Home Blog Page 4941

हस्तमैथुन, समलैंगिकता, सबके सामने शौच-पेशाब: ‘इस्लाम ऑन द मूव’ किताब में तबलीगियों की पूरी ट्रेनिंग की कहानी

तबलीगी जमात के चर्चा में आने के बाद उनसे संबंधित नई-नई बातों का खुलासा हो रहा है। मलेशिया के लेखक फारिश अ नूर ने अपनी किताब, ‘इस्लाम ऑन द मूव’ में इसी से संबधित चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने अपनी किताब में बताया है कि जो जमाती मरकज़ में रहते हैं, वे एक-दूसरे के सामने खुलेआम शौच करने व पेशाब करने में शर्म नहीं करते। क्योंकि उनके भीतर अपने शरीर को लेकर शर्म खत्म हो चुकी होती है। 

Coronavirus: 20 states at risk due to Tablighi Jamaat, search ...
एकत्रित जमाती

इतना ही नहीं, वहाँ टॉयलेट का डिजाइन इस तरह से बनाया जाता है कि तबलगियों को शौच करते हुए सब देख सकें। ताकि अन्य तबलीगी अपने भाइयों को आँकें और उनके पेशाब करने की मुद्रा को सुन्नत के अनुरूप सुधार सकें। किताब में इस बात का उल्लेख है कि मुस्लिमों को बैठकर पेशाब करना चाहिए, खड़े होकर नहीं।

मलेशिया लेखक की किताब का अंश

इसके अलावा इन खुले शौचालयों का एक उद्देश्य ये भी होता है कि इस बात को सुनिश्चित किया जा सके कि तबलीगी जमात का कोई भी जमाती मरकज़ के भीतर समलैंगिक संबंध और हस्तमैथुन जैसी क्रियाएँ न करें। क्योंकि ये दोनों चीजें इस्लाम में हराम है। 

एक ही थाली में 6-7 लोग खाते थे, सेक्स करना भी सिखाते थे: मरकज में 21 दिन रहे शख्स का खुलासा

तबलीगी जमात के ख़िलाफ़ मत बोलो, टीवी पर आ रही सब न्यूज फेक है: रेडियो मिर्ची RJ सायमा ने किया मरकज के ‘मानव बम’…

अब अगर, मलेशिया के लेखक का अवलोकन उचित है और ये सारी बातें सच हैं तो हमें इस समय जमातियों से संबंधित खबरों पर हैरान नहीं होना चाहिए। क्योंकि इनकी शर्म तो उस मरकज़ में ही खत्म कर दी जाती है, जहाँ दीन की बातें सिखाने का दावा होता है। लेकिन उसके बदले मजहब का हवाला देकर ये सब सिखाया जाता है।

स्तंभकार और राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के विश्लेषक दिव्या कुमार सोती ने भी इस जानकारी को सोशल मीडिया पर साझा किया है। उन्होंने अपने ट्विटर पर इसके संबंध में लिखा, “आज हर कोई आइसोलेशन में रखे गए तबलीगियों को देखकर हैरान है कि वे इतना क्यों थूक रहे हैं। तो बता दें कि उनका धर्मशास्त्र उन्हें ऐसा करने की शिक्षा देता है कि नमाज पढ़ते समय या मजहबी कार्य करते समय शैतान की दखलअंदाजी खत्म करने के लिए वो ये करें।”

तबलीग़ी जमात की ग़लती के लिए सारे ...
फोटो: PTI

गौरतलब है कि इन सभी बातों के अलावा हमें मरकज़ के मुखिया मौलाना साद की वो वायरल ऑडियो भी ध्यान में रखने की आवश्यकता है, जिसमें वह सभी जमातियों को यह शिक्षा देने की कोशिश कर रहा था कि कोरोना वायरस एक साजिश है, जिसे मुस्लिमों को मारने के लिए रचा जा रहा है। साथ ही सरकार को एक शैतान के रूप में प्रदर्शित किया था क्योंकि उन्होंने कोरोना वायरस के मद्देनजर किसी भी धार्मिक स्थल पर भीड़ इकट्ठा करने को मना किया था।

इसी शिक्षा का असर है कि अब स्वास्थ्यकर्मियों को जमातियों के बेहूदे रवैये का सामना करना पड़ा रहा है। और खबरें आ रही हैं कि वे सरकार व प्रशासन की बात नहीं मान रहे हैं, वॉर्डों में थूक रहे हैं, नर्सों से बदतमीजी कर रहे हैं, फब्तियाँ कस रहे हैं। आस-पास गंदगी मचा रहे हैं और खुलेआम कॉरिडोर में शौच कर रहे हैं।

देश में पहले कोरोना पॉजिटिव डॉक्टर की मौत: इंदौर की सभी सीमाओं को किया गया सील, बढ़ाई गई मेडिकल स्टाफ की सुरक्षा

देश में लगातार बढ़ते कोरोना के मरीजों की संख्या के बीच इंदौर के कोरोना पीड़ित एक डॉक्टर ने दम तोड़ दिया। यह देश में कोरोना से पीड़ित पहले डॉक्टर की मौत है। इसके बाद पूरे मध्य प्रदेश के साथ देश के डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर सरकार तरह-तरह के इंतजाम कर रही है। वहीं इंदौर में बिगड़ते हालातों को देखते हुए शहर को पूरी तरह से सील कर दिया है।

एनबीटी की खबर के मुताबिक स्वास्थ्य विभाग के सीएमएचओ डॉक्टर प्रवीण जड़िया ने बताया कि डॉ शत्रुधन पंजवानी पिछले दिनों कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे और उनका उपचार पहले गोकुलदास में चल रहा था। इसके बाद सीएचएल और फिर उन्हें अरविंदों अस्पताल में शिफ्ट किया गया था। इसके बाद भी उनकी हालत में कोई सुधार नहीं हो रहा था और स्थिति गंभीर बनी हुई थी। इसी बीच आज (गुरुवार 9 अप्रैल) सुबह को उनकी मौत हो गई।

