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जैन, बौद्ध, सिख… सब पर लागू है हिंदू मैरिज एक्ट, इसके तहत ही मिलेगा तलाक: MP हाई कोर्ट, कहा- ‘अल्पसंख्यक दर्जा’ मिलने से नहीं हो जाते बाहर

हिंदू मैरिज एक्ट जैन, बौद्ध और सिखों पर भी लागू होता है। इनसे जुड़े विवाह और तलाक के मामले में भी इसी कानून के दायरे में आते हैं। ‘अल्पसंख्यक दर्जा’ मिलने के कारण ये इस अधिनियम के दायरे से बाहर नहीं होते। यह बात मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने एक फैसले में कही है।

जस्टिस सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और संजीव एस कलगाँवकर की बेंच ने सोमवार (24 मार्च, 2025) को एक जैन दंपति के तलाक के मामले की सुनवाई करते हुए यह बात कही। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की शादी 2017 में हुई थी। बाद में दंपति अलग रहने लगे। उन्होंने तलाक के लिए हिंदू मैरिज एक्ट के तहत फैमिली कोर्ट में आवेदन दिया।

उनकी याचिका पर 8 फरवरी को इंदौर फैमिली कोर्ट के अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश ने सुनवाई की। उन्होंने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13-बी के तहत आपसी सहमति से तलाक देने की अर्जी को अस्वीकार कर दिया था। कोर्ट का कहना था कि जैन एक अल्पसंख्यक समुदाय में आता है। इस धर्म से जुड़े किसी व्यक्ति को विपरीत मान्यता रखने वाले धर्म के कानून का लाभ देना उचित नहीं है।

गौरतलब है कि जैन समुदाय को 2014 से ही अल्पसंख्यक का दर्जा प्राप्त है। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम 1992 की धारा 2 खंड सी की शक्तियों के अनुसार जैन समुदाय को अल्पसंख्यक समुदाय के रूप में अधिसूचित किया है। लेकिन इसके तहत जैन समुदाय के सदस्यों को किसी भी वर्तमान कानून के दायरे से बाहर करने का संशोधन नहीं किया गया है।

इसके बाद सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने हाई कोर्ट में अपील की और तर्क दिया कि उन्होंने हिंदू रीति रिवाजों के अनुसार विवाह किया था। उनकी इस अपील पर जस्टिस सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और संजीव एस कलगाँवकर की पीठ ने सुनवाई करते हुए माना कि जैन भी हिंदू मैरिज एक्ट के दायरे में आते हैं।

पीठ ने कहा कि फैमिली कोर्ट के जज ने यह कहकर गंभीर गलती की है कि हिंदू विवाह अधिनियम 1955 के प्रावधान जैन समुदाय पर लागू नहीं होते। यह आदेश विवादित है। लिहाजा इसे रद्द किया जाता है। हाई कोर्ट ने 13-बी के तहत दायर याचिका को वापस कर फैमिली कोर्ट अधिनियम धारा 7 के तहत प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

‘रेखा दीदी’ की सरकार ने पेश किया पहला बजट, ₹1 लाख करोड़ से विकसित होगी दिल्ली: साफ पानी पर फोकस, महिला समृद्धि के लिए ₹5100 करोड़

दिल्ली में भाजपा सरकार ने अपना पहला बजट पेश किया है। यह बजट मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पेश किया है। ₹1 लाख करोड़ के इस बजट में भाजपा के संकल्प पत्र की झलक दिखी है। सरकार ने कई वादों को इस बजट के जरिए पूरा करने की तरफ कदम बढ़ा दिया है। बजट का फोकस दिल्ली में इन्फ्रा के विकास और साफ़ पानी तथा यमुना की सफाई पर रहा है।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार (25 मार्च, 2025) को विधानसभा में वित्त वर्ष 2025-26 सरकार का पहला बजट पेश किया। CM रेखा गुप्ता द्वारा पेश किया गया यह बजट ₹1 लाख करोड़ का है। दिल्ली का बजट इस बार 31% बढ़ा है। CM रेखा गुप्ता ने कहा है कि बीते वर्ष का बजट घटा कर ₹69 हजार करोड़ कर दिया गया है।

CM रेखा गुप्ता ने ऐलान किया है कि राज्य सरकार ₹28 हजार करोड़ दिल्ली में कैपिटल एक्सपेंडिचर होगा। इससे दिल्ली में इन्फ्रा का विकास किया जाएगा। इसी बजट के साथ दिल्ली में प्रधानमंत्री आयुष्मान योजना लागू कर दी गई है। इसके तहत अब दिल्ली के नागरिकों को ₹10 लाख का स्वास्थ्य बीमा मिलेगा।

इसमें ₹5 लाख केंद्र सरकार जबकि बाकी ₹5 लाख दिल्ली सरकार देगी। इसके लिए ₹2144 करोड़ दिल्ली के बजट में दिए गए हैं। वहीं दिल्ली में झुग्गी झोपड़ी के विकास के लिए ₹696 करोड़ दिए गए। सीएम रेखा गुप्ता ने कहा है कि झुग्गी झोपड़ी के विकास के लिए पहले सिर्फ बाते होती थीं।

भाजपा सरकार के इस पहले बजट का फोकस दिल्लीवासियों को साफ़ पानी दिलाने पर भी है। दिल्ली के बजट में ₹9000 करोड़ साफ़ पानी की सप्लाई के लिए दिए गए हैं। दिल्ली में पानी सप्लाई करने वाले टैंकरों में जीपीएस लगाया जाएगा। दिल्ली में यमुना सफाई भी इस बार सरकार के एजेंडे में शीर्ष पर है।

दिल्ली सरकार ने ₹500 करोड़ राज्य में गंदे पानी की ट्रीटमेंट के लिए दिए हैं। यह क्षमता बढ़ने के बाद यमुना में गंदा पानी नहीं मिल सकेगा। वहीं पीने के पानी की को साफ़ करने के लिए भी क्षमता बढ़ाई जाएगी, इस पर भी ₹250 करोड़ खर्च की जाएगी। ₹500 करोड़ यमुना की सफाई के लिए दिए जाएँगे।

दिल्ली में स्वास्थ्य के लिए ₹6847 करोड़ का बजट रखा जाएगा। CM रेखा गुप्ता ने ऐलान किया है कि सरकार 10वीं पास करने वाले 750 बच्चों को लैपटॉप देगी। यह लैपटॉप 1200 बच्चों को दिए जाएँगे। दिल्ली में भाजपा सरकार ने अपने चुनावी वादों पर भी काम चालू कर दिया है।

