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व्यंग्य: तबलीगी जमातियों ने की क्वारंटाइन में टट्टी, ‘स्वच्छता अभियान है फेल’ बोले ध्रुव लाठी

समय बीतता जाता है और मात्र 99% तबलीगी जमातियों के कारण बचे हुए पूरे एक प्रतिशत का नाम खराब होता जाता है। ताजा खबर, उत्तर प्रदेश के नरेला का है जहाँ नरेन्द्र मोदी के तमाम ‘स्वच्छता अभियान’ के दावे के, कि भारत खुले में शौच से मुक्त हो चुका है, नया मामला सामने आया है, जहाँ तब्लीगी जमात के कोरोना संदिग्ध लोगों ने कमरे के बाहर शौच कर दी।

अब आप सोचिए कि कोई भला क्यों ऐसा करेगा? अल्पसंख्यकों पर इतना ज्यादा अत्याचार हो रहा है कि कई खबरों में उन्हें बाहर से सेक्स आदि का भी प्रशिक्षण नहीं मिल पा रहा, तो वो बताते हैं कि मरकज़ निज़ामुद्दीन में उन्हें साथ खाने से ले कर सेक्स कैसे करना चाहिए, ये भी सिखाया जाता है।

आप दोबारा सोचिए कि आज के दौर में जहाँ भारत जैसी रूढ़िवादी सभ्यता में, कहीं कोई संस्था अपने अनुयायियों को सेक्स एजुकेशन दे रही है, तो उसे आप कोरोना के नाम पर छापे मारी कर रोक देंगे? उन्हें तमाम मीडिया वाले मिल कर बदनाम करेंगे?

कोरोना का क्या है, वो तो मौलाना शाद ने खुद कहा है कि ऊपर वाले ने जब दे दिया, और उसने 70,000 फरिश्ते भी तुम्हारी हिफाजत के लिए दिए हैं, तब भी अगर तुम डॉक्टरों की वाहियात बातों पर विश्वास रखोगे और मस्जिदों को आबाद नहीं करोगे, तो तुम्हें तो वैसे भी बीमारी होनी ही है। इसलिए मस्जिद में जमा होने का, उसे आबाद करने का समय है कि जब तुम आओगे, फरिश्ते उतरेंगे और वो तुम्हें ठीक करेंगे।

लेकिन हुआ क्या? मौलाना शाद की इस तकनीक का परीक्षण तक नहीं होने दिया गया और उनसे कहलवाया गया कि वो लोगों से अपील करें कि डॉक्टरों की बात मानी जाए, सरकार की अपील सुनी जाए। उसके बाद मीडिया ट्रायल शुरू हो गया कि तबलीगी ने कहीं थूक दिया, कहीं पेशाब इकट्ठा कर रहे हैं, कहीं शौच कर दिया…

एक मर्द के तौर पर आप सोचिए कि ये सारी चीजें क्या कुदरती नहीं हैं? यहाँ शाहीन बाग में जब कहा गया कि खाना तो कुदरती तौर पर आ रहा है तब तो सब ने मान लिया। लेकिन किसी को कुदरती तौर पर थूक आ जाए, पेशाब लग जाए, गुदाद्वार पर विष्ठा दस्तक देने लगे, तो क्या वो किसी पर थूक भी नहीं सकता? बोतलों में पेशाब नहीं कर सकता? दरवाजे पर शौच नहीं कर सकता?

अरे, जिनके खानदान के लोगों ने एक हजार साल तक राज किया है यहाँ के हिन्दुओं पर, वो क्या मुँह में थूक आने पर डॉक्टरों पर फेंक नहीं सकते? क्या हो जाएगा? थूक में कोरोना है? बिना जाँचे कैसे पता? और अगर है भी तो डॉक्टर ने तो पीपीई सूट पहना हुआ है न। उसे अगर फिर भी हो गया तो तुम्हारा मोदी ही जिम्मेदार है कि कैसे सूट दे रहा है जो तबलीगियों के मुँह से निकली कुदरती थूक तक नहीं झेल पा रहा?

क्या यही है गंगा-जमुनी तहजीब कि अनंतकाल से खेतों में मल त्यागने जाने वाले समाज में, आज एक तबलीगी गेट पर बैठ कर विष्ठा कर रहा है, तो उसे यहाँ के बहुसंख्यक बर्दाश्त नहीं कर पा रहे! क्या ऐसे होगी विविधता में एकता कि हम तुम्हारे घर के सामने टट्टी तक नहीं कर सकते?

आप बताइए कि पेशाब बोतल में रखने पर रोक है! अरे! आज क्या मजहबी इन्सान इतना पराया हो गया कि अपना ही पेशाब बोतल में नहीं रख सकता? मतलब थूकने पर मनाही है, शौच करने पर मनाही है, तब हमने बोतलों में पेशाब रख लिया, तो भी दिक्कत! अरे भाई बता दो कि थूक, पेशाब और शौच को पास में रखें, या बाहर फेंके। माइंड मेक अप कर लो। ऐसे नहीं चलेगा कि दोनों साइड से तुम ही बजाओ।

इंदौर में कुछ भाइयों ने डॉक्टर और पुलिस पर पत्थरबाजी कर दी। क्या हो गया? आपको नहीं पता कि फेंकने पर अगर हम आ गए तो क्या-क्या फेंक देते हैं। पत्थर तो कुदरती चीज है, पड़ी थी, हथेली में खुजली हुई, फेंक दिया। जब एक बार इलाके में बता दिया कि हमें नहीं हो रहा कोरोना, तो पुलिस क्यों दिमाग लगाने आती है?

कभी नमाज पढ़ने पर रोक लगाने की बात होती है, कभी जाँचने आ जाते हैं। क्या इस देश का संविधान हमें अभिव्यक्ति की आजादी नहीं देता? हिन्दुओं की शादियों में बंदूकें चले तो वो भावनात्मक बात हो जाती है कि खुशी में फायर कर दिया, और हमने मधुबनी में गोली चला दी थोड़ी सी, तो उसे आपराधिक कह दिया! अरे, हमने गम में फायर कर दिया, हमारे भी जज्बात हैं, हम भी भावनात्मक लोग हैं, हम भी अपने आप को ऐसे अभिव्यक्त करते हैं।

बिजनौर में अंडा करी और बिरयानी माँग ली तो बवाल हो गया कि देखो जमाती क्या-क्या माँग रहे हैं! क्या करें, देश की अर्थव्यवस्था को बर्बाद होते देखें हम? मुर्गीपालन और अंडेवालों पर तो रवीश जी ने भी प्राइम टाइम कर दिया था कि हालत खराब हो जाएगी व्यवसायियों की। तो क्या एक जिम्मेदार नागरिक के तौर पर हम डिमांड क्रिएट कर, सप्लाई चेन में स्फूर्ति नहीं ला सकते?

