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सेना में महिलाओं को नया मोर्चा: नौसेना के युद्धपोत पर पहली बार तैनाती, राफेल भी उड़ाएँगी

भारतीय वायु सेना बहुत जल्द राफेल स्‍क्‍वाड्रन में महिला पायलट की तैनाती करने वाली है। फ़िलहाल महिला पायलट की अंबाला में ‘कनवर्ज़न ट्रेनिंग’ जारी है ताकि वे जल्द राफेल उड़ाने के लिए तैयार हो जाएँ। इसके अलावा भारतीय नौसेना ने भी आज (21 सितंबर 2020) दो महिला अधिकारियों को युद्धपोत पर तैनात किया गया है। इन्हें हेलीकॉप्टर स्ट्रीम में ऑब्जर्वर के तौर पर नियुक्त किया गया है। ऐसा पहली बार हुआ है।

इंडिया टुडे में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़ जो महिला पायलट पहले MiG-21 लड़ाकू विमान उड़ाती थी, उन्हें अब फुल फाइटर प्रक्षिक्षण कोर्स में शामिल किया गया है। बहुत जल्द ही वह 17 स्क्वाड्रन में सक्रिय भूमिका निभाती हुई नज़र आएँगी। ख़बरों में इस बात की पुष्टि की गई है कि महिला और पुरुष दोनों के लिए प्रशिक्षण नियमावली एक जैसी होगी। चाहे महिला हो या पुरुष, उन्हें लड़ाकू विमान बदलते समय कनवर्ज़न ट्रेनिंग के हर चरण से गुज़रना होगा। फ़िलहाल भारतीय वायु सेना में कुल लड़ाकू विमान उड़ाने वाली 10 महिला पायलट हैं। 

इन महिला पायलटों ने अभी तक कई श्रेणी के लड़ाकू विमान उड़ाए हैं, जिसमें Su-30 MKI और MiG-29 मुख्य हैं। केंद्र सरकार ने इस संबंध में साल 2016 के दौरान ही अनुमति का आदेश जारी किया था। तत्कालीन राज्य रक्षा मंत्री सुभाष भामरे ने कहा था, “रणनीतिक आवश्यकताओं को मद्देनज़र रखते हुए महिला पायलटों को भारतीय वायु सेना में विमान उड़ाने संबंधी गतिविधियों के लिए शामिल किया जा रहा है। समय-समय पर इसकी समीक्षा भी होती रहेगी।”       

वहीं दूसरी तरफ दो महिला अधिकारियों सब लेफ्टिनेंट कुमुदिनी त्यागी और सब लेफ्टिनेंट रीति सिंह को ‘ऑब्जर्वर’ का पद दिया गया। इस पद के ज़रिए महिला अधिकारियों को नौसेना में ‘वॉरशिप फ्रंटलाइन’ की अगुवाई करने का मौक़ा मिलेगा। भारतीय नौसेना के प्रवक्ता (कमांडर) विवेक अग्रवाल ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा “बहुत जल्द दोनों महिला अधिकारी अपनी ज़िम्मेदारी निभाती हुई नज़र आएँगी। यह वॉरशिप से बतौर एयरबोर्न कॉम्बटेंट काम करने वाला महिला अधिकारियों का पहला दस्ता है। पहले महिला अधिकारियों का विंग एयरक्राफ़्ट में प्रवेश प्रतिबंधित था, खासकर जो तट से उड़ान भरते और उस पर उतरते हैं।”

सब लेफ्टिनेंट रीति सिंह और लेफ्टिनेंट कुमुदिनी त्यागी भारतीय नौसेना के कुल 17 अधिकारियों के समूह का हिस्सा होंगी। इसमें 4 महिलाएँ और इंडियन कोस्ट गार्ड के कुल 3 अधिकारी (रेगुलर बैच के 13 अधिकारी और शॉर्ट सर्विस कमीशन की कुल 4 महिला अधिकारी) शामिल होंगी। इन महिला अधिकारियों को आज आज यानी 21 सितंबर को आईएनएस कोच्चि में ‘विंग्स’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

₹1100 अरब सिर्फ एक साल में, दाऊद का Pak फाइनेंसर अल्ताफ ऐसे करता है आतंक और ड्रग तस्करों की फंडिंग

अमेरिका की फ़ाइनेंशियल क्राइम्स एन्फोर्समेंट नेटवर्क (FinCEN) ने एक बड़ा ख़ुलासा किया है। FinCEN ने दाऊद इब्राहिम के मुख्य फाइनेंसर और पाकिस्तानी मूल के अल्ताफ खनानी को 14 से 16 बिलियन डॉलर [103088 लाख करोड़ रुपए से लेकर 117819 लाख करोड़ रुपए तक (21 सितंबर 2020 के करेंसी एक्सचेंज की दर से)] की सालाना लॉन्ड्रिंग के मामले गिरफ्तार किया है। इन रुपयों की मदद से वह ड्रग कार्टेल, तालिबान, हिजबुल्लाह और अल कायदा जैसे आतंकवादी संगठनों की फंडिंग करता था। 

अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक ने इस मामले में सस्पीशियस एक्टिविटी रिपोर्ट (SARs) दायर की थी, जिसके बाद यह कार्रवाई संभव हुई। FinCEN ने अपनी 20 पन्नों की इंटेलिजेंस रिपोर्ट में यह खुलासा किया है कि आखिर कैसे खनानी मज़ाका जनरल ट्रेडिंग एलएलसी और 54 शेल कंपनियों (मास्को नेटवर्क) के ज़रिए मनी लॉन्ड्रिंग करता था। इन कंपनियों की मदद से वह फंड्स रूस से अन्य देशों में यूरोपियन सिक्यॉरिटी मार्केट के रास्ते भेजता था।     

