महाराष्ट्र में कॉन्ग्रेस, एनसीपी और शिवसेना के बीच चल रही साझा बैठक ख़त्म हो गई है। एनसीपी के मुखिया शरद पवार ने बैठक के बाद जानकारी देते हुए बताया कि उद्धव ठाकरे के नाम पर सभी दलों में सहमति बन गई है। इससे साफ़ हो गया है कि शिवसेना सुप्रीमो उद्धव महाराष्ट्र के नए सीएम होंगे। पवार ने आगे बताया कि अभी तीनों दलों के बीच और भी बैठकें होंगी। शनिवार (नवंबर 33, 2019) को भी बैठक प्रस्तावित है।
Consensus on Uddhav to lead Maha govt; talks in progress on other issues: Pawar
उद्धव ठाकरे ने बैठक के बाद कहा कि तीनों दल किसी भी मुद्दे को टालना नहीं चाहते हैं और सभी मसलों पर आम सहमति के बाद ही काम किया जाएगा। शरद पवार ने साफ़ कर दिया है कि महाराष्ट्र की नई सरकार का नेतृत्व उद्धव ठाकरे करेंगे। इससे पहले एनसीपी के प्रवक्ता नवाब मलिक ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा था कि पवार ने ‘चाणक्य’ को पटखनी दे दी।
उधर शिवसेना सांसद संजय राउत ने भी इस बात की पहले ही पुष्टि कर दी थी। उनसे जब पूछा गया था कि क्या शरद पवार उद्धव को मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं, तो उन्होंने कहा कि ये सूचना ग़लत है। साथ ही राउत ने कहा कि महाराष्ट्र की जनता उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री बनते देखना चाहती है। पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता पृथ्वीराज चौहान ने कहा कि देवेंद्र फडणवीस के ख़राब शासन का अंत करने के लिए शिवसेना का समर्थन करना ज़रूरी था। उन्होंने बताया कि उनकी पार्टी ने शिवसेना को समर्थन देने का निर्णय लिया है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राजस्थान सरकार के उस आदेश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दिया है, जिसमें पाकिस्तानी हिन्दू शरणार्थियों को वापस भेजने की बात कही गई थी। गृह मंत्रालय ने बड़ा क़दम उठाते हुए अशोक गहलोत सरकार के आदेश पर रोक लगा दी है। विदेशियों के प्रत्यर्पण के सम्बन्ध में गृह मंत्रालय ने अपनी शक्ति का इस्तेमाल करते हुए इस आदेश पर रोक लगाई है। गृह मंत्रालय के कुछ अधिकारियों के साथ-साथ सीमावर्ती क्षेत्रों के कुछ अधिकारियों को भी इस सम्बन्ध में निश्चित अधिकार दिए गए हैं। अब मंत्रालय ने दखल देते हुए हिन्दुओं के प्रत्यर्पण को रोक दिया है।
बता दें कि राजस्थान में अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार ने हिन्दुओं के लिए भारत छोड़कर पाकिस्तान चले जाने का आदेश निकाला था। राज्य सरकार का यह आदेश उनके लिए था जो पाकिस्तान के सिंध प्रांत से धार्मिक वीजा पर भारत आए थे। दरअसल यह सभी हिन्दू हैं जो पाकिस्तान से विस्थापित होकर भारत में रह रहे हैं।
#Breaking | MASSIVE TIMES NOW IMPACT.@PIBHomeAffairs has put a stay on Rajasthan Govt’s order to deport persecuted Hindus.