कानपुर के हमारे भाइयों ने जब थूक-थूक कर पूरे गणेश शंकर विद्यार्थी मेमोरियल अस्पताल के क्वारंटाइन वार्ड को सैनिटाइज करने की कोशिश की तब भी न्यूज बना दिया गया। हमने देखा है सैनिटाइजर। बोतल में पारदर्शी चीज होती है। हाथ पर लगाते हैं, और कहते हैं कि कीड़ा मर जाता है। हमारे मुँह में भी तो कुदरती पारदर्शी लार है।

हमने वही फेंका, हमारी मंशा पाक थी, लेकिन लोग क्या कह रहे हैं कि तबलीगियों ने थूक कर गंदा कर दिया! क्या विज्ञान नहीं कहता कि घाव पर थूक लगाओ, उसमें एंटीबैक्टेरियल गुण होते हैं? कर लोग गूगल, फिर बताना की पाँच वक्त का नमाजी तुमसे झूठ बोल रहा था! लाहौलविलाकुवत! जो चीज साबित नहीं कर सकते, कि धरती गोल है, तो उस पर हमारा मजाक बनाओगे जिसे मात्र सौ-पचास लोगों ने देखा है, लेकिन थूक में जो मेडिकल चीजें हैं, उसको झुठला दोगे?

ग़ाज़ियाबाद वाला मामला कितना तूल पकड़ा कि नर्सों पर अश्लील टिप्पणी कर दी, गंदे गाने सुने, बीड़ी माँग रहे थे। आप यह तो मानते हैं कि आदमी अकेले पड़े-पड़े बोर हो जाता है? नर्सें लगातार काम कर रही थी, हमने माहौल हल्का करने के लिए बोला कि हैदराबाद चलो, फूल वाले बुर्के में रखेंगे, झीनी-झीनी जरीदार जाली से हवा आएगी तो मई के महीने में जो आँखों पर ठंढी लगेगी कि एसी भूल जाओगी। ये तो जेनरल नॉलेज की बात है, शेयर की, हमें कह दिया गया कि तबलीगी ठरकी हैं, तबलीगी वाले औरतों का सम्मान नहीं करते।

आप ये भी तो मानेंगे कि गरमी का मौसम है। ऐसे में हमने सोचा कि गमगीनी के इस माहौल को थोड़ा लाइट किया जाए, हम नंगे हो कर घूमने लगे। किसी को क्या परेशानी हो सकती है? आप बाथरूम में नंगे हो कर नहाते हैं, वो ठीक, यहाँ एक आदमजात गरमी में नंगा हो गया, तो क्या परेशानी हो गई? आँख बंद कर लो, दिक्कत है तो। कमाल की बात ये है कि खुद कुछ नहीं करना, सामने वाले की हर बात को नकारात्मक तरीके से देखना।

बात यह है कि अल्पसंख्यकों की हर बात में देश के कुछ लोगों को परेशानी है। हम अपने फलों के ठेले पर रखे फल पर थूक लगाएँ, तब परेशानी है। हम थूक लगा कर तरबूज काटें तब परेशानी है। हमारी आलोचना कोई करे तो उसे गोली मार दें, तब परेशानी है! मतलब थूक हमारा, फल हमारा, तरबूज हमारा, चाकू हमारा, गोली हमारी… और उसे कैसे इस्तेमाल करेंगे, वो हमें कोई और बताएगा!

ये है भारत का निजाम जिसके लिए लेहरू जी और गान्ही बाबा इतनी लड़ाई किए? क्या इसी निजाम के लिए संविधान सभा बैठा करती थी जिसमें अल्पसंख्यकों को अपनी थूक पर ही हक नहीं, देश का तो खैर छोड़ ही दीजिए! हम क्या करें, कहाँ जाएँ? कोई कहता है पाकिस्तान चले जाओ। पागल समझ रखा है क्या कि पाकिस्तान चले जाएँ, हमें क्या पता नहीं था कि उधर के मजहबी कैसे होंगे। उनके देश का बाप दाढ़ी तक नहीं रखता था, वहाँ तो नहीं ही जाना।

और हाँ, ये जो शौच वाली बात है न, उससे तो यही साबित होता है कि मोदी का शौचालय वाला अभियान फुस्स है। उसने ताल ठोक कर कहा था कि भारत खुले में शौच से मुक्त है। अगर मुक्त हो गया होता तो कैसे हमारे भाई कर लेते? कुछ तो सिस्टम होगा ना कि आदमी खुले में जाए तो ‘मुक्त’ होने के कारण उतरे ही नहीं। अरे, जैसे सड़क क्रॉस करने पर रेड लाइट होती है, ट्रैफिक वाला होता है, रेलवे फाटक होता है, वैसा कुछ सिस्टम होना चाहिए कि नहीं।

तभी तो जुगराफिया से ले कर अलगंजा, अलपंचर और अलझबरा की समझ रखने वाले ध्रुव लाठी ने कहा कि तबलीगियों का शौच कर पाना बताता है कि मोदी का स्वच्छता अभियान एक असफल कैम्पेन है। लाठी ने आगे कहा, कि यूँ तो मोदी का आईटी सेल क्वारंटाइन सेंटर में मल त्यागने को ‘ओपन’ नहीं मानते हुए, अपने वादे की सफलता की बात करेगा, लेकिन हम सब जानते हैं कि वो झूठ है और मोदी एक्सपोज हो चुके हैं।

इसको और अलग तरीके से देखना है तो आप यह भी देखिए कि भारत के स्वास्थ्य व्यवस्था की सच्चाई कैसे सामने आती? अगर तबलीगी मरकज दिल्ली में न हुआ होता और हमने अपने सैकड़ों दीनी लोग पूरे भारत के मस्जिदों में न भेजे होते, तो पता कैसे चलता कि हमारी राज्य सरकारें तैयार हैं। हमने तो देश का भला किया है कि जब सब कुछ ठीक चल रहा था, तो हमने अपने लोग उतारे कि हालात बदल दो, जज्बात बदल दो, और दिखा दो कि तुम कौन हो।

आप इसे एक मॉक ड्रिल कह सकते हैं कि हमारे तबलीगी भाइयों के कारण, अलहमदुलिल्ला, हमने भारत की सोई स्वास्थ्य व्यवस्था को ऐसा तमाचा मारा है कि अब ये आँखों में टेप साटे घूम रहे हैं। इसलिए, हमें तो धन्यवाद देने, हमारा शुक्रगुजार होने के अलावा और कुछ बनता ही नहीं है भारत के लोगों का।

कुल मिला कर बात यही है कि एक सोची-समझी साजिश के तहत, अपने ही भीतर के कुदरती थूक, कुदरती पेशाब और कुदरती टट्टी को अपने मन के हिसाब से यहाँ-वहाँ फेंकने वाले मासूम तबलीगियों को उनके मजहब होने के कारण बदनाम किया जा रहा है। आज देश कोरोना से लड़ रहा है, ऐसे में हमें मजहब-मजहब करने से बचना चाहिए। तभी एक समाज के तौर पर हम आगे बढ़ पाएँगे।

बॉलीवुड गैंग के ‘पेड ट्वीट्स’ की हवा फुस्स: जानिए, गरीबों की मौत से कितनी चिंतित उद्धव सरकार

महाराष्ट्र में 117 नए मामलों के साथ कोरोना वायरस संक्रमितों की संख्या 1,135 हो चुकी है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में कोरोना वायरस के संक्रमण से आठ लोगों की मौत हुई है। इसके साथ राज्य में संक्रमण से कुल मृतकों की संख्या 72 हो गई है। लेकिन महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे की सोशल मीडिया सेना कुछ और ही कह रही है। यह सेना रोजाना ट्विटर पर दिन के कम से कम 3 टाइम एक ही सन्देश ट्वीट करती है, जिसमें महाराष्ट्र सरकार की कोरोना महामारी से निपटने के प्रयासों को लेकर पीठ थपथपाई गई होती है।

