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जब छपरा जेल के 1300 कैदियों ने कर लिया था कारागार पर कब्जा: कहानी लालू-राबड़ी युग के ‘जंगलराज’ की

बिहार में लालू-राबड़ी युग के जंगलराज की एक से बढ़ कर एक कहानियाँ हैं। इनमें से एक है छपरा जेल काण्ड। जी हाँ, जेल में रहने वाले कैदियों ने ही जेल पर कब्जा कर लिया था। तब छपरा के एसपी रहे कुंदन कृष्णन आज बिहार के एडीजी हैं। 2002 में हुए छपरा जेल काण्ड के बारे में हम विस्तृत रूप से आगे बात करेंगे लेकिन उससे पहले हमें इस स्थान और यहाँ अपराधियों के बर्चस्व की कहानी को समझना पड़ेगा।

घाघरा और गंगा नदी के मुहाने पर बसा छपरा शहर बिहार के सारण जिले का मुख्यालय है। आज भले ही छपरा विकास के रास्ते पर अग्रसर हो और यहाँ बिहार का पहला डबल-डेकर फ्लाईओवर बन रहा हो लेकिन 2005 से पहले ऐसा नहीं था। ये भोजपुरी सम्राट भिखारी ठाकुर और संगीतकार चित्रगुप्त (जिनके बेटे आनंद-मिलिंद हैं) के बेटे की भूमि है, जिसने बिहार को उसका 10वाँ मुख्यमंत्री दिया – दरोगा प्रसाद राय।

छपरा: राजनीतिक रूप से बहुचर्चित क्षेत्र की कहानी

छपरा के राजनीतिक महत्व का अंदाज़ा इसी बात से लगा लीजिए कि बिहार के मुख्यमंत्री रहे लालू प्रसाद यादव ने अपना पहला लोकसभा चुनाव इसी सीट से लड़ा था। 1977 में वो यहाँ से जीत कर सांसद बने और इस कारनामे को 1989 और 2004 में दोहराया। 2009 में लालू यादव फिर से यहाँ से जीते (सारण लोक सभा) और संसद पहुँचे। लेकिन, यही वो क्षेत्र है जहाँ से 2014 में पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को हार मिली।

छपरा के दरोगा प्रसाद राय बिहार के मुख्यमंत्री बने और उनकी पोती ऐश्वर्या राय की शादी लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप से हुई। हालाँकि, ये रिश्ता नहीं चल पाया और दोनों अलग-अलग हो गए। अब स्थिति ये है कि इसी जिले की किसी विधानसभा सीट से तेज प्रताप भी चुनाव लड़ने वाले हैं और ऐश्वर्या के भी यहीं से लड़ने की ख़बरें उड़ रही हैं। उनके पिता चन्द्रिका राय जदयू में शामिल हो चुके हैं।

जहाँ तक छपरा मंडल कारा की बात है, यहाँ आए दिन होने वाली पुलिस की छापेमारी में कैदियों के पास से कई ऐसी चीजें बरामद होती रहती हैं, जिन्हें जेल में रखने की अनुमति नहीं है। इस जेल में बंदियों द्वारा मोबाइल फोन का प्रयोग करने की सूचनाएँ अक्सर मिलती रहती हैं, ऐसा प्रशासनिक अधिकारी भी मानते हैं। खुद डीएम-एसपी कई बार कमान संभालते हैं और यहाँ तालशी अभियान चलाते हैं।

हाल ही में एक कैदी ने छपरा जेल में भी धूमधाम से अपने जन्मदिन की पार्टी मनाई थी, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी वायरल हुईं। जेल में न सिर्फ जन्मदिन की पार्टी मनाया गया बल्कि पूरी पार्टी का वीडियो इंस्टाग्राम पर भी अपलोड कर दिया गया। मामला सामने आने के बाद एसपी ने जाँच कमिटी बना कर इतिश्री कर ली। इसी से आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि इस इलाक़े में जब कैदी ऐसे हैं तो अपराधी कितने बेख़ौफ़ होंगे।

छपरा मंडल कारा: जब जेल पर 4 दिनों तक रहा था कैदियों का कब्जा

2002 में छपरा जेल में रहने वाले कैदियों ने ही जेल पर कब्जा कर लिया, जिसकी सुनवाई अब तक चली आ रही है। 2017 के जून में ट्रायल कोर्ट में इस मामले की सुनवाई पूरी की गई थी। कैदियों ने न सिर्फ पुलिस पर पत्थरबाजी की थी बल्कि जम कर फायरिंग भी की थी। अभियोजन पक्ष की ओर से 50 के क़रीब गवाहों की गवाही हुई। ये घटना 2002 के होली की है, जब कैदी स्थानांतरण और जेल में मुलाकात के नियमों को लेकर आक्रोशित थे।

और जब पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई कर के जेल को कैदियों के चंगुल से छुड़ाया तो इस प्रकरण में 5 कैदी मारे गए। मार्च 30, 2002 को इस जेल को कैदियों के कब्जे से आज़ाद कराया गया। पटना से लगभग 75 किलोमीटर दूर स्थित छपरा में हुए इस जेल कांड की चर्चा तब पूरे देश में हुई थी। जेल को आज़ाद कराने के लिए पुलिस और सीआरपीएफ का सहारा लिया गया। कुल 1200 ऐसे कैदी थे, जिन्होंने जेल पर कब्जा जमा रखा था।

दरअसल, ये सब शुरू हुआ था राबड़ी देवी की सरकार के उस निर्णय से, जिसके हिसाब से छपरा जेल से 5 हार्डकोर अपराधियों को कहीं और स्थानांतरित किया जाना था। इनमें वकील राय, संजय राय और अशोक उपाध्याय नामक कैदियों के भी नाम थे। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में ये तीनों ही कैदी मारे गए। इन दोनों के अलावा शशि सिंह और संजय साह नामक दो अन्य कैदी भी मारे गए। सारण के एसपी कुंदन कृष्णन ने इस ऑपरेशन का नेतृत्व किया था।

कैदी इतने आक्रामक थे कि उन्होंने ईंट-पत्थर चलाना शुरू कर दिया था और इसमें एसपी कृष्णन का हाथ भी फ्रैक्चर हो गया था। ये सब कुछ तब शुरू हुआ, जब अधिकारियों की टीम कैदियों के स्थानांतरण के लिए उन्हें लेने पहुँची। इनमें से तीन कैदियों को बक्सर जेल में ले जाया जाना था और दो कैदियों को भागलपुर जेल में स्थानांतरित करना था। जैसे ही टीम वहाँ पहुँची, कैदियों ने उनका विरोध करना शुरू कर दिया।’

असल में कैदियों को डर था कि स्थानांतरण के समय फेक एनकाउंटर के बहाने उन्हें मार डाला जा सकता है। बिहार में उस वक़्त इस तरह की चीजें आम बात थीं। आक्रोशित कैदियों ने अधिकारियों को बाहर निकाल कर भगा दिया और जेल को भीतर से बंद कर लिया। एक तरह से उन्होंने जेल को ही ‘हाईजैक’ कर लिया था। इसके अगले ही दिन कैदियों ने जेल की छत पर चढ़ कर नारेबाजी शुरू कर दी।

उनकी माँग थी कि या तो बिहार की मुख्यमंत्री उनसे मिलने आए या फिर आईजी (प्रिजन्स) उनसे मुलाकात करें क्योंकि उन्हें जिला स्तर के अधिकारियों पर जरा भी भरोसा नहीं है। इसके बाद उन्होंने जेल के बाहर कैम्प कर रहे पुलिसकर्मियों पर ईंट-पत्थर बरसाए। महराजगंज के सांसद प्रभुनाथ सिंह ने वहाँ पहुँच कर कैदियों से बातचीत का प्रयास किया लेकिन इससे कोई फायदा नहीं हुआ।

अगले ही दिन कुछ कैदियों के रिश्तेदार खाने-पीने की चीजें लेकर जेल में मिलने पहुँचे लेकिन पुलिस ने उनलोगों को अंदर नहीं जाने दिया। इसके बाद कैदी फिर से उखड़ गए और पत्थरबाजी शुरू कर दी। इसके बाद सीआरपीएफ और बीएमपी के जवानों ने बिहार पुलिस के साथ मिल कर सीढियाँ लगा कर छत पर चढ़ना शुरू किया। 30 मार्च के दिन ही दोपहर 2:30 बजे जेल को कब्जे से छुड़ाने की कार्रवाई शुरू की गई।

मार्च 30, 2002: जब छपरा जेल को कब्जे से छुड़ाया गया

कुंदन कृष्णन को छपरा की कमान तब दी गई थी, जब वहाँ अपराध चरम पर था और वो ज़माना ऐसा था, जब जेल को ही अपराधी ‘सेफ हैवेन’ मानते थे और भीतर बैठ कर बड़े-बड़े आपराधिक घटनाओं को अंजाम देते थे। दिक्कत ये थी कि जेल का फाटक भीतर से बंद था और चाभी कैदियों के पास थी। राजनेताओं के दाँव भी फेल हो गए थे, ऐसे में बलप्रयोग ही अब आखिरी रास्ता बचा हुआ था।