इन सभी के परिवार जैसलमेर और उसके आसपास के सीमावर्ती इलाकों में रह रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा वक़्त में इन परिवारों के 19 सदस्य यहाँ रह रहे हैं। इनमें से तीन सदस्यों को सीबीआई और जिला प्रशासन की टीम पाकिस्तान चले जाने का नोटिस थमा चुकी थी। इन शरणार्थियों के पक्ष में आवाज़ बुलंद करते रहे जयपुर के अमरेंद्र रत्नू ने बताया-
“राजस्थान पुलिस इन लोगों को वाघा-अटारी बॉर्डर के रास्ते पाकिस्तान डिपोर्ट करना चाहती है मगर हम पूरा प्रयास कर रहे हैं कि इसे रुकवाया जाए। इसके लिए सुबह से ही लगतार हम ट्वीट भी कर रहे हैं। इस सम्बन्ध में हमारी बात अरुण कुमार और संघ के अन्य बड़े नेताओं से हुई है। होम मिनिस्टर तक बात चली गई है। हम इन्हें डिपोर्ट तो नहीं होने देंगे, हमें सतत प्रेशर बना कर रखना है।”
अब गृह मंत्रालय के इस क़दम से ये हिन्दू शरणार्थी भारत में रह पाएँगे। पाकिस्तान में हिन्दुओं व सिखों की स्थिति काफ़ी बदतर है और उनके साथ मानवीय व्यवहार किया जाता है। वहाँ अल्पसंख्यकों पर फ़र्ज़ी ईशनिंदा क़ानून लगा कर उन्हें सज़ा देने की कई घटनाएँ सामने आई हैं।
कोयम्बटूर में एक सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल के एक 65 वर्षीय कैथोलिक पादरी एंटनी राज को पुलिस ने गुरुवार (21 नवंबर) को गिरफ़्तार कर लिया। पादरी की गिरफ़्तारी इसलिए हुई क्योंकि उसने कुछ छात्राओं को कथित तौर पर अपने मोबाइल फोन पर सेक्सुअल कंंटेंट (यौन सामग्री) खोलने के लिए मजबूर किया था।
कैथोलिक पादरी, जो शहर में एक सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल के कॉरस्पॉण्डेन्ट के रूप में सेवा दे रहा था। पुलिस ने बताया कि मारिया एंटनी राज, जो शहर के गाँधीपुरम में सेंट मैरी हाई स्कूल में कॉरस्पॉण्डेन्ट के तौर पर कार्यरत था, उसने कई बार छात्राओं को अपने मोबाइल फोन पर सेक्सुअल कंटेंट खोलने के लिए मजबूर किया था। उसकी इस हरक़त से क़रीब पाँच छात्राएँ प्रभावित थी।
छात्राओं की शिक़ायत के बाद, उनके माता-पिता ने कॉरस्पॉण्डेन्ट को हटाने के लिए स्कूल प्रबंधन से कहा था। जब उसे स्कूल से नहीं निकाला गया, तो माता-पिता ने पुलिस से सम्पर्क किया। स्कूल के एक अधिकारी ने कहा कि अभिभावकों ने सोमवार (18 नवंबर) को उनसे सम्पर्क किया और कॉरस्पॉण्डेन्ट की शिकायत की। अधिकारी ने कहा, “उन्होंने बुधवार को फिर से इस मुद्दे का उठाया और हमें उसे हटाने के लिए कहा।”
इस मामले की छानबीन के लिए गुरुवार (21 नवंबर) को पुलिस ने स्कूल का दौरा किया और प्रभावित छात्रों, उनके माता-पिता और स्कूल प्रबंधन से पूछताछ की। बाद में आरोपित को ऑल वुमेन पुलिस स्टेशन, कोयम्बटूर सेंट्रल ले जाया गया। वहाँ उसके ख़िलाफ़ प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस (POCSO) एक्ट, 2012 की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।
ख़बर के अनुसार, पुलिस उपायुक्त (क़ानून-व्यवस्था) एल बालाजी सरवनन ने बताया कि आरोपित को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस सूत्रों ने कहा कि इस बात की जाँच भी की जा रही है कि स्कूल में इस तरह की घटनाएँ हुई थी या नहीं। सूत्रों ने यह भी कहा कि वे प्रभावित बच्चों को परामर्श और चिकित्सा जाँच के लिए भेजेंगे ताकि यह पता चल सके कि कहीं, वो किसी तरह की मानसिक पीड़ा से ग्रसित तो नहीं थी।
