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भारत में मुस्लिम लेकर आए थे जलेबी तो फिर श्रीराम के जन्मदिन पर कैसे बनी थी ‘कर्णशष्कुलिका’: जलेबी के मुगलीकरण पर बहस

इतिहास के साथ छेड़छाड़ करके उसे आज की पीढ़ी के सामने रखना सोशल मीडिया पर एक प्रचलन की तरह है। संस्कृति, सभ्यता से लेकर खाने पीने तक की चीजों में नैरेटिव घुसाने की कोशिश अक्सर यहाँ होती रहती है। ऐसे में तथ्य व तर्क ही इस नैरेटिव को धराशायी करने के कारगर तरीके हैं। हाल ही में कुछ ऐसा ही जलेबी को लेकर हुआ है। जी हाँ, बिरयानी के बाद अब जलेबी को लेकर दावा किया जा रहा है कि इसे भारत में मुस्लिम लेकर आए।

‘गुजरात हिस्ट्री’ नाम के ट्विटर हैंडल से कल दावा किया गया कि भारत में जलेबी मुस्लिमों की देन हैं। जलेबी नाम अरबी के शब्द जलाबिया से निकला है। फारसी में इसे जलिबिया कहा जाता है। यह भारत का मशहूर मिष्ठान है। इसके अलावा मुस्लिम भारत में चपाती बनाने की कला, कुल्फी, गुलकंद, गुलाबजामुन, जलेबी, पुलाव, फालुदा, बर्फी, बीरंज, मुरब्बो, हल्वो, शिरो और शक्कर पारा लेकर आए थे।

आगे ट्वीट में ‘गुजरात हिस्ट्री’ लिखता है कि मध्यकाल में कई सदियों तक मुस्लिमों ने भारत में राज किया। इसके बाद उन्होंने यह भी लिखा कि कुछ लोग हो सकता है उनके ट्वीट को पसंद करें कुछ न पसंद करें लेकिन वह ऐतिहासिक तथ्यों को नहीं बदल सकते।

अपने ट्वीट का स्रोत उन्होंने गुजरात की एक इतिहास की किताब, ‘भारत का सांस्कृतिक इतिहास’ को बताया है। साथ ही लिखा कि मुस्लिमों के 550 साल के शासल काल में मुस्लिमों और हिंदुओं के बीच खानपान, रहन-सहन, भाषा, मान्यताओं, संस्कृति और परंपराओं का आदान प्रदान हुआ।

अब ‘गुजरात हिस्ट्री’ के इसी दावे पर कुछ लोगों में काफी नाराजगी है। ‘आदि’ नाम के एक ट्विटर यूजर ने दावा किया है कि जलेबी प्रभु राम के जन्मदिन पर भी बनाई जाती थी जिसका जिक्र हिन्दुओं की आध्यात्मिक पुस्तक ‘रामायण’ में है। उस समय जलेबी को ‘कर्णशष्कुलिका’ कहा जाता था।

इसके बाद एक राज शर्मा नाम के ट्विटर यूजर ने बताया कि जलेबी चूँकि कान के पन्ना जैसी लगती थी इसलिए इसका नाम ‘कर्णशष्कुलिका’ रखा गया। इसके अलावा, 17वीं सदी की किताब में एक मराठा ब्राह्मण रघुनाथ ने जलेबी बनाने की विधि का उल्लेख कुण्डलिनि नाम से किया है। इसका आधार ‘भोजनकुतूहल’ नाम की किताब है।

राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के जानकार दिव्य कुमार सोती लिखते हैं, “बर्फी बनाने के लिए दूध, बिरयानी बनाने के लिए चावल, मुरब्बा बनाने के लिए आँवला और जलेबी बनाने के लिए गुड़-चीनी मुसलमान अरब के रेगिस्तान से भारत लेकर आए थे। इतिहास नहीं जानते तो कम से कम आपको भूगोल और खेती का तो पता होना चाहिए!”

इसी प्रकार एक यूजर @commentlogy लिखता है कि मुगलों से 1500 साल पहले संगम काल में तमिल कविता में जिक्र है कि आखिर कैसे चावल व मसालों से मीट बनता था इसलिए ये मानना कि पुलाव मुगलों ने सिखाया गलत है और इसे सूची से हटाया जाए।

डॉ पीएस विष्णुवर्धन तंज भरे अंदाज में लिखते हैं, “तो धरती के सबसे अमीर भारतीय आदि काल की तरह तब तक कच्चा माँस खाते थे, जब तक धरती के सबसे गरीब इलाकों से मुगल यहाँ आइस्क्रीम और बिरयानी  नहीं लेकर आए।”

ट्विटर का मशहूर ट्विटर अकॉउंट ‘ट्र इंडोलॉजी’ भी गुजरात हिस्ट्री को चपाती बनाने की विधि पर आड़े हाथों लेता है और पूछता है कि रोटी बनाने की विधि मुस्लिम लेकर आए भारत में? फिर कहता है, “महान, चपाती मूलत: संस्कृत शब्द चर्पटी से निकला है। दोनों का अर्थ एक ही होता है। ऐसे कोई शब्द फारसी और अरबी में नहीं है। चर्पटी का उल्लेख अम्राकोसा (Amarakośa) में है, जिसे पैगंबर के जन्म से भी सैकड़ों साल पहले लिखा गया था।”

राजस्थान: सैलरी माँगने पर दलित सेल्समैन को शराब ठेकेदारों ने डीप फ्रीजर में डाल ज़िंदा जलाया