इस पूरी घटना में 5 कैदियों की मौत हो गई और कई घायल भी हुए, जिनका इलाज छपरा के सदर अस्पताल में हुआ। एसपी कृष्णन ने अपना काम किया और फिर कहा था कि अब जेल प्रशासन के ऊपर है कि वो आगे की कार्रवाई करे। घायलों की स्थिति अच्छी-खासी गंभीर थी। ऑपरेशन ख़त्म होते ही जेल का ताला खोला गया और अधिकारियों ने अंदर जाकर चार्ज लिया। अंत में लाउडस्पीकर से सभी कैदियों को अपने-अपने वार्ड से निकल कर आत्मसमर्पण करने को कहा गया और उन्होंने ऐसा ही किया।

कैदियों ने इस मुठभेड़ के दौरान पुलिस से भी ज्यादा राउंड फायरिंग की थी। ये पूरा मामला इसीलिए भी भड़का क्योंकि राज्य सरकार ने भी काफी लापरवाही की थी। जिस छपरा जेल में मात्र 500 कैदियों की क्षमता थी, उसमें 1300 कैदी ठूँस कर रखे गए थे। साथ ही कैदियों के पास से कई लाठी-डंडे, पिस्तौल और सेलफोन्स जब्त किए गए। ऐसा नहीं है कि छपरा जेल पहली बार चर्चा में आया था।

अक्टूबर 2001 में छपरा जेल में ही दो कैदियों को मार डाला गया था। इस मामले में मृत कैदियों के परिजनों ने जेल के अधिकारियों के खिलाफ ही मामला दर्ज कराया था। इस ऑपरेशन में मारे गए एक कैदी शशि सिंह का दावा था कि वो उन कैदियों की हत्या का गवाह था। इसीलिए, इस मामले में प्रशासनिक अधिकारियों से भी कई सवालों के जवाब लोगों को चाहिए थे, जो अब शायद ही कभी मिल पाएँ।

नितीश कुमार होंगे NDA का चेहरा: JDU- 121, BJP- 121 पर लड़ेगी चुनाव, HAM को अपने हिस्से से सीटें देगी JDU

बिहार में सत्ताधारी एनडीए गठबंधन की ओर से सीट बँटवारे का ऐलान कर दिया गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बताया कि जेडीयू इस बार 122 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, बीजेपी के खाते में 121 सीटें गई हैं। वहीं जीतनराम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) HAM को 7 सीटें दी गई हैं। वहीं बीजेपी अपने कोटे से मुकेश सहनी की पार्टी वीआईपी को सीट देंगे।

एनडीए के संयुक्त संवाददाता सम्मेलन के पूर्व के एक संक्षिप्त बयान में बिहार भाजपा के अध्यक्ष संजय जयसवाल ने साफ़ कहा कि NDA गठबंधन में वही रहेंगे जो नीतीश कुमार के नेतृत्व को स्वीकार करते हैं। संजय जयसवाल ने कहा कि बिहार में एनडीए के नेता नीतीश कुमार हैं और गठबंधन में चुनाव नीतीश कुमार जी के नेतृत्व में हो रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि नीतीश कुमार के नेतृत्व को बिहार में भारतीय जनता पार्टी पूरी तरह स्वीकार करती है।

इस दौरान नीतीश कुमार ने विपक्षी पार्टी खास तौर से आरजेडी पर जमकर निशाना साधा। पटना में बीजेपी-जेडीयू की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने फिर कहा कि नीतीश कुमार ही एनडीए के नेता हैं।

बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने कहा, “सीटों की सूची भी रिलीज कर दी जाएगी। हम लोग बिहार के विकास के लिए काम कर रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे। बहुत सारे लोगों के द्वारा बेवजह बहुत बातें की जाती हैं मैं उन्हें मैं महत्व नहीं देता हूँ। हमसे पहले भी 15 साल दूसरे लोगों को मौका मिला, कहाँ कोई विकास का काम हुआ, क्या हालत थी बिहार की। हमने हमेशा कहा न्याय के साथ विकास। हमारे मन में कोई गलतफहमी नहीं है। बिहार को आगे बढ़ाना है, यही हमारा लक्ष्य है।”

सीएम नीतीश कुमार ने आगे कहा, “जनता मालिक है वो तय करेंगे। हमलोग बीजेपी के साथ हैं। हमलोग मिलकर काम करेंगे। किसी को अगर कुछ कहने से आनंद मिलता है कहें,हमें कोई फर्क नही पड़ता। हमलोगों के मन ने कोई कंफ्यूजन नहीं है। निर्णय लेने में थोड़ा विलम्ब किया, मगर अब सब साफ हो गया है। कुछ लोग होते हैं कुछ बोलेंगे उनका स्वभाव होता है।”

बिहार विधानसभा चुनाव में महज कुछ दिन बचे हैं। एनडीए से अलग होने के बाद बीजेपी और जेडीयू कितनी-कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेंगे साफ हो गया है। बीजेपी और जेडीयू के संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह साफ कर दिया है कि एनडीए के नेता नीतीश कुमार ही रहेंगे और उन्ही के नेतृत्व में चुनाव लड़ा जाएगा।

बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय जयसवाल ने कहा कि बीजेपी के सबसे पुराने सहयोगी नीतीश कुमार के साथ पूरे बिहार का विकास हुआ है। 15 साल में एनडीए सरकार ने बदहाल बिहार को खुशहाल बिहार बनाया है। जेडीयू से हमारा अटूट बंधन है। लोजपा नेता रामविलास का सम्मान करते हैं। मगर बिहार में NDA के नेता नीतीश कुमार हैं और रहेंगे।

बीजेपी ने उम्मीदवारों की लिस्ट को लेकर भी चर्चा पूरी कर ली है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी इस बार कैंडिडेट्स की लिस्ट में बड़ा सरप्राइज देने की तैयारी कर रही है। पार्टी इस बार पाँच से छ: मौजूदा विधायकों के टिकट काट सकती है। यही नहीं मौजूदा विधायकों के किसी करीबी और रिश्तेदार को भी टिकट नहीं देने पर विचार भी पार्टी कर रही है।

राहुल-प्रियंका के ठहाके वाले वीडियो के बचाव में इंडिया टुडे ने फर्जी ‘फैक्ट चेक’ कर की क्लीन चिट देने की कोशिश

हाथरस मामले पर हो रही राजनीति के बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी को कार से हाथरस जाते हुए देखा जा सकता है, जहाँ वह कथित तौर पर पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करने के लिए जा रहे थे। वीडियो में कॉन्ग्रेस नेता के ठहाके की आवाज सुनाई देती है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो की काफी आलोचना की गई, जो कि इंडिया टुडे को रास नहीं आया और मीडिया चैनल ने इसका ‘फैक्ट-चेक’ कर डाला। मीडिया चैनल ने दावा किया कि वीडियो को बहुत सारे कॉन्ग्रेसी नेताओं ने ठहाके वाली आवाज के साथ शेयर किया। India Today ने इस बात से इनकार नहीं किया कि राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी वाड्रा, दोनों ही कार में सबसे आगे बैठे हैं, लेकिन उनका कहना है कि चूँकि दोनों के चेहरे नहीं दिख रहे थे इसलिए यह नहीं बताया जा सकता है कि कौन हँस रहा है।

वीडियो को कॉन्ग्रेस पार्टी एनएसयूआई के छात्रसंघ के ट्विटर प्रोफाइल से ठहाके वाली आवाज के साथ शेयर किया गया था।

वीडियो को भारतीय युवा कॉन्ग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रतिभा रघुवंशी ने भी शेयर किया।

अन्य कॉन्ग्रेसी नेताओं ने इस वीडियो का छोटा सा हिस्सा शेयर किया, जिसमें ठहाके की आवाज सुनाई नहीं दे रही है।

हालाँकि इंडिया टुडे वायरल हुए वीडियो का बिना ठहाके वाला वर्जन प्रस्तुत नहीं कर सका। कुछ कॉन्ग्रेस नेताओं द्वारा शेयर किया वीडियो एडिटेड है। यह सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो से छोटा है। इसमें ठहाके वाली आवााज वाला हिस्सा हटाकर शेयर किया गया है। वायरल वीडियो को ध्यान से सुनने पर साफ पता चलता है कि यह प्रियंका गाँधी और राहुल गाँधी की आवाज है। और जब कॉन्ग्रेस नेताओं द्वारा इसे शेयर किया गया है, तो फिर इसकी प्रमाणिकता पर संदेह करने के लिए शायद ही कुछ बचा हो।

इसके अलावा, गाँधी भाई-बहनों को क्लीन चिट देने के लिए, इंडिया टुडे ने भ्रामक ’फैक्ट-चेक’ किया।

इंडिया टुडे ने 2019 के आम चुनावों से पहले ली गई एक तस्वीर शेयर की, जहाँ गाँधी भाई-बहन मुस्कुरा रहे हैं और कैमरे के लिए पोज दे रहे हैं। इंडिया टुडे ‘फैक्ट-चेक’ करते हुए यह दावा कर रहा है कि ‘ठहाके वाला वीडियो’ ‘भ्रामक’ था। इंडिया टुडे ने दो अलग-अलग घटनाओं को गलत तरीके से इस्तेमाल किया और गाँधी भाई-बहनों को क्लीन चिट देने के लिए शेयर हो रहे ठहाके वाले वीडियो को आसानी से नजरअंदाज कर दिया।

