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राहुल गाँधी होंगे अब से ‘राओल विंची’ ताकि बहन पिरंका की बात बनी रहे सच कि ‘बिना गाँधी’ नाम वाला हो अध्यक्ष

कोरोना, लॉकडाउन, प्रवासी, PM CARES फंड और ऐसे ही तमाम मुद्दों पर पिछले कुछ माह ‘जनता के मुद्दों’ के नाम पर कॉन्ग्रेस ने बर्बाद कर दिए। आखिरकार इंदिरा गाँधी की पोती ने कमान संभाली और कॉन्ग्रेस पार्टी को वापस पारंपरिक विषय पर डालने का ऐतिहासिक काम किया।

पिरंका ने मुद्दों की कमी से जर्जर होती जा रही कॉन्ग्रेस में नई जान फूँकने के लिए बयान जारी किया और कॉन्ग्रेस की कमान किसी गैर गाँधी शख्स को सौंपे जाने की वकालत की। यानी, किसी ऐसी हस्ती को ही पार्टी की कमान सौंपी जाए, जिसके नाम में ‘गाँधी’ न हो।

लेकिन इससे पहले कि भाजपा समर्थक इस फैसले को कॉन्ग्रेस पार्टी लाइन के खिलाफ बताकर पिरंका के विरोध में शाहीनबाग़ खड़ा करते, गाँधी परिवार ने एक और बयान जारी करते हुए बताया कि राहुल गाँधी का नाम आज से राओल विंची ही माना जाएगा।

राहुल गाँधी के राजनैतिक गुरु दिग्विजय सिंह ने भी फौरन पेपर में इश्तिहार दे दिया कि राहुल गाँधी अब राओल विंची कहलाएँगे। इसके पीछे बड़ी वजह यह मानी जा रही है कि विदेशी किस्म के नामों में कॉन्ग्रेस परिवार और समर्थकों की नेहरू जी के जमाने से ही विशेष आस्था रही है। हालाँकि, अभी भी भूमिभक्षी रॉबर्ट वाड्रा और रेहान वाड्रा को कॉन्ग्रेस का नेतृत्व सौंपे जाने की उम्मीदें कायम हैं।

पिरंका के मुँह से किसी गैर-गाँधी के पास कॉन्ग्रेस की सत्ता जाने की बात सुनकर सावन माह के शिवभक्त और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ जी तो एक बार को बगावती हो गए थे और उन्होंने फौरन उन्हें देशद्रोही तक घोषित कर दिया था। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस पार्टी लाइन के खिलाफ बात करने वाला सज्जन कोई भी हो, एंटी नेशनल कहलाएगा।

लेकिन जब उन्हें अगले दिन के अखबार में दिग्विजय सिंह जी द्वारा भेजा गया राहुल गाँधी का नाम राओल विंची किए जाने का इश्तिहार मिला तब जाकर वो अपने क्रोध पर नियंत्रण कर पाए।

हालाँकि, इस बीच कमलनाथ जी ने राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को भी फोन कर के ‘वही कलाकारी’ दोबारा दिखाने की भी सिफारिश कर डाली जिसे करने से मध्य प्रदेश में कमलनाथ चूक गए थे।

हमने दिग्विजय सिंह से बात की तो उन्होंने कहा कि वो पिरंका जी का सम्मान करते हैं और उनके एक तिहाई भाग में गाँधी होने के कारण कोई भी कॉन्ग्रेसी उनकी किसी बात को काट नहीं सकता। साथ ही राहुल गाँधी जैसे दूरदर्शी व्यक्तित्व के नेतृत्व से पार्टी को अलग रखना निहायत ही गलत सोच होगी। अतः अपने मास्टरस्ट्रोक का प्रयोग करते हुए उन्होंने कहा कि ‘साला! नामे बदल दिहिस!’

दिग्विजय की इस बात का भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने स्वागत किया है। संबित पात्रा ने कहा, “देखिए, हम नहीं चाहते कि कॉन्ग्रेस की आंतरिक कलह का प्रभाव भाजपा पर पड़े। इसलिए राहुल गाँधी चाहे राओल विंची बन कर नेतृत्व दें, या आउल विनोद बन जाएँ, हमें किसी भी शर्त पर कॉन्ग्रेस में इस व्यक्ति को शीर्ष में बने रहना देखना है।”

मौलाना-रोधी भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि अगर कॉन्ग्रेस इससे थोड़ा भी दाहिने-बाएँ जाती है, तो हम सुप्रीम कोर्ट को छोड़िए इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस का भी दरवाजा खटखटाएँगे।

गुप्त सूत्रों से यह खबर भी आ रही है कि पिरंका जी अब अपनी बात से मुकर रही हैं क्योंकि रात में उन्हें माताजी का एक वीडियो कॉल आया और उन्होंने कहा, “अे कीया कार डीया बेटी! असा नेही केना ठा।”

हमारे सूत्र बताते हैं कि कल पिरंका जी ये भी कह सकती हैं कि उन्होंने तो यूएस कॉन्ग्रेस के बारे में ऐसा कहा था जिसे मीडिया ने अपने हिसाब से प्रस्तुत किया है। पिरंका के इस बयान से मची उथल-पुथल पर कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ इंग्लिशाचार्य शशि थरूर ने नाराजगी प्रकट करते हुआ कड़े शब्दों में कहा – “एपड़ी बैका”

लेकिन कुछ देर बाद जब शशि थरूर को होश आया तो उन्होंने माफी माँगते हुए कहा कि किसी गैर गाँधी को कॉन्ग्रेस की कमान देने की बात सुनकर वो अपने होशोहवास में नहीं थे, जिसके चलते उन्होंने इंग्लिश के बजाए पहाड़ी/गढ़वाली शब्द का प्रयोग कर दिया।

उन्होंने कहा कि इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि सदियों से एक परिवार विशेष के लिए समर्पित रहने वाली जमात-ए-कॉन्ग्रेस कितनी व्यथित और उनकी क्या हालत रही होगी जब पिरंका ने किसी बिना गाँधी नाम वाले व्यक्ति को उनका लीडर होने की बात कही।

जब उनसे पूछा गया कि क्या ‘एपड़ी बैका’ किसी प्रकार की गाली होती है? इस पर शशि थरूर ने जवाब देते हुए सवाल किया कि क्या किसी बिना गाँधी नाम वाले के हाथ में कॉन्ग्रेस की कमान सौंपने के बारे में विचार करना गाली नहीं है?