CM रेखा गुप्ता ने ऐलान किया है कि ₹5100 करोड़ का धनराशि महिला समृद्धि योजना के लिए दिए जाएँगे। इसके तहत महिलाओं को ₹2500/माह दिए जाएँगे। सरकार ने इसी के साथ बजट में वरिष्ठ नागरिकों को दी जाने वाली पेंशन भी बढ़ा कर ₹3000 कर दी है।

बजट में दिल्ली में ट्रांसपोर्ट क्षेत्र में सुधार के लिए भी पैसा दिया गया है। दिल्ली में ₹12,952 करोड़ परिवहन क्षेत्र के लिए दिए गए हैं। मेट्रो के विकास के लिए भी ₹2929 करोड़ दिए गए हैं। CM रेखा गुप्ता ने ऐलान किया है कि दिल्ली के भीतर 5000 इलेक्ट्रिक बसें खरीदी जाएँगी।

दिल्ली में महिला एवं बाल विकास कल्याण के लिए ₹10 हजार करोड़ दिए गए हैं। दिल्ली में गर्भवती महिलाओं को भी ₹21 हजार दिए जाएँगे। CM रेखा गुप्ता ने साफ़ किया है कि उन्होंने इस बजट से जो लक्ष्य तय किए हैं, उन्हें जल्द पूरा किया जाएगा।

5% (₹400 करोड़) कमीशन माँगने वाले IAS अभिषेक प्रकाश के खिलाफ ED जाँच शुरू, लखनऊ की कोठी-खेती की जमीन सब रडार पर: यूपी इन्वेस्ट के CEO को सस्पेंड कर चुकी है योगी सरकार; जानिए क्या है मामला

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इन्वेस्ट यूपी के पूर्व CEO अभिषेक प्रकाश पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के मामले में जाँच चालू कर दी है। लखनऊ स्थित ED के अधिकारियों ने इस मामले में लखनऊ पुलिस से FIR, जाँच की जानकारी और दलाल निकांत जैन के विषय में सूचना तलब की है।  

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ED दलाल निकांत जैन और उसके भाई की कम्पनियों और बाकी निवेश सम्बन्धित जानकारी भी जुटा रही है। वह आने वाले दिनों में निकांत जैन को पूछताछ के लिए हिरासत में भी ले सकती है। ED द्वारा अभिषेक प्रकाश का बयान दर्ज करने के कयास भी लगाए जा रहे हैं। 

ED इस मामले में शिकायत करने वालों से भी जानकारी जुटा सकती है और उस प्रक्रिया पर भी जानकारी इकट्ठा कर सकती है, जिसके तहत IAS अभिषेक प्रकाश पर रिश्वत माँगने का आरोप है। ED जाँच के दायरे में इस प्रक्रिया में शामिल दूसरे अधिकारियों को भी ले सकती है। उसने भी पूछताछ की जा सकती है।

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि ED रिश्वत के मामले के साथ ही अभिषेक प्रकाश की संपत्तियों पर भी जाँच करने वाली है। जाँच एजेंसी का फोकस उन जिलों पर रहेगा, जहाँ अभिषेक प्रकाश जिलाधिकारी के तौर पर रहे हैं। उनकी खेती और बाकी जमीनों पर भी जानकारी इकट्ठा की जाएगी।

अभिषेक प्रकाश के लखनऊ के घर के विषय में भी ED जानकारी जुटा रही है, यह घर दो प्लाट को मिला कर बनाया गया था। घर एक महंगी सोसायटी में स्थित है। इस पूरे मामले पर एजेंसी ने अभी आधिकारिक तौर कोई जानकारी नहीं दी है।

IAS अभिषेक प्रकाश वर्ष 2022 में यूपी इन्वेस्ट के CEO बने थे। वह 20 मार्च, 2025 तक इस पद पर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में निवेश लाने के बनाई गई इस नोडल एजेंसी ने इस दौरान काफी सफलता भी पाई है लेकिन इस 3 वर्ष में कई निवेश के प्रस्ताव खारिज भी किए गए हैं।

बताया गया है कि अब इस दौरान खारिज किए गए सभी प्रस्तावों की फाइलें दोबारा खोली जाएँगी। इस पर जाँच होगी कि आखिर निवेश प्रस्ताव को सही कारणों के तहत खारिज किया गया या फिर उसमें भी कोई भ्रष्टाचार का एंगल शामिल था।

गौरतलब है कि 20 मार्च, 2025 को SAEL Solar P6 नाम की कंपनी के विश्वजीत दत्ता ने IAS अभिषेक प्रकाश के संबंध में शिकायत की थी। कंपनी ने कहा था कि यूपी इन्वेस्ट के तहत उन्होंने Letter of Comfort (LOC) के लिए आवेदन किया था लेकिन उनकी फाइल अटकी हुई थी। 

कंपनी ने आरोप लगाया कि मंजूरी के एवज में IAS अभिषेक प्रकाश ने दलाल निकांत जैन के जरिए पूरे प्रोजेक्ट का 5% (₹400 करोड़) कमीशन माँगा। शिकायत सामने आने के बाद निकांत जैन के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी और उसे गिरफ्तार कर लिया गया थी। वहीं IAS अभिषेक प्रकाश को योगी सरकार सस्पेंड कर दिया था।

 

CPM छोड़ BJP में शामिल होने की सजा- बम मारा, फिर कुल्हाड़ी से काट डाला: 8 वामपंथियों को उम्रकैद, एक केरल CM के प्रेस सेक्रेटरी का भाई

बीजेपी कार्यकर्ता एलाम्बिलई सूरज की केरल के कन्नूर में 7 अगस्त 2005 को निर्मम हत्या कर दी गई थी। इस मामले में कन्नूर की थालासरी जिला सत्र न्यायालय ने सत्ताधारी वामपंथी दल के 9 कार्यकर्ताओं को दोषी माना है। इनमें से 8 को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है।

आजीवन कारावास के साथ ही इन सभी 8 लोगों पर 50-50 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। इसके अलावा एक अन्य दोषी को तीन साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई है। साथ ही 25 हजार रुपए का जुर्माना लागाया गया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, उम्रकैद पाने वालों में मनोज नारायण भी शामिल है। वह केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन के प्रेस सचिव पीएम मनोज का भाई है। एक अन्य दोषी टीके राजेश 2012 में हुई टीपी चंद्रशेखरन की हत्या के आरोप में पहले से ही जेल में है।

इनके अलावा ईवी योगेश, के शामजिथ, नेयोथ सजीवन, प्रभाकरन, केवी पद्मनाभन, राधाकृष्णन और पुथियापुरइल प्रदीपन को भी उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। इन सबकी उम्र 45 से 70 के बीच है। वहीं, नागाथनकोटा प्रकाशन को इस मामले में गवाह के मुकरने के कारण बरी कर दिया गया है।

