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आरोग्य सेतु ऐप प्राइवेसी के लिए ख़तरा, लोगों की जासूसी करता है: राहुल गाँधी के आरोप का पात्रा ने दिया जवाब

जहाँ एक तरफ केंद्र सरकार ने जन-जन को जागरूक करने, उन तक पहुँचने और कोरोना वायरस के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए ‘आरोग्य सेतु ऐप’ जारी किया है, राहुल गाँधी और कार्ति चिदंबरम सहित अन्य नेताओं को ये रास नहीं आ रहा है। राहुल गाँधी ने तो यहाँ तक कह डाला कि ये एक जटिल सर्विलांस सिस्टम है, जो प्राइवेसी का हनन करता है, नागरिकों की जासूसी करता है। उन्होंने दावा किया कि ये संस्थागत निरीक्षण के अभाव में डेटा प्राइवेट कंपनियों तक जा रही है।

बकौल पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष, ‘आरोग्य सेतु ऐप’ से लोगों के डेटा और प्राइवेसी को लेकर चिंताएँ खड़ी हो गई हैं। उन्होंने माना कि तकनीक का इस्तेमाल करके समस्याओं को सुलझाया जा सकता है लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि सरकार इसका फायदा उठा कर लोगों की अनुमति लिए बिना ही उन्हें ट्रैक करने लगे, उनकी जासूसी करने लगे। हालाँकि, अपने आरोपों को साबित करने के लिए राहुल ने कोई सबूत नहीं दिए। इसी तरह का हंगामा आधार को लेकर किया गया था।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने राहुल गाँधी के आरोपों का जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी ने एक बार फिर से ‘आरोग्य सेतु ऐप’ की आलोचना की है। उन्होंने बताया कि सरकार न जाने कितनी बार ये स्पष्ट कर चुकी है कि इस एप्लीकेशन का सर्विलेंस से कोई लेना-देना नहीं है और ये एक नागरिक के लिए उसके पर्सनल बॉडीगार्ड का काम करता है। उन्होंने कहा कि इस तकनीक के इस्तेमाल से भारत कोरोना से निपटने में सक्षम होगा।

संबित पात्रा ने कहा कि सब कुछ जानते-समझते हुए भी कॉन्ग्रेस पार्टी सभी प्रकार के अफवाह और फेक न्यूज़ फैला रही है क्योंकि आपदा के वक़्त भी अपनी राजनीति करना कॉन्ग्रेस की पुरानी आदत है। बता दें कि सभी पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर एम्प्लाइज के लिए इस ऐप को अनिवार्य कर दिया गया है। कॉन्ग्रेस नेताओं ने राहुल गाँधी का समर्थन करते हुए आरोग्य सेतु को कोर्ट में चैलेन्ज करने की भी बात कही।

बता दें कि जल्द ही सरकार देश के करीब 90 करोड़ लोगों तक पहुँचने वाली है और सिर्फ स्मार्टफोन्स पर ही नहीं, बल्कि बटन वाले फीचर फोन्स तक भी इस ऐप को पहुँचाने की तैयारी की जा रही है। ये ऐप कोरोना के ख़िलाफ़ लड़ाई में सरकारी दिशानिर्देशों और मेडिकल सलाहों को जनता तक पहुँचाने का सबसे बड़ा माध्यम साबित हो रहा है। लोगों को सभी भाषाओं में कॉल कर के जानकारी दी जाएगी।

बता दें कि आरोग्य सेतु ऐप को मात्र 13 दिन में 50 मिलियन लोगों ने डॉउनलोड कर एक नया रिकॉर्ड कायम किया था। भारत सरकार द्वारा लॉन्च किए गए इस ऐप को डाउनलोड करने की सलाह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने संबोधन में दी थी।

पश्चिम बंगाल: कम और घटिया राशन दे रहा था डीलर हलीम शेख, लोगों ने घर घेरा, ममता बनर्जी के खिलाफ लगे नारे

पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में चल रही तृणमूल कॉन्ग्रेस सरकार कोरोना वायरस से निपटने में असफल रही है। मुर्शिदाबाद में ख़राब राशन मिलने के बाद लोगों ने हंगामा किया और सरकार के ख़िलाफ़ नारेबाजी करने लगे। वायरल हुए वीडियो में लोग मारामारी करते हुए और कुर्सी उठापटक करते दिख रहे हैं। लोगों का कहना है कि पीडीएस प्रणाली के तहत उन्हें काफ़ी ख़राब गुणवत्ता वाला राशन दिया जा रहा है।

लोगों का ये भी कहना था कि ममता के पश्चिम बंगाल में न सिर्फ़ घटिया राशन दिया जाता है बल्कि काफ़ी कम मात्रा में भी दिया जाता है। लोगों ने पुलिस के सामने ही तोड़फोड़ मचाई। बाद में पुलिस ने किसी तरह मामले को काबू किया। सालार क्षेत्र में हुए इस हंगामे के दौरान सैकड़ों लोगों ने एक राशन डीलर के घर को घेर लिया। उनकी माँग थी कि सरकार राशन प्रणाली को दुरुस्त करे। भीड़ ने राशन डीलर हलीम शेख के घर की कई चीजें तोड़ डालीं।

विरोध प्रदर्शन के दौरान भारी पत्थरबाजी भी हुई। आगजनी भी की गई। जनता का आरोप था कि शेख राशन वितरण में काफ़ी गड़बड़ियाँ करता है और जितना मिलना चाहिए, उसका आधा राशन ही देता है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने घोषणा की थी कि सभी कार्डधारियों को पाँच-पाँच किलो राशन दिया जाएगा। राज्य के कई हिस्सों से राशन वितरण में गड़बड़ियों की ख़बर आई है। खाद्य मंत्री ज्योतिप्रिय मलिक ने दावा किया है कि वो कड़ी नज़र रख रही हैं।

उन्होंने कहा कि कोई भी राशन डीलर गड़बड़ियों में लिप्त पाया गया तो उसके ख़िलाफ़ न सिर्फ़ कड़ी कार्रवाई की जाएगी बल्कि उसे सजा भी मिलेगी और साथ ही लाइसेंस कैंसल कर दिया जाएगा। अब तक अनियमितताओं के मामले में पूरे राज्य में 283 राशन डीलरों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जा चुकी है। कई मामलों में लाइसेंस रद्द किए गए हैं। पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों में इस कारण तनाव व्याप्त है।