जानकारी के मुताबिक इंदौर के रुपराम नगर में रहने वाले डॉक्टर पंचवानी प्राइवेट प्रैक्टिस करते थे। जो कि शहर के विनय नगर और दूसरा त्रिवेणी कॉलोनी में अपना क्लीनिक संचालित करते थे। आशंका जताई जा रही है कि इस दौरान हो सकता है कि किसी कोरोना पॉजीटिव के संपर्क में आए हों, हालाँकि, वह कोरोना से संक्रमिल लोगों का इलाज नहीं कर रहे थे। लेकिन इन दिनों इंदौर में कोरोना संक्रमण तेजी से फैलता ही जा रहा है।

अब सरकार के लिए यह एक चिंता का विषय हो गया है, क्योंकि देश में पहले कोरोना पीड़ित डाक्टर ने दम तोड़ा है। लिहाजा प्रदेश सरकार ने इंदौर शहर को पूरी तरह से सील कर दिया है। इतना ही नहीं प्रदेश सरकार ने प्रदेश में कोरोना संक्रमण से जूझ रहे 14 जिलों में सख्ती से लॉकडाउन का पालन कराने के आदेश दिए हैं। वहीं डॉक्टर की मौत के बाद इंदौर में कोरोना पीड़ितों के इलाज में लगे डॉक्टर और नर्सिंग स्टॉफों का प्रशासन विशेष ध्यान रख रहा है।

वहीं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पुलिस को निर्देश दिए हैं कि यदि कोई व्यक्ति कोरोना संक्रमण को छुपाता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इससे पहले शिवराज सिंह ने तबलीगी जमात से जुड़े लोगों को चेतावनी देते हुए कहा था कि निजामुद्दीन के मरकज में शामिल होकर सूबे में जो लोग पहुँचे हैं वे 24 घंटे के अंदर स्टेट अथॉरिटी के समक्ष रिपोर्ट करें नहीं तो ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

आपको बता दें कि अब तक मध्य प्रदेश में 404 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए है, जबकि प्रदेश में 30 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं अगर बात करें इंदौर की तो यहाँ अकेले इंदौर शहर में 213 पॉजिटिव मामले सामने आए हैं, जिनमें से 21 लोगों की मौत हो चुकी है।

निज़ामुद्दीन मरकज में हर रोज देश-विदेश से जुटते थे 5000 जमाती: दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा की पूछताछ में कई नए खुलासे

दिल्ली निजामुद्दीन से निकले तबलीगी जमातियों के बाद से देश में कोरोना से संक्रमित लोगों की संख्या लगातार बढ़ती चली जा रही है। वहीं मरकज मामले में जैसे-जैसे दिल्ली पुलिस की जाँच आगे बढ़ती चली जा रही है ऐसे ही मरकज से जुड़े एक के बाद एक नए खुलासे हो रहे हैं। दिल्ली पुलिस को मरकज से जुड़े लोगों से पूछताछ में जानकारी मिली है कि दिल्ली मरकज में हर रोज देश-विदेश से करीब पाँच हजार लोग आते थे। फिलहाल दिल्ली पुलिस की विशेष शाखा द्वारा जमातियों से पूछताछ जारी है।

मामले की जाँच कर रही दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा को मरकज से जुड़े लोगों से पूछताछ में पता लगा है कि निजामुद्दीन स्थित तबलीगी जमात के मरकज में हर रोज देश और विदेश से 4 से 5 हजार लोग इकट्ठा होते थे। यहाँ आने वाले लोगों से उनके देश और उनके उद्देश्य के बारे में पूछा जाता था। इसके बाद जो लोग जमात के लिए आते थे उन लोगों को मरकज में रोका जाता था और जो लोग किसी दूसरे मकसद से मरकज में आते थे उन लोगों को यहाँ से वापस कर दिया जाता था।

इसलिए दिल्ली स्थित मरकज में हर दिन जमातियों के आने-जाने का सिलसिला लगा रहता था। लगातार एक के बाद एक मिल रही नई जानकारियों को ध्यान में रखते हुए दिल्ली पुलिस की विशेष शाखा द्वारा यह पूछताछ जारी है। हालाँकि, कोरोना संक्रमण के खतरे से बचने के लिए अधिकारियों द्वारा यह पूछताछ अभी मोबाइल फोन पर ही चल रही है। इतना ही नहीं खुद दिल्ली पुलिस के अधिकारी मरकज से जुड़े लोगों को सामने बैठाकर पूछताछ करने से बच रही है।

वहीं दिल्ली पुलिस द्वारा मरकज के मौलाना साद, मोहम्मद अशरफ, मुफ्ती शहजाद, डॉ. जीशान, मुरसालीन सैफी, मो. सलमान और यूनुफ को दूसरा नोटिस जारी कर फिर से कुछ सवालों के जवाब माँगे हैं। साथ ही पुलिस ने दूसरे नोटिस का जल्द ही जवाब देने की बात कही है। इतना ही नहीं दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा तबलीगी मरकज की जाँच रिपोर्ट हर रोज गृह मंत्रालय को भेज रही है। जानकारी के मुताबिक गृह मंत्रालय इस रिपोर्ट को सभी राज्यों से साझा करता है।

गौरतरलब है कि दिल्ली पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा खाली कराए गए दिल्ली स्थित मरकज के बाद से मरकज का मौलाना साद फरार है। पुलिस उसकी तलाश में दिल्ली सहित कई राज्यों में लगातार छापेमारी कर रही है।

क्या है हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन (HCQ) का मामला: दो देशों के बीच खींचातानी और भारतीय दवाई उद्योग

हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन पर बयानबाजी के बाद इंडियन फार्मा इंडस्ट्री ‘हॉट टॉपिक’ बन चुकी है। लोग अपने-अपने हिसाब से अंदाजा लगा रहे हैं कि भारत ने अमेरिका के सामने घुटने टेक दिए या फिर भारत दवाइयों का शहंशाह है और पहले अपनी माँग और आपूर्ति का ध्यान रखेगा और उसके बाद ही किसी अन्य देश को सप्लाई करेगा। इस चर्चा ने एक मौका दिया है कि फार्मा इंडस्ट्री की वस्तुस्तिथि और अन्य संबंधित मुद्दों पर चर्चा की जा सके।