सबसे बड़ा दुर्भाग्य यह है कि सोशल मीडिया पर एक सुर में महाराष्ट्र सरकार के गुणगान में भक्तिगीत गाती हुई इस सेना के ट्वीट महाराष्ट्र के मंत्रियों की प्रेस वार्ता से कहीं भी मेल नहीं खाते हैं। जमीनी आँकड़ों से इतर, कोरोना पर महाराष्ट्र सरकार की वाह-वाही करने वाला यह गिरोह कई दिनों से एक ही प्रकार के ट्वीट कर रहा था।

इस गिरोह में मौजूद लोगों के नाम देखकर ही इसके दावों की विश्वसनीयता स्पष्ट हो जाती है, क्योंकि इसमें वो नाम हैं, जो अक्सर अपने जन्मदिन की पार्टी से लेकर हर दूसरे फंक्शन में पटाखे फोड़ने के बाद ट्विटर पर पर्यावरण बचाने की अपील वाले ट्वीट किया करते हैं। यही नहीं, ये गिरोह जनता कर्फ्यू से लेकर मोमबत्ती और दीपक जलाने जैसी बातों से भी असहमत नजर आता है।

बहुत दिनों से सोनम कपूर, जावेद अख्तर, स्वर भास्कर, स्वाति चतुर्वेदी, आदि ट्विटर पर महाराष्ट्र सरकार को शाबासी देते हुए देखे जा रहे थे। इनका दावा है कि महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे सरकार कोरोना से निपटने में कहीं ज्यादा सफल रही है।

लेकिन आज की ही फ्री प्रेस जरनल की एक रिपोर्ट में आँकड़े एकदम उलट है। यह रिपोर्ट बताती है कि महाराष्ट्र सरकार कोरोना से होने वाली मौतों को लेकर बहुत ज्यादा चिंतित नहीं है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि स्वास्थ्य सेवा पर पैसा खर्च करने में सभी बड़े राज्यों में यह सबसे पीछे रहा है। यह आँकड़े अप्रैल 07, 2020 को CARE रेटिंग्स द्वारा निकाले गए एक शोध पत्र द्वारा सामने लाए गए हैं।

सरकार द्वारा पैसे खर्च करने के तरीके के विश्लेषण पर जरा सा ध्यान देने पर आप पाएँगे कि स्वास्थ्य सेवाओं की तुलना में पुनर्वास पर अधिक खर्च किया है। जैसा कि इस रिपोर्ट में कहा गया है कि गरीबों की झुग्गियाँ चुनाव के समय वोटबैंक की तरह इस्तेमाल की जाती हैं और आखिर में रियल स्टेट की अपार सम्भावनाएँ तैयार करती हैं। यदि आपको ध्यान होगा तो दिल्ली विधानसभा चुनावों में यही झुग्गियाँ अरविन्द केजरीवाल का सबसे बड़ा टारगेट रहती आई हैं। महाराष्ट्र में इन झुग्गियों की संख्या पूरे भारतवर्ष में सर्वाधिक हैं।

यह भी पाया गया कि बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) कुछ इमारतों में सैनिटाइजर्स इस्तेमाल करती रही, जबकि कुछ को उसने छोड़ दिया। दूसरा तरीका यह है कि आप BMC को पत्र लिखें और कोरोना की महामारी के टाइम में लाइन में लगकर अपने नम्बर आने का इन्तजार करें।

इस चार्ट में आप देख सकते हैं कि महाराष्ट्र ने अपने जीएसडीपी (सकल राज्य घरेलू उत्पाद) के प्रतिशत के रूप में किसी भी बड़े राज्यों की तुलना में सबसे कम पैसे खर्च किए हैं। एक और बात यह कि स्वास्थ्य सेवाओं पर अपने कुल राजस्व का सबसे कम प्रतिशत खर्च करने वाला अभी तक सिर्फ तेलंगाना ही था। तो क्या अब इस मामले में महाराष्ट्र ने अपनी प्रतिस्पर्धा तेलंगाना से शुरू कर दी है?

इतनी बड़ी आपदा के समय भी यदि महाराष्ट्र सरकार झुग्गियों की अनदेखी कर रही है तो यहाँ हर हाल में एक बड़े संकट की और इशारा करता है। वह भी तब, जब महाराष्ट्र कोरोना संक्रमितों की संख्या में एक अग्रणी राज्य है।

लेकिन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और उनके पुत्र आदित्य ठाकरे का सारा ध्यान शायद सिर्फ सोशल मीडिया पर छवि को दुरुस्त रखने में है। बॉलीवुड की वे ‘हस्तियाँ’ जिन्होंने रोजगार की कमी के चलते केंद्र की दक्षिणपंथी सरकार-विरोधी एजेंडा अपनाकर अपनी प्रासंगिकता बरकरार रखी है, वह इस काम उनके सहायक की भूमिका में नज़र आ रही हैं।

लॉकडाउन में एक बीवी के साथ घिरा हूँ, दूसरी के घर जा सकता हूँ: पुलिस से माँगी इजाजत

दुबई के एक रेडियो स्टेशन में एक पुलिस अधिकारी के सामने तब अजीबोगरीब स्थिति उत्पन्न हो गई जब एक श्रोता ने अजीब सा सवाल पूछ दिया। दरअसल, कोरोना वायरस को लेकर वहाँ भी अन्य देशों की तरह लोगों को सेल्फ-क्वारंटाइन में रहने को कहा गया है। उक्त श्रोता ने पूछा कि क्या उसे क्वारंटाइन के दौरान अपनी दोनों बीवियों के घर में बारी-बारी से रहने की इजाजत मिल सकती है? चूँकि वहाँ लोगों को घर में रख कर बाहरी इलाक़ों को सैनिटाइज किया जा रहा है, उक्त व्यक्ति ने बताया कि वो एक ही बीवी के साथ घिरा हुआ है।

कॉल करने वाले व्यक्ति ने कहा कि उसने दो शादी की है। उसने इस बात की अनुमति माँगी कि वो जब चाहे अपनी दोनों बीवियों के घर जा सके। ब्रिगडियर सैफ मुहैर अल मज़रूई ने उस व्यक्ति के इस सवाल पर ठहाका लगाया। वो वहाँ के ट्रैफिक विभाग के डायरेक्टर भी हैं। उन्होंने कहा कि अनुमति न मिलने की बात बोल कर अपनी दूसरी बीवी के सामने बहाना मार सकता है, जिसके पास वो नहीं जा पा रहा है।

हालाँकि, ब्रिगेडियर ने इस चीज की अनुमति देने से इनकार कर दिया, क्योंकि वहाँ की सरकार ने कहा है कि सिर्फ़ ज़रूरी चीजों के लिए ही लोग बाहर निकल सकते हैं। उन्होंने कहा कि उनके पास रोज इस तरह के फोन कॉल्स आते हैं और लोगों को एक बार ही निकलने की अनुमति है। इसका इस्तेमाल वे सिर्फ़ ज़रूरी वस्तुएँ खऱीदने या फिर कोई आवश्यक काम करने के लिए कर सकते हैं।

ब्रिगेडियर ने बताया कि जिन क्षेत्रों को पहले सैनिटाइज करने में 1 सप्ताह लगते थे, अब वहाँ 1 दिन में ही काम हो जाता है। यूएई में अब तक 2500 के क़रीब कोरोना वायरस के मामले आए हैं।