राहुल गाँधी के साथ मंच पर मौजूद पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री कोरोना +ve: संगरूर रैली में शामिल कई नेताओं के जद में आने की आशंका

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी और पंजाब मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के साथ सोमवार (अक्टूबर 5, 2020) को संगरूर में ट्रैक्टर रैली के दौरान नजर आने वाले प्रदेश स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिद्धू कोरोना संक्रमित पाए गए हैं।

राहुल गाँधी की रैली के दौरान वह स्टेज सेक्रेटरी के तौर पर काम कर रहे थे। इस दौरान कई दफा वह प्रदेश सीएम अमरिंदर सिंह व पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी समेत कई नेताओं के संपर्क में आए थे।

आज कोरोना से संक्रमित पाए जाने के बाद उन्होंने खुद को आइसोलेट कर लिया है। रिपोर्ट्स की मानें तो उनमें कोरोना के हल्के लक्षण थे। उन्हें बुखार और शरीर में दर्द की शिकायत थी।

मंगलवार को जब उन्होंने अधिक परेशानी बढ़ने पर कोरोना टेस्ट करवाया तो रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसके बाद उन्होंने खुद को क्वारंटाइन कर लिया। अब उनके संपर्क में आए सभी लोगों का कोरोना टेस्ट किया जाएगा।

बता दें कि बलबीर सिद्धू ने सोमवार को संगरूर में खेती बचाओ रैली में भाग लिया था। राहुल गाँधी वहाँ नए किसान कानूनों के विरोध में अपनी रैली कर रहे हैं।

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने सोमवार को अपनी रैली में आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन कृषि कानूनों से ‘किसानों और मजदूरों को वैसे ही खत्म’ कर रहे हैं जैसे उन्होंने नोटबंदी और जीएसटी से छोटे दुकानदारों को ‘बर्बाद’ कर दिया था। वहाँ उन्होंने चीन के मुद्दे को उठाते हुए यह भी कहा था कि भारतीय सैनिकों पर हमला चीन के फौजियों ने इसलिए किया क्योंकि प्रधानमंत्री ने देश को कमजोर बना दिया है।

उल्लेखनीय है कि इस समय पंजाब में कोरोना संक्रमण के 1,19,186 मामले सामने आए हैं। इनमें से करीब 1,02,648 लोग ठीक हो चुके हैं और 3,641 लोगों की अब तक मौत हुई है। वहीं पूरे भारत की यदि बात करें तो देश में संक्रमण के मामले बढ़कर 66,85,082 हो गए हैं। वहीं 884 और लोगों की मौत के बाद मृतक संख्या बढ़कर 1,03,569 हो गई है। इसके अलावा देश में कोरोना के 9,19,023 मरीजों का इलाज जारी है और 56,62,490 लोग संक्रमण मुक्त हो चुके हैं

नर्क से भी बड़ी यातना: चित्रगुप्त ने उस जीव को एक ढपली दी, ‘आजादीईईई’ का नारा दिया… मगर टिकट नहीं दी

“इन्साफ? आखिर कहाँ है इन्साफ?”, “तुम सब जिम्मेदार हो! क्या एक गरीब-मजलूम का न्याय पर कोई हक़ नहीं?” बाहर से तेज आवाजें आ रही थीं। वैसे तो यमपुरी में दफ्तर की सबसे ऊँची मंजिल का कोने वाला बड़ा केबिन यमराज को सदियों से मिला हुआ था, लेकिन सबसे नीचे के फ्लोर पर चल रही इस चीख-पुकार की आवाज, उनके ना चाहते हुए भी उनके कमरे तक आ ही जाती थी।

ऐसा लग रहा था कि दर्जन भर यमदूत किसी आत्मा से उठा पटक में लगे हुए हैं। बलशाली, दिव्य शक्तियों से लिसे उनके यमदूतों के लिए पापी से पापी, ज़ेवियर्स जैसी, खुद को संत घोषित करने वाली आत्माओं को भी नरक में पटकना चुटकियों का खेल था। फिर ये कौन था जो यमराज के दफ्तर में ही यमदूतों को धोबी-पछाड़ दिए जा रहा था?

चित्रगुप्त के भेजे डैशबोर्ड में जन्म-मृत्यु का हिसाब भी सही सेट नहीं हुआ था और यमराज पहले ही खीजे हुए थे। चिढ़े हुए यमराज अपने केबिन से बाहर निकले और दहाड़े, “क्या मजाक बना रखा है? ये दफ्तर है या कोई मछली बाजार?” चित्रगुप्त घबराए, मगर जब उन्हें दिखा कि ये डाँट उन्हें नहीं नीचे के किन्हीं कर्मचारियों को पड़ रही है, तो वो भी मौके का फायदा उठाकर अधिनस्तों पर धौंस जमाने यमराज के पीछे लपक लिए।

यमराज का पीछा करना बेचारे दुबले-पतले चित्रगुप्त के लिए कोई हँसी खेल न था। कोविड-19 के दौर में वर्क फ्रॉम होम करते जो वजन बढ़ गया था उसे नियंत्रित करने के लिए यमराज आजकल सीढ़ियों से चढ़ते उतरते थे।

पतले दुबले चित्रगुप्त को लगा कि उसके लिए सीढ़ियों का इस्तेमाल जरूरी नहीं। फिर दौड़कर यमराज को पकड़ लेना भी कोई हँसी खेल नहीं था। सदियों में एकमात्र सावित्री ऐसा कर पाई थी, मगर वो तो स्त्री थी, वो कुछ भी कर सकती है, चित्रगुप्त ने सोचा और लिफ्ट में घुस लिए।

निचली मंजिल पर अफरा-तफरी मची थी। कई मेज-कुर्सियाँ उल्टी पड़ी थीं और एक लाल कमीज और कमर से खतरनाक स्तर तक फिसल चुकी जीन्स पहने कोई जवानी के बीते दिनों तक पहुँचा युवक, एक हाथ उठाए, आँखे बंद किए गला फाड़ कर चीख रहा था – “आजादीईईई! हमें क्या चैये – आजादी! अरे ले के रहेंगे – आजादीईईई” यमदूतों में कोई जमीन पर औंधा पड़ा था तो कोई इस उत्पाती आत्मा को बाँधने के लिए जैसे तैसे दिव्य शक्तियों के संधान में जुटा था।

लिफ्ट से भाग कर निकलते चित्रगुप्त और आँखें लाल किए, हाँफते हुए, सीढ़ियों से पहुँचे यमराज को देखकर यमदूतों को लगा बैकअप फ़ोर्स आई है। “कौन है ये जो इतना बवाल काट रहा है?” कहते कहते यमराज ने कमर पर टंगा यमपाश उतारा और शोर मचा रहे अधेड़ युवक की आत्मा को बाँधकर मेज से नीचे घसीट लिया। उसका गिरना था कि यमदूत उस पर टूट पड़े। दिव्य शक्तियों का संधान छोड़ जूते-चप्पल, लप्पड़-थप्पड़ जिसे जो मिला उसने उसी से मरम्मत शुरू कर दी। “बस करो मूर्खों, इधर लाओ उसे”, यम दोबारा चीखे।

हंगामा कुछ शांत हुआ और जब तक उसे यमराज के सामने पेश किया गया, तब तक किसी ने उसका मुँह मोबिल से काला कर डाला था। जोरदार पिटाई होते ही शौचालय में की जाने योग्य हरकतें भी उसने वहीं कर डाली थी। नाक सिकोड़ते हुए यमराज ने अपना उत्तरीय मुँह पर रखा और हिकारत भरी नजर से उसकी और भी नीचे फिसल गई गीली जीन्स को देखा।

चित्रगुप्त बोले, “आखिर कौन है ये दुष्ट और इसने उत्पात क्यों मचा रखा है।“ “उत्पात मचाने की इसकी शुरू से ही आदत रही है महाराज! धरती पर तो ये ‘टुकड़े होंगे’ के नारे लगाकर देश तोड़ने तक की बातें किया करता था”, एक यमदूत बोला। “ठीक है-ठीक है, मगर ये यमलोक में हंगामा क्यों खड़ा कर रहा है? कौन लाया है इसे?” “लाया नहीं गया महाराज, ये तो खुद ही घुसपैठ करके यमपुरी में प्रवेश कर रहा था, हम तो रोक रहे हैं इसे!” एक दूसरे यमदूत ने बताया।

“खुद ही घुसा चला आ रहा था!” चौंककर चित्रगुप्त ने यमराज की ओर देखा और बोले, “मैं अभी इसका बही-खाता देखता हूँ महाराज”, और कहते-कहते ही अपना टैब हवा में प्रकट कर लिया। पिटकर हलकान हुए व्यक्ति को अब कुछ होश आ रहा था और उसने इधर उधर देखना शुरू किया।

