहीं बनाया जा सकता। गंगा-जमुनी तहजीब की बात करने वाले दारा शिकोह को याद क्यों नहीं करते? दिल्ली में औरंगजेब रोड को अब्दुल कलाम रोड बनाया गया, तो इसका मतलब समझना चाहिए। जो हमारी संस्कृति की बात करेंगे, उन्हें ही हम फॉलो करेंगे।” इसके साथ ही उन्होंने आक्रमणकारी सोच को देश के लिए खतरा बताया और कहा कि हमें अपने नायकों को चुनना होगा।

जानकारी के मुताबिक, बैठक में बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रही हिंसा का मुद्दा भी जोर-शोर से उठा। RSS ने इसके खिलाफ एक प्रस्ताव पास किया। इसमें कहा गया, “बांग्लादेश में हिंदुओं और दूसरे अल्पसंख्यकों पर इस्लामी कट्टरपंथियों की सुनियोजित हिंसा, अन्याय और उत्पीड़न हो रहा है। ये मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है।” होसबले ने कहा कि हिंदुओं को वहाँ से पलायन नहीं करना चाहिए, लेकिन उनकी सुरक्षा जरूरी है।

कर्नाटक सरकार की ओर से सरकारी ठेकों में मुसलमानों को चार प्रतिशत आरक्षण देने के फैसले पर चल रही बहस के बीच होसबोले ने कहा कि संविधान धर्म आधारित कोटा की अनुमति नहीं देता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के आरक्षण हमारे संविधान निर्माता बीआर आंबेडकर के खिलाफ हैं।

इस दौरान उन्होंने वक्फ संशोधन विधेयक को समाज के हित में बताया और परिसीमन पर भी बोले। उन्होंने कहा कि दक्षिणी राज्यों की लोकसभा सीटें कम नहीं होनी चाहिए, ताकि क्षेत्रीय संतुलन बना रहे। राम मंदिर पर उन्होंने कहा, “ये RSS की नहीं, पूरे समाज की जीत है।