गौरतलब है कि सीपीएम छोड़कर सूरज भाजपा में शामिल हो गए थे। इसके बाद राजनीतिक दुश्मनी के चलते 7 अगस्त 2005 को उनकी हत्या कर दी गई। राजेश, योगेश, शामजिथ, सजीवन और प्रभाकरन को उनकी हत्या का दोषी पाया गया है। वहीं पद्मनाभन, राधाकृष्णन, प्रकाशन को हत्या की साजिश रचने और प्रदीपन को आरोपितों को भगाने और अंडरग्राउंड करने के जुर्म में सजा दी गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हत्या से छह माह पहले भी सूरज पर हमला हुआ था। इसमें उनके पैर में गंभीर चोटें आई थी और कई महीनों तक उन्हें बेड रेस्ट और मेडिकल केयर की जरूरत पड़ी थी। ठीक होने के बाद दोबारा हमला कर उनकी हत्या कर दी गई। 7 अगस्त 2025 की सुबह मुजप्पिलंगड टेलीफोन एक्सचेंज के सामने कुछ लोग एक ऑटोरिक्शा से उतरे। उन्होंने पहले सूरज पर बम फेंका और फिर कुल्हाड़ी और धारदार हथियारों से उन्हें मार डाला।

बहन को चर्च जाने से रोकता था, इसलिए पादरी बजिंदर सिंह ने युवक को पीटा: वायरल की जाँच शुरू, पुलिस ने बताया- महिला पादरी को भी किया अपमानित, मारे थप्पड़

पंजाब में चंगाई सभाएँ करवाने वाले पादरी बजिंदर सिंह के खिलाफ पंजाब पुलिस ने एक नए मामले में जाँच चालू की है। पादरी बजिंदर सिंह का एक महिला और एक पुरुष को दफ्तर के भीतर पीटने का वीडियो सामने आया था। इस वीडियो के पीड़ितों के बयान भी पुलिस ने दर्ज कर लिए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बजिंदर सिंह जिस युवक को CCTV फुटेज में पीटता दिखाई दे रहा है, वह अपनी बहन को चर्च आने से रोकता था। बजिंदर सिंह के खिलाफ रेप का आरोप लगाने वाली पीड़िता ने बताया है कि इस युवक की बहन को बजिंदर सिंह छेड़ता था।

पीड़िता ने बताया है कि बजिंदर सिंह से यह युवक अपनी बहन को छोड़ देने के लिए कह रहा था और इसी लिए इसकी पिटाई बजिंदर सिंह ने कर दी। वहीं जिस महिला पर कॉपी फेंकते और पीटते बजिंदर सिंह दिख रहा है, वह मोहाली की रहने वाली है।

अब पुलिस ने पिटाई के इस मामले में जाँच भी चालू कर दी है। बताया गया है कि वायरल हुई पिटाई की वीडियो मोहाली स्थित चर्च ऑफ़ ग्लोरी एंड विजडम की हैं। यह वीडियो 13 फरवरी, 2025 की बताई जा रही हैं। मोहाली पुलिस ने इस मामले के पीड़ितों के बयान भी दर्ज कर लिए हैं।

एक पुलिस अधिकारी ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया, “कुराली और आस-पास के इलाकों के कुल चार पादरियों ने हमारे पास अपनी शिकायतें दर्ज करवाई। वे पिछले कई सालों से बजिंदर के साथ काम कर रहे थे और अब अलग काम करना चाहते थे, जिसके कारण विवाद हुआ।”

पुलिस अधिकारी ने बताया, “महिला पादरी ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि बजिंदर ने अपने दफ्तर में उसे लगातार अपमानित किया और थप्पड़ जड़े। एक और महिला पादरी ने भी यही बात अपनी शिकायत में कही है।” पुलिस ने कहा है कि शिकायत के बाद वह बजिंदर के खिलाफ एक्शन लेगी।

गौरलतब है कि हाल ही में वायरल हुई वीडियो में बजिंदर सिंह एक महिला और एक पुरुष को पीटते हुए दिखा थी। वीडियो में दिखा था कि पादरी पहले युवक के ऊपर पन्ने फेंकता है और उसके बाद उसे मारता है। बीच में महिला आती है तो उससे भी उलझता है और थोड़ी कहासुनी के बाद महिला को भी मारता है।

बता दें कि पादरी बजिंदर के खिलाफ कुछ दिन पहले ही कपूरथला पुलिस ने 22 वर्षीय महिला की शिकायत के आधार पर उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 354-ए, 354-डी और 506 के तहत यौन उत्पीड़न, पीछा करने और आपराधिक धमकी देने के आरोप में FIR दर्ज की थी।

कुणाल कामरा के बैंक अकाउंट, कॉल रिकॉर्ड की होगी जाँच: कहाँ-कहाँ से आया पैसा, इसका पता लगाएगी महाराष्ट्र सरकार; मुंबई पुलिस ने पूछताछ के लिए बुलाया

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को ‘गद्दार’ कहने वाले कॉमेडियन कुणाल कामरा के कॉल रिकॉर्ड और बैंक खातों की जाँच की जाएगी। कहाँ-कहाँ से उसके पास पैसा आया और शिंदे के अपमान से पहले वह किसके संपर्क में था, इसकी जाँच की जाएगी। वहीं मुंबई पुलिस उसके खिलाफ दर्ज FIR पर आगे कार्रवाई करने जा रही है।

महाराष्ट्र के गृह राज्य मंत्री योगेश कदम ने राज्य की विधानपरिषद में कुणाल कामरा के लेनदेन और उसके बाकी कनेक्शन की जाँच होगी। उन्होंने कुणाल कामरा की इस टिप्पणी के पीछे कौन है, इसकी जाँच करने को कहा है।

योगेश कदम ने कहा, “यह एक गंभीर मामला है, कॉमेडियन कुणाल कामरा की कॉल रिकॉर्डिंग और बैंक स्टेटमेंट की भी जाँच की जाएगी। उसको कहाँ-कहाँ से भुगतान किया गया, इसकी जाँच की जाएगी और इसके पीछे कौन है, इसका पता लगाया जाएगा।”

योगेश कदम ने कहा है कि कुणाल कामरा ने उपमुख्यमंत्री शिंदे के साथ ही देश की राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और सुप्रीम कोर्ट का भी अपमान किया है। योगेश कदम ने स्पष्ट किया है कि अगर कोई उनके नेताओं का अपमान करता है, तो इसे एकदम बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इससे पहले शिवसेना के बाकी नेता भी कुणाल कामरा के इस एक्शन के पीछे दूसरे लोगों का हाथ होने का आरोप लगा चुके हैं। मुंबई पुलिस को दी गई FIR में भी राहुल गाँधी, आदित्य ठाकरे और संजय राउत को एकनाथ शिंदे के खिलाफ साजिश रचने का आरोपित बनाया गया था।