“ये तो एक पहुँचा हुआ नौटंकीबाज है महाराज!” चित्रगुप्त बही-खाते का हिसाब देखकर चीखे। “हस्तिनापुर जो कि अब दिल्ली-एनसीआर नाम से जानी जाती है, वहाँ के एक कंजड़ी ‘छोटा आदमी’ के बाद बेतुके बवाल करने में ये दूसरे नंबर पर था”, चित्रगुप्त ने आगे जोड़ा।

“काम के नाम पर ये ‘तैयारी’ किया करता था, और जिस उम्र में लोग मेहनत-मजदूरी से कमाने लगते हैं, उस उम्र में ये जनता के करों से बने हॉस्टल में पलता रहा। उसके बाद इसने एक आयातित विचारधारा के साथ चुनाव भी लड़ा था और फिर पार्टी को उस चुनाव में हुए खर्चे का हिसाब भी नहीं दिया। इसके मित्रों पर मृतकों के नाम पर चंदा वसूलकर दावतें उड़ाने के भी अभियोग रहे हैं।” चित्रगुप्त के पास उसके अपराधों की लम्बी लिस्ट थी।

“वो सब तो ठीक है, मगर ये यमपुरी कैसे पहुँचा? आयु कितनी है इसकी?” यमराज सीधे काम की बात पर आए। जितनी जल्दी ये बवाल निपटता वो घर की ओर निकल पाते, वैसे भी गृह-स्वामिनी ने आज मशरूम लेकर आने का आदेश दिया हुआ था। उसके साथ फ्रोजेन मटर ना ले जाने पर ‘तुम जरा सा भी दिमाग नहीं लगाते, क्या सिर्फ मशरूम की सब्जी बनेगी’, वाला भाषण सुनने का खतरा था, और जो लेकर जाते तो ‘पहले से ही फ्रिज में पड़ा था, अगर मुझे मँगाना होता तो वो भी व्हाट्स एप्प किया होता’ की डाँट पड़ सकती थी।

आगे कुआँ, पीछे खाई की स्थिति में फँसे यमराज इस घुसपैठिया आत्मा का का किस्सा जल्दी निपटाना चाहते थे। “आयु तो शेष है महाराज, उँगलियों पर हिसाब जोड़कर चित्रगुप्त ने कहा, जरूर ये आत्महत्या के प्रयास का मामला है!” उनकी बात पूरी ख़त्म भी नहीं हुई थी कि बंधे हुए युवक के अंग विशेष पर एक यमदूत ने लात जड़ दी। “कोई आत्महत्या के प्रयास का मामला नहीं महाराज”, वो चीखा!

“ये आत्मा इसी यमदूत के बीट एरिया की है महाराज, इससे अन्दर का मामला पता चल जाएगा”, चित्रगुप्त बोले। यमराज ने उसे आगे आने का इशारा दिया। “इसने जानबूझकर कम नशे की गोलियाँ खाई हैं महाराज”, यमदूत बोला। “ये पहले से ही नशे का अभ्यस्त है, पतली सिगरेट को वीड और मोटी सिगरेट को हैश बुलाने वाली ताड़का तो इसके पुराने हंगामों की ख़बरों में इसके बगल में ही दिख जाएगी!”

यमदूत के पास अपनी बात सिद्ध करने के लिए प्रयाप्त मात्रा में लिंक और स्क्रीनशॉट भी थे। “कितने नशे पर ये मरेगा नहीं, बीच में लटका रहेगा और आत्महत्या के प्रयास की सहानुभूति भी बटोर लेगा, ये इसे अच्छी तरह पता है। ये बीच में लटका था जब यमदूत सुट्टा ब्रेक पर गए और प्रहरियों के कम होते ही ये यमपुरी में घुसने का प्रयास करने लगा। इसे बीच में लटका देखकर ही मुझे इसकी नियत पर शक हुआ था, और मैंने मोशन सेंसर ऑन कर दिए थे, इसके घुसपैठ करते ही अलार्म बज गया और ये पकड़ा गया।” यमदूत ने अपनी बात पूरी की।

“ठीक है, मगर फिर भी एक बार इससे पूछ लेते हैं, हमें दूसरे पक्ष की बात भी सुननी चाहिए महाराज”, चित्रगुप्त ने निवेदन किया। “हम्म, कहो, तुम्हें अपने पक्ष में क्या कहना है?” यमराज ने कड़ककर कहा। उनके इशारे पर तब तक एक दूसरा यमदूत नरक की आग की आँच तेज करने में जुट गया था, कुछ दूसरे तलने वाला कड़ाह और तेल भी ले आए थे।

पिटाई से टूटा हुआ युवक तैयारियाँ देखकर सुबका, “वो मुझे बहुत पसंद थी यमराज!” पहले ही वाक्य में सबको समझ आ गया कि मामला एकतरफा प्रेम प्रसंग का है। सहानुभूति में चित्रगुप्त ने सर हिलाया और यमदूतों की पकड़ भी कुछ ढीली पड़ी। यमराज ने अपना पाश वापस खींच लिया। “मैं उसे रोजाना चिट्ठियाँ लिखा करता था”, उसने बताया।

“चिट्ठियां! #लाखोलपिला_क्वार्टर! व्हाट्स एप्प, और ईमेल के दौर में ये पढ़ा लिखा आदमी स्नेल-मेल भेज रहा था?” एक यमदूत बोल पड़ा। क्वार्टर कि बात सुनकर चित्रगुप्त ने आँखें तरेरी और यमराज की ओर आँखों से इशारा किया। यमदूत सकपका कर चुप हो गया।

“मगर जब दौर फ़ोन, मेसेज, व्हाट्स एप्प वगैरह का है ही तो तुम चिट्ठियाँ क्यों लिख रहे थे?” चित्रगुप्त ने जानना चाह। “वो क्या है कि मैं रोज व्हाट्स एप्प यूनिवर्सिटी कहकर देश की आम बहुसंख्यक आबादी का मजाक जो उड़ाता था! खुद ही व्हाट्स एप्प के जरिए प्रेम कैसे शुरू करता?” लाल कमीज वाले ने कहा।

“खैर, फिर क्या हुआ?” यमराज ने जल्दी किस्सा खत्म करवाने के लिए पूछा। “महाराज मैं चाँद-तारे तोड़कर लाने, गहने-जेवर दिलाने जैसे बुर्जुआ वादे भी नहीं करता था”, उसने बात जारी रखी। “बुर्जुआ”, नया शब्द सुनकर यम फुसफुसाए, “जाने दें महाराज, जुमला है, किस्सा सुन लें जल्दी”, चित्रगुप्त ने जवाब दिया। “कोने के ठेले की पापड़ी चाट, नत्थू हलवाई के समोसे-जलेबी से लेकर चुनमुन के खोमचे के गोलगप्पे तक के वादे किए थे मैंने”, वो बोलता रहा।

“फिर क्या हुआ?” चित्रगुप्त ने उकसाया। “होना क्या था, जो चिट्ठियाँ पहुँचाने जाता था, उसने चिट्ठियां खोलकर पढ़ने की आजादी ले ली!” उसने जीन्स को वापस थोड़ा ऊपर खींचते हुए कहा। “मैं आज जो चिट्ठी में वादा करता, अगले ही दिन वो कासिद वही चीज़ चिट्ठी के साथ लिए पहुँच जाता”। अब सुनने वालों को अंदाजा हो चला कि क्या हुआ होगा।

“मतलब तुम्हारी चिट्ठियाँ पहुँचाते-पहुँचाते डाकिए ने ही तुम्हारी माशूका फँसा ली! यही ना?” चित्रगुप्त ने पटाक्षेप किया। चित्रगुप्त की बात सुनते ही दोनों हाथ ऊपर उठाकर उसने दारुण स्वर में विलाप किया और पछाड़ मारकर जमीन पर लोटने लगा।

“अब आप ही फैसला कीजिए महाराज”, चित्रगुप्त बोले। युवक की मूर्खता पर अब यमदूतों को भी हँसी आ रही थी। “अरे मूर्ख, तूने बस वादे किए, उन्हें पूरा तो वो डाकिया करता रहा। ऐसे में लड़की चिट्ठियों के साथ चाट-समोसे पहुँचाने वाले के साथ नहीं जाती तो क्या तेरे झूठे वादे पढ़ती रहती?” यमराज ने सर पीटते हुए कहा।

“इस मूर्ख उत्पाती को अब कड़ाहे में तल देते हैं महाराज”, अब तक यमदूतों ने तेल भी खौला लिया था। “यमलोक की मामूली सजाएँ इस गधे के लिए प्रयाप्त नहीं होंगी। जरूर किसी क्लेरिकल एरर की वजह से इसे उल्लू-गधे के बदले मानवीय शरीर मिल गया है”, यमराज ने चित्रगुप्त की तरफ देखकर पूछा।

खुद को मामले में फँसता देखकर चित्रगुप्त ने जल्दी मामला निपटाना चाहा, “इसे वापस दिल्ली में फेंक देते हैं महाराज। मैं टिकट पाने वालों की पार्टी की पहली लिस्ट से इसका नाम काट देता हूँ। धरती पर जाकर ये दूसरे सिर्फ वादा करने वालों को सत्ता का इन्तजार करते और फासीवादी कहलाने वालों को वादे पूरे करके सत्ता का सुख भोगते देखकर जलेगा। कड़ाहे में तलना इसके लिए प्रयाप्त नहीं”, चित्रगुप्त ने जल्दी जल्दी कहा।