राहुल को राओल विंची बना देने के बावजूद भी अभी कुछ कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता अपने मन को बहला पाने में असमर्थ हैं और पिरंका द्वारा दीए गए इस बयान में साजिश की बू तलाश रहे हैं। दरअसल, राहुल गाँधी के इन समर्थकों ने हमारे गुप्त सूत्रों को बताया है कि पिरंका का यह बयान ऐसे समय में आया है जब राहुल गाँधी को उनके ही नेताओं द्वारा नशेड़ी कहे जाने की चर्चा एकबार फिर बाजार में गर्म है।

‘तहलका’ के संपादक और सेक्स स्कैंडल में फँसे तरुण तेजपाल ने राहुल गाँधी के 2005 के इस इंटरव्यू को दबा दिया था। उस समय कई लोग कॉन्ग्रेस में इस चिंता में पड़ गए थे कि उनकी ‘नौकरी’ चली जाएगी और वो कहने लगे थे कि ये किस व्यक्ति से बात कर लिया, ये तो नशेड़ी है।

वहीं, भाजपा ने भी पिरंका के बयान को पहली बार गम्भीरता से लेते हुए फौरन एक उच्चस्तरीय आपात बैठक बुलाई और इस बात पर चर्चा की कि अगर वाकई में राहुल गाँधी कॉन्ग्रेस के लीडर नहीं रहे तो ऐसी परिस्थिति में भाजपा के लिए परिस्थितियाँ एकदम उलट हो जाएँगी।

पिरंका द्वारा कॉन्ग्रेस पार्टी के नेतृत्व पर विचार रखने पर मशहूर शायर और रं** के भाव विशेषज्ञ मुनव्वर राना ने भी अपनी एक नज्म याद करते हुए कहा – “कई बातें मुहब्बत सबको बुनियादी बताती है, जो परदादी बताती थी वही दादी बताती है।”

केरल: गर्भवती भैंस काटकर पूर्ण विकसित भ्रूण निकालकर खाया, अबू और सुहैल समेत 6 गिरफ्तार

केरल में गर्भवती हथिनी की मौत की खबर के बाद एक गर्भवती जंगली भैंस को मारने की घटना सामने आई है। सैकड़ों लोगों ने मिलकर क्रूरतापूर्ण तरीके से गोली मारकर एक गर्भवती जंगली भैंस को मार दिया।

ऑर्गेनाइजर की एक रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के वन अधिकारियों ने 10 अगस्त को हुई इस घटना के सिलसिले में मलप्पुरम जिले के छह मूल निवासियों को गिरफ्तार किया है। पुल्लारा अबू उर्फ ​​नानिप्पा (47), मुहम्मद बुस्तान (30), मुहम्मद अंसिफ (23), आशिक (27) और सुहैल ( 28) समेत एक अन्य आरोपित बाबू को रविवार (अगस्त 16, 2020) को गिरफ्तार किया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, आरोपितों ने न केवल भैंस का माँस आपस में बाँटा बल्कि भैंस को चीरकर उसके पेट में पूर्ण विकसित भ्रूण के माँस को भी बाँट लिया।

इस मामले के आरोपित अबू ने अपनी ही बंदूक से जंगली भैंस को गोली मारी। भैंस को मारने के बाद उन्होंने उसके पेट से पूरी तरह से विकसित भ्रूण को भी निकाल लिया, और अपनी टीम के अन्य सदस्यों के बीच बाँट लिया। आरोपितों ने खोपड़ी सहित भैंस के शेष हिस्सों को जंगल में अलग-अलग स्थानों पर फेंक दिया।

इस क्रूर घटना के मामले में पहले आरोपित अबू के घर से 25 किलो माँस बरामद हुआ है। इस गिरोह के शेष सदस्य भी हिरासत में हैं। रेंज अधिकारी का अनुमान है कि इस घटना में इनके साथ और भी सहयोगी मौजूद थे। शुरूआती कार्रवाई पूरी करने के बाद आरोपितों को मंजेरी अदालत में पेश किया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि कुछ माह पहले ही केरल के साइलेंट वैली नेशनल पार्क की एक गर्भवती हथिनी को कुछ लोगों ने पटाखों से भरा अनानास खिला दिया था। अनानास चबाते ही उसमें हुए विस्फोट से हथिनी का जबड़ा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था।

हफ्तेभर बाद 27 मई को पलक्कड़ में वेल्लियार नदी में हथिनी की मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पता चला कि हथिनी गर्भवती थी। इस घटना को लेकर देशभर में लोगों ने बड़े स्तर पर अपना विरोध प्रकट किया था।

ये डर अच्छा है: प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट से सजा सुनाने से पहले डाली नई अर्ज़ी

वकील प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक अर्जी दायर की जिसमें अवमानना मामले के संबंध में उनकी सजा पर सुनवाई टालने की माँग की गई है। इसमें कहा गया है कि जब तक इस संबंध में एक समीक्षा याचिका दायर नहीं की जाती है और अदालत द्वारा इस पर विचार नहीं किया जाता है, तब तक सजा पर सुनवाई को टाल दिया जाए। 

बुधवार (अगस्त 20, 2020) को सजा पर बहस होने वाली है। 14 अगस्त को शीर्ष अदालत ने वकील प्रशांत भूषण को कोर्ट की अवमानना वाले मामले में दोषी करार दिया। न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा, न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की पीठ ने भूषण को अवमानना का दोषी ठहराते हुए कहा कि इसकी सजा की मात्रा के मुद्दे पर 20 अगस्त को बहस सुनी जाएगी। शीर्ष अदालत ने पाँच अगस्त को इस मामले में सुनवाई पूरी फैसला सुरक्षित कर लिया था। 