इससे पहले शुक्रवार (अप्रैल 29, 2020) को काकद्वीप के नारायणपुर, बीरभूम के लाभपुर और मुर्शिदाबाद के झलांगी से सामने आई थी। मंत्री मलिक का कहना है कि भाजपा और कॉन्ग्रेस हिंसा भड़का रही है जबकि उनकी पार्टी इस मामले में राजनीति नहीं कर रही है। उन्होंने बताया कि राज्य में 21,000 डीलर और 9.96 करोड़ लोग डायरेक्ट राशन योजना से लाभान्वित हुए हैं। भाजपा नेताओं का आरोप है कि राशन चोरी की जा रही है।

नदिया हबीबपुर में एक ट्रक द्वारा राशन समाग्री को चुरा कर कहीं ले जाने की बात सामने आई है। चावल और अन्य राशन से भरा वो ट्रक स्थानीय डीलर के पास आया था, जिसे कृष्णा राइस मिल भेजा जा रहा है। ग्रामीणों को इसका पता लग गया और उन्होंने इसे बीच में रोक कर ही विरोध प्रदर्शन किया। शुक्रवार की रात उस राइस मिल के सामने विरोध प्रदर्शन हुआ। तृणमूल कॉन्ग्रेस नेताओं ने इस पर कमेंट करने से इनकार किया है।

इससे पहले एक व्यक्ति ने बंगाल के स्वास्थ्य सुविधाओं की पोल खोली थी। तृणमूल कॉन्ग्रेस सरकार पर आरोप लग रहे हैं कि उसने कोरोना वायरस के मरीजों से जुड़े आँकड़े में छेड़छाड़ किया है और टेस्टिंग में भी कमी कर दी है। भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय ने आरोप लगाया था कि तृणमूल कॉन्ग्रेस सरकार राज्य में कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ लड़ाई को कमजोर कर रही है। उन्होंने सीएम ममता से आग्रह किया था कि मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति छोड़ कर अब पश्चिम बंगाल को बचाने की ओर ध्यान देना चाहिए।

ED ने महाराष्ट्र के डिप्टी CM अजित पवार खिलाफ दर्ज किया मामला: सिंचाई घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच शुरू

महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री (डिप्टी CM) व NCP नेता अजित पवार की मुश्किलें सिंचाई घोटाले को लेकर एक बार फिर बढ़ गई हैं। इस बार, ED ने नागपुर में VIDC (विदर्भ सिंचाई विकास निगम) से संबंधित सिंचाई घोटाले में एक एन्फोर्समेंट केस इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट दर्ज की है। साथ ही संदिग्ध अनियमितताओं को लेकर मनी-लॉन्ड्रिंग की जाँच शुरू कर दी है। ये जाँच प्रवर्तन निदेशालय (ED) कर रही है।

ख़बर आई थी कि एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार के भतीजे अजित पवार को सिंचाई घोटाले में क्लीनचिट मिल गई है। यह घोटाला अजित के महाराष्ट्र के जल संसाधन मंत्री रहते हुआ था। 27 नवंबर को कहा गया था कि एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने बॉम्बे हाई कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर अजित पर लगे सारे आरोप वापस ले लिए हैं। हलफनामा दाखिल होने वाली ख़बर से एक दिन पहले ही भाजपा के देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था। अजित पवार के उप मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर वापस एनसीपी में लौट जाने पर फडणवीस ने अपना पद छोड़ा था।

गौरतलब है कि साल 1999 से 2009 तक जल संसाधन मंत्री रहे अजित पवार के ख़िलाफ़ ये हलफनामा कई आरोपों से जुड़ा हुआ है। इसमें विदर्भ में शुरू हुई 32 सिंचाई परियोजनाओं का मामला भी शामिल है, जिनकी लागत 3 महीनों के भीतर 17,700 करोड़ रुपए तक बढ़ गई थी। साथ ही मनी लॉन्ड्रिंग का मामला भी है।

आपको बता दे कॉन्ग्रेस और एनसीपी गठबंधन में अजीत पवार 1999-2009 उपमुख्यमंत्री रहे थे। इसी दौरान प्रमुख विभागों के बीच जल संसाधन विकास विभाग भी संभाला था। जिसमें विदर्भ सिंचाई विकास निगम के अध्यक्ष पद पर थे। बाद में इस पर कथित रूप से 35,000 करोड़ रुपये की अनियमितता बरतने का आरोप लगा। सूत्रों के अनुसार अब ED की नागपुर यूनिट ने भंडारा जिले में गोसीखुर्द परियोजना की जाँच शुरू कर दी है। इसकी जाँच एसीबी द्वारा दर्ज मामलों पर आधारित है।

भाजपा नेता किरीट सोमैया ने इस पर कहा कि महाराष्ट्र सिंचाई घोटाले पर ED द्वारा आज (2 मई 2020) पंजीकृत 2 ECIR / शिकायतों का मैं स्वागत करता हूँ। मुझे यकीन है कि वे भ्रष्ट आचरण, मनी लॉन्ड्रिंग आदि पर गहराई से जाएँगे और वास्तविक लाभार्थियों को भी ढूँढेंगे।

जमात के कारण गुजरात में बढ़ी कोरोना मरीजों की संख्या, अहमदाबाद में हमने लगाई 750 टीमें: CM रूपाणी

गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणि ने राज्य में कोरोना वायरस के प्रसार के लिए तबलीगी जमात को जिम्मेदार ठहराया है। बता दें कि सबसे ज्यादा कोरोना मरीजों के मामले में गुजरात दूसरे नंबर पर है। वहाँ 70,000 से भी अधिक लोगों की टेस्टिंग हुई है और 4721 कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। रूपाणी ने कहा कि घर-घर जाकर टेस्ट करने की प्रकिया अपनाई जा रही है और सर्विलांस किया जा रहा है।

रूपाणी ने बताया कि कुल मामलों में से 70% अकेले अहमदाबाद के हैं। रूपाणी ने बताया कि गुजरात में रोजाना 3000 से ज्यादा टेस्टिंग की जा रही है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से जमातियों ने कोरोना के मामलों को छिपाया, उससे कई मामले बढ़े। अहमदाबाद में जमात के सदस्यों ने ट्रेवल हिस्ट्री छिपाते हुए लोगों से मिले और बिना रोकटोक घूमते रहे, जिससे मरीजों की संख्या बढ़ी। रूपाणी ने बताया कि अहमदाबाद में जमातियों के कारण मामले इतने बढ़ गए।