महाराष्ट्र सरकार के इस फैसले के साथ ही मुंबई पुलिस ने भी कुणाल कामरा मामले में कार्रवाई आगे बढ़ा दी है। उन्होंने शिवसेना नेताओं की तरफ से दर्ज की FIR को लेकर कुणाल कामरा को समन भेजा है। उसे मुंबई पुलिस के सामने पेश होने को कहा गया है।

कुणाल कामरा ने भी इस बीच एक बयान जारी किया है। कामरा ने कहा है कि वह जाँच में शामिल होंगे। कामरा ने दावा किया है कि नेताओं का अपमान करना कानून का उल्लंघन नहीं है। वह इस समय कहाँ है, इसकी किसी को जानकारी नहीं है। एक कॉल रिकॉर्डिंग में उसने कथित तौर पर तमिलनाडु में रहने का दावा किया है।

गौरतलब है कि रविवार (23 मार्च, 2025) को मुंबई में एक लाइव कार्यक्रम के दौरान कुणाल कामरा ने एकनाथ शिंदे को ‘गद्दार’ बताया था और उन पर एक अपमानजनक गाना गया था। उन्होंने एकनाथ शिंदे को रिक्शावाला बताया और कहा कि अगर उनकी नजर से देखा जाए तो शिंदे गद्दार नजर आएँगे।

कामरा ने कहा था कि एकनाथ शिंदे ने जिस थाली में खाया उसी में छेद किया। कामरा ने यह भी दावा किया कि एकनाथ शिंदे ने ‘बाप चुराया है।’ उनका इशारा बालासाहेब ठाकरे की तरफ था। गौरतलब है कि एकनाथ शिंदे लगातार बालासाहेब की राजनीति के आदर्शों से समझौता करने का आरोप उद्धव ठाकरे पर लगाते हैं।

साई चरण को अगवा कर ‘इस्लामी गैंग’ ने घंटों पीटा, क्योंकि मुस्लिम लड़की से कर रहा था बात: अजीम शेख, मुज्जू और इरशाद समेत 9 पर FIR

तेलंगाना के हानमकोंडा में एक हिन्दू युवक को मुस्लिम लड़कों ने अगवा करके बेरहमी से पीटा। उसे घंटों तक बंधक बनाकर रखा और धमकियाँ दी। हिन्दू युवक को एक मुस्लिम लड़की से बात करने के लिए प्रताड़ित किया गया। हिन्दू पीड़ित मुस्लिम लड़की को नौकरी दिलाने के लिए उससे बात कर रहा था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह घटना रविवार (23 मार्च, 2025) को हुई। हानमकोंडा में साई चरण नाम का युवक एक मुस्लिम लड़की से एक सार्वजनिक जगह पर कुछ बात कर रहा था। साई चरण डिलीवरी बॉय का काम करता है। वह जिस लड़की से बात कर रहा था, वह उसकी बहन की दोस्त थी।

साई और मुस्लिम लड़की एक नौकरी के विषय में बात कर रहे थे। इसी दौरान उनकी बातचीत का वीडियो किसी ने रिकॉर्ड कर लिया। इसे मुस्लिम लड़कों के गैंग के पास भेजा गया। उन्होंने इसके बाद साई को रविवार को अगवा कर लिया। उसे एक जगह पर जबरदस्ती बाइक पर बैठा लिया गया।

मुस्लिम लड़के इसके बाद साई को उस मुस्लिम लड़की के घर ले गए और यहाँ भी उस को प्रताड़ित किया। साई को एक कमरे में बंद करके मुस्लिम गैंग के लड़कों ने उस पर लाठियों और रॉड से हमला किया। इसके चलते वह गंभीर रूप से घायल हो गया। उसके शरीर पर पिटाई के निशान पड़ गए हैं।

साई चरण को घंटों तक बंधक बना कर रखा गया और प्रताड़ित किया गया। साई ने पूरी बात मुस्लिम गैंग के लड़कों को बताई लेकिन इसका उन पर कोई असर नहीं हुआ। किसी तरह साई मुस्लिम लड़कों की गिरफ्त से छूट सका और इसके बाद वह पुलिस के पास पहुँचा।

पुलिस ने इस मामले में अब मोहम्मद अजीम, शेख अफसर, मोहम्मद इरशाद, मुज्जू, शाहबाज, मोहम्मद फैयाज, निहाल समेत 9 के खिलाफ मामला दर्ज किया है। उनकी तलाश चल रही है। वहीं घायल साई चरण को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।

कंगना रनौत, केतकी चिताले, सुनैना होले… ने जो झेला उसके तो कुणाल कामरा ने अभी दर्शन भी नहीं किए, फिर भी फट गई लिबरलो : यह अभिव्यक्ति की आजादी पर नहीं, तुम्हारी दोगलई पर ‘हमला’ है

कॉमेडियन कुणाल कामरा ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को ‘गद्दार’ करार दिया है। कॉमेडी की आड़ में राजनीतिक रोटियाँ सेंकने का कामरा का यह दाँव उल्टा पड़ गया है। शिवसेना कार्यकर्ता अब उससे नाराज हैं। हालाँकि, एक धड़ा ऐसा भी है जो कुणाल कामरा की इस धृष्टता को ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ का नाम दे रहा है। लोकतांत्रिक अधिकारों की दुहाई दे रहा है। कुणाल कामरा के समर्थन में वह लोग तक उतर आए हैं, जो कुछ सालों पहले तक सांसदों-विधायकों की मिमिक्री करने वालों का मुँह सिलने की वकालत करते थे।

सपा की राज्यसभा सांसद जया बच्चन कुणाल कामरा के समर्थन में उतरी हैं। जया बच्चन ने पूछा है कि ‘फ्रीडम ऑफ़ स्पीच’ कहाँ है। उन्होने प्रश्न उठाया है कि आखिर ऐसे बोलने पर पाबंदी लगाई जाएगी तो मीडिया का क्या हाल होगा। वैसे तो भारतीय लिबरल ‘बोलने की आजादी’ जैसे शब्द का जाप दिन में 100 बार करते हैं लेकिन जया बच्चन के मुँह यह बात शोभा नहीं देती है। ऐसा इसलिए है क्यों कि यही श्रीमती बच्चन बोलने की आजादी को खत्म करने की वकालत कर रही थीं।

वर्ष 2014 में जया बच्चन कह रहीं थी कि रेडियो जॉकी को सांसद-विधायकों की नक़ल करने से रोका जाए। उन्होंने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से इस पर रोक लगाने को कहा था। यानी तब बैन और अब ‘आजादी’। हालाँकि, यह उनकी अकेले की गलती नहीं है, ना वह पहली ऐसी व्यक्ति हैं जो इन मामलों पर दोहरा चरित्र रखती हैं। इससे पहले कई ऐसे मामले हुए हैं, जब इसी लिबरल समुदाय ने बोलने की आजादी पर दोहरा मापदंड दिखाया है।