इस प्रक्रिया को आम तौर पर मिरर ट्रेडिंग भी कहते हैं। ट्रेडिंग की इस प्रक्रिया में एक व्यक्ति किसी अधिकार क्षेत्र में चीज़ें (सिक्यॉरिटी) खरीदता है और उन्हें दूसरे अधिकार क्षेत्र में बेचता है। इस प्रक्रिया में भले कोई आर्थिक लाभ नहीं है लेकिन फंड का स्रोत और अंतिम जगह ज़रूर छुपा सकता है।

इस प्रक्रिया में ऐसे कई लोग हैं, जो खनानी का साथ दे रहे हैं और वह कोई और नहीं पाकिस्तान में रहने वाले खनानी के रिश्तेदार हैं। उसे मार्च 2013 से अक्टूबर 2016 के बीच मास्को नेटवर्क से लगभग 49.78 मिलियन डॉलर मिले थे। 

उसकी पेरेंट ट्रेडिंग कंपनी मजाका जनरल ट्रेडिंग एलएलसी सिंगापुर की मिरर ट्रेडिंग कंपनी ‘आस्क ट्रेडिंग पीटीई’ की फंडिंग भी करती है। मिरर ट्रेड का पूरा लेन-देन न्यू यॉर्क के जेपी मॉर्गन चेज़ बैंक, सिंगापुर के यूनाइटेड ओवरसीज़ बैंक और बैंक ऑफ़ बड़ोदा की दुबई शाखा की मदद से हुआ था।

इस मामले में उसके वकील मेल ब्लैक ने कहा था, “खनानी दोषी साबित हुए थे और उन्हें लंबे समय तक दंड दिया गया। इस दौरान उनके भाई की मृत्यु हुई, वह अपने परिवार से अलग हुए और उनका स्वास्थ्य भी ठीक नहीं है। उनकी माली हालत भी तब से बदतर है, जब से उन्हें ओएफएसी से प्रतिबंधित किया गया है और उनके खाते बंद किए गए हैं। वह पिछले 5 सालों में किसी भी तरह की व्यावसायिक गतिविधियों में शामिल नहीं हुए हैं। वह आगे चल कर क़ानून के अनुसार स्थायी जीवन जीना चाहते हैं।” 

खनानी ने 2009 में बनी नई दिल्ली स्थित रंगोली इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड के साथ 10.65 मिलियन डॉलर का ट्रेड किया था। इस मामले में पूरा लेन-देन पंजाब नेशनल बैंक, सेन्ट्रल बैंक ऑफ़ इंडिया, विजया बैंक, बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र, ओरिएण्टल बैंक ऑफ़ कॉमर्स और सहकारी बैंक की मदद से हुआ था। इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक़ 18 जून 2014 को पंजाब नेशनल बैंक की ज़रिए 1,36,254 डॉलर का ट्रेड हुआ था। 

ख़बरों की मानें तो 339.19 करोड़ रुपए के सेल्स रेवेन्यू (बिक्री मुनाफ़ा) के बावजूद रंगोली समूह को 74.87 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था। इतना कुछ होने के बाद कंपनी को फरवरी 2020 में विलफुल डिफॉल्टर की सूची में रखा गया था।

इलाहाबाद बैंक ने रंगोली को मार्च 2015 में टॉप-50 एनपीए की सूची में रखा था। पंजाब नेशनल बैंक ने भी 2016 से 2019 के बीच रंगोली की गिरवी संपत्ति की ‘ई-मॉर्गेज’ प्रक्रिया शुरू कर दी थी। इसके अलावा सहकारी बैंक ने अक्टूबर 2019 में कंपनी की अचल संपत्ति की नीलामी का ऐलान किया था।   

ठीक इसी तरह की कार्रवाई यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया ने लोन वापस प्राप्त करने के लिए की थी। ख़बरों के मुताबिक़ बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र ने फरवरी 2020 में कंपनी को विलफुल डिफॉल्टर की सूची में रखा था।

इन आरोपों पर अपना पक्ष रखते हुए रंगोली कंपनी के एमडी ने कहा था, “तथाकथित रूप से साल 2013 से 2014 के बीच रंगोली इंटरनेशनल के ज़रिए हुए 70 लेन-देन पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं, जिसका कोई डेटा ही मौजूद नहीं है। इस पर किसी भी तरह की प्रतिक्रिया देना विरोधाभास से कम नहीं होगा।”

इसके बाद उन्होंने पंजाब नेशनल बैंक की मदद के ज़रिए खनानी की मिरर ट्रेडिंग कंपनी से मिले 1,36,254 मिलियन डॉलर वाले दावे को भी ख़ारिज कर दिया था। 

खनानी को साल 2015 में ओवरसीज लेन-देन के मामले में अमेरिका के हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया गया था। जुलाई 2020 तक उसे मायामी की जेल में रखा गया था। खनानी और दाऊद के बीच संबंध अमेरिका के ऑफिस ऑफ़ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (OFAC) की मदद से बना था, जब उसे नोटिस जारी किया गया था।

जारी किए गए नोटिस में साफ़ तौर पर लिखा था कि कैसे खनानी ने मनी लॉन्ड्रिंग आर्गेनाईजेशन (MLO) के ज़रिए आतंकवादी समूहों, ड्रग्स तस्कर और आपराधिक संगठनों की फंडिंग में मदद की। नोटिस में लिखा था,

“खनानी MLO और अल ज़रूनी का मुखिया अल्ताफ खनानी तालिबान के साथ लेन-देन के मामले में शामिल था। उसके लश्कर-ए-तैय्यबा, दाऊद इब्राहिम, अल कायदा और जैश-ए-मोहम्मद से भी संबंध थे।”