चूँकि यह अभी चर्चा का विषय बन चुका है, तो हमने अधिक जानकारी के लिए फार्मा (दवाई) उद्योग से जुड़े एक व्यक्ति से बात करने की कोशिश की। निजी कारणों से उन्होंने अपनी पहचान जाहिर करने से मना किया है। उनकी बातों से हमें इस उद्योग के कुछ ऐसे पहलुओं पर चर्चा करने का मौका मिला जो आम लोगों के लिए अज्ञात है।

उम्मीद के मुताबिक़ ही अधिकतर आम जन किसी भी देश में फार्मा कंपनियों की मौजूदगी, उनके द्वारा बनाई जाने वाली दवाईयों और मार्केटिंग के आधार पर पर विभिन्न देशों के बीच शक्तियों की तुलना कर रहे हैं। हालाँकि, इसमें कई पहलू हैं जिसमें हेल्थ एजेंसियों के बीच खींचतान, जेनेरिक बनाम इनोवेटर दवाइयाँ, एक्टिव फार्मास्युटिकल इनग्रेडिएंट (API), कंपनियों की रिसर्च एंड डेवलपमेंट यूनिट, प्रोडक्शन यूनिट और कॉर्पोरेट ऑफिस कुछ महत्वपूर्ण फैक्टर हैं।

जानकारी के लिए बता दें कि विश्व में अनेकों देशों की अपनी स्वास्थ्य संस्थाएँ हैं जो दवाइयों के निर्माण, वितरण, संबंधित बीमारियों में प्रयोग और अन्य उपयोगों से संबंधित निर्देश जारी करती हैं। इनमें अमेरिकी संस्था फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (US FDA) और यूरोप की यूरोपियन मेडिसिन एजेंसी (EMA) अग्रणी हैं। फार्मा कंपनियों में इन दोनों ही एजेंसियों का प्रभुत्व कायम है और दवाइयों, वैक्सीन अथवा मेडिकल डिवाइसेज के लिए इनके द्वारा दिए गए निर्देशों को मानना और उनकी शंकाओं का निवारण करने के लिए सभी कम्पनियाँ, जो कि इनके देशों में दवाइयाँ बेचती हैं, बाध्य होती हैं।

विशेष रूप से FDA अपने बनाए नियमों को लेकर अत्यधिक सख्त है और ‘अपने लोगों’ के स्वास्थ्य को लेकर दवाइयों में किसी भी तरह की खामियों को स्वीकार नहीं करती है। भारत में दवाइयों पर नियंत्रण रखने का काम CDSCO (Central Drugs Standard Control Organization) और DCGI (Drugs Controller General of India) मिलकर करते हैं। अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विभागों के प्रभुत्व और खींचतान को समझने के लिए हमें कुछ वर्ष पीछे जाना पड़ेगा।

2005 तक भारत ने दवाईयों के आपूर्तिकर्ता के रूप में तेजी से उभरना शुरू किया और कई भारतीय कंपनियों ने देश-विदेश में अपनी सफलता के झंडे गाड़ने शुरू किए। यदि आप इंटरनेट पर थोड़ी सी खोज करेंगे तो पाएँगे कि 2008 से 2012-13 तक FDA ने कई भारतीय कंपनियों द्वारा एक्सपोर्ट की जाने वाली दवाइयों पर ‘सब-स्टैण्डर्ड क्वालिटी प्रोडक्ट’ अथवा ‘प्रोडक्शन में हुई खामियाँ’ कहकर बैन लगाया और इनकी कमियों को लेकर लाखों डॉलर्स में फाइन लगाया।

हालाँकि, इन कंपनियों ने इस बात को चुनौती भी दी। अपने तर्क में इन कंपनियों का कहना था कि FDA ने सिर्फ जेनेरिक दवाओं (जिनका एक्टिव इनग्रेडिएन्ट पेटेंट से बाहर हो चुका हो और कई कंपनियों द्वारा इसकी दवा के निर्माण की अनुमति हो) पर प्रतिबन्ध लगाया लेकिन उन ब्रांडेड दवाओं पर नहीं जो विशेष रूप से कैंसर, ह्रदय रोग, मल्टीपल स्क्लेरोसिस अथवा रेट्रोवायरल जैसी बीमारियों में लड़ने के लिए अति-आवश्यक थीं और विभिन्न कारणों से जिनका सीमित प्रोडक्शन ही किया जा सकता था।

हालाँकि, FDA द्वारा उठाई गई कमियों को नजरअंदाज करना भी गलत होगा। FDA के दबाव का ही नतीजा है कि कई कम्पनियाँ अमेरिका में भेजी जाने वाली दवाइयों का निर्माण अपनी देख-रेख में, अपने प्लांट में करती हैं लेकिन अन्य देशों को जाने वाली सप्लाई का ऑर्डर कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाली छोटी इकाईयों को देती हैं। इसे इस तरह समझिए कि एक हलवाई मिनिस्टर या VIP के लिए सावधानी से, खुद मिठाई बनाकर खिला रहा हो और आम-लोगों के लिए किसी को भी मिठाई बनाकर बाँट देने को कहे।

अगर हलवाई को मिठाई की क्वालिटी पर भरोसा हो तो वो सभी को एक ही जगह से बनी मिठाई को खिलाने में किसी भी तरह का संकोच नहीं करेगा। मार्केटिंग में सेल को प्रमोट करने के लिए सेल्स-रिप्रेज़ेंटेटिव द्वारा डाक्टरों को लालच देना और दवा लिखने के बदले डॉक्टरों की फॉरन ट्रिप, फिल्म टिकट या कॉन्फरेंस के लिए पैसों की माँग के किस्से मीडिया में आते ही रहते हैं। हालाँकि, सभी ऐसा नहीं करते, ये उल्लेखित करना भी यहाँ अत्यंत जरूरी है।

अब बात हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन विवाद की। इसमें कोई दोराय नहीं कि इतने वर्षों में भारतीय फार्मा कंपनियों ने अपनी गुणवत्ता में सुधार करके विश्व में अपनी अलग पहचान बनाई है और जेनेरिक दवाइयों का सबसे बड़ा सप्लायर बनकर उभरा है। लेकिन यह ध्यान रखने योग्य बात है कि आज भी चीन APIs का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है और यही दवाइयों के निर्माण और सप्लाई (फ़ाइनल फॉर्मुलेशन) का आधार है। सिर्फ ट्रम्प ने एक दवा का नाम लिया इसलिए अचानक से वह महत्वपूर्ण नहीं हो जाती।