राजस्थान में हिंसा की घटनाएँ थमने का नाम ही नहीं ले रही हैं। अलवर के कुमपुर गाँव से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ शनिवार (अक्टूबर 24, 2020) को एक सेल्समैन की शराब का ठेका चलाने वाले ने सिर्फ इसीलिए हत्या कर दी, क्योंकि वो सैलरी माँग रहा था। उक्त सेल्समैन को डीप फ्रीजर में डाल कर जिंदा ही जला डाला गया। उसका अपराध ये था कि उसने अपनी पाँच महीने से रोकी हुई सैलरी की माँग की थी। राजस्थान की इस घटना को लेकर सत्ताधारी कॉन्ग्रेस नेता चुप हैं।

थानाधिकारी द्वारा सिंह ने जानकारी दी है कि झाड़का निवासी रमेशचंद्र के पुत्र रूप सिंह धानका ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि उनका भाई 23 वर्षीय कमल किशोर शराब ठेका संचालक राकेश यादव और सुभाषचंद के यहाँ काम करता था। कुमपुर-भगेड़ी मोड़ पर एक कंटेनर में इस ठेके को चलाया जा रहा था। ठेकेदार ने कमल किशोर को 5 महीने से सैलरी नहीं दी थी। माँगने पर उससे मारपीट की जाती थी और उसे धमकाया जाता था।

दोनों ठेकेदार माछरोली के निवासी हैं। शनिवार की शाम ये दोनों कमल किशोर के घर आए और उसे ले गए। जब कमल पूरी रात घर नहीं आया तो परिवार वालों को लगा कि वो ठेकेदारों के साथ कहीं गया होगा। इसके अगले दिन मिली कि कुमपुर शराब ठेके में आग लग गई है। पुलिस ने परिजनों के साथ घटनास्थल पर पहुँच कर लोहे के कंटेनर को खुलवाया। अंदर कमल किशोर का शो डीप फ्रीजर में बैठी हुई अवस्था में मिला, जो पूरी तरह जल चुका था।

आरोप है कि ठेकेदार राकेश और सुभाष ने पेट्रोल डाल कर कमल को ज़िंदा जलाया और फिर कंटेनर को भी आग के हवाले कर दिया। परिजनों की शिकायत के बाद भेड़टा श्योपुर निवासी सुभाष यादव और फातियाबाद निवासी राकेश यादव के खिलाफ हत्या के साथ-साथ एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। आरोपित राकेश की माँ सरपंच है। पुलिस ठेके के कागजात की जाँच-पड़ताल कर रही है।

इस ठेके को कंटेनर में चला कर आबकारी विभाग के नियम-कायदों की सरेआम धज्जियाँ उड़ाई जा रही थीं। नियमानुसार सीसीटीवी कैमरे भी नहीं फिट किए गए। तमाम मापदंडों के उल्लंघन के बावजूद विभाग सुषुप्त अवस्था में बैठा रहा, जिससे उस पर भी तमाम सवाल उठ रहे हैं। डीएसपी ने इस मामले को गंभीर संदिग्ध बताया है। परिजन न्याय की माँग करते हुए शव का पोस्टमॉर्टम न कराने की जिद पर अड़े थे, लेकिन प्रशासन के समझने के बाद वो मान गए।

‘आज तक’ की खबर के अनुसार, खैरथल थाने में एफआईआर नंबर 405/20 आईपीसी की धारा 302, 436, 120 बी व 3(2)(v) एससी-एसटी के तहत दर्ज की गई है। दोनों ठेकेदार फ़िलहाल फरार हैं। आरोप है कि दुकान में लाखों का माल जलने के बाद भी वो सामने नहीं आए और हत्या के आरोप के बाद भी पुलिस ने उनकी तलाश करने का प्रयास नहीं किया। दुकान की चाभी भी मृतक के पास ही मिली। प्रक्रिया के बाद शव को परिजनों को सौंप दिया गया है।

कुछ ही दिनों पाहे राजस्थान में करौली जिले के बूकना गाँव में जमीन को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद में 50 वर्षीय पुजारी बाबूलाल वैष्णव को पेट्रोल डालकर जिंदा जला दिया गया था। बाबूलाल वैष्णव को गंभीर हालत में जयपुर के एसएमएस अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहाँ उन्होंने दम तोड़ दिया। इस बीच, राज्य के साधुओं ने मंदिर के पुजारी की हत्या के विरोध में सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया था। बाबूलाल गाँव के राधागोविंद मंदिर के प्रधान पुजारी थे।

प्रकाश जावड़ेकर ने तकनीक संग दिया कोरोना जागरूकता का संदेश, पिछले 6 हफ्ते से लगातार कोविड पर आ रही गुड न्‍यूज

कोरोना वायरस की महामारी से उत्पन्न चुनौती और खतरे से निपटने के लिए भारत सरकार सभी आवश्यक कदम उठा रही है। इस बीच मंत्री भी अपने-अपने तरीके से संदेश देकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं। इसी कड़ी में केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने अनोखे तरीके से लोगों के बीच अपना संदेश जारी किया।

उन्होंने सोशल मीडिया और फेसबुक के कवर फोटो के माध्यम से लोगों के समक्ष कोरोना को लेकर जागरूकता फैलाई। इस क्रम में उन्होंने वन्यजीव के संरक्षण को लेकर भी संदेश दिया। एक कवर फोटो में #UnlockWithPrecautions के हैशटैग का इस्तेमाल करते हुए 6 फीट की दूरी बनाए रखने का संदेश दिया। इसके साथ ही उन्होंने फेस मास्क, हाथ धोने और सेनेटाइजर के इस्तेमाल पर भी जोर दिया। 

इसी तरह एक अन्य कवर फोटो में उन्होंने 2 से 8 अक्टूबर तक वन्यजीव सप्ताह को लेकर संदेश दिया। इसमें लिखा गया था, “वन्यजीव है हमारी धरोहर, हर हाल में करेंगे इसका संरक्षण।” 