महाराष्ट्र के धुले से लेकर यूपी के कानपुर तक, किसान ऐसे कर रहे हैं कृषि बिलों का समर्थन

कृषि सुधार बिलों पर कॉन्ग्रेस इकोसिस्टम का प्रोपेगेंडा छिपा नहीं है। किसानों के नाम पर सड़क से संसद तक हंगामा करने की कोशिशों के बीच इस बिल करे अलग-अलग हिस्सों के कृषकों का समर्थन मिल रहा है। उत्तर प्रदेश के कानपुर से लेकर महाराष्ट्र के धुले तक, किसानों का स्पष्ट तौर पर कहना है कि वे सरकार के इस कदम का स्वागत करते हैं। 

उत्तर प्रदेश स्थित कानपुर के एक किसान ने समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए इस मुद्दे पर अपना विचार रखा। उन्होंने कहा, “हम सरकार के इस विधेयक का स्वागत करते हैं। लेकिन सरकार को किसानों के बारे में और सोचने की ज़रूरत है। बेशक सरकार का यह कदम किसानों के हित के लिए ही उठाया गया है और हम इसके लिए सरकार का समर्थन करते हैं। सरकार का प्रयास होना चाहिए कि खरीद की प्रक्रिया में बिचौलियों की भूमिका ख़त्म हो जाए। इसके अलावा सरकार को आने वाले समय में यह भी सुनिश्चित करना होगा कि किसान आत्महत्या जैसे कदम न उठाए।”

इसके बाद किसान ने कहा, “फ़िलहाल जिस तरह के हालात हैं उसमें आधे से ज़्यादा मुनाफ़ा बिचौलियों को होता है। हम उम्मीद करते हैं कि कृषि सुधार विधेयक की मदद से इसे रोकने में मदद मिलेगी। इस बात में कोई दो राय नहीं है कि अगर ऐसी गतिविधियों पर रोक नहीं लगती है तो आने वाले पीढ़ियाँ इस पेशे में आगे नहीं बढ़ेंगी। इसके लिए यह बेहद ज़रूरी है कि सरकार के बनाए गए नियमों का सख्ती से पालन हो। हमारा सरकार से एक और निवेदन है कि किसानों को कम से कम उनकी लागत का भुगतान किया जाए।” 

उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के अलावा महाराष्ट्र के धुले जिले में भी किसानों ने इस विधेयक का स्वागत किया। उनका कहना है कि हम सरकार के इस विधेयक को स्वीकार करते हैं, लेकिन सरकार को कई बातें सुनिश्चित करनी होंगी। जिसमें सबसे अहम है कि किसानों की आत्महत्या का आँकड़ा कम से कम किया जाए। यह पूरी तरह सरकार की ज़िम्मेदारी है कि अन्नदाता को ज़्यादा से ज़्यादा मुनाफ़ा हो और उन्हें सशक्त बनाया जाए।    

रविवार (सितंबर 20, 2020) को कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्द्धन और सरलीकरण) विधेयक-2020, कृषक (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन समझौता और कृषि सेवा पर करार विधेयक-2020 को उच्च सदन ने ध्वनिमत से पारित कर दिया था।

विधेयक पारित होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि सुधार संबंधी विधेयकों को ‘ऐतिहासिक’ करार दिया था। उन्होंने कहा था, “भारत के कृषि इतिहास में आज एक बड़ा दिन है। संसद में अहम विधेयकों के पारित होने पर मैं अपने परिश्रमी अन्नदाताओं को बधाई देता हूँ। यह न केवल कृषि क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन लाएगा, बल्कि इससे करोड़ों किसान सशक्त होंगे।”

प्रधानमंत्री ने जोर देते हुए कहा था, “मैं पहले भी कहा चुका हूँ और एक बार फिर कहता हूँ: MSP की व्यवस्था जारी रहेगी। सरकारी खरीद जारी रहेगी। हम यहाँ अपने किसानों की सेवा के लिए हैं। हम अन्नदाताओं की सहायता के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे और उनकी आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर जीवन सुनिश्चित करेंगे।”

रोहिणी सिंह, रबी में भी होता है धान: यह PM पर तंज कसने से नहीं, जमीन पर उतरने से पता चलता है

किसानों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट क्या किया, लिबरल गैंग के कुछ पत्रकारों को लगा कि उन्हें पीएम मोदी को नीचा दिखाने का मौका मिल गया है। ताज़ा विवाद रबी और खरीफ फसलों को लेकर शुरू हुआ। पीएम मोदी पर कटाक्ष करने वाली पत्रकार का नाम रोहिणी सिंह हैं। उन्होंने इस बात पर आश्चर्य जताया है कि रबी में धान की फसल? इस पर चर्चा करने से पहले कुछ बातें जाननी ज़रूरी हैं।

भारत में अलग-अलग इलाक़ों की भौगोलिक परिस्थितियाँ भिन्न हैं और इस हिसाब से फसलों की बुआई-कटाई होती है। फसलों के लिए रबी और खरीफ सीजन के रूप में पूरे साल को विभाजित किया जाता है। इनके अलावा ‘समर क्रॉप्स’ के रूप में भी कहीं-कहीं अलग से फसलों को उपजाया जाता है। ध्यान रखें, रबी और खरीफ क्रॉप सीजंस के नाम हैं, जिसमें होने वाले फसलों को रबी क्रॉप्स और खरीफ क्रॉप्स कहते हैं।

