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वामपंथन कविता कृष्णन ने ‘लव जिहाद’ से जताई अनभिज्ञता, कहा- मुझे एक भी केस नहीं मिले, ये लीजिए पढ़िए हाल के 10 से अधिक मामले

वामपंथी कविता कृष्णन ने मंगलवार (अक्टूबर 20, 2020) को राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष और महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोशियारी के बीच हुई बैठक पर अपनी नाराजगी जताई।

राष्ट्रीय महिला आयोग ने इस बैठक पर ट्वीट किया था, “हमारी अध्यक्ष रेखा शर्मा श्री भगत सिंह कोशियारी से मिली। महाराष्ट्र के महामहिम राज्यपाल ने बैठक में महिलाओं की सुरक्षा पर बात की। इसमें कोविड केंद्रों में महिलाओं के साथ हो रही छेड़छाड़, बलात्कार सहित लव जिहाद के मामले सम्मिलित थे।”

अब इस ट्वीट में उल्लेखित किए गए ‘लव जिहाद’ शब्द से सीपीआई (एमएल) सदस्य आहत हो गईं। उन्होंने आयोग अध्यक्ष की आलोचना करते हुए कहा कि रेखा शर्मा ने राष्ट्रीय महिला आयोग को शर्मसार किया है। 

कविता कृष्णन ने पूछा कि लव जिहाद क्या है? क्या अगर कोई मुस्लिम व्यक्ति हिंदू महिला से प्रेम करता है तो वह लव जिहाद है? कविता ने यह भी लिखा कि रेखा शर्मा की हिम्मत कैसे है कुर्सी पर बने रहने की। कृष्णन ने दावा किया कि उन्हें एक भी ऐसे केस नहीं मिले जहाँ मुस्लिम युवकों ने हिंदू बनकर महिला के साथ रिश्ता बनाया हो और उन पर धर्मांतरण का दबाव बनाया हो।

कविता कृष्णन ने लव जिहाद केसों पर कैसे अनभिज्ञता जताई

लव जिहाद के बढ़ते मामलों पर अनजान बनते हुए कविता कृष्णन जैसी वामपंथी महिला ने न केवल इन केसों पर अपनी अनभिज्ञता जताई बल्कि दावा किया कि उनकी रिसर्च में ऐसा कोई केस उनके सामने नहीं आया जहाँ मुस्लिम युवकों ने हिंदू महिला के साथ पहचान छिपा कर धोखा किया हो। उन्होंने अपनी बात रखते हुए रेखा शर्मा को कट्टर तक लिखा।

अब बता दें कि लव जिहाद एक ऐसी स्थिति है जहाँ मुस्लिम व्यक्ति हिंदू महिला को फँसाने के लिए उनसे झूठ बोलता है। वह या तो अपनी पहचान छिपाकर या अपना धर्म छिपाकर गैर मुस्लिम महिला के साथ संबंध बनाता है। कई बार लड़की को जब देर से हकीकत पता चलती है तो या तो उसे प्रताड़ित किया जाता है या फिर उसे मार दिया जाता है। कई बार महिला का जबरन धर्मांतरण करवा कर भी उसे नारकीय यातनाएँ दी जाती हैं।

यह कोई एक तकनीकी या कानूनी शब्दावली नहीं है, बल्कि इस शब्द का प्रयोग उन परिस्थितियों को देखकर किया जाता है जहाँ गैर मुस्लिम महिला पर मजहब परिवर्तन जैसे दबाव बनाए गए हों। कई बार कुछ पीड़िताएँ आपबीती सुनाते समय इस शब्द का प्रयोग नहीं करती, लेकिन उनके साथ हुए अन्याय की पूरी कहानी इस लव जिहाद शब्द को परिभाषित कर देती है।

कई महिलाएँ खुशकिस्मत होती हैं जो लव जिहाद की वीभत्सता का शिकार होने से पहले कट्टरपंथियों के चंगुल से निकल जाती हैं और दुनिया को हकीकत बताती हैं। मगर, कई दर्दनाक किस्से ऐसे भी होते हैं जिन्हें सुनाने के लिए लड़कियाँ जिंदा तक नहीं बच पाती।

आज कविता कृष्णन, जिन्हें लव जिहाद के मामले रिसर्च करने पर भी नहीं मिल रहे, उनके लिए हम कुछ केस लेकर आए हैं ताकि लव जिहाद शब्द का अर्थ उन्हें व उन जैसे लोगों को समझ आ सके।

वसीम अहमद ने दिनेश रावत बन दिया हिंदू लड़की को धोखा

हाल में, मेरठ में वसीम अहमद नाम के युवक के ख़िलाफ़ एक मामला दर्ज हुआ था। लड़की ने अपनी शिकायत में कहा था कि युवक ने उसे हिंदू बन कर प्रेम के जाल में फँसाया और उसके साथ शारीरिक संबंध स्थापित किए, बाद में उसकी वीडियोज भी वायरल कर दीं। लड़की ने शिकायत में कहा था कि वसीम ने उसे अपनी पहचान दिनेश रावत के रूप में बताई थी।

लड़की के बयान में कहा गया था कि वसीम ने उसे शादी का झाँसा दिया था, मगर बाद में बताया कि उसके दो बच्चे हैं। शिकायत में पीड़िता ने ये भी कहा था कि जब उसने वसीम से इन सबके पीछे वजह पूछी तो उसने कहा, “मैंने तुम्हें धोखा दिया क्योंकि मैं तुम्हें सबक सिखाना चाहता था।”

गोल्डी बन निजामुद्दीन ने विधवा को दिया धोखा

22 अगस्त 2020 को 25 साल की विधवा ने निजामुद्दीन नामक शख्स के खिलाफ़ शिकायत करवाई। इसमें उसने बताया कि निजामुद्दीन ने उससे अपना मजहब छिपाकर संबंध बनाए और उसे गर्भवती बनाया। उसने अपनी पहचान पहले गोल्डी बताई थी मगर बाद में पता चला वह मुस्लिम है। इस हकीकत के खुलने के बाद वह उसे प्रताड़ित करने लगा। कुछ दिन बाद निजामुद्दीन और उसके घरवालों ने महिला को घर से बाहर कर दिया। हर ओर से आस खत्म होने के बाद महिला थाने पहुँची और धोखेबाजी का मुकदमा दर्ज करवाया। 

पहचान छिपाकर खुर्शीद और अंसारी नें हिंदू बहनों को बनाया निशाना

सितंबर माह में दिल्ली के ओखला से एक लव जिहाद का केस सामने आया। खुर्शीद और अंसारी ने दो हिंदू बहनों को निशाना बनाया। जब लड़कियों को इस संबंध में मालूम चला तो उन्होंने किसी भी प्रकार के रिश्ते को रखने से मना कर दिया, तब इन युवकों ने पार्किंग का बहाना बनाकर लड़की के परिवार पर हमला बोल दिया। इस घटना में लड़की के पिता की टाँग टूट गई थी। उनका इलाज एम्स में चला था।

प्रिया और कशिश को मार कर शमशाद ने दफनाया उन्हीं के घर में

मेरठ के भूड़भड़ाल से माँ बेटी की हत्या मामला भी पिछले दिनों खूब चर्चा में था। प्रिया और कशिश की हत्या करने वाला शमशाद साल 2013 में प्रिया से अमित गुर्जर बनकर मिला था। बाद में सच्चाई खुलने पर उसने रो रोकर प्रिया को अपने साथ रखे रखा। कुछ दिन बाद पता चला कि उसकी एक बीवी भी है। विवाद बढ़ने पर शमशाद ने प्रिया और कशिश को मौत के घाट उतारकर उनके ही घर में दफना दिया । इस केस में प्रिया की सहेली चंचल की सक्रियता ने शमशाद को जेल की सलाखों के पीछे पहुँचाया था।