“हाँ, वैसे भी अपनी माशूका को किसी और की बाहों में देखकर जलने जैसा दर्द हमारे नरक में भी नहीं दिया जा सकता”, यमराज ने उसे वापस दिल्ली में फेंकने का इशारा करते हुए कहा और मुड़कर वापस सीढ़ियों की तरफ चल पड़े।

उत्पाती युवक को पता था कि नीचे उन्हीं की सरकार है जिन्हें कोसने में उसने पिछले 5 साल बिताए हैं। अगले कई वर्षों तक भी यही व्यवस्था रहने वाली थी, ये भी उसे मालूम था। कठिन दंड से घबराकर उसने छूटना चाहा मगर अब तक यमदूत संभल चुके थे। छटपटाते जीव को वापस दिल्ली में पड़े उसके शरीर में फेंक दिया गया।

केरल: लॉकडाउन के दौरान बढ़े चाइल्ड पोर्नोग्राफी के मामले, DYFI नेता इसा रियाज समेत 41 लोग गिरफ्तार

केरल में बढ़ रहे चाइल्ड पोर्नोग्राफी के मामलों का खुलासा करते हुए प्रदेश पुलिस की साइबर विंग ने सोमवार (अक्टूबर 5, 2020) को DYFI (डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया) नेता इसा रियाज (Easa Riyaz) समेत 41 लोगों को गिरफ्तार किया है। इसमें कई आइटी प्रोफेशनल भी शामिल हैं। इन पर आरोप है कि इन्होंने छोटे बच्चों की नग्न तस्वीरें सोशल मीडिया पर सर्कुलेट की।

प्रदेश के एडिशनल डीजीपी मनोज अब्राहम ने बताया कि चाइल्ड पोर्नोग्राफी मामले में उन्होंने 268 मामले दर्ज किए हैं। गिरफ्तार हुए लोगों पर ऐसी सामग्री अपलोड, डाउनलोड और उन्हें सोशल मीडिया पर सर्कुलेट करने का आरोप है। इन लोगों के पास से पुलिस ने कई इलेक्ट्रानिक डिवाइस और फोन भी जब्त किए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक केरल पुलिस ने अपने इस ऑनलाइन ऑपरेशन को ‘P Hunt 20.2’ का नाम दिया था। इसी ऑपरेशन के तहत यह 41 लोग गिरफ्तार हुए। पुलिस ने बताया कि ये लोग चाइल्ड पोर्नोग्राफी से संबंधित सामग्री को अपलोड और सर्कुलेट करने के लिए इनक्रिप्टिड अकाउंट का इस्तेमाल करते थे। पुलिस को इनके पास से कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और फोन मिले।

एडिशनल डीजीपी मनोज अब्राहम इस संबंध में बताते हैं कि आरोपितों की पहचान और उनकी गिरफ्तारी ‘साइबरडोम’ (Cyberdome- साइबर पुलिस के स्पेशल विंग), इंटरपोल और अन्य एजेंसियों की मदद से की गई है। पुलिस का कहना है कि चाइल्ड पोर्नोग्राफी से संबंधी बरामद सामग्री में अधिकांश बच्चे 6 से 15 उम्र के शामिल हैं।

इसके अलावा अधिकारियों ने यह भी पाया है कि कुछ आरोपितों ने अपने फोन को लगातार फॉरमेट किया ताकि उन पर किसी की नजर न पड़े। साथ ही बच्चे की जानकारी चुराने के लिए ‘मालवेयर’ का इस्तेमाल करके पीड़ित का वेबकैम भी चालू किया गया।

साइबर क्राइम में विशेष अधिकारी के तौर पर तैनात मनोज अब्राहम कहते हैं, “महामारी के दौरान स्वास्थ्य के अलावा जिसके ऊपर सबसे बड़ा दुष्प्रभाव पड़ा है वो है- ऑनलाइन क्राइम। लॉकडाउन में डिजिटल इस्तेमाल में काफी बढ़ोत्तरी हुई है और इसी के साथ पोर्नोग्राफी खासकर चाइल्ड पोर्नोग्राफी के मामले बढ़े हैं। कई लोग यह सोचते हैं कि रात के अंधेरे में वो जो कुछ भी नेट पर सर्च करते हैं उस पर किसी की नजर नहीं है, लेकिन ये उनकी भूल है।” अब्राहम के अनुसार कई केसों में देखा गया कि ऐसे लोग बीमार होते हैं जिन्हें इलाज की जरूरत होती है क्योंकि वह बार-बार वही अपराध दोहराते हैं।

बता दें कि हमारे देश में चाइल्ड पोर्नोग्राफी से संबंधी तस्वीरें, वीडियो और साहित्य देखना, उसे शेयर करना अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसा करने वाले को पाँच साल की जेल और अधिकतम 10 लाख का जुर्माना भरना पड़ सकता है।

हाथरस की एक और बेटी ने तोड़ा दम: 6 साल की मासूम बच्ची से हुआ था रेप, इगलास SO सस्पेंड

हाथरस की एक और बेटी की दुष्कर्म के बाद मौत हो गई है। 6 साल की मासूम बच्ची ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। मामला सादाबाद क्षेत्र का है। पीड़िता की मौसी के ही बेटे पर ही रेप का आरोप है। बच्ची की मौत के बाद शव के साथ परिजनों ने सड़क पर धरना दिया। पीड़ित पिता ने इगलास एसओ पर संगीन आरोप लगाए हैं। इसके बाद एसओ पर गाज गिरी है।

अलीगढ़ के एसएसपी ने इगलास एसओ को इस मामले में सस्पेंड कर दिया है। इगलास थाना क्षेत्र के एक गाँव में बच्ची के साथ रेप की घटना हुई थी। पुलिस ने इस मामले में एक आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। पिता की तहरीर के आधार पर अलीगढ़ में मौसी और उसके बेटे के खिलाफ आईपीसी की धारा 323, 342, 376, 120b और लैंगिक अपराधों से बालकों के संरक्षण अधिनियम 2012 की धारा 5 और 6 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

हाथरस एसपी ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि हाथरस में सादाबाद क्षेत्र के जटोई गाँव की रहने वाली एक नाबालिग लड़की के अलीगढ़ में रहने के दौरान कथित तौर पर उसके साथ 15-20 दिन पहले उसके नाबालिग मौसेरे भाई ने बलात्कार किया था, जो कि मानसिक रूप से विक्षिप्त है। पीड़िता का कल इलाज के दौरान निधन हो गया और उसके परिवार ने उसका अंतिम संस्कार कर दिया। उन्होंने बताया कि आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है और अलीगढ़ पुलिस द्वारा उसे जुवेनाइल कोर्ट में पेश किया गया। आगे की कार्रवाई की जा रही है।

मामले में दर्ज एफआईआर के मुताबिक, मृतक बच्‍ची की माँ की मौत 7 महीने पहले हो गई थी। इसके बाद उसकी मौसी उसे अपने यहाँ ले गई थी। पिता का आरोप है कि उसी के लड़के ने बच्ची से रेप किया। उन्होंने गुहार लगाई कि उनकी बड़ी लड़की को वापस लाया जाए और इस मामले में सही आरोपित की गिरफ्तारी हो। पुलिस ने गलत आरोपित को पकड़ा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि पीड़िता के साथ दरिंदगी करने के बाद इलाज की जगह उसे बाथरूम में बंद कर दिया गया। घर के बाहर खेल रहे बच्चों ने जब मासूम के रोने की आवाज सुनी तो शोर मचाया, जिसके बाद ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी। इसके बाद चाइल्ड हेल्पलाइन की मदद से मासूम हो अस्पताल में एडमिट कराया गया। हालत बिगड़ता देख उसे दिल्ली भेजा गया था, जहाँ इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

गौरतलब है कि हाथरस की ही दलित लड़की की मौत के मामले को लेकर पूरे देश में गुस्से और गम का माहौल है। चंदपा थानाक्षेत्र के एक गाँव की रहने वाली दलित लड़की के साथ चार लोगों ने कथित रूप गैंगरेप किया था और उस पर जानलेवा हमला किया था। कई दिनों तक जिंदगी और मौत से लड़ने के बाद दलित लड़की की सफदरगंज अस्पताल में मौत हो गई थी। हालाँकि अभी तक इस मामले में रेप की स्थिति स्पष्ट नहीं है। मेडिकल रिपोर्ट में रेप के आरोप की पुष्टि नहीं हुई है।

व्यंग्य: बिहार चुनाव में टिकट न मिलने पर कन्हैया का धमाकेदार इंटरव्यू ऑपइंडिया पर

अजीत: भेज रहा हूँ नेह निमंत्रण प्रियवर तुम्हें बुलाने को, हे बीहट के वामपंथी शूकर तुम भूल न जाना आने को… शरद ऋतु के आश्विन मास की चतुर्दशी की इस पावन बेला में हम आज आप लोगों का साक्षात्कार कन्हैबा से करवाने जा रहे हैं। इनको इज्जत बस वामपंथी कामभक्त माओवंशी लमप्ट समुदाय और गिरोह विशेष के पत्रकार और R&Dtv जैसे संस्थान ही देते हैं। वरना लड़कियों के सामने लिंगलहरी बन कर मूत्र विसर्जन का कार्य हो, या फिर भारत के टुकड़े-टुकड़े करने की अतितीव्र इच्छा, इनकी करतूतें ऐसी हैं कि कन्हैया कुमार कहना कुछ वैसा ही है जैसे कुत्ते को घी पिलाना। पचेगा ही नहीं। इसलिए हम इन्हें कन्हैबा कहेंगे।

कन्हैबा: आप ही लोग का टाइम है, संघी लोग का समय है तो सूगर कह लो, कुत्ता कह लो… लेकिन जनता जवाब देगी इसका भी। संघियों से बढ़िया बात का उम्मीद भी कैसे करें। यही सब गाली-गलौज करोगे, यही सिखाया जाता है साखा में।

अजीत: अरे, शूकर तो विष्णु के अवतार हैं भाय! आप को तो वामपंथी होने के बाद भी सूअर कह कर मैंने कितनी इज्जत दी है। जेएनयू में ये सब नहीं पढ़ाया क्या? खाली यही पढ़ाया कि बाप मरे तो माथा मत मुड़ाओ? जनेऊ तोड़ तो, ब्राह्मणवाद के खिलाफ हो जाओ?