‘आजतक’ के अंजना ओम कश्यप से बात करते हुए रूपाणी ने बताया कि सरकार ने बिना समय जाया किए अहमदाबाद में 750 टीमों को लगाया और सर्दी-खाँसी और बुखार से पीड़ित लोगों की टेस्टिंग करके उन्हें क्वारंटाइन किया, नहीं तो स्थिति और ख़राब हो जाती। उन्होंने जानकारी दी कि अहमदाबाद डेथ रेट भी बढ़ गया है। उन्होंने बताया कि मृतकों में वैसे लोग हैं जो बुजुर्ग हैं और कैंसर से लेकर बीपी और शुगर जैसी बीमारियों से जूझ रहे हैं।

अहमदाबाद के म्युनिसिपल कमिश्नर ने 31 मई तक 8 लाख मामले आने की बात कही थी। सीएम रूपाणी ने कहा कि ऐसी स्थिति नहीं आएगी। सूरत में मजदूरों के पलायन को लेकर उन्होंने कहा कि पूरा गुजरात ही इंडस्ट्री वाला राज्य है और कई प्रदेशों के लोग यहाँ रहते हैं। उन्होंने डायमंड और टेक्सटाइल इंडस्ट्री के कारण सूरत को लघु भारत बताते हुए कहा कि यहाँ कई प्रदेशों के लोग वास करते हैं और वो सभी सरकार का सहयोग कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री विजय रूपाणी का इंटरव्यू (साभार: आजतक)

रूपाणी ने बताया कि उन्होंने भी भारत सरकार से मजदूरों को गृह प्रदेश भेजे जाने की बात कही थी, जिसके लिए ट्रेनें जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सभी श्रमिक वापस जाएँ और सब ठीक होते ही फिर वापस आएँ, ऐसी वो कामना करते हैं। उन्होंने बताया कि कई उद्योग-धंधे धीरे-धीरे चालू हो रहे हैं और काम फिर से चालू हो रहा है। अहमदाबाद के कॉन्ग्रेस विधायक इमरान को कोरोना होने की बात पर उन्होंने कहा कि उन्हें टेस्ट रिपोर्ट आए बिना घर से नहीं निकलना चाहिए था लेकिन 20 फुट की दूरी से ही बात हुई थी।

इसके बाद रूपाणी ने भी सारे मेडिकल रिपोर्ट्स आने तक ख़ुद को क्वारंटाइन कर के रखा। उन्होंने 10 दिनों के लिए सारे विजिटर्स को मना कर दिया। इमरान के इलाज के लिए भी राज्य सरकार ने सारी व्यवस्था की। वो फ़िलहाल ठीक हो गए हैं। उन्होंने बताया कि गुजरात में लॉकडाउन सफल रहा है और सीसीटीवी कैमरे के कारण हर किसी पर सरकार की नज़र थी। उन्होंने बताया कि गुजरात में 10 दिनों में वेंटिलेटर्स और मास्क बनाए गए।

पालघर साधु लिंचिंग का 55 वर्षीय आरोपित निकला कोरोना पॉजिटिव, 23 पुलिसकर्मी सहित 43 अन्य किए गए क्वारंटाइन

पालघर में हुए दो नागा साधु और उनके ड्राइवर के लिंचिंग के आरोप में गिरफ्तार किए गए 110 आरोपितों में से एक 55 वर्षीय आरोपित कोरोना पॉजिटिव पाया गया है। इसकी जानकारी मिलते ही पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया है। जिसके बाद 23 पुलिसकर्मियों के साथ 43 अन्य लोगों को तत्काल क्वारंटाइन कर दिया गया है।

मामले की पुष्टि करते हुए पालघर ग्रामीण अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. दिनकर गावित ने बताया कि पालघर लिंचिंग केस में एक 55 वर्षीय आरोपित को कोरोना पॉजिटिव पाया गया है, वह वाड़ा पुलिस थाने में कस्टडी में था। साथ ही आरोपित के संपर्क में आए 43 लोगों को क्वारंटाइन किया जा रहा है। इनमें 23 पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। सभी के सैंपल लेकर उन्हें जाँच के लिए भेजा गया है।

डॉ. गावित ने जानकारी देते हुए कहा कि 28 अप्रैल की सुबह आरोपित के गले का स्वाब टेस्ट लिया गया था, जिसमें वह नेगेटिव पाया गया था, लेकिन शनिवार सुबह एक बार फिर टेस्ट किया गया तो इसमें आरोपित कोरोना पॉजिटिव पाया गया। इसके बाद उसे आरएच में भर्ती कराया गया था, मगर उच्च अधिकारियों से अनुमति लेने के बाद आरोपित मरीज को मुंबई के जेजे अस्पताल के जेल वार्ड में स्थानांतरित किया गया है।

दरअसल, आरोपित दहानु में दिव्य-वाकीपाड़ा का रहने वाला है, जिसे 17 अप्रैल को कासा पुलिस ने गिरफ्तार किया था और तब से वह साधुओं की हत्या के मामले में 20 अन्य आरोपियों के साथ वाडा पुलिस लॉकअप में बंद था। वहीं मामले में गिरफ्तार शेष आरोपितों को पुलिस ने वाडा, दहानू, कासा, विक्रमगढ़, तलासरी और अन्य पुलिस थानों के लॉकअप में रखा है ताकि कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण भीड़भाड़ से बचा जा सके।

महाराष्ट्र में लगातार बढ़ते कोरोना मरीजों की संख्या के बीच आई इस खबर ने पुलिस प्रशासन के साथ प्रदेश सरकार को भी चिंता में डाल दिया है। आपको बता दें कि स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र में कोरोना से मरने वालों की संख्या 485 है, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या 11506 हो गई है। राहत की बात यह है कि संक्रमित लोगों में से 1879 मरीज ठीक होकर वापस अपने घरों को जा चुके हैं।

गौरतलब है कि 16 अप्रैल 2020 को जूना अखाड़े से जुड़े दो साधु 70 वर्षीय कल्पवृक्ष गिरि महाराज और 35 वर्षीय सुशील गिरि महाराज अपने ड्राइवर 30 वर्षीय नीलेश तेलगेडे के साथ एक अन्य साधु के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए मुंबई से गुजरात जा रहे थे। इसी बीच पालघर जिले के गढ़चिंचले गाँव के 200 से अधिक लोगों की भीड़ ने इकठ्ठा होकर साधुओं पर हमला किर दिया था। इस दौरान भीड़ ने दोनों साधुओं के साथ उनके एक ड्राइवर की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी।