अमेरिकी न्यूज़ गलियारों में ट्रम्प और एक फार्मा कम्पनी से उनके कनेक्शन पर भी शायद आम जनता निगाह डालना चाहेगी। दूसरी ध्यान देने योग्य बात कि COVID-19 के इलाज के लिए ही एनाल्जेसिक/एन्टिपाइरेटिक कैटेगरी की एक अन्य दवाई के निर्यात पर भारत ने पूर्ण प्रतिबन्ध लगाया हुआ है। इसलिए भ्रान्ति फैलाने वाले मीडिया और आरोप-प्रत्यारोप करने वाले अज्ञानियों से दूर रहने में ही आम-जनमानस की भलाई है।

फार्मा सेक्टर दवाइयों और वैक्सीन से दुनिया की सेवा कर रहा है लेकिन यह भी उतना ही बड़ा सच है कि कॉर्पोरेट सिर्फ और सिर्फ पैसा देखता है। COVID-19 दुनिया के समक्ष आज सबसे बड़ी चुनौती है लेकिन यही चुनौती फार्मा जगत के लिए सबसे बड़ा मौका भी है। कोरोना वायरस के सामने आते ही फार्मा कम्पनियाँ पहले से ही मौजूद दवाइयों के कोरोना वायरस के इलाज की टेस्टिंग में जुट चुकी थीं।

चूँकि जेनेरिक दवाइयों की उपलब्धता अधिक रहती है और इन पर सीमित अधिकार नहीं होते, इसलिए चर्चा में भी यही अधिक आती हैं। लेकिन फार्मा कम्पनियाँ पहले से ही मौजूद इनोवेटिव दवाइयों जिनमें इम्युनोमोड्यूलेटर, एंटीवायरल इत्यादि दवा और वैक्सीन हैं, का COVID-19 के इलाज में ट्रायल/विश्लेषण शुरू कर चुकी हैं। इसकी सफलता से मानव जीवन को तो कोरोना वायरस से छुटकारा मिलेगा ही, साथ ही दशकों तक दवाइयों की खोज में पानी की तरह पैसा बहाने वाली फार्मा कंपनियों में भी नए उत्साह का संचार होगा।

इसलिए इस विवाद में मत पड़िए कि ‘ट्रम्प ने धमकाया तो मोदी डर गया’। सोचिए कि एक कंपनी जिसका ‘रिसर्च एंड डेवलपमेंट’ यूनिट यूरोप या अमेरिका में हो, प्रोडक्शन यूनिट भारत में हो, API चीन से आता हो और सदियों तक जिसने रिसर्च और ड्रग सेफ्टी में पैसा लगाया हो, सिर्फ ट्रम्प के फैसले पर निर्भर होगी क्या? ऐसी कंपनियों के कॉर्पोरेट ‘डॉक्यूमेंट ऑफ़ म्यूचुअल एग्रीमेंट, नॉलेज शेयरिंग’ एवम आपसी तालमेल पर हस्ताक्षर करते हैं और विपदा में एक-दूसरे का साथ निभाने को बाध्य होते हैं। वजह चाहे मानवीय हो या वित्तीय। इसलिए दूसरे देशों की मदद करना भारत का कर्तव्य है और भारत की मदद करना अन्य देशों का। बस इतनी सी बात है।

हाँ! इस पर चर्चा होनी चाहिए कि भारत के लिए ये हेल्थ सेक्टर में अग्रणी बनने का अच्छा मौका है और अभी तक फार्मा इंडस्ट्री ने अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभाया भी है। भारतीय फार्मा इंडस्ट्री सरकार के सामने अपनी माँगें रख सकती है। प्रोडक्शन यूनिट से लेकर सप्लाई चेन, रॉ-मटीरियल और फिनिश्ड गुड के क्वालिटी अस्योरेंश से लेकर क्वालिटी चेक तक, पैकिंग यूनिट से लेकर मार्केटिंग, प्लांट में दी जाने वाली कम सैलरी से लेकर कॉर्पोरेट ऑफिस की चकाचौंध तक, हर खामी और जरूरत का ब्यौरा सरकार और कम्पनी के मालिकों के सामने रखा जा सकता है।

साथ ही CDSCO और DCGI के पास भी मौका है कि वे विश्लेषण करें कि EMA और FDA की तुलना में विश्व स्वास्थ्य में उनका स्थान और योगदान क्या है? सिर्फ इनका अनुसरण करने की जगह ये भारतीय संस्थाएँ अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार स्टाफ की भर्ती करें, भारत भर में अपने नए ऑफिस खोलें और दवाओं की आपूर्ति और वितरण पर नियंत्रण बढाएँ।

सबसे जरूरी है कि दवाइयों के ‘नुकसान (साइड इफेक्ट) और लाभ’ के तुलनात्मक विश्लेषण पर अधिक जोर दें। इसमें कोई दोराय नहीं कि कड़े और विश्वसनीय नियमों के साथ भारत FDA और EMA की तुलना में कहीं आगे निकल सकता है। COVID-19 हमारे लिए चाहे बुरा सपना बनकर आया है, लेकिन इसने हमें हर बार चीन जैसे मुल्कों की ओर ताकने की जगह आत्मनिर्भर बनने का कड़ा सन्देश दिया ही है। हम जरूर उठेंगे और विश्व स्वास्थ्य के क्षेत्र में अग्रणी बनेंगे।

चीन में फिर कोरोना ने पकड़ी रफ्तार: दूसरे फेज़ में 1104 संक्रमित, एक दिन में 63 नए मामले, 2 की मौत

कुछ दिन पहले खबर आई थी कि चीन ने कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ जंग को जीत लिया है और अब वहाँ कोई भी कोरोना पॉजिटिव केस नहीं है। इसलिए पूरे विश्व को उससे सीखने की जरूरत है। मगर, यदि वर्तमान की बात करें तो कोरोना ने अपना शिकंजा दोबारा से चीन में कसना शुरू कर दिया है। जी हाँ, बुधवार को खबर आई है कि वहाँ से कोरोना के करीब 63 नए मामले सामने आए। जबकि 2 की मौत हो गई है। इसके साथ यहाँ कोरोना के दूसरे फेज में अब तक संक्रमितों की संख्या 1000 के पार चली गई है।