उल्लेखनीय है कि कोविड-19 के नए मामलों में इस हफ्ते (19-25 अक्‍टूबर) सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई। पिछले हफ्ते के मुकाबले करीब 16% कम नए मामले सामने आए जबकि मौतों की संख्‍या में इस दौरान 19% कम रही। इस हफ्ते 3.6 लाख से थोड़े ज्‍यादा केस आए हैं जो कि पिछले तीन महीनों का सबसे कम आँकड़ा है। इससे पहले 20-26 जुलाई के बीच कोरोना वायरस के 3.2 लाख केस आए थे। पिछले हफ्ते देश में करीब 4.3 लाख केस दर्ज हुए थे। यह लगातार छठा हफ्ता है, जब देश में कोविड पीक (7-13 सितंबर) के बाद से मामले कम दर्ज किए गए हैं। एक तरह से यह दिखाता है कि भारत में कोरोना महामारी काबू में आ रही है।

रिकवरी रेट अब 90 पर्सेंट के पार

रविवार (अक्टूबर 25, 2020) को भारत ने कोरोना के खिलाफ लड़ाई में अहम मुकाम हासिल किया। कोविड-19 की रिकवरी दर 90% से ज्‍यादा हो चुकी है। कुल 79.1 लाख में से अब‍ तक करीब 71.3 लाख लोग रिकवर कर चुके हैं। पिछले हफ्ते के मुकाबले वायरस से मौतों की संख्‍या 19% कम रही है। इस हफ्ते कोविड-19 से देश में लगभग 4,400 मौतें हुईं जबकि पिछले हफ्ते 5,455 मरीजों की मौत हुई थी। 14-20 सितंबर वाले हफ्ते के बाद से हर हफ्ते मौतों की संख्‍या भी घटी है।

रविवार को लगभग हर राज्‍य में कोविड-19 के आँकड़ों में कमी देखी गई, लेकिन दिल्‍ली अपवाद रही। वहाँ पर 4,136 नए मामले सामने आए जो पिछले 38 दिन में सबसे ज्‍यादा हैं। दशहरा और दुर्गा पूजा के बीच कर्नाटक देश का तीसरा राज्‍य बन गया है जहाँ 8 लाख से ज्‍यादा कोविड केस हैं। वहाँ रविवार को 4,439 नए मामले सामने आए। कोविड संक्रमण से सबसे ज्‍यादा प्रभावित महाराष्‍ट्र है और वहाँ कुल मामले 17 लाख के करीब पहुँच गए हैं।

ठाकरे के गाँजे की खेती वाले बयान पर कँगना का जवाब- ये महादेव, पार्वती का घर है जिसे देवभूमि कहते हैं

बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत ने महाराष्ट्र मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के ऊपर एक बार फिर निशाना साधा है। कंगना ने एक वीडियो जारी कर महाराष्ट्र के सीएम व महाराष्ट्र सरकार से कुछ सवाल किए हैं। उन्होंने अपनी वीडियो में अपने ऊपर हुई टिप्पणी को लेकर पूछा कि अब नारी सशक्तिकरण वाले कहाँ गए। उन्होंने कहा कि जिस हिमाचल के बारे में सीएम ने तुच्छ बातें की उसे देवभूमि कहा जाता है। दरअसल, उद्धव ठाकरे ने एक बयान में कहा था कि हम घरों में तुलसी उगाते हैं, गाँजा नहीं! ठाकरे ने यह भी कहा था कि गाँजा उनके राज्य में उगता है, ना कि महाराष्ट्र में।

कंगना ने वीडियो में कहा, “उद्धव ठाकरे तुमने कल मुझे अपने भाषण में गाली दी। मुझे नमक हराम कहा। इससे पहले भी मुझे सोनिया सेना के कई लोगों ने मुझे गंदी गलियाँ दी हैं। मुझे धमकाया है। मेरे जबड़े तोड़ने की बात या मुझे मारने की बात खुलेआम कही है। लेकिन आप देखेंगे कि नारी सशक्तिकरण के ठेकेदारों ने कुछ नहीं कहा।”

आगे कंगना ने कहा, “उसी भाषण में उद्धव ठाकरे ने माता पार्वती की जन्मभूमि और महादेव की कर्मभूमि हिमालय पर टिप्पणी की। आज भी यहाँ कण-कण में माँ पार्वती और भगवान शिव बसे हुए हैं। इसे देवभूमि कहा जाता है फिर भी इसके बारे में इतनी तुच्छ बातें की गई।”

बॉलीवुड एक्ट्रेस ने शिवसेना नेता को लेकर कहा कि एक मुख्यमंत्री होने के बावजूद उद्धव ठाकरे ने पूरे राज्य को नीचे गिराया है क्योंकि वह एक लड़की से नाराज हैं और वो लड़की उनके बेटे की उम्र की है।

रनौत कहती हैं, “चीफ मिनिस्टर आप मुझसे बहुत ज्यादा नाराज हुए थे जब मुझे धमकाने के बाद मैंने वहाँ (मुंबई) की तुलना पीओके से की थी क्योंकि वहाँ आजाद कश्मीर के नारे लगे थे और आपकी सोनिया सेना ने उसे डिफेंड किया था। तब संविधान को बचाने वाले आए थे। लेकिन आपने अपने भाषण में भारत की तुलना पाकिस्तान से की, पर अब वह संविधान वाले नहीं आएँगे क्योंकि उनके मुँह में कोई पैसा नहीं ठूस रहा है।”