कॉन्ग्रेस नेता समीर खान पर हिंदू नाबालिग ने लगाए गंभीर आरोप

साल 2020 के सितंबर में एक नाबालिग लड़की सतना थाने पहुँची और उसने कॉन्ग्रेस नेता समीर खान उर्फ सिकंदर पर मामला दर्ज करवाया। लड़की ने कॉन्ग्रेस नेता समीर पर यौन शोषण का आरोप लगाया। खान के ख़िलाफ़ शिकायत में लड़की ने कहा कि उसने उसे सिकंदर बन कर मुलाकात की और बाद में उसे फार्म हाउस बुलाया। वहाँ समीर ने उसका रेप किया व उसकी आपत्तिजनक तस्वीरें खींचीं। फिर करीब 3 साल तक उसका शोषण करता रहा। आखिरकार लड़की ने तंग आकर पुलिस को इस संबंध में बताया और मामला दर्ज हुआ

शौकत अली ने साहिल कुमार बन रचाई शादी, बाद में करने लगा प्रताड़ित

शौकत अली ने भी नेहा नाम की हिंदू महिला को झूठी पहचान बताकर फँसाया और फिर उसे आर्थिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू किया। सोशल मीडिया पर वायरल अपनी वीडियो में नेहा ने कहा था कि जयपुर में काम करते हुए वह शौकत के संपर्क में आई और उसने उसे अपनी पहचान कश्मीरी हिंदू साहिल कुमार के रूप में बताई। शादी के 6 महीने बाद शौकत अली उस पर धर्मांतरण का दबाव बनाने लगा और उसने अपने परिजनों के साथ मिलकर उसका शोषण भी किया।

शिबू अली बना सचिन, लड़की पर किया चाकू से हमला

लव जिहाद के अन्य मामले में शिबू अली हिंदू महिला से सचिन कहकर मिला। इस केस में तो लड़की ने अपनी पूरी कहानी सोशल मीडिया पर सुनाई थी। पीड़िता ने कहा था कि जब मुस्लिम युवक की सच्चाई उजागर हुई तो उसे परेशान किया जाने लगा। उससे मारपीट करके उसका धर्मांतरण के लिए दबाव बनाया गया। इतना ही नहीं , उसे गौमाँस खिलाने के लिए व मौलवी के साथ शारीरिक संबंध बनाने को भी कहा गया। जब महिला शिबू के चंगुल से भाग निकली तब भी शिबू ने उसका पीछा नहीं छोड़ा और अपनी नाफरमानी करता देख महिला पर चाकू से हमला किया।

कानपुर में पहचान छिपाकर हिंदू लड़कियों से दोस्ती करने के मामले

यूपी के कानपुर में हिंदू नाबालिग के साथ भी लव जिहाद का मामला सामने आया। गोपाल नगर में रहने वाली पीड़ित के परिवार ने बजरंग दल के रामजी तिवारी की मदद से फतेह अली खान उर्फ आर्यन मेहरोत्रा के खिलाफ़ अपनी शिकायत करवाई। उन्होंने बताया कि कैसे कलावा पहनकर, तिलक लगाकर वह हिंदू लड़कियों को फँसाने के लिए मंदिर में जाता था।

एक अन्य मामला कुछ दिन पहले ही कानपुर के बजरिया थाने में सामने आया था। जहाँ लकी खान नाम के एक युवक ने अपना हिंदू नाम बता कर नाबालिग लड़की को अपने प्रेम जाल में फँसाया और उसकी अश्लील तस्वीरें ले कर इस्लाम धर्म कबूलने और निक़ाह करने के लिए युवती को ब्लैकमेल करने लगा। इस केस में भी लड़की के परिजनों ने लकी खान के खिलाफ एफआईआर करवाई और बताया कि लड़की मंदिर के बाहर फूल की दुकान लगाती थी। उससे दोस्ती करने के लिए लकी खान ने अपना नाम सिर्फ लकी ही बताया। जिससे युवती को आभास नहीं हुआ कि युवक संप्रदाय विशेष से है। 

अनवर ने अनु बन हिंदू महिला को फँसाया

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी पिछले महीने की 4 अगस्त को लव जिहाद का केस देखने को मिला। आउटर दिल्ली के किराड़ी इलाके में अनवर नाम के एक लड़के ने 20 साल की लड़की को अपना नाम अनु बताकर फँसाया और फिर कई महीनों तक उसके साथ बलात्कार करता रहा। सबसे पहले उसने जब युवती के साथ गलत काम किया तब उसने उसे कोल्डड्रिंक में नशीला पदार्थ डाल कर पिलाया था। फिर उसके बेहोश होते ही उसका बलात्कार किया और पूरी घटना को शूट कर लिया। बाद में यह सिलसिला चलता रहा। एक बार उसने लड़की को विश्वास में लेने के लिए उससे मंदिर में शादी भी की। मगर कुछ समय बाद पता चला वह अनु नहीं अनवर है।

लव जिहाद के कुछ अन्य मामले इस लिंक पर क्लिक करके पढ़ें।

कराची में हुए बम धमाके में 3 की मौत: फौज और पुलिस में ठनी, सिंध पुलिस के सभी अधिकारियों की छुट्टियाँ रद्द

पाकिस्तान के कराची में गृह युद्ध का ख़तरा बढ़ता जा रहा है। अब वहाँ के मसकन चौरंगी स्थित इमारत गुलशन-ए-इक़बाल में हुए एक बड़े बम धमाके में कम से कम 3 लोगों की मौत हो गई है और 15 घायल हो गए हैं। ये धमाका बुधवार (अक्टूबर 21, 2020) को हुआ। सभी मृतकों और घायलों का इलाज पटेल हॉस्पिटल में चल रहा है। मुबीना टाउन SHO ने बताया कि ये सिलिंडर से किया गया बम धमाका हो सकता है।

धमाके के कारणों का पता लगाने के लिए बम डिस्पोटल स्क्वाड को लगाया गया है। इमारत की दूसरी मंजिल पे ये धमाका हुआ। आसपास की कुछ इमारतों और वहाँ से गुजर रही गाड़ियों को भी खासा नुकसान पहुँचा है। सिंध के पुलिस प्रमुख ने स्थानीय प्रशासन को रिपोर्ट तैयार करने को कहा है। इससे 1 दिन पहले ही शिरीन जिन्ना कॉलोनी में हुए बम धमाके में 5 लोग घायल हो गए थे। वहाँ सायकिल पर IED डाल कर ब्लास्ट किया गया था।

उधर सिंध के IGP मुस्ताक महर ने अपनी छुट्टियों को टाल दिया है और पूरी सिंध की पुलिस को कहा है कि वो अपनी-अपनी छुट्टी की अर्जियों को 10 दिन के लिए किनारे कर दें। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हित में ये निर्णय लिया गया है, जिसके नतीजे PML-N के नेता मोहम्मद सफ़दर की गिरफ़्तारी में हो रहे जाँच के निष्कर्ष पर निर्भर करेंगे। इससे पहले इन सभी ने छुट्टियों की अर्जी दी थी और कहा था कि इस गिरफ़्तारी के बाद प्रोफेशनल तरीके से काम करने में उन्हें दिक्कतें आ रही हैं।