स्कूल की हेडमिस्ट्रेस एसी अनीता ने कहा कि राज एक सेवानिवृत्त व्यक्ति थे, जो कॉरस्पान्डन्ट के रूप में सेवा दे रहे थे। इस घटना के बाद उन्हें पद से हटा दिया गया था, और आगे उनकी सेवा बहाल नहीं की जाएगी। वहीं, इस बात का भी पता चला कि राज कोयम्बटूर सूबे (लैटिन संस्कार) से जुड़ा हुआ है।
बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी (बीएचयू) के संस्कृत विद्या धर्म-विज्ञान संकाय में फिरोज खान की नियुक्ति को लेकर विरोध को आज 16वें दिन छात्रों ने पीएमओ के दखल पर विराम दे दिया है। लगातार प्रशासन छात्रों पर दबाव बना रहा है कि छात्र धरना ख़त्म कर दें लेकिन छात्र विराम देने के बाद भी अभी अपनी माँगों पर बने हुए हैं। छात्रों से पीएमओ और BHU प्रशासन ने इस मुद्दे के समाधान के लिए 10 दिन का समय माँगा है।
छात्रों ने कल ही प्रशासन को अपना माँग पत्र सौंपते हुए कई सवालों का विश्वविद्यालय प्रशासन से जवाब माँगा था। जिसे लेकर देर रात SVDV के संकाय प्रमुख, अन्य विभागाध्यक्षों और VC के बीच मीटिंग चली थी लेकिन किसी भी नतीजे पर नहीं पहुँचा गया। छात्रों का कहना है जब तक हमारी माँगों का समाधान नहीं होता और फिरोज खान को यहाँ से हटाया या स्थान्तरित नहीं किया जाता तब तक छात्र कक्षा और 2 दिसंबर से होने वाली परीक्षाओं का बहिष्कार जारी रखेंगे। छात्र कल पीएमओ को ज्ञापन और अपनी माँगों की कॉपी भी सौंपने जाएँगे।
आंदोलनरत SVDV के छात्रों का वाइसचांसलर से सवाल
इस नियुक्ति प्रक्रिया में विश्वविद्यालय ने यूजीसी के किस शार्ट लिस्टिंग प्रक्रिया को अपनाया है?
विश्वविद्यालय संविधान के अनुसार नियुक्ति प्रक्रिया सम्पन्न हुई है?
क्या बीएचयू एक्ट के 1904, 1096, 1915, 1955, 1966 व 1969 एक्ट को केंद्र में रखकर यह नियुक्ति की गई है?
संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के साहित्य विभाग में क्या संकाय के अन्य सभी विभागों के अनुरूप ही शार्ट लिस्टिंग हुई है?
क्या संकाय के सनातन धर्म के नियमों को ध्यान में रखकर शार्ट लिस्टिंग की गई है?
SVDV BHU के छात्रों का माँग पत्र SVDV BHU के छात्रों का माँग पत्र
बता दें कि इस विरोध प्रदर्शन के विराम की कहानी पीएमओ के दखल के बाद लिखी गई। आज ही इस मामले की गूँज प्रधानमंत्री तक पहुँची थी। और प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस सम्बन्ध में रिपोर्ट तलब की है। पीएमओ ने इस पूरे बवाल को लेकर BHU प्रशासन से रिपोर्ट भी माँगी। आनन-फानन में मंडलाधिकारी दीपक अग्रवाल ने विदेश दौरे पर होने के बावजूद पीएमओ को रिपोर्ट भेजी। अब प्रशासन एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रहा है, जिसे प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजा जाएगा। छात्रों ने आरोप लगाया है कि कई विभागों में अयोग्य नियुक्तियों के जरिए विश्वविद्यालय को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।
बता दें कि पहली बार बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय (SVDV) के साहित्य विभाग में एक मुस्लिम सहायक प्रोफेसर डॉ फिरोज खान की नियुक्ति 5 नवम्बर को हुई। संकाय के विद्यार्थियों को जैसे ही इसकी जानकारी हुई, इस नियुक्ति के खिलाफ विश्वविद्यालय में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया था और तब से लगातार प्रदर्शन जारी था।
बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी के ‘धर्म विज्ञान संकाय’ में फ़िरोज़ ख़ान की नियुक्ति के ख़िलाफ़ चल रहे छात्रों के विरोध प्रदर्शन को दबाने की कोशिश हो रही है। छात्रों का कहना है कि हिन्दू कर्मकांड के विषय को एक मुस्लिम कैसे पढ़ा सकता है, जो यज्ञोपवीत और शिखा धारण नहीं करता। कई तबकों में अफवाह फैलाई जा रहा है कि संस्कृत पढ़ाने के लिए फ़िरोज़ ख़ान का विरोध हो रहा है जबकि छात्र साफ़-साफ़ कहते हैं कि अगर फ़िरोज़ ख़ान संस्कृत पढ़ाते हैं तो उनका स्वागत है। इस सम्बन्ध में ऑपइंडिया ने बीएचयू के ‘संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान’ संकाय के छात्र आनंद मोहन झा से बात की। झा इस विरोध प्रदर्शन के नेतृत्वकर्ताओं में शामिल हैं।
इस पूरे प्रकरण के दौरान ‘इंडिया टुडे’ का एक इंटरव्यू चर्चित हुआ, जिसमें पत्रकार राहुल कँवल ने विरोध-प्रदर्शन में शामिल छात्रों का नेतृत्व कर रहे चक्रपाणि ओझा से बातचीत की। इसमें राहुल कँवल ने छात्रों की बात सुनने से इनकार कर दिया और उनका ऑडियो म्यूट कर दिया। इस दौरान उन्होंने महोपनिषद के श्लोक का एक भाग ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ का ग़लत उच्चारण करते हुए छात्रों को नीचा दिखाया। आनंद मोहन ने बताया कि जहाँ छात्रों ने अपनी बात रखी, वहाँ ‘इंडिया टुडे’ ने उनकी आवाज़ म्यूट कर दी।
आनंद मोहन झा ने बताया कि ‘इंडिया टुडे’ के शो में राहुल कँवल व अन्य अतिथियों का लहजा काफ़ी ग़लत था, जिसका बीएचयू के छात्र सख्त विरोध करते हैं। उन्होंने कहा कि राहुल कँवल ने बीएचयू के छात्रों के साथ काफ़ी गन्दा व्यवहार किया। प्रदर्शनकारी छात्रों पर दबाव पैदा किया जा रहा है ताकि वो आंदोलन से पीछे हट जाएँ। झा ने बताया कि छात्र कहीं न कहीं ख़ासा दबाव का सामना कर रहे हैं। ऑपइंडिया से बात करते हुए बीएचयू के ‘संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान’ संकाय के छात्र आनंद मोहन झा ने बताया कि व्याकरण विभाग के प्रोफेसर बृजभूषण ओझा ने छात्रों के साथ गुंडागर्दी की।
The tone & manner in which @rahulkanwal spoke to the BHU student is the reason why Lutyens/the Delhi lot are despised by the rest of India. I may disagree with the student,but this is no way for an anchor to talk to anyone. Boorish elitism on display https://t.co/Yslln6DH1y
विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों में से एक का प्रोफेसर ओझा ने हाथ पकड़ लिया और उसे खींचने लगे। इस स्थिति को देख अन्य छात्रों ने अपने साथ को वापस खींचना शुरू किया। उक्त छात्र का हाथ पकड़ कर जबरदस्ती खींचते हुए प्रोफेसर ओझा ने कहा- “चलो, तुम मेरे साध उधर अंदर चलो।” ओझा ने सभी छात्रों के सामने खुलेआम ऐसा किया। इसके अलावा एक अन्य प्रोफेसर रामनारायण द्विवेदी का भी नाम सामने आया है। आनंद मोहन झा ने बताया कि प्रोफेसर द्विवेदी विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर दबाव बनाने में लगे हुए हैं। उन्होंने धमकी दी कि छात्रों का करियर चौपट कर दिया जाएगा।
प्रोफेसरों ने छात्रों से कहा कि जो हो रहा है उसे होने दो और जैसा विश्वविद्यालय प्रशासन चाहता है, वैसा करो।प्रोफेसरों ने धमकी देते हुए कहा- “हम लोग तो बाहर बैठे रहेंगे फिर भी हमें रुपए मिलते रहेंगे, तुमलोग अपना सोचो।” आनंद मोहन झा के अनुसार, प्रोफेसरों ने कहा कि इधर धरना जितना लम्बा चलेगा, वो लोग बैठ कर आराम से पैसा खाते रहेंगे। उन्होंने बताया कि बाद में प्रोफेसर अपने ही बयान से पलट गए। बीएचयू के कई पुराने छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मुलाक़ात की है। छात्रों की वीसी के साथ भी बैठक हुई। झा ने बताया कि इस बैठक के दौरान भी वीसी का रवैया काफ़ी दबावपूर्ण था।
बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में विरोध प्रदर्शन करते छात्र
रिसर्च कर रहे छात्रों के गाइड होते हैं, जिसके लिए किसी प्रोफेसर को असाइन किया जाता है। उन्हें सुपरवाइजर भी कहा जाता है। संकाय के छात्र आनंद मोहन झा ने बताया कि जितने भी जिन प्रोफेसरों (गाइड) ने कभी छात्रों को डाँटा तक नहीं, उनका रवैया भी अब काफ़ी दबावपूर्ण हो गया है। उन्होंने आशंका जताई कि सुपरवाईजरों पर भी ऊपर से काफ़ी दबाव बनाया गया है। उन्होंने बताया कि ये प्रोफेसर लगातार छात्रों के आत्मविश्वास को कम करने में लगे हुए हैं।
फिलहाल जेएनयू के छात्रों का आंदोलन जारी है क्योंकि आनंद मोहन झा और चक्रपाणि ओझा सहित सभी छात्रों ने पीछे हटने से इनकार कर दिया है। इन्हें शंकराचार्य का भी समर्थन प्राप्त हुआ है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी प्रशासन से इन पूरे कांड की रिपोर्ट तलब की है। छात्रों ने 15 दिनों के आंदोलन के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय के निवेदन पर धरना ख़त्म कर दिया लेकिन कहा कि लड़ाई जारी रहेगी। अब छात्र प्रधानमंत्री को ज्ञापन देने के लिए कार्यालय जाएँगे। हालाँकि, तब तक परीक्षाओं का बहिष्कार किया जाएगा।
राजस्थान के जालोर जिले के मांडवला गाँव से महिला सरपंच रेखा देवी की एक वीडियो वायरल हुई है। वीडियो में देखा जा सकता है कि महिला सरपंच जेसीबी को पकड़कर उसपर लटक रही हैं और आसपास मौजूद लोग उन्हें उतारने का प्रयास कर रहे हैं।
हालाँकि, सोशल मीडिया पर जहाँ इस वीडियो को देखने के बाद लोग रेखा देवी का तरह-तरह से मजाक उड़ा रहे हैं। तो वहीं, मीडिया रिपोर्ट्स में इसे रेखा देवी पर हुआ हमला बताया जा रहा है।
#WATCH: Rekha Devi, sarpanch of Mandawala village tries to climb a JCB machine in an attempt to stop anti-encroachment drive in Jalore, Rajasthan. (21.11) pic.twitter.com/fxpd93TvVi
जानकारी के अनुसार ये पूरा मामला सरकारी जमीन पर हुए अतिक्रमण से संबंधित था और रेखा देवी इसी समस्या के समाधान के लिए मौक़े पर जेसीबी लेकर पहुँची थीं। लेकिन इसी बीच अतिक्रमी के पक्ष की ओर से एक अन्य जेसीबी वहाँ आई और सरपंच की गाड़ी को तोड़ने का प्रयास किया। जब रेखा देवी बीच में आईं तो उसने उनपर भी हमला बोल दिया।
कहा जा रहा है कि जिस समय दूसरे पक्ष की जेसीबी ने महिला सरपंच की गाड़ी पर हमला किया, उस समय 2 वार्ड पंच उसमें बैठीं हुईं थी। जेसीबी लगातार 2-3 बार उनकी गाड़ी में टक्कर मार चुकी थी। जिस कारण उनकी गाड़ी बार-बार पलटने से बची थी।
इसी बात से नाराज सरपंच दौड़कर अपनी गाड़ी के आगे आकर खड़ी हुईं और दूसरे पक्ष का विरोध किया। जिसके बाद जेसीबी ने उनपर भी हमला कर दिया और वे भी उसपर लटक गईं। जेसीबी चालक ने 2-3 बार उन्हें पटकने का प्रयास किया लेकिन वह जेसीबी के पंजे को कसके पकड़ी रहीं। थोड़ी देर बाद गाँव वालों ने सहारा देकर उन्हें जेसीबी से नीचे उतारा। तभी आरोपित अपनी जेसीबी लेकर फरार हो गया।
बता दें इस मामले में एक दूसरा पक्ष ये भी दिखाया जा रहा है कि सरपंच खुद ही अतिक्रमण हटाने आए दस्ते से झगड़ने लगीं थी। इसलिए ये सब हुआ। लेकिन न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार सरपंच ने इस पक्ष का खंडन किया है और जालोर डीएसपी जयदेव सियाग ने कहा है कि उन्हें महिला सरपंच की ओर से शिकायत मिली है। जिसके बाद उन्होंने फरार आरोपित की तलाश शुरु कर दी है।