इससे पहले, अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने उन दो ट्वीट का बचाव किया था, जिसमें कथित तौर पर अदालत की अवमानना की गई है। उन्होंने कहा था कि वे ट्वीट न्यायाधीशों के खिलाफ उनके व्यक्तिगत स्तर पर आचरण को लेकर थे और वे न्याय प्रशासन में बाधा उत्पन्न नहीं करते। हालाँकि सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (अगस्त 10, 2020) को वकील प्रशांत भूषण के खिलाफ 2009 का आपराधिक अवमानना मामला खारिज करने से इनकार कर दिया। 11 साल पुराने इस केस में कोर्ट ने प्रशांत भूषण की स्पष्टीकरण और माफ़ी माँगने से इनकार कर दिया है।

ज्ञात हो कि यह केस प्रशांत भूषण की ओर से तहलका पत्रिका को दिए गए इंटरव्यू को लेकर है। इसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि भारत के पिछले 16 मुख्य न्यायाधीशों में से आधे भ्रष्ट थे। तरुण तेजपाल उस समय तहलका पत्रिका के संपादक थे। मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त को होगी।

गौरतलब है कि वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने देश के सर्वोच्च न्यायलय और मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबड़े के खिलाफ ट्वीट किया था, जिस पर स्वत: संज्ञान लेकर कोर्ट कार्यवाही कर रहा है। अपने ट्वीट में प्रशांत भूषण ने कहा था, “जब भविष्य में इतिहासकार वापस मुड़कर देखेंगे कि किस तरह से पिछले 6 वर्षों में औपचारिक आपातकाल के बिना ही भारत में लोकतंत्र को नष्ट किया गया है, तो वे विशेष रूप से इस विनाश में सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका को चिह्नित करेंगे, और पिछले 4 CJI की भूमिका को और भी अधिक विशेष रूप से।”

AMU के ‘खिलाफत’ पर वेबिनार में तुर्की की प्रोफेसर को बुलाए जाने पर बवाल: BJP नेता ने लिखा शिकायती पत्र

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में 13 अगस्त को हुए एक वेबिनार में तुर्की की गिरेसुन विश्वविद्यालय की प्रोफेसर एच हिलाल शाहीन को आमंत्रित किए जाने पर बीजेपी नेता ने ऐतराज जताया है। बीजेपी नेता ने इस संबंध में मानव संसाधन विकास मंत्रालय को एक पत्र भी लिखा है, जिसमें उन्होंने कहा है कि तुर्की से हमारे रिश्ते पहले से ही हमेशा खराब रहे हैं। वह पाकिस्तान को सपोर्ट करता रहा है।

ऐसे में 13 अगस्त को AMU द्वारा आयोजित वेबिनार में तुर्की की प्रोफेसर हिलाल शाहीन को आमंत्रित किया गया। इसमें वाईस चांसलर तारिक मंसूर भी शामिल हुए थे। अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय को स्पष्ट करना चाहिए कि ये वेबिनार क्यों आयोजित हुई। बीजेपी नेता ने पत्र में एएमयू के कुलपति एवं कार्यक्रम के आयोजकों के खिलाफ कार्रवाई करने की मानव संसाधन मंत्रालय से माँग की है।

बीजेपी नेता डॉ निशित शर्मा ने मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक को लिखे पत्र में कहा है कि दिनांक 13 अगस्त को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के शिक्षकों द्वारा एक वेबिनार का आयोजन किया गया था। जिसका विषय ‘तुर्की, भारत और महात्मा गाँधी -खिलाफत आंदोलन’ के आलोक में था। इसमें अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर तारिक मंसूर सहित कई अन्य प्रोफेसर ने भाग लिया था। 

बीजेपी नेता ने पत्र में लिखा है कि किस प्रकार तुर्की ने विभिन्न विषयों पर लगातार भारत का विरोध किया है तथा पाकिस्तान के समर्थन में रहा है। धारा 370 हटाने का भी विरोध तुर्की द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पटल पर किया गया था। जिस विषय पर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के अंदर वेबिनार का आयोजन हुआ वह विषय खिलाफत आंदोलन को लेकर था और यह भी सर्वविदित है कि खिलाफत आंदोलन के कारण संपूर्ण विश्व में नरसंहार की एक शृंखला प्रारंभ हो गई थी। जिसका असर भारत के मालाबार दंगों में भी देखने को मिला।

बीजेपी नेता ने पत्र में लिखा कि इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा गैर-इस्लामी लोगों की हत्या की गई। खिलाफत आंदोलन ही भारत के विभाजन का एक मुख्य कारण भी था। एक इस्लामिक आंदोलन पर भारत विरोधी निर्णय लेने वाले तुर्की देश की प्रोफेसर को आमंत्रित कर स्वयं अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति द्वारा एक वेबिनार की अध्यक्षता किया जाना गंभीर प्रश्न उत्पन्न करता है। निवेदन है कि विशेष संज्ञान में लें। जाँच समिति स्थापित कर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी कुलपति एवं वेबिनार के अन्य आयोजकों को दंडित करें। यह भारत की आंतरिक सुरक्षा, शैक्षणिक संस्थान में कट्टरपंथी विचारधारा के प्रभावी होने का विषय है।

बीजेपी नेता ने कहा खिलाफत आंदोलन को पुनर्जीवित करने का काम चल रहा है। खिलाफत जैसे विवादास्पद और राष्ट्र विभाजन वाले विषय को लेकर ऐसे लोगों को बुलाकर वेबिनार का आयोजन करना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण और गंभीर विषय है। AMU जैसे एक संस्था में इस तरह की गतिविधियाँ होना भी रेडिकलाइजेशन को बढ़ावा देने वाला विषय है। कहीं ना कहीं ऐसा लगता है कि खिलाफत 2.0 की तैयारी चल रही है।

इस पूरे मामले पर अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर डॉ मोहम्मद वसीम अली ने बताया कि 13 अगस्त को एक ऑनलाइन वेबिनार आयोजित किया गया था। इसकी स्पीकर तुर्की विश्वविद्यालय की प्रोफेसर एच हिलाल शाहीन थी। इन्हीं का मेन टॉक था। यह एक एकेडमिक प्रोग्राम था और काफी सर्च करने के बाद उनको इनवाइट किया गया, वो खिलाफत मूवमेंट की एक्सपर्ट है। जिसके बाद उन्होंने ऑनलाइन अपना लेक्चर रखा। इसका कोई राजनीतिक कनेक्शन नहीं है। ना कोई पॉलीटिकल बैकग्राउंड है।