कन्हैबा: जेएनयू एक वर्ल्ड क्लास

अजीत: चार चवन्नी घोड़े पर, वर्ल्ड क्लास…

कन्हैबा: फिर देखो अश्लील बातें… यही सब तो पढ़ाते हैं साखा में।

अजीत: एगो भीतर का बात बताएँ? हम आज तक संघ की किसी शाखा में नहीं गए। हम वहाँ गए हैं जहाँ तुम्हारे जैसे बकचोन्हर पूरा जीवन किताब पढ़ कर मर जाएँगे, सलेक्शन नहीं होगा। और, अगर बचपन में थोड़ा पढ़ लेते मेरी तरह के स्कूल में, तो बनराते नहीं। अफ्रीका के समाज पर पीएचडी कर के बिहार के गाँव में ज्ञान नहीं दे रहे होते कि सामाजिक न्याय नहीं हो रहा है। और वैसे भी, कभी शाखा हो आओ, क्या पता लबरागिरी छोड़ कर कुछ सेन्स माथा में ढुक जाए!

कन्हैबा: अरे महराज, सबाल पूछिए, टाइम नहीं है ओतना! सुबह-सुबह दारू ले के बैठ गए हैं…

अजीत: दारू नहीं है, शैम्पेन है। मेहनत की कमाई का है। तुम बाप जनम में अफोर्ड नहीं कर पाओगे। किसी बड़े वामपंथी के पास जाओगे तो हो सकता है सूँघने या देखने दे दे, तुम्हारी औकात उतनी ही है। पूरा जीवन साला ‘ऐ कामरेड, दो रूपया दीजिए न, एक बीयर हो जाएगा’ कह के जेएनयू में भीख माँगने में बीता, और बात करते हैं शैम्पेन की… और ये ‘टाइम’ का क्या करोगे तुम? हाथरस जाना है क्या तुमको भी? तुम्हारे भाई-बंधु तो आग लगाने की तैयारी में हैं, जाओ तुम भी… अच्छा, पहला सवाल दोगलेपन पर है। याद है तुम ललुआ का पैर में गिर गए थे दाँत बिदोर के? कि भूल गए? और वही राजद वाला तुम्हारे खिलाफ चुनाव में कैंडिडेट उतार दिया था? नहीं तो तुम्हारी हार इतने बुरे तरीके से नहीं होती। एक और बात याद है, चंद्रशेखर वाली? कॉमरेड चंद्रशेखर? पता है मेरे ही स्कूल के थे, उनको लालू पार्टी के ही काल में पार्टी के ही नेता ने सरेआम गोली से छलनी कर दिया था। फिर ये बताओ कन्हैबा, लाज नहीं लगा था ललुआ के पैर पर गिरने में? वो भी छोड़ो, इस बार तो गठबंधन में आ गए हैं वामपंथ वाले। तुम लोगों का सही में कुछ ईमान-जमीर जैसा कुछ है कि सब बेच कर बीड़ी पी गए? लाज नहीं लगता है आईना देखते हो तो?

कन्हैबा: देखिए राजनीति में कोई परमानेंट दोस्त या दुश्मन नहीं होता… कॉमरेड चन्द्रशेखर वाली बात तो पुरानी हो गई। कब तक वही बात ले कर हम लोग अलग-अलग बिखरे रहेंगे। समय है कि सेकुलर ताकतों को एक साथ…

अजीत: ऐऽऽऽ इधर देखो… ऐसा लप्पड़ मारेंगे न कि कनपट्टी लाल हो जाएगा! सेकुलर ताकतें? पूरा जीवन साला हिन्दू-मुस्लिम, यादव-मुस्लिम, दलितों की बात कर के आंदोलन के नाम पर उन्हीं गरीबों की हत्या करवाने में लगे रहे, और बात कर रहे हैं सेकुलर ताकतों का। दोबारा मत बोलना नहीं तो स्क्रीन से बाहर निकल कर चमेटा मारेंगे।

कन्हैबा: अरे! राजनीति में और क्या कहें? कह दें कि हम लोग बिक गए हैं, विचारधारा के नाम पर हमें कोई पूछता नहीं, न ही हम विचारधारा जैसी कोई बात मानते हैं? ऐसे थोड़े होता है। सब कुछ देखना पड़ता है भाई, वरना हम लोगों को, जब तक कहीं सैनिकों को न मार दें, सरकारी कर्मियों को माइन से न उड़ा दें, कहीं केरल माँगे आजादी न कहें, कहीं दिल्ली में दंगा न करवाएँ, तब तक हमको पूछता ही कौन है? हम लोगों से ज्यादा पॉपुलर और वामपंथी तो साले कॉमेडियन हो गए हैं! …ये वाला पार्ट कटवा दीजिएगा भाय, आप तो समझते ही हैं।

अजीत: अरे, एकदम… बिलकुल कटवा देंगे भाई। टेंशन न लो। वैसे विचारधारा से याद आया कि उमर खालिद पर पूरे साल कुछ बयान नहीं? अरेस्ट हो गया, एक केस से छूटा, दूसरे में अरेस्ट हुआ। तुमने न तो फासीवाद कहा, न लोकतंत्र की हत्या… मतलब, भाई था यार तुम्हारा। कितने फोटो में एकदम जानेमन टाइप चिपक कर खड़ा है तुम्हारे साथ…

कन्हैबा: देखिए, उसको राजनीति करना है, हमको भी करना है। उसको ताहिर हुसैन, खालिद सैफी, सफूरा जरगर के साथ मीटिंग कर के जिल्ली दंगों वाली राजनीति करनी है, हमको बिहार का राजनीति करना है। वो अपने राह चला, हम अपने। हम अभी कुछ बोलेंगे तो बेगूसराय वाला सब मारेगा कम, दौड़ाएगा ज्यादा। लोकसभा चुनाव में तो देखे ही आप कि कैसे जिस गाँव में जाते थे, वहीं पूछता था कि भारत के टुकड़े काहे करना चाहते हो? बोला ऊ, फँस गए हम। हमको भोट भी उसी कारण लोग नहीं दिया। नया मूँछ वाला मजहबी छोड़ कर हमको वोट कोई देबे नहीं किया नहीं तो गिरिराज को तो हराइए देते।

अजीत: मतलब, अपनी छवि सुधारना चाह रहे हो कि तुम देशद्रोही नहीं हो?

कन्हैबा: और क्या! हम काहे के देशद्रोही? ‘जो भरा नहीं है भावों से, बहती जिसमें रस धार नहीं, वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं’! हमको सब याद है ये सब। हम देशप्रेमी आदमी हैं। हमको तो फँसाया गया है मोदी के द्वारा, डरता है हमसे…

अजीत: फिर देखो! मोदी तुमसे काहे डरेगा? कभी सोचे हो बैठ कर?

कन्हैबा: देस के युवाओं से डरता है मोदी, हम भी युवा हैं…

अजीत: अच्छा! तुम युवा हो और मोदी तुमसे डरता है? सुनो, ऐसा है कि तुम हो बुजुर्ग आदमी जो ‘छात्र’ होने के नाम पर बहुत दिन पब्लिक के पैसे पर ऐश काटा। यहीं बीहट के चाँदनी चौक पर मोबाइल रिचार्ज का दुकान खोल लो, फिर आशिकबाजी करते रहना… बात करते हैं! बिहार चुनाव में तो घंटा टिकट नहीं मिला तुमको…

कन्हैबा: हम कौन सा टिकट माँग रहे थे। हम तो लड़ने का सोचे भी नहीं थे।

अजीत: अच्छा! दस महीने में बिहार पर जो ज्ञान देते रहे, गाँव-घर घूमते रहे, वो क्या जनेर के घास का दाम पता कर रहे थे? इतना झूठ काहे बोलते हो? इंटरनेट के युग में ये सब छुपता है? सीधे क्यों नहीं बोलते कि तुम्हारी पार्टी ने अपना भविष्य देखते हुए, राजद ने अपने लौंडों का भविष्य देखते हुए, तुम्हें लात मार कर बाहर कर दिया। राजद वाला अपने तेजू-तेजा को ‘युवा नेता’ बनाएगा कि तुमको आगे बढ़ने देगा?