हिंदू समाज पार्टी के अध्यक्ष कमलेश तिवारी की नृशंस हत्या के बाद उनकी पत्नी किरण तिवारी को मारने की साजिश रची जा रही है। उनका आरोप है कि बीते सप्ताह उन्हें पत्र भेजकर जान से मारने की धमकी दी गई।
किरण तिवारी ने नाका थाने में महाराष्ट्र के लातूर निवासी गणेश नागो राव आप्टे के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि 16 नवंबर की शाम 4 बजे खुर्शेदबाग स्थित घर के पते पर एक बंद लिफाफा भेजा गया था। इसे खोलने पर उसके भीतर से नौ पन्ने का एक पत्र निकला। दो पन्ने में उर्दू भाषा में कुछ लिखा हुआ था। किरण का कहना है कि उन्होंने उर्दू के पन्नों में लिखी बातों का हिंदी में अनुवाद कराया तो धमकी की बात सामने आई। किरण तिवारी ने 18 नवंबर को एफआईआर दर्ज कराया। इसके साथ ही उन्होंने अपनी सुरक्षा के लिए सरकार से जेड प्लस कवर की भी माँग की है।
#लखनऊ हिंदूवादी नेता कमलेश तिवारी की हत्या के बाद अब पत्नी को मिली धमकी
कमलेश तिवारी की पत्नी के आवास पर पत्र से मिली जान से मारने की धमकी
पत्र महाराष्ट्र के लातूर के मुडखेड ताल्लुका स्थित शिवाजी चौक अंबेडकरनगर निवासी गनेश नागो राव आप्टे के नाम से भेजा गया था। इंस्पेक्टर ने बताया कि महाराष्ट्र पुलिस से संपर्क कर पत्र भेजने वाले के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। अब मामले में लखनऊ पुलिस महाराष्ट्र पुलिस से संपर्क कर रही है।
गौरतलब है कि 18 अक्टूबर को हिन्दूवादी नेता कमलेश तिवारी की हत्या कर दी गई थी। दिल्ली के खुर्शेदबाग इलाक़े में स्थित कमलेश तिवारी के घर में 2 लोग भगवा वस्त्रों में आए और उन्होंने उनकी हत्या कर दी। हत्यारे मिठाई के डब्बे में हथियार ले गए थे। दोनों हत्यारों की पहचान अशफ़ाक़ और मोईनुद्दीन के रूप में हुई।
पुलिस ने कमलेश तिवारी की हत्या मामले में सभी आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। बता दें कि अशफ़ाक़ ने फ़र्ज़ी फेसबुक अकाउंट बना कर ख़ुद को हिंदूवादी दिखाया था और राम मंदिर के लिए भीड़ जुटाने का लालच देकर कमलेश तिवारी से मिलने का समय माँगा था।
महज़ डेढ़ मिनट के अंदर हत्या की इस वारदात को अंजाम देने वाले आरोपितों ने अपना ज़ुर्म क़बूलते हुए कहा कि वो लोग कमलेश तिवारी का सिर धड़ से अलग करना चाहते थे। इसके बाद सिर को हाथ में लेकर वीडियो बनाकर दहशत फैलाना चाहते थे। ऐसा करके वो लोगों को चेताना चाहते थे कि अब कोई धार्मिक विवादित टिप्पणी न करे।कमलेश तिवारी की हत्या के बाद उनकी पत्नी किरण तिवारी को हिन्दू समाज पार्टी का अध्यक्ष बनाया गया।
जया प्रदा के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करने और आपत्तिजनक भाषण देने के मामले में कोर्ट ने समाजवादी पार्टी के सांसद आजम खान के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया है। इस मामले में आजम खान को गुरुवार (नवंबर 21, 2019) को कोर्ट में पेश होना था लेकिन वह उपस्थित नहीं हुए। जिसके बाद एडीजी-6 की कोर्ट ने वारंट जारी किया। इस पर अगली सुनवाई 2 दिसंबर को होगी।
उल्लेखनीय है कि लोकसभा चुनाव के प्रचार के दौरान शाहबाद में आयोजित जनसभा में आजम खान ने भाजपा की प्रत्याशी और पूर्व सांसद जया प्रदा के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। आजम ने जया प्रदा की तरफ इशारा करते हुए कहा था, “उसकी असलियत समझने में आपको 17 साल लग गए। मैं तो 17 दिन में ही पहचान गया कि इनके नीचे का जो अंडरवियर है, वो भी खाकी रंग का है।“ यह टिप्पणी करते हुए आजम खान ये दिखाने की कोशिश कर रहे थे कि जया प्रदा के संबंध आरएसएस से थे और जया ने जो उनके खिलाफ आरोप लगाए थे, वो भी आरएसएस की साज़िश थी।