ज्यादा दिन की बात नहीं है, मराठी अभिनेत्री ने शिवसेना-कॉन्ग्रेस-एनसीपी की सरकार के दौरान शरद पवार की आलोचना करते हुए एक कविता साझा कर दी थी। केतकी पर इसके बाद 22 FIR दर्ज की गई थीं और उन्हें 40 दिन जेल में बिताने पड़े थे। तब अभिव्यक्ति की आजादी, कॉमेडी, रचनात्मक स्वतंत्रता जैसी बातें जया बच्चन जैसे लिबरलों के दरवाजे पर दस्तक देती रहीं थीं, लेकिन उन्होंने इस पर गौर नहीं किया था। केतकी चिताले इस दोहरे मापदंड की अकेली पीड़ित नहीं है।

रिपब्लिक टीवी के एंकर अर्नब गोस्वामी को 2021 में इसी महायुति सरकार ने घर से घसीट कर गिरफ्तार करवा दिया था। बहाना 2018 के एक मामले का दिया गया था। इस फ़ाइल का भूत गोस्वामी को डराने के लिए ही निकाला गया था। कुणाल कामरा के लिए लोकतंत्र के नाम पर मर्सिये पढ़ने वाले तब तार्किकता, कानून का राज, न्याय और ऐसे शब्दों की चाशनी में लपेट कर इसे सही ठहरा रहे थे। अर्नब लगातार इस इकोसिस्टम की पोल खोलते रहे हैं।

सोशल मीडिया के एक्टिविस्ट समेत ठक्कर को 2020 में इसी सरकार ने इसलिए घर से 200 पुलिसवालों से उठवा लिया था, क्योंकि उन्होंने उद्धव ठाकरे की सरकार और उनके मंत्रियों की आलोचना कर दी थी। उन्हें भी 21 दिन जेल में रखा गया था। तब भी अभिव्यक्ति की आजादी जैसे पैरामीटर लागू नहीं किए गए थे। और जिन कुणाल कामरा के लिए आज कॉन्ग्रेस और उद्धव ठाकरे वाली शिवसेना (उद्धव) यह सब दुहाई दे रहे हैं, उसे तो यह सब बोलने का अधिकार ही नहीं है।

सोशल मीडिया एक्टिविस्ट सुनैना होले ने एक बार महाराष्ट्र सरकार की आलोचना कर दी थी तो उन्हें भी FIR का सामना करना पडा था। उनको गिरफ्तार कर लिया गया था। उनके खिलाफ FIR कोर्ट ने रद्द कर दी थी। उनके समय भी यह आजादी कहीं किनारे के रास्ते से निकल गई थी।

सबसे अधिक दोगलापन तो कुणाल कामरा का ही विक्टिम कार्ड खेलना होगा। इसी महायुति सरकार ने अभिनेत्री कंगना रनौत के दफ्तर पर बुलडोजर चलाया था। यह सब ‘अतिक्रमण’ के नाम पर की गई थी। आज जो कामरा आजादी का रोना रो रहे हैं, तब उन्होंने ही संजय राउत के साथ बुलडोजर के खिलौने मेज पर रख कर पॉडकास्ट किया था और अट्टाहास किया था। उन्होंने इस एक्शन को पूरा समर्थन दिया था। अब अगर उनके खिलाफ शिवसैनिक गुस्सा दिखा रहे हैं, तो वह विक्टिम क्यों बन रहे हैं।

असल बात यह है कि इस गैंग में ना किसी को अभिव्यक्ति की आजादी की पड़ी है, ना किसी को कलाकारों की रचनात्मकता की। बात है कि हम बोले तो ठीक और तुम बोलो तो गलत वाली। यह सिलेक्टिव अप्रोच हमेशा ही यह गैंग अपनाता आया है। इसके लिए लोकतंत्र तभी मरता है, जब इस गैंग का कोई कुछ उल्टा सीधा बोल कर कानून के शिकंजे में आया हो। जब बात दूसरे खेमे की हो तब ‘ऐसा नहीं बोलना चाहिए’ और ‘कानून अपना काम करेगा’ जैसी बातें होती हैं।

और उदाहरण लेने के लिए ज्यादा पीछे जाने की जरूरत नहीं है। हाल ही में तेलंगाना में 2 महिला पत्रकारों पर सीएम रेवंत रेड्डी ने चाबुक चलाया था। उनके खिलाफ टिप्पणी पर रेड्डी ने कहा था, “यह मत सोचिए कि मैं चुप हूँ, क्योंकि मैं मुख्यमंत्री हूँ। मैं आपको नंगा कर दूँगा और आपको पीटूँगा। ऐसे लाखों लोग हैं, जो मेरे आह्वान पर आपको पीटने के लिए सड़कों पर उतर आएँगे। लेकिन, मैं अपने पद के कारण सहनशील बना हुआ हूँ।”

एक विफल कॉमेडियन के पीछे हाथ बाँध कर खड़ी इस जमात में से एक आदमी भी तब रेवंत रेड्डी के खिलाफ नहीं बोला। ना ही उसने संविधान की चिंता जताई। जब मसखरे कामरा ने एकनाथ शिंदे पर अशोभनीय टिप्पणी की और उस पर कानूनी कार्रवाई होने लगी, तो संविधान तुरंत खत्म होने लगा। यही इस जमात का चाल और चरित्र है। इनका बस एक ही मंत्र है, ‘तुम्हारा कुत्ता कुत्ता, हमारा कुत्ता टॉमी।”

राजा का स्वप्न, विद्यापति-ललिता का प्रेम, विश्ववासु की आराधना… नील माधव ही हैं भगवान जगन्नाथ, जानिए कांतिलो के उस मंदिर की कथा जहाँ राष्ट्रपति ने की पूजा-अर्चना

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार (24 मार्च 2025) को ओडिशा के नयागढ़ जिले में स्थित कांटिलो के प्रसिद्ध नीलमाधव मंदिर में दर्शन और पूजा की। ढोल-नगाड़ों की गूँज और फूलों की मालाओं के बीच राष्ट्रपति ने मंदिर में प्रवेश किया। मंदिर के गर्भगृह में भगवान नीलमाधव की मूर्ति के सामने वो श्रद्धा से नतमस्तक हुईं और करीब आधे घंटे तक पूजा में लीन रहीं।