6 जिले 66 मौलाना: मस्जिदों को सैनिटाइज तो मौलवियों को क्वारंटाइन कर रहा बिहार

तबलीगी जमात वालों ने पूरे भारत में कोरोना वायरस के प्रकोप को और बढ़ा दिया। एक तरह से दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मरकज़ मस्जिद से निकल कर जमाती भारत के विभिन्न राज्यों में पहुँचे और वो वहाँ के मुस्लिम बहुल इलाक़ों में छिपे रहे। बिहार में भी कई मस्जिदों में जमाती छिपे हुए थे, जिन्हें एक-एक कर निकाला गया। इस दौरान मस्जिदों ओर मुस्लिम बहुल इलाक़ों में सर्च के लिए गई पुलिस टीम पर हमले भी हुए। मधुबनी में फायरिंग की गई।

सबसे पहले तो बात पटना की। यहाँ 14 विदेशी नागरिक एक मस्जिद में छिपे मिले। पटना का नूरी मस्जिद एक तरह से बिहार में जमातियों का मुख्यालय है। जब पुलिस-प्रशासन वहाँ पहुँचा तो वो सभी ख़ुद को स्वस्थ बताने लगे और मेडिकल टेस्ट से भी आनाकानी की। बाद में सभी विदेशी नागरिकों का मेडिकल टेस्ट कराया गया। ये सभी 15 दिनों तक उस मस्जिद में छिपे हुए थे। इनमें से कई ने बताया कि वो दिल्ली से पटना पहुँचे थे। उन सभी का पुराना ट्रेवल रिकॉर्ड मिला था।

इसी तरह बारा में भारत-नेपाल बॉर्डर पार करने की कोशिश कर रहे 9 मौलानाओं को पुलिस ने पकड़ लिया था। पता चला था कि ये सभी आसपास के इलाकों की मस्जिदों में छिपे हुए थे। सभी मौलाना तबलीगी जमात के मजहबी कार्यक्रमों में हिस्‍सा लेकर लौटे थे। उन्होंने बहाना बनाया था कि वो लॉकडाउन की वजह से यहाँ पर फँस गए हैं। जिन मौलानाओं को पकड़ा गया, वो सभी मटीअरवा गाँव के नजदीक ‘नो मैंस लैंड’ पार कर नेपाल में प्रवेश करने का प्रयास कर रहे थे। इन सबको आइसोलेट किया गया।

अररिया के जामा मस्जिद से भी 9 लोग पकड़े गए थे। मेडिकल टेस्ट कराने के बाद सबको क्वारंटाइन किया गया। एक व्यक्ति की मौत भी हो गई थी लेकिन बाद में पता चला कि उसकी मौत कोरोना के कारण नहीं बल्कि प्राकृतिक मृत्यु हुई थी। ये सभी मलेशिया से आए थे। इसी तरह किशनगंज के 13 लोग मिले थे, जिन्हें वहीं के एक मस्जिद में क्वारंटाइन किया गया था।

मधुबनी की बात करें तो वहाँ अंधराठाढ़ी थाना के गीदरगंज गाँव से चार जमाती और रुद्रपुर थाना क्षेत्र के हरना गाँव की एक मस्जिद से 11 बंगाली जमातियों को क्वारंटाइन किया गया था। अंधारठाढ़ी में पुलिस पर हमला भी किया गया था। इन सभी को क्वारंटाइन करने के बाद पुलिस ने मस्जिद को भी सैनिटाइज किया। ब्लीचिंग पाउडर और केमिकल्स के साथ पूरे इलाक़े में अग्निशमन विभाग को लगाया गया था।

मधुबनी से सटे दरभंगा जिले में भी 10 मौलवी आए थे, जिन्होंने क़रीब एक दर्जन मस्जिदों में भाषण दिया था। ये सभी 15 मार्च के आसपास दिल्ली से ट्रेन के माध्यम से दरभंगा पहुँचे थे। इन लोगों को स्थानीय स्तर पर सुविधा दिलाने और ठहराने में शामिल एक वार्ड पाषर्द समेत कुछ नामी लोगों को भी पुलिस ने अपने रडार पर लिया था। इसी तरह मोतिहारी के भी एक मौलवी को पकड़ के क्वारंटाइन किया गया था।

मरकज से निकल तबलीगी जमातियों ने किए 12 अनूठे कारनामे, 10वाँ तो… खुदा खैर करे

निजामुद्दीन स्थित मरकज से निकले तबलीगी जमात के सदस्य देश में कोरोना वायरस संक्रमण के मुख्य स्रोत बनकर ही नहीं उभरे। अपने कारनामों से ये लगातार चर्चा में भी बने हुए हैं। चाहे वह क़्वारंटाइन किए जाने के बाद डॉक्टरों पर थूकना हो या फिर अश्लील वीडियो देखते हुए नर्सों के सामने नंगा होना।

इनमें जमात के देसी सदस्यों के साथ-साथ पर्यटक वीजा पर आकर मजहबी गतिविधियों में शामिल होने वाले ‘धर्म प्रचारक’ भी हैं। थूकने और नंगई से ऊबने के बाद अस्पताल में 25-25 रोटियों और स्वादिष्ट बिरयानी की डिमांड भी इन्होंने की। मामला चाहे मस्जिद, मदरसों में इनकी बिरादरी की खोजबीन का हो, या फिर इन्हें आइसोलेशन में रखने का, जमात के सदस्यों ने व्यवस्था में बाधा डालने की हर मुमकिन कोशिश की है।

अस्पताल में शौच करने से लेकर संक्रमण फैलाने के उद्देश्य से डॉक्टर्स पर थूकने और हमला करने तक, भारत से लेकर पाकिस्तान तक तबलीगी जमातियों में विचित्र एकरूपता देखी जा रही है। परिस्थितियाँ ऐसी बन गई हैं कि स्वास्थ्यकर्मी और पुलिसकर्मियों के बड़े हिस्से का कीमती वक़्त इनकी बदसलूकी से निपटने में जाया हो रहा है।

क्वारंटाइन से लेकर पुलिस की खोज में तबलीगी जमातियों और समर्थकों का हंगामा

एक ओर जहाँ क्वारंटाइन किए गए जमातियों का हंगामा जारी था, उसी समय देश के विभिन्न हिस्सों में इनकी तलाश में जुटी पुलिस पर मजहबी लोगों का हमला भी चालू हो गया। इन हमलों के पीछे उद्देश्य सिर्फ और सिर्फ निजामुद्दीन मरकज के आयोजन में शामिल जमातियों को पुलिस से दूर रखना था। हालाँकि, पुलिस सिर्फ इनकी तलाश सिर्फ इसलिए कर रही है ताकि ये अन्य लोगों को भी संक्रमित ना कर दें।

ऐसे ही कुछ मामलों पर एक नजर –

1. असम-महाराष्ट्र-बिहार-गुजरात में पुलिस पर पत्थरबाजी और फायरिंग

गुजरात के अहमदाबाद स्थित गोमतीपुर में भीड़ द्वारा पुलिस पर पत्थरबाजी की घटना सामने आई जबकि बिहार के मधुबनी जिले में मुस्लिमों की भीड़ ने पुलिस पर हमला किया था। मधुबनी में समुदाय विशेष की भीड़ ने पुलिस को करीब एक किलोमीटर तक खदेड़ा। उन पर पत्थरबाजी और फायरिंग की। यहाँ तक कि पुलिस की जीप तालाब में पलट दी। जमातियों को तलाश रही पुलिस पर महाराष्ट्र के सोलापुर में पत्थरबाजी की गई। 28 मार्च को असम के बोंगाईगाँव में पुलिस पर पत्थरबाजी की गई।