इस मामले में पुलिस ने लिंचिंग की धाराओं में मुकदमा दर्ज करते हुए 110 लोगों को गिरफ्तार किया था। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए महाराष्ट्र पुलिस को नोटिस जारी किया है साथ ही चार सप्ताह में संबंधित रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए हैं। जानकारी के मुताबिक घटनास्थल वाला गाँव और इलाका आदिवासी बहुल है और ग्रामीणों में ज़्यादातर ईसाई समुदाय के हैं।

बंगाल: कोरोना+ को भर्ती करने से अस्पतालों का इनकार, मौत के बाद परिजन ने खोली ममता बनर्जी सरकार की पोल

पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार के असंवेदनशील रवैए की पोल खोलते हुए समीर अख्तर नाम के व्यक्ति ने अपने एक परिजन के साथ हुए बुरे अनुभव का वाकया शेयर किया है। समीर ने फेसबुक पर बताया कि उनके साले डॉक्टर एसएस मुखर्जी की कोरोना वायरस के कारण मृत्यु हो गई, क्योंकि उन्हें इलाज की कोई व्यवस्था नहीं मिल पाई। उन्होंने कई अस्पतालों के चक्कर काटे लेकिन सभी ने उन्हें एडमिट करने से इनकार कर दिया।

समीर और उनके परिजनों ने मरीज को अपोलो, एएमआरआई के दोनों सेंटरों, दसुन, रूबी, पीयरलेस और कोलकाता हॉस्पिटल में भर्ती कराने का प्रयास किया लेकिन कोई भी उन्हें एडमिट करने को राजी नहीं हुआ।मेडिकल इक्विपमेंट्स ट्रेड में सक्रिय होने के कारण समीर को लगभग सारे अस्पतालों के बारे में जानकारी थी। उन्होंने हर जगह अपने साले को एडमिट कराने का प्रयास किया।

अपोलो और साल्ट लेक में स्थित एएमआरआई में तो समीर ने ही कई मेडिकल इक्विपमेंट्स इस्टॉल किए थे, जो काइजेन कम्पनी से आए थे। समीर ने जानकारी दी कि अस्पतालों ने मरीज को एडमिट न करने के पीछे पश्चिम बंगाल सरकार के आदेश को कारण बताया। सभी अस्पतालों ने एडमिट न करने के पीछे कई बहाने बनाए। बाद में किसी तरह उन्हें मंगलवार (अप्रैल 28, 2020) को एमआर बांगुर में दाखिल कराया गया, जहाँ उन्हें डॉक्टर एसआर पॉल के अंतर्गत रखा गया था।

लेकिन, डॉक्टर ने मरीज का इलाज करना तो दूर, उन्हें देखने तक से इनकार कर दिया। परिजन लगातार निवेदन करते रहे लेकिन डॉक्टर के कान में जूँ तक न रेंगी। बांगुर क्वारंटाइन हॉल में उन्हें शिफ्ट कर दिया गया, जहाँ किसी भी प्रकार की मेडिकल सुविधा नहीं थीं। समीर बताते हैं कि एक ही हॉल में 40 बिस्तर लगा दिए गए थे। समीर ने बताया कि गर्मी होने के बावजूद हॉल में एक पंखा तक नहीं लगाया गया था। दवाओं तक की व्यवस्था नहीं की गई थी।

समीर ने साझा किया अपना अनुभव

समीर ने अपना अनुभव शेयर करते हुए बताया कि जब एक मरीज की तबीयत ख़राब हुई तो चिल्लाने के बावजूद एक डॉक्टर तक को नहीं भेजा गया। उन्होंने लिखा कि यही पश्चिम बंगाल है और इसी दुर्दशा में यहाँ के लोगों को रहना पड़ रहा है। मरीज की मौत के बाद तुरंत मृत्यु प्रमाण-पत्र बना कर दे दिया गया और मौत की वजह ‘कार्डियक अरेस्ट’ को बताया गया। अंतिम संस्कार के लिए 5 गुना ज्यादा रुपए लगे सो अलग।

समीर ने अफ़सोस जताते हुए कहा कि वे ऐसे राज्य में रह रहे हैं, जहाँ इस तरह की गतिविधियाँ चल रही हैं। उन्होंने राज्य के अन्य नागरिकों को अपने अनुभव से अवगत कराते हुए उन्हें सजग रहने की सलाह दी। उनके फेसबुक पोस्ट सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर शेयर किए गए हैं। लोग मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सलाह दे रहे हैं कि वो लोगों की ज़िंदगी को अपनी राजनीति से ऊपर रखें।

तृणमूल कॉन्ग्रेस सरकार पर आरोप लग रहे हैं कि उसने कोरोना वायरस के मरीजों से जुड़े आँकड़े में छेड़छाड़ किया है और टेस्टिंग में भी कमी कर दी है। भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय ने आरोप लगाया था कि तृणमूल कॉन्ग्रेस सरकार राज्य में कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ लड़ाई को कमजोर कर रही है। उन्होंने सीएम ममता से आग्रह किया था कि मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति छोड़ कर अब पश्चिम बंगाल को बचाने की ओर ध्यान देना चाहिए।

दिल्ली: गरीबों को AAP विधायक ने टरकाया, चुनाव हारने वाले तजिंदर बग्गा ने राशन का किया इंतजाम

भगवती जोशी और रेखा दिल्ली के हरि नगर विधानसभा क्षेत्र में रहती है। दोनों पर पॉंच लोगों के परिवार की पेट भरने की जिम्मेदारी है। लेकिन ये गरीब श्रमिक लॉकडाउन में राशन का इंतजाम कहॉं से करें? सहारा सरकार का ही बचता है। सरकारी सिस्टम ने राशन के लिए दोनों को ई-कूपन दे दिया। भगवती से 19 तो रेखा से 21 अप्रैल को दिन के 11 से 2 बजे के बीच आकर डीएमएस कॉलोनी से राशन ले जाने को भी कहा। लेकिन राशन नहीं दिया।

हद तो तब हो गई जब इनका दर्द स्थानीय विधायक राजकुमारी ढिल्लों तक पहुॅंचा और उन्होंने टके सा जवाब दिया- राशन है ही नहीं तो कहॉं से दें। ढिल्लों सत्ताधारी आम आदमी पार्टी की विधायक हैं। ऐसे गाढ़े वक्त में भगवती और रेखा के परिवार के काम आए तजिंदर बग्गा। उन्होंने दोनों परिवार तक राशन पहुॅंचाया।

दिलचस्प यह है कि कुछ महीने पहले हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी नेता बग्गा को हराकर ही ढिल्लों विधायक बनी थीं। पूरा वाकया सोशल मीडिया पर सामाजिक कार्यकर्ता अंकित गुप्ता ने साझा किया है। इस घटना ने लॉकडाउन के दौरान लाखों गरीबों को भोजन और राशन देने के केजरीवाल सरकार के दावों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

अंकित गुप्ता ने विधायक से मदद के लिए गुहार लगाई। उन्हें बताया कि इन दो परिवारों को राशन नहीं दिया गया है। दोनों के डिटेल्स भी उन्होंने विधायक ढिल्लों के व्हाट्सप्प पर भेजा। मदद के आश्वासन की बजाए हरि नगर की जनप्रतिनिधि ने बताया कि अभी डीएमएस स्कूल में राशन ही नहीं आया है। उन्होंने साफ़ कह दिया कि जब राशन है ही नहीं तो कहाँ से दे दें?