अपनी बात रखते हुए कंगना ने कहा, “मैं कहना चाहती हूँ कि जितने भी देशभक्त लोग हैं उनका एक रवैया मैंने देखा है कि वो कोई सहायता नहीं करते। उनका कहना होता है कि यदि आप देश भक्ति के बारे में बात करते हैं, देश के लिए कुछ कर रहे हैं, तो कौन सा हमारे लिए कर रहे हैं, देश के लिए कर रहे हैं। वो कहते हैं कि हमारे पास न पैसे हैं, न हमें ठूसने आते हैं, न हम खुद ही लेते हैं। लेकिन देश विद्रोह के लिए आपके मुँह में पैसे ठूसे जाते हैं।” 

वह कहती हैं कि कल एक मुख्यमंत्री ने एक लड़की को सरेआम गाली दी। लेकिन ऐसे लोगों ने कुछ नहीं कहा। उन्होंने उद्धव ठाकरे को कहा, “कुल मिलाकर मैं ये बात कहना चाहती हूँ मुख्यमंत्री जी सरकार आती जाती हैं। आप सरकारी कर्मचारी हैं। मुंबई के लोग आपसे खुश नहीं हैं। सत्ता आती जाती है चीफ मिनिस्टर लेकिन जो एक बार सम्मान खो देता है वह उसे नहीं पा सकता है।”

कंगना रनौत का पोस्ट

कंगना रनौत के पोस्ट

अपने एक पोस्ट में भी कंगना ने महाराष्ट्र सीएम को तुच्छ व्यक्ति बताया है। उन्होंने लिखा:

”मुख्यमंत्री आप बहुत तुच्छ व्यक्ति हैं। हिमाचल को देव भूमि कहा जाता है, यहाँ सबसे अधिक संख्या में मंदिर हैं और क्राइम रेट शून्य है। हाँ, यहाँ की जमीन बहुत उपजाऊ है, यह सेब, कीवी, अनार और स्ट्रॉबेरी की उपज होती है, यहाँ कोई कुछ भी उगा सकता है। आप एक ऐसे नेता हैं जिसका नजरिया एक ऐसे राज्य को लेकर बदला लेने वाला, अदूरदर्शी और कम जानकारी वाला है, जो भगवान शिव और मां पार्वती का निवास स्थान है। इसके अलावा कई महान संतों जैसे मार्केंडेय, मनु ऋषि और पांडवों ने निर्वासन का लंबा समय हिमाचल में बिताया।”

रनौत ने आगे लिखा, ”मुख्यमंत्री, आपको खुद पर शर्म आनी चाहिए, जनसेवक होने के बावजूद आप इस तरह के तुच्छ झगड़े में शामिल हैं, अपनी शक्ति का इस्तेमाल आपसे अहसमत लोगों के अपमान और नुकसान के लिए कर रहे हैं। गंदी राजनीति खेलकर आपने जो कुर्सी हासिल की है, उसके लायक आप नहीं हैं। शर्म की बात है।” 

Hindustantimes

एक ट्वीट में वह लिखती हैं कि एक मुख्यमंत्री की जुर्रत देखिए वह देश को बाँट रहा है, किसने उन्हें महाराष्ट्र का ठेकेदार बनाया? वह केवल जनसेवक हैं, उनसे पहले वहाँ कोई और था और जल्द ही वह बाहर होंगे और कोई और राज्य की सेवा के लिए आएगा। वह ऐसा क्यों व्यवहार कर रहे हैं कि महाराष्ट्र के मालिक हैं।

गौरतलब है कि उद्धव ठाकरे ने दशहरा उत्सव में जनता को संबोधित करते हुए कंगना रनौत के लिए नमक हराम जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था। उन्होंने यह भी कहा था कि लोग मुंबई की इस तरह की तस्वीर बनाना चाहते हैं कि मुंबई पीओके हैं, यहाँ हर जगह ड्रग्स लेने वाले लोग हैं। वे नहीं जानते कि हमारे घरों में तुलसियाँ उगाते हैं, गांजा नहीं। गांजे के खेत आपके राज्य में है। आप जानते हो कहाँ, महाराष्ट्र में नहीं।

भारत का, भारत के लिए समर्पित मीडिया समूह IDMA: ऑपइंडिया, रिपब्लिक समेत 9 ग्रुप लगाएँगे विदेशी हस्तक्षेप पर लगाम

‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ और ‘ऑपइंडिया’ सहित 9 मीडिया संस्थानों ने मिल कर ‘इंडियन डिजिटल मीडिया असोसिएशन (IDMA)’ नामक प्लेटफॉर्म का गठन किया है। ये भारत में डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का सबसे बड़ा समूह है। ये भारत के स्वामित्व वाला, भारत का, और भारत के लिए समर्पित मीडिया समूह होगा। इसके सभी संस्थापक सदस्यों के 10 करोड़ यूजर्स हैं और ये सभी ‘इंडिया फर्स्ट’ की थ्योरी पर काम करेंगे।

इसमें रिपब्लिक, ऑपइंडिया, गोवा क्रॉनिकल, OTV डिजिटल, देश गुजरात, असम लाइव, न्यूज एक्स, संडे गार्जियन और इन खबर शामिल हैं। इसके साथ ही 25 से अधिक डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म इससे जुड़ने वाले भी हैं। ऑपइंडिया अंग्रेजी की संपादक नूपुर शर्मा ने इसका स्वागत करते हुए कहा कि डिजिटल मीडिया के पास राष्ट्रीय चर्चाओं को आकार देने की सामर्थ्य है। उन्होंने कहा कि पंचलाइंस और एजेंडा की जगह अब सच्चाई ने ले ली है।