सिंध पुलिस का कहना है कि उसके आला अधिकारियों का जिस तरह से अपमान किया गया, उनके साथ बुरा बर्ताव किया गया, उससे पुलिस महकमा शॉक में है। इसके बाद बिलावल भुट्टो जरदारी के पाकिस्तान की फ़ौज के मुखिया जनरल बाजवा से मुलाकात कर सिंध में सेना के कामकाज पर आपत्ति जताई थी। इसके बाद सिंध पुलिस के गुस्से को कम करने के लिए फ़ौज ने जाँच का आदेश दिया। वहीं सिंध पुलिस इस अपमान से जल रही है।

उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान में यह सारी हलचल ठीक तब शुरू हुई जब विपक्ष ने प्रधानमंत्री इमरान खान के प्रशासन के खिलाफ़ रैली निकाली और नवाज शरीफ के दामाद गिरफ्तार कर लिए गए।  सफदर को तो कोर्ट ने बाद में बेल देकर रिहा कर दिया, पर इस बीच पाकिस्तान आर्मी पर आरोप लगने लगे कि पाक सेना ने उन्हें गिरफ्तार किया व सिंध प्रांत के पुलिस चीफ मुश्ताक मेहर का अपहरण करके सफदर की गिरफ्तारी के लिए दवाब बनाया।

‘बिलाल ने नाम बदला, टीका लगाता था, हमें लगा हिन्दू होगा’: 8 लाख लेकर भागी छात्रा, परिजनों ने लगाया ‘लव जिहाद’ का आरोप

उत्तर प्रदेश में एक बार फिर से कथित ‘लव जिहाद’ का मामला सामने आया है। बरेली में शनिवार (अक्टूबर 17, 2020) को एक लड़की गायब हो गई थी, जिसके परिवार ने आरोप लगाया है कि दूसरे समुदाय के एक युवक ने उससे शादी कर ली है। आरोप है कि ये शादी जोर-जबरदस्ती की गई। भाजपा और विहिप के कार्यकर्ताओं ने इस घटना के बाद थाने में जाकर विरोध प्रदर्शन किया और मामले में कड़ी कार्रवाई की माँग की।

हालाँकि, परिजनों के आरोपों को नकारते हुए लड़की ने एक वीडियो जारी किया है और दावा किया है कि वो बालिग़ है और अपनी मर्जी से गई है। लड़की ने जहाँ जोर-जबरदस्ती की बात नकार दी है, वहीं उसके पिता ने आरोप लगाया है कि वो 8 लाख रुपए और सोने की चैन लेकर फरार हुई है। पिता ने आशंका जताई है कि उनकी बेटी की हत्या की जा सकती है और ये धन के लिए किया गया कृत्य भी हो सकता है।

वहीं स्थानीय हिन्दू संगठनों ने आरोप लगाया है कि लड़की के साथ जोर-जबरदस्ती करके उसे धोखे से ले जाया गया है। प्रदर्शन कर रहे भाजपा और विहिप कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने लाठियाँ भी बरसाईं। लापरवाही और बल-प्रयोग के बाद चौकी इंचार्ज सहित कुछ पुलिसकर्मियों को सस्पेंड भी कर दिया गया है। सोशल मीडिया पर भी कई तस्वीरों के माध्यम से दावा किया जा रहा है कि बरेली का ये मामला ‘लव जिहाद‘ का ही है।

लड़की के पिता ने बताया कि उनकी बेटी बीएससी की छात्र है और कम्प्यूटर कोचिंग के लिए जाती है। अक्टूबर 17 को जब वो कोचिंग से वापस नहीं आई तो परिजनों ने खोजबीन शुरू की। फिर किसी ने बताया कि एक लड़का उसे ले गया है। पिता का कहना है कि लड़के के माथे पर टीका लगा हुआ था, इसीलिए परिजन समझते थे कि वो हिन्दू होगा। प्रेमनगर की रहने वाली छात्रा से आरोपित ने अपना नाम छिपा कर परिचय बढ़ाया था, ऐसा आरोप है।

आरोपित का नाम बिलाल है, जिसके खिलाफ मामला सामने आने के 3 दिन बाद तक भी कार्रवाई नहीं हुई तो हिन्दू संगठन उग्र हो गए। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा। एडीजी ने मौके पर पहुँच कर आश्वासन दिया है कि लड़की को 24 घंटे के भीतर बरामद कर लिया जाएगा। एसएसपी ने बताया कि अभद्रता करने वाला चौकी इंचार्ज निलंबित किया जा चुका है। आरोपित और पीड़िता को अब कोर्ट में पेश किया जाएगा।

PAK में ‘गृहयुद्ध’: सेना के खिलाफ लगे सड़कों पर नारे, नवाज शरीफ के दामाद की गिरफ्तारी पर आर्मी चीफ को देने पड़े जाँच के आदेश

पाकिस्तान में इमरान सरकार और पाक सेना को लेकर विपक्ष का गुस्सा कम होने का नाम नहीं ले रहा। ताजा खबर है कि पाकिस्तान के आर्मी चीफ ने अपनी सेना पर लग रहे आरोपों के मद्देनजर जाँच के आदेश दे दिए हैं। पाक आर्मी पर आरोप है कि उन्होंने सिंध के पुलिस चीफ का अपहरण किया ताकि वह पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शऱीफ के दामाद की गिरफ्तारी करवा सकें।

अपने बयान में मिलिट्री ने कहा आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा ने कराची की पोर्ट सिटी में मिलिट्री पर लग रहे आरोपों की जाँच शुरू करने के आदेश दिए हैं।

मंगलवार (अक्टूबर 20, 2020) को ऐसे ही खींचतान के बीच द इंटरनेशनल हेराल्ड ने ट्विटर पर एक वीडियो डाली। इस वीडियो में बाजवा के ख़िलाफ़ नारे लग रहे थे। ट्वीट में कैप्शन देते हुए पाकिस्तान की स्थिति को ‘सिविल वॉर’ करार दिया। बाद में खबर आई कि इस झड़प में 10 कराची पुलिस ऑफिसर मारे गए। हालाँकि, पाकिस्तान के प्रमुख अखबार डॉन ने अपने वेबसाइट पर ऐसी कोई खबर पब्लिश नहीं की।

उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान में यह सारी हलचल ठीक तब शुरू हुई जब विपक्ष ने प्रधानमंत्री इमरान खान के प्रशासन के खिलाफ़ रैली निकाली और नवाज शरीफ के दामाद गिरफ्तार कर लिए गए।  सफदर को तो कोर्ट ने बाद में बेल देकर रिहा कर दिया, पर इस बीच पाकिस्तान आर्मी पर आरोप लगने लगे कि पाक सेना ने उन्हें गिरफ्तार किया व सिंध प्रांत के पुलिस चीफ मुश्ताक मेहर का अपहरण करके सफदर की गिरफ्तारी के लिए दवाब बनाया।

वैसे बता दें कि अभी तक इन आरोपों पर न किसी जवान ने और न पीएम इमरान खान ने कोई टिप्पणी की है। मगर, मेहर के साथ हुए दुर्व्यवहार से वहाँ कई पुलिस अधिकारियों में गुस्सा है। अधिकारियों का कहना है कि पुलिस ने शुरू में ही सफदर को गिरफ्तार करने से मना किया था। 