विधायक ढिल्लों ने गरीबों की मदद करने से किया इनकार

अंकित गुप्ता ने इस बात को सोशल मीडिया पर उठाया और कहा कि ऐसे ही लोग वोट पाकर सत्ता का दुरुपयोग करते हैं। उन्होंने कहा कि एक जीती हुई उम्मीदवार अपने क्षेत्र के लोगों की मदद नहीं कर पा रही, जबकि हारे हुए उम्मीदवार ने देश भर में हजारों तक सहायता पहुँचाई है।

तजिंदर बग्गा ने उपलब्ध कराई मदद

दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता तजिंदर बग्गा को जैसे ही उनलोगों की समस्याओं के बारे में पता चला, उन्होंने तुरंत उन ज़रूरतमंद परिवारों के लिए राशन का इंतजाम कराया। ट्विटर पर उन्होंने सूचना देते हुए बताया कि उक्त परिवारों को राशन मुहैया करा दिया गया है। इधर राजकुमारी ढिल्लों ट्विटर पर स्कूलों में निःशुल्क भोजन दिए जाने की बात कह रही हैं, लेकिन उनके द्वारा शेयर किए गए किसी भी फोटो में ग़रीब खाते हुए नहीं दिख रहे हैं। सिर्फ़ स्कूल में बोर्ड लगा हुआ है। नीचे तस्वीर में आप देख सकते हैं कि तजिंदर बग्गा ने उक्त परिवारों तक राशन डिलीवर कराया:

तजिंदर बग्गा ने ज़रूरतमंद को मुहैया कराया राशन
तजिंदर बग्गा ने अपनी तरफ से भिजवाया राशन, विधायक ने किया निराश

तजिंदर बग्गा ने अपनी ‘दीदी’ स्मृति ईरानी की राह पर चलते हुए हार कर भी अपने विधानसभा क्षेत्र के लिए की गई घोषणाओं को पूरा करने का निश्चय किया और आज जब कोरोना वायरस आपदा के बीच लॉकडाउन चल रहा है, वो लगातार सोशल मीडिया के माध्यम से गरीबों की समस्याओं को सुन कर उनकी मदद करने में लगे हुए हैं। न सिर्फ़ दिल्ली बल्कि वो देश के अन्य कोने में भी लोगों को सहायता पहुँचा रहे हैं।

इससे पहले शायर राहत इंदौरी ने कुछ पीड़ितों के बारे में बताया था कि उनका परिवार काफ़ी परेशान है। परिवार में बच्चे भी हैं और राशन उपलब्ध नहीं है। उन्होंने राशन उपलब्ध कराने की गुहार लगाई थी। तजिंदर बग्गा ने जैसे ही इस ट्वीट को देखा, वो हरकत में आ गए। उन्होंने इंदौर के विधायक रमेश मेंदोला को टैग करते हुए राहत इंदौरी की मदद करने का निवेदन किया। इसके बाद परिवारों तक मदद पहुँची थी। बग्गा इसी तरह लोगों की मदद कर रहे हैं।

अब रिपब्लिक टीवी के CFO से पूछताछ कर रही मुंबई पुलिस, अर्नब ने पालघर पर सोनिया की चुप्पी को लेकर पूछे थे सवाल

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी के खिलाफ टिप्पणी करने को लेकर रिपब्लिक टीवी के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी से 12 घंटे से अधिक पूछताछ के बाद अब मुंबई पुलिस मीडिया कंपनी के मुख्य वित्तीय अधिकारी से पूछताछ कर रही है। मुंबई पुलिस ने अर्नब गोस्वामी के खिलाफ दर्ज मामले में पूछताछ के लिए आज (मई 2, 2020) रिपब्लिक टीवी के मुख्य वित्तीय अधिकारी एस सुंदरम को बुलाया है।

यह पूछताछ आज सुबह तकरीबन 10.30 बजे शुरू हुई और इस रिपोर्ट लिखने के समय तक जारी थी। यह मुंबई पुलिस द्वारा रिपब्लिक टीवी के अधिकारी से एक और लंबी पूछताछ हो सकती है। 

बता दें कि 27 अप्रैल को, मुंबई पुलिस ने अर्नब गोस्वामी से मुंबई के एनएम जोशी मार्ग पुलिस स्टेशन में 12 घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की थी। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने रिपब्लिक टीवी एडिटर इन चीफ को तीन सप्ताह की अंतरिम सुरक्षा भी दी थी। साथ ही कहा था कि इस दौरान वे जमानत भी ले सकते हैं।

दरअसल पिछले दिनों महाराष्ट्र के पालघर में दो साधुओं सहित तीन लोगों की भीड़ ने निर्मम तरीके से हत्या कर दी थी। लेकिन कॉन्ग्रेस चुप रही। राज्य सरकार में वह शिवसेना के साथ सत्ता में साझीदार है। इस मॉब लिंंचिंग पर चुप्पी को लेकर कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गॉंधी से ‘रिपब्लिक टीवी’ के संपादक अर्नब गोस्वामी ने तीखे सवाल पूछे थे।

मॉब लिंचिंग पर सोनिया गॉंधी की चुप्पी को लेकर अर्नब ने कहा था, “सोनिया गाँधी तो खुश हैं। वो इटली में रिपोर्ट भेजेंगी कि देखो, जहाँ पर मैंने सरकार बनाई है, वहाँ पर हिन्दू संतों को मरवा रही हूँ। वहाँ से उन्हें वाहवाही मिलेगी। लोग कहेंगे कि वाह, सोनिया गाँधी ने अच्छा किया। इनलोगों को शर्म आनी चाहिए। क्या उन्हें लगता है कि हिन्दू चुप रहेंगे? आज प्रमोद कृष्णन को बता दिया जाना चाहिए कि क्या हिन्दू चुप रहेंगे? पूरा भारत भी यही पूछ रहा है। बोलने का समय आ गया है।”