भारतीय इतिहास के इस सबसे बड़े डिजिटल मीडिया समूह IDMA का उद्देश्य न सिर्फ सभी सदस्यों के हितों की रक्षा करना है, बल्कि इससे सम्बद्ध संगठनों से लेकर यूजरों तक से भी संपर्क स्थापित करना है। ये राष्ट्रवादी सिद्धांतों पर काम करेगा और इसके सभी सदस्य भारतीय होंगे, इसमें कोई विदेशी शामिल नहीं होगा। मीडिया में विदेशी हस्तक्षेप और नियंत्रण को कम करना भी इसका उद्देश्य है। समूह ने विदेशी स्वामित्व के खिलाफ सभी सम्पादकों को आगे आने की अपील की है।

लगातार बदलती दुनिया में डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का आगे आने वाली पत्रकारिता को आकार देने में एक बड़ा रोल होगा और इसे राष्ट्रवादी, नैतिक, पारदर्शी, डायनेमिक और भारतीय हितों की रक्षा के सिद्धांत के साथ IDMA को लॉन्च किया गया है। समूह का मानना है कि भारतीय मीडिया में विदेशी स्वामित्व से देश के हितों के साथ समझौता होता है और इसे खत्म किया जाना चाहिए। इससे जनता के ‘राइट टू इन्फॉर्मेशन’ की रक्षा भी करनी है।

रिपब्लिक और ऑपइंडिया सहित ये सभी 9 मीडिया प्लेटफॉर्म्स डिजिटल मीडिया समूह IDMA के संस्थापक सदस्य होंगे। ‘गोवा क्रॉनिकल’ के संपादक सेविओ रोड्रिगुएस ने कहा कि अगले कुछ दिनों में भारत डिजिटल मीडिया की तरफ एक बड़ा शिफ्ट देखने वाला है। उन्होंने कहा कि ‘वाइब्रेंट इंडिया’ की मुख्य आवाज़ के रूप में IDMA का गठन इन मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ आने से हुआ है, जो ‘डिजिटल मीडिया स्पेस’ को सुरक्षित रखेंगे।

NIT पटना की छात्रा की तस्वीर का दैनिक भास्कर ने किया ड्रग केस में इस्तेमाल, सोशल मीडिया ने खोली पोल

मीडिया अपने पाठकों के साथ किस तरह की बेईमानी करता है, इसका ताजा उदाहरण एक बार फिर देखने को मिला। दरअसल, परसों एक खबर आई कि ड्रग्स मामले में एनसीबी ने टीवी कलाकार प्रीतिका चौहान के खिलाफ़ कार्रवाई की है और उन्हें 8 नवंबर तक के लिए जेल भेज दिया है।

इस खबर को लगभग हर मीडिया चैनल व समाचार पत्रों ने प्रमुखता से उठाया। दैनिक भास्कर भी इस भीड़ में पीछे नहीं छूटा। उन्होंने भी प्रीतिका के ख़िलाफ़ लिए गए एक्शन पर अपनी खबर की। हालाँकि, खबर के साथ उन्होंने एक तस्वीर का इस्तेमाल किया, जो न तो प्रीतिका की थी और न ही प्रतीकात्मक तस्वीर थी।

इसके बाद सोशल मीडिया पर यह मुद्दा उठा। दैनिक भास्कर की ‘जागरूकता’ की पोल खोलते हुए BefittingFacts ने तथ्य सामने रखे। ट्विटर अकॉउंट से बताया गया कि दैनिक भास्कर अपनी खबर में जिस लड़की को प्रीतिका चौहान बताकर खबर दे रहा है कि उन्हें ड्रग केस में अरेस्ट किया गया, वह लड़की अनीता भारती है, पटना में पढ़ती है न कि प्रीतिका चौहान।

अपनी बात को साबित करने के लिए ट्विटर अकॉउंट होल्डर ने एक और पेपर की कटिंग शेयर की, जिसमें अनीता भारती और उनके भाई अभिषेक भारती की तस्वीर है। ये दोनों पिछले दिनों अपनी वेबसाइट ट्यूऑन खोलने के कारण चर्चा में आए थे। इन्होंने इस वेबसाइट के जरिए एक सकारात्मक पहल की शुरुआत की थी और बच्चों को एक ऐसा प्लेटफॉर्म मुहैया करवाया था, जहाँ वह मुफ्त ट्यूशन ले सकें।

इस पेपर कटिंग के मुताबिक अनीता एनआईटी पटना से इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग की छात्रा हैं। मगर, दैनिक भास्कर उनके चेहरे का इस्तेमाल प्रीतिका के रूप में कर रहा है। साथ ही बता रहा है कि उनके पास से 99 ग्राम गांजा बरामद हुआ है।

BefittingFacts अपने ट्वीट में लिखते हैं, “दैनिक भास्कर ने ड्रग संबंधी केस में हुई प्रीतिका चौहान की गिरफ्तारी के लिए अनीता भारती की तस्वीर का इस्तेमाल किया। दैनिक भास्कर द्वारा घटिया स्तर की पत्रकारिता।”

गौरतलब हो कि एक ओर जहाँ पर मौजूद जानकारी के मुताबिक साल 2019 तक इस अखबार का सर्कुलेशन प्रतिदिन 45,79,051 का है, ऐसे में सोचने वाली बात है कि अगर इनकी ऐसी लापरवाही की पोल सोशल मीडिया पर खुल भी गई तो क्या हर पाठक तक इनकी गलती पहुँच पाएगी। शायद नहीं!