चीनी स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, बुधवार को जो 63 नए मामले रिपोर्ट हुए हैं उनमें से 61 बाहर से आए हुए हैं। ऐसे में खतरा है कि कोरोना वायरस की लहर दोबारा चल सकती है। ये केस उस दिन सामने आए हैं, जब वुहान से काफी वक्त के बाद कर्फ्यू हटाया गया और हजारों की संख्या में लोग अचानक बाहर निकले।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बुधवार को सामने आए नए 63 केस के अलावा चीन में दो मौत भी हुई हैं, जिसके साथ ही कोरोना वायरस से मरने वालों का आँकड़ा 3335 हो गया है। जबकि कुल केस की संख्या 81 हजार के पार चली गई है। दूसरे फेज़ में चीन में कोरोना वायरस के केस की संख्या 1104 हो गई है।

गौरतलब है कि तीन महीने की मशक्कत के बाद चीन कोरोना वायरस को हराने में कामयाब हुआ था, वुहान से भी करीब 73 दिनों का लॉकडाउन हटाया गया था। लेकिन फिर अचानक पिछले एक हफ्ते में दोबारा कुछ नए मामले सामने आने लगे। चीनी स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि ऐसा इसलिए है क्योंकि लॉकडाउन हटने के बाद लोग बड़ी संख्या में इधर-उधर आ जा रहे हैं।

बता दें, इससे पहले, चीन में कोरोना लौटने की खबर आई थी। बताया गया था कि कोरोना को लाने वाला एक 16 वर्षीय छात्र है। जिसका नाम झोहू है। दरअसल, झोहू ने वुहान से बीजिंग और दुबई होते हुए यूके के न्यूकैसल तक सफर किया था। वुहान हेल्थ कमीशन के अनुसार, झोहू यूके में रहकर पढ़ता था। उसने न्यूकैसल इंटरनेशनल एयरपोर्ट से 21 मार्च को दुबई होते हुए बीजिंग के लिए उड़ान भरी थी। इसके बाद शुरुआत में एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग हुई। उसे मेडिकल ऑब्जर्वेशन में रखा गया। फिर उसे हाई स्पीड ट्रेन से उसके घर वुहान भिजवा दिया गया। साथ ही क्वारंटाइन होने के आदेश दिए थे।

वहीं, हांगकांग विश्वविद्यालय के शोधकर्ता गैब्रिएल का मानना था कि चीन में अभी भी तमाम लोग कोरोना से संक्रमित हो सकते हैं। इन लोगों में बाद में कोरोना का संक्रमण प्रभावी रूप से सामने आ सकता है। सरकार के मुताबिक कोरोना के कहर के दौरान चीन में करीब 81,589 लोग इससे संक्रमित हुए और 3,318 लोग मारे गए। स्था​नीय लोगों ने इस डाटा को खारिज करते हुए कहा है करीब 42 हजार लोग मारे गए हैं।

तबलीगी जमात के ख़िलाफ़ मत बोलो, टीवी पर आ रही सब न्यूज फेक है: रेडियो मिर्ची RJ सायमा ने किया मरकज के ‘मानव बम’ का बचाव

भारत में पूरे समाज के लिए खतरा बन चुके तबलीगी जमात की हकीकत अब सबके सामने आ चुकी हैं। ऐसे में कुछ मीडिया गिरोह के लोग सोशल मीडिया पर इनका समर्थन कर रहे हैं और अब भी इन्हें बचाने का प्रयास कर रहे हैं। रेडियो मिर्ची की आरजे सायमा उन्हीं में से एक हैं। जो जमातियों की हरकतों पर न केवल सफाई पेश कर रही हैं। बल्कि उनके गुनाह को फेक न्यूज़ कहकर उसपर लीपापोती भी कर रही हैं। उनका कहना है कि तबलीगी जमातियों ने गलती की। मगर जो उनकी गलती को मुद्दा बना रहे हैं वो इस देश में ज्यादा खतरनाक हैं।

दरअसल, आरजे सायमा ने दि प्रिंट के शेखर गुप्ता के एक ट्वीट को रीट्वीट किया। जिसमें शेखर गुप्ता ने तबलीगी जमात के मुस्लिम स्कॉलर की बात पोस्ट की थी कि तबलीगी जमात की हरकत को गलती कहिए। साजिश नहीं।

अब इसी को रीट्वीट करते हुए आरजे सायमा लिखती हैं, “वास्तव में ये यही है। एक गलती। शायद एक बहुत बड़ी गलती। लेकिन इसके पीछे मंशा गलत नहीं थी। जो लोग इसपर राजनीति कर रहे हैं वे इस देश के लिए खतरा हैं। वे कोरोना वायरस से भी ज्यादा खतरनाक हैं।”

अब हालाँकि, इस समय सायमा जैसे लोगों की ये बातें ट्विटर पर किसी जहर से कम नहीं है। जो आम जनता से ये कहना चाहती हैं कि गलत को गलत मत बोलो, बल्कि जो उसे गलत बोले, जो ऐसे अपराधियों के अपराध को उजागर करे, उनके ख़िलाफ़ बोलो।

आरजे सायमा ये बात अच्छे से जानती होंगी कि इस समय जमाती जगह-जगह कितनी गंदगी मचा रहे हैं। मगर फिर भी वे हर पहलू से अंजान बन रही हैं और कह रही हैं कि तबलीगी जमात की हरकतें गलती हैं, उन्होंने सब कुछ जानबूझ कर नहीं किया। 

अब इसी कारण  सोशल मीडिया पर इस समय लोग उन्हें घेरने लगे हैं और उनका भ्रम मिटाने के लिए वे सभी हरकतें एक के बाद एक बता रहे हैं, जो तबलीगी जमाती पकड़े जाने के बाद और क्वारंटाइन सेंटर में कर रहे हैं। इसी क्रम में एक ऐसा प्रयास संजय नाम के यूजर ने भी किया। 