रबी फसलों में सामान्यतः गेहूँ, जौं, चना, सरसो, मटर, मसूर और आलू की गिनती होती है। इसमें अधिकतर आपको दलहन और तिलहन मिलेंगे। वहीं खरीफ फसलों में धान, बाजरा, मक्का, कपास, ज्वार और गन्ना को लिया जाता है। लेकिन, ध्यान देने वाली बात ये है कि कुछ फसलें ऐसी भी होती हैं, जो रबी और खरीफ- दोनों ही सीजन में उगाई जाती हैं। जैसे, धान को ही ले लीजिए। दक्षिण के राज्यों में रबी सीजन में भी धान उगाया जाता है। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में बड़े स्तर पर इसकी फसलें लहलहाती हैं।

अगर आप बिहार से पश्चिम बंगाल में ही घुसेंगे तो आपको धान की फसलों की समयावधि और उसकी टाइमिंग में फर्क मिल जाता है। ऐसा बारिश और मॉनसून को ध्यान में रख कर तय किया जाता है। जैसे 2017-18 के ही रबी रिपोर्ट कार्ड की बात करते हैं। उस साल 257.47 लाख हेक्टेयर में गेहूँ की फसल की गई थी। लेकिन, साथ ही 14.58 हेक्टेयर में धान की भी खेती की गई थी, जिसे हम ‘रबी राइस’ कहते हैं।

2018-19 में ये आँकड़ा क्रमशः 253.52 और 9.98 लाख हेक्टेयर था। सरकारी आँकड़े हैं। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के अलावा तमिलनाडु में भी रबी सीजन में बड़े स्तर पर धान की खेती की जाती है। इसी तरह इस साल अक्टूबर-नवंबर में सरकार 75 लाख टन ‘रबी राइस’ के खरीद की योजना बना रही है। इसी तरह 2018-19 में सरकार ने 61 लाख टन ‘रबी राइस’ की खरीद की थी। इस बार उससे ज्यादा की खरीद की जाएगी।

अब वापस आते हैं नरेंद्र मोदी को नीचा दिखाने की रोहिणी सिंह की कोशिश पर। हाल ही में संसद के दोनों सदनों से सरकार ने कृषि क्षेत्र से जुड़े बिलों को पास कराया, जिससे किसानों को अपने उत्पाद सीधे प्राइवेट प्लेयर्स को बेचने की अनुमति होगी। साथ ही पुरानी व्यवस्था भी लागू रहेगी। एमएसपी से छेड़छाड़ नहीं होगी। लेकिन कॉन्ग्रेस इकोसिस्टम ने किसानों को भड़काया और विरोध-प्रदर्शन चालू कर दिया।

इसी बीच पीएम मोदी ने हिंदी, अंग्रेजी और पंजाबी में ट्वीट कर के किसानों को भ्रम से बचाते हुए सरकार का पक्ष रखा और उन्हें झाँसे में न आने की सलाह दी। पीएम मोदी ने ऐसी ही एक ट्वीट में लिखा कि इस साल कोरोना संक्रमण के दौरान भी रबी सीज़न में किसानों से गेहूँ की रिकॉर्ड खरीद की गई है। उन्होंने जानकारी दी कि इस साल रबी में गेहूँ, धान, दलहन और तिलहन को मिलाकर, किसानों को 1 लाख 13 हजार करोड़ रुपए MSP पर दिया गया है।

पीएम मोदी ने बताया कि ये राशि भी पिछले साल के मुकाबले 30 प्रतिशत से ज्यादा है। यहाँ रोहिणी सिंह ने ‘रबी’ और ‘धान’, इन दोनों शब्दों को पकड़ के बात का बतंगड़ बनाना शुरू कर दिया। उन्होंने लिखा, “रबी की फसल में धान? फिर कहते हैं मेरी बात पर भरोसा करो।” साथ ही उन्होंने सिर पर हाथ रखे एक इमोजी भी डाली, जिससे लगे कि उन्हें कितनी ज्यादा जानकारी है और पीएम मोदी को कृषि के बारे में कुछ पता ही नहीं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कृषि से पुराना नाता है। गुजरात खुद एक कृषि प्रधान राज्यों में से एक है और वहाँ कृषि क्षेत्र की छवि बदलने के लिए उन्होंने काफी कुछ किया है। गुजरात की कृषि जीडीपी 2002 से लेकर 2014 तक प्रतिवर्ष 8% की दर से आगे बढ़ी। आपको पता है कि इस दौरान देश का औसत क्या रहा? 3.3%. ऐसे व्यक्ति को रोहिणी सिंह जैसे लोग रबी और खरीफ सिखाने चले हैं।

यहाँ दो और राज्यों की बात करनी ज़रूरी है, जहाँ रबी सीजन में धान का अच्छा-खासा उत्पादन होता है। वो राज्य हैं पश्चिम बंगाल और असम। दोनों ही राज्यों में 40-50 लाख टन ‘रबी राइस’ के उत्पादन का लक्ष्य रखा जाता है। लेकिन, हिंदी पट्टी के किसी इलाक़े में किसी 2-3 BHK फ्लैट में बैठ कर कृषि को लेकर ट्वीट करना आसान है लेकिन इन्हें ये पता होना चाहिए कि दुनिया इसके इतर भी है। दक्षिण है, उत्तर-पूर्व है।

इसी तरह छत्तीसगढ़ में भी रबी के सीजन में धान की खेती होती है। रोहिणी सिंह के लिए ये कोई नई बात नहीं है। वो पहले भी इस तरह की हरकतें कर चुकी हैं। पीएम मोदी द्वारा बोले-लिखे गए एक-एक शब्दों का इस्तेमाल उसे गलत साबित कर के नैरेटिव बनाने के लिए किया जाता है। अगर जबान फिसल जाए तब तो कहना ही क्या! वो ये नहीं समझते कि प्रधानमंत्री भी एक मनुष्य ही होता है।

रोहिणी सिंह वही हैं, जिन्होंने दीपक चौरसिया पर शाहीन बाग़ में सीएए विरोधी प्रदर्शन के दौरान हुए हमले को सही ठहराया था और उन्हें एक पत्रकार मानने तक से इनकार कर दिया था। रोहिणी सिंह के इसी ट्वीट का जवाब देते हुए पत्रकार दीपक चौरसिया ने लिखा था, “मैंने एक ग़रीब पृष्ठभूमि से आकर अपने दम पर पत्रकारिता की। मेरा कसूर सिर्फ़ इतना है कि मैं आप की तरह डिजाइनर पत्रकार नहीं हूँ! मेरा वित्त मंत्रालय में परिचय नीरा राडिया ने नहीं कराया! ना ही मैंने आज तक किसी सरकार से 3BHK फ़्लैट लेकर खबरें लिखी है!”