उन्होंने आगे कहा कि गवर्नमेंट ऑफ इंडिया की ऐसी कोई एडवाइजरी नहीं है कि इस तरह का कोई प्रोग्राम में किस को बुलाना है या किस को नहीं बुलाना। कोशिश यही रहती है कि जो अच्छे वक्ता हैं उनको बुलाया जाए। डिस्कशन के लिए उसी कड़ी में मैडम को इसमें निमंत्रण दिया गया था और उन्होंने ऑनलाइन इस पर एक लेक्चर दिया था।

मॉडलिंग में करियर के बहाने लड़कियों का यौन शोषण, ब्लैकमेल: महेश भट्ट को NCW ने बुलाया, कहा – ‘3 बेट‍ियों का पिता हूँ’

मॉडलिंग का मौका देने के नाम पर लड़कियों के यौन उत्पीड़न के मामले को लेकर राष्ट्रीय महिला राष्ट्रीय महिला आयोग (National Commission for Women) ने मंगलवार (अगस्त 18, 2020) को मशहूर निर्माता-निर्देशक महेश भट्ट समेत कई गवाहों के बयान दर्ज किए। 

महिला आयोग ने इस जवाब को ट्विटर पर साझा किया। इसके बाद अपने जवाब में महेश भट्ट ने कहा कि उनके नाम और फोटो का ग़लत इस्तेमाल किया गया है। आयोग ने सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भयाना द्वारा दायर एक शिकायत का संज्ञान लेने के बाद महेश भट्ट, सोनू सूद, उर्वशी रौतेला, मौनी रॉय, रणविजय सिंह, प्रिंस नरूला और ईशा गुप्ता को समन जारी किया था।

ऑनलाइन सुनवाई के लिए आयोग के सामने उपस्थित हुए महेश भट्ट ने बयान जारी कर कहा, ”मैं राष्ट्रीय महिला आयोग को सैल्यूट करता हूँ कि उन्होंने ऐसी कुछ संस्थाओं को चिन्हित कर उन पर कड़ाई की है, जो इंडस्ट्री में महिलाओं संग यौन उत्पीड़न को बढ़ावा देती हैं और इंडस्ट्री का नाम खराब करती हैं। इसके लिए मैं नेशनल कमिशन फॉर वुमन का आभारी हूँ। मैं आज अपने ऊपर लगे आरोपों के संदर्भ में कमिशन के समक्ष हाजिर हुआ। आईएमजी वेंचर ने नवंबर 2020 में अपने प्रमोशनल इवेंट मिस्टर और मिसेज ग्लैमर, 2020 में मेरा नाम का इस्तेमाल किया और मुझे आमंत्रण दिया कि मैं इवेंट का हिस्सा बनूँ।”

भट्ट ने कहा, “इसी के संदर्भ में मुझे कमिशन के सामने हाजिर होना पड़ा। मगर मैंने मौजूदा हालातों का हवाला देकर शो में शिरकत करने से मना कर दिया था। मैं इस इवेंट को लेकर किसी भी प्रकार के एग्रीमेंट में नहीं था और ना ही इसके लिए मुझे कोई फीस दी गई थी। मगर दुर्भाग्यवश मेरा नाम और मेरी इमेज का इस्तेमाल सोशल मीडिया द्वारा इस इवेंट के संदर्भ में मेरी सहमति के बिना किया गया। जब मैंने इस बारे में उनसे पूछा तो उन्होंने इसके लिए मुझसे माफी माँगी। इसके बाद मेरी इमेज और नाम को हर जगह से हटा दिया गया।”

उन्होंने आगे कहा, ”मैंने ये बयान इसलिए जारी किया है कि सभी को इस बारे में पता चल जाए कि आईएमजी से मेरा कोई भी वास्ता नहीं है। बस मेरे नाम और इमेज का इस्तेमाल इसलिए किया गया ताकि उनके इवेंट में ज्यादा से ज्यादा लोग शरीक हो सकें। मैं 71 साल का हो चुका हूँ। इस उम्र में ज्ञान बाँटने और सामाजिक दृष्टिकोण से लोगों को जागरुक करने की कोशिश करता हूँ। मैं तीन बेटियों का पिता हूँ। मैं नेशनल कमिशन ऑफ वुमन का आभारी हूँ, जिस तरह वे सामाजिक मुद्दे के लिए सराहनीय काम कर रहे हैं।”’

गौरतलब है कि सामाजिक कार्यकर्तायोगिता भयाना ने अपनी शिकायत में आईएमजी वेंचर नाम की कंपनी के प्रमोटर सनी वर्मा के खिलाफ आरोप लगाया है कि उसने मॉडलिंग में करियर बनाने का मौका देने के बहाने कई लड़कियों को ब्लैकमेल और उनका यौन शोषण किया है। भयाना ने अपनी शिकायत में कहा था कि कई टीवी और फिल्म एक्टर एक वीडियो विज्ञापन के जरिए उसकी कंपनी को प्रमोट कर रहे हैं।

योगिता भयाना द्वारा राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा को लिखे गए एक शिकायती पत्र में आरोप लगाया गया था कि सनी वर्मा अपनी कंपनी के माध्यम से मिस एशिया प्रतियोगिता के आयोजन के बहाने लड़कियों को इस दावे के साथ बुलाता है कि इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के बाद वह मॉडल बन जाएँगी।

कॉन्ग्रेस ट्रोल साकेत गोखले ने फिर फैलाई फर्जी खबर: फेसबुक निदेशक अँखी दास पर RSS से जुड़े होने का लगाया आरोप

द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने 14 अगस्त को फेसबुक के एक वरिष्ठ अधिकारी पर कथित रूप से भाजपा का पक्ष लेने का आरोप लगाते हुए एक रिपोर्ट प्रकाशित किया था। इसके बाद से कॉन्ग्रेस पार्टी और उसका इकोसिस्टम फेसबुक की सार्वजनिक नीति निदेशक अँखी दास को लगातार निशाना बना रहे हैं।