संजय ने सायमा का ट्वीट देखकर प्रतिक्रिया में सायमा के लिए लिखा, “स्वास्थ्य अधिकारियों पर थूकना, सड़कों पर बस से बाहर थूकना, महिला कर्मचारियों के सामने अर्ध नग्न हो, भद्दी टिप्पणी करना, अस्पतालों में अनुचित माँग करना, केवल पुरुष कर्मचारियों को उनके लिए उपस्थित होने के लिए हंगामा करना और आप कितनी आसानी से कह रही हो कि इनके इरादे खराब नहीं हैं। हद है।”

यहाँ संजय ने इस ट्वीट के जरिए जमातियों की हरकतों को उजागर करने की कोशिश की। मगर, सायमा कहाँ समझने वाली थीं। उन्होंने उन सभी बातों को फेक न्यूज बता दिया और संजय को सलाह दी कि वे अपने भीतर मौजूद घृणा से ऊपर उठें। क्योंकि एक जीवन मिला है उसे इतनी नकारात्मकता के साथ जीने में न व्यर्थ करें।

हैरानी की बात ये देखने को मिली कि उन्होंने टीवी पर दिखाई जा रही खबरों को फेक न्यूज़ कहकर खारिज कर दिया। साथ ही फेक न्यूज बनाने वाले ऑल्ट न्यूज का प्रचार किया। सायमा ने ऑल्ट न्यूज की तारीफ करते हुए संजय को सलाह दी कि वह ऑल्ट न्यूज को फ़ॉलो करें। ताकि उन्हें पता चले कि आखिर फेक क्या होता हैं। 

गौरतलब है कि जिस ऑल्ट न्यूज की खबर शेयर करते हुए आरजे सायमा यूजर से ऑल्ट न्यूज फॉलो करने की बात करती हैं। वो खबर उस वायरल वीडियो से संबंधित है। जिसमें एक मुस्लिम फल विक्रेता थूक लगाकर उसे बेचने के लिए रेड़ी पर रख रहा था। हालाँकि, इसके वायरल होने के पीछे फल विक्रेता की हरकत मुख्य कारण थी। मगर ऑल्ट न्यूज़ का फैक्ट चेक इस बात पर था कि वीडियो अप्रैल में वायरल होनी शुरू हुई है। लेकिन वास्तविकता में ये घटना फरवरी की है।

बता दें, देश में इस समय कोरोना वायरस के कारण हाहाकार मचा हुआ है। हर राज्य की सरकार इस समय दो मुसीबतों से जूझ रही हैं। एक तो ये कि कोरोना संक्रमितों के बढ़ते आँकड़ो को कैसे कंट्रोल किया जाए। दूसरा ये कि इन्हें फैलाने का मुख्य स्त्रोत बन चुके तबलीगी जमातियों को कैसे पकड़ा जाए। हालाँकि, ये बात सब जानते हैं कि अगर तबलीगी जमाती समय रहते अपनी बेवकूफी का प्रदर्शन न करते तो देश में ये आँकड़े अब तक 5 हजार पार नहीं करते और हो सकता था कि कुछ राज्य इससे अछूते भी रह जाते। मगर, इनकी नासमझी और मनमानियों के कारण ये गंभीर विषय बन गया। यहाँ तक की कई नेताओं ने नियमों का पालन न करने वाले ऐसे कोरोना पॉजिटिव जमातियों को ‘मानव बम‘ भी कहा।

जैश आतंकी सज्जाद अहमद डार के जनाजे में शामिल हुई भारी भीड़: सोशल डिस्टेंसिंग की उड़ी धज्जियाँ, बढ़ा कोरोना संक्रमण का खतरा

जम्मू-कश्मीर में कल बुधवार (अप्रैल 8, 2020) को सुरक्षाबलों द्वारा मार गिराए गए जैश ए मुहम्मद के एक आंतकी सज्जाद अहमद डार के जनाजे में 400 से ज़्यादा स्थानीय लोग शामिल हुए। सोशल डिस्टेंसिंग का उल्लंघन करते हुए जनाजे में शामिल लोगों ने खुद के साथ अपने परिवार के जीवन को भी संकट में डाल दिया है। इसके बाद पुलिस ने लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में जनाजे में शामिल होने वाले लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

एक तरफ कोरोना महामारी के बीच लोग देश में लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहे हैं, लेकिन दूसरी तरफ जम्मू-कश्मीर में इसकी अनदेखी कर सैकड़ों लोगों ने एक आतंकी के जनाजे में हिस्सा लिया। सुरक्षाबलों द्वारा जैश आतंकी सज्जाद अहमद डार को बुधवार को मार गिराने के बाद शव को परिजनों को सौंप दिया गया इस हिदायत के साथ कि जनाजे में ज्यादा लोग एकत्र न हों, लेकिन इसके बाद भी जैसे ही आतंकी के शव को परिजनों को सौंप दिया गया। नियमों और कोरोना से खतरे को ताक पर रखकर एक के बाद एक भारी संख्या में स्थानीय लोगों की भीड़ उसके जनाजे में जुटने लगी।

इसकी जानकारी जैसे ही पुलिस-प्रशासन को हुई उन्होंने जनाजे में शामिल होने वाले लोगों के खिलाफ में आईपीसी की धारा 188 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। जम्मू कश्मीर पुलिस के कश्मीर रेंज के आईजीपी विजय कुमार ने बताया कि सज्जाद को संगठन में स्थानीय युवाओं की भर्ती का काम सौंपा गया था। वह लगातार इलाके के युवाओं को संगठन में भर्ती करने के काम में लगा हुआ था। उस पर कई अन्य मामले भी दर्ज थे।

आपको बता दें कि कल बुधवार को सुरक्षाबलों को सूचना मिली थी कि बारामुला जिले के सोपोर इलाके में जैश के तीन से चार आतंकी छिपे हुए हैं। इस पर सेना की 22 राष्ट्रीय राइफल्स, 179 बटालियन सीआरपीएफ और एसओजी के जवानों ने सोपोर, आरमपुरा के गुलबड़ इलाके की घेराबंदी कर संयुक्त तलाशी अभियान चलाया था। करीब 14 घंटे तक इलाके में घेराबंदी और तलाशी अभियान के बाद आतंकियों के साथ शुरू हुई मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने स्थानीय आतंकी सज्जाद डार को मार गिराया था।