महानदी के किनारे बसा नीलमाधव मंदिर चारों ओर से हरियाली और शांति से घिरा हुआ है। नदी का साफ पानी और आसपास के जंगल इस जगह को और भी मनोरम बनाते हैं। राष्ट्रपति ने पूजा के बाद मंदिर के पुजारी परिवार से मुलाकात की और उनकी पीढ़ियों से चली आ रही भक्ति परंपरा की तारीफ की।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कांटिलो से करीब 5 किलोमीटर दूर कलियापल्ली गाँव में शबर समुदाय के बीच भी समय बिताया। यह वही समुदाय है, जिसका नीलमाधव और जगन्नाथ की कहानी से गहरा जुड़ाव है। गाँव में उन्होंने शबर राजा विश्ववासु की एक नवनिर्मित मूर्ति का अनावरण किया। इसके बाद वो विश्ववासु के तपस्थल पर गईं, जहाँ उन्होंने फूल चढ़ाए और कुछ पल मौन रहकर सम्मान प्रकट किया। स्थानीय महिलाओं ने उन्हें पारंपरिक ओडिया वस्त्र भेंट किए, जिसे वो खुशी-खुशी स्वीकार करती नजर आईं।

महानदी के किनारे स्थित नीलमाधव मंदिर (फोटो साभार : X)

नीलमाधव मंदिर: भगवान जगन्नाथ का पौराणिक घर

अब बात करते हैं नीलमाधव मंदिर की उस पौराणिक कहानी की, जो इसे इतना खास बनाती है। ओडिशा के लोगों के लिए यह मंदिर सिर्फ एक पूजा स्थल नहीं, बल्कि उनकी सांस्कृतिक पहचान और प्राचीन परंपराओं का जीवंत प्रतीक है। यहाँ की हर ईंट, हर पत्थर और महानदी का बहता पानी उस इतिहास को बयान करता है, जो सैकड़ों-हजारों साल पुराना है। कहा जाता है कि यह मंदिर भगवान विष्णु के नीलमाधव रूप का प्राचीन घर है, जो बाद में पुरी में जगन्नाथ के रूप में पूजे गए। ओडिया लोककथाओं में इसे भगवान जगन्नाथ की उत्पत्ति का मूल माना जाता है।

यह कहानी सतयुग से शुरू होती है, जब राजा इंद्रद्युम्न ओड्रा देश (आज का ओडिशा) में राज करते थे। वो भगवान विष्णु के परम भक्त थे और हमेशा उनकी कृपा पाने की कामना करते थे। एक रात उन्हें स्वप्न में भगवान विष्णु ने दर्शन दिए। भगवान ने कहा, “मैं महानदी के किनारे एक जगह पर नीलमाधव के रूप में प्रकट हुआ हूँ। वहाँ शबर जनजाति का मुखिया मुझे एक विशाल वृक्ष के नीचे पूजता है। तुम मुझे ढूंढो और पुरुषोत्तम क्षेत्र (पुरी) में मेरे लिए एक भव्य मंदिर बनवाओ।” यह सपना राजा के लिए एक दिव्य आह्वान (Divine Calling) की तरह था।

उन्होंने तुरंत अपने सबसे भरोसेमंद ब्राह्मण विद्यापति को नीलमाधव को खोजने की जिम्मेदारी सौंपी। विद्यापति ने लंबी यात्रा शुरू की। वो जंगलों, पहाड़ों और नदियों को पार करते हुए शबर जनजाति के राज्य में पहुँचे। वहाँ शबर मुखिया विश्ववासु अपने कबीले के साथ रहते थे। विद्यापति ने विश्ववासु से दोस्ती की और उनके यहाँ आश्रय माँगा। विश्ववासु ने उन्हें अपने घर में जगह दी। कुछ दिनों बाद विद्यापति का दिल विश्ववासु की खूबसूरत बेटी ललिता पर आ गया। दोनों का प्रेम परवान चढ़ा और जल्द ही उनकी शादी हो गई।

विद्यापति ने देखा कि विश्ववासु हर दिन सुबह-शाम जंगल में गायब हो जाते थे। वो उत्सुक हुए और ललिता से इसका राज पूछा। ललिता ने बताया कि उनके पिता जंगल में एक गुप्त जगह पर नीलमाधव की पूजा करते हैं, जो उनके कबीले का सबसे बड़ा रहस्य है। विद्यापति ने ललिता से अनुरोध किया कि वो अपने पिता से उन्हें नीलमाधव के दर्शन करवाने को कहें। ललिता ने बहुत मनुहार की और आखिरकार विश्ववासु मान गए। लेकिन उन्होंने एक शर्त रखी कि विद्यापति की आँखों पर पट्टी बाँधी जाएगी, ताकि वो उस जगह का रास्ता न देख सकें।

अगले दिन विश्ववासु विद्यापति को लेकर जंगल के गहरे हिस्से में गए। विद्यापति की आँखों पर पट्टी थी, लेकिन वो चतुर थे। उन्होंने अपनी जेब में सरसों के बीज छुपा रखे थे और रास्ते में उन्हें धीरे-धीरे गिराते गए। जब वो उस गुप्त स्थान पर पहुँचे, तो पट्टी हटी और विद्यापति ने नीलमाधव की दिव्य मूर्ति देखी। एक विशाल वृक्ष के नीचे रखी वह लकड़ी की मूर्ति अलौकिक प्रकाश से चमक रही थी। दर्शन के बाद वो वापस लौट आए, लेकिन उनके मन में अब वह छवि बस गई थी।

विद्यापति ने राजा इंद्रद्युम्न को सब बताया। राजा अपने सैनिकों और सेवकों के साथ उस जगह पर पहुँचे। सरसों के बीज अब छोटे-छोटे पौधों में बदल चुके थे, जो रास्ता दिखा रहे थे। लेकिन जब वो वहाँ पहुँचे, तो नीलमाधव की मूर्ति गायब थी। विश्ववासु ने बताया कि भगवान नहीं चाहते कि उनकी पूजा का स्थान सबको पता चले। यह सुनकर राजा का दिल टूट गया। वो निराश और उदास होकर वापस लौट आए।

लेकिन इंद्रद्युम्न ने हार नहीं मानी। उन्होंने भोजन और जल त्याग दिया और महानदी के किनारे कठोर तप शुरू कर दिया। दिन-रात वो भगवान विष्णु को याद करते रहे। उनकी भक्ति इतनी गहरी थी कि आसपास के लोग भी उनके साथ प्रार्थना करने लगे। कई दिनों की तपस्या के बाद भगवान विष्णु फिर प्रकट हुए। उन्होंने कहा, “मैं तुम्हारी भक्ति से प्रसन्न हूँ। अब मैं पुरी के समुद्र तट पर ‘दारु ब्रह्म’ यानी पवित्र लकड़ी के रूप में प्रकट होऊँगा। वहाँ मेरे लिए एक भव्य मंदिर बनवाओ, जहाँ मैं जगन्नाथ के रूप में पूजा जाऊँगा।”