‘दैनिक भास्कर’ मीडिया जगत में 6 दशक को पार कर चुका है और यह अखबार गाँव-गाँव तक में अपनी जगह बना चुका है। ऐसे में संभव ही नहीं है कि इनके बिना गलती माने इनकी लापरवाहियों की पोल हर किसी के सामने खुल पाए। ऐसे ही संस्थान हमेशा से पाठक को बेवकूफ बनाकर कामचलाऊ पत्रकारिता करते आए हैं। इन्होंने अपनी लापरवाही के नाम पर कभी मौलवी को बाबा बताया है तो कभी मुस्लिम आलिम को तांत्रिक लिखने का काम किया है।

IAS अधिकारी ने जबरन हवन करवाकर पंडितों को पढ़ाया ‘समानता का पाठ’, लोगों ने पूछा- मस्जिद में मौलवियों को भी ज्ञान देंगी?

हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में स्थित माँ शूलिनी के मंदिर में IAS अधिकारी रितिका जिंदल द्वारा पंडितों को ज्ञान देने की बातें कुछ लोगों को पसंद नहीं आई हैं और वो पूछ रहे हैं कि क्या अन्य मजहबों व उनके प्रार्थना स्थलों में जाकर भी अधिकारीगण इस तरह भाषण झाड़ सकते हैं? रितिका जिंदल का दावा है कि पंडितों ने दुर्गाष्टमी के दिन महिला होने के कारण उन्हें हवन में हिस्सा लेने से रोका, जिसके बाद उन्होंने ब्राह्मणों को ‘बराबरी’ का पाठ पढ़ाया।

रितिका जिंदल का कहना है कि अष्टमी के दिन हम महिलाओं के सम्मान की बात तो की जाती है, लेकिन उन्हें उन्हीं के अधिकारों से वंचित रखा जाता है। उनकी मानें तो वो सुबह मंदिर में व्यवस्थाओं का निरीक्षण करने गई थीं। मंदिर में महिलाओं के प्रवेश और पूजा करने पर कोई रोक नहीं है, लेकिन वहाँ हवन चल रहा था और उन्हें कहा गया कि वो महिला होने के कारण हवन में नहीं बैठ सकतीं। इस पर उन्होंने विरोध जताया।

IAS अधिकारी रितिका जिंदल का कहना है कि उन्हें ये सब सुनकर धक्का लगा और इसीलिए उन्होंने समानता की बातें कर हवन में हिस्सा लिया। उनका कहना है कि वो मंदिर अधिकारी की हैसियत से वहाँ गई थीं और वो एक IAS अधिकारी बाद में हैं, एक महिला पहले हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और संविधान की बातें करते हुए कहा कि लिंग या जाति के आधार पर किसी को पूजा करने से नहीं रोका जा सकता।

उन्होंने कहा कि हमारे समाज में एक रूढ़िवादी ख्याल है, एक पितृसत्तात्मक भाव है, जिसे ख़त्म कर के सभी को बराबरी की तरफ बढ़ना पड़ेगा। रितिका जिंदल ने बताया कि उन्होंने पंडितों से साफ़-साफ़ कह दिया कि वो शूलिनी मंदिर में हवन में हिस्सा लेंगी और पूजा की सारी प्रक्रियाएँ करेंगी। उन्होंने ये भी कहा कि उन्होंने पंडितों को निर्देश दिया है कि आगे से किसी अन्य महिला को नहीं रोका जाना चाहिए। बता दें कि शूलिनी मंदिर में महिलाओं द्वारा पूजा-पाठ पर कोई रोक नहीं है।

अभिजीत अय्यर मित्रा ने तंज कसते हुए कहा कि एक IAS ‘जोकर’ हिन्दू ब्राह्मणों को ‘समानता के अधिकार’ के बारे में सिखा रही हैं, एक अन्य अधिकारी किसी खास चैनल पे ब्रांड्स द्वारा एड न देने को लेकर अभियान चला रहा है। उन्होंने कहा कि एक अन्य अधिकारी ने बिना आर्थिक समझ ने सरकार के सामने आर्थिक पुनरुद्धार का ब्लूप्रिंट पेश कर दिया। मित्रा ने कहा कि इन सबके बावजूद वामपंथी संस्थाओं के राजनीतिकरण का मुद्दा उठा कर चिल्ला रहा है।

दिक्कत ये है कि क्या पंडितों को ‘समानता का पाठ’ पढ़ाने वाले IAS अधिकारी मौलवियों को ये पाठ पढ़ाएँगे? चर्चों में जाकर पादिरयों द्वारा यौन शोषण की आई कई खबरों का जिक्र करते हुए ज्ञान देंगे? और हाँ, जब बात समानता की ही हो रही है तो क्या वो इसके लिए आवाज़ उठाएँगे कि ‘मंदिर अधिकारी’ की तरह मस्जिदों और चर्चों के लिए भी उन्हें अधिकारी नियुक्त किया जाए? लोग यही पूछ रहे हैं। केरल के सबरीमाला को लेकर भी कई सालों से विवाद होता रहा है।

नसीब बदलने का दावा करने वाले काले खान, हारून ने जलाया युवक का हाथ: मीडिया ने बताया ‘तांत्रिक’

उत्तर प्रदेश के फतेहगंज में पुलिस ने काले खान और हारून खान नामक दो ठग फकीरों को गिरफ्तार किया है। ये दोनों अपनी ‘शक्ति’ के बल पर भाग्य उदय का दावा किया करते थे। उनके पास से पुलिस ने दो तमंचे भी बरामद किए हैं। सोमवार (अक्टूबर 26, 2020) को उन्हें कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें जेल भेज दिया जाएगा। ये दोनों भोजीपुरा थाना क्षेत्र स्थित घघोरा गाँव के निवासी हैं, लेकिन वो टिटौली गाँव के मजार पर रहा करते थे।