इसी तरह लॉकडाउन के दौरान पत्रकार रोहिणी सिंह ने दावा किया था कि सरकार ट्रेन से मजदूरों को घर पहुँचाने के लिए उनसे 50 रुपए अतिरिक्त ले रही है, ताकि उन्हें घर पहुँचाया जा सके। उन्होंने ‘पीएम केयर्स’ लिख कर सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसा था। जबकि सच्चाई ये थी कि यात्रियों को रेलवे को एक रुपया भी देने की ज़रूरत नहीं थी।

प्रशांत महासागर में अमेरिकी नौसैनिक बेस पर चीन के H-6 ने बरसाए बम? PLAAF ने जारी किया हमले का नकली Video

चीन ने प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए एक नकली वीडियो जारी किया है। इसमें चीनी वायु सेना के परमाणु सक्षम H-6 बॉम्बर्स को प्रशांत महासागर स्थित अमेरिकी नौसैनिक बेस गुआम पर एक बम गिराते दिखाया गया है।

यह वीडियो पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयरफोर्स (PLAAF) के वीबो अकाउंट पर शनिवार (सितंबर 19, 2020) को जारी किया गया। गुआम बेस एशिया प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका का प्रमुख सैन्य ठिकाना है। 

चीन की वायु सेना ने 2 मिनट 15 सेकेंड का जो वीडियो जारी किया है, उसका टाइटल दिया है ‘The god of war H-6K goes on the attack!’ वीडियो में दिखाया गया है कि आधे रास्ते के बीच से, एक पायलट एक बटन दबाता है और एक समुद्र तटीय रनवे पर मिसाइल छोड़ देता है। एक सैटेलाइट पिक्चर दर्शाने की कोशिश की गई है, जो बिल्कुल एंडरसन के लेआउट जैसा दिखता है। ब्लास्ट के हवाई दृश्यों के बाद अचानक नाटकीय अंदाज में म्यूजिक आता है और जमीन हिलने लगती है। कुल मिलाकर बारीकी से देखने पर यह हॉलीवुड की किसी फिल्म के ट्रेलर की तरह दिखता है। 

PLAAF ने वीडियो के साथ एक संक्षिप्त विवरण में लिखा है, “हम मातृभूमि की हवाई सुरक्षा के रक्षक हैं; हमारे पास हमेशा मातृभूमि की आसमान में सुरक्षा का भरोसा और क्षमता है।”

वीडियो पर न तो चीन के रक्षा मंत्रालय और न ही अमेरिकी इंडो-पैसिफिक कमांड ने किसी तरह की कोई प्रतिक्रिया दी है। ताइवान की वायु सेना के अनुसार, H-6 ताइवान और उसके आसपास कई चीनी उड़ानों में शामिल रहा है। H-6K बॉम्बर का नवीनतम मॉडल है, जो 1950 के पुराने सोवियत TU-16 पर आधारित है।

सिंगापुर के इंस्टीट्यूट ऑफ डिफेंस एंड स्ट्रेटेजिक स्टडीज के एक रिसर्च फेलो कोलिन कोह का कहना है कि चीन ने इस वीडियो को एक खास मकसद से जारी किया है। चीन के इस वीडियो को जारी करने का उद्देश लंबी दूरी तक मार करने की उसकी क्षमताओं का प्रदर्शन करना है। इस वीडियो के जरिए चीन ने अमेरिका को चेतावनी भी दी है कि वह ताइवान और साउथ चाइना सी में विवादों से दूर रहे।

नुसरत जहां की फोटो दिखा लुभा रहा था वीडियो चैट ऐप, TMC सांसद के कंप्लेन पर हरकत में आई पुलिस

तृणमूल कॉन्ग्रेस की सांसद व अभिनेत्री नुसरत जहां ने सोमवार को अपनी तस्वीर के गलत इस्तेमाल पर कोलकाता पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। उन्होंने यह शिकायत एक वीडियो चैट एप्लीकेशन के ख़िलाफ़ करवाई है। उनका कहना है कि एप्लीकेशन ने बिना उनकी रजामंदी के उनकी फोटो का इस्तेमाल किया।

सांसद नुसरत जहां ने कोलकाता पुलिस कमिश्नर अनुज शर्मा को अपने ट्वीट में टैग करते हुए उस विज्ञापन का स्क्रीनशॉट शेयर किया और कानूनी कार्रवाई की माँग की।

उन्होंने लिखा, “यह बिलकुल अस्वीकार्य है। तस्वीर को बिना रजामंदी के इस्तेमाल किया गया। कोलकाता पुलिस की साइबर सेल से अनुरोध है कि वह इस पर गौर करें। मैं इस पर कानूनी रूप से कार्रवाई के लिए तैयार हूँ।”