गौरतलब है कि यह कोई पहल मौका नहीं कि जब किसी आतंकी के जनाजे में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग जुटे हों। यहाँ पहले से ही यह सिलसिला जारी है, जिसमें लोग आतंकी को हीरो की तरह पेश करते हुए भारत विरोधी नारी लगाते हैं। इसे लेकर सुरक्षाबलों ने भी कई तरह की गाइडलाइन जारी की हैं। वहीं जम्मू-कश्मीर में बुधवार को कोरोना के 19 नए मामले सामने आए। अब तक प्रदेश में कुल 144 कोरोना मरीज पाए गए हैं, जिनमें 134 एक्टिव केस हैं।

‘मानव बम जैसे हैं दिल्ली से लौटे तबलीगी जमाती, महाराष्ट्र सरकार जानबूझकर नहीं पेश कर रही मरकज से जुड़े संक्रमितों के आँकड़े’

महाराष्ट्र में लगातार बढ़ते कोरोना के मरीजों की संख्या को देख परेशान हुए पूर्व सीएम देवेन्द्र फडनवीस ने तबलीगी जमातियों को लेकर बढ़ा बयान दिया है। फडनवीस ने कहा है कि दिल्ली के मरकज में शामिल हुए तबलीगी जमात के लोग संक्रमित होकर पूरे देश में घूम रहे हैं, जो कि एक मानव बम की तरह है। इनको पकड़कर इनकी जाँच की जानी चाहिए और इन्हें जल्दी से जल्दी क्वारंटाइन किया जाना चाहिए। फडनवीस ने यह बातें बीते दिन राज्यपाल से मुलाकात के बाद एक वीडियो जारी कर कहीं।

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार शाम को राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मुलाकात करने के बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश जारी किया, वीडियो संदेश में फडणवीस ने कहा, “नई दिल्ली के निजामुद्दीन में आयोजित मजहबी कार्यक्रम में कोरोना वायरस से संक्रमित होकर आए लोग ‘मानव बम’ जैसे हैं। वे बड़ी आबादी को संक्रमित कर सकते हैं। इसलिए सरकार को इन लोगों का पता लगाकर जल्दी से इलाज किया जाना चाहिए।”

वीडियो में फडनवीस ने राज्य सरकार पर कई गंभीर आरोप भी लगाए। फडनवीस ने आगे कहा कि सरकार जानबूझकर तबलीगी जमात से जुड़े संक्रमित लोगों के आँकड़े पेश नहीं कर रही है। इतना ही नहीं सरकार के मंत्री तरह-तरह के बयान देकर भ्रामक बातें कर गंदी राजनीति कर रहे हैं। सरकार दिल्ली मरकज में शामिल होकर लौटकर आए लोगों को पकड़ने में असमर्थ है। जरूरी है कि इन लोगों का पता लगाकर जल्दी से जाँच की जाए और फिर इन्हें क्वारंटाइन किया जाए।

पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि केन्द्र सरकार ने जो राशन लोगों के लिए दिया है वह यहाँ के लोगों को नहीं मिल रहा है। वह भुखमरी के कगार पर हैं। यहाँ तक कि सरकार डॉक्टरों को पीपीई किट भी उपलब्ध नहीं करा पा रही हैं। इस तरह से ऐसे लोगों का मनोबल कम होता है, जो लोग सामने आकर कोरोना के खिलाफ जंग लड़ रहे हैं।

आपको बता दें कि देश में सबसे अधिक कोरोना से मरने वालों और इससे संक्रमिल लोगों की संख्या महाराष्ट्र में सबसे अधिक है। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाईट के मुताबित महाराष्ट्र में अब तक कोरोना की चपेट में आने से 72 लोगों की मौत, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या 1135 से अधिक हो चुकी है।

चौंकाने वाली बात यह कि अकेले मुंबई शहर ही कोरोना का सबसे बड़ा हॉटस्पॉट बना हुआ है यहाँ अकेले लगभग 700 कोरोना संक्रमित मरीज हैं और करीब 40 की मौत हो चुकी है। मुंबई की झुग्गी-झोपड़ियों में जमात के कनेक्शन के चलते कोरोना वायरस फैला है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मुंबई के अस्पतालों में 90 फीसदी मरीजों का तबलीगी जमात से कनेक्शन सामने आया है।

गौरतलब है कि इससे पहले बीजेपी के महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने इंदौर में कहा था कि इस दिल्ली मरकज में शामिल और फिर वहाँ से कोरोना संक्रमित हुए तबलीगी जमात के लोग मानव बम की तरह घूम रहे। इन लोगों को खुद ही प्रशासन को सौंप देना चाहिए, ताकि समाज में यह बीमारी न फेंला सकें।

अब भी अगर छिपे मिले तबलीगी जमाती तो होगा हत्या के प्रयास में केस दर्ज: कोरोना को लेकर हरियाणा सरकार हुई बेहद सख्‍त

दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज़ से निकलकर हरियाणा में जाकर छिपे जमातियों के ख़िलाफ़ राज्य सरकार का रुख सख्त हो गया है। सरकार का कहना है कि अब राज्य में छिपे जमातियों के ख़िलाफ़ हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज किया जाएगा। उन्होंने जमात से लौटे सभी लोगों को बुधवार तक सरेंडर करने का समय दिया था। इसके बाद 200 तबलीगी जमातियों ने खुद को अलग-अलग जिलों में प्रशासन के सामने पेश किया। अब आने वाले समय में जो भी जमाती पकड़ा जाएगा, उसपर हत्या का प्रयास करने का मामला दर्ज होगा। बता दें, राज्य में अब तक मिले जमातियों की संख्या 1562 हो गई है। इनमें से 82 जमाती ऐसे हैं जिन्हें कोरोना पॉजिटिव पाया गया और 590 की रिपोर्ट नेगेटिव आई।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, हरियाणा सरकार ने निर्णय लिया है कि बुधवार शाम 5 बजे के बाद किसी भी जिले में छिपे हुए तबलीगी जमाती के पकड़े जाने पर उसके खिलाफ़ हत्या के प्रयास (आईपीसी धारा 307) में मुकदमा दर्ज किया जाएगा। फिर उसका कोरोना टेस्ट होगा। यदि टेस्ट पॉजिटिव रहा तो यह मुकदमा चलता रहेगा। रिपोर्ट निगेटिव आने की स्थिति में उसपर से धारा 307 हटा दी जाएगी।