डब्ल्यूएसजे की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कॉन्ग्रेस पार्टी और उसके इकोसिस्टम ने आरोप लगाया था कि अँखी दास ने अभद्र भाषा का प्रयोग करने वाले भाजपा और हिंदुत्व का समर्थन करने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई का विरोध किया था। हालाँकि, अपने द्वारा किए गए दावे को सही ठहराने के लिए न ही डब्ल्यूएसजे और न ही कॉन्ग्रेस और उसके इकोसिस्टम ने कोई सबूत पेश किया।

जैसे-जैसे कॉन्ग्रेस पार्टी और कुछ मीडिया नेटवर्क द्वारा अँखी दास के खिलाफ लगाए गए आरोप कम होने लगे, कॉन्ग्रेस पार्टी ने दोबारा व्यक्तिगत रूप से दास पर हमला करते हुए उन्हें ट्रोल करने लगी। कॉन्ग्रेस ने बेबुनियाद आरोप लगाते हुए दावा किया कि दास के आरएसएस से संबंधित समूहों के साथ संबंध थे।

कॉन्ग्रेस पार्टी के प्रति सहानुभूति रखने के लिए प्रसिद्ध ट्रोल साकेत गोखले ने ऐसा ही एक आरोप लगाया था। गोखले ने आरोप लगाया था कि अँखी दास के आरएसएस से जुड़े ग्रुप्स के साथ संबंध है।

शनिवार को, गोखले ने दावा किया था कि अँखी दास ने वर्ल्ड आर्गेनाइजेशन स्टूडेंट्स एंड युथ (WOSY) के सत्रों में भाग लिया। इस युवा समूह का नेतृत्व उसकी बहन रश्मि दास करती है। कॉन्ग्रेस से हमदर्दी रखने वाले साकेत ने यह भी कहा कि WOSY का कार्यालय दिल्ली में आरएसएस के संगठन का कार्यालय एक ही इमारत में स्थित था।

अँखी दास को निशाना बनाने की जल्दबाजी में, गोखले ने WOSY इवेंट की एक तस्वीर को पोस्ट किया। जिसमें उन्होंने दावा किया कि अँखी दास इस कार्यक्रम में भाग ले रही थी। हालाँकि, जिस व्यक्ति के तस्वीर को उन्होंने अपने पोस्ट में शेयर किया था, वह अँखी दास नहीं बल्कि उनकी जुड़वाँ बहन डॉ रश्मि दास थी।

बता दें कि इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाली अँखी दास नहीं, बल्कि उनकी जुड़वाँ बहन रश्मि दास थी। रश्मि दास जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में एबीवीपी की एक पदाधिकारी भी रह चुकी है।

ABVP, WOSY ने फर्जी दावों का जवाब

हमेशा की तरह ही साकेत गोखले ने लोगों को बदनाम करने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फर्जी खबरों का सहारा लिया था। वहीं गोखले द्वारा फैलाए गए फर्जी खबर को एबीवीपी और डब्ल्यूओएसवाई ने खारिज कर दिया। WOSY ने उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की धमकी भी दी है।

डब्ल्यूओएसवाई ने अपने ट्विटर हैंडल पर एक बयान जारी करते हुए कहा कि अँखी दास के सत्रों में शामिल होने वाला दावा पूरी तरह से गलत व झूठ है।

इसके साथ ही उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि रश्मि दास दो दशकों से अधिक समय से WOSY के साथ हैं। डब्ल्यूओएसवाई ने यह भी कहा कि डॉ रश्मि दास के साथ इसका संबंध पूरी तरह स्वैच्छिक था और इसका उद्देश्य भारत में रहने वाले अंतर्राष्ट्रीय छात्रों के बीच ‘वसुधैव कुट्टम्बकम’ की अवधारणा को फैलाना था।

डब्ल्यूओएसवाई ने गोखले के पोस्ट को हटाने की माँग करते हुए उनसे सार्वजनिक रूप से माफी माँगने के लिए भी कहा। इसके साथ उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि अगर साकेत उनकी बात नहीं मानते हैं, तो डब्ल्यूओएसवाई उनके खिलाफ जनता में फर्जी खबरें, घृणा और अशांति फैलाने के लिए कानूनी कार्रवाई करेगा।

वहीं एबीवीपी की जेएनयू यूनिट ने भी रविवार को गोखले के खिलाफ एक बयान जारी किया था। जिसमें उन्होंने गोखले को रश्मि दास के खिलाफ लगाए गए झूठे आरोपों के लिए उनकी आलोचना करते हुए कहा कि गोखले द्वारा किया गया यह काम सिर्फ लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचने के लिए एक घटिया प्रयास है। और कॉन्ग्रेस द्वारा फैलाया गई “झूठी खबर।” एबीवीपी जेएनयू ने साकेत गोखले को कॉन्ग्रेस का “string-puppet journalist” भी बताया।

एबीवीपी ने साकेत गोखले को “राहुल गाँधी के जाने-माने अनुयायी और प्रशंसक” बताया और कहा कि वह “कॉन्ग्रेस के संरक्षण में” फर्जी खबरें और झूठे प्रचार करते रहते हैं।

एबीवीपी से अपने संबंधों को कभी नहीं छिपाया

इस बीच, अँखी दास की जुड़वाँ बहन डॉ रश्मि दास ने विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके राजनीतिक झुकाव के कारण उन पर हमला किया जा रहा है। टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए, रश्मि दास ने कहा कि उन्होंने कभी भी एबीपीपी के साथ अपने संबंधों नहीं छिपाया। बता दे रश्मि दास, अँखी से 2 मिनट बड़ी है।

उन्होंने कहा, “मैं जेएनयू में एबीवीपी के साथ जुड़ी थी। जेएनयू से मैंने अंतरराष्ट्रीय संबंधों में पीएचडी की थी। मैं छात्रसंघ की महासचिव थी। एबीवीपी और संघ के संगठनों के साथ मैंने 25 वर्षों तक काम किया है , जिसके बारे में सभी को पता है।”