इस शिकायत पर एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि साइबर सेल ने मामले की जाँच शुरू कर दी है। बता दें जिस ऐप के विज्ञापन को देख कर नुसरत जहां भड़की हैं, उसका नाम fancy-u video chat App है। इसमें अभिनेत्री व सासंद की फोटो शेयर करते हुए लिखा गया है, “लॉकडाउन में घर पर बैठे बनाएँ नए दोस्त।” इसके अलावा उनकी फोटो पर लिखा है, “फाइंड आउट मोर अबाउट हर।”

गौरतलब है कि इस घटना से पहले भी नुसरत जहां अपनी एक फोटो के कारण चर्चा में कुछ दिन पहले ही आईं थी। उस तस्वीर में वह माँ दुर्गा जैसी वेशभूषा में दिख रही थीं। हालाँकि वो तस्वीर उन्होंने खुद ही शेयर की थी, मगर कट्टरपंथियों को उसे देख गुस्सा आ गया। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्हें उनकी उस तस्वीर के लिए बहुत घेरा गया और कई सवाल किए गए।

उस तस्वीर में उन्होंने लाल रंग की साड़ी पहनी थी। अपने केश खुले रखे थे और हाथ में त्रिशूल लेकर लोगों को महालया की शुभकामना दे रही थीं। इस तस्वीर को देख कट्टरपंथी उनसे सवाल करने लगे कि वह हिंदुओं जैसा आचरण करके इस्लाम का अपमान क्यों कर रही हैं। जब वह हिंदुओं की तरह रहती हैं तो उनका मजहब इस्लाम कैसे?

याद दिला दें, पिछले साल जून में निखिल जैन से शादी करने के बाद भी कट्टरपंथियों ने उन्हें घेरा था। उस समय कट्टरपंथियों ने उनकी खूब आलोचना की थी। उन्होंने जब दुर्गा पूजा में ढाक बजाया तब भी मामला बहुत गर्माया था। मजहबी ठेकेदारों ने इसे अपराध कहा था, जिनके जवाब में नुसरत ने कहा था कि वह बंगाल में पैदा हुई हैं और परंपरा और संस्कृति के हिसाब से सही काम कर रही हैं।

रिया का ड्रग्स कनेक्शन छोटा नहीं, दुबई और आतंकी समूहों से जुड़े हैं तार: NCB प्रमुख राकेश अस्थाना

बॉलीवुड अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) को जाँच में रिया चक्रवर्ती के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ड्रग्स कनेक्शन के सबूत मिले हैं। आउटलुक मैगजीन को दिए इंटरव्यू में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) प्रमुख राकेश अस्थाना ने कई अहम खुलासे किए हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में बड़े ड्रग्स रैकेट का पता चला है, जिसके तार दुबई और आतंकी समूहों से अंतरराष्ट्रीय स्तर तक जुड़े हुए हैं।

एनसीबी प्रमुख राकेश अस्थाना ने मैगजीन को दिए इंटरव्यू में कहा, “रिया का मामला कोई छोटा नहीं है। इसके जरिए एक व्यवस्थित रूप से चल रहे रैकेट का खुलासा हुआ है, जिसके तार दुबई और आतंकी संगठनों से जुड़े हुए हैं। रेव पार्टियों के लिए अवैध ड्रग्स खरीदी जाती हैं। उससे होने वाली कमाई का इस्तेमाल आतंक फैलाने के लिए किया जाता है। क्यूरेटेड मरिजुआना से बनाई गई एक किलोग्राम ‘बड’ की कीमत आठ लाख रुपए है। रिया जैसे लोग युवाओं के लिए रोल मॉडल होते हैं, ऐसे में उन्हें माफ नहीं किया जा सकता है। हमें लोगों को ड्रग्स का इस्तेमाल रोकने के लिए एक उदाहरण पेश करना होगा।”

उन्होंने कहा कि ड्रग्स बनाने वाले देश में ड्रग्स की तस्करी और इस्तेमाल को बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। राकेश अस्थाना ने इंटरव्यू में कहा कि रिया चक्रवर्ती का ड्रग्स सिंडिकेट छोटा नहीं है। उन्होंने बताया कि इस मामले से एक व्यवस्थित ड्रग्स रैकेट का खुलासा हुआ है, जिसका दुबई और आतंकी समूहों की तरह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संबंध हैं। ड्रग्स रेव पार्टी के लिए लाया जाता था और इस पैसे का इस्तेमाल नार्को-टेरर के लिए किया जाता है।

राकेश अस्थाना ने इंटरव्यू के दौरान बताया कि दुनिया की 95 फीसदी हेरोइन अफगानिस्तान और म्यांमार के खेतों से निकलती है। भारत की बड़ी जनसंख्या के कारण इसका बाजार भी काफी बड़ा है। ऐसे में ड्रग का अवैध कारोबार करने वाले जमीन और समुद्री दोनों रास्तों का इस्तेमाल कर रहे हैं। 

इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि हमारे कुछ पड़ोसी देश, ड्रग माफियाओं पर सख्त कार्रवाई नहीं करते हैं। इसके अलावा म्यांमार में विद्रोही राज्य शान और काचीन में हेरोइन और याबा गोलियों का निर्माण बड़े पैमाने पर होता है, जिनकी सीमाएँ चीन से मिलती हैं।

इसके अलावा अवैध ड्रग्स बनाने के लिए रसायनों की तस्करी चीन और भारत से की जाती है, जो बाद में फिर से ड्रग्स के रूप में भारत पहुँच जाते हैं। इसी तरह कनाडा और अमेरिका से भेजी गई कोकीन ब्राजील और दुबई होते हुए भारत के पश्चिमी तट पर पहुँच जाती है।

गौरतलब है कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत की जाँच शुरू होने के बाद ड्रग्स का मामला सामने आया था। कथित तौर पर रिया ने पूछताछ में एनसीबी को 25 बॉलीवुड सेलेब्स के नाम बताए हैं, जो ड्रग्स का इस्तेमाल करते हैं या तस्करी करते हैं। एनसीबी की इसकी जाँच कर रही है। इसी हफ्ते अभिनेत्री श्रद्धा कपूर और सारा अली खान को समन भेजने की बात भी कही जा रही है।

ठुड्डी के बगल में 1.5 इंच छेद, आँख-नाक से खून; हाथ मुड़े: आखिर दिशा सालियान के साथ क्या हुआ था?

बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत को लेकर हर दिन नए-नए खुलासे हो रहे हैं। हाल ही में दिशा सालियान के मृत शरीर को ले जाने के लिए बुलाई गई एंबुलेंस के ड्राइवर पंकज सैदन ने रिपब्लिक भारत के साथ बात की। इस दौरान उन्होंने 8-9 जून की घटनाओं का खुलासा किया। पंकज ने बताया कि उन्होंने दिशा सालियान की लाश को किस अवस्था मे देखा था। 

‘निजी कार में ले जाया गया शव’

पंकज सैदन ने कहा, “मुझे कल्याण नगर से लगभग 1.45 बजे फोन आया कि किसी ने आत्महत्या कर ली है। जल्दी से एम्बुलेंस लेकर आओ। 10 मिनट के भीतर मैं वहाँ पहुँच गया। कॉल मुंबई पुलिस का था। लेकिन जब मैं वहाँ पहुँचा, तो उन्होंने मुझसे कहा कि शव को निजी कार में ले जाया जा चुका है। इसके बाद मैं दूसरे बॉडी को लेने के लिए चला गया।”

पंकज ने आगे कहा, “जब मैं मौके पर पहुँचा था, वहाँ बहुत सारे लोग थे, पुलिस की गाड़ियाँ थी। उन्होंने मुझे बताया कि उनके पड़ोसी या दोस्त पहले ही उसका शव ले गए थे। दूसरे शरीर को लेने के बाद जब मैं लगभग 30 मिनट में शताब्दी अस्पताल पहुँचा, उसी वाहन में वे लोग वहाँ पहुँचे थे। वे उसे नीचे ट्राली पर ले गए, जहाँ उसे मृत घोषित कर दिया गया।”

दिशा के मृत शरीर की स्थिति बताते हुए पंकज सैदन ने कहा, “पूरे शरीर पर घाव थे। उनकी ठुड्डी के बगल में 1.5 इंच का छेद था। उनकी आँख, नाक, दाँत से खून बह रहा था। उनका हाथ भी मुड़ गया था।”

एंबुलेंस ड्राइवर ने आगे कहा, “दिशा सालियान ने पूरे कपड़े पहना था। उन्होंने लाल रंग की टॉप और ग्रे रंग का लेगिंग्स पहना था। जब उन्हें पोस्टमॉर्टम के लिए ले जाया गया, तब उनके कपड़े उतार कर चेंज किया गया।” 

उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस के कारण किसी भी व्यक्ति को अंदर जाने की अनुमति नहीं थी। मुंबई पुलिस ने कहा कि उसके दो दोस्त उसका शव लेकर आए थे। उन्होंने यह भी कहा कि दो निजी अस्पतालों ने उसे एडमिट करने से इनकार कर दिया था। वे पहले एवरशाइन गए, फिर तुंगा, फिर वे आखिरकार शताब्दी आए।

गौरतलब है कि 8 और 9 जून की मध्यरात्रि को मलाड की 14 वीं मंजिल से गिरने की वजह से दिशा की मौत हो गई थी और मुंबई पुलिस ने इसे आत्महत्या करार दिया था। लेकिन लगातार ऐसे दावे सामने आए हैं जिससे उनकी हत्या किए जाने का शक गहराता जा रहा है।

पिछले दिनों मीडिया रिपोर्ट में चश्मदीद के हवाले से दावा किया गया था कि 8 जून की रात दिशा से चार लोगों ने रेप किया था। इस रात उन्होंने अपने घर पर पार्टी रखी थी। बाद में 14वीं मंजिल से गिरने से उसकी मौत हो गई थी। चश्मदीद ने बताया था कि उस रात पार्टी में काफी तेज म्यूजिक था। इसके कारण दिशा सालियान की चीख-पुकार दब गई थी।

सिर्फ 194 दिन में बिहार के हर गाँव में फास्ट इंटरनेट, जुड़ेगा ऑप्टिकल फाइबर से, बनेगा देश का पहला ऐसा राज्य

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (सितंबर 21, 2020) को बिहार में 14258 करोड़ रुपए की परियोजनाओं की सौगात दी। उन्‍होंने राज्य के 45945 गाँवों को ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क से जोड़ने वाली सेवाओं का उद्घाटन कर राज्‍य में ग्रामीण डिजिटल क्रांति का भी आरंभ किया।

भारत सरकार के दूरसंचार विभाग की इस परियोजना के तहत लगभग 1000 करोड़ रुपए की लागत से बिहार के सभी गाँवों में मार्च 2021 तक ऑप्टिकल फाइबर बिछा कर तेज गति इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी। इस कार्य का क्रियान्वयन भारत की संस्था कॉमन सर्विस सेंटर के द्वारा किया जाएगा। 

अब तक बिहार के सभी 8386 ग्राम पंचायत भारत नेट परियोजना के द्वारा ऑप्टिकल फाइबर से जोड़ा जा चुका है। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से दिए अपने सम्बोधन में कहा था कि अगले 1000 दिनों में देश के सभी छः लाख गाँवों को ऑप्टिकल फाइबर इंटरनेट से जोड़ा जाएगा।