2. मस्जिद में छुपे हुए तबलीगी जमात के विदेशी सदस्य

पुलिस की जाँच में तबलीगी मरकज के लोगों के नए ठिकाने भी सामने आते रहे। 31 मार्च को ही पटना, राँची, दिल्ली और महाराष्ट्र के मस्जिद से मौलवियों के मिलने की खबर के बाद UP की राजधानी लखनऊ के अमीनाबाद इलाके में डीएम के छापे के बाद इस खबर का खुलासा हुआ कि वहाँ के मरकजी मस्जिद में 6 विदेशी लोग रह रहे थे। ये किर्गिस्तान और कजाकिस्तान के नागरिक थे और वो भी निजामुद्दीन के जलसे में भाग लेने आए थे।

3. जान-बूझकर इधर-उधर थूक रहे तबलीग़ी जमात के लोग

घटना का पता चलने के बाद दिल्ली के निजामुद्दीन से ले जाए जा रहे सभी जमाती लोग बदतमीजी पर उतर आए। उनके द्वारा वो सारी हरकतें की जा रही हैं, जिनसे संक्रमण फैलने का ख़तरा हो सकता था। एक डॉक्टर ने बताया कि बस से ले जाए जा रहे ये सभी लोग इधर-उधर थूक रहे थे और अधिकारियों की बात नहीं मान रहे हैं। ये सभी बस की खिड़कियों की तरफ़ से थूक रहे थे, जिससे अन्य लोगों में संक्रमण फैलने का ख़तरा हो सकता था।

4. पाकिस्तान में पुलिस अधिकारी पर जमातियों का चाकू से हमला

31 March, 2020 को ही पाकिस्तान से एक खबर सामने आई जिसमें इस्लामिक प्रचारक तबलीगी जमात के 27 सदस्यों में कोरोना वायरस की पुष्टि हुई। जब क्वारंटाइन सेंटर में सभी तबलीगी जमातियों का टेस्ट किया जा रहा था तो उनमें से एक प्रचारक ने क्वारंटाइन से बचने के लिए पुलिस ऑफिसर SHO अशरफ मलिक माखी पर चाकू से हमला कर दिया और भागने की कोशिश की। इसमें जो एक विशेष प्रकार का पैटर्न देखा गया, वह यह था कि संक्रमित जमातियों द्वारा पुलिस और डॉक्टर्स पर हमला सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि भारत में भी किया जा रहा था।

5. डॉक्टर्स पर थूकने वाले जमाती

1 अप्रैल को आइसोलेशन में रखे तबलीगी जमातियों के डॉक्टर्स पर थूकने का अजीबोगरीब मामला सामने आया। वो अस्पताल ले जाते हुए खाने की चीजों की अनुचित माँग करते रहे। जमाती, क्वारंटाइन सेंटर में कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार के साथ ही वहाँ पर मौजूद डॉक्टरों समेत अन्य काम करने वाले सभी लोगों पर थूकने लगे।

6. नर्सों पर अश्लील टिप्पणी, क्वारंटाइन में अश्लील विडियो, डॉक्टर्स से बदसलूकी

2 अप्रैल को गाजियाबाद के आइसोलेशन वार्ड में रखे गए संभावित कोरोनावायरस तबलीगी जमाती मरीजों के खिलाफ सीएमओ गाजियाबाद ने बताया कि आइसोलेशन में रखे गए तबलीगी जमाती बिना कपड़ों, पैंट के नंगे घूम रहे थे। यही नहीं, आइसोलेशन में रखे गए ये जमाती अश्लील वीडियो चलाने के साथ ही नर्सों को गंदे-गंदे इशारे भी कर रहे थे। स्टाफ के साथ हर प्रकार की बदसलूकी के साथ ही बीड़ी-सिगरेट की माँग भी की।

7. छुपे हुए जमातियों की सूचना देने वाले की पिटाई

इंदौर-महाराष्ट्र में ऐसे मामले सामने आने लगे, जिनमें जाँच करने वाले या फिर जमातियों के छुपे होने की जानकारी देने वालों पर हमले किए गए। महाराष्ट्र में एक 56 वर्षीय व्यक्ति ने जब सूचना दी कि वहॉं के सात लोग दिल्ली निजामुद्दीन में जमात के कार्यक्रम में शामिल होकर गॉंव लौटे हैं तो नाराज जमात के कार्यक्रम में शामिल हुए लोगों ने उसकी पिटाई कर दी। हालात ये थे कि अस्पताल में ही पुलिस तैनात करनी पड़ी और कुछ जमातियों को जेल में आइसोलेट करना पड़ा।

8. क्वारंटाइन वार्ड में जमातियों ने थूक-थूक कर गंदगी

4 अप्रैल 2020 की एक रिपोर्ट में कानपुर के गणेश शंकर विद्यार्थी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज के क्वारंटाइन वार्ड में जमातियों ने थूक-थूक कर गंदगी फैलाने का मामला सामने आया। यह सोशल डिस्टेंसिंग का एकदम भद्दा मजाक था। जमाती अस्पताल में एक ही बेड पर बैठे रहते और डॉक्टरों से जाँच कराने से भी इंकार कर रहे थे।

9. नर्स और स्वास्थयकर्मियों के साथ बदसलूकी

गाजियाबाद के सुंदरदीप आयुर्वेदिक कॉलेज की महिला कर्मियों के साथ अभद्रता की। जमाती नर्सों के साथ बदतमीजी करने के साथ ही अश्लील टिप्पणियाँ भी कर रहे थे। कोई उनसे कहता कि हैदराबाद चलो, वहाँ जन्नत की सैर कराएँगे, तो कोई अन्य अश्लील टिप्पणियाँ कर रहे थे।

10. अस्पताल में उपद्रव: बिरियानी-अंडा करी की डिमांड

बिजनौर में 8 इंडोनेशियाई जमातियों ने अंडा-करी और बिरयानी की माँग की। साथ ही उन्होंने सफाई कर्मचारियों के साथ भी अभद्रता की थी। बस्ती और आगरा में भी बिरयानी माँग कर हॉस्पिटल कर्मचारियों को परेशान किया।

मुरादाबाद में जमातियों ने दाल-रोटी खाने से इनकार कर दिया। जमातियों ने ऐसी ही माँग उत्तरखंड की राजधानी देहरादून स्थित दून अस्पताल में भी की, साथ ही यह भी पता चला कि जमाती एक बार में 25-25 रोटियाँ हजम कर जाते हैं और तब भी संतुष्ट नहीं होते।

11. जमातियों का हॉस्पिटल में हंगामा

अहमदाबाद के सोला अस्पताल में तबलीगी जमात के सदस्यों ने हंगामा खड़ा करते हुए दवाएँ और इंजेक्शंस लेने से मना कर दिया। इनका आरोप था कि सरकार इन्हें जान से मारने की कोशिश कर रही है।