इस संबंध में 20 अक्टूबर को सिंध पुलिस ने कई ट्वीट किए हैं। एक ट्वीट में उन्होंने बताया कि 18/19 अक्टूबर को हुई घटना ने सिंध पुलिस को आहत किया है। इस घटना के बाद सिंध पुलिस चीफ ने छुट्टी पर जाने का निर्णय लिया लेकिन बाद में जाँच हेतु फैसला बदल लिया। उन्होंने यह नहीं बताया है कि किसने उनका अपहरण करके किसने उन्हें रेंजर्स के पास पहुँचाया। 

सिंध पुलिस ने अपने ट्वीट थ्रेड में चीफ के साथ हुई घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। साथ ही मामले में जाँच का आदेश देने के लिए आर्मी चीफ का आभार व्यक्त किया। ज्ञात हो कि नवाज शरीफ के दामाद को कराची में उनके होटल से गिरफ्तार किया गया था।

सिंध पुलिस के ट्वीट

गोहत्या करने से मना करता था युवक, मुन्नू कुरैशी और कइल ने गला रेत कर मार डाला: माँ ने झारखण्ड सरकार से लगाई न्याय की गुहार

झारखण्ड के गढ़वा में सदर थाना स्थित उचरी मोहल्ले में एक युवक की सिर्फ इसीलिए गला रेत कर हत्या कर दी गई, क्योंकि उसने गायों को बचाने की कोशिश की थी। ये घटना सोमवार (अक्टूबर 19, 2020) की देर रात हुई। उक्त मुस्लिम युवक ने गोहत्या करने से रोका था, जिसके बाद उसके ही समुदाय के लोगों ने उसे मार डाला। पुलिस ने उसी समुदाय के दो आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है, जिन्होंने युवक का गला रेत डाला था।

उंचरी निवासी मोहम्मद हबीब के 18 वर्षीय पुत्र मोहम्मद आरजू की हत्या के अगले दिन उसके शव को पोस्टमॉर्टम के लिए गढ़वा स्थित सदर अस्पताल में लाया गया। सुबह-सुबह ही झारखण्ड के पेयजल मंत्री मिथिलेश कुमार ठाकुर भी अस्पताल का निरीक्षण करने पहुँचे। उन्हें मृतक की माँ आयशा ने बताया कि उनका बेटा आसपास के लोगों को गोहत्या करने से मना करता था, जिसके कारण उसकी हत्या कर दी गई।

मोहल्ले के ही मुन्नू कुरैशी और कइल कुरैशी ने उसे मार डाला। महिला ने झारखण्ड सरकार के मंत्री के सामने माँग रखी कि उनके बेटे के हत्यारों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। महिला के निवेदन पर मंत्री ने वहाँ उपस्थित थाना प्रभारी राजीव कुमार सिंह को निर्देश दिया कि इस मामले में कड़ी कार्रवाई की जाए। इसके बाद पुलिस ने दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। मृतक की उम्र मात्र 18 साल ही थी।

मृतक की माँ ने बताया कि चूँकि उनका बेटा आरजू मोहल्ले के लोगों को गोहत्या न करने के लिए कहता था और इसके खिलाफ आवाज़ भी उठाता था, इसीलिए उन्हें अपने ही समुदाय का आक्रोश झेलना पड़ता था। गढ़वा जिला झारखण्ड के पलामू प्रमंडल में पड़ता है। झारखण्ड में इससे पहले भी गोहत्या को लेकर तनाव के मामले सामने आते रहे हैं। हेमंत सोरेन की सरकार बनने के बाद ऐसी गतिविधियों में वृद्धि देखी गई है।

पूर्व IIT प्रोफेसर ने विदेश से लाए थे माओवादी साहित्य, उमर खालिद था ‘अर्बन पार्टी मेंबर’: ‘दलित आतंकवाद’ पर हो रहा था काम

‘एल्गार परिषद’ मामले में एक गवाह ने ‘राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA)’ को बताया कि एक बैठक के दौरान कथित एक्टिविस्ट और बुद्धिजीवी आनंद तेलतुंबड़े ने ‘दलित आतंकवाद’ को नए रूप में पुनर्जीवित करने की बात कही थी। साथ ही उसने माओवादी आंदोलन के ‘क्रन्तिकारी पुनरुत्थान’ की बात भी कही थी। NIA कोर्ट में दायर हुई सप्लीमेंट्री चार्जशीट में ये बयान दर्ज है। भीमा-कोरेगाँव मामले में इस चार्जशीट में 6 गवाहों के बयान दर्ज हैं, जिनमें से किसी की पहचान छिपाई नहीं गई है।

NIA के अनुसार, एक अन्य गवाह ने बताया कि भीमा-कोरेगाँव हिंसा का साजिशकर्ता आनंद तेलतुंबड़े फिलीपींस, पेरू और तुर्की में कई अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में हिस्सा लिया करता था। वो अकादमिक दौरे के नाम पर ऐसा किया करता था और वहाँ से माओवादी साहित्य वीडियो और डिजिटल रूप में लाया करता था। इन वीडियोज और साहित्य को CPI (माओवादी) के कार्यकर्ताओं को उनके प्रशिक्षण के दौरान दिखाया गया था। बता दें कि ये संगठन प्रतिबंधित है।

साथ ही एक अन्य आरोपित पी वरवरा राव ने माओवादी बैनर तले ‘क्रांति को एकजुट करने’ की बात की थी, वहीं शोमा सेन ने महिलाओं को माओवादी आंदोलन में शामिल होने के लिए मनाया था। हनी बाबू और रोमा विल्सन ने दिल्ली के छात्रों को माओवादी विचारधारा का पाठ पढ़ाया था और माओवादियों के लिए उनके मन में सहानुभूति बिठाई थी। अक्टूबर 9, 2020 को दायर हुए सप्लीमेंट्री चार्जशीट में 8 आरोपित हैं।

आनंद तेलतुंबड़े को अप्रैल 14, 2020 को गिरफ्तार किया गया था। दिसंबर 31, 2017 को हुई ‘एल्गार परिषद’ की बैठक के अगले ही दिन भीमा-कोरेगाँव में जबरदस्त हिंसा भड़की थी। आनंद का भाई मिलिंद तेलतुंबडे भी शहरी क्षेत्रों में माओवादी आंदोलन को तेज करने की साजिश रच रहा था। वो आनंद से दिशानिर्देश लेता रहता था। गवाहों के अनुसार, वो कहा करता था कि उसेक बड़े भाई के कारण ही वो माओवादी बना है।

ये भी खुलासा हुआ है कि जेएनयू का छात्र नेता रहा उमर खालिद उनका ‘अर्बन पार्टी मेंबर’ था और उसे दिल्ली में माओवादी एजेंडा फैलाने के लिए नियुक्त किया गया था। ‘एल्गार परिषद’ की बैठक के दौरान उसने भी भाषण दिया था। गौतम नवलखा, जिसने माओवादियों के लिए साहित्य भी लिख रखा है, उसने एक स्वीडिश लेखक के साथ जंगलों में जाकर माओवादियों से मुलाकात की थी। वो वरवरा राव का अच्छा दोस्त था।

गौतम नवलखा ने ही मानवाधिकार समूहों को माओवादी आंदोलन से जोड़ा था। झारखण्ड में स्टेन स्वामी का अपना अलग संगठन है, NGO है, और ‘अर्बन नक्सल्स’ ने पाया था कि उनकी अलग पहचान है, इसीलिए उन्हें भी जिम्मेदारी सौपी गई थी। बता दें कि आनंद तेलतुंबड़े IIT खड़गपुर में प्रोफेसर रह चुका है। उसका कहना है कि आनंद तेलतुंबड़े कब का घर छोड़ चुका है, इसीलिए उसके कारण उसे फँसाया जा रहा है।