दिलचस्प बात यह है कि दोनों बहनें जेएनयू में पढ़ी हैं। डॉ रश्मि दास ने कहा कि यह गलत है कि उन्हें अपमानित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अँखी और मैं जुड़वा हैं और मैं न तो अपनी पहचान छिपा सकती हूँ और न ही अपने अतीत या चल रहे काम को छिपा सकती हूँ।

साकेत गोखले द्वारा लगाए गए झूठे आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए, रश्मि दास ने कहा, “मैं उसकी बहन हूँ, मेरे कामों को लेकर उस पर झूठे दावे किए जा रहे है। मेरे इमेज को मेरी बहन पर मढ़ा जा रहा यह कहते हुए कि उसने WOSY के कार्यक्रम में भाग लिया था, जो कि गलत है।”

बेगूसराय: बंदूक की नोक पर अगवा हिंदू नाबालिग लड़की 25 दिनों बाद पटना से बरामद, मुख्य आरोपित नजमुल फरार

बिहार के बेगूसराय से 26 जुलाई को बंदूक की नोक पर अगवा की गई हिंदू नाबालिग लड़की को बचा लिया गया है। बेगूसराय पुलिस ने बुधवार (19 अगस्त, 2020) सुबह नाबालिग लड़की को पटना से बरामद किया।

पिता को सुबह करीब साढ़े सात बजे बेगूसराय के बछवारा पुलिस थाने से फोन आया और सूचना मिली कि लड़की पटना में मिली है।

लड़की के पिता दिनेश ने ऑपइंडिया को बताया कि अपहरणकर्ताओं के गिरोह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। वहीं मुख्य आरोपित नजमुल अभी भी फरार है।

दिनेश कुमार पंडित ने बताया था कि एक महिला सहित 7 लोगों के एक गिरोह ने 26 जुलाई की शाम को उनकी बेटी का अपहरण कर लिया था। पीड़ित पिता ने मुख्य आरोपित इज़मुल खान उर्फ ​​नजमुल उर्फ ​​आर्यन और उसके साथी, मोहम्मद नरूल अंसारी, मोहम्मद मुनफ़र अंजुम अंसारी अलार चंद, फ़रत और अन्य लोगों के खिलाफ़ एफआईआर दर्ज कराई थी।

इस बीच, दिनेश ने पुष्टि की कि उन्होंने अपनी बेटी को अभी तक नहीं देखा है। बता दें नाबालिक हिंदू लड़की को बेगूसराय कोर्ट ले जाया गया है और उसके माता-पिता फिलहाल अपनी बेटी से मिलने के लिए जा रहे हैं।

बेगूसराय से नाबालिग हिंदू लड़की का अपहरण

गौरतलब है कि बिहार के बेगूसराय के बछवारा पुलिस थाने के अंतर्गत भिखम चक गाँव से गत 26 जुलाई को एक नाबालिग हिंदू लड़की को बंदूक की नोक पर उस समय अगवा कर लिया गया था, जब वह अपने पिता के साथ बाजार से लौट रही थी।

नाबालिग लड़की के पिता दिनेश ने आरोप लगाया था कि जब वह बेगूसराय जिले के मंसूरचक ब्लॉक में बेहरामपुर में पंचायत भवन को पार कर रहे थे, उसी वक्त मुख्य आरोपित नजमुल और एक महिला सहित सात लोगों ने एक बोलेरो कार में उसकी बेटी को जबरन बंदूक की नोक पर अगवा कर ले गए।

उल्लेखनीय है कि बेटी के अपहरण के मामले में पुलिस की उदासीनता के बारे में बताते हुए, दिनेश ने कहा था पुलिस उनकी शिकायतों पर विश्वास नहीं कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि बेगूसराय के डीएसपी ने उनकी बातों को बेतुका करार दिया था। इसके अलावा पुलिस ने घटना को एक मनगढंत कहानी भी बताया।

जिसके बाद इस घटना पर ऑपइंडिया से बेगूसराय के डीएसपी ने कहा था, “आपको गलत जानकारी दी गई है। किसी भी नाबालिग लड़की का अपहरण नहीं हुआ। लड़की का लड़के के साथ प्रेम संबंध था।”

वहीं पहले हमनें आपको रिपोर्ट दी थी कि लड़की के नाबालिग होने के बावजूद, SHO ने पुष्टि की थी कि इस मामले में POCSO अधिनियम को लागू नहीं किया जाएगा और आरोपितों पर IPC की धारा 366, 323, 341, 379, 384 और 504 के तहत अपहरण और चोट पहुँचने का मामला दर्ज किया गया था।

गरीब भी था और नेपोटिज्म तो था ही… हटाना पड़ा था ‘शुक्ला’ सरनेम: रवि किशन ने बॉलीवुड की खोली पोल

गोरखपुर से सांसद रवि किशन ने बॉलीवुड में सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद नेपोटिज्म पर चल रही बहस को आगे बढ़ाते हुए एक बड़ा खुलासा किया है। एक दौर में भोजपुरी फिल्मों के सुपरस्टार रहे और कई बॉलीवुड फिल्मों में अलग-अलग भूमिकाएँ निभा चुके रवि किशन ने कहा है कि मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री में नेपोटिज्म इतना ज्यादा हावी है कि उन्हें अपना सरनेम (शुक्ला) तक हटाना पड़ा था।

बता दें कि संसद में भी वो रवि किशन शुक्ला के रूप में पुकारे जाते हैं क्योंकि उनका आधिकारिक नाम यही है और चुनाव भी उन्होंने इसी नाम से लड़ा था लेकिन फिल्म इंडस्ट्री में कभी भी उनके नाम के साथ ‘शुक्ला’ लगा हुआ नहीं देखा गया। भाजपा नेता ने बताया कि उन्होंने नेपोटिज्म के कारण बहुत कुछ खोया है। उन्होंने कहा कि वो इंडस्ट्री में रुपए कमाने और अपने माँ-बाप का नाम रौशन करने आए थे।