इसके बाद कॉन्ग्रेस ने अर्नब गोस्वामी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। उनके खिलाफ कई राज्यों में केस दर्ज करवाया गया, जिसमें से अधिकतर राज्य कॉन्ग्रेस शासित हैं। कॉन्ग्रेसियों ने अर्नब गाेस्वामी पर आराेप लगाया था कि महाराष्ट्र के पालघर जिले में दाे साधुओं समेत तीन की लिचिंग मामले में उन्होंने अपने टीवी चैनल के कार्यक्रम में देश के लोगों को गुमराह किया। धर्म, नस्ल, जन्मस्थान, निवास भाषा के आधार पर नफरत फैलाने की काेशिश की है।

22-23 अप्रैल की रात एडिट कॉल निपटा कर लौटते हुए अर्नब गोस्वामी और उनकी पत्नी पर कॉन्ग्रेस के दो मोटरसाइकिल सवार गुंडों ने हमला किया था। रिपब्लिक टीवी एंकर अर्नब गोस्वामी ने खुद इस हमले की जानकारी देते हुए बताया था कि उनकी कार के आगे अपनी मोटरसाइकिल खड़ी कर दी और फिर हमला किया।

तेजस्वी सूर्या के ट्वीट पर छाती पीटते लिबरलों को क्यों खटक रहे भारत-अरब के मैत्रीपूर्ण रिश्ते

सन 2015 में किए गए सांसद तेजस्वी सूर्या के एक ट्वीट पर सऊदी अरब के शेखों और कुछ व्यावसायियों की नींद अचानक कुछ दिनों पहले खुली, जबकि तेजस्वी सूर्या के ट्ववीट के बाद के इन पाँच सालों में अरब में महिलाओं को देखने का नजरिया कितना बदला है, इसका अंदाजा अरब से जुड़ी खबरों को पढ़ने से ही मिलता है। फिर भी आज जो हालात हैं, वह संतोषजनक नहीं हैं।

तेजस्वी सूर्या ने अपने पाँच साल पुराने ट्वीट पर उपजे विवाद से कुछ दिनों पहले एक कॉमेडियन यूट्यूबर कॉमरेड कुणाल कामरा को इंटरव्यू दिया था। हो सकता है कि यह ट्वीट उस कॉमरेड यूट्यूबर की टीम को अपनी रिसर्च में मिली हो। उसके बाद षड्यंत्र के अन्तर्गत पूरी योजना के साथ इस ट्वीट को भारत से सऊदी अरब तक प्रचारित किया गया। कुणाल ने तेजस्वी का जो इंटरव्यू अपने यूट्यूब पर जारी किया है, वह भी इंटरव्यू नहीं बल्कि तेजस्वी को अपमानित करने जैसा एपिसोड है।

तेजस्वी के प्रशंसक कुणाल के शो पर उनके जाने से निराश हुए। इसी कुणाल कामरा के साथ कन्हैया कुमार, कविता कृष्णन अरविंद केजरीवाल, रवीश कुमार का इंटरव्यू आप यूट्यूब पर देख सकते हैं, जहाँ कुणाल कॉन्ग्रेसी आईटी सेल के कमिटेड कॉमरेड की भूमिका में नजर आते हैं।

अजीत अंजुम, विनोद दुआ, अभिसार शर्मा, आशुतोष गुप्ता, आरफा खानम शेरवानी, अभिनंदन शेखरी, सिद्धार्थ वरदराजन, कुणाल कामरा, आकाश बनर्जी, ध्रुव राठी, वरुण ग्रोवर जैसे तमाम स्टैन्डअप कॉमेडिन्स को नरेन्द्र मोदी और भाजपा से उन सबकी नफरत आपस में जोड़ती है। इसी नफरत का परिणाम था कि पिछले एक सप्ताह में एक बड़ा गिरोह भारत और यूएई के रिश्ते खराब करने के लिए अपने देश में सक्रिय हुआ।

इस काम में बहुत सारा पैसा भी इन्वेस्ट हुआ है। सारे मोदी विरोधी यूट्यूबर और सोशल मीडिया एक्टिविस्ट सक्रिय हुए। इसके पीछे की वजह साफ थी कि ये पूरा समूह अरब देशों के साथ भारत के प्रधानमंत्री के बेहतर रिश्ते से परेशान हैं। भारत और यूएई के ये मजबूत संबंध भारतीय संसद के अंदर विपक्ष में बैठी कई राजनीतिक पार्टियों की आँख की किड़किड़ी भी है, क्योंकि गैर भाजपाई राजनीतिक दल मजहब विशेष को अपना जरखरीद गुलाम ही मानते हैं। वे मेरा तेरा रिश्ता क्या- ला इलाहा इल्लल्लाह के कॉन्सेप्ट में भी यकीन रखते हैं।

सऊदी अरब ने प्रधानमंत्री मोदी को अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान जायेद मेडल से सम्मानित किया। भला यह बात मोदी को मजहब विशेष विरोधी प्रचारित करने वालों को कैसे हजम हो सकती हैं?

यही वजह थी कि मोदी विरोधी गिरोह ने पीएम मोदी की कमजोर कड़ी तलाशनी शुरू कर दी और जब वहाँ असफल हो गए तो उन्होंने बेंगलुरु दक्षिण से बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या को निशाना बनाया। वह भी पाँच साल पुराने ट्ववीट को तलाश कर। सूर्या के कथित महिला विरोधी ट्वीट के खिलाफ सऊदी अरब में महिलाओं को सामने आना चाहिए था। यदि सूर्या का ट्ववीट किसी के खिलाफ था तो वह महिलाओं के। लेकिन दिलचस्प बात यह थी कि तेजस्वी के ट्वीट पर अरब की महिलाओं ने कुछ नहीं कहा। महिलाओं को कहना चाहिए था, लेकिन उन्होंने नहीं कहा। महिलाओं की तरफ से ट्ववीट पर सारी जंग सऊदी अरब के कुछ शेख और अधिकतर फेक पाकिस्तानी और मोदी विरोधी भारतीय ट्विटर हैंडल लड़ रहे थे।