भगवान विष्णु के अवतार माने जाते हैं नीलमाधव

कुछ दिनों बाद पुरी के समुद्र तट पर एक विशाल लकड़ी का लट्ठा बहता हुआ आया। उसे देखते ही लोगों को लगा कि यह कोई साधारण लकड़ी नहीं है। राजा उसे महल में लाए और मूर्तियाँ बनाने का काम शुरू करने का आदेश दिया। तभी भगवान विश्वकर्मा एक बूढ़े बढ़ई के रूप में वहाँ आए। उन्होंने कहा, “मैं इन लकड़ियों से मूर्तियाँ बनाऊँगा, लेकिन मेरी एक शर्त है। जब तक मैं काम करूँ, कोई भी कमरे में नहीं आएगा और दरवाजा नहीं खोलेगा।” राजा ने उनकी शर्त मान ली।

विश्वकर्मा ने काम शुरू किया। कमरे से हथौड़े और छेनी की आवाजें आने लगीं। सात दिन बीत गए, लेकिन काम पूरा होने का नाम नहीं ले रहा था। रानी और राजा अधीर हो गए। रानी ने कहा, “क्या पता वो बढ़ई ठीक से काम कर भी रहा है या नहीं?” आखिरकार उनकी सब्र की सीमा टूट गई और उन्होंने दरवाजा खोल दिया। अंदर का नजारा देखकर वो हैरान रह गए। विश्वकर्मा गायब हो चुके थे और वहाँ तीन मूर्तियाँ खड़ी थीं – जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा। लेकिन इन मूर्तियों के हाथ-पैर अधूरे थे। फिर भी उनकी आँखें और मुस्कान इतनी जीवंत थीं कि वो अधूरी होते हुए भी पूर्ण लग रही थीं।

राजा ने इन मूर्तियों को पुरी के भव्य मंदिर में स्थापित करवाया। आज भी ये मूर्तियाँ वहाँ विराजमान हैं और दुनिया भर से आए भक्तों को आशीर्वाद देती हैं। लेकिन राजा ने शबर जनजाति को भी नहीं भुलाया। ललिता और उसके कबीले को ‘दैतापति’ का दर्जा दिया गया। ये दैतापति आज भी जगन्नाथ मंदिर में विशेष सेवक हैं। हर 12 साल में जब ‘नव कालेबर’ होता है, यानी मूर्तियों को बदला जाता है, तो नीम के पेड़ों का चयन दैतापतियों को सपने में बताया जाता है। इन पेड़ों पर शंख, चक्र और गदा जैसे विष्णु के चिह्न होते हैं।

नीलमाधव मंदिर आज भी उस प्राचीन कथा को अपने सीने में समेटे हुए है। यहाँ की शांति, महानदी का बहता पानी और जंगल की हरियाली इसे एक तीर्थ से कहीं ज्यादा बनाती है। यह ओडिशा की आत्मा है, जहाँ आदिवासी परंपराएँ और वैष्णव भक्ति का अनोखा मेल देखने को मिलता है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का यहाँ आना इस मंदिर के गौरव को और बढ़ाता है। उनके इस दौरे ने न सिर्फ कांटिलो, बल्कि पूरे ओडिशा के लोगों के दिलों में खुशी और गर्व का भाव भर दिया।

जिस महरंग की एक आवाज पर घरों से निकल आते हैं लाखों बलोच, उसे देशद्रोह के केस से डरा रही पाकिस्तानी फौज: जानिए कैसे एक महिला डॉक्टर से ले रही जाफर एक्सप्रेस का बदला

पाकिस्तान के बलूचिस्तान में मशहूर मानवाधिकार कार्यकर्ता और बलूच यकजहती समिति (BYC) की लीडर महरंग बलोच को गिरफ्तार कर लिया गया है। शनिवार (22 मार्च 2025) को पाकिस्तान पुलिस ने महरंग और उनके 150 साथियों के खिलाफ आतंकवाद के गंभीर इल्जाम लगाते हुए FIR दर्ज की। इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर क्वेटा डिस्ट्रिक्ट जेल में डाल दिया गया।

ये मामला तब शुरू हुआ जब BYC के सदस्यों पर क्वेटा के सिविल हॉस्पिटल के मुर्दाघर से जफ्फर ट्रेन हादसे में मारे गए 5 लोगों के शव जबरन ले जाने का इल्जाम लगा। पुलिस का कहना है कि महरंग और उनके साथियों ने न सिर्फ शव चुराए, बल्कि हिंसा भड़काई, पुलिस पर गोलीबारी की और सड़कें जाम कर देश-विरोधी नारे लगाए। लेकिन BYC और महरंग के समर्थक इसे सरकार की साजिश बता रहे हैं, जिसका मकसद बलूचों की आवाज को दबाना है।

महरंग बलोच पिछले कई सालों से बलूचिस्तान में गायब लोगों के लिए इंसाफ की लड़ाई लड़ रही हैं। इस बार भी वो अपने साथी बीबर्ग बलोच, उनके भाई और बोलन मेडिकल कॉलेज के वाइस प्रिंसिपल डॉ. इलियास बलोच की गिरफ्तारी के खिलाफ धरने पर थीं। 21 मार्च को क्वेटा में सरियाब रोड पर उनका प्रदर्शन शुरू हुआ। BYC का कहना है कि पुलिस ने शांतिपूर्ण धरने पर बर्बर कार्रवाई की, जिसमें 3 लोग मारे गए और दर्जनों घायल हुए। संगठन ने दावा किया कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई, जबकि क्वेटा कमिश्नर हमजा शफकात ने इसे खारिज करते हुए कहा कि मौतें BYC के सशस्त्र लोगों की फायरिंग से हुईं। इस घटना के बाद 22 मार्च को पुलिस ने सुबह-सुबह छापा मारा और महरंग समेत 17 लोगों को गिरफ्तार कर लिया।

डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने महरंग के खिलाफ 3 FIR दर्ज कीं। पहली FIR सरियाब पुलिस स्टेशन में हुई, जिसमें उन पर मुर्दाघर से शव ले जाने, आतंकवाद, हत्या, हत्या की कोशिश और संपत्ति को नुकसान पहुँचाने का इल्जाम है। दूसरी FIR सिविल लाइंस पुलिस स्टेशन में दर्ज हुई, जिसमें कहा गया कि BYC के 100-150 लोगों ने हॉस्पिटल में तोड़फोड़ की और एक एम्बुलेंस छीनकर ड्राइवर को पीटा। तीसरी FIR ब्रूअरी पुलिस स्टेशन में हुई, जिसमें वेस्टर्न बाइपास रोड जाम करने और देश-विरोधी नारे लगाने का आरोप है। इन इल्जामों में एंटी-टेररिज्म एक्ट और पाकिस्तान पीनल कोड की कई धाराएँ जोड़ी गई हैं। BYC के कई बड़े नेता जैसे बीबो बलोच, गुलजादी सतकजई, सबीहा बलोच और गुलजार दोस्त भी इन FIR में नामजद हैं।