रवि किशन ने कहा कि इन सबके बावजूद वो एक गरीब परिवार से मुंबई आए थे, इसीलिए उन्हें यहाँ आकर अपना सरनेम हटाने के लिए मजबूर होना पड़ा। ‘न्यूज़ 18’ की खबर के अनुसार, उन्होंने सुशांत सिंह राजपूत मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा सीबीआई जाँच के आदेश देने और मुंबई पुलिस को जाँच एजेंसी का सहयोग करने का आदेश देने वाले फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि ये एक ऐतिहासिक फैसला है।

ये बातें उन्होंने ‘न्यूज़ 18’ की प्रीति श्रीवास्तव से बातचीत में कही। रवि किशन शुक्ला ने कहा कि ये दिवंगत अभिनेता के परिवार ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए ख़ुशी का विषय है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ये मामला आत्महत्या का नहीं लग रहा है और मुंबई पुलिस को इस बात पर सोच-विचार करना चाहिए कि आखिर उसने क्या खोया है? साथ ही उन्होंने बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय की भी तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने काफी अच्छा काम किया है। उन्होंने कहा:

“मुंबई में लोग हमें भैया कह कर पुकारते हैं और उत्तर प्रदेश या फिर बाकी छोटे क्षेत्रों से जो लोग आते हैं, उन्हें नेपोटिज्म का शिकार बनने को मजबूत होना पड़ता है। अभी जो लड़ाई लड़ी जा रही है, ये केवल सुशांत सिंह राजपूत की ही नहीं बल्कि पूरे देश के नौजवानों की लड़ाई है। उत्तर प्रदेश और बिहार से या किसी भी राज्य से जब कोई कलाकार मुंबई काम करने के लिए जाए तो उसे हीन भावना से भैया ना बोला जाए। उन्हें नज़रअंदाज़ न किया जाए।”

साथ ही रवि किशन ने ये भी कहा कि आगे यूपी-बिहार से जाने वाले नए कलाकारों के खिलाफ किसी भी प्रकार की गुटबाजी भी नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जो कलाकार वहाँ काम करने जाते हैं, उनका सम्मान किया जाना चाहिए। रवि किशन द्वारा ‘शुक्ला’ सरनेम हटाने के खुलासे के बीच बता दें कि सिने इंडस्ट्री में कई ऐसे अभिनेता हैं, जो सिल्वर स्क्रीन के लिए अपना पूरा नाम या सरनेम बदल कर या हटा कर काम कर रहे हैं।

SC ने CBI को सौंपी सुशांत मामले की जाँच, कहा- मुंबई पुलिस ने नहीं की उपयुक्त कार्रवाई, न हुई एक भी FIR दर्ज

सुप्रीम कोर्ट ने आज (अगस्त 19, 2020) सुशांत सिंह की मौत के मामले की जाँच का सारा दारोमदार सीबीआई (CBI) को सौंप दिया। कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए पटना में दर्ज एफआईआर को सही माना। इसके साथ ही मुंबई पुलिस को लेकर कहा कि उन्होंने इस मामले में FIR नहीं दायर की और न अपनी जाँच शुरू की।

कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए मुंबई पुलिस को लेकर कुछ महत्तवपूर्ण बातें कहीं। कोर्ट ने कहा, “वर्तमान मामले में, मुंबई पुलिस ने बिना किसी FIR किए धारा 174 के दायरे को बढ़ाने का प्रयास किया है और इसलिए, जैसा कि प्रतीत होता है, मुंबई पुलिस द्वारा संज्ञेय अपराध के लिए कोई जाँच नहीं की जा रही है। वहाँ अब भी FIR दर्ज होना बाकी है और न ही उन्होंने सीआरपीसी की धारा 175 (2) के तहत इस मामले में दृढ संकल्प दिखाया।”

कोर्ट ने कहा, हितधारकों द्वारा निष्पक्ष जाँच पर आशंका को देखते हुए, इस न्यायालय को यह सुनिश्चित करने का प्रयास करना चाहिए कि सत्य की खोज एक स्वतंत्र एजेंसी द्वारा की जाए, जो दोनों राज्य सरकारों द्वारा नियंत्रित ना हो। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जाँच और जाँच प्राधिकरण की विश्वसनीयता को संरक्षित किया जाना चाहिए।

कोर्ट ने दो अलग-अलग अदालतों में मामले के क्षेत्राधिकार पर आगामी संभावनाओं को मद्देनजर रखते हुए ये भी कहा कि ये मामला सीआरपीसी की धारा 186 व अन्य उपयुक्त धाराओं के तहत हल किया जा सकता है।

कोर्ट ने कहा कि सभी बातों से ये मालूम होता है कि मुंबई पुलिस ने सीआरपीसी की धारा 174 के तहत जो जाँच की, वह निश्चित कारण के लिए बहुत सीमित थी। इस केस को अपराध की धारा 157 के तहत नहीं जाँचा गया।

अदालत ने सुशांत के पिता की शिकायत को ध्यान में रखा और कहा कि शिकायतकर्ता ने कहा है कि वह पटना से अपने बेटे से संपर्क करने की कोशिश करते थे लेकिन आरोपितों ने कभी उनके इस प्रयास को पूरा नहीं होने दिया। जिसके कारण पिता-पुत्र के बीच बात नहीं हो पाई और उनके पास से अपने बेटे को बचाने की संभावना समाप्त हो गई।

फैसला सुनाते हुए अदालत ने विशेष रूप से कहा कि इस मामले के संज्ञान में आने के बाद धारा 154 के तहत एफआईआर होना अनिवार्य थी। पूर्व में हुए मामले बताते हैं कि जाँच के शुरुआती समय में ऐसा नहीं कहा जा सकता कि संबंद्ध थाने के बाद मामले में जाँच के प्रादेशिक क्षेत्राधिकार नहीं थे।

सुप्रीम कोर्ट ने केस में संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपने अधिकार का इस्तेमाल किया। अदालत ने कहा, “उपरोक्त प्रावधान यह स्पष्ट करता है कि सुप्रीम कोर्ट एक योग्य मामले में, न्याय प्रदान करने के लिए अनुच्छेद 142 शक्तियों को लागू कर सकता है। इस मामले में अजीब परिस्थितियों के लिए आवश्यक है कि इस मामले में पूर्ण न्याय किया जाए।”