वो खुद को तांत्रिक बताते हुए लोगों के भाग्य बदलने का दावा किया करते थे। वो कई सालों से ठगी के इस कारोबार में लगे हुए थे। दरअसल, हुआ यूँ कि करीब एक महीने पहले गाँव का ही एक युवक काम करते समय छत से गिर गया था, जिसके बाद उसकी मृत्यु हो गई। इस खबर की सूचना मिलते ही काले खान और हारून नामक इन फकीरों ने अपने एक चेले को मृतक के परिजनों के घर भेजा। उसने घर में भूत-प्रेत का साया होने की बात कही, जिससे वो लोग घबरा गए।

हाल ही में घर के मुखिया की मौत होने के कारण परिजनों को ये आशंका सही लगी और वो इन फकीरों के झाँसे में आ गए। फकीरों के चेले ने उस घर के लोगों को लेकर मजार पर लाकर इन दोनों ठगों से मिलवाया। इन दोनों ने 15 हजार रुपए लेकर घर में सब ठीक करने और नया भाग्य जगाने का दावा किया। इसमें से पाँच हजार रुपए उन्होंने बतौर एडवांस ऐंठ भी लिए। शनिवार (अक्टूबर 24, 2020) को ये दोनों परिजनों के घर में पहुँच गए।

यहाँ इन दोनों ने चमत्कार दिखाने के नाम पर घर के एक युवक के हाथ पर एक तरल पदार्थ डाल दिया। इससे उसके हाथ में आग लग गई। काफी देर तक आग लगे रहने के कारण उसका हाथ जल गया। चीख-चिल्लाहट सुन कर गाँव के कई लोग जमा हो गए, जिन्होंने तत्काल इस धोखाधड़ी की सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने काले खान और हारून को गिरफ्तार कर लिया। थाना प्रभारी चंद्रकिरण ने कहा कि ये दोनों काफी समय से इस जालसाजी में लगे हुए थे।

इनके पास से दो-दो जिन्दा कारतूस भी बरामद हुए हैं। वहीं मीडिया के एक धड़े ने फिर से काले खान और हारून का नाम छिपाते हुए ‘तांत्रिक’ शब्द को हैडिंग में डाल कर चलाया, जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि गिरफ्तार होने वाले हिन्दू तांत्रिक हैं, जबकि सच्चाई कुछ और है। साथ ही हैडिंग में ‘तंत्र विद्या’ की इस तरह से चर्चा की गई, जिसे ये दोनों हिन्दू हों। मीडिया लम्बे समय से आरोपितों की पहचान छिपाने के लिए ऐसा करता आ रहा है।

कुछ ही दिनों पहले खबर आई थी कि लखनऊ स्थित हुसैनाबाद, जामा मज़ार में एक मौलाना कथित तौर पर ऐसे दंपति का उपचार कर रहा था, जिनकी संतान नहीं थी। उपचार की आड़ लेकर वह महिला का यौन शोषण करवा रहा था। इसके अलावा आरोप यह भी है कि वह मज़ार के भीतर ही देह व्यापार का धंधा भी करता था। टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने मौलाना को ‘तांत्रिक’ बता कर खबर चलाई, जिससे लगे कि वो हिन्दू है।  

हमसे सवाल करने वालों के मुँह गोमूत्र-गोबर से भरे हैं: हिन्दू घृणा से भरे तंज के सहारे उद्धव ठाकरे ने साधा भाजपा पर निशाना

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री व शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने दशहरे के मौके पर भाजपा पर निशाना साधने के लिए वामपंथी और कट्टरपंथियों द्वारा उन्हीं की शैली में हिन्दू धर्म को अपमानित करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले ‘गोमूत्र और गोबर’ जैसे शब्दों को अपमानजनक तरीके से इस्तेमाल किया। उद्धव ठाकरे के इस बयान की वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल होने लगी। ट्विटर यूजर्स इस वीडियो को देखते हुए अपनी प्रतिक्रिया में कह रहे हैं कि तथाकथित रामभक्त भाजपा पर निशाना साधने के लिए गोमूत्र का मजाक बना रहे हैं।

वीडियो में उद्धव ठाकरे कहते सुने जा सकते हैं, “जो लोग हमारी सरकार पर सवाल उठाते हैं, उनके मुँह गोमूत्र और गोबर से भरे हुए हैं। वह हमारे ऊपर गोबर फेंकने की कोशिश कर रहे हैं, वो भी इस आशा से कि वह हमें चिपक जाए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ, हम साफ हैं। यह वो लोग हैं जिनके खुद के कपड़े गोमूत्र व गोबर से लिपटे हैं।”

गौरतलब है कि पौराणिक आयुर्वेद उपचार में गोमूत्र एक जरूरी हिस्सा होता था और आज के समय में भी इसे हिंदुओं में पवित्र माना जाता है। गौमूत्र को लेकर अक्सर वामपंथी व कट्टरपंथी लोग हिंदुओं को निशाना बनाते रहे हैं। ऐसे में शिवसेना नेता द्वारा की गई टिप्पणी साफ दर्शाती है कि उनकी मंशा ‘गोमूत्र’ को लेकर क्या है।

पिछले साल जब पुलवामा का हमला हुआ था और जैश के आतंकी आदिल डार ने अपनी वीडियो जारी की थी, तब उसने भी हिंदुओं को गोमूत्र पीने वाला बताया था। साथ ही कहा था कि वह अल्लाह के नाम पर ‘गाय का पेशाब पीने वालों को’ सबक सिखाना चाहता है।