साथ ही राजनैतिक कैदियों के लिए क़ानूनी सपोर्ट मुहैया कराने हेतु विल्सन को लाया गया था। साथ ही दिल्ली में ऐसे दलित छात्रों को चिह्नित किया जाता था, जो पिछड़े परिवारों से आते हैं, इसके बाद उनके मन में माओवादी आंदोलन के लिए सहानुभूति बिठाई जाती थी। सामाजिक कार्यकर्ताओं, डॉक्टरों, अधिवक्ताओं और शिक्षकों के माध्यम से माओवादी विचारधारा फैलाई जा रही है, जिसकी परिणीति अंत में हिंसा के रूप में ही होनी थी।

बता दें कि झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भीमा-कोरेगाँव हिंसा मामले में आरोपित पादरी स्टेन स्वामी के समर्थन में उतर आए थे। स्टेन स्वामी को NIA ने हिरासत में लिया था। हेमंत सोरेन ने पूछा था, “गरीब, वंचितों और आदिवासियों की आवाज़ उठाने’ वाले 83 वर्षीय वृद्ध ‘स्टेन स्वामी’ को गिरफ्तार कर केंद्र की भाजपा सरकार क्या संदेश देना चाहती है?” साथ ही कहा है, “अपने विरोध की हर आवाज को दबाने की ये कैसी जिद?“

सूरजभान सिंह: वो बाहुबली, जिसके जुर्म की तपिश से सिहर उठा था बिहार, परिवार हो गया खाक, शर्म से पिता और भाई ने की आत्महत्या

बिहार में बात जब राजनीति की आती है तो कर्पूरी ठाकुर, लालू यादव और नीतीश कुमार की बात होती है, लेकिन अगर डॉन, बाहुबलियों और अपराधियों का जिक्र न हो तो बिहार की सियायत अधूरी कहलाएगी। या यूँ कहें कि बिहार की सियासत लंबे समय तक नेता और बाहुबली से बनी धुरी पर ही घूमती रही है। शहाबुद्दीन, अनंत सिंह जैसे दबंगों के बीच एक बाहुबली नेता ऐसा भी रहा, जिसके गुनाहों का सूरज उसकी उम्र के साथ चढ़ता चला गया।

5 मार्च 1965 को गंगा किनारे बसे पटना जिले के मोकामा में जन्मे सूरजभान सिंह की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। अपराध की सीढ़ियाँ सूरजभान ने इतनी तेजी से चढ़ीं कि लोग उसके नाम से ही काँपने लगे। रंगदारी, अपहरण और हत्या जैसे अपराध उसके लिए आम हो चुके थे।

बिहार की राजनीति में रंगदारी, अपहरण और हत्या जैसे अपराध करने वाले सूरजभान सिंह दबंगई के बाद राजनीति में भी किस्मत आजमाने उतर गए। मोकामा की छोटी गलियाँ जब उनके अपराध के लिए संकरी पड़ने लगीं तो उसने पूरे बिहार को अपना निशाना बनाना शुरू किया। पहले दबंगई फिर विधायक और बाद में सांसद तक बने। पहले निर्दलीय विधायक बने फिर पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी का दामन थाम लिए।

मोकामा के एक छोटे से गाँव की गलियों में खेलते-कूदते बड़े हुए सूरजभान सिंह के पिता एक व्यापारी सरदार गुलजीत सिंह की दुकान पर नौकरी करते थे। इसी से घर चलता था। उनके बड़े भाई की नौकरी सीआरपीएफ में लगी तो परिवार को बड़ा सहारा मिला। पिता सोचते थे कि लंबी-चौड़ी कद काठी वाला छोटा बेटा भी फौज में जाएगा। 

लेकिन किस्मत को तो कुछ और ही मँजूर था। सूरजभान की किस्मत की लकीरें तो उसे सियासत और जुर्म की उस दुनिया में ले गईं, जहाँ उसके नाम का सिक्का चलता था। सूरजभान पहले बाहुबली, फिर विधायक और इसके बाद सांसद बने। शुरुआत में सूरजभान को ऐसे लोगों की संगत मिली, जिनके साथ मिलकर पहले उसने रंगदारी और फिर वसूली करनी शुरू कर दी।

ऐसे बढ़ा क्राइम का ग्राफ

5 मार्च 1965 को बिहार के मोकामा जिले में जन्मे सूरजभान सिंह पर तकरीबन 30 संगीन मामले दर्ज हैं। बताया जाता है कि 80 के दशक में सूरजभान छोटा-मोटा अपराध करता था। लेकिन नब्बे का दशक आते-आते उसके क्राइम का ग्राफ तेजी से बढ़ने लगा। उसे आगे बढ़ाने का श्रेय दो लोगों को जाता है- कॉन्ग्रेस के विधायक और मंत्री रह चुके श्याम सुंदर सिंह धीरज और अनंत सिंह के बड़े भाई दिलीप सिंह को।

दरअसल, कभी श्याम सुंदर के लिए बूथ कब्जा करने वाले बाहुबली दिलीप सिंह ने उन्हें चुनावी रण में न सिर्फ चुनौती दी बल्कि लालू प्रसाद यादव की सरकार में मंत्री बन गए। दिलीप सिंह को धीरज ने ही पाला-पोसा था। ऐसे में उनके पाले-पोसे शख्स ने उन्हें ही चुनावी मैदान में शिकस्त दे दी, इस बात से वे बौखला गए। इस दौरान उनकी नजर पड़ी दिलीप गैंग के ही एक लड़के पर, जिसमें जुर्म की दुनिया में छा जाने का भूत सवार था। वो लड़का सूरजभान ही था।

जब दिलीप मंत्री बनकर वाइट कॉलर जॉब में आ गए तो उन्हें सियासत भी करनी थी और रुतबा भी बरकरार रखना था। इस दौरान सूरजभान ने उस गुलजीत सिंह से भी रंगदारी माँग ली, जो उनकी आँखों के सामने बड़ा हुआ था और जिनके यहाँ पिता नौकरी करते थे। गुलजीत इस बर्ताव से दंग थे। उन्होंने सूरज के पिता को बताया। पिता ने बेटे को समझाने की खूब कोशिश की लेकिन तब तक ‘गंगा में बहुत पानी बह चुका था’।

जुर्म की आँच में परिवार ही खाक हो गया, भाई और पिता ने शर्म से की आत्महत्या

बिहार के एक आम परिवार से संबंध रखने वाले सूरजभान सिंह आज अपराध और बिहार की राजनीति में जाना-माना नाम है। लेकिन कहा जाता है कि सूरजभान के चाल-चलन से उनके पिता रामनंदन सिंह और उनके भाई काफी दु:खी रहते थे। सूरजभान मूल रूप से मोकामा के शंकरबार टोला के निवासी हैं। मोकामा में इनके पिता एक व्यवसायी की दुकान पर काम किया करते थे। 

लेकिन जब सूरजभान ने आपराधिक रास्ता अपनाकर मोकामा में रंगदारी और वसूली शुरू की तो उसने उन लोगों से भी वसूली और मार-पीट की जिनसे उनके परिवार की रोजी-रोटी चलती थी। पिता ने सूरजभान को काफी समझाने की कोशिश की लेकिन उसने एक न मानी। मोकामा वासियों की मानें तो इन्हीं घटनाओं से परेशान होकर सूरजभान के पिता ने गंगा में कूदकर आत्महत्या कर ली। इस घटना के कुछ दिन बाद सीआरपीएफ में कार्यरत उसके इकलौते भाई ने भी आत्महत्या कर ली। 