कोर्ट ने यह भी कहा कि मुंबई पुलिस ने इस मामले में एक्सिडेंटल मौत की रिपोर्ट को दर्ज किया था। इसमें सीमित जाँच शक्ति थी। अब चूँकि बिहार पुलिस ने एक पूरी एफआईआर दर्ज की है, जिसे पहले से ही सीबीआई को भेज दिया गया है। ऐसे में केंद्रीय एजेंसी को मामले की जाँच करनी चाहिए।

कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी सुनिश्चित किया कि राजपूत की हत्या के पीछे की जाँच में सीबीआई का एकमात्र अधिकार होने के बारे में किसी प्रकार का कोई भ्रम न हो और न ही कोई भी अन्य राज्य पुलिस इसमें हस्तक्षेप करे।

CBI सुशांत के मामले में न केवल एफआईआर दर्ज करने बल्कि राजपूत की मौत के मामले से जुड़ी किसी अन्य एफआईआर की जाँच करने का भी हक रखेगी। साथ ही सीबीआई को अपनी जाँच के लिए राज्य सरकारों की अनुमति की जरूरत नहीं होगी, वह जब चाहें, जिससे चाहें पूछताछ कर सकते हैं। सबूत इकट्ठा करने के लिए महाराष्ट्र सरकार से परमिशन नहीं लेनी होगी।

जिस पोते को शरद पवार ने कहा था ‘अपरिपक्व’… सुशांत केस में CBI जाँच पर उसने लिखा – ‘सत्यमेव जयते’

सुप्रीम कोर्ट द्वारा बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले की जाँच सीबीआई (CBI) को सौंपे जाने पर एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार के पोते और राज्य के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे पार्थ पवार ने खुशी जताई है।

सुशांत केस में आज सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला आने के बाद पार्थ पवार ने ट्वीट कर लिखा, “सत्यमेव जयत।” बता दें कि सुशांत केस की जाँच को सीबीआई को सौंपे जाने की माँग करने वालों में से एक पार्थ पवार भी थे। उन्होंने पार्टी लाइन से अलग होकर महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख को इसके लिए पत्र भी लिखा था। इस वजह से वो शिवसेना के लोगों के निशाने पर भी थे।

यही नहीं पार्थ की इस माँग पर शरद पवार भी खुश नजर नहीं आए थे, उन्होंने सार्वजनिक रूप से उन्हें ‘अपरिपक्व’ कह डाला था, जिसके बाद खबर आई थी पार्थ को लेकर एनसीपी और पवार के घर में क्लेश उत्पन्न हो गया है, फिलहाल आज एक बार फिर से पार्थ ने सुशांत केस पर प्रतिक्रिया दी है, ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि पवार अब क्या रिएक्शन देते हैं।

बता दें कि सुशांत सिंह राजपूत केस में शुरुआत से ही मुंबई पुलिस की जाँच पर सवाल उठ रहे हैं। सुशांत के परिवार ने भी मुंबई पुलिस की जाँच पर भरोसा न करते हुए रिया चक्रवती के खिलाफ बिहार पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई। इसके बाद महाराष्ट्र पुलिस और बिहार पुलिस भी आमने-सामने आ गईं। मुंबई पुलिस के दो महीने तक केस में एफआईआर दर्ज न करने पर सवाल उठे।

इस पूरे प्रकरण में महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई पुलिस की जाँच पर भरोसा जताया और साथ ही केस को सीबीआई में ट्रांसफर करने की बात को राजनीति करार दिया। महाराष्ट्र सरकार ने सुशांत केस में राजनीति के पीछे बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव का हवाला दिया।

उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र सरकार सीबीआई को सुशांत के मामले की जाँच को सौंपे जाने का विरोध कर रही थी। महाराष्ट्र सरकार की दलील थी कि मुंबई पुलिस ही मामले की जाँच करे क्योंकि वो इस मामले में 56 लोगों के बयान दर्ज कर चुकी है।

उद्धव सरकार की तरफ से ये भी कहा गया था कि सुशांत की मौत का मामला मुंबई पुलिस के अधिकार क्षेत्र का है क्योंकि घटना मुंबई में हुई और पीड़ित, आरोपित व गवाह सभी मुंबई के हैं।

फैसला आने के बाद संजय राउत ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “जो भी सरकार में हैं, वो कानून जानते हैं। मुंबई पुलिस कमिशनर और एडवोकेट जनरल इस पर बात कर सकते हैं। इस पर मेरे द्वारा टिप्‍पणी करना उचित नहीं होगा।” 

वहीं महाराष्ट्र सरकार पर लग रहे आरोपों पर उन्‍होंने कहा, “सुप्रीम कोर्ट ने अपना आदेश सुना दिया है। इस पर राजनीतिक बयानबाजी ठीक नहीं है। हमारे राज्‍य की न्‍याय व्‍यवस्‍था देश में बेहतर व्‍यवस्‍थाओं में से एक है। यहां सत्य और न्याय की हमेशा जीत होती है। कानून के ऊपर कोई नहीं है। सबको न्‍याय देना एक मानदंड है। हमारे राज्य की परपंरा है कि सबको न्याय मिले।”

शिवसेना नेता संजय राउत ने इससे पहले अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले की जाँच सीबीआई को स्थानांतरित किए जाने को ‘गैरकानूनी’ करार दिया था। उन्होंने यह भी कहा कि राजपूत के परिवार समेत सभी लोगों को कुछ समय चुप रहना चाहिए और मुंबई पुलिस को अभिनेता की मौत के मामले की अपनी जाँच पूरी करने देनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि नीतीश सरकार ने केस की जो सीबीआई जाँच की सिफारिश की थी वो सही थी। महाराष्ट्र सरकार को अब जांच में सहयोग करना होगा। मुंबई पुलिस को इस मामले के सारे सबूत सीबीआई को सौंपने होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी आदेश दिया है कि बिहार सरकार को इस मामले में जाँच का पूरा अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि पटना में जो एफआईआर दर्ज की गई है वो कानून सम्मत है।