शिवसेना के बदलते रूप

समय के साथ सबसे दिलचस्प चीज यह देखने वाली है कि शिवसेना नेता व खुद को रामभक्त कहने वाले मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने स्पष्ट रूप से अपने संबोधन में ‘गोमूत्र’ शब्द का इस्तेमाल करके हिंदूफोबिक टिप्पणी की है। हालाँकि, यही शिवसेना कुछ समय पहले तक कट्टर हिंदुत्ववादी विचारधारा के कारण पहचानी जाती थी। मगर, बाला साहेब ठाकरे की छवि का इस्तेमाल करके पहले शिवसेना ने विधानसभा का चुनाव लड़ा और उसके बाद सीएम की कुर्सी के लिए जाकर देश की ‘सेकुलर’ पार्टियों से गठबंधन कर लिया।

साल 2019 में शिवसेना का यह दोहरा रवैया सीएए के दौरान भी देखने को मिला था, जिसे लोकसभा में तो पार्टी का समर्थन मिला, लेकिन राज्यसभा में वह इसका विरोध करने लगे। महाविकास आघाड़ी सरकार ने राज्य में 10% आरक्षण को भी खत्म कर दिया है जिसे मोदी सरकार पिछले साल गरीबों के लिए लेकर आई थी ताकि शिक्षा व सरकारी क्षेत्रों में आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को फायदा मिल सके।

‘अपनी मर्जी से बिलाल के साथ गई, मेडिकल टेस्ट नहीं कराऊँगी’: फर्जी हिन्दू प्रेमी के बचाव में उतरी ₹8 लाख लेकर घर से भागी छात्रा

बरेली के ‘लव जिहाद’ मामले में नया मोड़ आया है। किला थाने में हिंदूवादी संगठनों के विरोध प्रदर्शन के बाद आरोपित युवक बिलाल को अजमेर से गिरफ्तार तो किया गया, लेकिन आरोपित ने दावा किया है कि उसने छात्रा से निकाह कर लिया है। वहीं छात्रा भी उसके बचाव में जुटी हुई है, जिससे पुलिस सकते में है। छात्रा ने न सिर्फ हॉस्पिटल के कर्मचारियों, बल्कि मजिस्ट्रेट के सामने भी एक के बाद एक दलीलें रख कर अपने क़ानूनी अधिकारों की बातें की।

इसके बाद उक्त छात्रा को नारी निकेतन भेज दिया गया है। अभी तक उसका मेडिकल टेस्ट नहीं हो सका है। अजमेर के होटल से मिलने के तुरंत बाद ही लड़की ने दो टूक कहा था कि वह बालिग है और अपनी मर्जी से प्रेमी बिलाल के साथ आई है। वो इसी बात को लगातार दोहरा रही है। जहाँ छात्रा शादी की बात से इनकार कर रही है, बिलाल का कहना है कि उनलोगों का निकाह हो चुका है। अब बरेली पुलिस भी असमंजस में है।

‘अमर उजाला’ की खबर के अनुसार, जब पुलिस और अस्पताल कर्मचारी छात्रा को उसके मेडिकल टेस्ट के लिए लेकर गए तो उसने अपने आधार कार्ड और हाईस्कूल के प्रमाण पत्रों को सामने रखकर खुद के बालिग होने की रट लगा दी और परीक्षण से इनकार कर दिया। उसने कहा कि जब उसके पास बालिग होने के सबूत हैं, फिर वो भला क्यों मेडिकल परीक्षण कराएगी? वो अस्पताल के कर्मचारियों से ही उलझ बैठी।

परेशान बरेली पुलिस को छात्र का मेडिकल परीक्षण कराए बिना ही लौटना पड़ा। अब उसके प्रमाण-पत्रों की जाँच होगी, जिसके बाद न्यायालय निर्णय लेगा कि आगे क्या किया जाना है। फ़िलहाल छात्रा ने अपने घर जाने से इनकार कर दिया है और बिलाल के साथ रहने की इच्छा प्रकट की है। उसे मंगलवार (अक्टूबर 27, 2020) को कोर्ट में पेश किया जाएगा। कोर्ट में वो क्या बयान देती है, इस पर सभी की नजर है।

लड़की के पिता ने बताया था कि बिलाल अक्सर हिंदू लड़कों की तरह रहा करता था और उसके कुछ और दोस्त भी तिलक लगाया करते थे। वो और उसके दोस्त हाथ में रक्षासूत्र भी बाँधते थे, जिसे देखकर लगता था कि वे हिंदू हैं। बेटी के घर से गायब होने के बाद जब उन्होंने बिलाल के बारे में पता किया, तब जाकर जानकारी मिली कि वो दूसरे मजहब का था। उसका दूध-दही का व्यापार है। उनका आरोप था कि बिलाल ने उनकी बेटी पर दबाव बनाया है। 

नकली आधार कार्ड बना कर इस्तेमाल करने के आरोप में बिलाल को फ़िलहाल जेल भेजा गया है। वहीं जारी किए गए वीडियो में लड़की असहज दिख रही थी और ऐसा लग रहा था कि वो घबराहट में बयान जारी कर रही है। बिलाल के पास से पुलिस ने चोरी के 3 लाख रुपए के साथ-साथ सोने की चैन भी बरामद कर ली है। हालाँकि, परिवार वालों का आरोप है कि बेटी 8 लाख रुपए लेकर घर से भागी थी।

बता दें कि बरेली में शनिवार (अक्टूबर 17, 2020) को एक लड़की गायब हो गई थी, जिसके परिवार ने आरोप लगाया था कि दूसरे समुदाय के एक युवक ने उससे शादी कर ली है। आरोप था कि ये शादी जोर-जबरदस्ती की गई। बरेली में भाजपा और विहिप के कार्यकर्ताओं ने इस घटना को ‘लव जिहाद’ बताते हुए थाने में जाकर विरोध प्रदर्शन किया था और छात्रा को छुड़ाने के साथ-साथ मामले में बिलाल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की थी। लड़की बीएससी की छात्रा है और कम्प्यूटर कोचिंग के लिए जाती थी।