कन्हैबा: अरे, हम तो एक सप्ताह पहलहिए बोल दिए थे कि हम चुनाव लड़ने की इच्छा नहीं रखते, ऐसा कोई विचार ही नहीं था।

अजीत: वामपंथी का बात, घोड़ा का पाद… चुनाव लड़ने की इच्छा नहीं रखते! सीधे बोलो कि पार्टी ने नौता दे के पत्तल खींच लिया। निर्दलीय लड़ जाओ, कौन रोक रहा है?

कन्हैबा: जिला परिसद का देखेंगे, पंचायत चुनाव का टार्गेट अब ले कर चलेंगे। हारना नहीं है, हम लड़ेंगे साथी। वो भी नहीं होगा तो जेएनयू में तो इतना है ही कि एक और पीएचडी के लिए एडमीसन मिल जाए। स्टूडेंट हैं, आदमी जीबन भर सीखता रहता है। हमारी उमर ही अभी क्या है!

अजीत: उमर का तो खैर रहने दो बौआ! ये बताओ कि लाज नहीं लगता तनिको? एक रत्ती? तनियो-मनियो? आदमी आज कल बीस-बाइस साल से कमाने लगता है, या कम से कम कमाने के लिए उपाय करता है। तुम अभी भी निर्लज्ज टाइप ‘एक और पीएचडी कर लेंगे’ की बात कर रहे हो। पुरानी पीएचडी से भारत के किस क्षेत्र का भला हो गया? बोलने-बैठने का सहूर नहीं है तुमको, तुमसे बढ़िया भाषण छठी क्लास का बच्चा देता है… तुमको नहीं लगता कि परिस्थितिवश तुम नेता बन गए, वरना तुमको आता तो घंटा कुछ नहीं है!

कन्हैबा: अरे आप संघी आदमी हैं, आपको पीएचडी कहाँ से समझ में आएगा। आप लोग तो शिक्षा के विरोध में हमेशा रहे हैं। समाज को बाँटना आप लोगों का काम रहा है। गाँधी जी भी अफ्रीका में ही काम किए थे। आप तो काले लोगों के विरोध में हमेशा रहे हैं। आप क्या जानेंगे कि अफ्रीका का क्या महत्व है।

अजीत: बेटा, संघ का कितना स्कूल चलता है पता है? संघ के किसी आदमी से मिले भी हो कि ऊपर से जो व्हाट्सएप्प ग्रुप में आता है, वही बोकर देते हो? समाज को बाँटने वालों ने कोरोना के समय में कितने करोड़ लोगों को लगातार भोजन पहुँचाया है पता करो। जब तुम्हारे वामपंथी सब घरों मों दुबक कर प्राइम टाइम कर रहे हैं, उसी समय में सेवा भारती बिना जात-मजहब देखे, लगातार सेवा में लगी हुई है। संघी होते तो आदमी होते, वामपंथी हो तो कीचड़ में मजा लेने वाले सूअर से ज्यादा कुछ भी नहीं।

कन्हैबा: फिर से सूअर बोल रहे हैं आप…

अजीत: बैल बोलेंगे तो कहोगे कि संघी है, गाली देता है। सूअर ही सूट करता है तुमको। इज्जत ही दे रहे हैं वैसे। अच्छा ये बताओ कि दिल्ली दंगे पर एकदम ही शांत हो गए…

कन्हैबा: (आईपैड में देखते हुए) दिल्ली दंगे पर क्या बोलना है। दोषियों को सजा होनी चाहिए और क्या…

अजीत: एक मिनट, एक मिनट… ये आईपैड कहाँ से आया तुम्हारे पास? कट्टा दिखा के ओवरब्रिज पर छीनमछोरी करने लगे क्या? कट्टा और वामपंथियों का तो पुराना नाता है…

कन्हैबा: अरे! अपना है। वामपंथी हैं तो कुछ भी बोलिएगा क्या?

अजीत: वाह! बाप मरे अन्हार में, बेटा पावरहाउस! कैपिटलिज्म का प्रोडक्ट यूज करते हुए उँगली गली नहीं तुम्हारी? दिन-रात तो गरियाते रहते हो कॉरपोरेट को, अमेरिका को लेकिन सामान जो है सो चकाचक वही वाला यूज करना है। तब फिर लोग गरियाता है तुमको कि ‘साले वामपंथी, वुडलैंड का जूता पहनते हैं, रिक्शा पर सर्वहारा से खिंचवाते हैं खुद को, कम पैसे देते हैं उसको, और फिर कमरे पर जा कर रिक्शावाले की व्यथा पर कविता करते हैं’ तब तुम्हारा लहर जाता है भक्क से…

कन्हैबा: तो क्या रिक्शा वाले का जीवन नहीं है! संघी लोग तो शुरु से ही गरीब विरोधी रहा है। रिक्शे पर बैठ कर चार रूपया ही तो देते हैं उसको…

अजीत: ‘चार ही रुपया देते हो’ ये बोलो। बीस रूपया का चढ़ते हो और गरिया कर दस रूपया दे कर चल देते हो सहेली के साथ…

कन्हैबा: आपको सेक्स नहीं मिलता तो उसके लिए वामपंथी जिम्मेदार कैसे हो गया?

अजीत: दुखती रग पर हाथ मत रखो, मार हो जाएगा… सेक्स-वैक्स पर बात नहीं होगा यहाँ पर। मेरा शो है, हम जो बोलेंगे उसी पर बात होगा… (रुक कर) यार तुम सेक्स का बात गलत कर दिए… पर्सनल नहीं होना चाहिए। क्या बताएँ यार तुमको… दस रुपया के नोट पर ‘आइ सभ यू एक्स’ लिख कर भेजे, वहीं नीचे लिखे कि इसी नोट पर लिख कर जवाब दे देना… नोट भी गया… लौंडा एक बताया कि उसी पैसे का गोलगप्पा खा गई और मैसेज पढ़ा ही नहीं… बहुत दुख है भाय जीवन में!

कन्हैबा: अरे ठीक हो जाएगा महाराज, रोइए नहीं। बताइए तो हम करवाते हैं इंतजाम… फोन करेंगे और हो जाएगा काम। हम लोगों को तो सबका एक्सेस है। ये बात तो विचारधारा से हट कर है इसलिए आपकी मदद कर देंगे।

अजीत: वीड पीते हो? वूमन आती थी जेएनयू में! वूमन आती थी? सीडी के बहाने? अनमोल रतन टाइप?

कन्हैबा: सब… सबकुछ… वामपंथ की तो पहली कक्षा में हम लोग नए लोगों को, खास कर लड़कियों को शारीरिक स्वतंत्रता के नाम पर यही सब तो कहते हैं कि ‘देह कम्यून की प्रॉपर्टी है’, ‘यह क्रांति की आग जलाए रखने में मददगार है।’ हम लोग समझाते हैं कि शरीर को इज्जत से नहीं जोड़ना चाहिए और उन्मुक्त जीवन जीना चाहिए। उनको ज्ञान इतना दे देते हैं कि पूरे समय सामाजिक व्यवस्था में दब-दब कर, डर-डर कर रहने वाली लड़कियों में अचानक से विद्रोह की आग घुस जाती है और हमारा काम बन जाता है।

अजीत: वाह! मोदी जी वाह! यही उगलवाने के लिए तो मैंने अपनी दुख भरी कहानी सुनाई थी तुम्हें। तुमको क्या लगता है कि हम दस रुपया के नोट पर सोनम गुप्ता बेवफा लिखने का काम करते हैं? ये बताओ, सिलिंडर कितने दिन चलता है?

कन्हैबा: यही तीन-चार दिन… मोदी यही सब तो करता है। पहले यहाँ के लोग गोबर के गोइठा से, लकड़ी के जलावन से काम करते थे। लोग जमीन से जुड़े हुए थे, ये मोदी आ कर सिलिंडर दे रहा है। आप ही बताइए कि सिलिंडर देने से भरवाएगा कितना आदमी?

अजीत: सौ में से 86 लोग भरवा रहे हैं सिलिंडर। तीन-चार लोगों के परिवार में 40-45 दिन चलता है सिलिंडर। और हाँ, जलावन का दाम जोड़ोगे तो कम ही आता है। कभी बैठ कर हिसाब करना, मोदी को गरियाना तो चलता रहेगा।

कन्हैबा: आपको कुछ पता नहीं है, दिल्ली में बैठे रहने से गाँव का पता कहाँ से चलेगा…

अजीत: तुमसे ज्यादा गाँव में रहे हैं बकलोल आदमी। तुमको अपने गाँव में भी आदमी तब पहचाना जब तुम कुख्यात होने लगे थे अपने कुकर्मों के कारण। इसलिए, ये बकैती रक्खो स्थान विशेष में…

कन्हैबा: स्थान विशेष क्या होता है? फिर कुछ अश्लील बात बोला संघी आदमी!