आजम ने जब यह शर्मनाक टिप्पणी की थी, उस समय सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी मंच पर मौजूद थे। अखिलेश यादव ने आज़म के इस महिला-विरोधी बयान पर उनका बचाव करते हुए कहा था, “आजम खान के बयान को गलत परिपेक्ष्य में पेश किया गया। उन्होंने ऐसा किसी और के लिए कहा था। संघ के कपड़ों को लेकर दिया गया उनका बयान किसी और के लिए था। मीडिया इस मामले में गलती कर रही है, कुछ और ही दिखाया जा रहा है।”
आजम खान की इस अभद्र टिप्पणी के साथ साथ उन पर आचार संहिता उल्लंघन का मुकदमा भी शाहबाद कोतवाली दर्ज किया गया था। पुलिस ने विवेचना के बाद इस मामले में चार्जशीट लगा थी। इस मामले की सुनवाई एडीजे-6 की कोर्ट में चल रही है। अदालत में 13 नवम्बर को इस मामले की सुनवाई होनी थी। लेकिन आजम नहीं पहुॅंचे। जिसके बाद रामपुर की जिला अदालत ने आजम खान के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है। इस मामले की सुनवाई की अगली तारीख 26 नवम्बर तय की गई है।
इसके अलावा सेना पर विवादित बयान देने के मामले में पुलिस की चार्जशीट पर आजम खान के वकील ने आपत्ति जताई है। इस मामले में अगली सुनवाई 3 दिसंबर को होनी है। आजम के बयान पर एक साल पहले बीजेपी नेता आकाश सक्सेना ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
इससे पहले आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम के जन्म प्रमाण पत्र मामले में आजम, उनकी पत्नी और बेटे के खिलाफ रामपुर कोर्ट से गैर जमानती वारंट जारी हुआ था। यह मुकदमा भी बीजेपी नेता आकाश सक्सेना ने आईपीसी की धारा 420, 467, 468 और 471 के तहत आजम खान और उनके परिवार के खिलाफ दर्ज करवाया था।
गुरु नानक देव की 550वीं जयंती के दौरान दो प्रमुख अलगाववादी ब्रिटिश सिख संगठनों ने लंदन के सिटी हॉल में करतारपुर गलियारे के लिए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को ‘लाइफटाइम अचीवमेंट’ पुरस्कार से सम्मानित किया। द पीएम फॉर यूके एंड यूरोप में पाकिस्तान के पीएम फॉर ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट के प्रवक्ता साहिबज़ादा जहाँगीर ने गुरुवार (21 नवंबर) को इमरान ख़ान की ओर से यह पुरस्कार प्राप्त किया।
सिटी हॉल में कार्यक्रम का आयोजन सिख नेटवर्क, सिख फेडरेशन (यूके) और लंदन के मेयर सादिक ख़ान के सहयोग से लंदन विधानसभा के सदस्य डॉ ओंकार सहोता ने किया था। सिख फेडरेशन (यूके) को खालिस्तान का समर्थक कहा जाता है। इस कार्यक्रम में लेबर पार्टी की नेता प्रीत कौर गिल, डिप्टी मेयर डेबी वीकस-बर्नार्ड, सतपाल सिंह, जस सिंह, कैनन मार्क पॉल्सन और सिख समुदाय के लोग शामिल हुए।
साहिबज़ादा जहाँगीर ने पुरस्कार के लिए सिख समुदाय के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि करतारपुर गलियारा पाकिस्तान से शांति का संदेश है। इसके अलावा उन्होंने कहा, “करतारपुर कॉरिडोर ने सिखों के विचारों को संस्कृतियों और देशों के बीच एक पुल के रूप में सुदृढ़ किया।”
I was humbled & honoured to receive the Life Achievement Award on behalf of the great man PM Imran Khan given in london by the Sikh Community. https://t.co/FS4ZIw9xiy