इस पूरे विवाद की वजह से तेजस्वी सूर्या को अपना ट्वीट डिलीट करना पड़ा। अब कहने की आजादी का ढोंग दशकों से रचने वाले इस तरह दबाव बनाकर क्या कोई बौद्धिक विमर्श खड़ा कर सकते हैं? यदि तेजस्वी ने अरब की महिलाओं के लिए 2015 में कोई ट्वीट किया तो इसके पीछे की वजह जानने का हमें प्रयास करना चाहिए था। सोशल मीडिया पर तेजस्वी की लिंचिंग करने की जगह उनके बयान के संबंध में बातचीत भी की जा सकती थी।

तेजस्वी का पक्ष जाने बिना उन पर हमला करना क्या सही था? ऐसे देश में जहाँ अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर समय-समय पर हमने कट्टरपंथी और कम्युनिस्टों को कंधे से कंधा मिलाकर मोमबत्ती जलाते देखा है। सोशल मीडिया पर कैम्पेन चलाते देखा है। आज तेजस्वी सूर्या प्रसंग में यही वामपंथी और कट्टरपंथी जमात एक हो गए हैं और ऐसी प्रतिक्रिया कर रहे हैं जैसे वे भारतीय ना होकर सऊदी अरब के एजेन्ट हों। वामपंथी और कट्टरपंथी दोनों तरह के लोगों को यह समझना होगा कि 2015 में जब तेजस्वी सूर्या ने ट्वीट किया था, उन दिनों अरब में महिलाओं की हालत बहुत अच्छी नहीं थी। अब पाँच साल के बाद हालात बदली है। लेकिन जो हालात हैं, उसे अब भी अच्छा नहीं कहा जा सकता।

इस बहस को इसलिए बढ़ाने में मेरी रूचि नहीं है क्योंकि यह दो मुल्कों का मामला है। कोई भी भारतीय चाहेगा कि सभी देशों के साथ हमारे रिश्ते अच्छे रहे और आने वाले समय में वह और मजबूत हो।

बावजूद इसके कुछ बातें बतानी इसलिए भी जरूरी है ताकि सनद रहे। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि सऊदी अरब में आज भी पति की इजाजत के बिना महिलाएँ बैंक अकाउंट नहीं खुलवा सकती हैं और अविवाहित महिलाएँ तो अकाउंट खुलवा ही नहीं सकतीं हैं। इसके पीछे की वजह यह बताई जाती है कि अकेली महिला के पास पैसा होगा तो वह गुनाह के रास्ते पर निकल जाएगी। भारत में महिला-पुरुष बराबरी की बात हम अक्सर करते हैं लेकिन सऊदी में महिलाएँ यदि घर से बाहर निकल रहीं हैं, तो उसके साथ किसी पुरुष रिश्तेदार का होना अनिवार्य है। अकेले निकलने पर उसे हिरासत में लिया जाता है। सऊदी में पुरुष डरते हैं कि महिला अकेली कहीं जाएगी तो उसके बदचलन होने की संभावना रहेगी।

सऊदी में महिलाओं को अपनी पसंद के पुरुष से शादी करने की आजादी नहीं है। साथ ही पति से अनबन होने, प्रताड़ित करने या किसी भी वजह से तलाक लेने की स्वतंत्रता भी नहीं है।

2006 में हुई एक बलात्कार की घटना अरब में महिलाओं की स्थिति क्या है, उसकी पूरी तस्वीर सामने रखने के लिए पर्याप्त है। घटना के वक्त पीड़िता अपनी सहेली के साथ एक कार में थी। तभी कुछ लोगों ने उन पर हमला बोल दिया और उनकी कार को दूर जंगल में ले गए। यहाँ 7 आरोपितों ने पीड़िता और उसकी सहेली से तकरीबन 14 बार गैंगरेप किया। घटना के बाद पीड़िता ने जब अदालत का दरवाजा खटखटाया तो उलटा उसे ही 90 कोड़े मारने की सजा दे दी गई और आरोपितों को कुछ समय के लिए हिरासत में भेज दिया गया।

इस पर पीड़िता के वकील ने आपत्ति जताई और फैसले के खिलाफ अदालत में याचिका दायर कर दी। दूसरी बार 2007 में जब मामले की सुनवाई हुई तो कोर्ट ने पीड़िता को मिली सजा दोगुनी कर दी और बलात्कारियों को किसी प्रकार की सजा नहीं दी। अदालत ने अब 200 कोड़े मारने की सजा दी और मीडिया को जानकारी देने के एवज में पीड़िता को 6 माह की सजा भी सुनाई।

तेजस्वी सूर्या के ट्वीट के बाद बीते पाँच सालों में अरब देशों में महिलाओं की आजादी को लेकर कई सुधार हुए। लेकिन इन सुधारों की गति बहुत धीमी है। सुधार की बात करें तो पहले महिलाओं को तलाक देने के लिए सऊदी अरब में पुरुषों को बताना जरूरी नहीं होता था। मतलब पति ने तलाक देकर दूसरा निकाह पढ़ लिया है और बीबी को इस बात की खबर भी नहीं होती थी।

पिछले साल से अरब में यह कानून बना है कि तलाक देते हुए, बीबी को तलाक दिया जा रहा है, बताना अनिवार्य होगा। जब तेजस्वी सूर्या ने टवीट किया था, उस साल तक महिलाओं को अरब में ड्राइविंग करने का अधिकार नहीं मिला था। वह सड़क पर गाड़ी नहीं चला सकती थीं। ऐसा करने पर उन्हें जेल हो सकता था। 2017 से उन्हें यह अधिकार भी मिल गया है। जिस साल तेजस्वी ने ट्वीट किया, उसी साल महिलाओं को सऊदी अरब ने मताधिकार दिया। वैसे कट्टरपंथी कभी महिलाओं को यह अधिकार देने के पक्ष में नहीं थे।

महिलाओं को ड्राइविंग का अधिकार तीन साल पहले तक नहीं था। 2011 में सऊदी अरब में कुछ अंतर्राष्ट्रीय संगठनों ने मिलकर ‘वुमेन टू ड्राइव’ कैंपेन चलाया, जिसमें महिलाओं से कहा गया कि वे कार ड्राइव करें और उसके फोटो और वीडियो इंटरनेट पर अपलोड करें। सऊदी अरब में महिलाओं के खुद स्विमिंग करने पर तो पाबंदी है ही, वे पूल में नहाते पुरुषों की ओर देख भी नहीं सकतीं हैं। शॉपिंग के दौरान कपड़ों का ट्रायल नहीं ले सकतीं, क्योंकि शरिया उन्हें अपने घर से बाहर निर्वस्त्र होने की इजाजत नहीं देता।