उस संबोधन की शुरुआत आज उन्होंने बिहार से की है और राज्य में इस कार्य को पूरा करने के लिए 31 मार्च, 2021 तक लक्ष्य भी रखा है। 

प्रधानमंत्री ने इस परियोजना को बिहार के डिजिटल भविष्य का शुभारंभ बताया। उन्होंने कहा कि इंटरनेट की अच्छी उपलब्धता से गाँव और शहर की दूरियाँ मिटेंगी और लोगों को कई सुविधाओं के लिए शहर नहीं आना पड़ेगा। उन्होंने बिहार के लोगों को इस बात की भी बधाई दी कि इस परियोजना के पूरा होने पर सभी गाँवों को ऑप्टिकल फाइबर इंटरनेट से जोड़ने वाला बिहार देश का पहला राज्य बन जाएगा।

गाँवों में इंटरनेट पहुँचने से सरकारी खर्च पर पाँच चिन्हित सरकारी संस्थाओं जैसे कि विद्यालय, आँगनवाड़ी केंद्र, आशा, जीविका दीदी आदि को एक वर्ष तक मुफ्त इंटरनेट भी उपलब्ध करवाया जाएगा। जो घर अपने यहाँ निजी इंटरनेट की लाइन लेना चाहेंगे, वो भी कम मासिक शुल्क पर इंटरनेट की सुविधा अपने घरों में लगवा सकेंगे।  

पीएम मोदी द्वारा परियोजना के शुभारंभ के दौरान अधिकारियों के साथ केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद

इसके साथ ही कॉमन सर्विस सेण्टर के द्वारा गाँवों में टेली-मेडिसिन के द्वारा जनता को बड़े अस्पतालों के अच्छे डॉक्टरों की सलाह भी मिल सकेगी। छात्र तेज गति इंटरनेट उपलब्ध होने से डिजिटल शिक्षा की सुविधा प्राप्त कर सकेंगे। किसानों को देश के किसी भी भाग में अपनी उपज बेचने और इंटरनेट के द्वारा अपनी फसल के बारे में विशेषज्ञों की राय भी मिल पाएगी। 

इस कार्यक्रम में बोलते हुए केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद देते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में बिहार का विकास तेज हुआ है। हर क्षेत्र में जितने विकास की परियोजनाएँ बिहार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में मिली हैं, उतनी पहले कभी नहीं मिली है। 

लगभग 1000 करोड़ रुपए की लागत वाली ऑप्टिक्ल फाइबर की इस परियोजना को बहुत की कम समय में अपनी मंजूरी देने के लिए उन्होंने प्रधानमन्त्री को सभी बिहारवासियों की तरफ से धन्यवाद दिया।

जिसे आज ताजमहल कहते हैं, वो शिव मंदिर ‘तेजो महालय’ है: शंकराचार्य ने CM योगी से की ‘दूषित प्रचार’ रोकने की अपील

ओडिशा के पुरी में स्थित गोवर्धन मठ के शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती ने ताजमहल को लेकर बड़ा दावा किया है। शंकराचार्य ने उत्तर प्रदेश के आगरा में यमुना नदी के किनारे स्थित मुगलिया इमारत के बारे में कहा कि ये प्राचीन काल में भगवान शिव का मंदिर था और इसका नाम ‘तेजो महालय’ था। उन्होंने कहा, “जिसे आजकल ताजमहल कहते हैं, उसका पुराना नाम तेजो महालय है। वहाँ शिवजी प्रतिष्ठित थे।“

शंकराचार्य ने कहा कि जयपुर राजपरिवार के पास ताजमहल का पूरा इतिहास सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि विदेशी यात्रियों ने भी अपनी यात्रा को लेकर जो संस्मरण लिखे हैं, उनसे ताजमहल का वास्तविक नाम ‘तेजो महालय’ ही सिद्ध होता है। उन्होंने यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपना ‘सुपरिचित’ बताते हुए कहा कि उन्हें इस तथ्य पर ध्यान देना चाहिए और इतिहास के नाम पर जो दूषित प्रचार किया गया है, उस पर पानी फेरने के अविलम्ब प्रयास करें।

शंकराचार्य का ये बयान गोवर्धन मठ के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से एक वीडियो के जरिए जारी किया गया है और योगी आदित्यनाथ को टैग भी किया गया है। शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती के बयान के बाद सोशल मीडिया में ताजमहल को लेकर चर्चा फिर से शुरू हो गई। लोगों का मानना है कि ताजमहल को बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया गया है और भारत के सैकड़ों हिन्दू मंदिर कलाकारी और भव्यता में इससे खासे बढ़ कर हैं।

इससे पहले श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट के सदस्य शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती ने आगरा को अग्रवन बताते हुए कहा था कि प्राचीन काल में जो स्थल हिन्दू नाम से जाने जाते थे, उनका नाम उन्हें वापस दिया जाना चाहिए। राजस्थान सरकार द्वारा लाल पत्थर के खनन पर रोक लगाए जाने के फैसले को लेकर उन्होंने कहा कि जल्द ही बातचीत के माध्यम से इसे सुलझाया जाएगा।

हाल ही में यूपी सीएम ने घोषणा की थी कि आगरा में निर्माणधीन म्यूज़ियम छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम स्थापित किया जाएगा। ताजमहल के पूर्व में बन रहे इस प्रोजेक्ट की लागत लगभग 150 करोड़ रुपए है। इससे पहले इसका नाम ‘मुग़ल म्यूजियम’ रखा गया था, जिसे सीएम योगी ने बदल दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि छत्रपति शिवाजी महाराज हमारे नायक हैं, मुग़ल किसी भी स्थिति में हमारे नायक नहीं हो सकते हैं।