उन्होंने कहा कि यह इमरान ख़ान की सरकार के लिए गर्व की बात है कि करतारपुर कॉरिडोर का “अद्भुत कार्य” आठ महीनों की सबसे कम संभव अवधि में पूरा हुआ और यह सब इमरान ख़ान के प्यार, शांति और मानवता के लिए जुनून के कारण संभव हो सका।
ग़ौर करने वाली बात यह है कि सिख फेडरेशन यूके की जड़ें सिख चरमपंथ और खालिस्तान आंदोलन से जुड़ी हुई हैं। इसके अधिकांश वरिष्ठ सदस्य अंतरराष्ट्रीय सिख यूथ फेडरेशन (ISYF) के पूर्व सदस्य हैं, जिन्हें आतंकवाद विरोधी क़ानूनों के तहत ब्रिटेन में प्रतिबंधित कर दिया गया था। ISYF की स्थापना भिंडरवाले के भतीजे जसबीर सिंह रोडे ने की थी।
सिख नेटवर्क, दबिंदरजीत सिंह सिद्धू द्वारा स्थापित एक अन्य ब्रिटिश सिख समूह है, जो ब्रिटेन से मान्यता और समर्थन प्राप्त करने और क्षेत्रीय अखंडता के लिए भारत के अधिकार को हटाने के लिए सूचीबद्ध है। इसका प्रमुख एजेंडा भारत-विरोधी राजनीति को समर्थन देना है।
जबरन धर्मांतरण के ख़िलाफ़ योगी सरकार सख्त हो उठी है। उत्तर प्रदेश सरकार इसके ख़िलाफ़ कड़ा क़ानून लाने की योजना तैयार कर रही है, जिसके अंतर्गत 7 साल तक की सज़ा का प्रावधान किया गया है। यहाँ तक कि शादी के बाद किसी का धर्मान्तरण कराए जाने के बाद भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस सम्बन्ध में विधि आयोग ने 208 पन्ने की रिपोर्ट सौंपी है, जिसे कई पड़ोसी देशों के क़ानून का अध्ययन करने के बाद तैयार किया गया है। हालाँकि, वापस पुराने धर्म में लौट आना, यानी ‘घर वापसी’ अपराध नहीं होगा। विधि आयोग की इस सिफारिश का अध्ययन कर सरकार क़ानून बनाएगी।
विधि आयोग ने अपनी सिफ़ारिश में कहा है कि अगर शादी के मामले में किसी भी पक्ष पर जबरन धर्मांतरण के दबाव बनाया जाता है तो उस शादी को रद्द कर दिया जाएगा। आयोग की सेक्रटरी सपना त्रिपाठी ने कहा कि अब सरकार के ऊपर है कि वो इस ड्राफ्ट के किन हिस्सों को क़ानून का रूप देगी। राज्य विधि आयोग के अध्यक्ष जस्टिस आदित्यनाथ मित्तल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी गई रिपोर्ट में लिखा:
“कतिपय संगठन हिन्दुओं, विशेषकर अनुसूचित जनजाति के लोगों को प्रलोभन देकर अपने निहित स्वार्थ के लिए धर्मान्तरण कराते हैं। वो भारत की सदियों पुरानी सभ्यता धारा को भुलाने की सीख देते हैं। ये संगठन लोगों को धार्मिक परम्पराओं व पूजा पद्धतियों का अपमान करने की सीख दे रहे हैं। वो अपने मजहब को सर्वोच्च दिखा कर दर्शाने का कुत्सित प्रयास कर रहे हैं।”
सपना त्रिपाठी ने बताया कि भारत के 10 राज्यों में धर्मान्तरण विरोधी क़ानून हैं और 2014 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं इस मुद्दे को उठाया था। उन्होंने बताया कि अभी धर्मान्तरण को लेकर सटीक आँकड़े उपलब्ध नहीं हैं लेकिन मुख्यमंत्री को विधि आयोग ने अपनी बात को सही साबित करने के लिए पिछले 6 महीने की काफ़ी सारी न्यूज़ क्लिप्स सौंपी है। इन क्लिप्स में धर्मान्तरण से जुड़ी ख़बरें हैं। इस ड्राफ्ट में एक से पाँच साल तक की सज़ा का प्रावधान है। अगर पीड़ित एससी-एसटी है या नाबालिग है तो सज़ा की अवधि को दो वर्ष और बढ़ाया जा सकता है।
ड्राफ्ट में प्रस्तावित किया गया है कि धर्मान्तरण से पहले अब स्थानीय मजिस्ट्रेट की अनुमति लेनी होगी। इसके लिए डीएम या फिर एसडीएम से लिखित में अनुमति माँगनी होगी। अनुमति के लिए 1 महीने पहले आवेदन करना पड़ेगा। प्रशासन पूरी जाँच करने के बाद ही धर्मान्तरण की अनुमति देगा। लिखित आवेदन में यह बताना होगा कि धर्मान्तरण का कारण क्या है और क्यों किया जा रहा है?