अजीत: स्थान विशेष का शरीर में वही महत्व है जो समुदाय विशेष का समाज में। बाकी, जोड़-घटाव कर लो। हग्गनपॉट को दिए एक इंटरव्यू में तुमने कहा कि ‘आज जो भी सिस्‍टम की कमियों पर सवाल उठाता है, उसे वामपंथी मान लिया जाता है, ये भी गलत है’। तो क्या तुम खुद को वामपंथी नहीं मानते? मतलब, टिकट नहीं दिया तो अब ये सब कहोगे कि ‘मैं किसी विचारधारा का चेहरा नहीं हूँ, मुद्दे की राजनीति करता हूँ?’ पूरा करियर तुम्हारा नजीब अहमद, रोहित वेमुला, अखलाक जैसों के नाम पर साम्प्रदायिकता फैलाने, दलितों के मन में जहर डालने में गया, वामपंथी पार्टी के सदस्य हो, उसके टिकट पर चुनाव लड़े और अचानक से टिकट लिस्ट में नाम न होने पर ‘मैं किसी विचारधारा का चेहरा नहीं हूँ’ पर आ गए? शास्त्रों में इसे ही…

कन्हैबा: ‘…दोगलापन कहा गया है’, यही कहोगे ना? मानते हैं इस बात को। लेकिन पार्टी ने क्या किया मेरे लिए? लाठी, जूता, चप्पल, ईंटा-पत्थल, गाली सब हम खाए, लोग हम पर पम्पीसेट का डहलका मोबिल फेंका है… किसके लिए वो सब सहे? और आज तेजस्वी जैसे लोगों से हाथ मिला लिया? क्यों? ताकि मेरे जैसा एक युवा नेता ऊपर न उठ सके?

अजीत: अरे रे रे रे… दुखती नब्ज पर हाथ रख दिया क्या?

कन्हैबा: भरे बैठे हैं, मुँह मत खुलवाइए!

अजीत: …वैसे, फिर कब दोगे… इंटरव्यू? ले तो तुम्हारी पार्टी ने ही रक्खी है!

कन्हैबा: (कुर्सी छोड़ कर उठते हुए) हमको नहीं करना है इंटरव्यू। बुला के बेइज्जत करता है। रिपब्लिक पर आया पाकिस्तानी गेस्ट बना कर रख दिया है। नै करना है ये सब। जो मन में आए लिखो।

नोट: व्यंग्य की आंचलिकता बचाए रखने के लिए कई शब्दों का उच्चारण जानबूझकर गलत ही छोड़ा गया है।

रिया चक्रवर्ती और भाई शोविक समेत 6 आरोपितों की 20 अक्टूबर तक बढ़ी न्यायिक हिरासत

बॉलीवुड अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती की जमानत याचिका एक बार फिर से खारिज कर दी गई है। रिया चक्रवर्ती को उनके पूर्व ब्वॉयफ्रेंड और अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत से जुड़े ड्रग्स मामले में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने गिरफ्तार किया है। रिया चक्रवर्ती और उनके भाई शोविक के अलावा, ड्रग्स सिंडिकेट चलाने के आरोप में गिरफ्तार सैमुएल मिरांडा, दीपेश, बासित परिहार और जैद की न्यायिक हिरासत मुम्बई की एनडीपीएस कोर्ट ने 14 दिनों के लिए बढ़ा दी है।

रिया की न्यायिक हिरासत फिर से 14 दिन के लिए बढ़ा दी गई है। इसके साथ ही रिया के भाई शोविक चक्रवर्ती की जमानत अर्जी भी खारिज कर दी गई है। अब दोनों भाई-बहन को 20 अक्टूबर तक जेल में रहना होगा।

गौरतलब है कि सितंबर 22, 2020 को स्पेशल एनडीपीएस कोर्ट ने रिया चक्रवर्ती की न्यायिक हिरासत की अवधि 6 अक्टूबर तक बढ़ा दी थी। जमानत के लिए आवेदन करते समय, रिया ने आरोप लगाया था कि उन्हें NCB द्वारा पूछताछ के दौरान खुद को दोषी मानने वाला बयान देने के लिए दबाव डाला गया था।

अभिनेत्री ने कहा था कि उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है और मामले में उन्हें गलत तरीके से फँसाया गया है। उन्होंने अपनी गिरफ्तारी को ‘अनुचित और अन्यायपूर्ण’ बताते हुए इसे मनमाना करार दिया।

14 जून को सुशांत की मौत के बाद मामले में उभरे ड्रग्स एंगल में कथित तौर पर ड्रग्स एंगल के आरोप में रिया को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत आरोपित ठहराया गया था।

उल्लेखनीय है कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने मंगलवार (सितम्बर 08, 2020) को रिया चक्रवर्ती को मादक पदार्थों से जुड़े आरोपों के सिलसिले में तीन दिनों तक पूछताछ करने के बाद ड्रग सिंडिकेट का सक्रिय सदस्य बताते हुए गिरफ्तार कर लिया गया। जिसके बाद रिया को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जहाँ उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा दिया गया था।

रिया चक्रवर्ती की गिरफ्तारी अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के 81 दिन बाद हुई थी। अगर रिया चक्रवर्ती इस मामले में दोषी पाई जाती हैं तो उन्हें करीब 10 साल तक की सजा हो सकती है। बता दें कि सुशांत सिंह राजपूत 14 जून को अपने बांद्रा स्थित घर में मृत पाए गए थे।

11 सितंबर को एक विशेष अदालत ने रिया चक्रवर्ती को जमानत देने से इनकार करते हुए कहा था कि अगर उन्हें जमानत पर रिहा किया गया तो वह दूसरों को सतर्क कर सकती हैं और वे सबूत नष्ट कर सकते हैं। रिया चक्रवर्ती ने अपनी याचिका में कहा था कि वह निर्दोष हैं और उसे झूठा फँसाया गया है। बता दें कि रिया को नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम, 1985 के कई धाराओं के तहत बुक किया गया है।

हाथरस कांड के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान ही आपस में भिड़ गए कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता, जमकर हुई जूतमपैजार: देखें VIDEO

हाथरस कांड पर पूरे देश में उबाल देखने को मिल रहा है। सभी विपक्षी पार्टियाँ इस मुद्दे पर अपनी राजनीति चमकाने की जुगत में लगे हैं। हर जगह विपक्षी पार्टियाँ इसी मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन करती आ रही है। इसी क्रम में कई जगहों से हिंसा की खबरें भी सामने आ रही है। ताजा मामला मुंबई का है।

सोमवार (अक्टूबर 5, 2020) को मुंबई के वसई में उस समय बेहद ही अलग नजारा देखने को मिला, जब प्रदर्शन के दौरान कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता आपस में ही भिड़ गए और जमकर जूतमपैजार हुए। इसका एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें देखा जा सकता है कि कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता कैसे आपस में ही लड़ रहे हैं।

कोई किसी का कॉलर पकड़ कर मार रहा है तो कोई घूँसा चला रहा है। वहीं कुछ लोग छुड़ाने का प्रयास कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच यह जूतमपैजार इस बात को लेकर हुई कि बैनर कौन पकड़ेगा।

इस वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स इसके खूब मजे ले रहे हैं और इस पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। ज्योति खाड़े नाम की एक सोशल मीडिया यूजर ने लिखा कि पप्पू के कार्यकर्ता पप्पू को कड़ी टक्कर दे रहे हैं।

वहीं एक यूजर ने लिखा, “प्रोटेस्ट में प्रोटेस्ट।”

एक अन्य सोशल मीडिया यूजर ने लिखा, “क्या बात है। शायद इसलिए कर रहे हैं कि आने वाले समय में उन्हें ये मौका दोबारा मिले या ना मिले।” इस पर प्रतिक्रिया देते हुए एक यूजर ने लिखा कि ऐसा ही कुछ लग रहा है।

गौरतलब है कि इससे पहले छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चंपा जिले में भी ऐसा ही कुछ नजारा देखने को मिला था। यहाँ योगी सरकार का विरोध करते-करते कॉन्ग्रेस और भीम आर्मी वाले आपस में झगड़ पड़े। विरोध प्रदर्शन के दौरान दोनों दलों के बीच जमकर मारपीट शुरू हो गई।

जानकारी के मुताबिक भीम आर्मी ने विरोध प्रदर्शन के दौरान कॉन्ग्रेस पार्टी के ख़िलाफ नारेबाजी करनी शुरू कर दी थी, इसी के कारण दोनों दलों में झड़प हुई। प्रदर्शन के दौरान भीम आर्मी के सदस्यों ने छत्तीसगढ़ में कॉन्ग्रेस सरकार के खिलाफ दलित विरोधी होने का आरोप लगाते हुए नारेबाजी की, जिसके कारण कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता भड़क गए। नतीजतन, दूसरी ओर से भी भीम आर्मी पर हमला बोल दिया गया।

पुलिस अधिकारी ने इस संबंध में कहा था, “कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता हाथरस मामले में प्रदर्शन कर रहे थे। इस बीच भीम आर्मी वाले आ गए और उनके ख़िलाफ़ नारेबाजी करनी शुरू कर दी। इसके बाद ही हिंसा भड़की।”