जमातियों ने खुद की इच्छा के विरुद्ध अस्पताल में रखे जाने का आरोप लगाया और एक कोने में इकट्ठा हो गए। इसके बाद अस्पताल प्रशासन को एक मुस्लिम डॉक्टर को बुलाना पड़ा। 5 घंटे तक चले हाई वोल्टेज ड्रामे के बाद मुस्लिम डॉक्टर की काउन्सिलिंग के बाद जाकर जमातियों ने हंगामा बंद किया।

12. कमरे के बाहर शौच, क्वारंटाइन सेंटर में सफाईकर्मी से बदसलूकी

उत्तर प्रदेश नरेला के क्वारंटाइन सेंटर में जहाँ कई जमातियों को कोरोना संदिग्ध होने पर रखा गया था, उनमें से 2 जमातियों ने अपने कमरे के बाहर ही शौच कर दी और जब सफाईकर्मी वहाँ पहुँचे तो ये लोग उनसे भी बदसलूकी करने लगे। इस हरकत की खबर फौरन नरेला इंडस्ट्रियल थाना पुलिस को दी गई और पुलिस ने बाराबंकी निवासी मो. फहद और अदनान जहीर के खिलाफ सरकारी आदेश का उल्लंघन समेत अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया।

एक ही थाली में 6-7 लोग खाते थे, सेक्स करना भी सिखाते थे: मरकज में 21 दिन रहे शख्स का खुलासा

तबलीगी जमात का नजामुद्दीन स्थित मरकज यूॅं ही देश में कोरोना वायरस संक्रमण का केंद्र बनकर नहीं उभरा है। वहॉं न केवल सरकार निर्देशों का उल्लंघन कर आयोजन हुए, बल्कि मरकज की दिनचर्या भी कुछ ऐसी थी जिससे संक्रमण फैलना ही था। यहॉं तक कि एक ही थाली में बैठकर 6-7 लोग खाना खाते थे।

यह खुलासा तेलंगाना के एक व्यक्ति ने किया है। वह मरकज में बीते साल नवंबर में 21 दिनों तक ठहरा था। उक्त व्यक्ति ने ‘स्वराज्य’ के स्वाति गोयल शर्मा से बातचीत की। इस दौरान उसने कई चौंकाने वाले दावे किए। यहाँ हम इस व्यक्ति का बदला हुआ नाम ‘जॉनी’ इस्तेमाल करेंगे।

जॉनी शुरू में ईसाई था। धर्मांतरण कर इस्लाम अपना लिया। उसने अपनी प्रेमिका के परिवार को ख़ुश करने के लिए ऐसा किया। एक डॉक्टर ने उसका लिंग-विच्छेद (खतना) किया। उसकी सलाह पर ही जॉनी ने तबलीगी जमात में शामिल होने का फ़ैसला किया। नवंबर में मरकज़ में जाने से पहले वह कई दिनों तक तेलंगाना की विभिन्न मस्जिदों में प्रवास कर चुका था।

उसने बताया कि तबलीगी जमात पूरी दिनचर्या तय करता है। खाने-पीने से लेकर मल-मूत्र त्याग करने तक सब कुछ। यहाँ तक कि सेक्स कैसे करना है, ये भी जमात ही सिखाता था। जॉनी को भी उस ‘ऑर्थोडॉक्स’ संस्था से जुड़ाव हो गया था और वो सब कुछ करता था, जैसे कहा जाए।

हालाँकि, जॉनी को जमातियों के रहन-सहन का तरीका पसंद नहीं आया। उसने कहा कि मरकज़ आज कोरोना वायरस का सबसे बड़ा हॉटस्पॉट बन गया है, ये आश्चर्यचकित करने वाली बात नहीं है। उसने वहाँ के तौर-तरीकों का जिक्र करते हुए बताया कि ये निश्चित है कि अगर वहाँ एक व्यक्ति को कोई ऐसा संक्रमण हुआ तो फिर बाकियों को भी हो ही जाएगा। जॉनी ने बताया:

“वहाँ 4 लोग एक साथ बैठ जाते हैं और एक ही प्लेट में भोजन करते हैं। रोटी, चावल और करी वगैरह भी एक ही प्लेट में खाते थे। यहाँ तक कि हम चम्मच का भी प्रयोग नहीं किया करते थे और साथ ही खाते थे। कभी-कभी 6-7 लोग भी ऐसा ही करते थे। अंदर बाथरूम बहुत कम हैं और सभी को शेयर करना पड़ता है। हालाँकि, एक समय पर मरकज़ में निश्चित लोग ही रहते हैं। लोग वहाँ आते-जाते रहते हैं। कभी-कभी तो वहाँ हज़ार से भी अधिक लोग एक साथ रह रहे होते हैं। इतनी भीड़ होती है कि आप दिन में कभी भी बाथरूम जाएँ, अंदर कोई न कोई होता है और आपको 5-7 मिनट इन्तजार करना ही करना पड़ेगा।”

जॉनी ने बताया कि मरकज़ के बाथरूम को रोज साफ़ किया जाता था लेकिन टॉयलेट्स से हमेशा दुर्गन्ध आती ही रहती थी। इतनी संख्या में लोग उसका प्रयोग करते थे कि ऐसा हेमशा होता था। दिल्ली सरकार में स्वास्थ्य विभाग की डायरेक्टर डॉक्टर नूतन मांडेजा ने भी कहा था कि मरकज़ में जिस तरह लोग रहते थे, उसी का पारिणाम है कि आज इतनी संख्या में वहाँ से कोरोना मरीज निकले हैं। उन्होंने कहा था कि वाशरूम और बर्तन साझा करने से ऐसा हुआ।

मरकज़ में स्विमिंग पूल की तरह एक पानी का पूल है, जिसे ‘वुडू’ कहते हैं। ये एक प्रक्रिया है, जिसके तहत समुदाय के लोग नमाज़ पढ़ने से पहले अपने हाथ-पाँव और मुँह को धोते हैं। इसके लिए वहाँ के लोग उसी पानी का प्रयोग करते थे, जिससे वायरस का फैलाव हुआ होगा। जॉनी ने अपने परिवार को नहीं बताया था कि वो दिल्ली में है। वो अभी भी कहता है कि जमात जीवन जीने के सही तौर-तरीके सिखाता है। यहाँ तक कि वहाँ अंदर मोबाइल फोन तक निकालना मना है। बाहर भी सेल्फी वगैरह क्लिक करने पर बाकी लोग ताना देते हैं और उनके मजहब पर सवाल उठाते हैं।

जनवरी में जॉनी को भी सर्दी-बुखार और कफ हो गया था। उसने कोई दवा नहीं ली। वो बताता है कि 20-25 दिन में वो अपने-आप ठीक हो गया। बकौल जॉनी, जमात ने सिखाया है कि डॉक्टरों के पास नहीं जाना चाहिए और अल्लाह में यकीन करना चाहिए। जॉनी कहता है कि वो इन चीजों को पूरी तरह फॉलो नहीं करता, क्योंकि अगर उसकी तबीयत ज्यादा ख़राब हुई तो उसे अस्पताल जाना ही पड़ेगा।

उत्तराखंड की 60 वर्षीय महिला ने दान की उम्रभर की जमा पूँजी, PM-CARES फंड में दिए ₹10 लाख

कोरोना वायरस के कारण पैदा आपदा से निपटने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से PM-CARES में योगदान की अपील की थी। देश का लगभग हर वर्ग अपनी क्षमता के अनुसार इसमें योगदान दे रहा है। कुछ ऐसे भी लोग हैं जो इस दौरान एक उदाहरण बनकर सामने आए हैं। ऐसा ही एक नाम उत्तराखंड की देवकी भंडारी का है।