अशोक सम्राट ने सूरजभान पर मोकामा में हमला भी करवाया था

अब सूरजभान के सिर पर दिलीप सिंह का हाथ था। सूरजभान सिंह मोकामा में उस वक्त छाया, जब उसका सामना उत्तर बिहार के डॉन माने जाने वाले अशोक सम्राट से हुआ। अशोक सम्राट ने सूरजभान पर मोकामा में हमला भी करवाया था। इस हमले में सूरजभान के पैर में गोली लगने के बाद भी वह बच गया था लेकिन उसका चचेरा भाई मारा गया था। कहा जाता है कि अशोक सम्राट जब तक जिन्दा रहा, सूरजभान मोकामा से बाहर नहीं निकल पाया था। 

हाजीपुर में पुलिस मठभेड़ में अशोक सम्राट के मारे जाने के बाद सूरजभान ने अपने कार्यक्षेत्र का विस्तार किया। इसी बीच सूरजभान के चचेरे भाई मोती सिंह की गैंगस्टर नागा सिंह ने हत्या कर दी थी। जिसके बाद सूरजभान का मोकामा विधायक दिलीप सिंह से दुश्मनी बढ़ी और उस दौर में अपराधियों के हो रहे राजनीतिकरण में सूरजभान का भी नाम जुड़ गया। इस दौरान श्याम सुंदर धीरज को भी एक बाहुबली की जरूरत थी। सूरजभान ने धीरज का हाथ पकड़ा जरूर लेकिन अब उसके सपने बड़े हो चुके थे।

साल 2000 में बने विधायक फिर सांसद

सूरजभान ने मोकामा से साल 2000 में तत्कालीन बिहार सरकार में मंत्री दिलीप सिंह के खिलाफ विधानसभा चुनाव लड़ा और भारी मतों से जीतकर निर्दलीय विधायक बन गए। उस वक्त पुलिस रिकॉर्ड में उन पर उत्तर प्रदेश और बिहार में कुल 26 मामले दर्ज थे। इसके बाद साल 2004 में वह रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी के टिकट से बलिया (बिहार) के सांसद बने। 

अपराधों की लंबी फेहरिस्त

जनवरी 1992 में बेगूसराय के मधुरापुर में रहने वाले रामी सिंह की हत्या हुई। तड़के 5 बजे रामी सिंह पर चार लोगों ने गोलियाँ चलाकर मौत की नींद सुला दिया। इसमें सूरजभान का भी नाम आया और लोअर कोर्ट ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई। 

इसी मामले में सजायाफ्ता होने के कारण सूरजभान पर चुनाव लड़ने से प्रतिबंध लगा है। रामी सिंह हत्याकांड के मुख्य गवाहों और यहाँ तक कि सरकारी वकील राम नरेश शर्मा की भी हत्या हो गई थी। सूरजभान अन्य मामलों की तरह इसमें भी बरी हो जाते अगर केस का एक गवाह और टूट गया होता। 

मगर गवाहों में एक व्यक्ति ऐसा भी था, जिसका नाता बेगूसराय के डॉन रह चुके कामदेव सिंह के परिवार से था। उस परिवार से जुड़े लोग बताते हैं कि सूरजभान के लोग आदतन उस गवाह को भी धमकाने गए। कामदेव सिंह का परिवार सफेदपोश कारोबारी हो चुका है। जब पता चला कि सूरजभान ने उनके किसी रिश्तेदार को जान से मारने की धमकी दी है तो सूरजभान को उसी के अंदाज में संदेश भिजवाया गया- “हमने हथियार चलाना बंद किया है, हथियार रखना नहीं। हमारी बंदूकों से अब भी लोहा ही निकलेगा।”

मामला कुछ फिल्मी सा था। वैसे मोकामा बेगूसराय इलाके के लोगों के बीच रहें तो आप इसे सहज पाएँगे। उनकी रोजमर्रा की बातें और बोलने का अंदाज अलहदा रहता है। डॉन को पूर्व डॉन की धमक का अंदाजा था। कामदेव सिंह के बहुत से चेले-चपाटे अपराध की दुनिया में धीरे-धीरे अपनी पकड़ बना रहे थे। सूरजभान सिंह को पीछे हटना पड़ा। 

पूर्व मंत्री बृज बिहारी की हत्या से दहल गया था राज्य

3 जून 1998 की शाम थी। बृज बिहारी प्रसाद, राबड़ी देवी सरकार में साइंस एंड टेक्नोलॉजी मंत्री थे। इलाज के लिए उन्हें पटना के इंदिरा गाँधी आयुर्विज्ञान संस्थान में भर्ती कराया गया था। जब वह पार्क में शाम को टहल रहे थे तो 6-7 हमलावरों ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियाँ चलाईं। गोलियाँ चलाने वालों में गोरखपुर का नामी डॉन श्रीप्रकाश शुक्ला भी था। इस घटना ने पूरे प्रदेश को दहलाकर रख दिया। मामले में सूरजभान को पुलिस ने आरोपित बनाया गया था। खूब बवाल मचा और जाँच सीबीआई को सौंपी गई। साल 2009 में निचली अदालत ने सूरजभान समेत सारे अपराधियों को आजीवन कारावास की सजा दी। हालाँकि, बाद में हाईकोर्ट ने सूरजभान को बरी कर दिया था। 

उमेश यादव हत्याकांड

साल 2003 में दिनदहाड़े मोकामा के पूर्व पार्षद और अपराधी उमेश यादव की गोली मारकर हत्या कर दी गई। उमेश के परिजनों ने सूरजभान पर इल्जाम लगाया। लेकिन मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद सूरजभान को बरी कर दिया गया। 

हालाँकि, ये तो ऐसे मामले हैं, जो कानून और पुलिस की निगाहों में आए। लेकिन कुछ अपराधों का चिट्ठा तो कभी खुला ही नहीं। कभी लोग सूरजभान के नाम से डरते थे। लेकिन अब ऐसा नहीं है। सूरजभान के चुनाव लड़ने पर रोक है। हालाँकि, उनकी पत्नी वीणा देवी मुंगेर की सांसद रह चुकी हैं। उनके बेटे आशुतोष सिंह की साल 2018 में एक सड़क हादसे में मौत हो गई थी।

ये तो ऐसे अपराधों की लिस्ट थी, जो कानून की नजर में आई थी। लेकिन कितनों का तो कोई हिसाब ही नहीं है। कहते हैं एक वक्त था जब लोग सूरजभान सिंह के नाम से ही डरते थे। लेकिन आज हालात ऐसे नहीं हैं। फिलहाल सूरजभान सिंह पर चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी गई है। लेकिन इनकी पत्नी वीणा देवी बिहार मुंगेर की सांसद रह चुकी हैं और बिहार की राजनीति में सक्रिय भी हैं। 

पत्नी ने दी थी तलाक की धमकी

लोकसभा इलेक्शन के दौरान जब भाजपा और लोजपा में गठबंधन हुआ, तब वीणा देवी ने एक सभा में कहा था कि उन्होंने अपने पति सूरजभान के सामने दो विकल्प रखा था। पहला या तो वे रामविलास पासवान से अलग हो जाएँ, अगर वे ऐसा नहीं करेंगे तो हम उन्हें तलाक देकर भाजपा में चले जाएँगे। वीणा देवी ने कहा कि उनकी इस धमकी के बाद ही पति सूरजभान सिंह भाजपा से गठबंधन के लिए सचेत हुए थे।