‘वेनिटी फेयर’ की पत्रकार मौरीन डॉड के अनुसार ऐसा कानून सिर्फ इसीलिए बनाया गया क्योंकि ट्रायल रूम में महिला नग्न है ऐसा सोचकर शॉपिंग स्टोर में मौजूद पुरुषों के लिए कंट्रोल रख पाना मुश्किल हो जाएगा। अरब पुरुषों की सुविधा के लिए महिलाएँ वहाँ ट्रायल रूम इस्तेमाल नहीं कर सकती। महिलाएँ किसी अंडर गारमेंट्स की शॉप पर काम नहीं कर सकती। वहाँ पुरुष ही मिलेंगे। चाहे अंडरगारमेन्ट महिलाओं के ही क्यों ना हों? महिलाएँ फैशन मैगजीन नहीं पढ़ सकतीं, क्योंकि उसमें छपे फोटो इस्लाम की मान्यताओं के अनुसार हलाल सर्टिफायड नहीं होते। लेकिन पुरुष उन्हें पढ़ और उसमें छपी तस्वीरों को देख सकते हैं।

महिलाओं के बार्बी डॉल रखने पर पाबंदी है। इसलिए अब बाजार में हलाल सर्टिफायड बार्बी उतार दिया गया है। बार्बी को यहूदी खिलौना बताकर उसके कपड़ों को गैर-इस्लामी करार दिया जाता है। जब मैं यह पोस्ट लिख रहा हूँ, तेजस्वी सूर्या ने अपना ट्वीट डीलीट कर दिया है, लेकिन हम सब किसी दबाव में आकर सच को सच ना कहें यह उचित नहीं है। इसी उद्देश्य से यह सब लिख रहा हूँ। यदि किसी ने कथित तौर पर कुछ आपत्तिजनक बात लिखी है तो उसे अपना पक्ष रखने का कम से कम अवसर दिया ही जाना चाहिए।

इस बात से वामपंथी होने के नाते नफरत करना क्या उचित होगा कि तेजस्वी सूर्या भारतीय जनता पार्टी से सांसद हैं और खुद को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का स्वयंसेवक कहते हैं। बहरहाल इस बात में कोई संदेह नहीं है कि सऊदी में मोहम्मद बिन सलमान जैसे शहजादे भी हैं जो महिलाओं के जीवन को बेहतर बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, उनकी आजादी के लिए लड़ रहे हैं। लेकिन इस बात से अरब देशों में महिलाओं के हालात को झुठलाया नहीं जा सकता।

कर्नाटक: कोलार में लॉकडाउन के दौरान नमाज अदा करने वाले 11 लोगों को पुलिस ने किया गिरफ्तार, मुकदमा दर्ज

कर्नाटक के कोलार की एक मस्जिद में लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन करते हुए कुछ नमाजी नमाज के लिए एकत्रित हो गए। सूचना पर पहुँची पुलिस ने मस्जिद से 11 लोगों को गिरफ्तार किया है। जानकारी के मुताबिक कर्नाटक राज्य के कोलार जिले के डोड्डापेट बाजार की एक मस्जिद में शुक्रवार को कुछ लोग लॉकडाउन के नियमों की अनदेखी करते हुए नमाज अदा करने के लिए जुट गए। इस बात की जानकारी खुफिया सूत्रों से जैसे ही पुलिस प्रशासन को हुई तो तत्काल तहसीलदार शोभिता एक पुलिस टीम के साथ मस्जिद में पहुँच गई। पुलिस की टीम को देख मस्जिद में मौजूद नमाजियों के बीच हलचल पैदा हो गई।

इस दौरान तहसीलदार शोभिता ने पहले तो लॉकडाउन का हवाला देते हुए मस्जिद में मौजूद लोगों को समझाने की कोशिश की और उनसे मस्जिद में आने को लेकर कुछ सवाल जवाब भी किए। इसके बाद पुलिस ने मस्जिद में मौजूद सभी 11 नमाजियों को हिरासत में ले लिया। वहीं पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सभी के खिलाफ में कोलार सिटी पुलिस स्टेशन में मुकदमा दर्ज किया है।

दरअसल, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में आप देख सकते हैं कि एक मस्जिद के अंदर करीब दर्जन भर लोग दिखाई दे रहे हैं। इसी बीच मस्जिद में पहुँची तहसीलदार शोभिता मौजूद लोगों से बात करते हुए उन्हें समझा रही हैं। दरअसल, मस्जिदों के अंदर इस तरह महिलाओं का प्रवेश करना कम ही देखा जाता है। वहीं महिला अधिकारी द्वारा दिखाए गए साहस की सोशल मीडिया पर जमकर सराहना हो रही है।

वहीं तहसीलदार शोभिता ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि मुस्लिम समुदाय के लोगों ने प्रतिबंधों के बावजूद मस्जिदों में इकट्ठा होकर लॉकडाउन के नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया है।

आपको बता दें कि सोमवार से देश में लागू होने वाले लॉकडाउन के तीसरे विस्तार में सरकार ने लोगों को कुछ सहूलियत दी हैं, लेकिन इस दौरान सभी प्रकार के धार्मिक कार्यक्रम पहले की तरह ही बंद रहेंगे। आपको बता दें कि कोलार जिला ग्रीन ज़ोन में है, क्योंकि जिले में अभी तक कोरोना का केस सामने नहीं आया है।

गौरतलब हो कि उलेमा काउंसिल, कर्नाटक और वक्फ बोर्ड देश में जारी लॉकडाउन को लेकर अपने समुदाय के लोगों से पहले ही अपील कर चुके हैं कि वह रमजान के दौरान अपने घरों में ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए नमाज अदा करें और मस्जिदों में नमाज अदा करने के लिए इकट्ठा न हों।

इससे पहले असम के लखीमपुर जिले के दक्खिन पंडोवा गाँव की एक मस्जिद में गुरुवार रात को कुछ लोग लॉकडाउन का उल्लंघन कर नमाज अदा करने के लिए एकत्र हो गए थे। इसकी जानकारी जब नाओबीचा पुलिस को हुई तो चौकी प्रभारी बिस्वजीत नाथ एक पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुँचे। पुलिस ने मस्जिद में 12 लोगों को पाया।

इसके बाद जैसे ही पुलिस की टीम मस्जिद से निकली उस पर पथराव शुरू हो गया। इसमें ग्राम प्रधान सहित चार पुलिसकर्मी घायल हो गए। पथराव में पुलिस का वाहन भी क्षतिग्रस्त हो गया।