60 साल की देवकी भंडारी ने अपने जीवनभर की कमाई को PM-CARES फंड में दे दी है। देवकी बताती हैं कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देश के प्रति सेवाभाव से प्रभावित होकर उन्होंने यह निर्णय लिया है।

उत्तराखंड के चमोली जिले के गौचर की निवासी देवकी भंडारी ने 10 लाख रुपए प्रधानमंत्री राहत कोष में जमा करवाकर समाज के सामने कोरोना वायरस की माहमारी के बीच एक बड़ी मिसाल पेश की है।

उन्होंने बताया कि उनके बैंक में एफडी और पेंशन की रकम से कुल 10 लाख रुपए जमा हुए थे। कोरोना संकट को देखते हुए उन्होंने जीवन भर की कमाई इस महामारी से लड़ने के लिए प्रधानमंत्री केयर फंड में दान दे दी है।

देवकी भंडारी के पिता स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। यह पहला अवसर नहीं है जब साठ वर्षीय देवकी भंडारी ने समाज सेवा में हिस्सा लिया हो। उल्लेखनीय है कि देवकी भंडारी की अपनी कोई संतान नहीं है लेकिन उन्होंने एक गरीब मेधावी छात्र को पढ़ाने में भी मदद की। इस बच्चे का खर्च देवकी देवी खुद वहन करती हैं।

केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने अपने ट्विटर एकाउंट से यह जानकारी साझा करते हुए लिखा है, “उत्तराखंड केचमोली जिले में स्थित गौचर से हमारी मातृ शक्ति आदरणीया देवकी भंडारी जी ने PM नरेन्द्र मोदी जी के आह्वान पर अपने जीवन की सम्पूर्ण संचित जमा पूँजी- 10 लाख रुपए की धन राशि #PMCaresFunds में #coronavirus से लड़ने के लिए देश सेवा में समर्पित की है।”

SBI में 10 लाख रुपए PM-CARES फंड में डालने के बाद देवकी भंडारी जी का सन्देश इस लिंक पर सुन सकते हैं;

डॉक्टरों की नहीं सुनी, कोरोना संक्रमित पिता का निकाला जनाजा: 200 लोग हुए क्वारंटाइन

कुछ समय पहले दुबई से लौटे 70 वर्षीय व्यक्ति एक व्यक्ति की मौत की खबर चेन्नई से आई थी। उन्हें 2 अप्रैल को स्टैन्ली मेडिकल अस्पताल में भर्ती कराया गया और 2 घंटे बाद मौत हो गई। अस्पताल प्रशासन ने इस बीच कोविड-19 की जाँच के लिए उनका सैंपल लिया और शव परिजनों को सौंप दिया। परिवारवालों से डॉक्टरों ने कहा कि मृतक कोरोना संक्रमित हो सकते हैं इसलिए तय दिशा-निर्देशों के तहत ही उनका दाह संस्कार करें।

बावजूद इसके मृतक के परिवार ने लोगों को इकट्ठा कर जनाजा निकाला। डॉक्टरों की सलाह नकारते हुए सभी रिवाज़ पूरे किए। 4 मार्च को जब मृतक की रिपोर्ट आई तो पता चला की वे कोरोना पॉजिटिव थे। इसके बाद उनके परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का इल्जाम लगा दिया। अस्पताल प्रशासन ने इसे खारिज करते हुए कहा है कि इस संबंध में मृतक के बच्चों को सब अच्छे से समझाया था।

अब इस मामले में पुलिस ने मृतक के दो बेटों पर मामला दर्ज किया है। न्यू इंडियन एक्प्रेस के मुताबिक, कीलाकरई पुलिस ने मृतक के दो बेटों को “सच्चाई दबाने” के लिए हिरासत में लिया है। इन पर महामारी रोग अधिनियम, तमिलनाडु सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिनियम और आपदा प्रबंधन अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, अस्पताल ने शव WHO प्रोटोकॉल के तहत सील बॉडी बैग में सौंपा था। लेकिन मृतक के बेटों ने इसकी अनदेखी करते हुए बैग से शव निकाल स्नान कराया। लोगों को जुटाकर जनाजा निकाला और पूरे रीति-रिवाज के साथ शव को दफनाया।

कीलाकरई गाँव के प्रशासनिक ऑफिसर मरिमुत्थु ने सोमवार को कीलाकरई पुलिस थाने में इन दोनों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कराया। दोनों भाइयों ने अपने पिता का अंतिम संस्कार इस प्रकार किया जिससे कोरोना वायरस का संक्रमण फैल सकता था। दोनों के ख़िलाफ़ सच्चाई छिपाई के मामले में केस दर्ज हुआ है। रामनाथपुरम के एसपी वी. वरुण कुमार ने बताया कि मृतक को कोरोना वायरस वाले वार्ड में भर्ती किया गया था और उन्हें कोरोना संदिग्ध बताया गया था।

मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल ने उनसे जानकारी छिपाई। इसलिए उन्होंने शव को दफनाते हुए कोई एहतियात नहीं बरता। जानकारी के अनुसार, मृतक के शव को उसी दिन एंबुलेंस से ले जाया गया था और अगले दिन करीब 10 बजे उन्हें दफना दिया गया। बताया जा रहा है कि जनाजे में रामनाथपुरम के विधायक और पूर्व मंत्री एम मणिकंदन सहित कई लोग शामिल हुए थे। इसे देखते हुए करीब 200 लोगों को क्वारंटाइन किया गया है। इसकी सूचना राज्य की स्वास्थ्य सचिव बीला राजेश ने मंगलवार को दी।

सारी स्थिति साफ होने के बाद परिजन अब भी दावा कर रहे हैं कि अस्पताल में न तो उन्हें उनके पिता के कोरोना पॉजिटिव होने की जानकारी दी गई और न ही उनका सैंपल लिया गया। इसके अलावा उनका कहना है कि शव भी उन्हें एक हरे कपड़े में मिला। उनके मुताबिक शनिवार को जब रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो इसकी सूचना उन्हें दी गई। अस्पताल प्रशासन ने परिजनों के सभी इल्जामों को खारिज किया है। उनका कहना है कि मृतक का शव COVID-19 प्रोटोकॉल के अनुसार लपेटा गया था और चेतावनी के साथ सौंपा गया था कि वे संक्रमित हो सकते हैं।

जारी हुआ राम मंदिर ट्रस्ट का लोगो: दिखी सूर्यवंशी राजा रामचंद्र की छवि, भगवा का भी जलवा

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने हनुमान जयंती के शुभ अवसर पर अपना लोगो जारी किया है। इसमें भगवान श्रीराम की तस्वीर के पीछे सूर्य बना दिख रहा है, जो उनके सूर्यवंशी राजा होने की पहचान है। साथ ही इसमें हनुमानजी की दो तस्वीरें बनी हुई हैं, जिसमें वो अपने आराध्य श्रीराम को प्रणाम करने की मुद्रा में बैठे हुए हैं। लोगो में पीले और लाल रंग से सूर्य की लपटों को दिखाया गया है। लाल घेरे पर ट्रस्ट का नाम लिखा है और बीच में भगवान श्रीराम की तस्वीर है।