तीन दशक से मोकामा पर बाहुबलियों का राज

मोकामा का नाम आते ही बिहार की राजनैतिक सरगर्मी बढ़ जाती है क्योंकि ये वो इलाका है जहाँ पिछले तीन दशक से बाहुबलियों का राज है। यानी बाहुबली ही विधायक चुने जाते रहे हैं। इसकी शुरुआत अनंत सिंह के बड़े भाई दिलीप कुमार सिंह से हुई थी जो साल 1990 में जनता दल के टिकट पर चुने गए थे। 1995 में भी दिलीप सिंह ही जीते थे, लेकिन साल 2000 में दूसरा बाहुबली सूरजभान सिंह यहाँ से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीता और विधानसभा पहुँचा। सूरजभान सिंह भी भूमिहार जाति से ही आता है। सूरजभान और अनंत सिंह के परिवारों के बीच दुश्मनी का इतिहास भी पुराना रहा है।

2005 के विधान सभा चुनाव में अनंत सिंह ने जदयू के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीते। उसी साल फिर उपचुनाव में फिर से अनंत सिंह ने जीत हासिल की। साल 2010 में भी जदयू के टिकट पर अनंत सिंह फिर से लड़े और जीत गए। 2015 में अनंत सिंह चौथी बार निर्दलीय लड़े और इसमें भी जीत गए। इस बार 2020 के विधान सभा में बाहुबली अनंत सिंह आरजेडी का दामन थाम फिर से चुनावी मैदान में उतर रहे हैं। इस बार की सबसे खास बात ये है कि जहाँ बाहुबली खुद आरजेडी के उम्मीदवार हैं वहीं पत्नी को निर्दलीय सीट पर खड़ा कर दिया है। मतलब साफ है कि अगर अंतिम दौर में कोई अड़चन आए तो सीट हाथ से ना जाने पाए। खुद जीतें या पत्नी, लेकिन जीत इनकी झोली में हीं आए।

बिहार का ताजा हालात ये है कि पिछले चुनाव में कुछ लोग जो दूसरे दलों के टिकट पर जीत कर आए थे या जिन्होंने चुनाव में अपना हाथ आजमाया था और जिनका रिश्ता किसी न किसी रूप में अपराध जगत से जुड़ा है वो लोग सत्ताधारी दल में आ चुके हैं या आने के लिए प्रयासरत हैंl सच ही कहा गया है कि अपराध का सबसे अच्छा संरक्षण और पोषण सत्ता के संसर्ग में ही होता हैl आपराधिक जमीन के विस्तार के लिए राजनीतिक जमीन की तलाश निहायत ही जरूरी हैl

37 वर्षीय रेहान बेग ने मुर्गियों को बनाया हवस का शिकार: पत्नी हलीमा रिकॉर्ड करती थी वीडियो, 3 साल की जेल

ब्रिटेन में एक शख्स को मुर्गियों के साथ सेक्स करने के आरोप में कोर्ट ने तीन साल की सजा सुनाई है। पुलिस ने कोर्ट को बताया कि इस दौरान उसकी पत्नी वीडियो शूट करती थी। पुलिस को छापे के दौरान उसके घर से ऐसे कई वीडियो मिले हैं। इन वीडियोज में वह अपनी पत्नी और मुर्गियों के साथ सेक्स करता दिखाई दे रहा था। ब्रिटेन की ब्रैडफोर्ड क्राउन कोर्ट ने सबूतों को देखने के बाद आरोपित को दोषी मानते हुए तीन साल की सजा सुनाई है।

मुर्गियों से साथ सेक्स में पत्नी भी देती थी साथ

जानकारी के मुताबिक, दोषी शख्स का नाम रेहान बेग है। 37 साल का रेहान ब्रिटेन के ब्रैडफोर्ड में एक पोल्ट्री फार्म की देखरेख करता था। इसी दौरान उसने अपनी पत्नी हलीमा के साथ ऐसी कई वीडियो को शूट किया था। पुलिस ने कोर्ट को बताया कि रेहान के इस कृत्य के दौरान कई मुर्गियों की मौत भी हो गई थी।

कोर्ट ने माना नीच, घिनौना और विकृत काम

ब्रैडफोर्ड क्राउन कोर्ट ने सुनवाई के बाद फैसले में रेहान बेग के अपराध को नीच, घिनौना और विकृत माना। कोर्ट ने कहा कि उसका अपराध समाज के किसी भी सही सोच वाले सदस्य को स्वीकार नहीं होगा। रेहान बेग की 39 वर्षीय पत्नी हलीम बेग ने अपने पति की घिनौने हरकतों को कोर्ट में स्वीकार किया। कोर्ट उसे भी जेल भेजने वाली थी, लेकिन जब उसने बताया कि उसका पति घरेलू हिंसा करता था तब कोर्ट ने उसे बरी कर दिया।

खबरों के मुताबिक, इस दंपति ने पहले एक कुत्ते के साथ सेक्स किया था और उसकी तस्वीरें भी ली थीं। उन्होंने 49 वीभत्स तस्वीरें ली थी, जिसमें से 11 काफी घिनौने थे और कुछ बच्चों की उम्र तो 6 साल से भी कम थी।

चाइल्ड पोर्नोग्राफी के आरोप में मारा गया था छापा

ब्रिटेन की नेशनल क्राइम एजेंसी ने पिछले साल 9 जुलाई को बच्चों के यौन शोषण वाले फोटोज की तलाश में रेहान बेग के ग्रेट हॉर्टन ब्रैडफोर्ड वेस्ट यॉर्कशायर में स्थित घर पर छापा मारा था। इस दौरान पुलिस ने दो कंप्यूटर एक लैपटॉप और एक मोबाइल फोन को जब्त किया था। जाँच के दौरान बच्चों के यौन शोषण के फोटोज के अलावा मुर्गियों के साथ यौन शोषण के वीडियो बरामद हुए।

पुलिस ने कोर्ट को सुनाई घिनौनी दास्ताँ

पुलिस की अभियोजक अबीगैल लैंगफोर्ड ने कोर्ट को बताया कि मूविंग इमेज में रेहान बेग कई मुर्गियों के साथ सेक्स करता हुआ दिखाई दिया। इनमें से कुछ वीडियो में उसकी पत्नी हलीमा बेग भी दिखी। अभियोजन ने कहा कि वीडियो देखने के बाद यह स्पष्ट है कि इसे दोषी बेग के घर के तहखाने में फिल्माया गया है। इस दौरान कई मुर्गियों की मौत भी हुई। एक वीडियो में बेग ने एक मरे हुए जानवर को ब्लैक बिन बैग में डालने से पहले भी उसके साथ सेक्स किया था।

#Tweet4Bharat: राष्ट्रीय महत्त्व के मुद्दों पर हिंदी श्रेणी में विजेताओं की सूची और उनको जीत दिलाने वाले ट्वीट थ्रेड्स यहाँ देखें

रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी (RMP) ने भारत में अगस्त में ऑपइंडिया के सहयोग से “#Tweet4Bharat” नामक पहली ट्विटर-थ्रेड प्रतियोगिता की शुरुआत की, जिसमें लोगों को पोर्टल पर अपने ट्वीट थ्रेड को प्रकाशित करने और इस प्रक्रिया में नकद पुरस्कार जीतने का अवसर दिया गया।