गिरफ्तारी के बाद महरंग बलोच को क्वेटा डिस्ट्रिक्ट जेल में रखा गया है। उनकी कजिन अस्मा बलोच ने बताया कि परिवार को उनसे मिलने या खाना देने की इजाजत नहीं दी जा रही। अस्मा ने कहा, “24 घंटे से ज्यादा हो गए, न उन्हें कोर्ट में पेश किया गया, न वकील से मिलने दिया गया। हम जेल के बाहर 2 घंटे खड़े रहे, खाना-कपड़े लेकर गए, पर सब वापस कर दिया।” BYC ने इसे मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन बताया और लोगों से सड़कों पर उतरने की अपील की।

महरंग की बहन ने उनके एक्स अकाउंट से पोस्ट कर कहा, “जब तक महरंग को रिहा नहीं किया जाता, मैं ये अकाउंट चलाऊँगी और उनकी हालत की जानकारी देती रहूँगी।”

इस घटना के बाद बलूचिस्तान में हड़ताल और प्रदर्शन शुरू हो गए। 23 मार्च को BYC के आह्वान पर कई शहरों जैसे केच, पंजगुर, नोशकी और कलात में दुकानें बंद रहीं। क्वेटा में हालात रविवार को सामान्य हुए, पर इंटरनेट 4 दिन तक बंद रहा, जिससे लोग परेशान रहे। PTCL ने दावा किया कि सर्विस बहाल हो गई, पर यूजर्स को अब भी दिक्कत थी। 24 मार्च को BYC ने कराची और क्वेटा में फिर से प्रदर्शन का ऐलान किया। कराची में प्रेस क्लब के बाहर और क्वेटा में भी धरने का ऐलान किया गया है। संगठन ने इसे ‘महरंग और बीबर्ग की गैरकानूनी हिरासत के खिलाफ आवाज’ बताया।

महरंग की गिरफ्तारी पर दुनिया भर से रिएक्शन आ रहे हैं। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा, “38 घंटे से ज्यादा हो गए, महरंग को वकील और परिवार से मिलने नहीं दिया जा रहा। पाकिस्तान को उन्हें तुरंत रिहा करना चाहिए।” बलोच ह्यूमन राइट्स काउंसिल ने UN से दखल देने की माँग की।

UN की मानवाधिकार अधिकारी मैरी लॉलर ने भी इसकी निंदा की। पाकिस्तान की PTI, BNP-M और नेशनल पार्टी ने सरकार पर हमला बोला। PTI के शेख वकास अकरम ने कहा, “ये क्रूरता देश को तोड़ रही है। महरंग और बाकियों को फौरन छोड़ो।” उन्होंने बचोल प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग की भी निंदा की।

जाफर ट्रेन पर हमले से जुड़ी गिरफ्तारी

उनकी गिरफ्तारी जाफर एक्सप्रेस ट्रेन पर हमले से जुड़ी है। बीते 11 मार्च को बलोच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने ट्रेन पर हमला किया था, जिसमें 26 फौजी और 33 बलोच राष्ट्रवादी लड़ाके मारे गए थे। BYC का कहना है कि सरकार ने मारे गए लोगों के शव बिना पहचान के दफनाने की कोशिश की, जिसके खिलाफ वो प्रदर्शन कर रहे थे। पुलिस का दावा है कि BYC ने शव चुराकर हिंसा फैलाई। ये हादसा बलूचिस्तान में चल रहे तनाव का एक हिस्सा है, जहाँ BLA जैसे संगठन आजादी की माँग कर रहे हैं और पाकिस्तान के साथ ही चीन के खिलाफ भी उन्होंने जंग छेड़ी हुई है।

बलोच प्रदर्शनकारियों से डरी पाकिस्तानी सरकार

पाकिस्तान सरकार महरंग और BYC से इतना क्यों डर रही है? बलूचिस्तान में सालों से आजादी की माँग चल रही है। वहाँ के लोग कहते हैं कि उनकी जमीन का शोषण हो रहा है, उन्हें हक नहीं मिलता। BLA जैसे संगठन हिंसा करते हैं, पर BYC शांति से लड़ाई लड़ता है। महरंग की अगुआई में लाखों लोग सड़कों पर उतरे हैं। हाल में उनके एक मार्च में 2 लाख लोग शामिल हुए थे। सरकार को लगता है कि अगर ये आंदोलन फैला, तो उसका कंट्रोल खतरे में पड़ सकता है। इसलिए वो इंटरनेट बंद कर रही है, नेताओं को जेल में डाल रही है और प्रदर्शनों को कुचल रही है।

कौन हैं महरंग बलोच? जिनके नाम से भी खौफ खाता है पाकिस्तान

31 साल की महरंग बलोच पेशे से डॉक्टर हैं, पर उनकी असली पहचान बलूचिस्तान की आवाज की है। 1993 में जन्मीं महरंग ने 2006 से बलोचों के हक की लड़ाई शुरू की। उनके पिता एक राष्ट्रवादी नेता थे, जिनका 2009 में अपहरण हुआ और 2011 में शव मिला। 2017 में उनके भाई को भी अगवा किया गया, जिसके बाद वो पूरी तरह आंदोलन में कूद पड़ीं। उनके प्रयासों से 2018 में भाई वापस आया। 2019 में उन्होंने BYC बनाया और छोटी-छोटी सभाओं से लोगों को जोड़ा। आज उनके साथ बुजुर्ग महिलाएँ, युवा और बच्चे तक जुड़ गए हैं। वो कहती हैं, “मौत से अब डर नहीं लगता। अपने लोगों के लिए लड़ती रहूँगी।”

महरंग का असर बलूचिस्तान पर गहरा है। उनके मार्च में लाखों लोग शामिल होते हैं। पुलिस की लाठियाँ, आंसू गैस और गिरफ्तारियाँ भी उन्हें रोक नहीं पाईं। उनकी हिम्मत ने युवाओं और महिलाओं को प्रेरित किया है। लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं। सरकार उन्हें आतंकवादी बताकर बदनाम करने की कोशिश कर रही है। फिर भी महरंग और उनके समर्थक हार नहीं मान रहे। उनकी लड़ाई इंसाफ और हक की है, जो बलूचिस्तान के हर घर की कहानी बन गई है।