प्रतीक चिह्न की ऊपरी परिधि में ट्रस्ट का नाम लिखा है, जबकि नीचे ‘रामो विग्रहवान धर्म:’ अंकित किया गया है, जिसका अर्थ है- भगवान श्रीराम धर्म के साक्षात् साकार रूप हैं। इस तस्वीर में भगवान अभयदान की मुद्रा में दिख रहे हैं। लोगो में लाल और पीले रंग के अलावा भगवा रंग का भी प्रयोग किया गया है। किसी भी तरह के पत्राचार या अन्य ज़रूरी चीजों के लिए ट्रस्ट अब इसी लोगो का प्रयोग करेगा। आधिकारिक कार्यों में इस लोगो का प्रयोग किया जाएगा।

लेटर हेड सहित अन्य आवश्यक कागज़ातों व दस्तावेजों पर इसी प्रतीक चिह्न को अंकित किया जाएगा। बता दें कि इससे पहले श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ने कोरोना वायरस से संक्रमण से उपजी आपदा के बीच पीएम केयर्स फंड में दान दिया था। ये दान राम मंदिर की तरफ से देश को दिया गया है। अब आप सोच रहे होंगे कि भव्य राम मंदिर का तो अभी निर्माण भी नहीं हुआ है लेकिन इसकी तरफ से पीएम केयर्स फंड में दान कैसे दे दिया, तो आपको बता दें कि ऐसा सच में हुआ है।

विनोद बंसल ने ‘जय श्री राम’ लिखते हुए इस बात की सूचना दी और साथ ही जिलाधिकारी के साथ ट्रस्टियों की तस्वीर भी शेयर की, जिसमें वो चेक सौंपते हुए दिख रहे हैं। साथ ही उन्होंने पीएम केयर्स फंड के अकाउंट डिटेल्स शेयर किए, ताकि अन्य लोग भी डोनेट कर सकें। बता दें कि पीएम केयर्स फंड में एक हफ्ते में 6500 करोड़ रुपए की धनराशि जमा हो गई है। जहाँ तक राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की बात है, इस ट्रस्ट की घोषणा की जानकारी ख़ुद पीएम मोदी ने दी थी। राम मंदिर के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला आने के बाद इसका गठन किया गया था।

घर में BJP कैंडिडेट की लाश, बाहर पेड़ से लटके थे पति: दीया जलाने पर TMC ने कही थी निशान बनाने की बात

शकुंतला हलदर को बीजेपी ने पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनावों के लिए उम्मीदवार घोषित कर रखा था। लेकिन, 7 अप्रैल को अपने ही घर में वह संदिग्ध परिस्थितियों में मृत मिलीं। उनका शव घर के भीतर बिस्तर पर पड़ा था। उनके पति चंद्र हलदर घर के पिछले हिस्से में आम के पेड़ से लटके मिले। घटना कुलताली के कनकासा गॉंव की है।

हत्या का आरोप सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस के गुंडों पर लग रहा है। यह भी कहा जा रहा है कि हत्या के बाद टीएमसी के गुंडों ने घर में घुसकर मृतक दंपती के बच्चों को भी धमकाया। इन बच्चों में से एक की उम्र करीब 16 साल तो दूसरे की 11 साल है। बंगाल बीजेपी ने अपने ट्विटर हैंडल से बताया है कि पंचायत चुनावों के लिए बीजेपी उम्मीदवार शकुंतला हलदर और उनके पति चंद्र हलदर की निर्मम तरीके से हत्या कर दी गई है। जब पूरी दुनिया कोरोना से लड़ने में जुटी है पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हत्याओं का सिलसिला जारी है।

इस घटना को 5 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर कोरोना के खिलाफ लड़ाई में एकजुटता दिखाने के लिए घरों की बत्ती बुझाकर दीया, टॉर्च, मोमबत्ती जलाने की अपील से भी जोड़कर देखा जा रहा है। कहा जा रहा है कि इसको लेकर इलाके के कई परिवारों को टीएमसी के लोगों ने धमकी दी थी। तृणमूल से जुड़े कवि प्रसून भौमिक ने एक फेसबुक पोस्ट में दावा भी किया था कि 5 अप्रैल को रात 9 बजे ऐसे लोगों के घरों के दरवाजे पर निशान लगा कर चिह्नित किया जाएगा, जहाँ लाइट्स ऑफ होंगे। उन्होंने कहा था कि ऐसे लोगों के दरवाजे पर चॉक से निशान बनाया जाएगा।

मंगलवार की सुबह स्थानीय लोगों ने चंद्र हलदर का शव पेड़ से लटकते देखा। पड़ोसी उनके घर में गए तो शकुंतला बिस्तर पर मृत पड़ी थी। इसके बाद ग्रामीणों ने घटना की जानकारी पुलिस को दी। दोनों का शव मंगलवार को दिनभर थाने में पड़ा रहा। टीएमसी के गुंडों के दबाव में पुलिस शवों को पोस्टमार्टम के लिए नहीं भेज रही थी। बीजेपी नेताओं के इस पर नाराजगी जताने के बाद शव पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए।

शकुंतला और उनके पति ईंट भट्ठे पर काम करते थे। बताया जा रहा है कि बुधवार की सुबह TMC के गुंडे मृतक दंपती के घर पहुॅंचे और उनके बच्चों को धमकी दी। खबर लिखे जाने तक इस मामले में शिकायत दर्ज नहीं किए जाने की सूचना थी।

गौरतलब है कि राजनीतिक हिंसा के लिए बदनाम पश्चिम बंगाल में यह पहली घटना नहीं है जब बीजेपी कार्यकर्ता की हत्या का आरोप टीएमसी के गुंडों पर लगा है। मार्च में गंगा सागर में बीजेपी के बूथ प्रेसिडेंट देवाशीष मंडल की हत्या कर दी गई थी। फरवरी में सोनारपुर में बीजेपी नेता नारायण विश्वास की निर्मम हत्या कर दी गई थी। उनकी हत्या का आरोप भी टीएमसी पर लगा था। गुंडों ने पहले उन्हें गोली मारी और जब वो जख्मी होकर नीचे गिर गए तो धारदार हथियार से उनकी हत्या कर दी।

इसी साल मार्च में अमित शाह के दौरे के दौरान टीएमसी के गुंडों ने भाजपा के कार्यालय में तोड़-फोड़ करने के बाद आग के हवाले कर दिया था। भाजपा ने उस समय आरोप लगाया था कि इस घटना को तृणमूल कॉन्ग्रेस के उपद्रवियों ने अंजाम दिया है, क्योंकि राज्य में भाजपा की संगठनात्मक शक्ति बढ़ रही है और टीएमसी इससे भयभीत है।

शाह की रैली में जाने की वजह से बीजेपी नेता अर्चना विश्वास के घर पर फायरिंग की गई थी। कोलकाता के शहीद मीनार मैदान में हुई इस रैली से भाजपा कार्यकताओं पर हमले हुए थे। भाजपा ने आरोप लगाया था कि महानगर के हेस्टिंग्स व हुगली जिले में शाह की सभा से लौट रहे कार्यकर्ताओं पर टीएमसी के गुंडों ने हमला किया। उनका कहना था कि इन घटनाओं में दर्जन भर कार्यकर्ता जख्मी हुए। इससे पहले टीएमसी के गुंडों ने जलपाईगुड़ी जिले में सात भाजपा समर्थकों के घरों में तोड़-फोड़ के बाद आग लगा दी थी।