RMP, 1982 से अपने ‘सार्वजनिक जागृति’ मिशन के हिस्से के रूप में सेमिनार और कार्यक्रमों के माध्यम से सार्वजनिक बातचीत को आकार देने के लिए काम कर रहा है। “#Tweet4Bharat” का उद्देश्य राष्ट्रीय महत्व के महत्वपूर्ण मुद्दों पर लिखने, चर्चा करने और विचार-विमर्श करने के लिए युवाओं को ‘ट्विटर थ्रेड्स’ का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित और प्रेरित करना था।

इस प्रतियोगिता में उम्मीद से काफी अधिक लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और आखिरकार बहुत अधिक विचार-विमर्श के बाद अब हम विजेताओं की घोषणा करने की स्थिति में हैं। प्रत्येक श्रेणी में प्रतिभागियों के जीतने के थ्रेड यहाँ भी पढ़े जा सकते हैं।

हिंदी भाषा

हिंदी भाषा श्रेणी के राष्ट्रीय एकीकरण सेक्शन में विजेता हैं:
सर्वश्रेष्ठ थ्रेड: @THESHUBHAMV
सबसे रचनात्मक थ्रेड: @TheSignOfFive
लोगों की पसंद: @ManishJangidJNU

हिंदी भाषा श्रेणी के लैंगिक समानता सेक्शन में विजेता हैं:
बेस्ट थ्रेड: @SaffronKoffee
सबसे रचनात्मक थ्रेड: @RealIndianSon
लोगों की पसंद: @hurkatneeta

हिंदी भाषा श्रेणी के सामाजिक न्याय सेक्शन में विजेता हैं:
सर्वश्रेष्ठ थ्रेड: @deeptibharadwaj
सबसे रचनात्मक थ्रेड: @ bhav2406
लोगों की पसंद: @Fussy_ca

इन विजेताओं में से प्रत्येक के थ्रेड अब नीचे लिस्टेड होंगे।

@THESHUBHAMV द्वारा किए गए ट्वीट थ्रेड हिंदी-राष्ट्रीय एकता श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ थ्रेड है।

@TheSignofFive द्वारा किया गया ट्वीट थ्रेड हिंदी-राष्ट्रीय एकता श्रेणी में सबसे रचनात्मक थ्रेड है।

वहीं @ManishJangidJNU का ट्वीट थ्रेड हिंदी-राष्ट्रीय एकता श्रेणी में सबसे अधिक लोगों द्वारा पसंद किया गया।

@SaffronKoffee का ट्वीट थ्रेड हिंदी लैंगिक-समानता श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ थ्रेड रहा।

@RealIndianSon द्वारा किया गया ट्वीट थ्रेड हिंदी लैंगिक-समानता श्रेणी में सबसे अधिक रचनात्मक थ्रेड रहा।

@hurkatneeta द्वारा किया गया ट्वीट थ्रेड लैंगिक समानता श्रेणी में सबसे अधिक लोगों ने पसंद किया।

@deeptibharadwaj द्वारा किया गया ट्वीट थ्रेड हिंदी-सामाजिक न्याय श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ थ्रेड रहा।

@bhav2406 द्वारा किया गया ट्वीट थ्रेड हिंदी-सामाजिक न्याय श्रेणी में सबसे अधिक रचनात्मक थ्रेड रहा।

Tweet Thread by @Fussy_ca, People’s Choice Thread in Hindi-Social Justice category.

@Fussy_ca द्वारा किए गए ट्वीट थ्रेड को हिंदी-सामाजिक न्याय श्रेणी में सबसे अधिक लोगों द्वारा पसंद किया गया।

मराठी भाषा

मराठी भाषा श्रेणी के राष्ट्रीय एकता सेक्शन में विजेता हैं:
बेस्ट थ्रेड: @deshpanderj
सबसे रचनात्मक थ्रेड: @PhaphaleShreyash
लोगों की पसंद: @TheSohamPuranik

सभी विजेताओं को बधाई और भाग लेने वाले सभी ट्विटर यूजर्स को बहुत-बहुत धन्यवाद!

क्या India Today का खेल खत्म? CBI ने TRP घोटाले में दर्ज की FIR: यूपी सरकार द्वारा की गई थी जाँच की सिफारिश

पिछले कुछ दिनों से चल रहे टीआरपी घोटाले ने एक नया मोड़ ले लिया है। महाराष्ट्र के बाद अब यह मामला उत्तर प्रदेश में भी सामने आया है। जिसके बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने इस मामले के संबंध में एक शिकायत दर्ज की और राज्य सरकार ने सीबीआई को जाँच सौंपने का अनुरोध किया था। ताजा जानकारी के मुताबिक, सीबीआई ने टीआरपी घोटाले की जाँच के लिए एक FIR दर्ज कर ली है। यहाँ पर बता दें कि शुरुआत में इस मामले के संबंध में मुंबई पुलिस की FIR में इंडिया टुडे चैनल का नाम सामने आया था।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यूपी सरकार ने इस मामले की सीबीआई जाँच की माँग की थी क्योंकि यह एक ऐसा मामला है जो कई राज्यों में फैला हुआ है। TRP में हेराफेरी करने वाले चैनलों से जुड़ी मूल शिकायत में कहा गया कि उन्हें अनुचित लाभ दिया गया। हमारे सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इसकी निजी शिकायत गोल्डन रैबिट कंपनी के सीआईओ कमल शर्मा द्वारा दर्ज कराई गई थी। शिकायत लखनऊ के हजरतगंज कोतवाली पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई गई।

गौरतलब है कि टीआरपी के नए मामले में मुंबई पुलिस के पूर्व असिस्टेंट कमिश्नर इकबाल शेख ने मुंबई के एक कोर्ट में याचिका दायर कर रिपब्लिक टीवी, आर भारत और अर्नब गोस्वामी पर कथित TRP घोटाले की रिपोर्टिंग से रोक लगाने की माँग की है। इसके साथ ही मुंबई के पूर्व सहायक पुलिस आयुक्त इकबाल शेख द्वारा दायर मुकदमे में मुंबई पुलिस के खिलाफ ‘अपमानजनक रिपोर्ट’ के कारण हुई मानसिक पीड़ा के लिए 5 लाख रुपए की क्षतिपूर्ति की भी माँग की गई है।

इससे पहले रिपब्लिक टीवी के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने की याचिका पर सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार (अक्टूबर 19, 2020) को कहा था कि रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी TRP मामले में आरोपित नहीं हैं। इसके बाद रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क और अर्नब गोस्वामी की तरफ से इस मुद्दे पर प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई। जिसमें उन्होंने मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह पर 200 करोड़ के मानहानि के मुक़दमे की बात कही।

सुनवाई के दौरान मुंबई पुलिस ने कोर्ट में परमबीर का सिंह का साथ देने से इनकार कर दिया था। कोर्ट में मुंबई पुलिस भी पीछे हट गई।  महाराष्ट्र सरकार और मुंबई पुलिस ने अदालत में यह बात स्वीकार ली कि टीआरपी मामले में दर्ज की गई एफ़आईआर में रिपब्लिक टीवी का नाम शामिल नहीं है। कोर्ट में उनके वकील ने भी माना कि रिपब्लिक आरोपित नहीं हैं। बता दें कि महाराष्ट्र राज्य और मुंबई पुलिस की तरफ से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल पेश हुए थे।