हरियाणा में छिपे तब्‍लीगी जमातियों पर अब होंगे हत्या के प्रयास के केस, सरकार हुई सख्‍त
साभार: दैनिक जागरण

दैनिक जागरण के मुताबिक, इस खबर की पुष्टि खुद राज्य के गृह मंत्री अनिल विज ने की है। माना जा रहा कि अब पुलिस हर जिले में छिपे हुए तबलीगी जमातियों की धरपकड़ करेगी, ताकि उनके जरिए कोरोना वायरस को फैलने से रोका जा सके।

इसके अलावा राज्य में पकड़े जा चुके 1562 जमातियों के कोरोना टेस्ट कराने का निर्णय भी राज्य सरकार ने लिया है। इनमें से अब तक 884 का टेस्ट हो चुका है। 590 की रिपोर्ट नेगेटिव आई है। 212 लोगों की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। बाकी जमातियों के भी टेस्ट चल रहे हैं। जो शुक्रवार तक पूरे होने की संभावना है। बता दें, 1562 जमातियों में 1036 दूसरे राज्यों के, 419 हरियाणा के और 107 जमाती विदेशी हैं।

जमातियों के प्रति अपने कड़े रुख पर गृह मंत्री अनिल विज ने इन्हें समाज का दुश्मन बताया। उन्होंने कहा कि इनके कारण पूरे प्रदेश की जिंदगी को दाव पर नहीं लगाया जा सकता। बड़ी संख्या में इनपर काबू किया जा चुका है। अब आगे किसी के पकड़े जाने पर कड़ी कार्रवाई होगी। उनका कहना है कि हमने इन जमातियों को बाहर आने का काफी समय दिया। अब और समय नहीं दिया जा सकता। 

वहीं, राज्य के मुख्यमंत्री ने भी जमातियों को लेकर बयान दिया है। उन्होंने तबलीगी जमातियों के लिए कहा कि छिपना किसी समस्या का समाधान नहीं है। अभी भी यदि कोई सामने आएगा तो कानूनी तौर तरीकों का इस्तेमाल करते हुए क्वारंटाइन के बाद उसे जाने दिया जाएगा। उन्होंने माना कि राज्य में कोरोना पाजीटिव मामलों की संख्या इन तबलीगी जमातियों की वजह से बढ़ी है, लेकिन अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा। उन्हें बाहर निकलना चाहिए।

डोनॉल्ड ट्रंप ने PM मोदी को कहा- धन्यवाद! भारत की इस मदद को कभी भुलाया नहीं जाएगा

कोरोना महामारी के भयानक प्रकोप से इस समय पूरा विश्व त्रस्त है। मगर, अमेरिका उन देशों में से एक है जिनपर इस बीमारी का असर सबसे ज्यादा पड़ा है। ऐसे में भारत द्वारा हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन के निर्यात को मंजूरी मिलने के बाद वे फूले नहीं समा रहे। जी हाँ, मीडिया में चले लंबे बवाल के बीच जब भारत सरकार ने दवाई के निर्यात की मंजूरी दी तो वहाँ के राष्ट्रपति ट्रंप बेहद खुश हो गए। उन्होंने जानकारी पाते ही भारत के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट की और पीएम समेत सभी देशवासियों को धन्यवाद कहा। उन्होंने लिखा कि भारत की इस मदद को भुलाया नहीं जा सकेगा।

बुधवार को ट्वीट करते हुए उन्होंने लिखा, “असाधारण समय में दोस्तों में घनिष्ठ सहयोग की जरूरत होती है। हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन पर भारत और भारत के लोगों को धन्यवाद। यह भुलाया नहीं जाएगा। इस लड़ाई में न सिर्फ भारत के लोगों की मदद के लिए बल्कि मानवता की मदद में शक्तिशाली नेतृत्व के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद।”

ट्रंप ने इससे पहले भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बात कर कोरोना के खिलाफ लड़ाई में मदद माँगी थी। मगर, इसके बाद एक पत्रकार के सवाल में उन्होंने हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन का निर्यात न करने पर भारत पर जवाबी कार्रवाई करने की बात कही थी। जिसे मीडिया ने खूब भुनाया था और सबके सामने इस तरह पेश किया था, जैसे उन्होंने भारत के आगे करो या मरो की स्थिति रखी है। लेकिन बता दें, डोनॉल्ड ट्रंप ने भारत को धमकाया नहीं था। उन्होंने केवल एक सवाल के जवाब में सामान्य प्रतिक्रिया दी थी। जो शायद मुश्किल की घड़ी में कोई भी बड़े पद पर बैठा अधिकारी या मंत्री अपने देश की जनता को देता है।

उन्होंने इस दौरान ये भी कहा था, “अगर वे प्रतिबंध न हटाने का निर्णय लेंगे तो मुझे अच्छा नहीं लगेगा। मुझे अभी उनका निर्णय नहीं पता। मुझे मालूम है कि उन्होंने दवाई अन्य देशों के लिए प्रतिबंधित की हैं। मैंने उनसे कल बात की। हमारी अच्छे से बात हुई। हम देखेंगे कि अब आगे क्या होगा। मुझे बहुत हैरानी होगी कि अगर ऐसा होता है। क्योंकि आप जानते हैं कि भारत हमेशा संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ अच्छा व्यवहार करता है।”

सिर्फ़ ट्विटर ही नहीं अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने एक टीवी चैनल को इंटरव्यू देने के दौरान भी पीएम मोदी की जमकर तारीफ की। उन्होंने मोदी को महान नेता बताया।

बता दें कि वैश्विक महामारी का रूप ले चुके कोरोना वायरस का संक्रमण विश्व के कई देशों में तेजी से फैल रहा है। इटली, स्पेन जैसे विकसित सुपर पावर देशों ने भी इस वायरस के आगे घुटने टेक दिए हैं। खुद अमेरिका की नजरें अब मदद की आस में भारत पर टिकी हैं। ट्रंप के मुताबिक कोरोना से इलाज में भी हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवा के अच्‍छे परिणाम सामने आए हैं। इसलिए वे इसे एक आस की तरह देख रहे हैं।